UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 5 States of Matter

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 5 States of Matter (द्रव्य की अवस्थाएँ)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 5 States of Matter (द्रव्य की अवस्थाएँ).

पाठ के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
30°C तथा 1 bar दाब पर वायु के 50 dm आयतन को 200 dm तक संपीडित करने के लिए कितने न्यूनतम दाब की आवश्यकता होगी?
उत्तर
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प्रश्न 2.
35°C ताप तथा 1.2 bar दाब पर 120 mL धारिता वाले पात्र में गैस की निश्चित मात्रा भरी है। यदि 35°C पर गैस को 180 mL धारिता वाले फ्लास्क में स्थानान्तरित किया जाता है तो गैस का दाब क्या होगा?
उत्तर
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प्रश्न 3.
अवस्था-समीकरण का उफ्योग करते हुए स्पष्ट कीजिए कि दिए गए ताप पर गैस का घनत्व गैस के दाब के समानुपाती होता है।
उत्तर
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प्रश्न 4.
0°C पर तथा 2 bar दाब पर किसी गैस के ऑक्साइड का घनत्व 5 bar दाब पर डाइनाइट्रोजन के घनत्व के समान है तो ऑक्साइड का अणुभार क्या है?
उत्तर
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प्रश्न 5.
27°C पर एक ग्राम आदर्श गैस का दाब 2 bar है। जब समान ताप एवं दाब पर इसमें दो ग्राम आदर्श गैस मिलाई जाती है तो दाब 3 bar हो जाता है। इन गैसों के अणुभार में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर
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प्रश्न 6.
नाली साफ करने वाले ड्रेनेक्स में सूक्ष्म मात्रा में ऐलुमिनियम होता है। यह कॉस्टिक सोडा से क्रिया पर डाइहाइड्रोजन गैस देता है। यदि 1 bar तथा 20°C ताप पर 0.15 g ऐलुमिनियम अभिक्रिया करेगा तो निर्गमित डाइहाइड्रोजन का आयतन क्या होगा?
उत्तर
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प्रश्न 7.
यदि 27°C पर 9 dm धारिता वाले फ्लास्क में 3.2 ग्राम मेथेन तथा 4.4 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का मिश्रण हो तो इसका दाब क्या होगा?
उत्तर
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प्रश्न 8.
27°C ताप पर जब 1L के फ्लास्क में 0.7 bar पर 2.0L डाइऑक्सीजन तथा 0.8 bar पर 0-5 L डाइहाइड्रोजन को भरा जाता है तो गैसीय मिश्रण का दाब क्या होगा?
उत्तर
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प्रश्न 9.
यदि 27°C ताप तथा 2 bar दाब पर एक गैस का घनत्व 5.46 g/dm’ है तो STP पर इसका घनत्व क्या होगा?
उत्तर
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प्रश्न 10.
यदि 546°C तथा 0.1 bar दाब पर 34.05 mL फॉस्फोरस वाष्प का भार 0.0625 g है तो फॉस्फोरस का मोलर द्रव्यमान क्या होगा?
उत्तर
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प्रश्न 11.
एक विद्यार्थी 27°C पर गोल पेंदे के फ्लास्क में अभिक्रिया-मिश्रण डालना भूल गया तथा उस फ्लास्क को ज्वाला पर रख दिया। कुछ समय पश्चात उसे अपनी भूल का अहसास हुआ। उसने उत्तापमापी की सहायता से फ्लास्क का ताप 477°C पाया। आप बताइए कि वायु का कितना भाग फ्लास्क से बाहर निकला?
उत्तर
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प्रश्न 12.
3.32 bar पर 5 dm आयतन घेरने वाली 4.0 mol गैस के ताप की गणना कीजिए। (R = 0.083 bar dm3 K-1mol-1)
उत्तर
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प्रश्न 13.
1.4g डाइनाइट्रोजन गैस में उपस्थित कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर
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प्रश्न 14.
यदि एक सेकण्ड में 100 गेहूँ के दाने वितरित किए जाएँ तो आवोगाद्रो संख्या के बराबर दाने वितरित करने में कितना समय लगेगा?
उत्तर
आवोगाद्रो की संख्या = 6.022×1023। चूँकि 1010 दाने प्रति सेकण्ड वितरित होते हैं,
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प्रश्न 15.
27°C ताप पर 1 dm3 आयतन वाले फ्लास्क में 8 ग्राम डाइऑक्सीजन तथा 4 ग्राम डाइहाइड्रोजन के मिश्रण का कुल दाब कितना होगा?
उत्तर
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प्रश्न 16.
गुब्बारे के भार तथा विस्थापित वायु के भार के अन्तर को ‘पेलोड कहते हैं। यदि27°C पर 10 m त्रिज्या वाले गुब्बारे में 1.66 bar पर 100 kg हीलियम भरी जाए तो पेलोड की गणना कीजिए। (वायु का घनत्व = 1.2 kg m3 तथा R = 0.083 bar dm3 K-1mol-1)
उत्तर
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प्रश्न 17.
31.1°C तथा 1 bar दाब पर 8.8 ग्राम CO2) द्वारा घेरे गए आयतन की गणना कीजिए। (R = 0.083 bar LK-1mol-1)
उत्तर
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प्रश्न 18.
समान दाब पर किसी गैस के 2.9 ग्राम द्रव्यमान का 95°C तथा 0.184 ग्राम डाइहाइड्रोजन का 17°C पर आयतन समान है। बताइए कि गैस का मोलर द्रव्यमान क्या
होगा?
उत्तर
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प्रश्न 19.
1 bar दाब पर डाइहाइड्रोजन तथा डाइऑक्सीजन के मिश्रण में 20% डाइहाइड्रोजन (भार से) रखा जाता है तो डाइहाइड्रोजन का आंशिक दाब क्या होगा?
उत्तर
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प्रश्न 20.
PV2T2/n राशि के लिए S.I. इकाई क्या होगी?
उत्तर
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प्रश्न 21.
चार्ल्स के नियम के आधार पर समझाइए कि न्यूनतम सम्भव ताप -273°C होता है।
उत्तर
जिस प्रकार गैस को गर्म करने पर उसका आयतन बढ़ता है ठीक उसी प्रकार उसे ठण्डा करने पर अर्थात् उसका ताप घटाने पर उसका आयतन घटता भी है। ऐसी स्थिति में,
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अतः -273°C पर गैस का आयतन शून्य हो जाना चाहिए।
इससे कम ताप पर आयतन ऋणात्मक हो जाएगा जो कि अर्थहीन है। वास्तव में सभी गैसें इस ताप पर पहुँचने से पउत्तरे ही द्रवित हो जाती हैं। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि -273°C (0K) ही न्यूनतम सम्भव ताप है।

प्रश्न 22.
कार्बन डाइऑक्साइड तथा मेथेन का क्रान्तिक ताप क्रमशः 31.1°C एवं -81.9°C है। इनमें से किसमें प्रबल अन्तर-आण्विक बल है तथा क्यों?
उत्तर
क्रान्तिक ताप जितना अधिक होगा, गैस को उतनी ही सरलता से द्रवीभूत किया जा सकता है। यह केवल तब सम्भव है जब अन्तर आणविक बल मजबूत हो। अत: CO2में, CH4 की तुलना में प्रबल अन्तराणविक बल है।

प्रश्न 23.
वाण्डरवाल्स प्राचल की भौतिक सार्थकता को समझाइए।
उत्तर

  1. वाण्डरवाल्स प्राचल ‘a’-इसका मान गैस के अणुओं में विद्यमान आकर्षण बलों के परिमाण की माप होता है। अत: a का मान अधिक होने का तात्पर्य, अन्तर-आण्विक आकर्षण बलों का अधिक होना है।
  2.  वाण्डरवाल्स प्राचल ‘b’-इसका मान गैस-अणुओं के प्रभावी आकार की माप है। इसका मान गैस-अणुओं के वास्तविक आयतन का चार गुना होता है। यह अपवर्जित आयतन कउत्तराता है।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गैस के किसी निश्चित भार के लिए यदि दाब को आधा तथा ताप को दोगुना कर दिया जाए, तो गैस का आयतन होगा ।
(i) V/4 ,
(ii) 2V2
(iii) 6V
(iv) 4V
उत्तर
(iv) 4V

प्रश्न 2.
स्थिर दाब पर ऐक लीटर धारिता वाले पात्र को 27°C से 37°C तक गर्म किया जाता है। बाहर निकलने वाली वायु का आयतन है।
(i) 22.2 लीटर
(ii) 0.333 लीटर
(iii) 0.222 लीटर
(iv) 33.3 लीटर
उत्तर
(iv) 33.3 लीटर

प्रश्न 3.
27°C पर एक गैस का दाब 90 सेमी है। स्थिर आयतन पर -173°C ताप पर गैस का दाब होगा
(i) 30 सेमी
(ii) 40 सेमी
(iii) 60 सेमी
(iv) 68 सेमी
उत्तर
(i) 30 सेमी

प्रश्न 4.
एक बर्तन में 25°C पर मेथेन तथा हाइड्रोजन के समान भार भरे गए हैं। हाइड्रोजन का दाब होगा, कुल दाबे का
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उत्तर
(ii) [latex]\frac { 8 }{ 9 } [/latex]

प्रश्न 5.
किसी गैस के 0.1 ग्राम का सा० ता० दा० पर आयतन 20 मिली है। इस गैस का अणुभार है।
(i) 56
(ii) 40
(iii) 80
(iv) 60
उत्तर
(iii) 80

प्रश्न 6.
ऑक्सीजन के 16 ग्राम तथा हाइड्रोजन के 3 ग्राम को मिलाया गया और 760 मिमी दाब तथा 273 K ताप पर एक बर्तन में रखा गया। मिश्रण द्वारा घेरा गया कुल आयतन होगा
(i) 22.4 लीटर
(ii) 33.6 लीटर
(iii) 11.2 लीटर
(iv) 44.8 लीटर
उत्तर
(iv) 44.8 लीटर

प्रश्न 7.
एक मिश्रण का कुल दाब ‘P’ है। इस मिश्रण में 5.6 ग्राम नाइट्रोजन और 6.4 ग्राम ऑक्सीजन है। मिश्रण में नाइट्रोजन का आंशिक दाब है।
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उत्तर
(ii) [latex]\frac { P }{ 2 } [/latex]

प्रश्न 8.
समान धारिता वाले दो फ्लास्कों में 500 मिमी दाब पर नाइट्रोजन एवं 250 मिमी दाब पर हाइड्रोजन भरी है। दोनों पात्रों को जोड़ देने पर सम्पूर्ण मिश्रण का दाब होगा
(i) 500 मिमी
(ii) 375 मिमी
(iii) 250 मिमी
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(ii) 375 मिमी

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में किस गैस का द्रवीकरण आसानी से होता है?
(i) NH3
(ii) SO2
(iii) H2
(iv) CO2
उत्तर
(i) NH3

प्रश्न 10.
जिस ताप पर द्रव का वाष्प दाब वायुमण्डलीय दाब के बराबर हो जाता है, उसे कहा जाता
(i) हिमांक
(ii) क्वथनांक
(iii) गलनांक
(iv) क्रान्तिक ताप
उत्तर
(ii) क्वथनांक

प्रश्न 11.
किसी द्रव की पृष्ठ तनाव
(i) ताप वृद्धि से बढ़ता है।
(ii) ताप वृद्धि से घटता है।
(iii) ताप का कोई प्रभाव नहीं होता है
(iv) कोई उत्तर सही नहीं है।
उत्तर
(ii) ताप वृद्धि से घटती है।

प्रश्न 12.
एक द्रव और जल के समान आयतन द्वारा एक बिन्दुमापी से क्रमशः 40 और 20 बूंदें बनाईं गईं। द्रव और जल के घनत्वों का अनुपात 2:1 है। यदि जल का पृष्ठ तनाव 7.2 x10-2न्यूटन/मीटर है, तो द्रव का पृष्ठ तनाव होगा।
(i) 14.4×10-2 न्यूटन/मीटर।
(ii) 28.8 x 10-2 न्यूटन/मीटर
(iii) 7.2×10-2 न्यूटन/मीटर
(iv) 0.36×10-2 न्यूटन/मीटर
उत्तर
(iii) 7.2 x 10-2 न्यूटन/मीटर

प्रश्न 13.
श्यानता की S.I. इकाई है।
(i) पॉइज
(ii) पास्कल
(iii) डाइन सेमी-2
(iv) न्यूटन सेमी-2
उत्तर
(ii) पास्कल

प्रश्न 14.
श्यानता गुणांक के C.G.S. और S.I. मात्रक में सम्बन्ध है।
(i) 1 पॉइज = 10 पास्कल-सेकण्ड
(ii) 1 पॉइज = 10-1 पास्कल-सेकण्ड
(iii) 1 पॉइज = 10-2 पास्कल-सेकण्ड
(iv) 1 पॉइज = 102 पास्कल-सेकण्ड
उत्तर
(ii) 1 पॉइज = 10-1 पास्कल-सेकण्ड

प्रश्न 15.
किसकी श्यानता अधिकतम है?
(i) ऐल्कोहॉल
(ii) ईथर
(iii) ग्लाइकॉल
(iv) ग्लिसरॉल
उत्तर
(iv) ग्लिसरॉल

प्रश्न 16.
श्यानता के सन्दर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
(i) दाब बढ़ाने पर श्यानता घटती है।
(ii) जल में सुक्रोस मिलाने पर श्यानता बढ़ती है।
(iii) जल में KCI मिलाने पर श्यानता घटती है।
(iv) ताप बढ़ाने पर श्यानता घटती है।
उत्तर
(i) दाब बढ़ाने पर श्यानता घटती है।

प्रश्न 17.
किसकी श्यानता अधिकतम होगी?
(i) (C2H5)2O
(ii) C2H5OH
(iii) C4H9OH
(iv) (CH3)2O
उत्तर
(iii) C4H9OH

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
15°C पर एक गैस का आयतन 360 मिली है। यदि दाब स्थिर है, तो किस ताप पर उसका आयतन 400 मिली हो जाएगा?
उत्तर
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प्रश्न 2.
स्थिर दाब तथा 127°C ताप पर एक गैस का आयतन किस ताप पर दोगुना हो जायेगा?
उत्तर
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प्रश्न 3.
गैस समीकरण PV = nRT में n क्या है? इसका मान कैसे निकालते हैं?
उत्तर
गैस समीकरण PV=nRT में n गैस के मोलों की संख्या है। यदि गैस समीकरण PV = nRT में P,V, R तथा T के मान ज्ञात हों, तो n का मान निम्न सूत्र से ज्ञात कर लेते हैं।
[latex]n=\frac { PV }{ RT } [/latex]

प्रश्न 4.
किसी विशेष ताप पर किसी गैस का दाब, घनत्व से किस प्रकार सम्बन्धित होता है?
उत्तर
ताप और दाब की स्थिर दशाओं में विभिन्न गैसों के घनत्व उनके मोलर द्रव्यमानों के समानुपाती होते हैं।
अर्थात्
[latex]M=\frac { dRT }{ P } [/latex]

प्रश्न 5.
गैस स्थिरांक के मान को S.I. मात्रकों में लिखिए।
उत्तर
गैस स्थिरांक R का मान S.I. मात्रकों में 8314 JK-1mol-1 है।

प्रश्न 6.
1 ग्राम H2 का S.T.P. पर आयतन क्या होगा?
उत्तर
1 ग्राम H2 में मोलों की संख्या = [latex]\frac { 1 }{ 2 } [/latex]
∵ 1 मोल H2 का S.T.P. पर आयतन = 22.4 ली।
∴ 1 मोल H2 का S.T.P. पर आयतन = [latex]22.4\times \frac { 1 }{ 2 } =11.2[/latex] ली

प्रश्न 7.
किसी गैस को इतना गर्म किया जाता है कि उसका दाब और आयतन दोनों दोगुना हो जाते हैं। गैस का नया परमताप क्या होगा?
उत्तर
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प्रश्न 8.
– 73°C ताप पर किसी गैस का दाब 1 वायुमण्डल है। यदि आयतन स्थिर रखा जाये, तो उसे किस ताप तक गर्म करें कि दाब दोगुना हो जाए?
उत्तर
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प्रश्न 9.
17°C ताप तथा 870 मिली दाब पर किसी गैस के निश्चित द्रव्यमान का आयतन 76 मिली है। मानक ताप तथा दाब पर उस गैस का आयतन क्या होगा?
उत्तर
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प्रश्न 10.
आदर्श गैस से आप क्या समझते हैं? गैस के किसी एक मोल के लिए आदर्श गैस समीकरण लिखिए।
उत्तर
जो गैस ताप व दाब की सभी परिस्थितियों में बॉयल एवं चार्ल्स के नियम का तथा आदर्श गैस समीकरण का पालन करती है, उसे आदर्श गैस कहते हैं।
1 मोल गैस के लिए आदर्श गैस समीकरण इस प्रकार होगी
PV =nRT
यदि n = 1 मोल हो, तो
PV = RT
जहाँ, P = दाब, V = आयतन, R = सार्वत्रिक गैस स्थिरांक, T = परमताप

प्रश्न 11.
परमताप को समझाइए।
उत्तर
273°C का वह न्यूनतम सम्भव परिकल्पित ताप जिस पर सभी गैसों को आयतन शून्य माना जाता है परमताप कउत्तराता है। वास्तव में प्रयोगों द्वारा परमताप का मान -27315°C ज्ञात हुआ है परन्तु सुविधा की दृष्टि से इसके सन्निकट मान -273°C का ही प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 12.
किन परिस्थितियों में आदर्श गैस आदर्श व्यवहार प्रदर्शित करती है?
उत्तर
वह गैस जो सभी तापों और दाबों पर गैस के नियमों और आदर्श गैस समीकरण (PV = nRT) का पालन करती है आदर्श गैस कउत्तराती है परन्तु यह पाया गया है कि कोई भी गैस सभी तपों और दाबों पर गैस के नियमों तथा गैस समीकरण का पालन नहीं करती है अतः कोई भी गैस आदर्श नहीं है।

प्रश्न 13.
क्रान्तिक ताप की परिभाषा दीजिए।
उत्तर
वह ताप जिसके नीचे दाब की वृद्धि करने से गैस द्रवित हो जाती है और जिसके ऊपर वह किसी भी दाब पर द्रवित नहीं होती है उसे क्रान्तिक ताप कहा जाता है। क्रान्तिक ताप को 7 से प्रदर्शित किया जाता है।

प्रश्न 14.
जलीय तनाव को परिभाषित कीजिए।
उत्तर
किसी निश्चित ताप पर जल वाष्प द्वारा आरोपित दाब एक नियतांक होता है तथा इसे जलीय तनाव कहते हैं।

प्रश्न 15.
श्यानता गुणांक को परिभाषित कीजिए।
उत्तर
किसी द्रव की श्यानता की परिमाणात्मक मापे उसका श्यानता गुणांक n (ईटा) होता है जिसे सामान्यतः द्रव की श्यानता कहते हैं।
द्रव की श्यानता (η) ताप पर निर्भर करती है। ताप वृद्धि के साथ श्यानता घटती है। इसकी इकाई पॉइज तथा S.I. मात्रक किलोग्राम प्रति मी/से या पास्कल-सेकण्ड है।

प्रश्न 16.
द्रव की श्यानता पर ताप तथा दाब के प्रभाव को समझाइए।
उत्तर

1. द्रव की श्यानता पर ताप परिवर्तन का प्रभाव–ताप बढ़ाने पर द्रव की श्यानता का मान घटता है क्योंकि ताप बढ़ाने पर द्रव के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा बढ़ती है जिससे अन्तराणविक आकर्षण बल का मान कम हो जाता है।
2. द्रव की श्यानता पर दाब परिवर्तन का प्रभाव-दाब बढ़ाने पर द्रव के अणु निकट आ जाते हैं। ” जिसके कारण अन्तराणविक आकर्षण बल का मान बढ़ जाता है जिससे श्यानता बढ़ जाती है।

प्रश्न 17.
जल की तुलना में ग्लिसरीन धीरे-धीरे बहती है, क्यों?
उत्तर
किसी द्रव के बहने का गुण द्रव की प्रकृति पर निर्भर करता है, क्योंकि द्रव के अणुओं के मध्य अन्तराणविक आकर्षण बलों का मान उच्च होने पर श्यानता का मान भी उच्च होता है जिससे बहने की दर कम हो जाती है। ग्लिसरीन के अणुओं के मध्य अन्तराणविक आकर्षण बल का मान जल के अणुओं के मध्य अन्तराणविक आकर्षण बल के मान से उच्च होता है अर्थात् ग्लिसरीन की श्यानता जल की श्यानता की तुलना में अधिक होती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सम्बन्ध PV = nRT को निगमित कीजिए जहाँ R सार्वत्रिक गैस नियतांक है।
उत्तर
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प्रश्न 2.
आदर्श गैस और वास्तविक गैस में अंतर लिखिए।
उत्तर
वह गैस जो सभी तापों और दाबों पर गैस के नियमों और आदर्श गैस समीकरण (PV =nRT) का पालन करती है आदर्श गैस कउत्तराती है जबकि ऐसी गैसें जो सभी तापों और दाबों पर आदर्श व्यवहार नहीं दर्शाती हैं वास्तविक गैसें कउत्तराती हैं।
वास्तव में कोई भी गैस आदर्श गैस नहीं है जबकि सभी गैसें वास्तविक गैसें हैं।

प्रश्न 3.
गतिज गैस समीकरण के प्रयोग से प्रदर्शित कीजिए कि गैस की प्रति मोल औसत गतिज ऊर्जा [latex]\frac { 3 }{ 2 } [/latex]RT से दी जाती है।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 5 States of Matter img-43

प्रश्न 4.
क्रान्तिक दाब तथा क्रान्तिक आयतन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
क्रान्तिक दाब–किसी गैस को क्रान्तिक ताप पर द्रवित करने के लिए जिस न्यूनतम दाब की आवश्यकता होती है वह उस गैस का क्रान्तिक दाब कउत्तराता है। इसे Pe से प्रदर्शित करते हैं। क्रान्तिक ताप जितना कम होता है क्रान्तिक दाब भी उतना ही कम होता है।

क्रान्तिक आयतन–क्रान्तिक दाब तथा क्रान्तिक ताप पर किसी गैस के 1 मोल का आयतन उसका ” क्रान्तिक आयतन कउत्तराता है। इसे Vc द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 5.
वाष्पन तथा क्वथन में अन्तर बताइए।
उत्तर
वाष्पन तथा क्वथन में निम्नलिखित अन्तर हैं-
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प्रश्न 6.
ताप का निम्न पर क्या प्रभाव पड़ता है।
(1) द्रव का घनत्व,
(2) द्रव का पृष्ठ तनाव,
(3) द्रव का वाष्प दाब।
उत्तर

  1. ताप बढ़ने पर अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है जो अणुओं के मध्य अन्तराणविक आकर्षण बलों के विरुद्ध कार्य करके द्रव के आयतन में वृद्धि कर देती है। आयतन में वृद्धि के कारण द्रव का घनत्व घट जाता है। अतः ताप बढ़ाने पर द्रव का घनत्व घटता है। ताप घटाने पर इसका विपरीत होता है।
  2. ताप के बढ़ने पर अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है और उनके मध्य अन्तराणविक आकर्षण बल घट जाता है। इसलिए द्रव की सतह पर उपस्थित अणुओं को द्रव के अन्दर स्थित अणु कम आकर्षित करते हैं जिससे पृष्ठ तनाव घट जाता है। इसके ठीक विपरीत, ताप के घटने पर पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है।
  3. अधिक ताप पर द्रव के अधिकं अणुओं के पास द्रव से बाहर निकलने के लिए पर्याप्त ऊर्जा होती है। जबकि कम ताप पर ऐसे अणु बहुत कम होते हैं इसलिए ताप बढ़ने पर द्रव का वाष्प दाब बढ़ जाता है। इसके ठीक विपरीत ताप घटने पर द्रव का वाष्प दाब घट जाता है।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बॉयल का नियम क्या है? यह नियम ग्राफीय रूप से किस प्रकार सत्यापित होता है। इस नियम का क्या महत्त्व है?
उत्तर
बॉयल का नियम (आयतन-दाब सम्बन्ध)-सन् 1962 में आयरिश भौतिक विज्ञानी राबर्ट बॉयल ने सर्वप्रथम गैस के आयतन और दाब में मात्रात्मक सम्बन्ध का अध्ययन किया। इस सम्बन्ध को बॉयल का नियम (Boyle’s law) कहते हैं। इस नियम के अनुसार, स्थिर ताप पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन उसके दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यदि स्थिर ताप T पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन V तथा उसको दाब P है तो बॉयल के नियमानुसार,
[latex]P\propto \frac { 1 }{ V } [/latex] (जब ताप और द्रव्यमान स्थिर हैं)
अथवा [latex]P=k\frac { 1 }{ V } [/latex] अथवा PV=k (नियतांक)
जहाँ, k एक स्थिरांक (constant) है जिसका मान गैस की मात्रा, गैस के ताप और उन मात्रकों पर निर्भर करता है जिनके द्वारा P तथा V व्यक्त किए गए हैं।
उपर्युक्त समीकरण के आधार पर बॉयल नियम के अनुसार, स्थिर ताप पर गैस की निश्चित मात्रा के आयतन तथा दाब का गुणनफल स्थिर (constant) होता है।
माना किसी गैस की निश्चित मात्रा का ताप T पर आयतन , तथा दाब P2 है। अब यदि ताप T पर ही गैस का दाब , कर दिया जाए तथा इससे उसका आयतन V2 हो जाए तब बॉयल के नियम के अनुसार,
P1V1 = P2V2 = स्थिरांक (जब द्रव्यमान और ताप स्थिर हैं)
अथवा [latex]\frac { { P }_{ 1 } }{ { P }_{ 2 } } =\frac { { V }_{ 2 } }{ { V }_{ 1 } } [/latex]
यदि इस स्थिति में हमें इन चार चरों (variables) में से तीन के मान ज्ञात हों, तो चौथे का मान ज्ञात किया जा सकता है। बॉयल के नियम का ग्राफीय निरूपण बॉयल के नियम का ग्राफीय निरूपण निम्न प्रकार से किया जा सकता है।
1.V तथा P के मध्य ग्राफ–नियत ताप पर किसी गैस की निश्चित मात्रा के आयतन (V) तथा दाब (P) के मध्य ग्राफ एक परवलय (hyperbola) होता है। यह दर्शाता है कि गैस का आयतन गैस के दाब का व्युत्क्रमानुपाती होता है।
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2. PV तथा P के मध्य ग्राफ—यह ग्राफ़ X-अक्ष के समानान्तर एक सीधी रेखा होता है। यह ग्राफ दर्शाता है कि नियते ताप पर किसी गैस की निश्चित मात्रा के आयतन तथा दाब का गुणनफल स्थिरांक होता है।
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3.P तथा [latex]\frac { 1 }{ V } [/latex] के मध्य ग्राफ—यह ग्राफ मूल बिन्दु से गुजरती हुई एक सीधी रेखा होता है। यह दर्शाता है कि नियत ताप पर गैस की निश्चित मात्रा के आयतन का व्युत्क्रम उसके दाब के अनुक्रमानुपाती होता है। अर्थात् गैस का आयतन उसके दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
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जैसा कि आप जानते हैं बॉयल नियम के अनुसार,
PV=k
तथा k का मान गैस के द्रव्यमान तथा ताप दोनों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी गैस की निश्चित मात्रा के लिए भिन्न-भिन्न तापों पर P-V वक्र, [latex]P-\frac { 1 }{ V } [/latex] वक्र तथा P-PV वक्र भिन्न-भिन्न आते हैं। एक ही ताप से सम्बन्धित वक्र समतापी (isothermal) कउत्तराता है। विभिन्न ग्राफों के वक्र नीचे दर्शाए गए हैं।
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बॉयल के नियम का महत्त्व
बॉयल का नियम दर्शाता है कि गैसों को सम्पीडित किया जा सकता है। जब किसी गैस की निश्चित मात्रा को सम्पीडित किया जाता है तो उसके अणु कम स्थान घेरते हैं अर्थात् गैस अधिक सघन हो जाती है।
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अतः कहा जा सकता है कि नियते ताप’ पर गैस की निश्चित मात्रा के लिए, गैस का घनत्व उसके दाब के समानुपाती होता है।
समुद्र-तल के पास की वायु पर उसके ऊपर स्थिर वायु का दाब होता है जबकि पर्वतों की वायु पर यह दाब कम होता है इसलिए समुद्र-तल के पास की वायु अधिक सघन तथा पर्वतों की वायु कम सघन होती है। यही कारण है कि पर्वतों पर कम ऑक्सीजन उपलब्ध होती है जिसके कारण वहाँ पर सिरदर्द, बेचैनी आदि होने लगती है। इससे बचने के लिए ही पर्वतारोही अपने साथ पर्वतों पर ऑक्सीजन के सिलेण्डर ले जाते हैं। इसी कारण से ऊँचाई पर उड़ने वाले वायुयानों में सामान्य दाब रखा जाता है। दाब के कम होने पर इनमें ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था होती है।
हीलियम के गुब्बारों को केवल आधा भरा जाता है। यदि इन्हें पूरा भर दिया जाए तो ऊपर जाकर दाब कम होने के कारण इनमें भरी गैस का आयतन बढ़ जाता है जिससे वे फट जाते हैं।

प्रश्न 2.
चार्ल्स का नियम क्या है? यह नियम ग्राफीय रूप से किस प्रकार सत्यापित होता है? इस नियम का क्या महत्त्व है?
उत्तर
चार्ल्स का नियम (ताप-आयतन सम्बन्ध)-स्थिर दाब पर किसी गैस के आयतन में ताप के साथ परिवर्तन का अध्ययन सर्वप्रथम फ्रांसीसी रसायनज्ञ जैक्स चार्ल्स (Jacques Charles) ने सन् 1787 में किया। बाद में इस सम्बन्ध का अध्ययन जोसफ गै-लुसैक ने भी किया। इनके प्रेक्षणों के आधार पर प्रतिपादित नियम को चार्ल्स का नियम कहते हैं जिसके अनुसार, स्थिर दाब पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन ताप के प्रत्येक 1°C बढ़ने या घटने पर उसके 0°C ताप के आयतन का 1/273 वाँ भाग बढ़ या घट जाता है।
यदि किसी गैस का 0°C पर आयतन , तथा १°C पर आयतन है, तब चार्ल्स के नियमानुसार,
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इस प्रकार यदि गैस की निश्चित मात्रा का 0°C पर आयतन ज्ञात हो, तो किसी अन्य ताप पर उसका आयतन ज्ञात किया जा सकता है।
चार्ल्स के नियम का ग्राफीय निरूपण
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जब स्थिर दाब पर किसी गैस की निश्चित मात्रा के आयतन तथा ताप के मध्य ग्राफ खींचा जाता है, तो एक सीधी रेखा (straight line) प्राप्त होती है।
जब इस सीधी रेखा को नीचे की ओर बढ़ाते हैं, तो यह रेखा X-अक्ष अर्थात् ताप के अक्ष को -273°C पर काटती है। यह दर्शाता है कि एक गैस का आयतन -273°C पर शून्य होता है। इससे कम ताप पर गैस का आयतन ऋणात्मक होता है जो कि असम्भव है। गैस की निश्चित मात्रा के लिए, प्रत्येक दाब पर V-t वक्र अलग होता है। जब दाब कम होता है, तो रेखा का ढाल अधिक होता है तथा जब दाब अधिक होता है, तो रेखा को ढाल कम होता है। स्थिर दाब पर खींची गई प्रत्येक V- t रेखा को समदाबी रेखा (isobar) कहते हैं। ऊपर दिए गए ग्राफ में प्रत्येक रेखा समदाबी है।
चाल्र्स के नियम का महत्त्व
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गुब्बारों में गर्म वायु का प्रयोग चार्ल्स के नियम पर ही आधारित है। चार्ल्स के नियम के अनुसार, ताप बढ़ने पर गैस का आयतन बढ़ता है। चूंकि गैस का द्रव्यमान वही रहता है इसलिए गैस का घनत्व कम हो जाता है। इसलिए गर्म वायु ठंडी वायु से कम सघन होती है। इसी कारण से गर्म वायु वाले गुब्बारे वायुमण्डल को ठण्डी वायु को विस्थापित करके ऊपर उठ पाते है।

प्रश्न 3.
गै-लुसैक का नियम क्या है? विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर
गै-लुसैक का नियम (दाब-ताप सम्बन्ध)-स्थिर आयतन पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का दाब ताप के प्रत्येक 1°C बढ़ने या घटने पर उसके 0°C वाले दाब का [latex]\frac { 1 }{ 273 } [/latex] भाग बढ़ या घट जाता है।
यदि किसी गैस की निश्चित मात्रा के ताप 0°C और t°C पर दाब क्रमशः P0तथा Pt हैं तब
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जहाँ, k एक स्थिरांक है जिसका मान गैस की मात्रा, उसके आयतन और उस मात्रक पर निर्भर करता है। जिसमें दाब व्यक्त किया गया है।
अत: स्थिर आयतन पर किसी निश्चित मात्रा वाली गैस का दाब उसके परमताप के समानुपाती होता है। इस सम्बन्ध को गै-लुसैक का नियम (Gay-Lussac’s law) कहते हैं।
P= kT से, [latex]\frac { P }{ T } =k[/latex] (जबकि गैस की मात्रा और आयतन स्थिर हैं)
यदि स्थिर आयतन पर गैस के एक नमूने के प्रारम्भिक दाब, प्रारम्भिक परमताप, अन्तिम दाब तथा अन्तिम परमताप क्रमशः P1,T1,P2, तथा T2, हैं तब गै-लुसैक के नियमानुसार, [latex]\frac { { P }_{ 1 } }{ { T }_{ 1 } } =\frac { { P }_{ 2 } }{ { T2 }_{ } } =k[/latex]
गै-लुसैक के नियम का प्रायोगिक सत्यापन
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गै-लुसैक के नियम को संलग्न चित्र में दर्शाए गए उपकरण द्वारा सत्यापित किया जा सकता है। फ्लास्क में ली गई गैस का ताप तापस्थायी (thermostat) द्वारा परिवर्तित किया जा सकता है। तापमापी से गैस का ताप तथा दाबमापी से गैस का दाब ज्ञात करते हैं। प्रत्येक स्थिति में [latex]\frac { P }{ T } [/latex] का मान स्थिर (constant) आता है जो गै-लुसैक के नियम का सत्यापन करता है।
गै-लुसैक के नियम का ग्राफीय निरूपण
नियत आयतन वाली किसी गैस की निश्चित मात्रा के दाब तथा परमताप (केल्विन पैमाने पर। ताप) के मध्य ग्राफ एक सीधी रेखा होता है। नीचे की ओर बढ़ाने पर यह सीधी रेखा मूल बिन्दु पर मिलती है जो यह दर्शाता है कि किसी गैस का परम शून्य ताप पर दाब शून्य हो जाता है। दूसरे शब्दों में, परम शून्य ताप पर गैस के अणु गति नहीं करते हैं।
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आरेख की प्रत्येक रेखा स्थिर आयतन पर प्राप्त की गयी है अतः इसकी प्रत्येक रेखा सम आयतनी. (isochore) कउत्तराती है।

प्रश्न 4.
द्रव के वाष्प दाब से आप क्या समझते हैं? यह किन-किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर
वाष्प दाब “निश्चित ताप पर यदि कोई द्रव एवं उसकी वाष्प साम्यावस्था में हो, तो वाष्प द्वारा द्रव पर डाला गया दाब, उस द्रव का वाष्प दाब कउत्तराता है।
द्रव ⇌ वाष्प
दिए गए ताप पर द्रव का वाष्प दाब उसका अभिलाक्षणिक गुण है।
द्रव के वाष्प दाब को प्रभावित करने वाले कारक
(1) द्रव की प्रकृति-द्रव का वाष्प दाब उसकी प्रकृति पर निर्भर करता है। द्रव के अणुओं के मध्य अन्तरा-अणुक आकर्षण बल का मान उच्च होने पर वाष्प दाब का मान कम होता है क्योंकि द्रव की सतह के अणु शीघ्रता से सतह नही छोड़ते हैं, जबकि अधिक वाष्पशील द्रवों के वाष्प दाब उच्च होते हैं। कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl4), एथिल ऐल्कोहॉल (C2H5OH) तथा जल (H2O) में अन्तराअणुक आकर्षण बल का क्रम कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl4) < एथिल ऐल्कोहॉल (C2H5OH) < जल (H2O) होता है, जबकि इनके वाष्प दाबों के मान का क्रम कार्बन टेट्राक्लोराइड > एथिल ऐल्कोहॉल. > जल होता है।
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(2) द्रव का ताप-द्रव को ताप बढ़ाने पर वाष्प दाब के मान में वृद्धि होती है क्योंकि ताप बढ़ाने पर द्रव के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, फलस्वरूप वाष्पन की दर भी बढ़ जाती है। अतः द्रव का वाष्पीकरण बढ़ जाता है, अर्थात् सतह के अणुओं की द्रव की सतह छोड़ने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। इस कारण वाष्प दाब बढ़ जाता है। वाष्पदाब में ताप के साथ होने वाले परिवर्तन की गणना निम्नलिखित समीकरण द्वारा की जाती है
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जहाँ, P1 तथा P2 क्रमशः परम ताप T1 व T2 पर द्रव के वाष्पदाब हैं तथा ∆Hvapan वाष्पीकरण की ऊष्मा है।
(3) अवाष्पशील विलेय का मिलाना-जब विलायक में कोई अवाष्पशील विलेय मिलाते हैं, तो उसका वाष्प दाब घट जाता है क्योंकि द्रव की सतह के कुछ क्षेत्र विलेय के अणु घेर लेते हैं। जिसके कारण द्रव की सतह का क्षेत्रफल कुछ कम हो जाता है, फलस्वरूप वाष्पन कम होता है। वाष्प दाब में होने वाली कमी की गणना राउल्ट के नियम की सहायता से की जाती है। वाष्प दाब का मापन स्थैतिक विधि, गतिक विधि तथा गैस चूंतप्त विधि द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 5.
पृष्ठ तनाव से आप क्या समझते हैं। इसे प्रभावित करने वाले कारकै लिखिए?
उत्तर
पृष्ठ तनाव-द्रव के अणुओं के मध्य आकर्षण बल होते हैं। द्रव के तले में उपस्थित अणुओं पर लगे शुद्ध आकर्षण बल के कारण ही पृष्ठ तनाव उत्पन्न होता है। माना किं एक बर्तन में द्रव भरा है। इसमें दो द्रव के अणुओं पर विचार करते हैं, अंणु A द्रव के अन्दर है। इसे अणु पर चारों ओर उपस्थित अणुओं के आकर्षण बल लेगेंगे, अतः इस पर लगने वाला शुद्ध आकर्षण बल शून्य हो जाएगा। अणु B द्रव के तल पर स्थित है, अतः इस पर नीचे की ओर एक शुद्ध आकर्षण बल लगेगा, परिणामस्वरूप तल पर एक बल नीचे की ओर लगता है और द्रव के तल का क्षेत्र न्यूनतम होने की कोशिश करेगा द्रव के तल पर लगने वाला वह बल जो उस द्रव के तल का क्षेत्र न्यूनतम रखने की प्रवृत्ति रखता हो, पृष्ठ तनाव कउत्तराता है। माना कि किसी एक द्रव के मुक्त पृष्ठ तल पर रेखा CD खींची जाती हैं जिसकी लम्बाई । तथा उस पृष्ठ के तल में बल F कार्यरत है तो पृष्ठ तनाव ( γ) = F/l होगा। C.G.S. इकाई में यह डाइने प्रति सेमी dyme cm-1) या अर्ग प्रति सेमी (erg cm-1) तथा S.I. इकाई में न्यूटन प्रति मीटर (Nm-1) में व्यक्त किया जाता है। द्रव की बूंद की गोलाकार आकृति, केशनलिका में द्रव्र का चढ़ना या गिरना, द्रव के तल का गोलाकार (उत्तल अथवा अवतल होना) आदि द्रव के पृष्ठ तनाव द्वारा ही समझाए जा सकते हैं; जैसे–ब्यूरेट के जल की सतह अवतल होती है। क्योंकि संसंजक बल का मान आसंजक बल से कम होता है। परन्तु नली में पारे की सतह उत्तल होती है क्योंकि संसंजक बल का मान आसंजक बल से अधिक होता है।
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माना कि दो द्रवों के पृष्ठ तनाव γ1 तथा γ2 हैं और एक ही केशनली में दोनों द्रवों के समान आयतन V उपस्थित हैं। केशनली में गिरने वाली द्रव की बूंदों की संख्या n1 और n2 तथा द्रवों के घनत्व d1 और d2 हैं, तो
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पृष्ठ तनाव को प्रभावित करने वाले कारक
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(1) द्रव का ताप-ताप बढ़ाने पर द्रवों के पृष्ठ तनाव का मान घटता है। क्योकि ताप वृद्धि पर द्रवों के अणुओं की गतिज ऊर्जा के मान में वृद्धि होती है जिसके फलस्वरूप अन्तर-आण्विक आकर्षण बलों के मान घटते हैं। इस कारण पृष्ठ तनाव का मान भी घट जाता है। क्रान्तिक ताप पर जहाँ द्रव एवं वाष्प में विभेद करने वाला तल समा हो जाता है, पृष्ठ तनाव का मान घटकर शून्य हो जाता है।
आटवोस (Eotvos) ने पृष्ठ तनाव को ताप का एक रेखीय फलन (linear function) बताया तथा निम्नलिखित समीकरण दी
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जहाँ M→ द्रव पदार्थ का आण्विक द्रव्यमान, D→ द्रव का घनत्व, Tc → क्रान्तिक ताप, T → परम ताप तथा k→ नियतांक है।
(2) द्रव की प्रकृति-पृष्ठ तनाव द्रव की प्रकृति पर निर्भर करता है। द्रवों में अणुओं के मध्य अन्तर-आण्विक बलों के मान बढ़ने पर, पृष्ठ तनाव के मान में वृद्धि होती है। उदाहरणार्थ-ईथर, एथिल ऐल्कोहॉल तथा जल के अणुओं के मध्य अन्तर आण्विक आकर्षण बलों के मान का क्रम ईथर < एथिल ऐल्कोहॉल < जल होता है। इस कारण इनके पृष्ठ तनाव (20°C) के मानों का क्रम ईथर (17.0 डाइन/सेमी) < एथिल ऐल्कोहॉल (22.27 डाइन/सेमी) < जल (72.75 डाइन/सेमी) है। इनके अतिरिक्त ग्लिसरीन, ग्लाइकॉल तथा एथेनॉल में पृष्ठ तनाव का बढ़ता क्रम एथेनॉल < ग्लाइकॉल < ग्लिसरीन होता है।
(3) बाह्य पदार्थों की उपस्थिति–किसी द्रव में पृष्ठ सक्रिय पदार्थ (साबुन/अपमार्जक) मिलाने पर उसका पृष्ठ तनाव कम हो जाता है जबकि आयनिक पदार्थों की उपस्थिति से द्रव का पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है। उदाहरणार्थ-जल में साबुन मिलाने पर उसका पृष्ठ तनाव घट जाता है जबकि नमक मिलाने पर जल का पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है।

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UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 1 The Living World

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 1 The Living World (जीव जगत)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Biology . Here we  given UP Board Solutions for Class 11 Biology chapter 1 The Living World

अभ्यास के अ न्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
जीवों को वर्गीकृत क्यों करते हैं?
उत्तर :
जीवों का वर्गीकरण निम्नलिखित कारणों से किया जाता है

  1.  जीवों की सरलता से पहचान हेतु।
  2. अन्य स्थानों के जीवों के अध्ययन हेतु।
  3. जीवाश्मों के अध्ययन हेतु।
  4. समूह बनाकर सभी जीवों का अध्ययन किया जा सकता है जबकि सभी जीवों का पृथक अध्ययन असम्भव है।
  5.  वर्गीकरण से जीवों में समानता व असमानता का पता चलता (UPBoardSolutions.com) है जिससे विभिन्न जीव समूहों के बीच सम्बन्ध का ज्ञान होता है।
  6. विभिन्न टैक्सा के विकास (evolution) को पता चलता है।

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प्रश्न 2.
वर्गीकरण प्रणाली को बार-बार क्यों बदलते हैं?
उत्तर :
नये उपकरणों और प्रौद्योगिकी के विकास के साथ-साथ वैज्ञानिक अध्ययन का भी लगातार विकास होता रहता है। प्राचीन काल में वैज्ञानिक जीवों का वर्गीकरण उनके आवास तथा गुण के आधार पर करते थे। उसके पश्चात् बाह्य आकारिकी (external morphology) वर्गीकरण का मुख्य आधार बन गई। उसके पश्चात् सूक्ष्मदर्शी (microscope) व अन्य उपकरणों की खोज के पश्चात् आन्तरिक संरचना (anatomy) तथा भौणिकी (embryology) का उपयोग वर्गीकरण हेतु होने लगा। वर्तमान में कोशिकीय संरचना (cellular structure), गुणसूत्र (chromosomes), जैव रासायनिक विश्लेषण (biochemical analysis), जीन संरचना (gene structure) (UPBoardSolutions.com) तथा DNA में समानता का भी उपयोग जीवों के बीच सम्बन्ध स्थापित करने में तथा वर्गीकरण में किया जा रहा है। इसलिए वर्गीकरण प्रणाली समय के साथ-साथ परिवर्तित एवं विकसित की जाती रही है।

प्रश्न 3.
जिन लोगों से आप प्रायः मिलते रहते हैं, आप उनको किस आधार पर वर्गीकृत करना पसंद
करेंगे? [संकेत-ड्रेस, मातृभाषा, प्रदेश जिसमें वे रहते हैं; आर्थिक स्तर आदि।]
उत्तर :

  1.  परिवार के सदस्य (Family members)
  2. रिश्तेदार (Relatives)
  3. पारिवारिक मित्र (Family friends)
  4. स्कू ल मित्र (School friends)
  5.  सहपाठी (Classmates)
  6. वयस्क, अपने से बड़े, अपने से छोटे, समान उम्र वाले (Adults, seniors, juniors, same age)
  7. लिंग-स्त्री या पुरुष (Sex : Female or male)
  8. ऊँचाई (Height)
  9.  खेल मित्र (Playmates)

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प्रश्न 4.
व्यष्टि तथा समष्टि की पहचान से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर : 
व्यष्टि (Individual) : 
प्रत्येक व्यष्टि में कुछ विशिष्ट लक्षण होते हैं जो उसकी समष्टि के अन्य व्यष्टियों में नहीं पाए जाते हैं। समष्टि (Population)

  1.  प्रत्येक समष्टि जनन में पृथक (reproductively isolated) होती है।
  2. एक समष्टि के सदस्य आपस में अन्तरे प्रजनन (interbreed) करके नये जीव को जन्म दे सकते हैं।
  3.  एक समष्टि के सदस्यों में समानता होती है तथा (UPBoardSolutions.com) ये अन्य समष्टि से असमान दिखाई देते हैं।
  4. समष्टि के प्रत्येक सदस्य का कैरियोटाइप (karyotype) समान होता है।
  5. एक समष्टि के सदस्यों में आन्तरिक संरचना में समानता पायी जाती है।

प्रश्न 5.
आम का वैज्ञानिक नाम निम्नलिखित है। इनमें से कौन- सा सही है ? मैंजीफेरा इंडिका, मैजीफेरा इंडिका
उत्तर :
मैंजीफेरा इंडिका (Mangifera indica).

प्रश्न 6.
टैक्सोन की परिभाषा दीजिए। विभिन्न पदानुक्रम स्तर पर टैक्सा के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
टैक्सोन, किसी भी स्तर को वर्गिकी समूह होता है। (Taxon is a taxonomic group of any rank). यह किसी भी स्तर पर जीवों के समूह को निरूपित करता है। उदाहरणार्थ-मक्का (species), रोजेज (genus), घास (family), कोनिफर (order), (UPBoardSolutions.com) द्विबीजपत्री (class), बीजीय पौधे (division) शब्द टैक्सोन (taxon) सर्वप्रथम 1956 में  ICBN (International Code of Botanical Nomenclature) ने प्रतिपादित किया था तथा मेयर (1964) ने इसकी परिभाषा ‘किसी भी स्तर के वर्गिकी समूह’ के रूप में दी थी।

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प्रश्न 7.
क्या आप वर्गिकी संवर्ग का सही क्रम पहचान सकते हैं ?

(a) जाति (Species) → गण (Order) →संघ (Phylum) → जगत (Kingdom)
(b) वंश (Genus) → जाति (Species) → गण (Order) → जगत (Kingdom)
(c) जाति (Species) → वंश (Genus)→ गण (Order) → संघ (Phylum)

उत्तर: 
(c) जाति (Species) → वंश (Genus) → गण (Order) → संघ (Phylum)

प्रश्न 8.
‘जाति’ शब्द के सभी मानवीय वर्तमान कालिक अर्थों को एकत्र कीजिए। क्या आप अपने शिक्षक से उच्च कोटि के पौधों, प्राणियों तथा बैक्टीरिया की स्पीशीज का अर्थ जानने के लिए चर्चा कर सकते हैं?
उत्तर :

  1.  जाति (species) एक प्राकृतिक जनसंख्या अथवा समान आकारिकी (morphology), आन्तरिक संरचना (anatomy), कार्यिकी (physiology) तथा कोशिकीय संरचना (cellular structure) वाले जीवों की प्राकृतिक जनसंख्या है।
  2.  जाति (species), वर्गीकरण की आधारीय इकाई (basic unit) है जिसमें एक जाति के जीव | समान आनुवंशिक गुण रखते हैं।
  3.  जाति (species) ऐसे संरचनात्मक रूप से समान जीवों का समूह है जो आपस में मुक्त (UPBoardSolutions.com) लैंगिक जनन (freely sexual reproduction) द्वारा संतान उत्पन्न कर सकते हैं परन्तु अन्य जाति के जीवों से जनन में पृथकता (reproductively isolated) दर्शाते हैं।

उच्च पादप तथा जन्तुओं (higher plants and animals) में लैंगिक जनन होता है। अतः इनकी जाति निर्धारण के लिए जनन पृथकता (reproductive isolation) का उपयोग किया जाता है। अत: परिभाषा (3) सही है। जीवाणुओं (bacteria) में मुक्त प्रजनन (free reproduction) तथा जनन पृथकता (reproductive isolation) नहीं पाया जाता है। इसलिए जीवाणुओं की जाति का निर्धारण आकारिकी (morphology) के आधार पर किया जाता है। अत: परिभाषा (1) सही है।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित शब्दों को समझिए तथा परिभाषित कीजिए

(i) संघ
(ii) वर्ग
(iii) कुल
(iv) गण
(v) वंश

उत्तर :

(i) संघ (Phylum) :
समान गुणों वाले वर्गों (class) को एक संघ (phylum) में रखा जाता है, जैसे मत्स्य, उभयचर, सरीसृप (reptiles), पक्षी तथा स्तनधारी जंतुओं को एक ही संघ कॉडेटा (chordata) में रखा गया है। इन सभी जंतुओं में रीढ़ की हड्डी पाई जाती है। पौधों में समान गुणों वाले वर्गों (class) को एक डिविजन (division) में वर्गीकृत किया जाता है।

(ii) वर्ग (Class) :
समान गुणों वाले गण (order) को एक वर्ग (class) में रखा जाता है। गण प्राइमेटा (order primata) में बंदर, गोरिल्ला, चिंपैंजी आदि को एक ही वर्ग मैमेलिया (mammalia) में शेर, कुत्ता, बिल्ली आदि के साथ रखा गया है, क्योंकि ये सभी स्तनधारी श्रेणी में रखे गए हैं।

(iii) कुल (Family) :
जिस प्रकार समान गुणों वाली जाति को एक वंश में रखते हैं उसी प्रकार समान गुणों वाले सभी वंशों को एक कुल या कुटुंब (family) में रखते हैं। जैसे आलू, टमाटर, बैंगन में कई गुण समान होते हैं इसलिए इन्हें एक ही कुल सोलेनेसी (solanaceae) में रखा गया है। कुटुंब को वर्धिक (vegetative) तथा जननीय लक्षणों (reproductive characters) के आधार पर विशेषीकरण (characterization) किया जाता है। उदाहरण के लिए, शेर, बाघ तथा तेंदुआ (UPBoardSolutions.com) को वंश पैथेरा (Panthera) में बिल्ली (Felis) के साथ कुटुंब फेलिडी (Felidae) में रखा गया है। इसी प्रकार कुत्ता और बिल्ली में कुछ समानताएँ तथा कुछ अन्तर होते हैं। इन्हें दो अलग-अलग कुटुंबों क्रमशः कैनिडी (Canidae) तथा फेलिडी (Felidae) में रखा गया है।

(iv) गण (Order) :
समान गुणों वाले कुलों को एक गण (order) में रखा जाता है। उदाहरण के लिए, बिल्ली, कुत्ता तथा शेर को एक ही ऑर्डर कार्निवोरा (carnivora) में रखा गया है। पौधों में कानवॉल्वुलेसी (convolvulaceae) तथा सोलेनेसी (solanaceae) कुटुंब को एक गण | पॉलीमोनिएल्स (polemoniales) में पुष्पीय गुणों के आधार पर रखा गया है।

(v) वंश (Genus) :
वंश, सम्बन्धित स्पीशीज का एक समूह है। (Genus is a group of related species)। वर्गीकरण में वंश का बहुत महत्त्व है। द्विपद-नाम-पद्धति (binomial nomenclature) के अनुसार किसी भी स्पीशीजे को तब तक कोई नाम नहीं दिया जा सकता जब तक कि वह किसी वंश के साथ न हो।

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प्राय: एक ही वंश की जाति के गुणों में काफी समानता होती है। सामान्य गुणों के ऐसे समूह को सह-संबंधित गुण (correlated characters) कहा जाता है। ऐसी जाति को एक वंश के अन्तर्गत रखा जाता है। एक वंश के अन्दर कई जाति हो सकती हैं, जैसे आम का वंश है मैंजीफेरा (Mangifera), जिसके अन्तर्गत 35 जातियों को रखा गया है। मैंजीफेरा इंडिका (Mangifera indica) 35 जातियों में से एक है। एक वंश के अन्तर्गत केवल एक जाति भी (UPBoardSolutions.com) हो सकती है। जैसे वंश जिंगो (Ginkgo) में केवल एक जाति है-जिंगो बाइलोबा (Ginkgo biloba)। ऐसे वंश, जिनमें केवल एक ही जाति होती है-मोनोटिपिक जीनस (monotypic genus) कहलाते हैं।

प्रश्न 10.
जीव के वर्गीकरण तथा पहचान में कुंजी किस प्रकार सहायक है?

उत्तर :
कुंजी एक ऐसी विधि है जिसके द्वारा विभिन्न वर्गों में स्थित प्रत्येक प्रकार के जीव की पहचान की जा सकती है। वैज्ञानिक जीवों की पहचान उनके गुणों के आधार पर बनाई गई कुंजी (keys) से करते हैं। कुंजी (key) पौधों तथा जन्तुओं के समान तथा असमान गुणों के आधार पर बनाई जाती है। वर्गिकी कुंजी (taxonomic key) दो विपरीत लक्षणों पर आधारित होती है। इनमें से एक को स्वीकार किया जाता है जबकि दूसरे को अस्वीकृत कर दिया जाता है। कुल, वंश तथा जाति के लिए अलग-अलग कुंजी का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 11.
पौधों तथा प्राणियों के उचित उदाहरण देते हुए वर्गिकी पदानुक्रम का चित्रण कीजिए।
उत्तर :
वर्गीकरण एकल सोपान प्रक्रम नहीं है, बल्कि इसमें पदानुक्रम सोपान (hierarchy of steps) होते हैं जिसमें प्रत्येक सोपान पद अथवा वर्ग (rank or category) को प्रदर्शित करता है। चूंकि संवर्ग (category) समस्त वर्गिकी व्यवस्था है इसलिए इसे वर्गिकी संवर्ग (taxonomic category) कहते हैं। और तभी सारे संवर्ग मिलकर वर्गिकी पदानुक्रम (taxonomic hierarchy) बनाते हैं। प्रत्येक संवर्ग वर्गीकरण की एक इकाई को प्रदर्शित करता है। वास्तव में, यह एक पद को दिखाता है और इसे प्रायः वर्गक (टैक्सोन) कहते हैं। वर्गिकी संवर्ग तथा पदानुक्रम का वर्णन एक उदाहरण द्वारा कर सकते। हैं। कीट (insects) जीवों के एक वर्ग को दिखाता है जिसमें एक समान गुण जैसे तीन जोड़ी संधिपाद (टाँगे) होती हैं। इसका अर्थ है कि कीट संघ स्वीकारणीय सुस्पष्ट जीव है जिसका वर्गीकरण किया जा सकता है, इसलिए इसे एक पद (rank) अथवा संवर्ग (UPBoardSolutions.com) (category) का दर्जा दिया वर्ग (क्लास) गया है। स्मरण रहे कि वर्ग (group) संवर्ग (category) को दिखाता है। प्रत्येक पदे (rank) अथवा वर्गक (taxon) वास्तव में, वर्गीकरण की एक इकाई को बताता है। ये वर्गिकी वर्ग/संवर्ग सुस्पष्ट जैविक है ना कि केवल आकारिकीय समूहन। सभी ज्ञात जीवों के वर्गिकीय अध्ययन से सामान्य संवर्ग जैसे जगत । (kingdom), संघ (phylum) अथवी भाग (पौधों के लिए), वर्ग (class), गण (order), कुल (family), वंश (genus) तथा जाति (species) का विकास हुआ। पौधों तथा प्राणियों दोनों में जाति । सबसे निचले संवर्ग में आती है। इनका वर्गीकरण संलग्न चित्र के अनुसार होता है।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 1 The Living World image 1

मनुष्य तथा आम का वर्गिकी पदानुक्रम में वर्गीकरण निम्न प्रकार है

पदानुक्रम                                                      मनुष्य
जगत (Kingdom)                                एनीमेलिया (Animalia)
संघ/डिविजन (Phylum/Division)    कॉडेंटा (Chordata)
वर्ग (Class)                                           मैमेलिया (Mammalia)
गण (Order)                                          प्राइमेटा (Primata)
कुल (Family)                                       होमोनीडी (Homonidae)
वंश (Genus)                                         होमो (Homo)
जाति (Species)                                    होमो सेपियन्स(Homo sapiens)
पदानुक्रम                                                            आम
जगत (Kingdom)                                  प्लाण्टी (Plantae)
संघ/डिविजन (Phylum/Division)  एन्जियोस्पर्मी (Angiospermae)
वर्ग (Class)                                             डाइकोटिलीडनी (Dicotyledonae)
गण (Order)                                           सेपिंडेल्स (Sapindales)
कुल (Family)                                         एनाकाडेंसी (Anacardiaceae)
वंश (Genus)                                          मैंजीफेरा (Mangifera)
जाति (Species)                                     मैंजीफेरा इंडिका (Mangifera indica)

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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मछलियों का अध्ययन जीव विज्ञान की किस शाखा के अन्तर्गत करते हैं?

(क) हरपेटोलॉजी
(ख) हेल्मिन्थोलॉजी
(ग) ओफियोलॉजी
(घ) इक्थियोलॉजी
उत्तर : 
(घ) इक्थियोलॉजी

प्रश्न 2.
जन्तु किन लक्षणों में पादपों से मिलते हैं?

(क) ये दिन-रात श्वसन करते हैं।
(ख) ये केवल दिन में श्वसन करते हैं।
(ग) ये केवल रात में श्वसन करते हैं।
(घ) ये जब चाहें श्वसन करते हैं।
उत्तर :
(क) ये दिन-रात श्वसन करते हैं।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
“जीव विज्ञान” शब्द का प्रयोग सबसे पहले किसने किया था?
उत्तर :
“जीव विज्ञान (Biology) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1802 ई० में लैमार्क (Lamarck) और ट्रैविरैनस (Treviranus) द्वारा किया गया।

प्रश्न 2.
जीव विज्ञान, जन्तु विज्ञान तथा वनस्पति विज्ञान के पिता का नाम लिखिए। या जन्तु विज्ञान के जनक कौन थे?
उत्तर :
जीव विज्ञान       → अरस्तू (Aristotle)
जन्तु विज्ञान       → अरस्तू (Aristotle)
वनस्पति विज्ञान → थियोफ्रेस्टस (Theophrastus)

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प्रश्न 3.
सजीव एवं निर्जीव में अन्तर बताइए।
उत्तर :
सभी सजीवों में जीवद्रव्य उपस्थित होता है जोकि सभी सजीवों (जीवधारियों) की भौतिक आधारशिला है। इसके विपरीत निर्जीवों में यह अनुपस्थित होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जीव विज्ञान की दो परम्परागत शाखाओं के नाम लिखिए तथा इनमें अन्तर बताइए।
उत्तर : 
जीव विज्ञान की दो परम्परागत शाखाएँ निम्नवत् हैं

  1. जन्तु विज्ञान (Zoology)
  2. वनस्पति विज्ञान (Botany)

जन्तु विज्ञान शाखा के अन्तर्गत जन्तुओं (animals) का अध्ययन किया जाता है, जबकि वनस्पति विज्ञान शाखा के अन्तर्गत वनस्पतियों (plants) का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 2.
सजीवों के किन्हीं दो लक्षणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :

1. श्वसन (Respiration) :
जीवधारियों में श्वसन हर समय होता रहता है। इस क्रिया में जीव वायुमण्डल से ऑक्सीजन (O,) लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड (CO,) बाहर निकालते हैं। इस क्रिया में कार्बोहाइड्रेट, वसा एवं प्रोटीन का ऑक्सीकरण (Oxidation) होता है और ऊर्जा मुक्त होती है। (UPBoardSolutions.com) इस मुक्त ऊर्जा से ही जीवधारियों की समस्त जैविक-क्रियाएँ संचालित होती हैं। श्वसन क्रिया एक अपचयी क्रिया (catabolic reaction) है।

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2. जनन (Reproduction) :
जनन भी जीवों का अभिलक्षण है। बहुकोशिक जीवों में जनने (लैंगिक जनन-sexual reproduction) का अर्थ अपनी संतति उत्पन्न करना है जिसके अभिलक्षण लगभग उसके अपने माता-पिता से मिलते हैं। जीव अलैंगिक जनन (asexual reproduction) भी करते हैं। फंजाई (कवक) लाखों अलैंगिक बीजाणुओं (asexual spores द्वारा गुणन करती है और सरलता से फैल जाती है। निम्न कोटि के जीवों; जैसे- यीस्ट तथा हाइड्रा में मुकुलन (budding) द्वारा जनन होता है। प्लैनेरिया (चपटा कृमि) में वास्तविक पुनर्जनन (true regeneration) होता है अर्थात् एक खंडित जीव अपने शरीर के लुप्त अंग को पुनः प्राप्त (जीवित) कर (UPBoardSolutions.com) लेता है और इस प्रकार एक नया जीव बन जाता है। फंजाई, तंतुमयी शैवाल, मॉस का प्रथम तंतु (protonema of moss) सभी विखण्डन (fragmentation) विधि द्वारा गुणन करते हैं।

प्रश्न 3.
पौधों तथा जन्तुओं में मुख्य अन्तर बताइए।
उत्तर : 
पौधों तथा जन्तुओं में मुख्य अन्तर निम्नवत्
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 1 The Living World image 2

प्रश्न 4.
अजायबघर या म्यूजियम किसे कहते है? म्यूजियम एवं चिड़ियाघर में अन्तर बताइए।
उत्तर :
संग्रहालय (Museum) :
संग्रहालय प्रायः शैक्षिक संस्थानों; जैसे विद्यालय तथा कॉलेजों में स्थापित किए जाते हैं। संग्रहालय में अध्ययन के लिए परिरक्षित पौधों तथा प्राणियों के नमूने होते हैं। पौधे तथा प्राणियों के नमूनों को सुखाकर परिरक्षित करते हैं। कीटों को एकत्र करके मारने के बाद डिब्बों में पिन लगाकर रखते हैं। बड़े प्राणी; जैसे–पक्षी तथा स्तनधारी; को प्रायः परिरक्षित घोल में डालकर जारों में भरकर परिरक्षित करते हैं। संग्रहालय में प्राय: प्राणियों के कंकाल भी रखे जाते हैं।

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प्रमुख संग्रहालय

  1. नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम, लंदन
  2.  फॉरेस्ट म्यूजियम, अण्डमान-निकोबार द्वीप
  3. नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री, दिल्ली
  4. प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूजियम, मुम्बई
  5. इण्डियन म्यूजियम, कोलकाता
  6. महाराजा सवाई मान सिंह म्यूजियम, जयपुर

प्राणी उपवन अथवा चिड़ियाघर (Zoological Park) :
इन उपवनों में अधिकांशतः वन्य आवासी जीवित प्राणी रखे जाते हैं। इनसे हमें वन्य जीवों की मानव की देख-रेख में आहार-प्रकृति तथा व्यवहार को सीखने का अवसर प्राप्त होता है। जहाँ तक संभव होता है; चिड़ियाघरों में विभिन्न प्राणी उपलब्ध कराए जाते हैं। चिड़ियाघर में सभी प्राणियों को उनके प्राकृतिक आवासों वाली परिस्थितियों में रखने का प्रयास किया जाता है। इन उद्यानों को प्रायः चिड़ियाघर (zoos) कहते हैं। इसे देखने के लिए बहुत-से लोग तथा बच्चे आते हैं।

प्रश्न 5.
वानस्पतिक उद्यानों का क्या महत्त्व है? भारतवर्ष के किन्हीं दो वानस्पतिक उद्यानों के नाम लिखिए। या पादप (वानस्पतिक) उद्यान को समझाइए।
उत्तर :
विभिन्न प्रकार के पौधों की जातियाँ लगाकर उसे सुरक्षित करने हेतु सम्पूर्ण क्षेत्रफल को चारों ओर से घेर देते हैं। इन्हें ही वानस्पतिक या पादप उद्यान कहते हैं। वानस्पतिक उद्यानों से निम्नलिखित लाभ हैं जिसके कारण इनका बहुत महत्त्व है।

  1. वर्गीकरण अध्ययन हेतु जीवित जातियों को वानस्पतिक उद्यानों से प्राप्त किया जाता है।
  2. यहाँ पर विदेशों से भी लाकर नई जातियाँ लगाई जाती हैं तथा उनका (UPBoardSolutions.com) विकास किया जाता है।
  3. अनुसंधान के लिए यहाँ पर पौधों को लगाकर रखा जाता है।
  4.  अनुसंधान द्वारा यहाँ नई जातियों का विकास किया जाता है।
  5. विलुप्त होने वाली पादप जातियों को यहाँ संरक्षण प्रदान किया जाता है।

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भारत के दो प्रमुख वानस्पतिक उद्यान निम्नवत् हैं

1. Royal Botanical Garden (Kolkata)
2. National Botanical Garden (Lucknow)

प्रश्न 6.
हरबेरियम किसे कहते हैं? इसे तैयार करने में किन चीजों की आवश्यकता होती है?
उत्तर :
हरबेरियम पौधों या पौधों के भागों का संग्रहालय होता है जिसे मान्य वर्गीकरण पद्धति के अनुसार व्यवस्थित रखा जाता है। इसे हरबेरियम शीट या पादपालय पत्र पर चिपकाकर व्यवस्थित ढंग से रखा जाता है। हरबेरियम को तैयार करने के लिए निम्नलिखित चीजों की (UPBoardSolutions.com) आवश्यकता होती है|

  1. कैंची
  2. चाकू
  3. नमूनों को रखने हेतु वैस्कुलम नामक बॉक्स
  4.  पादप प्रेस
  5.  अखबार
  6.  लेंस आदि

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UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज

UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 7 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज.

अभ्यास 5 (a)

प्रश्न 1.
आकृति 5.18 में ∠B समकोण है, भुजा CA की माप होगी?
(i) 5 सेमी
(ii) 10 सेमी
(iii) 8 सेमी
(iv) 6 सेमी
हल :
CA2 = AB2 + BC2 = 62 + 82 = 36+ 64 = 100 = 102
CA = 10 सेमी (ii)
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 1
प्रश्न 2.
आकृति 5.19 ∠A समकोण हो, (UPBoardSolutions.com) तो AB की माप होगी?
(i) 25 सेमी
(ii) 13 सेमी
(ii) 5 सेमी।
(iv) 12 सेमी
हल :
AB2 = BC2 – CA = 132 – 122
= 169- 144 = 25 = 52
AB = 5 सेमी (iii)
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 2

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित आकृतियों में समकोण त्रिभुजों को देखकर अपनी अभ्यास पुस्तिका में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 3

 

प्रश्न 4.
∆ABC में ∠ABC समकोण है। यदि AB = 7 (UPBoardSolutions.com) सेमी और BC = 24 सेमी, तो CA की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
हल :
समकोण त्रिभुज ABC में,
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 4

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प्रश्न 5.
आयत ABCD में विकर्ण CA = 20 सेमी और AB = 16 सेमी। BC की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
हल :
समकोण त्रिभुज ABC में,
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 5
प्रश्न 6.
65 डेसीमी लम्बी सीढ़ी को दीवार से 25 डेसीमी हटाकर लगाया गया है, दीवार के आधार से सीढ़ी के ऊपरी सिरे की ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
हल :
माना दीवार के आधार से सीढी के ऊपरी सिरे (UPBoardSolutions.com) की ऊँचाई = h डेसीमी समकोण त्रिभुज ABC में,
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 6UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 7

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प्रश्न 7.
26 मीटर लम्बा एक तार है। उसका एक सिरा 24 मीटर (UPBoardSolutions.com) ऊँचे खम्भे के ऊपरी सिरे से बँधा है। और दूसरा जमीन में गड़ा है। जमीन पर खम्भे और तार के निचले सिरे के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 8
प्रश्न 8.
निम्नलिखित पाइथागोरियन त्रिक हैं। प्रत्येक से तीन-तीन पाइथागोरियन त्रिक बनाइए।
(i) 3,4,5
(ii) 5, 12, 13
(iii) 8, 15, 17
हल :
(i) 3, 4, 5 पाइथागोरियन त्रिक है।
3, 4, 5 को 2 से गुणा करने पर,
(3 × 2, 4 × 2, 5 × 2) अर्थात् 6, 8, 10 भी पाइथागोरियन त्रिक होंगे।
3, 4, 5 को 3 गुणा करने पर,
(3 × 3, 4 × 3, 5 × 3) अर्थात् 9, 12, 15 भी पाइथागोरियन त्रिक होंगे।
3, 4, 5 को 4 गुणा करने पर,
(3 × 4, 4 × 4, 5 × 4) अर्थात् 12, 16, 20 भी पाइथागोरियन त्रिक होंगे।

(ii) (5, 12, 13) के पाइथागोरियन त्रिक हैं।
= (2×5, 2 x 12, 2 x 13); तथा (3 x 5, 3 x 12,3 x 13)
(4 x 5, 4 x 12, 4 x 13) = (10, 24, 26); (15, 36, 39) तथा (20, 48, 52)

(iii) (8, 15, 17) के पाइथागोरियनु त्रिक हैं।
= (2 × 8, 2 × 15, 2 × 17); (3 × 8, 3 × 15, 3 × 17) तथा (4 × 8, 4 × 15, 4 × 17)
= (16, 30, 34); (24, 45, 51) तथा (32, 60, 68)

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित में पाइथागोरियन त्रिक छाँटकर लिखिएः (UPBoardSolutions.com)
(i) 5, 12, 13
(ii) 7,8, 15
(iii) 6,7,8
(iv) 8, 15, 17
(v) 3,4,5
हल :
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 9

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UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 10

अभ्यास 5 (b)

प्रश्न 1.
त्रिभुज ABC की रचना कीजिए जिसकी भुजा BC=6.0 सेमी ∠B=50°तथा CA+AB=8.0 सेमी
हल :
दिया है A ABC में रेखाखण्ड BC = 6 सेमी ∠B = 50 तथा ∠A + AB = 8 सेमी
रचना करनी है – ∆ ABC की।
रचना-

  1. सर्वप्रथम रेखाखण्ड BC=6 सेमी खींचा।
  2. बिन्दु B पर 50°का कोण बनाती हुई रेखा BY खींची।
  3. रेखा BY से दो भुजाओं का योग (UPBoardSolutions.com) (CA+AB=8 सेमी) का रेखाखण्ड BD खींचा। बिन्दु D को C से मिलाया।
  4. रेखाखण्ड CD का लम्बार्द्धक खींचा जो कि BD को A पर प्रतिच्छेद करता है। A को C से मिलाया।
  5. यही AABC अभीष्ट त्रिभुज है।
    UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 11

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प्रश्न 2.
∆ABC की रचना कीजिए जिसमें BC = 7.5 सेमी, ∠B = 45° तथा AB – CA = 2.0 सेमी
हल :
दिया है ∆ABC में रेखाखण्ड BC=7.5 (UPBoardSolutions.com) सेमी 2B = 45° तथा AB – CA = 2 सेमी
रचना करनी है – ∆ ABC की
रचना –

  1. र्वप्रथम रेखाखण्ड BC = 7.5 सेमी खींचा।
  2. बिन्दु B पर परकार व पटरी की सहायता से 45° का। कोण बनाती हुए रेखा BX खींची।
  3. रेखा BXसे AB-CA=2 सेमी का रेखाखण्ड। BD खींचा।
  4. बिन्दु D से C को मिलाया।
  5. रेखाखण्ड CD का लम्बार्द्धक खींचा जो BX को A पर काटता है। CA को मिलाया।
  6. यही ∆ABC अभीष्ट त्रिभुज है।
    UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 12

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प्रश्न 3.
∆ABC की रचना कीजिए जिसमें BC = 5 सेमी, ∠B = 50° तथा AC – AB = 2 सेमी
हल :
दिया है A ABC में रेखाखण्ड BC=5 सेमी ∠B= 50° तथा AC-AB=2 सेमी
रचना करनी है – ∆ ABC की।
रचना –

  1. सर्वप्रथम रेखाखण्ड BC=5 सेमी खींचा।
  2. बिन्दु B पर 50° का कोण बनाती हुई रेखा BX खींची तथा इसे B की तरफ नीचे बढ़ाते हुए रेखा BY खींचीं।
  3. रेखा BY से AC-AB=2 (UPBoardSolutions.com) सेमी का रेखाखण्ड BD खींचा।
  4. बिन्दु D से C को मिलाया।
  5. रेखाखण्ड CD का लम्बार्द्धक खींचा जो रेखा BX को A पर काटता है। CA को मिलाया।
  6. यही ∆ABC अभीष्ट त्रिभुज है।
    UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 13

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अभ्यास 5 (c)

प्रश्न 1.
नीचे दी गई भुजाओं और कोणों से त्रिभुज खींचकर उनके शीर्षलम्ब खींचिए तथा जाँच कीजिए कि प्रत्येक त्रिभुज के शीर्षलम्ब संगामी हैं।
(i) 3.4 सेमी. 5.4 सेमी. 4.5 सेमी;
(ii) दो भुजाएँ 6 सेमी और 4.5 सेमी तथा इनके बीच का कोण 120°;
(iii) दो भुजाएँ 5 सेमी और 4 सेमी तथा इनके बीच की कोण 90°;(UPBoardSolutions.com)
(iv) दो कोण 65° तथा 80° और बीच की भुजा 5 सेमी।।

(i) रचना – सर्वप्रथम दी हुई भुजाओं की माप से A ABC * बनाया। शीर्ष A से ALL BC खींचा। शीर्ष B से BM 1 AC खींचा। शीर्ष C से CN 1 AB खींची। ∆ABC के तीनों शीर्षलम्ब AL, BM और CN एक ही बिन्दु 0 से होकर जाते हैं। अत: प्रत्येक त्रिभुज के शीर्षलम्ब संगामी हैं।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 14

नोट : विद्यार्थी प्रश्न 1 का खंड
(ii), (iii) व
(iv) की रचना खंड
(i) की तरह अपने (UPBoardSolutions.com) अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।

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प्रश्न 2.
एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC खींचिए, जिसमें AB=AC, शीर्ष A से शीर्षलम्ब AL खींचिए। मापकर बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या नहीं।
हल :
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 15

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प्रश्न 3.
AABC में ∠C समकोण है। इस त्रिभुज का बिना शीर्षलम्ब खींचे तथा केन्द्र बताइए।
हल :
AABC में ∠C समकोण है अतः त्रिभुज का लम्बकेन्द्र, शीर्ष लम्ब AC तथा BC का प्रतिच्छेद बिन्दु C होगा।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 16

अभ्यास 5(d)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथनों को अपनी अभ्यास-पुस्तिका में लिखकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: ( पूर्ति करके)
उत्तर :

  • त्रिभुज की माध्यिका वह रेखाखण्ड है जो इसके किसी शीर्ष को सम्मुख भुजा के मध्यबिन्दु से मिलाती है।
  • किसी त्रिभुज की माध्यिकाएँ संगामी होती हैं।
  • त्रिभुज की माध्यिकाएँ जिस बिन्दु पर मिलती हैं उसे केन्द्रक कहते हैं। (UPBoardSolutions.com)
    UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 17

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प्रश्न 2.
एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC खींचिए, जिसमें AB = AC माध्यिका AD खींचिए। नापकर बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या नहीं।
उत्तर :
सर्वप्रथम एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC, खींचा, जिसमें AB = AC एवं AD माध्यिका खींची। नापने पर,

  • AD, BC पर लम्ब है। ( सत्य)
  • AD, 2A को समद्विभाजित करता है। ( सत्य)
  • AD, BC का लम्ब समद्विभाजक है। ( सत्य)

प्रश्न 3.
AD, BE और CF किसी ∆ABC की (UPBoardSolutions.com) माध्यिकाएँ हैं और G इसका केन्द्रक है। यदि BE=CF, तो ∆GBC किस प्रकार का त्रिभुज है? आकृति बनाकर देखिए।
(i) विषमबाहु
(ii) समद्विबाहु
(iii) समबाहु
हल :
(ii) समद्विबाहु
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 18

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अभ्यास 5 (e)

प्रश्न 1.
एक रेखाखण्ड AB लेकर उसकी लम्ब समद्विभाजक रेखा खींचिए। पर कोई बिन्दु P लेकर PA और PB को नापिए। क्या PA और PB बराबर हैं?
हल :
हाँ, PA और PB बराबर हैं।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 19

प्रश्न 2.
एक समकोण त्रिभुज ABC खींचिए, जिसमें ∠C समकोण हो। (UPBoardSolutions.com) AB का मध्य बिन्दु 0 ज्ञात कीजिए। केन्द्र O और त्रिज्या OA वाला एक वृत्त खींचिए। क्या यह C से होकर जाता है?A ABC के संदर्भ में, बिन्दु’O को क्या कहते हैं?
हल :
हाँ, केन्द्र 0 और त्रिज्या OA वाला वृत्त C से होकर जाता है। ∆ABC के संदर्भ में, बिन्दु 0 को परिकेन्द्र कहते हैं।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 20

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प्रश्न 3.
नीचे दी गई भुजाओं और कोणों से त्रिभुज बनाइए और उनकी भुजाओं के लम्ब समद्विभाजक खींचिए और जाँच कीजिए कि वे संगामी हैं।
(i) 7 सेमी, 5 सेमी और 4 सेमी
(ii) 6 सेमी तथा भुजा पर बने कोण 90° और 30°
(iii) 4.5 सेमी, 2.5 सेमी, बीच कोण 105°
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 21
(i) रचना – सर्वप्रथम दी गई भुजा व कोणों की माप से त्रिभुज ABC बनाया। भुजा AB, BC तथा AC के लम्ब समद्विभाजक क्रमशः l, m तथा n खींचे। ये लींब समद्विभाजक एक-दूसरे को बिन्दु 0 पर काटते हैं। अतः ये संगामी हैं।
(ii) रचना – सर्वप्रथम 6 सेमी की एक रेखा AB खींची। (UPBoardSolutions.com) अब बिन्दु A पर 90° का कोण और बिन्दु B पर 30° का कोण बनाया A और B के किरणों को बढ़ाया जो एक-दूसरे को बिन्दु C पर काटती हैं। अब AB,BC और AC के लम्ब समद्विभाजक खींचे। ये लम्ब समद्विभाजक एक-दूसरे को बिन्दु पर काटते हैं। अतः ये संगामी हैं।
(iii) रचना – विद्यार्थी
(ii) की भाँति अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 22

अभ्यास 5 (f)

प्रश्न 1.
नीचे दी गई भुजाओं तथा कोणों से त्रिभुज बनाइए और उनके कोणों के समद्विभाजक खींचकर जाँच कीजिए कि क्या वे संगामी हैं।
(i) 3.4 सेमी, 4 सेमी तथा 2.5 सेमी
(ii) 4.6 सेमी, 3.5 सेमी तथा बीच का कोण 120°
(iii) 5 सेमी, 4 सेमी तथा 2.5 सेमी।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 23
(i) रचना – सर्वप्रथम दी गई भुजाओं की माप से ∆ABC बनाया। ∠A, ∠B और ∠C के समद्विभाजक खींचे। ये एक-दूसरे के बिन्दु 0 पर काटते हैं।
अतः ये संगामी हैं।
(UPBoardSolutions.com)
(ii) रचना – सर्वप्रथम दी गई भुजा व कोणों की माप से त्रिभुज ∆ABC बनाया। ∠A, ∠B और ∠C के समद्विभाजक खींचे। ये एक-दूसरे के बिन्दु 0 पर काटते हैं। अतः ये संगामी हैं।
(iii) रचना – छात्र खंड
(i) की भाँति स्वयं करें।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 24

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प्रश्न 2.
एक समबाहु ∆ABC खींचिए और उसका केन्द्र ज्ञात कीजिए। यह भी ज्ञात कीजिए कि इसके परिकेन्द्र, लम्बकेन्द्र व केन्द्रक इसके अन्तः केन्द्र पर संपाती हैं।
रचना – सर्वप्रथम एक समबाहु त्रिभुज ABC खींचा। ∠A, ∠ B तथा ∠C के समद्विभाजक किए। जो त्रिभुज में बिन्दु 0 से होकर जाते हैं। बिन्दु 0 समद्विबाहु त्रिभुज का अन्त: केन्द्र है। चूँकि समबाहु त्रिभुज में अन्त: केन्द्र, परिकेन्द्र, लम्बकेन्द्र व केन्द्रक एक ही बिन्दु होता है। अतः समबाहु त्रिभुज के परिकेन्द्र, लम्बकेन्द्र व केन्द्रक इसके अन्तः केन्द्र पर संपाती हैं।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 25

प्रश्न 3.
पाश्र्व चित्र में ∆ABC समद्विबाहु त्रिभुज है, इसमें AB= AC है, (UPBoardSolutions.com) AP, ∠A का अर्धक है। यह रेखाखण्ड AP, BC का लम्बार्धक है या नहीं। चित्र खींचकर और नापकर बताइए।
रचना – सर्वप्रथम एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC खींचा, जिसमें AB = ACI ∠A का अर्धक AP खींचा। भुजा BC का लम्बार्धक खींचा, जो अर्धक AP से मिलता है। अत: रेखाखण्ड AP, BC का लम्बार्धक है।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 26

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अभ्यास 5 (g)

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए ( पूर्ति करके)
हल :

  • समकोण त्रिभुज का परिकेन्द्र कर्ण पर स्थित होता है।
  • अधिक कोण त्रिभुज का परिकेन्द्र त्रिभुज के बाह्य क्षेत्र में स्थित होता है।
  • न्यूनकोण त्रिभुज का परिकेन्द्र त्रिभुज अन्तः क्षेत्र में स्थित होता है।

प्रश्न 2.
एक त्रिभुज ABC खींचिए जिसमें AB=3 सेमी, BC-4 सेमी और AC=5 सेमी। इस त्रिभुज का परिकेन्द्र ज्ञात कीजिए।
रचना – सर्वप्रथम दी गई नाप के अनुसार एक (UPBoardSolutions.com) त्रिभुज ABC खींचा। भुजा AB, BC तथा AC के लम्बार्धक खींचे, जो एक-दूसरे को बिन्दु 0 पर काटते h b हैं। अतः बिन्दु 0 त्रिभुज का परिकेन्द्र है, जो त्रिभुज के कर्ण पर स्थित है।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 27

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प्रश्न 3.
एक अधिक कोण त्रिभुज ABC बनाइए जिसका कोण B अधिक कोण हो, इस त्रिभुज का परिकेन्द्र ज्ञात कीजिए।
रचना – सर्वप्रथम किसी भी नाप का एक अधिककोण त्रिभुज बनाया, जिसका कोण B अधिक कोण है। भुजा AB तथा BC के लम्बार्धक खींचे, जो एक-दूसरे को बिन्दु 0 पर काटते हैं। अतः बिन्दू 0 त्रिभुज ABC को परिकेन्द्र है।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 28

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अभ्यास 5 (h)

प्रश्न 1.
एक∆ABC बनाइए, जिसका ∠Bअधिक कोण हो। इस त्रिभुज का लंबकेन्द्र ज्ञात कीजिए।
रचना – सर्वप्रथम एक त्रिभुज ABC बनाया, जिसमें B अधिक कोण है। त्रिभुज के (UPBoardSolutions.com) शीर्ष A तथा C से शीर्षलम्ब खींचे, जो एक-दूसरे को त्रिभुज के बाहर बिन्दु 0 पर काटते हैं। अतः बिन्दु 0 त्रिभुज का लम्ब केन्द्र है, जो त्रिभुज के बाह्य क्षेत्र में स्थित है।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 29

प्रश्न 2.
न्यूनकोण त्रिभुज ABC बनाइए तथा इसका लम्बकेन्द्र ज्ञात कीजिए। यह भी बताइए कि इस त्रिभुज का लम्बकेन्द्र त्रिभुज के अन्तः क्षेत्र में स्थित है अथवा बाह्य क्षेत्र में।
रचना – सर्वप्रथम एक न्यूनकोण त्रिभुज ABC बनाया। त्रिभुज के शीर्ष A,B तथा C से शीर्षलम्बे खींचे, जो एक-दूसरे को बिन्दु 0 पर काटते हैं। अतः बिन्दु 0 त्रिभुज का लम्बकेन्द्र है, जो त्रिभुज के अन्तः क्षेत्र में स्थित है।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 30

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अभ्यास 5 (i)

प्रश्न 1.
समकोण त्रिभुज ABC में ∠B समकोण है। AB = 3 सेमी, BC=4 सेमी। इस त्रिभुज की रचना कर इसका केन्द्रक ज्ञात कीजिए।
रचना – सर्वप्रथम दी गई नाप के अनुसार एक समकोण त्रिभुज ABC FN बनाया। AB, BC तथा AC के मध्यबिन्दु क्रमशः F, D, E ज्ञात किए। त्रिभुज की माध्यिकाएँ AD, BE तथा CF खींची। तीनों माध्यिकाएँ एक-दूसरे को बिन्दु G पर काटती हैं। अतः बिन्दु G त्रिभुज का केन्द्रक है।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 31

प्रश्न 2.
एक त्रिभुज की माध्यिकाएँ क्रमशः 6 सेमी, 9 सेमी और 12 (UPBoardSolutions.com) सेमी लम्बी है। इस त्रिभुज के केन्द्रक द्वारा माध्यिकाओं के विभाजित भाग ज्ञात कीजिए।
रचना – त्रिभुज का माध्यिकाएँ AD = 6 सेमी, BE = 9 सेमी, CF = 12 सेमी हम जानते हैं कि त्रिभुज का केन्द्रक माध्यिकाओं को 2:1 के अनुपात में विभाजित करती है।
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अभ्यास 5 (j)

प्रश्न 1.
आकृति 5.50 में दो त्रिभुज ABC और PQR समरूप हैं। इनकी भुजाओं की लम्बाइयाँ सेमी में अंकित है।x और y ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 33
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 34

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प्रश्न 2.
यदि किसी त्रिभुज ABC और त्रिभुज PQR में उनकी (UPBoardSolutions.com) भुजाएँ क्रमशः AB = 3 सेमी, BC=5 सेमी, CA=4 सेमी तथा PQ=7 सेमी, PR=6 सेमी, QR=8 सेमी है, तो त्रिभुज समरूप हैं या नहीं?
हल :
दो त्रिभुज समरूप होंगे यदि,
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 35

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प्रश्न 3.
आकृति 5.51 में त्रिभुज ABC और त्रिभुज PQR समरूप हैं। त्रिभुज PQR की शेष भुजाओं को ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 36

प्रश्न 4.
त्रिभुज ABC में MN, BC के समान्तर ∆ABC के शेष (UPBoardSolutions.com) कोणों की माप बताइए। क्या त्रिभुज
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 37

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प्रश्न 5.
उपर्युक्त आकृति 5.53 में, यहि M तथा N क्रमशः AB (UPBoardSolutions.com) और AC भुजाओं के मध्य बिन्द हों, तो भुजा BC और MN का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल :
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 38

प्रश्न 6.
हो समान्तर रेखाखण्ड AB और CD खींचिए। A को D से और B को C से मिलाइए। मान लीजिए कि वे एक-दूसरे को बिन्दु 0 पर काटती हैं। क्या त्रिभुज OAB और त्रिभुज OCD समरूप होंगे?
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प्रश्न 7.
क्या आकृति 5.54 में ABC त्रिभुज और त्रिभुज PRQ समरूप हैं? (UPBoardSolutions.com) यदि हाँ, तो कारण बताइए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 40

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प्रश्न 8.
20 मी = 1 सेमी मानकर एक खेत का आकार आकृति 5.55 (UPBoardSolutions.com) में दर्शाया गया है। 40 मी = 1 सेमी मानकर खेत का नया आकार अपनी अभ्यास पुस्तिका पर दर्शाइए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 41
हल :
चित्र में पैमाना 20 मीटर = 1 सेमी मानकर खेत का आकार प्रदर्शित किया गया है। यदि पैमाना : 40 मीटर = 1 सेमी माना जाए तो खेत के नए आकार में 5 सेमी वाली भुजा 2.5 सेमी, 12 सेमी वाली भुजा 6 सेमी तथा 13 सेमी वाली भुजा 6.5 सेमी होगी। अत: खेत के नए आकार संगत भुजाएँ पहली भुजाओं की आधी होंगी।

अभ्यास 5 (k)

प्रश्न 1.
यदि किसी त्रिभुज ABC की भुजाओं में 4:4:5 का अनुपात हो, तो उनके समरूप एक त्रिभुज की रचना कीजिए। जिसका आधार 7 सेमी हो।।
हल :
दिया है- ∆ABC जिसकी भुजाओं में अनुपात 4:4:5 है।
रचना करनी है- ∆ABC के समरूप ∆PQR की।
1. A की भुजाओं में अनुपात 4:4:5 है। इस अनुपात में 2 (UPBoardSolutions.com) से गुणा करने पर क्रमश 8 सेमी, 8 सेमी तथा 10 सेमी होगी।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 42

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2. अब 6 सेमी, 8 सेमी तथा 10 सेमी की भुजाओं का APQR बनाया।
3. रेखाखण्ड PQ= 10 सेमी खींचा ∠A=∠P तथा ∠B=∠Q बनाती हुई रेखाएँ खींची जोकि एक दूसरे को बिन्दु R पर काटती है। यही APQRAABC को समरूप A है।

प्रश्न 2.
यदि किसी त्रिभुज ABCकी भुजाओं में 3:4:5 का अनुपात हो, (UPBoardSolutions.com) तो उनके समरूप एक त्रिभुज की रचना कीजिए। जिसका आधार 7 सेमी हो।
हल :
दिया है –
∆ABC जिसकी भुजाओं में अनुपात 3:4:5 है।
रचना करनी है – ∆ABC के समरूप ∆PQR की ।

  1. ∆ की भुजाओं में अनुपात 3:4:5 है। इस अनुपात में 2 से गुणा करने पर क्रमश 6 सेमी, 8 सेमी तथा 10 सेमी होगी।
    UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 43
  2. अब 6 सेमी, 8 सेमी तथा 10 सेमी की भुजाओं का ∆PQR बनाया।
  3. रेखाखण्ड PQ= 10 सेमी खींचा (UPBoardSolutions.com) ∠A = ∠P तथा ∠B = ∠Q बनाती हुई रेखाएँ खींची जोक एक दूसरे को बिन्दु R पर काटती है। यही ∆PQR ∆ABC को समरूप ∆ है।

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प्रश्न 3.
यदि किसी त्रिभुज ABC की भुजाओं में 2:4:5 को अनुपात हो तो, उनके समरूप एक त्रिभुज की रचना कीजिए। जिसको आधार 3 सेमी हो।।
हल :
दिया है –
∆ABC जिसकी भुजाओं में अनुपात 2:4:5 है।
रचना करनी है – ∆ABC के समरूप ∆PQR की

  1. A की भुजाओं में अनुपात 2:4:5 है। इस अनुपात में 2 से गुणा करने पर क्रमश 4 सेमी, 8 सेमी तथा 10 सेमी होगी।
    UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 44
  2. अब 4 सेमी, 8 सेमी तथा 10 सेमी की भुजाओं का ∆PQR बनाया।
  3. रेखाखण्ड PQ= 10 सेमी खींचा ∠A=∠P तथा ∠B=∠Q (UPBoardSolutions.com) बनाती हुई रेखाएँ खींची जोकि एक दुसरे को बिन्द R पर काटती है। यही ∆PQR ∆ABC का समरूप A है।

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दक्षता अभ्यास 5

प्रश्न 1.
समकोण त्रिभुज ABC में ∠B = 90°, AB = 6.0 सेमी, AC= 10 सेमी, तो BC की माप होगीः
(i) 6 सेमी
(ii) 10 सेमी
(iii) 8 सेमी
(iv) इनमें से कोई नहीं
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 45
हलः
BC2 = AC2 – AB2 = 102 – 62
100 – 36 = 64 = 82
BC = 8 सेमी (iii)

प्रश्न 2.
एक आयताकार मैदान की लम्बाई 24 मीटर, चौड़ाई A 24 m 10 मीटर है। इस आयताकार मैदान का विकर्ण होगा
(i) 26 मी
(ii) 29 मी
(iii) 20 मी
(iv) 24 मी
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 46
हलः
AD2 = AB2 + BD2 = 242 + 102
= 576 + 100 = 676 = 262
AD = 26 मी (i)

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प्रश्न 3.
एक सर्वेक्षक (Surveyor) बिन्दु A और B के बीच की दूरी (UPBoardSolutions.com) ज्ञात करना चाहता है किन्तु वह A से B तक सीधा नहीं पहुँच सकता, अतः वह चित्रानुसार एक समकोण त्रिभुज बनाता है जिसमें AC=21 मी, BC=35 मी, AB कितना लम्बा है?
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 47

प्रश्न 4.
बिन्दु A और B एक झील के विपरीत किनारे हैं। एक सर्वेक्षक A और B के बीच की दूरी ज्ञात करने के लिए आकृति 2.46 के अनुसार एक समकोण त्रिभुज ADC बनाता है। A से बिन्दु B के बीच की दूरी कितनी है, जबकि BC= 12 मीटर है।
हल :
समकोण त्रिभुज ADC में,
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 48

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प्रश्न 5.
एक सड़क के दोनों किनारों पर दो मकान आमने-सामने हैं। 50 मी लम्बी सीढ़ी का एक सिरा सड़क के एक ओर स्थित मकान की दीवार पर 48 मी ऊँचाई तक पहुँचता है तथा दूसरे किनारे वाले मकान की दीवार पर यह केवल 14 मी ऊँचाई (UPBoardSolutions.com) तक पहुँचता है। सड़क की चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
(संकेत : चित्रानुसार सड़क की चौड़ाई BD = BC + CD)
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 49

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प्रश्न 6.
उस त्रिभुज का नाम बताइए जिसके परिकेन्द्र और अन्तः बिन्दु एक ही होते हैं।
हल :
समबाहु त्रिभुज में परिकेन्द्र और अन्तः केन्द्र एक ही होते हैं।

प्रश्न 7.
3,4,5 पाइथागोरियन त्रिक है। दिखाइए कि 15, 20, 25 भी पाइथागोरियन त्रिक है।
हल :
(25)2 = (15)2 + (20)2
25 × 25 = 15 × 15 + 20 × 20
625 = 225 + 400
या 625 = 625
अतः 15, 20, 25 भी पाइथागोरियन त्रिक है।

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प्रश्न 8.
एक त्रिभुज ABC की रचना कीजिए, जिसका आधार 7 सेमी, ∠ B= 60° तथा दो भुजाओं का योग 9 सेमी है।
हल :

  1. सर्वप्रथम रेखाखण्ड BC=7सेमी खींचा।
  2. बिन्दु B पर परकार व पटरी की सहायता से 60°का कोण बनाती हुई , रेखा BY खींची।
  3. BY से दो भुजाओं को योग (AB+AC=9cm) का (UPBoardSolutions.com) रेखाखण्ड BD खींचा। D को C से मिलाया।
  4. DCका लम्बअर्द्धक खींचा जो रेखाखण्ड BD को A पर काटता है। A से C को मिलाया।
  5. ∆ABC अभीष्ट त्रिभुज है।
    UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 50

प्रश्न 9.
एक ∆ABCकी रचना कीजिए, जिसका एक कोण 120° तथा दो भुजाएँ क्रमशः 5 सेमी तथा 6 सेमी है, तो त्रिभुज का परिकेन्द्र ज्ञात करें।
हल :

  1. सर्वप्रथम रेखाखण्ड BC=6 सेमी खींचा।
  2. परकार तथा पटरी की सहायता से बिन्दु B पर 120°का कोण बनाती हुई रेखा BYखींची।
  3. रेखा BY से रेखाखण्ड AB=5 सेमी खीचा बिन्दु A से C को मिलाया।
    UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 51
  4. रेखाखण्ड AB तथा BC तथा CA का लम्ब अर्द्धक खींचें जो एक दूसरे को ∆ABC के बाह्य बिन्दु O पर मिलते हैं। अतः बिन्दु 0, ∆ABC को परिकेन्द्र है।

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प्रश्न 10.
समबाहु त्रिभुज की रचना कीजिए, जिसकी भुजा 6 सेमी हो, तो त्रिभुज का केन्द्रक तथा शीर्ष से केन्द्रक तक की दूरी ज्ञात करें।
हल :

  1. सर्वप्रथम रेखाखण्ड BC=6 सेमी खींचा।
  2. बिन्दु B और C को केन्द्र मानकर 6 सेमी त्रिज्या लेकर चाप लगाये जो एक दूसरे को A पर काटते हैं।
  3. A से B और C को मिलाया है। अत: ∆ABC अभीष्ट समबाहु A है।
  4. ∆ABC के कोण ∠A, ∠B तथा ∠C का समद्विभाजक करते हैं जो कि एक दूसरे को A के केन्द्रक O पर मिलते हैं।
  5. अत: OA = OB = OC = 3.5 सेमी
    UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 52

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प्रश्न 11.
एक त्रिभुज PQR की भुजाओं में 4:5:6 का अनुपात है। इस त्रिभुज के समरूप एक त्रिभुज ABC की रचना कीजिए। जिसको आधार 8 सेमी हो।
हल :
दिया है –
∆PQR जिसकी भुजाओं में अनुपात 4:5:6 है।
रचना करनी है – ∆PQR के समरूप ∆ABC की Q
(UPBoardSolutions.com)
रचना –

  1. A की भुजाओं में अनुपात 4:5:6 है। इस अनुपात में 2 से गुणा करने पर क्रमश 8 सेमी, 10 सेमी तथा 12 सेमी होगी।
  2. अब 8 सेमी, 10 सेमी तथा 12 सेमी की भुजाओं का ∆ABC बनाया। C
    UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 53
  3. रेखाखण्ड AB = 10 सेमी खींचा ∠P =∠A तथा ∠Q=∠B बनाती हुई रेखाएँ खींची जो कि एक दूसरे को बिन्दु C पर काटती है। यही ∆ABC, ∆PQR का समरूप है।

एम०एस०ई० प्रश्न

प्रश्न 12.
किसी त्रिभुज के तल पर स्थित बिन्दु जो त्रिभुज की भुजाओं के बराबर लम्बवत दूरी पर है, वह बिन्दु त्रिभुज का
(i) अन्तः केन्द्र होता है।
(ii) परिकेन्द्र होता है।
(iii) लम्बकेन्द्र होता है।
(iv) केन्द्रक होता है।
उत्तर :
(i) अन्त:केन्द्र होता है।
(UPBoardSolutions.com)

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प्रश्न 13. संलग्न चित्र में DEF का क्षेत्रफल होगा D, E, F भुजाओं के मध्य बिन्दु हैं।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 5 त्रिभुज 54

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UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 2 Biological Classification 

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 2 Biological Classification (जीव जगत का वर्गीकरण)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Biology . Here we  given UP Board Solutions for Class 11 Biology chapter 2 Biological Classification

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वर्गीकरण की पद्धतियों में समय के साथ आए परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
वर्गीकरण पद्धति (classification system) जीवों को उनके लक्षणों की समानता और असमानता के आधार पर समूह तथा उपसमूहों में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया है। प्रारम्भिक पद्धतियाँ कृत्रिम थीं। उसके पश्चात् प्राकृतिक तथा जातिवृतीय वर्गीकरण पद्धतियों का विकास हुआ।

1. कृत्रिम वर्गीकरण पद्धति (Artificial Classification System) :
इस प्रकार के वर्गीकरण में वर्षी लक्षणों (vegetative characters) या पुमंग (androecium) के आधार पर पुष्पी पौधों का वर्गीकरण किया गया है। कैरोलस लीनियस (Carolus Linnaeus) ने पुमंग के आधार पर वर्गीकरण प्रस्तुत किया था। परन्तु, कृत्रिम (UPBoardSolutions.com) लक्षणों के आधार पर किए गए वर्गीकरण में जिन पौधों के समान लक्षण थे उन्हें अलग-अलग तथा जिनके लक्षण असमान थे उन्हें एक ही समूह में रखा गया था। यह वर्गीकरण की दृष्टि से सही नहीं था।ये वर्गीकरण आजकल प्रयोग नहीं होते।

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2. प्राकृतिक वर्गीकरण पद्धति (Natural Classification System) :
प्राकृतिक वर्गीकरण पद्धति में पौधों के सम्पूर्ण प्राकृतिक लक्षणों को ध्यान में रखकर उनका वर्गीकरण किया जाता है। पौधों की समानता निश्चित करने के लिए उनके सभी लक्षणों—विशेषतया पुष्प के लक्षणों का अध्ययन किया जाता है। इसके अतिरिक्त पौधों की आंतरिक संरचना, जैसे शारीरिकी. भ्रौणिकी एवं फाइटोकेमेस्ट्री (phytochemistry) आदि को भी वर्गीकरण करने में सहायक माना जाता है। आवृतबीजियों का प्राकृतिक लक्षणों पर आधारित वर्गीकरण जॉर्ज बेन्थम (George Bentham) तथा जोसेफ डाल्टन हूकर (Joseph Dalton Hooker) द्वारा सम्मिलित रूप में प्रस्तुत किया गया जिसे उन्होंने जेनेरा प्लेंटेरम (Generg Plantarum) नामक पुस्तक में प्रकाशित किया। यह वर्गीकरण प्रायोगिक (practical) कार्यों के लिए अत्यन्त सुगम तथा प्रचलित वर्गीकरण है।

3. जातिवृत्तीय वर्गीकरण पद्धति (Phylogenetic Classification System) :
इस प्रकार के वर्गीकरण में पौधों को उनके विकास और आनुवंशिक लक्षणों को ध्यान में रखकर वर्गीकृत किया गया है। विभिन्न कुलों एवं वर्गों को इस प्रकार व्यवस्थित किया गया है जिससे उनके वंशानुक्रम का ज्ञान हो। इस प्रकार के वर्गीकरण में यह माना जाता है कि एक प्रकार (UPBoardSolutions.com) के टैक्सा (taxa) का विकास एक ही पूर्वजों (ancestors) से हुआ है। वर्तमान में हम अन्य स्रोतों से प्राप्त सूचना को वर्गीकरण की समस्याओं को सुलझाने में प्रयुक्त करते हैं। जैसे कम्प्यूटर द्वारा अंक और कोड का प्रयोग, क्रोमोसोम्स का आधारे, रासायनिक अवयवों का भी उपयोग पादप वर्गीकरण के लिए किया गया है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित के बारे में आर्थिक दृष्टि से दो महत्वपूर्ण उपयोगों को लिखिए 
(a) परपोषी बैक्टीरिया
(b) आद्य बैक्टीरिया
उत्तर :

(a) परपोषी बैक्टीरिया (Heterotrophic Bacteria) :
परपोषी बैक्टीरिया का उपयोग दूध से दही बनाने, प्रतिजीवी (antibiotic) उत्पादन में तथा लेग्युमीनेसी कुल के पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण (nitrogen fixation) में किया जाता है।

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(b) आद्य बैक्टीरिया (Archaebacteria) :
आद्य बैक्टीरिया का उपयोग गोबर गैस (biogas) निर्माण तथा खानों (mines) में किया जाता है।

प्रश्न 3.
डाइएटम की कोशिका भित्ति के क्या लक्षण हैं?
उत्तर :
डाइएटम की कोशिका भित्ति में सिलिका (silica) पाई जाती है। कोशिका भित्ति दो भागों में विभाजित होती है। ऊपर की एपिथीका (epitheca) तथा नीचे की हाइपोथीका (hypotheca)। दोनों साबुनदानी की तरह लगे होते हैं। डाइएटम की कोशिका भित्तियाँ (UPBoardSolutions.com) एकत्र होकर डाइएटोमेसियस अर्थ (diatomaceous earth) बनाती हैं।

प्रश्न 4.
शैवाल पुष्पन (algal bloom) तथा ‘लाल तरंगें (red tides) क्या दर्शाती हैं?
उत्तर :
शैवालों की प्रदूषित जल में अत्यधिक वृद्धि शैवाल पुष्पन (algal bloom) कहलाती है। यह मुख्य रूप से नीली-हरी शैवाल द्वारा होती है। डायनोफ्लैजीलेट्स जैसे गोनेयूलैक्स के तीव्र गुणन से समुद्र के जल का लाल होना लाल तरंगें (red tide) कहलाता है।

प्रश्न 5.
वाइरस से वाइरॉयड कैसे भिन्न होते हैं?
उत्तर :
वाइरस तथा वाइरॉयड में निम्नलिखित अन्तर पाए जाते हैं
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 2 Biological Classification image 1

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प्रश्न 6.
प्रोटोजोआ के चार प्रमुख समूहों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :

प्रोटोजोआ जन्तु

ये जगत प्रोटिस्टा (protista) के अन्तर्गत आने वाले यूकैरियोटिक, सूक्ष्मदर्शीय, परपोषी सरलतम जन्तु हैं। ये एककोशिकीय होते हैं। कोशिका में समस्त जैविक क्रियाएँ सम्पन्न होती हैं। ये परपोषी होते हैं। कुछ प्रोटोजोआ परजीवी होते हैं। इन्हें चार प्रमुख समूहों में बाँटा जाता है

(क) अमीबीय प्रोटोजोआ (Amoebic Protozoa) :
ये स्वच्छ जलीय या समुद्री होते हैं। कुछ नम मृदा में भी पाए जाते हैं। समुद्री प्रकार के अमीबीय प्रोटोजोआ की सतह पर सिलिका का कवच होता है। ये कूटपाद (pseudopodia) की सहायता से प्रचलन तथा पोषण करते हैं। एण्टअमीबा जैसे कुछ अमीबीय प्रोटोजोआ (UPBoardSolutions.com) परजीवी होते हैं। मनुष्य में एण्टअमीबा हिस्टोलाइटिका के कारण अमीबीय पेचिश रोग होता है।

(ख) कशाभी प्रोटोजोआ (Flagellate Protozoa) :
इस समूह के सदस्य स्वतन्त्र अथवा परजीवी होते हैं। इनके शरीर पर रक्षात्मक आवरण पेलिकल होता है। प्रचलन तथा पोषण में कशाभ (flagella) सहायक होता है। ट्रिपैनोसोमा (Trypanosoma) परजीवी से निद्रा रोग, लीशमानिया से कालाअजार रोग होता है।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 2 Biological Classification image 2

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(ग) पक्ष्माभी प्रोटोजोआ (Ciliate Protozoa) :
इस समूह के सदस्य जलीय होते हैं एवं इनमें अत्यधिक पक्ष्माभ पाए जाते हैं। शरीर दृढ़ पेलिकल (UPBoardSolutions.com) से घिरा होता है। इनमें स्थायी कोशिकामुख (cytostome) व कोशिकागुद (cytopyge) पाई जाती हैं। पक्ष्माभों में लयबद्ध गति के कारण भोजन कोशिकामुख में पहुँचता है।

उदाहरण :

पैरामीशियम (Paramecium)

(घ) स्पोरोजोआ प्रोटोजोआ (Sporozoans) :
ये अन्त: परजीवी होते हैं। इनमें प्रचलनांग का अभाव होता है। कोशिका पर पेलिकल का आवरण होता है। इनके जीवन चक्र में संक्रमण करने योग्य बीजाणुओं का निर्माण होता है। मलेरिया परजीवी-प्लाज्मोडियम (Plasmodium) के कारण कुछ दशक पूर्व होने वाले मलेरिया रोग से मानव आबादी पर कुप्रभाव पड़ता था।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 2 Biological Classification image 3

प्रश्न 7
पादप स्वपोषी हैं। क्या आप ऐसे कुछ पादपों को बता सकते हैं जो आंशिक रूप से परपोषित हैं
उत्तर :
कीटभक्षी पौधे (insectivorous plants) जैसे-यूट्रीकुलेरिया (Utricularia), ड्रोसेरा (Drosera), (UPBoardSolutions.com) नेपेन्थीस (Nepenthes) आदि आंशिक परपोषी (partially heterotrophic) हैं। ये पौधे हरे तथा स्वपोषी हैं परन्तु नाइट्रोजन के लिए कीटों (insects) पर निर्भर रहते हैं।

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प्रश्न 8.
शैवालांश (phycobiont) तथा कवकांश (mycobionts) शब्दों से क्या पता लगता है?
उत्तर :
लाइकेन (lichen) में शैवाल व कवक सहजीवी रूप में रहते हैं। इसमें शैवाल वाले भाग को शैवालांश (phycobiont) तथा कवक वाले भाग को कवकांश (mycobiont) कहते हैं। शैवालांश भोजन निर्माण करता है जबकि कवकांश सुरक्षा एवं जनन में सहायता करता है।

प्रश्न 9.
कवक (Fungi) जगत के वर्गों का तुलनात्मक विवरण निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत कीजिए
(a) पोषण की विधि
(b) जनन की विधि
उत्तर :

(a) पोषण की विधि
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(b) जनन की विधि
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 2 Biological Classification image 5

प्रश्न 10.
यूग्लीनॉइड के विशिष्ट चारित्रिक लक्षण कौन-कौन से हैं?
उत्तर :
यूग्लीनॉइड के चारित्रिक लक्षण

  1. अधिकांश स्वच्छ, स्थिर जल (stagnant fresh water) में पाए जाते हैं।
  2. इनमें कोशिका भित्ति का अभाव होता है।
  3. कोशिका भित्ति के स्थान पर रक्षात्मक प्रोटीनयुक्त लचीला आवरण पेलिकल (pellicle) पाया जाता है।
  4.  इनमें 2 कशाभ (flagella) होते हैं, एक छोटा तथा दूसरा बड़ा कशाभ।
  5.  इनमें क्लोरोप्लास्ट पाया जाता है।
  6. सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ये प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा भोजन निर्माण कर लेते हैं (UPBoardSolutions.com) और प्रकाश के अभाव में जन्तुओं की भॉति सूक्ष्मजीवों का भक्षण करते हैं अर्थात् परपोषी की तरह व्यवहार करते हैं।

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उदाहरण :
युग्लीना (Euglena)

प्रश्न 11.
संरचना तथा आनुवंशिक पदार्थ की प्रकृति के सन्दर्भ में वाइरस का संक्षिप्त विवरण दीजिए। वाइरस से होने वाले चार रोगों के नाम भी लिखिए।
उत्तर :
वाइरस दो प्रकार के पदार्थों के बने होते हैं :
प्रोटीन (protein) और न्यूक्लिक एसिड (nucleic acid)। प्रोटीन का खोल (shel), जो न्यूक्लिक एसिड के चारों ओर रहता है, उसे कैप्सिड (capsid) कहते हैं। प्रत्येक कैप्सिड छोटी-छोटी इकाइयों का बना होता है, जिन्हें कैप्सोमियर्स (capsomeres) कहा जाता है। ये कैप्सोमियर्स न्यूक्लिक एसिड कोर के चारों ओर एक जिओमेट्रिकल फैशन (geometrical fashion) में होते हैं। न्यूक्लिक एसिड या तो RNA या DNA के रूप में होता है। पौधों तथा कुछ जन्तुओं के वाइरस का न्यूक्लिक एसिड RNA (ribonucleic acid) होता है, जबकि अन्य जन्तु वाइरसों में यह DNA (deoxyribonucleic acid) के रूप में होता है। वाइरस का संक्रमण करने वाला भाग आनुवंशिक पदार्थ (genetic material) है। वाइरस आनुवंशिक पदार्थ निम्न प्रकार का हो सकता है

  1.  द्विरज्जुकीय DNA (double stranded DNA); जैसे – T,, T,, बैक्टीरियोफेज, हरपिस वाइरस, हिपेटाइटिस -B
  2. एक रज्जुकीय DNA (single stranded DNA) जैसे – कोलीफेज ф x 174
  3. द्विरज्जुकीय RNA (double stranded RNA) जैसे -रियोवाइरस, ट्यूमर वाइरस
  4. एक रज्जुकीय RNA (single stranded RNA) जैसे – TMV, खुरपका-मुँहपका वाइरस पोलियो वाइरस, (UPBoardSolutions.com) रिट्रोवाइरस। वाइरस से होने वाले रोग एड्स (AIDS), सार्स, (SARS), बर्ड फ्लू, डेंगू, पोटेटो मोजेक।

प्रश्न 12.
अपनी कक्षा में इस शीर्षक “क्या वाइरस सजीव हैं अथवा निर्जीव’, पर चर्चा करें।
उत्तर :
वाइरस (Virus) :
इनकी खोज सर्वप्रथम इवानोवस्की (Iwanovsky, 1892), ने की थी। ये प्रूफ फिल्टर से भी छन जाते हैं। एमडब्ल्यू० बीजेरिन्क (M.W. Beijerinck, 1898) ने पाया कि संक्रमित (रोगग्रस्त) पौधे के रस को स्वस्थ पौधो की पत्तियों पर रगड़ने से स्वस्थ पौधे भी रोगग्रस्त हो जाते हैं। इसी आधार पर इन्हें तरल विष या संक्रामक जीवित तरल कहा गया। डब्ल्यू०एम० स्टैनले (W.M. Stanley, 1935) ने वाइरस को क्रिस्टलीय अवस्था में अलग किया। डालिंगटन (Darlington, 1944) ने खोज की कि वाइरस न्यूक्लियोप्रोटीन्स से बने होते हैं। वाइरस को सजीव तथा निर्जीव के मध्य की कड़ी (connecting link) मानते हैं।

वाइरस के सजीव लक्षण

  1. वाइरस प्रोटीन तथा न्यूक्लिक अम्ल (DNA या RNA) से बने होते हैं।
  2. जीवित कोशिका के सम्पर्क में आने पर ये सक्रिय हो जाते हैं। वाइरस का न्यूक्लिक अम्ल पोषक कोशिका में पहुँचकर कोशिका की उपापचयी क्रियाओं पर नियन्त्रण स्थापित करके स्वद्विगुणन करने लगता है और अपने लिए आवश्यक प्रोटीन का संश्लेषण भी कर लेता है। इसके (UPBoardSolutions.com) फलस्वरूप विषाणु की संख्या की वृद्धि अर्थात् जनन होता है।
  3.  वाइरस में प्रवर्धन केवल जीवित कोशिकाओं में ही होता है।
  4.  इनमें उत्परिवर्तन (mutation) के कारण आनुवंशिक विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।
  5. वाइरस ताप, रासायनिक पदार्थ, विकिरण तथा अन्य उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया दर्शाते हैं।

वाइरस के निर्जीव लक्षण

  1. इनमें एन्जाइम्स के अभाव में कोई उपापचयी क्रिया स्वतन्त्र रूप से नहीं होती।
  2. वाइरस केवल जीवित कोशिकाओं में पहुँचकर ही सक्रिय होते हैं। जीवित कोशिका के बाहर ये निर्जीव रहते हैं।
  3. वाइरस में कोशा अंगक तथा दोनों प्रकार के न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA) नहीं पाए जाते।
  4. वाइरस को रवों (crystals) के रूप में निर्जीवों की भाँति सुरक्षित रखा जा सकता है। रवे (crystal) की अवस्था में भी इनकी संक्रमण शक्ति कम नहीं होती।

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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
द्विनाम पद्धति को किसने प्रतिपादित किया था?
(क) जॉन रे
(ख) मंडल
(ग) लीनियस
(घ) बेन्थम तथा हुकर
उत्तर :
(ग) लीनियस

प्रश्न 2.
मोनेरा जगत का सदस्य है
(क) बैक्टीरिया
(ख) अमीबा
(ग) हाइड्रा
(घ) केंचुआ
उत्तर :
(क) बैक्टीरिया

प्रश्न 3.
जीवाणुओं में नहीं होता है
(क) कोशिका भित्ति
(ख) राइबोसोम
(ग) माइटोकॉण्ड्रिया
(घ) जीवद्रव्य
उत्तर :
(ग) माइटोकॉण्ड्रिया

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प्रश्न 4.
दलहनी पौधों की जड़ों की ग्रन्थियों में पाए जाने वाले जीवाणु का नाम लिखिए जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण में भाग लेता है
(क) क्लॉस्ट्रिडियम
(ख) ऐजोटोबैक्टर
(ग) राइजोबियम लेग्युमिनोसेरम
(घ) क्लोरोबियम
उत्तर :
(ग) राइजोबियम लेग्युमिनोसेरम

प्रश्न 5.
प्रोटिस्टा जगत के प्राणी होते हैं
(क) पूर्वकेन्द्रकीय एककोशीय
(ख) सुकेन्द्रकीय बहुकोशीय
(ग) पूर्वकेन्द्रकीय बहुकोशीय
(घ) सुकेन्द्रकीय एककोशीय
उत्तर :
(घ) सुकेन्द्रकीय एककोशीय

प्रश्न 6.
प्रोटोजोआ के उस वर्ग का क्या नाम है जिसमें अमीबा आता है?
(क) मैस्टिगोफोरा
(ख) ओपेलाइनेटा
(ग) राइजोपोडा
(घ) सीलिएटा
उत्तर :
(ग) राइजोपोडा

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन खाद्य कवक है?
(क) म्यूकर
(ख) मॉर्केला
(ग) पक्सिनिया
(घ) अस्टिलेगो
उत्तर :
(ख) मॉर्केला

प्रश्न 8.
गेहूँ के कीट रोग का कारक जीव है
(क) पक्सीनिया
(ख) आल्टरनेरिया
(ग) म्यूकर
(घ) अस्टिलैगो
उत्तर :
(क) पक्सीनिया

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प्रश्न 9.
मानव में कवकों द्वारा उत्पन्नं एक सामान्य व्याधि है
(क) कॉलेरा
(ख) टायफॉइड
(ग) टिटेनस
(घ) रिंगवर्म
उत्तर :
(घ) रिंगवर्म

प्रश्न 10.
पेनिसिलिन प्राप्त होता है
(क) पेनिसिलियम नोटेटम से
(ख) पेनिसिलियम ट्रायसोजिनक से
(ग) इन दोनों से
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) इन दोनों से

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
द्विपद नाम पद्धति क्या है? आधुनिक वर्गीकरण के जनक का नाम बताइए।
उत्तर :
नामकरण की वह पद्धति जिसमें नाम का प्रथम पद वंश (genus) तथा द्वितीय पद जाति (species) को निर्दिष्ट करता है, द्विपद नाम पद्धति कहलाती है। आधुनिक वर्गीकरण अर्थात् द्विपद नाम पद्धति के जनक का नाम कैरोलस लीनियस है।

प्रश्न 2.
मोनेरा एवं प्रोटिस्टा का उदाहरण सहित एक प्रमुख लक्षण लिखिए।
उत्तर :
मोनेरा के जीवधारियों में केन्द्रक के स्थान पर कोशिका में केन्द्रकाभ पाया (UPBoardSolutions.com) जाता है, जिसे वलयाकार डी०एन०ए० कहते हैं।

उदाहरणार्थ :
जीवाणु, सायनोबैक्टीरिया, आर्किबैक्टीरिया इत्यादि। प्रोटिस्टा के जीवधारियों में कोशिका का वास्तविक केन्द्रक पूर्ण विकसित होता है। उदाहरणार्थअमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना इत्यादि।

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प्रश्न 3.
जगत प्रोटिस्टा के दो लक्षण तथा दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर :

लक्षण :

  1. इसके अन्तर्गत सभी एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव आते हैं तथा
  2. ये प्रायः जलीय जीव होते हैं

उदाहरण :

  1. अमीबा
  2. पैरामीशियम

प्रश्न 4.
कण्डुआ (smut) रोग उत्पन्न करने वाले एक फफूद (कवक) का नाम लिखिए।
उत्तर :
अस्टिलैगो (Ustilago) नामक परजीवी कवक की अनेक जातियाँ विभिन्न अनाजों के पौधों पर कण्डुआ (smut) रोग उत्पन्न करती हैं;जैसे-अस्टिलैगो न्यूडा (Ustilogo nuda) गेहूं में श्लथ कण्ड (loose smut) उत्पन्न करता है।

प्रश्न 5.
उस कवक का नाम लिखिए जिससे पेनिसिलिन प्राप्त होती है।
उत्तर :
पेनिसिलिन (penicillin) पेनिसिलियम (Penicillium) की जातियों; जैसे- पे० नोटेटम (UPBoardSolutions.com) (P, notatum), पे० क्राइसोजीनम, (P, chrysogenum) आदि से प्राप्त होती है।

प्रश्न 6.
उस कवक का वानस्पतिक नाम लिखिए जिसमें आभासीय कवकजाल पाया जाता है।
उत्तर :
बेटेकोस्पर्मम (Batruchospermum)

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प्रश्न 7.
बेकरी उद्योग में जिस कवक का प्रयोग किया जाता है उसका वानस्पतिक नाम लिखिए।
उत्तर :

यीस्ट :
कैरोमाइसीज सेरेविसी (Saccharomyces cerevisiae)

प्रश्न 8.
पेनिसिलिन की खोज करने वाले वैज्ञानिक का नाम लिखिए।
उत्तर :
पेनिसिलिन एन्टीबायोटिक की खोज एलेक्जेन्डर फ्लेमिंग (Alexander Fleming) ने 1928 में की थी

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जन्तु जगत तथा पादप जगत के प्रमुख लक्षण बताइए। या जन्तुओं को परिभाषित करने वाले किन्हीं चार लक्षणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :

जन्तु जगत के मुख्य लक्षण

  1. कोशिका भित्ति (cell wall) तथा केन्द्रीय रिक्तिका (central vacuole) का अभाव।
  2. जन्तु समभोजी पोषण (holozoic nutrition)।
  3. उत्सर्जी अंग, संवेदी अंग तथा तंत्रिका तंत्र की उपस्थिति।
  4. प्रकाश संश्लेषण व पर्णहरिम का अभाव।
  5.  तारककाय (centrosome) तथा लाइसोसोम की उपस्थिति।

पादप जगत के मुख्य लक्षण

  1. कोशिका भित्ति (cell wall) की उपस्थिति।
  2. कोशिका में केन्द्रीय रिक्तिका (central vacuole) की उपस्थिति।
  3. कोशिका में अकार्बनिक लवणों (inorganic salts) की उपस्थिति।
  4. उत्सर्जी अंग (excretory organs), संवेदी अंग (UPBoardSolutions.com) (sense organs) तथा तंत्रिका तंत्र (nervousystem) की अनुपस्थिति।
  5. प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) द्वारा भोजन निर्माण की क्षमता तथा पर्णहरिम | (chlorophyll) की उपस्थिति।

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प्रश्न 2.
पाँच जगत वर्गीकरण की विशेषता बताइए। या जीवन के पाँच जगत का नाम एवं इस वर्गीकरण का आधार लिखिए।
उत्तर :

  1. जगत–मोनेरा
  2. जगत–प्रोटिस्टा
  3.  जगत-कवक
  4.  जगत-पादप
  5.  जगत-जन्तु

पाँच जगत वर्गीकरण की विशेषताएँ निम्नवत् हैं

  1.  इस वर्गीकरण में प्रोकैरियोट को पृथक् कर मोनेरा जगत बनाया गया। प्रोकैरियोट संरचना, कायिकी तथा प्रजनन आदि में यूकैरियोट से भिन्न होते हैं।
  2. एककोशिक यूकैरियोट को बहुकोशिक यूकैरियोट से पृथक् कर प्रोटिस्टा जगत में स्थान दिया गया।
  3. कवक को पादपों से अलग करके एक कवक जगत बनाया गया। (UPBoardSolutions.com) ये विषमपोषी होते हैं तथा भोजन अवशोषण से ग्रहण करते हैं।
  4. प्रकाश संश्लेषी बहुकोशिक जीवों (पौधों) को अप्रकाश संश्लेषी, बहुकोशिक जीवों (जन्तु) से पृथक् कर दिया गया।
  5. जैव संगठन की जटिलता, पोषण विधियों तथा जीवन शैली के आधार पर बनाया गया यह वर्गीकरण विकास के क्रम को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 3.
यीस्ट कोशिका का एक नामांकित चित्र बनाइए तथा यीस्ट की महत्त्वपूर्ण क्रियाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :

यीस्ट कोशिका
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 2 Biological Classification image 6

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यीस्ट की महत्त्वपूर्ण क्रियाएँ

यीस्ट कोशिकाओं की कुछ महत्त्वपूर्ण क्रियाएँ निम्न प्रकार हैं।
लाभदायक क्रियाएँ

1. बेकरी उद्योग में (In Baking Industry) :
यीस्ट का उपयोग डलबरोटी बनाने में किया जाता है। गीले मैदे में यीस्ट कोशिकाएँ मिलाकर किण्वीकरण (fermentation) की क्रिया कराई जाती है। यीस्ट मण्ड (starch) को शर्करा में तथा शर्करा को जाइमेस विकर (2ymase enzyme) की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) व एथिल ऐल्कोहॉल (C2HSOH) में परिवर्तित कर देती है। कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) छोटे-छोटे उभारों के रूप में बाहर निकलती है। इस मैदे को डबलरोटी के साँचों में भरकर गर्म भट्टी में रख देते हैं जिससे डबलरोटी फूल जाती है तथा सरन्ध्र (porous) हो जाती है।

2. औषधियों में (In Medicines) :
यीस्ट को विटामिन (B1, B12 व C) के साथ मिलाकर  गोलियाँ (tablets) बनाई जाती हैं। ये गोलियाँ पेट के रोगों में काम आती हैं।

3. खाद्य रूप में (As Food) :
क्योंकि यीस्ट में बहुत से प्रोटीन, विटामिन व विकर (enzymes) होते हैं। (UPBoardSolutions.com) इनकी गोलियाँ बनाकर भोजन के रूप में प्रयोग में लाई जाती हैं।

4. शराब उद्योग में (In Alcohol Industry) :
यीस्ट कोशिकाएँ किण्वीकरण (fermentation) द्वारा शर्करा के घोल को शराब में परिवर्तित करती हैं। इस क्रिया में यीस्ट द्वारा उत्पन्न इन्वटेंस व जाइमेस एन्जाइम्स भाग लेते हैं। कुछ यीस्ट शर्करा घोल के ऊपर तैरती रहती हैं इन्हें टॉप यीस्ट (top yeast) कहते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ दूसरी यीस्ट जो शराब बनाने में प्रयोग की जाती हैं घोल के नीचे की ओर रहती हैं। इन्हें बॉटम यीस्ट (bottom yeast) कहते हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 2 Biological Classification image 7

हानिकारक क्रियाएँ

  1. यीस्ट के द्वारा बहुत से भोज्य-पदार्थ, उदाहरण-फल व पनीर, आदि नष्ट हो जाते हैं।
  2. यीस्ट की कुछ जातियाँ मनुष्य में कुछ बीमारियाँ उत्पन्न कर देती हैं तथा इनका प्रभाव त्वचा, फेफड़ों, इत्यादि पर भी पड़ता है। क्रिप्टोकोकस नियाफोरमेन्स (Cryptococcus neoformans) मस्तिष्क के रोग उत्पन्न करता है जिसे क्रिप्टोकोकस मेनिनजाइटिस (UPBoardSolutions.com) (Cryptococcus meningitis) कहते हैं। ये त्वचा, फेफड़ों, नाखूनों का रोग भी फैलाते हैं जिसे मोनिलिएसिस (moniliasis) कहते हैं।
  3. यीस्ट की कुछ जातियाँ पौधों में रोग फैलाती हैं (टमाटर, कपास, इत्यादि में)।
  4. यीस्ट सिल्क उद्योग में काम आने वाले कीड़ों को हानि पहुँचाता है।

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प्रश्न 4.
लाइकेन्स क्या हैं? इनके आर्थिक महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर :

लाइकेन्स

लाइकेन एक जटिल व द्विप्रकृति (dual nature) वाले पौधों का विशेष वर्ग है जिनकी शरीर रचना में दो भिन्न पौधे एक शैवाल (alga) तथा एक कवक (fungus) भाग लेते हैं। इसमें शैवाल को शैवालांश (phycobiont) तथा कवक को कवकांश (mycobiont) कहते हैं। लाइकेन में पोषण, शैवाल के समान तथा जनन, कवक के समान होता है। लाइकेन में शैवाल सहभागी या शैवालांश अपनी प्रकाश-संश्लेषण योग्यता द्वारा अपने साथी कवक सहभागी (कवकांश) के लिए भोजन निर्माण करता है। कवक के तन्तुओं का जाल वर्षा के जल को स्पंज की भाँति अवशोषित करके शैवालांश (phycobiont) को जल की पूर्ति कर सहायता करता है। (UPBoardSolutions.com) यही नहीं कवक सहभागी अपने नाइट्रोजनयुक्त (nitrogenous) अवशेष एवं श्वसन द्वारा मुक्त कार्बन डाइऑक्साइड (CO, ) को अपने शैवालीय सहभागी या शैवालांश (phycobiont) को प्रकाश-संश्लेषण एवं भोजन निर्माण हेतु प्रदान करता है। इस प्रकर लाइकेन (शैवाक), शैवाल व कवक सहजीवन (Symbiosis) का अति उत्तम उदाहरण प्रस्तुत करते हैं जिसमें दोनों ही सहजीवी एक-दूसरे को लाभ पहुंचाते हैं।

लाइकेनों का आर्थिक महत्त्व

1. भोजन व चारे के रूप में (As food and fodder) :
लाइकेन्स में पॉलिसैकेराइड्स, कुछ एन्जाइम्स तथा विटामिन्स पाये जाते हैं। अतः इनकी अनेक जातियों को भोजन व पशुओं के चारे के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। भारत में पार्मेलिया (Parmelia) को करी पाउडर (curry powder) के रूप में प्रयोग किया जाता है। इजराइल में लेकानोरा (Lecanora) खाया जाता है। एवर्निआ (Evernig) को मिस्रवासी, डबलरोटी बनाने में प्रयुक्त करते हैं। आर्कटिक भागों में रेइन्डियर मॉस (Reindeer moss = Cladonia rangifering) को रेइन्डियर व अन्य चौपाए खाते हैं। इनके अतिरिक्त विभिन्न लाइकेन्स का कीट व लार्वी भी भक्षण करते हैं।

2. स्त्र व सौन्दर्य प्रसाधनों में (In perfumes and cosmetics) :
लाइकेन के थैलाई में तीव्र  गन्ध वाले पदार्थ होते हैं, अतः इनका उपयोग इत्र व अन्य सुगन्धित द्रव्य बनाने में किया जाता है। एवर्निआ
(Evermia) तथा रामालिना (Ramalina) से प्राप्त सुगन्धित तेल का उपयोग साबुन बनाने में किया जाता है।

3. टेनिंग व रंग बनाने में (In tanning and dyeing) :
रोक्सेला (Roccella) तथा लेकानोरा (Lecanora) लाइकेन्स से ऑर्चिल (orchill) नामक नीला रंग (blue dye) प्राप्त होता है। रोक्सेला से लिटमस (litmus) निकाला जाता है जिसका प्रयोग अम्लीयता के परीक्षण में किया जाता है।

4. ऐल्कोहॉल बनाने में (In alcohol industry) :
कुछ लाइकेन्स जैसे, सिट्रेरिया इस्लेण्डिका (Cetrgrig islandica) से कुछ ऐल्कोहॉल बनाए जाते हैं।

5. दवाइयों के रूप में (As medicines) :
अस्निक अम्ल (Usnic acid) एक विस्तृत क्षेत्र (broad spectrum) वाला महत्त्वपूर्ण एण्टीबायोटिक है जिसे अस्निया (Usneq = old man’s beard) तथा क्लेडोनिया (Cladonia) से तैयार किया जाता है। यह अनेक प्रकार के संक्रमण में तथा घावों के लिए मरहम बनाने (UPBoardSolutions.com) में काम आता है। पीलिया (jaundice) रोग में जैन्थोरिआ (Xanthorig porienting) तथा मिर्गी रोग (epilepsy) में पार्मेलिया (Parmelia sexatilis) लाइकेन प्रयोग किए जाते हैं। इसी प्रकार से अस्निया (Usnia burbate) लाइकेन बालों को सुदृढ़ करने तथा गर्भाशय सम्बन्धी रोगों में पेल्टिजेरा (Peltizera camorna) लाइकेन, हाइड्रोफोबिया (hydrophobia) में तथा लोबारिआ (Lobaria pulmonaria) का उपयोग फेफड़ों सम्बन्धी रोगों के उपचार में किया जाता है।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संघ प्रोटोजोआ के प्रमुख लक्षणों का उल्लेख कीजिए तथा विशिष्ट लक्षणों एवं उदाहरणों सहित वर्ग तक वर्गीकरण कीजिए। या संघ प्रोटोजोआ के सामान्य लक्षणों का वर्णन कीजिए तथा स्टोरर एवं यूसिंजर के अनुसार उदाहरणों सहित वर्ग तक वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
संघ प्रोटोजोआ के प्रमुख लक्षण

  1. इस संघ के जन्तु सूक्ष्मदर्शीय (microscopic) एवं एककोशिकीय (unicellular) होते हैं। ये | आद्य (primitive) तथा जीवद्रव्य श्रेणी (protoplasmic type) के जन्तु हैं।
  2. ये जल, कीचड़, सड़ी-गली कार्बनिक वस्तुओं में स्वाश्रयी (free living) अथवा अन्य जन्तुओं यो पेड़-पौधों के शरीर में परजीवियों (parasites) के रूप में पाये जाते हैं।
  3. ये एकाकी (single) अथवा संघीय (colonial) जीवन व्यतीत करते हैं।
  4. इनमें शरीर की आकृति भिन्न, परन्तु प्राय: वातावरणीय दशाओं एवं गमन की आवश्यकताओं के अनुसार परिवर्तनशील होती है।
  5.  इनमें गमन के लिए रोमाभ (cilia), कशाभिकाएँ (flagella) तथा कूटपाद अथवा पादाभ (pseudopodia) पाये जाते हैं।
  6. ये एकलकेन्द्रकीय (uninucleate), द्विकेन्द्रकीय (binucleate) अथवा बहुकेन्द्रकीय (multinucleate) होते हैं।
  7. श्वसन विसरण द्वारा शरीर सतह से होता है।
  8. उत्सर्जन संकुचनशील धानियों (contractile vacuoles) द्वारा शरीर सतह (body surface) से होता है।
  9. जनन लैंगिक तथा अलैंगिक दोनों प्रकार से होता है।
  10. इनमें कायिक द्रव्य तथा जनन द्रव्य में विभेदन नहीं होता है, इस कारण इनकी प्राकृतिक मृत्यु नहीं होती है।

उदाहरण :

  1. अमीबा प्रोटियस तथा
  2. प्लाज्मोडियम वाइवैक्स

संघ प्रोटोजोआ का वर्गीकरण

गमनांगों (organs of locomotion) एवं केन्द्रकों (nuclei) के आधार पर प्रोटोजोआ संघ को अग्रलिखित चार उपसंघों में विभाजित किया गया है

(क)
उपसंघ-सार्कोमैस्टिगोफोरा

इस उपसंघ के प्राणियों में केन्द्रक एक अथवा अधिक, परन्तु एक जैसे तथा गमनांग कूटपाद अथवा कशाभिकाएँ होते हैं। इन्हें निम्नलिखित तीन वर्गों में बाँटा गया है।

1. वर्ग-मैस्टिगोफोरा अथवा फ्लेजिलैटा :
(class-mastigophora or flagellata) इस वर्ग के प्राणियों में

(i) एक या कई कशाभिकाएँ (flagella) होती हैं
(ii) कुछ सदस्यों में पर्णहरित (chlorophyll) पाया जाता है

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उदाहरण :

  1. युग्लीना (Euglena)
  2. ट्रिपैनोसोमा (Trypanosoma) आदि

2. वर्ग-सार्कोडिना अथवा राइजोपोडा :
(class-sarcodina or rhizopoda) इस वर्ग के प्राणियों में

(i) शारीरिक आकृति प्रायः परिवर्तनशील होती है।
(ii) गमनांग कूटपाद होते हैं।

उदाहरण :

  1. अमीबा (Amoeba)
  2. एण्टअमीबा (Entamoeba) आदि

3. वर्ग-ओपैलाइनैटा (class-opalinata) :

(i) ये प्रायः चपटे व संघ एम्फीबिया के प्राणियों की आँत के परजीवी होते हैं।
(ii) इनमें सिस्टम नहीं पाया जाता।
(iii) इनमें केन्द्रक दो-या-दो से अधिक होते हैं।
(iv) इनके गमनांग अनेक रोमाभ (cilia) होते हैं।

उदाहरण :
ओपैलाइना (Opalina)

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(ख) उपसंघ :
स्पोरोजोआ

इस उपसंघ के प्राणियों में विशिष्ट गमनांग एवं संकुचनशील रिक्तिकाएँ नहीं पायी (UPBoardSolutions.com) जाती हैं। ये प्रायः अन्तः परजीवी (endoparasites) होते हैं। इनमें सामान्य रूप से बीजाणुजनन (sporulation) पाया जाता है। इन्हें निम्नलिखित दो वर्गों में बाँटा जाता है।

1. वर्ग टीलोस्पोरिया  :

(i) (class-telosporia) इसमें बीजाणुज
(ii) (sporozoites) लम्बवत् होते हैं

उदाहरण :

  1. प्लाज्मोडियम (Plasmodium)
  2. मोनोसिस्टिस (Monocystis) आदि

2. वर्ग पाइरोप्लाज्निया :
(class-piroplasmea)

(i) ये पशुओं के लाल रुधिराणुओं के परजीवी होते हैं।
(ii) इनमें बीजाणु नहीं बनते।

उदाहरण :
बेबेसिया (Babesia)

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(ग)
उपसंघ :
निडोस्पोरा

इस उपसंघ के प्राणि भी अन्य जन्तुओं पर परजीवी होते हैं। इनमें गमनांग नहीं पाये जाते। इनमें बीजाणुजनन होता है तथा बीजाणुओं में ध्रुवीय तन्तु (polar filaments) उपस्थित होते हैं। इन्हें भी निम्नलिखित दो वर्गों में बाँटा गया है

1. वर्ग-मिक्सोस्पोरिया (class-mixosporia) :
इन प्राणियों में

(i) बीजाणुओं का विकास कई केन्द्रकों से होता है।
(ii) बीजाणु दो या तीन कपाटों का बना होता है।

उदाहरण :
सिरेटोमिक्सा (Ceratomyxa)

2. वर्ग-माइक्रोस्पोरिया (Class-microsporia) :
इनमें

(i) बीजाणु एक ही केन्द्रक से बनते हैं।
(ii) बीजाणु-खोल भी एक ही कपाट का बना होता है।

उदाहरण :
नोसिमा (Nosema)

(घ)
उपसंघ :
सीलियोफोरा

इस उपसंघ के प्राणियों में गमनांग रोमाभ होते हैं। इनमें केन्द्रक छोटे व बड़े (micro and macro) दी। प्रकार के होते हैं। इस उपसंघ के सभी सदस्यों को एक ही वर्ग में सम्मिलित किया जाता है। वर्ग-सीलिएटा (class-ciliata)-ये स्वाश्रयी व परजीवी दोनों प्रकार के होते हैं।

उदाहरण :

  1. पैरामीशियम (Paramecium)
  2.  बैलेण्टीडियम (Balantidium) आदि

प्रश्न 2.
यूग्लीना का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए तथा इसके जन्तु लक्षण लिखिए।
उत्तर :

युग्लीना

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 2 Biological Classification image 8

यूग्लीना के जन्तु लक्षण निम्नवत् हैं।

  1. यह अपने फ्लैजिला का प्रयोग करके गमन कर सकता है।
  2. यह भोजन को ग्रहण कर सकता है।

प्रश्न 3.
अमीबा प्रोटिअस में द्विखण्डन तथा बीजाणुजनन का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर :
अमीबा प्रोटिअस में द्विखण्डन यह अलैंगिक जनन की सबसे सरल एवं सामान्य विधि है, जो वातावरणीय अनुकूल परिस्थितियों में अर्थात् पर्याप्त भोजन, ताप, जल आदि उपस्थित होने पर सम्पन्न होती है। इस विधि में केन्द्रक समसूत्री विभाजन (mitosis) द्वारा विभाजन करता है। विभाजन की प्रोफेज अवस्था में अमीबा कूटपादों को समेट कर गोलाकार हो जाता है। संकुचनशील रिक्तिका लुप्त हो जाती है तथा केन्द्रकद्रव्य में गुणसूत्र प्रकट हो जाते हैं। मेटाफेज अवस्था में गुणसूत्र स्पिण्डल की मध्य रेखा पर व्यवस्थित हो जाते हैं। ऐनाफेज अवस्था में कई परिवर्तन होते हैं। क्रोमैटिड्स पृथक् होकर स्पिण्डल के विपरीत ध्रुवों पर चले जाते हैं। इससे पूर्व ही सम्पूर्ण कोशिकाद्रव्य भी मध्य में दबकर संकरा होता जाता है तथा एक डम्बल का आकार (dumbel shaped) बना लेता है। कूटपाद कुछ बड़े हो जाते हैं तथा केन्द्रक (UPBoardSolutions.com) दो सन्तति केन्द्रकों में विभक्त हो जाता है। टीलोफेज अवस्था में अमीबा का लम्बा हुआ शरीर मध्य भाग में सिकुड़कर टूट जाता है तथा दो सन्तति अमीबी (daughter Amoebae) में विभक्त हो जाता है, जिनमें से प्रत्येक में एक सन्तति केन्द्रक होता है। अमीबा प्रोटिअस में बीजाणुजनन अमीबा में इस प्रकार का प्रजनन प्रतिकूल वातावरणीय परिस्थितियों में होता है। प्रजनन की इस विधि में केन्द्रक कला (nuclear membrane) के टूट जाने के कारण क्रोमैटिन कण छोटे-छोटे समूहों में कोशिकाद्रव्य में फैल जाते हैं। अब प्रत्येक समूह के चारों ओर फिर से केन्द्रककला के बन जाने से अनेक (लगभग 200) छोटे-छोटे केन्द्रक बन जाते हैं। अमीबा का कोशिकाद्रव्य छोटे-छोटे पिण्डों में टूट जाता है। प्रत्येक पिण्ड एक केन्द्रक को चारों ओर से घेरकर एक सन्तति अमीबी (daughter Amoebae) बनाता है। इस प्रकार अनेक सन्तति अमीबी (Amoebae) बन जाते हैं। अब प्रत्येक सन्तति अमीबी के कोशिकाद्रव्य का बाहरी स्तर कड़ा होकर एक बीजाणु आवरण (spore wall) बना लेता है। यह सम्पूर्ण रचना बीजाणु (spore) कहलाती है। जनक कोशिका के नष्ट हो जाने पर बीजाणु मुक्त होकर जलाशय के तल में डूब जाते हैं। वातावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होने पर बीजाणु आवरणों को तोड़कर नन्हें अमीबी (Amoebae) मुक्त हो जाते हैं तथा वृद्धि कर वयस्क बन जाते हैं।

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प्रश्न 4.
परासरण नियन्त्रण की परिभाषा दीजिए। अमीबा के सन्दर्भ में इसके महत्त्व की विवेचना कीजिए। या अमीबा में परासरण नियन्त्रण की क्रिया का वर्णन कीजिए और संकुचनशील रसधानी के कार्य बताइए।
उत्तर :
परासरण नियन्त्रण ताजे अथवा अलवणीय जल (fresh water) में पाये जाने वाले अमीबा तथा प्रोटोजोआ संघ के अनेक सदस्यों में यह क्रिया पायी जाती है। अमीबा का कोशिकाद्रव्य बाहरी अलवणीय जल से सदैव अतिपरासरी (hypertonic) रहता है, जिसके फलस्वरूप बाहरी जल निरन्तर परासरण द्वारा अमीबा के शरीर में प्रवेश करता रहता है। कुछ उपापचयी क्रियाओं के फलस्वरूप विशेष रूप से खाद्य धानियों (food vacuoles) में भी जल की उत्पत्ति होती है। अमीबा में एक विशेष प्रकार की संकुचनशील रसधानी (contractilevacuole) पायी जाती है। यह अतिरिक्त जल को एकत्रित कर समय-समय पर कोशिका से बाहर की ओर फटकर जल को फेंकती रहती है। इस प्रकार यह अतिरिक्त जल को कोशिका से बाहर निकालने का कार्य करती रहती है। इसके फटकर समाप्त होने की अवस्था को सिस्टोल (systole) तथा पुनः उत्पन्न होकर बड़ा आकार प्राप्त कर लेने की अवस्था को डायस्टोल (diastole) कहते हैं। अतः शरीर में जल की निश्चित मात्रा को बनाये रखने एवं अनावश्यक मात्रा को निष्कासित करने की प्रक्रिया परासरण नियन्त्रण कहलाती है।

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संकुचनशील रसधानी के मुख्य कार्य

इसके मुख्य कार्य इस प्रकार हैं

  1.  संकुचनशील रसधानी का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कार्य परासरण नियन्त्रण अथवा जल नियमन (osmoregulation) है।
  2.  यह अनावश्यक जल के साथ उसमें घुले उत्सर्जी पदार्थों को भी निष्कासित करती है। इस प्रकार यह उत्सर्जन (excretion) में भी योगदान देती है।
  3.  यह कार्बन डाइऑक्साइड की कुछ मात्रा का निष्कासन कर श्वसन में भी योगदान देती है।  यदि अलवणीय अथवा सामान्य जल के अमीबा को समुद्र के खारे जल अथवा नमक के विलयन में रखा जाता है तो इसका कोशिकाद्रव्य समुद्री जल के समपरासरी अथवा निम्नपरासरी (isotonic or hypotonic) हो जाता है, अत: बाहरी जल के अमीबा के शरीर में पहुंचने की सम्भावना समाप्त हो जाती है। ऐसी अवस्था में अमीबा को परासरण नियन्त्रण की आवश्यकता नहीं रहती है अथवा इसको अधिकतम जल कोशिका से बाहर परासरित हो जाता है; अत: इसकी संकुचनशील रसधानी धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है।

प्रश्न 5.
उपयुक्त चित्रों की सहायता से राइजोपस में लैंगिक जनन का वर्णन कीजिए। या विषमजालिकता (विषम लैगिकता) से आप क्या समझते हैं? उदाहरण देकर समझाइए। या विषमजालिकता पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
राइजोपस में लैगिक जनन राइजोपस में लैंगिक जनन प्रायः प्रतिकूल वातावरण में विशेषकर भोज्य पदार्थों की कमी के समय होता है। यह क्रिया दो एक-जैसी रचनाओं, समयुग्मकधानियों (isogametangia) के बीच होने वाले संयुग्मन (conjugation) के द्वारा सम्पन्न होती है। समयुग्मकधानियाँ यद्यपि समान आकार-प्रकार की दिखाई देती हैं, किन्तु विषम लैंगिकता (heterothallism) प्रदर्शित करती हैं तथा कार्यिकी दृष्टि से भिन्न-भिन्न प्रकार के कवक जालों से आनी चाहिए। इनमें से एक को + तथा दूसरे को – विभेद (strain) का मानते हैं अर्थात् यहाँ विषमजालिकता (heterothallism) पायी जाती है। सर्वप्रथम ए० एफ० ब्लेकेसली (A.E Blakeslee) ने 1904 में म्यूकर म्यूसिडो (Mucor mucedo) नामक कवक में इसका अध्ययन किया। प्रारम्भिक अवस्था में, जब दो विषमजालिक (+ तथा – विभेद) कवक तन्तु एक-दूसरे के सम्पर्क में आते हैं तो सम्पर्क के स्थान पर दोनों पाश्र्वीय शाखाएँ उभरने लगती हैं। ये पाश्र्वीय शाखाएँ छोटी तथा मुग्दराकार (club-shaped) होती हैं और प्राक्युग्मकधानियाँ या प्रोगैमेटेन्जिया (progametangia) कहलाती हैं। ये लम्बाई में बढ़ने के साथ सिरे पर फूलती हैं जो जीवद्रव्य, भोज्य पदार्थ आदि के संग्रह से सम्भव होता है। शीघ्र ही यह फूला हुआ भाग एक पट (septum) द्वारा अ लग कर दिया जाता है। इस प्रकार, दो भाग बनते हैं—सिरे पर समयुग्मकधानी या संकोशी युग्मकधानी जिसमें बहुत सारे केन्द्रक पाये जाते हैं और पिछला शेष भाग निलम्बक (suspensor) कहलाता है।परिपक्व होने पर दोनों युग्मकधानियों के बीच की भित्ति गल जाती है। इसमें होकर दोनों युग्मकधानियों के संकोशी युग्मक (coenogametes) आपस में मिल जाते हैं। इससे बना हुआ संयुक्त आकार युग्माणु (zygospore) कहा जाता है। युग्माणु में शीघ्र ही कुछ और भित्ति की (UPBoardSolutions.com) परतें बनती हैं जिससे वह मोटी, कड़ी तथा काली हो जाती है। इसमें से सबसे बाहरी परत, सबसे अधिक मोटी, कंटकयुक्त (spinous) होती है और काइटिन की बनी होती है। इसे बाह्य कवच (exosporium) कहा जाता है। युग्माणु पर यह कड़ा कवच होने के कारण यह प्रतिकूल वातावरण को आसानी से सहन करता है। विश्राम का यह समय एक युग्माणु के लिए पाँच से नौ माह तक हो सकता है। संयुग्मन (conjugation) से लेकर विश्राम की किसी अवस्था में + तथा – विभेद के केन्द्रक आपस में जोड़ा बनाते हैं। सामान्यतः यह क्रिया देर की अवस्थाओं में ही होती हुई समझी जाती है। ये जोड़े संयुक्त (fuse)”होकर द्विगुणित (diploid) केन्द्रक भी बनाते हैं, किन्तु इनमें से एक द्विगुणित केन्द्रक को छोड़कर शेष सभी नष्ट हो जाते हैं। क्रियाशील द्विगुणित केन्द्रक अर्द्धसूत्री विभाजन से विभाजित होकर चार अगुणित haploid = n) केन्द्रक बनाता है। इनमें से दो + तथा अन्य दो – विभेद के होते हैं। इनमें से भी अन्त में एक ही क्रियाशील रहता है, तीन नष्ट हो जाते हैं। सामान्यतः अनुकूल वातावरण आने पर जल अवशोषित करके (नमी सोखकर) युग्माणु (zygospore) अंकुरित होता है। इस समय बाह्य कवच को तोड़कर अन्तःकवच (intine) जो मुलायम होता है, नलिका के रूप में बाहर आता है। एकमात्र केन्द्रक बार-बार विभाजित होकर अब तक जीवद्रव्य को संकोशीय या बहुकेन्द्रकी (coenocytic) बना देता है जो नलिका (germ tube) या प्राक्कवक तन्तु (promycelium) के सिरे में एकत्रित होने लगता है। बाद में, इस शाखा से अन्य शाखाएँ भी निकल सकती हैं, किन्तु सामान्यतः एक शाखा के सिरे पर कॉल्यूमैला रहित

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UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 2 Biological Classification image 9

बीजाणुधानी (sporangium) का निर्माण होता है। यह बीजाणुधानी शेष प्राक्कवक तन्तु (UPBoardSolutions.com) या अब, बीजाणुधानीधर से एक पट (septum) के द्वारा अलग हो जाती है। बीजाणुधानी के फटने पर बीजाणु स्वतन्त्र हो जाते हैं।

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UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 4 धातु-रूप प्रकरण (व्याकरण)

UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 4 धातु-रूप प्रकरण (व्याकरण) are the part of UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit. Here we have given UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 4 धातु-रूप प्रकरण (व्याकरण).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 9
Subject Sanskrit
Chapter Chapter 4
Chapter Name धातु-रूप प्रकरण (व्याकरण)
Number of Questions Solved 25
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 4 धातु-रूप प्रकरण (व्याकरण)

धातु-रूप प्रकरण

जिस शब्द के द्वारा किसी काम के करने या होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं; जैसे-‘राम: पुस्तकं पठति।’ इस वाक्य में ‘पठति से पढ़ने के काम का बोध होता है; अतः ‘पठति क्रिया है।

क्रिया के मूल रूप को संस्कृत में ‘धातु’ कहते हैं; जैसे—राम: पुस्तकं पठति। इस वाक्य में ‘पठति’ क्रिया का मूल ‘पद्’ है; अतः ‘पद्’ धातु है।

धातुओं में प्रत्यय जोड़ने से ही क्रिया के विभिन्न रूप बनते हैं। क्रियाएँ ‘तिङ’ प्रत्यय जोड़कर बनायी जाती हैं; अतः तिङन्त कहलाती हैं। संस्कृत में क्रिया का ही प्रयोग होता है, धातु का नहीं।

क्रियाएँ दो प्रकार की होती हैं-(1) सकर्मक क्रिया तथा (2) अकर्मक क्रिया।।

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(1) सकर्मक क्रिया- ये वे क्रियाएँ हैं, जिनका अपना कर्म होता है। समर्कक क्रिया के व्यापार को फल कर्ता को छोड़कर किसी और (कर्म) पर पड़ता है; जैसे-राम: पुस्तकं पठति। इस वाक्य में ‘पठति’ क्रिया के व्यापार का फल ‘राम:’ कर्ता को छोड़कर ‘पुस्तकम्’ (कर्म) पर पड़ता है; अतः ‘पठति’ (UPBoardSolutions.com) क्रिया सकर्मक है।। क्रिया के पूर्व ‘क्या’ या ‘किसको’ लगाकर प्रश्न करने पर मिलने वाला उत्तर कर्म होता है। ऊपर के वाक्य में ‘क्या’ पढ़ता है; प्रश्न करने पर उत्तर में ‘पुस्तकम्’ आता है; अतः ‘पुस्तकम् कर्म है और ‘पठति’ क्रिया, सकर्मक है।

(2) अकर्मक क्रिया- अकर्मक क्रिया के व्यापार का फल केवल कर्ता तक ही सीमित होता है। अकर्मक क्रियाओं का अपना कोई कर्म नहीं होता है; जैसे-रामः हसति। इस वाक्य में हसति’ (हँसना) क्रिया के व्यापार का फल केवल ‘राम:’ कर्ता पर ही पड़ता है; अतः ‘हसति’ क्रिया अकर्मक है।। अकर्मक क्रिया के पूर्व ‘क्या’ या ‘किसको’ लगाकर प्रश्न करने से उत्तर में कुछ नहीं आता है।

लकार या काल

प्रयोग की दृष्टि से क्रियाओं की विभिन्न अवस्थाएँ होती हैं, संस्कृत में उन्हें लकारों द्वारा प्रकट किया जाता है। संस्कृत में प्राय: सभी कालों के प्रारम्भ में ‘ल’ वर्ण आता है, अत: इन्हें लकार कहते हैं। ये 10 होते हैं

  1. लट् लकार (वर्तमानकाल),
  2. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल),
  3. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत्),
  4. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत्),
  5. लङ् लकार (अनद्यतन भूत),
  6. लिङ् लकार (विधिलिङ) अनुमति, आज्ञा, प्रार्थना आदि अर्थ में,
  7. आशीलिङ् (आशीर्वाद अर्थ में),
  8. लोट् लकार (आज्ञा अर्थ में)
  9. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल) तथा
  10. लुङ् लकार (हेतु-हेतुमद्भूत)

उम्रर्युक्त लकारों में लट्, लोट्, लङ, विधिलिङ ये चार लकार सार्वधातुक और शेष छ: लकार आर्धधातुक कहलाते हैं।नवीं कक्षा के छात्रों को केवल निम्नलिखित पाँच लकारों के रूप जानना आवश्यक है
(1) लट् लकार (वर्तमानकाल)- निरन्तर होती हुई, वर्तमानकाले की क्रिया लट् लकार द्वारा बतायी जाती है।
(2) लङ् लकार- भूतकाल की क्रिया को बताने के लिए लङ् लकार का प्रयोग होता है। यह लकार, जो कार्य आज से पहले हुआ हो, उसका बोध कराने के लिए प्रयोग किया जाता है।
(3) लृट् लकार- हिन्दी की उन क्रियाओं का, जिनके अन्त में गा, गे, गी लगे होते हैं, का अनुवाद करने के लिए भविष्यत्काल के वाक्यों में लुट् लकार का प्रयोग किया जाता है।
(4) लोट् लकार– अनुमति, निमन्त्रण, आमन्त्रण, अनुरोध, जिज्ञासा और सामर्थ्य अर्थ में लोट् लकार का प्रयोग किया जाता है।(5) विधिलिङ् लकार- उनुमति को छोड़कर शेष (निमन्त्रण, आमन्त्रण, अनुरोध, जिज्ञासा, सामर्थ्य तथा विधि) अर्थों में विधिलिङ् लकार का प्रयोग किया जाता है। :

क्रिया क पद

क्रिया के तीन पद होते हैं—

  • परस्मैपद,
  • आत्मनेपद तथा
  • उभयपद।।

(1) परस्मैपद- क्रिया के व्यापार का परिणाम जब कर्ता को प्राप्त न होकर किसी अन्य को प्राप्त होता है तब वहाँ क्रिया के परस्मैपदी रूप का प्रयोग होता है; जैसे-पठति।

(2) आत्मनेपद- जब क्रिया के व्यापार का परिणाम कर्ता तक ही सीमित रहता है, वहाँ क्रिया का आत्मनेपदी रूप प्रयुक्त होता है; जैसे-लभते।

(3) उभयपद- जिन धातुओं के ‘परस्मैपदी’ तथा ‘आत्मनेपदी’ दोनों रूप प्रसंगानुसार प्रयुक्त होते हैं, वे उभयपदी धातुएँ कहलाती हैं; जैसे—कृ—करोति, कुरुते; नी-नयति, नयते; जि- जयति, जयते।

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पुरुष

संज्ञा और सर्वनामों की तरह क्रियाओं के भी तीन पुरुष होते हैं—

  • प्रथम पुरुष,
  • मध्यम । पुरुष तथा
  • उत्तम पुरुष।

वचन

वन संज्ञा और सर्वनामों की तरह क्रियाओं के भी तीन वचन होते हैं—

  • एकवचन,
  • द्विवचन तथा
  • बहुवचन ।

लिंग

लिग संस्कृत में लिंग के कारण क्रियाओं में कोई अन्तर नहीं आता।

धातुगण

उन अनेक धातुओं के समूह को गण कहते हैं, जिनमें एक विकरण प्रत्यय होता है। संस्कृत में विकरण प्रत्ययों के आधार पर समस्त धातुओं को दस गणों में विभक्त किया गया है। (UPBoardSolutions.com) प्रत्येक गण का नाम उसकी प्रथम धातु के आधार पर रखा गया है; जैसे-भ्वादिगण की प्रथम धातु ‘भू’ (भू + आदि गण) है। दस गणों में कुल धातुओं की संख्या 1970 है। इन गणों के नाम इस प्रकार हैं

  • भ्वादिगण,
  • अदादिगण,
  • जुहोत्यादिगण,
  • दिवादिगण,
  • स्वादिगण,
  • तुदादिगण,
  • रुधादिगण,
  • तनादिगण,
  • क्रयादिगण,
  • चुरादिगण।

घातुओं के प्राथय

UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 4 धातु-रूप प्रकरण (व्याकरण)
विशेष— नवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में ‘पद्, गम्, अस्, शक्, प्रच्छ’ परस्मैपदी धातुओं; ‘लभ्’ आत्मनेपदी धातु तथा ‘याच्, ग्रह, कथ्’ उभयपदी धातुओं के रूप (UPBoardSolutions.com) निर्धारित हैं। विद्यार्थियों के ज्ञान एवं. अनुवादोपयोगी होने के कारण कुछ अन्य प्रमुख धातु-रूपों को भी यहाँ दिया जा रहा है।

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वस्तनिष्ठ प्रश्नोत्तर

अधोलिखित प्रश्नों में प्रत्येक प्रश्न के उत्तर रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। इनमें से एक विकल्प शुद्ध है। शुद्ध विकल्प का चयन कर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए-
1. वर्तमानकाल के लिए किस लकार का प्रयोग किया जाता है?
(क) विधिलिङ् लकार का
(ख) लट् लकार का
(ग) लृट् लकार का
(घ) लङ् लकार का

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2. लङ् लकार किस काल को प्रदर्शित करता है? |
(क) वर्तमानकाल को ।
(ख) भविष्यत्काल को ।
(ग) भूतकाल को
(घ) किसी काल को नहीं

3. विधिलिङ् लकार का प्रयोग किस प्रकार के वाक्यों में होता है?
(क) आज्ञा अर्थ के वाक्यों में
(ख) चाहिए अर्थ के वाक्यों में
(ग) भविष्यत्काल के वाक्यों में ।
(घ) इच्छा अर्थ के वाक्यों में

4. आज्ञा अर्थ में कौन-सा लकार प्रयुक्त होता है?
(क) लोट् लकार
(ख) लङ् लकार
(ग) विधिलिङ् लकार
(घ) लृट् लकार

5. लकार कुल कितने प्रकार के होते हैं?
(क) आठ
(ख) पाँच
(ग) सात
(घ) दस

6. संस्कृत में कुल कितने गण माने जाते हैं? ।
(क) पाँच
(ख) सात
(ग) दस
(घ) सोलह

7. गण का नाम किस आधार पर रखा गया है?
(क) धातु से जुड़े प्रत्यय के आधार पर
(ख) धातु से जुड़े उपसर्ग के आधार पर
(ग) लकार के आधार पर
(घ) गण की प्रथम धातु के आधार पर

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8. संस्कृत में किस कारण से क्रिया में कोई परिवर्तन नहीं होता?
(क) क्रिया-पद के कारण।
(ख) लिंग के कारण
(ग) पुरुष के कारण
(घ) वचन के कारण

9. निम्नलिखित में से कौन क्रिया को पद नहीं है?
(क) सकर्मकाकर्मक
(ख) परस्मै
(ग) आत्मने
(घ) उभय

10. ‘युवां ग्रन्थम् अपठतम्’ में रेखांकित पद के स्थान पर क्रिया का क्या रूप होगा, जिससे वाक्य विधिलिङ्का बन जाए?
(क) पठेयम्
(ख) पठेव
(ग) पठतम्।
(घ) पठेतम् ।

11. ‘गच्छानि’ किस लकार, पुरुष और वचन का रूप है?
(क) लोट्, उत्तम, एक
(ख) लट्, उत्तम, एक
(ग) लङ, प्रथम, बहु ।
(घ) लृट्, मध्यम, एक

12. ‘अगच्छम्’ किस काल का रूप है?
(क) वर्तमानकाल का
(ख) सामान्य भूतकाल का ।
(ग) भविष्यत्काल का
(घ) भूतकाल का ।

13. ‘लभ्’ धातु के लट् लकार, प्रथम पुरुष एकवचन ( आत्मनेपदी) का रूप होगा
(क) लभेते
(ख) लभेत
(ग) लभताम्
(घ) लभते

14. ‘लभध्वम्’ ‘लभ्’ धातु (आत्मनेपदी) के किस लकार, पुरुष और वचन का रूप है?
(क) लोट्, मध्यम, एक ।
(ख) लोट, मध्यम, बह.
(ग) विधिलिङ, मध्यम, बहु
(घ) लृट्, मध्यम, बहु ।

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15. परस्मैपद में ‘याचेत्’ किस लकार का रूप होगा?
(क) लोट् का
(ख) विधिलिङ को
(ग) लृट् को
(घ) लङ् का

16. “याचे’ आत्मनेपद में किस काल का रूप होगा?
(क) वर्तमानकाल का
(ख) भूतकाल का
(ग) विधिलिङ का
(घ) भविष्यत्काल का ।

17.’एधि’ किस धातु का रूप है?
(क) आप् का.
(ख) याच् का ‘
(ग) अस् का 
(घ) इष् का

18. ‘शक्ष्याव:’ में मूल धातु और लकार कौन-से हैं?
(क) आस् और लृट्
(ख) शक् और लृट्
(ग) नश् और लोट् ।
(घ) अस् और विधिलिङ

19. ‘शिष्यः प्रश्नं प्रक्ष्यति।’ में रेखांकित पद के स्थान पर वाक्य को लोट् लकार में बदलने के | लिए क्या पद प्रयुक्त करेंगे? ।
(क) पृच्छेत्
(ख) अपृच्छत्
(ग) पृच्छति
(घ) पृच्छतु
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20. ‘ग्रह्’ धातु ( आत्मनेपदं) में लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप होगा
(क) गृणीत.
(ख) गृहणीत
(ग) गृणीते
(घ)गृणीताम्।

21. ‘अगृह्णन्’ में लकार, पुरुष, वचन और पद होगा
(क) लङ प्रथम, बहु, परस्मैपद
(ख) लृट्, उत्तम, एक, उभये
(ग) लङ, प्रथम, एक, परस्मैपद
(घ) लङ, मध्यम, एक, आत्मनेपद

22. ‘कथ्’ धातु (परस्मैपदी) लोट् लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप है
(क) कथयते
(ख) कथयतम्
(ग) कथयताम्
(घ) कथयथ

23. निम्नलिखित में कौन-सी धातु उभयपदी है?
(क) अस्
(ख) लभ्
(ग) याच् :
(घ) प्रच्छ्।

24. ‘पृच्छाम’ रूप किस लकार, पुरुष तथा वचन का है?
(क) लट्, उत्तम, एके
(ख) लोट्, उत्तम, बहु ।
(ग) लङ, प्रथम, द्वि
(घ) विधिलिङ, उत्तम, बहु

25. ‘अस्’ धातु किस गण के अन्तर्गत आती है?
(क) अदादि
(ख) दिवादि
(ग) क्रयादि
(घ) रुधादि ।

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