UP Board Solutions for Class 9 Social Science Civics Chapter 2 लोकतंत्र लोकतन्त्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

UP Board Solutions for Class 9 Social Science Civics Chapter 2 लोकतंत्र लोकतन्त्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
यहाँ चार देशों के बारे में कुछ सूचनाएँ हैं। इन सूचनाओं के आधार पर आप इन देशों का वर्गीकरण किस तरह करेंगे? इनके सामने ‘लोकतांत्रिक’, ‘अलोकतांत्रिक’ और ‘पक्का नहीं लिखें।
(क) देश क : जो लोग देश के आधिकारिक धर्म को नहीं मानते उन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं है।
(ख) देश ख : एक ही पार्टी बीते वर्षों से चुनाव जीतती आ रही है।
(ग) देश ग : पिछले तीन चुनावों में शासक दल को पराजय को मुँह देखना पड़ा।
(घ) देश घ : यहाँ स्वतन्त्र चुनाव आयोग नहीं है।
उत्तर:
(क) अलोकतांत्रिक
(ख) पक्का नहीं
(ग) लोकतांत्रिक
(घ) अलोकतांत्रिक

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प्रश्न 2.
यहाँ चार अन्य देशों के बारे में कुछ सूचनाएँ दी गई हैं। इन सूचनाओं के आधार पर इन देशों का वर्गीकरण आप किस तरह करेंगे? इनके आगे ‘लोकतांत्रिक’, ‘अलोकतांत्रिक’ और ‘पक्का नहीं लिखें।
(क) देश च : संसद सेना प्रमुख की मंजूरी के बिना सेना के बारे में कोई कानून नहीं बना सकती।
(ख) देश छ : संसद न्यायपालिका के अधिकारों में कटौती का कानून नहीं बना सकती।
(ग) देश जे : देश के नेता बिना पड़ोसी देश की अनुमति के किसी और देश से संधि नहीं कर सकते।
(घ) देश झ : देश के अधिकांश फैसले केन्द्रीय बैंक के अधिकारी करते हैं जिसे मंत्री भी नहीं बदल सकते।
उत्तर:
(क) अलोकतांत्रिक
(ख) लोकतांत्रिक
(ग) अलोकतांत्रिक
(घ) अलोकतांत्रिक

प्रश्न 3.
इनमें से कौन-सा तर्क लोकतंत्र के पक्ष में अच्छा नहीं है और क्यों?
(क) लोकतन्त्र में लोग खुद को स्वतंत्र और समान मानते हैं।
(ख) लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ दूसरों की तुलना में टकरावों को ज्यादा अच्छी तरह सुलझाती हैं।
(ग) लोकतांत्रिक सरकारें लोगों के प्रति ज्यादा उत्तरदायी होती हैं।
(घ) लोकतांत्रिक देश दूसरों की तुलना में ज्यादा समृद्ध होते हैं।

उत्तर:
(क) एक लोकतंत्रीय राज्य अन्य राज्यों की तुलना में अधिक समृद्ध हो, ऐसा होना आवश्यक नहीं है। देश विदेश के लोगों की समृद्धि और खुशहाली देश के आर्थिक विकास पर निर्भर करती है न कि सरकार के स्वरूप पर। हमें ऐसे अनेक उदाहरण सरलता से प्राप्त हो जाएँगे कि देश में लोकतांत्रिक सरकार विद्यमान होते हुए भी वहाँ के लोगों की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश आज भी आर्थिक रूप से
विकसित हो रहे हैं। जबकि संयुक्त अरब अमीरात जैसे राजतंत्र वाले देश आर्थिक रूप से समृद्ध हैं।

प्रश्न 4.
इन सभी कथनों में कुछ चीजें लोकतांत्रिक हैं तो कुछ अलोकतांत्रिक। हर कथन में इन चीजों को अलग अलग करके लिखें।
(क)
एक मंत्री ने कहा कि संसद को कुछ कानून पास करने होंगे जिससे विश्व व्यापार संगठनों द्वारा तय नियमों की पुष्टि हो सके।
(ख) चुनाव आयोग ने एक चुनाव क्षेत्र के सभी मतदान केन्द्रों पर दोबारा मतदान का आदेश दिया जहाँ बड़े पैमाने पर मतदान में गड़बड़ की गई थी।
(ग) संसद में औरतों का प्रतिनिधित्व कभी भी 1 प्रतिशत तक नहीं पहुँचा है। इसी कारण महिला संगठनों ने संसद में एक-तिहाई आरक्षण की माँग की है।
उत्तर:
(क) लोकतांत्रिक चीज : “संसद को कुछ कानून पास करने होंगे।’
अलोकतांत्रिक चीज : “विश्व व्यापार संगठन द्वारा तय नियमों की पुष्टि हो सके।
(ख) लोकतांत्रिक चीज : “चुनाव आयोग ने किसी चुनाव क्षेत्र में दोबारा मतदान का आदेश दिया।”
अलोकतांत्रिक चीज : “बड़े पैमाने पर मतदान में गड़बड़ हुई थी।
(ग) लोकतांत्रिक चीज : “इसी के कारण महिला संगठनों ने एक तिहाई आरक्षण की माँग की है।”
अलोकतांत्रिक चीज : “संसद में औरतों का प्रतिनिधित्व कभी भी 10 प्रतिशत तक नहीं पहुँचा है।”

प्रश्न 5.
लोकतन्त्र में अकाल और भुखमरी की संभावना कम होती है। यह तर्क देने का इनमें से कौन-सा कारण सही नहीं है?
(क) विपक्षी दल भूख और भुखमरी की ओर सरकार को ध्यान दिला सकते हैं।
(ख) स्वतंत्र अखबार देश के विभिन्न हिस्सों में अकाल की स्थिति के बारे में खबरें दे सकते हैं।
(ग) सरकार को अगले चुनाव में अपनी पराजय का डर होता है।
(घ) लोगों को कोई भी तर्क मानने और उस पर आचरण करने की स्वतंत्रता है।

उत्तर:
(घ) लोगों को कोई भी तर्क मानने और उस पर आचरण करने की स्वतंत्रता है।

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प्रश्न 6.
किसी जिले में 40 ऐसे गाँव हैं जहाँ सरकार ने पेयजल उपलब्ध कराने का कोई इंतजाम नहीं किया है। इन गाँवों के लोगों ने एक बैठक की और अपनी जरूरतों की ओर सरकार का ध्यान दिलाने के लिए कई तरीकों पर विचार किया। इनमें से कौन-सा तरीका लोकतांत्रिक नहीं है।
(क) अदालत में पानी को अपने जीवन के अधिकार का हिस्सा बताते हुए मुकदमा दायर करना।
(ख) अगले चुनाव का बहिष्कार करके सभी पार्टियों को संदेश देना।
(ग) सरकारी नीतियों के खिलाफ जन-सभाएँ करना।
(घ) सरकारी अधिकारियों को पानी के लिए रिश्वत देना।
उत्तर:
(घ) यह एक अलोकतांत्रिक तरीका है।

प्रश्न 7.
लोकतन्त्र के खिलाफ दिए जाने वाले इन तर्को का जवाब दीजिए
(क) सेना देश का सबसे अनुशासित और भ्रष्टाचार मुक्त संगठन है। इसलिए सेना को देश का शासन करना चाहिए।
(ख) बहुमत के शासन का मतलब है मूख और अशिक्षितों का राज। हमें तो होशियारों की जरूरत है, भले ही उनकी संख्या कम क्यों न हो।
(ग) अगर आध्यात्मिक मामलों में मार्गदर्शन के लिए हमें धर्म-गुरुओं की जरूरत होती है तो उन्हीं को राजनैतिक मामलों में मार्गदर्शन का काम क्यों नहीं सौंपा जाए। देश पर धर्म गुरुओं का शासन होना चाहिए।
उत्तर:
(क) किसी देश की सेना रक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण है लेकिन यह लोगों द्वारा निर्वाचित नहीं है। इसलिए एक लोकतांत्रिक
सरकार का गठन नहीं कर सकती है। निश्चय ही सेना सर्वाधिक अनुशासित एवं भ्रष्टाचार मुक्त संगठन है फिर भी कोई व्यक्ति इस बात की गारण्टी नहीं दे सकता है कि सेना तानाशाह नहीं बनेगी। सैन्य शासन के अधीन नागरिकों के सभी मौलिक अधिकार छीन लिए जाएँगे। उदाहरण के (UPBoardSolutions.com) लिए, जनरल ऑगस्तों पिनोशे के शासन के अधीन चिली के लोगों को अनेक कष्ट भोगने पड़े थे।

(ख) किसी भी देश के सभी लोग कुछ सीमा तक समझदार होते हैं। सार्वभौम वयस्क मताधिकार सिद्धान्त के अनुसार भारत में 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को मताधिकार प्रदान किया गया है। समाज के कुछ वर्गों की उपेक्षा करना उचित नहीं है।

(ग) तीसरा कथन उपयुक्त नहीं है। राजनीति में धर्म को शामिल करने से खतरनाक विवाद उत्पन्न हो सकता है क्योंकि भारत में अनेक धर्मों के लोग साथ-साथ रहते हैं ऐसे में किसी एक धर्म के धर्मगुरुओं को राज्य के संचालन का कार्य सौंप देने से देश में साम्प्रदायिक संघर्ष उत्पन्न हो सकते हैं। वैश्विक स्तर पर अभी तक किसी धार्मिक नेता द्वारा सफल शासन संचालन का उदाहरण प्राप्त नहीं हुआ है।
ऐसे में धर्म को राजनीति से पृथक् रखना ही उचित है। राजनीति में धर्म का हस्तक्षेप विनाशकारी होता है। अतः सत्ता को धर्म-निरपेक्ष होना चाहिए और धार्मिक विश्वास के मामले को व्यक्ति की उसकी रुचि पर छोड़ देना चाहिए।

प्रश्न 8.
इनमें से किन कथनों को आप लोकतांत्रिक समझते हैं? क्यों?
(क) बेटी से बाप : मैं शादी के बारे में तुम्हारी राय सुनना नहीं चाहता। हमारे परिवार में बच्चे वहीं शादी करते हैं जहाँ माँ-बाप तय कर देते हैं।
(ख)  छात्र से शिक्षक : कक्षा में सवाल पूछकर ध्यान मत बँटाओ।
(ग) अधिकारियों से कर्मचारी : हमारे काम करने के घंटे कानून के अनुसार कम किए जाने चाहिए।
उत्तर:
(क) पहला कथन लोकतांत्रिक नहीं है क्योंकि बेटी को उसकी शादी के बारे में अपना मत प्रकट करने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। बेटी को दूसरे लोगों द्वारा उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी करने के लिए विवश नहीं किया जाना चाहिए। विवाह के पश्चात् बेटी को ही अपने पति के साथ जीवन-निर्वाह करना होता है। इसलिए बेटी के विवाह में पति का चयन करते समय बेटी के विचार को महत्त्व दिया जाना चाहिए।

(ख) दूसरी कथन लोकतांत्रिक नहीं है क्योंकि छात्र को प्रश्न पूछ कर अपने मन में उत्पन्न संशय का समाधान करने का पूरा अधिकार है। अध्यापक द्वारा छात्र को प्रश्न पूछने से रोकना अलोकतांत्रिक है। उपयुक्त तो यह होता है कि शिक्षक छात्रों से कहें कि कक्षा समाप्त होने के पश्चात् छात्र अपने मन में उठे विषय से सम्बन्धित प्रश्नों का समाधान करें। शिक्षक को छात्रों के प्रश्नों का निश्चय ही समाधान करना चाहिए।

(ग) यह कथन लोकतांत्रिक है क्योंकि वह ऐसे नियम या कानून की माँग करता है जो कर्मचारियों के लिए लाभप्रद है। कर्मचारी कानूनी मानकों के अनुरूप अपने अधिकारी (UPBoardSolutions.com) से किसी चीज की माँग कर सकते हैं। अतः यह कथन
लोकतांत्रिक मूल्यों के सापेक्ष है।

प्रश्न 9.
एक देश के बारे में निम्नलिखित तथ्यों पर गौर करें और फैसला करें कि आप इसे लोकतंत्र कहेंगे या नहीं। अपने फैसले के पीछे के तर्क भी बताएँ।।
(क) देश के सभी नागरिकों को वोट देने का अधिकार है और चुनाव नियमित रूप से होते हैं।
(ख) देश ने अन्तर्राष्ट्रीय एजेंसियों से ऋण लिया। ऋण के साथ यह एक शर्त जुड़ी थी कि सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य पर अपने खर्चे में कमी करेगी।
(ग)  लोग सात से ज्यादा भाषाएँ बोलते हैं पर शिक्षा का माध्यम सिर्फ एक भाषा है, जिसे देश के 52 फीसदी लोग बोलते हैं।
(घ) सरकारी नीतियों का विरोध करने के लिए अनेक संगठनों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन करने और देश भर में हड़ताल करने का आह्वान किया है। सरकार ने उनके नेताओं को गिरफ्तार कर लिया है।
(ङ) देश के रेडियो और टेलीविजन चैनल सरकारी हैं। सरकारी नीतियों और विरोध के बारे में खबर छापने के लिए अखबारों को सरकार से अनुमति लेनी होती है।
उत्तर:
(क) सभी नागरिकों को समानता के सिद्धान्त पर मताधिकार देना और नियमित चुनाव लोकतांत्रिक प्रणाली के अनुरूप है परन्तु चुनाव स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष होना चाहिए।
(ख)वह देश लोकतांत्रिक हो सकता है यदि ऋण लेने वाली सरकार जनता द्वारा निर्वाचित है।
(ग)  वह राज्य लोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता क्योंकि नागरिकों को अपनी भाषा में शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नहीं है।
(घ) सभी लोकतांत्रिक राज्य अपने नागरिकों को हड़ताल करने का अधिकार देते हैं, इससे राज्य अलोकतांत्रिक नहीं बन जाता।
(ङ) यह अलोकतांत्रिक है। रेडियो तथा टेलीविजन सरकारी नहीं होना चाहिए। लोगों को समाचार-पत्रों, रेडियो तथा टेलीविजन द्वारा अपने विचार प्रकट करने तथा सरकार की जन-विरोधी नीतियों की आलोचना करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

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प्रश्न 10.
अमेरिका के बारे में 2004 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार वहाँ के समाज में असमानता बढ़ती जा रही है।
आमदनी की असमानता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विभिन्न वर्गों की भागीदारी घटने-बढ़ने के रूप में भी सामने आई। इन समूहों की सरकार के फैसलों पर असर (UPBoardSolutions.com) डालने की क्षमता भी इससे प्रभावित हुई है। इस रिपोर्ट की मुख्य बातें थीं
(क) सन् 2004 में एक औसत अश्वेत परिवार की आमदनी 100 डालर थी जबकि गोरे परिवार की आमदनी 162 डालर/औसत गोरे परिवार के पास अश्वेत परिवार से 12 गुना ज्यादा सम्पत्ति थी।

(ख) राष्ट्रपति चुनाव में 75,000 डालर से ज्यादा आमदनी वाले परिवारों के प्रत्येक 10 में से 9 लोगों ने वोट डाले थे। यही लोग आमदनी के हिसाब से समाज के ऊपरी 20 फीसदी में आते हैं। दूसरी ओर 15,000 डालर से कम आमदनी वाले परिवारों के प्रत्येक 10 में से सिर्फ 5 लोगों ने ही वोट डाले। आमदनी के हिसाब से ये लोग सबसे निचले 20 फीसदी हिस्से में आते हैं।

(ग) राजनैतिक दलों का करीब 95 फीसदी चंदा अमीर परिवारों से ही आता है। इससे उन्हें अपनी राय और चिंताओं से नेताओं को अवगत कराने का अवसर मिलता है। यह सुविधा देश के अधिकांश नागरिकों को उपलब्ध नहीं है।

(घ) जब गरीब लोग राजनीति में कम भागीदारी करते हैं तो सरकार भी उनकी चिंताओं पर कम ध्यान देती हैगरीबी दूर करना, रोजगार देना, उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की व्यवस्था करने पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता जितना दिया जाना चाहिए। राजनेता अक्सर अमीरों और व्यापारियों की चिंताओं पर ही नियमित रूप से गौर करते हैं।

इस रिपोर्ट की सूचनाओं को आधार बनाकर और भारत के उदाहरण देते हुए ‘लोकतंत्र और गरीबी’ पर एक लेख लिखें।
उत्तर:
भारत में आर्थिक आधार पर अत्यधिक असमानता पायी जाती है। समाज में एक वैभवशाली, साधन सम्पन्न विलासी वर्ग है तो वहीं ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें वक्त की रोटी भी मुश्किल से मिल पाती है। इससे स्पष्ट है कि लोगों की आय में अत्यधिक असमानता पायी जाती है। मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार भारत में 26 प्रतिशत लोग गरीबी की श्रेणी में आते हैं। निर्धनता अनेक सामाजिक (UPBoardSolutions.com) और आर्थिक बुराइयों को जन्म देती है।
निर्धन व्यक्ति को हमेशा अपने भरणपोषण की चिन्ता सताती रहती है। ऐसे में उसके पास समाज और देश की समस्याओं के बारे में विचार करने का न तो समय होता है और न ही इच्छा।
गरीब व्यक्ति चुनाव लड़ना तो दूर उसके बारे में मुश्किल से सोच पाता है क्योंकि उसके सामने आर्थिक समस्याओं का पहाड़ खड़ा रहता है। राजनीतिक दल पूँजीपतियों से पार्टी फण्ड में चन्दा लेते हैं, इसलिए यह आम धारणा है कि सरकार पर पूँजीपतियों का नियंत्रण है। प्रत्येक राजनीतिक दल गरीबों की गरीबी का राजनीतिक लाभ उठाना चाहता है।
चुनाव के समय सभी राजनीतिक दल गरीबी उन्मूलन की बात तो करते हैं किन्तु सत्ता में आने के बाद वे अपने इस वायदे को भूल जाते हैं। निर्धनता ने अनेक हिंसात्मक आन्दोलनों को जन्म दिया है। निश्चय ही निर्धनता भारतीय लोकतन्त्र की सफलता में बहुत बड़ी बाधा है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सार्वभौम वयस्क मताधिकार से क्या आशय है?
उत्तर
भारत में 18 वर्ष से अधिक की आयु का कोई भी नागरिक चाहे वह किसी भी जाति, रंग, सम्प्रदाय या सामाजिक स्थिति का हो उसे मतदान का अधिकार है।

प्रश्न 2.
डेमोक्रेसी शब्द की उत्पत्ति किस भाषा के शब्द से हुई है?
उत्तर
डेमोक्रेसी शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द डीमोस (Demos) तथा क्रेशिया (Cratia) से हुई है, ‘डीमोस’ का अर्थ है जनता (लोग) तथा ‘क्रेशिया’ का अर्थ है शासन। अतः लोकतंत्र वह शासन प्रणाली है जिसमें देश का शासन जनता के हाथों में होता है।

प्रश्न 3
अधिनायकवाद ( तानाशाही ) का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
तानाशाही शासन का वह रूप है जिसमें शासन की सत्ता एक ही व्यक्ति अथवा एक ही राजनैतिक दल के हाथों में होती है। तानाशाह (अधिनायक) अपनी शक्तियों का प्रयोग अपनी इच्छानुसार करता है और वह किसी के प्रति उत्तरदायी नहीं होता। नागरिकों को तानाशाह अथवा (UPBoardSolutions.com) उसकी नीतियों की आलोचना करने का अधिकार नहीं होता। उसका कार्यकाल निश्चित नहीं होता और वह तब तक अपने पद पर बना रहता है जब तक शासन की शक्ति उसके हाथों में रहती है।

प्रश्न 4.
लोकतांत्रिक सरकार की सीमाएँ बताइए।
उत्तर:
एक लोकतांत्रिक सरकार संवैधानिक कानूनों एवं नागरिक अधिकारों के दायरे में रहते हुए शासन करती है। इसमें कानून का शासन होता है जिससे सरकार संवैधानिक कानूनों एवं नागरिक अधिकारों के दायरे में रहते हुए शासन करती है।

प्रश्न 5.
लोकतन्त्र लोगों की गरिमा में वृद्धि करता है। व्याख्या करें।
उत्तर:
राजनीतिक समानता पर आधारित होने के कारण लोकतन्त्र यह स्वीकार करता है कि सबसे निर्धन एवं सबसे कम पढ़े लिखे लोगों की समाज में वही स्थिति है जो अमीर व शिक्षित लोगों की है। लोकतंत्र में लोग शासक की प्रजा नहीं बल्कि स्वयं शासक हैं।

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प्रश्न 6.
लोकतांत्रिक व्यवस्था दूसरों से बेहतर है क्योंकि लोकतंत्र मतभेदों और टकरावों को संभालने का तरीका उपलब्ध कराता है। व्याख्या करें।
उत्तर:
किसी भी समाज में लोगों के हितों और विचारों में अन्तर होता है। भारत की तरह भारी सामाजिक विविधता वाले देश में इस तरह का अन्तर और भी ज्यादा होता है। भारत में विभिन्न भाषा, क्षेत्र, जाति, धर्म के लोग रहते हैं। इनके रहन-सहन में भी अन्तर है। एक समूह की पसंद और दूसरे (UPBoardSolutions.com) समूह की पसंद में टकराव भी होता है। लोकतन्त्र इस समस्या का एकमात्र शांतिपूर्ण समाधान उपलब्ध कराता है। लोकतांत्रिक सरकार विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच सामंजस्य कराता है।

प्रश्न 7.
बेहतर सरकार और सामाजिक जीवन पर प्रभाव की दृष्टि से तीन तर्क दीजिए जो लोकतन्त्र को सुदृढ़ सिद्ध करते हैं।
उत्तर:
(क) लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक अधिकार और सम्मान में वृद्धि होती है।
(ख) लोकतन्त्र में अन्य शासकीय व्यवस्थाओं की तुलना में नागरिक की स्थिति अच्छी होती है।
(ग) लोकतन्त्र राजनीतिक समानता के सिद्धान्त पर आधारित है, यहाँ सबसे गरीब और अनपढ़ को भी वही दर्जा प्राप्त है जो अमीर और पढ़े लिखे लोगों को है। लोग किसी शासक की प्रजा न होकर खुद अपने शासक हैं।

प्रश्न 8.
लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी गलती सुधारने का अवसर मिलता है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ऐसा कोई शासन तन्त्र नहीं जिसमें शासन तन्त्र से कोई गलती न हो चाहे वह लोकतन्त्र ही क्यों न हो। लेकिन लोकतन्त्र में गलतियों पर विचार-विमर्श करने और उसे सुधारने की संभावना अन्तर्निहित होती है। इसका आशय यह है कि या तो शासक समूह अपना निर्णय बदले या फिर शासक समूह को ही बदला जा सकता है। गैरलोकतांत्रिक सरकारों में ऐसा नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न 9.
जिम्बाब्वे की लोकतांत्रिक व्यवस्था ने किस तरह का उदाहरण प्रस्तुत किया है?
उत्तर:
जिम्बाब्वे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए यह उदाहरण प्रस्तुत करता है कि शासकों द्वारा जनता का विश्वास पाने के लिए बार-बार जनादेश पाना लोकतन्त्र की एक आवश्यकता है पर इतना ही पर्याप्त नहीं है। लोकप्रिय नेता भी अलोकतांत्रिक हो सकते हैं। लोकप्रिय नेता भी तानाशाह हो सकते हैं। जिम्बाब्वे के नेता रॉबर्ट मुगाबे अत्यधिक लोकप्रिय नेता हैं। स्वतन्त्रता के बाद से ही शासन कर रहे हैं। चुनाव नियमित रूप से होते हैं और सदा जानु पी. एफ. दल ही चुनावों में जीतता आया है। चुनाव जीतने के लिए गलत तरीके भी अपनाए जाते हैं। अतः यह उदाहरण लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संदेश नहीं है।

प्रश्न 10.
मैक्सिको में पी. आर. आई. पार्टी निरन्तर 2000 ई. से किस तरह से सत्ता में बनी हुई है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मैक्सिको का यह राजनीतिक दल चुनाव में हर तरह के हथकण्डे अपनाकर किसी न किसी तरह चुनाव जीतने का प्रयास करती रही है और इसमें सफल भी रही थी। सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले सभी लोगों के लिए पार्टी की बैठकों में जाना (UPBoardSolutions.com) अनिवार्य था। सरकारी स्कूलों के अध्यापक अपने विद्यार्थियों के माता-पिता से पी.आर.आई. को वोट देने को कहते थे। कई बार अन्तिम क्षणों में मतदान केन्द्रों को एक जगह से हटाकर दूसरी जगह कर दिया जाता था जिससे अनेक लोग वोट नहीं डाल पाते थे। पी.आर.आई. राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के चुनाव अभियान में काफी धन खर्च करती थी।

प्रश्न 11.
चीन में सांसद का चुनाव किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर:
चीन की संसद ‘राष्ट्रीय जन संसद’ कहलाती है। चीन की संसद हेतु प्रत्येक पाँचवें वर्ष नियमित रूप से चुनाव होता है। इस संसद को देश का राष्ट्रपति नियुक्त करने का अधिकार है। इसमें पूरे देश से लगभग 3,000 सदस्य आते हैं। कुछ सदस्यों का चुनाव सेना (UPBoardSolutions.com) भी करती है। चुनाव लड़ने से पहले सभी उम्मीदवारों को चीनी कम्युनिष्ट पार्टी से मंजूरी लेनी होती है। 2002-03 ई. में हुए चुनावों में सिर्फ कम्युनिस्ट पार्टी और उससे सम्बद्ध कुछ छोटी पार्टियों के सदस्यों को ही चुनाव लड़ने की अनुमति मिली। सरकार सदा कम्युनिष्ट पार्टी की ही बनती है।

प्रश्न 12.
ऐसे दो देशों का उदाहरण दीजिए जहाँ नागरिकों को मतदान के समान अधिकार नहीं हैं?
उत्तर:
एस्टोनिया ने अपने यहाँ नागरिकता के नियम कुछ इस तरह बनाए हैं कि रूसी अल्पसंख्यक समाज के

  1. लोगों को मतदान का अधिकार हासिल करने में मुश्किल होती है।
  2. फिजी की चुनाव प्रणाली में वहाँ के मूल निवासियों के वोट का महत्त्व भारतीय मूल के फिजी नागरिक के वोट से ज्यादा है।

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प्रश्न 13.
अर्थशास्त्रियों के अनुसार चीन में पड़े भयंकर अकाल के कारण तीन करोड़ से अधिक लोगों के मरने का प्रमुख कारण क्या था?
उत्तर:
अर्थशास्त्रियों के अनुसार चीन में पड़े भयंकर अकाल के कारण तीन करोड़ से अधिक लोगों के मरने का मुख्य कारण वहाँ पर साम्यवादी शासन व्यवस्था को माना गया है।

लघु उत्तरीय प्रश्न –

प्रश्न 1.
लोकतन्त्र की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
लोकतन्त्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं–

  1.  एक लोकतांत्रिक देश में प्रत्येक वयस्क नागरिक को एक वोट देने का अधिकार है और प्रत्येक वोट का समान | महत्त्व है। कोई भी नागरिक किसी भी जाति, धर्म, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि का हो वह किसी भी पद के लिए चुनाव लड़ सकता है जिसका अर्थ यह है कि सभी नागरिकों को वोट देने का अधिकार प्राप्त है।
  2. एक लोकतांत्रिक सरकार संवैधानिक कानूनों एवं नागरिक अधिकारों के दायरे में रहते हुए शासन करती है।
  3. लोकतांत्रिक देशों में शासकों का चयन जनता करती है जो सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं।
  4.  इसमें स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव होते हैं। चुनाव लोगों के सामने वर्तमान शासकों को बदलने का एक विकल्प एवं अच्छा अवसर (UPBoardSolutions.com) प्रदान करते हैं।
  5. चुनाव के पहले और बाद में भी विपक्षी दलों को स्वतन्त्र रूप से काम करते रहने की अनुमति है।
  6.  इसमें अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता होती है और लोग मौलिक अधिकारों का प्रयोग करते हैं।
  7. ऐसी सरकारें राजनैतिक समानता के मौलिक सिद्धान्त पर आधारित होते हैं।

प्रश्न 2.
लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रमुख दोषों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रमुख दोष इस प्रकार हैं

  1. लोकतंत्र भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है क्योंकि यह चुनावी प्रतिस्पर्धा पर आधारित है।
  2. निर्वाचित नेता लोगों के सर्वश्रेष्ठ हितों से परिचित नहीं होते हैं। ऐसे में वे अनेक गलत निर्णय करते हैं जिससे जन
    सामान्य को कष्ट होता है।
  3.  लोकतन्त्र में नेता बदलते रहते हैं। यह अस्थिरता का कारण बनता है।
  4. लोकतन्त्र राजनैतिक प्रतिद्वन्दिता एवं शक्ति का खेल है। इसमें नैतिकता के लिए कोई स्थान नहीं है।
  5.  जनसाधारण को यह पता नहीं होता है कि उनके लिए क्या करना अच्छा है, उन्हें कोई निर्णय नहीं लेने दिया जाता है।

प्रश्न 3.
प्रत्यक्ष लोकतन्त्र को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रत्यक्ष लोकतन्त्र में राज्य की इच्छा जनता द्वारा आम सभाओं के माध्यम से प्रकट की जाती है। इसमें जनता अपने प्रतिनिधियों को निर्वाचित करके नहीं भेजती, वरन् स्वयं एकत्रित होकर अधिकारियों को नियुक्त करती है, कर निर्धारित करती है तथा (UPBoardSolutions.com) कानून बनाती है।
ऐसा प्रजातन्त्र छोटे-छोटे राज्यों में ही स्थापित किया जा सकता है। प्राचीन यूनान तथा रोम के नगर-राज्यों में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र प्रणाली प्रचलित थी। आधुनिक राष्ट्र राज्यों में इसे लागू नहीं किया जा सकता फिर भी स्विट्जरलैण्ड के कुछ कैंटनों, अमेरिका तथा रूस के कुछ राज्यों तथा गणतन्त्रों में प्रत्यक्ष प्रजातंत्र की व्यवस्था है।
प्रत्यक्ष प्रजातंत्र के आधुनिक साधनों में जनमत संग्रह, प्रस्तावाधिकार तथा प्रत्यावर्तन के साधन हैं। इन साधनों द्वारा मतदाता कानून के निर्माण में प्रत्यक्ष रूप से भाग ले सकते हैं। जनमत संग्रह का थोड़ा-बहुत प्रयोग अन्य देशों में भी किया जाता है।

प्रश्न 4.
अप्रत्यक्ष लोकतंत्र का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अप्रत्यक्ष (प्रतिनिधि) लोकतन्त्र वर्तमान समय में ऐसे राज्यों में पाया जाता है जहाँ का क्षेत्रफल तथा जनसंख्या अधिक होती है। जनसंख्या व क्षेत्रफल की विशालता के कारण ही अप्रत्यक्ष लोकतन्त्र का विकास हुआ, जिसमें मतदाता अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं, जो देश का शासन चलाते हैं।
ये प्रतिनिधि एक निश्चित समय के लिए चुने जाते हैं। यदि ये प्रतिनिधि जनता की इच्छानुसार या जनमत के अनुसार कार्य नहीं करते तो अगले चुनाव में जनता उन्हें वोट नहीं करेगी और वे चुनाव हार कर सत्ता से बाहर हो जायेंगे। इस तरह जनता के प्रतिनिधि जनता के प्रति उत्तरदायी बने रहते हैं। वर्तमान समय में जहाँ भी प्रजातंत्रात्मक शासन प्रणाली अपनायी गयी है वहाँ प्रतिनिधि प्रजातन्त्र प्रणाली ही पायी जाती है।

प्रश्न 5.
भारत में लोकतन्त्र का भविष्य बताइए।
उत्तर:
यद्यपि भारत के लोकतांत्रिक विकास के मार्ग में अनेक बाधाएँ हैं लेकिन भारत में अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत में लोकतन्त्र का भविष्य उज्ज्वल है। ये सभी चुनाव प्रायः स्वतन्त्र और निष्पक्ष रूप से कराए गए हैं।
न केवल भारतीय जनता बल्कि राजनीतिक दलों को भी लोकतन्त्र में दृढ़ विश्वास है। भारतीय मतदाता अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए आंदोलन करने तथा बड़ी-से-बड़ी कुरबानी देने के लिए तैयार रहते हैं। चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग की स्थापना की गई है जो पूर्ण रूप से निष्पक्ष होकर कार्य करता है। भारत में न्यायपालिका भी स्वतन्त्र है जो (UPBoardSolutions.com) लोकतन्त्र पर होने वाले किसी भी आघात को रोकती है। यद्यपि भारत के अधिकांश लोग अशिक्षित हैं, परन्तु वे राजनीतिक दृष्टि से जागरुक हैं। ऐसी स्थिति में भारतीय लोकतन्त्र के सफल भविष्य के बारे में चिंता की कोई बात नहीं है।

प्रश्न 6.
लोकतन्त्र की त्रुटियों को कैसे सुधारा जा सकता है?
उत्तर:
लोकतन्त्र स्वयं की गलतियों को सुधारने की अनुमति देता है। इसकी कोई गारंटी नहीं है कि लोकतन्त्र में कोई गलती नहीं हो सकती। सरकार का कोई भी स्वरूप इसकी गारण्टी नहीं दे सकता। लोकतन्त्र का गुण यह है कि ऐसी गलतियाँ लम्बे समय तक छिपी नहीं रहतीं। इन गलतियों पर सार्वजनिक चर्चा की जा सकती है और गलती सुधारने का अवसर भी उपलब्ध रहता है या तो शासकों को अपने निर्णय बदलने पड़ते हैं अन्यथा शासकों को बदल दिया जाता है।

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प्रश्न 7.
“लोकतन्त्र मतभेदों एवं विवादों से निपटने का तरीका उपलब्ध कराता है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
किसी भी समाज के लोगों में मत एवं हितों में विवाद हो सकता है। भारत में ये मतभेद और भी गहरे हैं। लोग विभिन्न क्षेत्रों से सम्बन्ध रखते हैं, वे अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं, अलग-अलग धर्म का पालन करते हैं और वे विभिन्न जातियों से सम्बन्ध रखते हैं।
एक समूह की प्राथमिकता दूसरे समूह के साथ टकराव का कारण बन सकती है। इस विवाद को बल प्रयोग से भी हल किया जा सकता है। जो भी समूह अधिक शक्तिशाली होगा वह अपनी शर्ते मनवा लेगा और दूसरे लोगों को इसे स्वीकार करना होगा। किन्तु यह आक्रोश का कारण बनेगा। (UPBoardSolutions.com) लोकतन्त्र इस समस्या का एकमात्र शांतिपूर्ण हल उपलब्ध कराता है। लोकतन्त्र में कोई भी स्थायी विजेता नहीं होता। विभिन्न समूह परस्पर शांतिपूर्वक रह सकते हैं। भारत जैसे विविधता । भरे देश में लोकतन्त्र विभिन्न प्रकार के लोगों को एक साथ रहने में मदद करता है।

प्रश्न 8.
“1958-1961 ई. के बीच का चीन का अकाले सरकारी नीतियों का परिणाम था।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
चीन में 1958 से 1961 ई. के बीच भीषण अकाल पड़ा। इस अकाल में लगभग 3 करोड़ लोग मारे गये। उस समय चीन की अर्थव्यवस्था भारत की अर्थव्यवस्था से अच्छी नहीं थी। चीन में लोकतांत्रिक व्यवस्था न होने के कारण सरकार लोगों की अधिक फिक्र नहीं करती थी। यदि चीन में बहुदलीय चुनावी व्यवस्था होती, विपक्षी दल होता और सरकार की आलोचना कर सकने वाली स्वतन्त्र मीडिया होती तो इतने सारे लोग भूख से नहीं मरे होते।

प्रश्न 9.
लोकतन्त्र को सरकार के अन्य स्वरूपों की अपेक्षा बेहतर क्यों माना जाता है?
उत्तर:
लोकतन्त्र को सरकार के अन्य स्वरूपों से बेहतर इसलिए माना जाता है क्योंकि यह लोगों की आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व करता है। लोकतन्त्र शासक या (UPBoardSolutions.com) तानाशाह की सनक पर निर्भर नहीं है। लोकतन्त्र लोगों के लिए है तथा एक लोकतांत्रिक सरकार सदैव लोगों के प्रति उत्तरदायी है जिसका विवरण इस प्रकार है

  1. यह राजनैतिक समानता के सिद्धान्त पर आधारित है जो यह स्वीकार करता है कि सबसे निर्धन एवं सबसे कम पढ़े-लिखे लोगों की भी समाज में वही स्थिति है जो अमीर व शिक्षित लोगों की है। इस प्रकार लोकतंत्र नागरिकों की गरिमा में वृद्धि करता है।
  2.  लोकतन्त्र सरकार के अन्य स्वरूपों की अपेक्षा बेहतर है क्योंकि यह हमें इसकी गलती सुधारने का अवसर प्रदान करती है।
  3.  लोकतन्त्र मतभेदों एवं विवादों से निपटने का तरीका उपलब्ध कराता है।
  4.  लोकतन्त्र निर्णय लेने की गुणवत्ता में सुधार करता है क्योंकि यह मंत्रणा एवं परिचर्चा पर आधारित होता है।
  5. लोकतन्त्र प्रत्येक समस्या का शान्तिपूर्ण समाधान उपलब्ध कराता है। यह भारत जैसे देश के लिए उपयुक्त है जिसमें भाषा, धर्म एवं संस्कृति आधारित भिन्नताएँ पायी जाती हैं। भारतीय लोकतन्त्र ने भिन्नता में एकता बनाए रखते हुए एक शांतिपूर्ण समाज उपलब्ध कराया है।

प्रश्न 10.
किन्हीं दो देशों के नाम बताएँ जहाँ नियमित रूप से चुनाव कराए जाते हैं किन्तु उन्हें लोकतांत्रिक देश नहीं कहा जा सकता? इसके कारण भी बताएँ।
उत्तर:
चीन और मैक्सिको लोकतांत्रिक देश नहीं हैं क्योंकि चीन में चुनाव लोगों को कोई गम्भीर विकल्प उपलब्ध नहीं कराते। उन्हें शासन कर रहे दल (कम्युनिस्ट पार्टी) और उसके द्वारा अनुमोदित उम्मीदवारों को ही चुनना पड़ता है। मैक्सिको में 1930 (इसकी आजादी के दिन से) से सन् 2000 तक प्रत्येक चुनाव में पी. आर. आई. (इंस्टीट्यूशनल रिवोल्यूशनरी पार्टी) ही विजयी होती आई थी क्योंकि विपक्षी दल कभी भी जीत ही नहीं पाए। पी.आर.आई. चुनाव में गन्दे हथकण्डे अपनाकर जीतने के लिए कुख्यात थी। किसी प्रकार (UPBoardSolutions.com) के चुनाव कराना ही पर्याप्त नहीं है। अपितु चुनाव में उपलब्ध विकल्पों में से किसी एक को चुनने की स्थिति भी होनी चाहिए। किन्तु मैक्सिको में शासक दल को पराजित नहीं किया जा सकता था, चाहे लोग उसके विरुद्ध ही क्यों न हों। इसलिए लोकतन्त्र एक स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव पर आधारित होना चाहिए जिसमें सत्ताधारी दल के हार जाने के भी पूर्ण अवसर हों। लेकिन चीन और मैक्सिको में ऐसा नहीं है।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकतांत्रिक एवं अलोकतांत्रिक सरकारों के मध्य अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लोकतांत्रिक एवं अलोकतांत्रिक सरकारों के मध्य अन्तर लोकतांत्रिक सरकार
UP Board Solutions for Class 9 Social Science Civics Chapter 2 लोकतंत्र लोकतन्त्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

प्रश्न 2.
भारतीय लोकतन्त्र की प्रमुख समस्याएँ बताइए तथा उन समस्याओं को दूर करने के उपाय बताइए।
उत्तर:
भारतीय लोकतन्त्र की प्रमुख समस्याएँ इस प्रकार हैं

  1. असामाजिक तत्वों की भूमिका- चुनावों में असामाजिक तत्वों की भूमिका बहुत बढ़ गयी है। चुनावों के दौरान मतदाताओं पर किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष में मतदान करने के लिए दबाव डाला जाता है। चुनाव के दौरान मत खरीदे और बेचे जाते हैं और मतदान केन्द्रों पर कब्जा किया जाता है।
  2. जातिवाद और सम्प्रदायवाद- जातिवाद एवं सम्प्रदायवाद भारतीय लोकतन्त्र के सम्मुख उपस्थित एक गम्भीर समस्या है। चुनाव के लिए प्रत्याशियों का चयन करते समय सभी राजनीतिक दल जातीय समीकरण को महत्त्व देते हैं। मतदाता भी मतदान करते समय जातिवाद तथा सम्प्रदायवाद से प्रभावित होकर मतदान करते हैं। कई राजनीतिक दलों का गठन भी सम्प्रदाय तथा जातिवाद के आधार पर किया गया है। जातिवाद के आधार पर लोगों में आपसी झगड़े होते रहते हैं जो लोकतन्त्र की बड़ी समस्या का कारण बनते हैं।
  3. सामाजिक तथा आर्थिक असमानता- किसी भी देश में लोकतन्त्र की सफलता के लिए सामाजिक एवं आर्थिक समानता का होना अनिवार्य होता है। भारत में इसका अभाव है। समाज में सभी नागरिकों को समान नहीं समझा जाता। जाति, धर्म तथा वंश आदि के आधार पर नागरिकों में भेदभाव किया जाता है। आर्थिक दृष्टि से अमीर तथा गरीब की खाई बहुत बड़ी है।
  4. निरक्षरता- भारत में बहुत बड़ी संख्या में लोग अनपढ़ हैं। उन्हें अपने अधिकारों तथा कर्तव्यों के बारे में पूरा ज्ञान नहीं है। अनपढ़ व्यक्ति देश की समस्याओं को ठीक प्रकार से नहीं समझ सकते। उनका दृष्टिकोण संकुचित होता है और वे जातिवाद, भाषावाद तथा (UPBoardSolutions.com) सम्प्रदायवाद की भावनाओं में पड़े रहते हैं। अनपढ़ता के कारण देश में राजनीतिक समस्याओं के बारे में स्वस्थ जनमत का निर्माण नहीं हो सकता। अतः निरक्षरता लोकतन्त्र की सफलता में बाधक बनती है।

लोकतंत्र की समस्याओं को दूर करने के उपाय

  1. सरकार द्वारा लोकतन्त्र में व्याप्त समस्याओं के निराकरण के लिए निम्न उपाय अपनाये जा सकते हैं|
  2.  चुनावों में धर्म तथा जाति के प्रयोग में कड़ी पाबन्दी लगा देनी चाहिए, धर्म अथवा जाति के आधार पर राजनैतिक । दलों के गठन को रोका जाए और चुनावों के दौरान धर्म अथवा जाति के आधार पर वोट माँगने वाले उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर देना चाहिए।
  3. नागरिकों में सामाजिक व आर्थिक असमानता को दूर करने के उपाय करने चाहिए।
  4. नागरिकों को शिक्षित करने का प्रबन्ध करना चाहिए। शिक्षित तथा राजनीतिक दृष्टि से जागरूक नागरिक ही कुशल ईमानदार तथा निःस्वार्थी प्रतिनिधियों का चुनाव कर सकते हैं।
  5. समाज में लोकतंत्रीय मूल्यों का विकास करना चाहिए, प्रत्येक नागरिक को चाहिए कि वह अन्य नागरिकों के अधिकारों तथा स्वतंत्रताओं का आदर करें।

प्रश्न 3.
लोकतन्त्र किसे कहते हैं? लोकतन्त्र के गुण-दोषों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लोकतन्त्र से आशय-वह शासन पद्धति जिसमें शासक लोगों द्वारा निर्वाचित किए जाते हैं, को लोकतन्त्र कहते हैं। इस प्रकार लोकतन्त्र का अर्थ है लोगों द्वारा शासन। लोकतंत्र के गुण :

  1.  लोकतन्त्र में किसी की भी जय या पराजय स्थायी नहीं होती।
  2. लोकतन्त्र मतभेदों एवं विवादों से निपटने का तरीका उपलब्ध कराती है।
  3.  लोकतन्त्र नागरिकों की गरिमा में वृद्धि करता है क्योकि यह राजनैतिक समानता के सिद्धान्त पर आधारित है जो
    यह स्वीकार करता है कि सबसे निर्धन एवं सबसे कम पढ़े-लिखे लोगों की भी समाज में वही स्थिति है जो अमीर | व शिक्षित लोगों की है। लोग किसी शासक की प्रजा नहीं हैं अपितु वे स्वयं शासक हैं।
  4.  लोकतन्त्र लोगों की जरूरतों को प्रत्युत्तर देती है। एक लोकतांत्रिक सरकार सदैव लोगों के प्रति जवाबदेह है।
  5. लोकतन्त्र निर्णय करने की गुणवत्ता में सुधार लाती है क्योंकि ये संविधान एवं परिचर्चा पर आधारित होते हैं।
  6. लोकतन्त्र प्रत्येक समस्या का शांतिपूर्ण समाधान उपलब्ध कराता है। यह भारत जैसे देश के लिए उपयुक्त है जिसमें भाषा, धर्म एवं संस्कृति आधारित भिन्नताएँ पायी जाती हैं।

भारतीय लोकतन्त्र ने भिन्नता में एकता बनाए रखते हुए एक शांतिपूर्ण समाज उपलब्ध कराया है।

  1.  लोकतन्त्र भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है क्योंकि यह चुनावी प्रतिस्पर्द्ध पर आधारित है।
  2. जनसाधारण को पता नहीं होता कि उनके लिए क्या अच्छा है; न ही उन्हें कोई निर्णय लेने का समय होता है।
  3. लोकतन्त्र में नेता बदलते रहते हैं। यह अस्थिरता का कारण बनता है।
  4.  लोकतन्त्र राजनैतिक प्रतिद्वन्द्विता एवं शक्ति का खेल है। इसमें नैतिकता के लिए कोई स्थान नहीं है।
  5. निर्वाचित नेता लोगों के सर्वश्रेष्ठ हितों से परिचित नहीं होते। यह गलत निर्णयों का कारण बनता है।

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प्रश्न 4.
‘लोकप्रिय सरकारें अलोकतांत्रिक हो सकती हैं और लोकप्रिय नेता स्वेच्छाचारी हो सकते हैं।’ जिम्बाब्वे के सन्दर्भ में इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
जिम्बाब्वे ने सन् 1980 में स्वतन्त्रता प्राप्त की। इस देश में तभी से जानु पी. एफ. दल का शासन है। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद से इस देश पर रॉबर्ट मुगाबे का शासन है। जिम्बाब्वे में नियमित रूप से चुनाव कराए जा रहे हैं और हर बार रॉबर्ट मुगाबे का दल चुनाव में विजयी हो रहा है।
रॉबर्ट मुगाबे यद्यपि अपने देश में लोकप्रिय है किन्तु वह चुनाव में अनुचित साधनों का प्रयोग करता है। राष्ट्रपति की शक्तियाँ बढ़ाने और उसे कम जवाबदेह बनाने के लिए संविधान में कई बार संशोधन किए जा चुके हैं। विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं को सताया जाता है और उनकी सभाओं को तितर-बितर किया जाता है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों एवं आन्दोलनों को गैर कानूनी घोषित (UPBoardSolutions.com) कर दिया गया है। राष्ट्रपति की आलोचना का अधिकार सीमित है।
मीडिया पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में है और केवल सत्ताधारी दल की विचारधारा का प्रसार करते हैं। स्वतन्त्र अखबारों को सत्ताधारी दल के विरुद्ध कुछ भी लिखने पर सताया जाता है। सरकार न्यायालय के ऐसे फैसलों की परवाह नहीं करती जो उसके विरुद्ध जा रहे हों और जजों पर दबाव डाला जाता है।
उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट है कि लोकतन्त्र में शासकों का लोकप्रिय अनुमोदन किया जाए, यही पर्याप्त नहीं है। लोकप्रिय सरकारें आलोकतांत्रिक हो सकती हैं और लोकप्रिय नेता स्वेच्छाचारी हो सकता है।

प्रश्न 5.
क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था सभी राज्यों के लिए उपयुक्त है?
उत्तर:
अनेक लोगों का विचार है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था केवल उन्हीं देशों के लिए उपयुक्त है जो आर्थिक तथा औद्योगिक दृष्टि से विकसित हैं। उनके विचार में यह प्रणाली भारत एवं पाकिस्तान जैसे विकासशील देशों के लिए उपयुक्त नहीं है। उन विचारकों का कहना है कि देश का ठीक तथा शीघ्र (UPBoardSolutions.com) विकास तानाशाही शासन में ही संभव है क्योंकि उसमें अनुशासन रहता है और निर्णय शीघ्र किया जा सकता है। वाद-विवाद में समय नष्ट नहीं करना पड़ता और निर्णय लेते समय सरकार को अगले चुनावों को ध्यान में रखना पड़ता है। किन्तु यह विचार उपयुक्त नहीं है।

यदि हम संयुक्त-राज्य अमेरिका, इंग्लैण्ड तथा भारत जैसे लोकतंत्रीय देशों की ओर ध्यान करें तो हमें यह बात स्पष्ट दिखाई देगी कि इन देशों की सरकारें देश के विकास के लिए बहुत अच्छा कार्य कर रही हैं। सरकार द्वारा नागरिकों की भलाई के लिए अनेक योजनाएँ लागू की गई हैं और लोगों को समान रूप से शिक्षा तथा रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं।
इसके दूसरी ओर तानाशाही शासन में तानाशाह द्वारा नागरिकों की भलाई की ओर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता और लोगों को भी सरकार की आलोचना करने का अधिकार नहीं होती। देश के विकास की ओर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता और थोड़ा-बहुत विकास का लाभ तानाशाह तथा शासक दल के अन्य सदस्यों द्वारा हथिया लिया जाता है। वे गैर-कानूनी तथा भ्रष्ट उपायों से धन इकट्ठा करने में लगे रहते हैं।

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UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 10 (Section 3)

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 10 मानवीय संसाधन : व्यवसाय (अनुभाग – तीन)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 10 Social Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 10 मानवीय संसाधन : व्यवसाय (अनुभाग – तीन).

 

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राथमिक व्यवसाय से आप क्या समझते हैं ? किन्हीं दो प्राथमिक व्यवसायों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
प्राथमिक व्यवसाय भोजन-प्राप्ति तथा पृथ्वी पर जीवित रहने के लिए मनुष्य किसी-न-किसी रूप में कोई-न-कोई कार्य अवश्य करता है। सामान्य जन्तुओं को अपने भोजन के लिए स्वयं इधर-उधर घूमना पड़ता है तथा बड़े जन्तुओं को अपने भोजन की आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए एक बड़े क्षेत्र की आवश्यकता होती है। मनुष्य की स्थिति अन्य जन्तुओं से भिन्न है। मनुष्य ने श्रम-विभाजन किया है, जिससे सभी लोग केवल खाद्य पदार्थों के उत्पादन में ही न लगे रहे। इस व्यवस्था में कुछ लोग तो खाद्य पदार्थों के उत्पादन में लग जाते हैं और कुछ लोगों को समाज की अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई अन्य काम-धन्धे करते हैं। इस प्रकार के व्यवसाय को प्राथमिक व्यवसाय कहते हैं। प्राथमिक व्यवसाय के अन्तर्गत आखेट, पशुपालन, मत्स्यपालन, कृषि तथा खनन कार्य की गणना की जाती है
1. आखेट एवं संग्रहण – समाज का सबसे आरम्भिक रूप आखेट अवस्था का था। इस युग में लोग छोटे-छोटे समूहों में अलग-अलग रहते और शिकार करते थे। जब मानव को जंगली जानवरों से भय हुआ तो उसने उन्हें मारना शुरू कर दिया और उनका शिकार करके अपना पेट भरना भी सीख लिया। इस प्रकार आखेट मानव का सबसे प्राचीन व्यवसाय बन गया। पृथ्वी पर अभी भी कुछ प्रदेशों के लोग। सादा जीवन बिताते हैं। ऐसे लोग पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर करते हैं। वे खाद्य पदार्थों की खोज में इधर-उधर घूमते रहते हैं। पशु-पक्षियों के आखेट तथा झीलों और नदियों से मछली पकड़ कर ये (UPBoardSolutions.com) लोग संग्रहण से प्राप्त अपने भोजन की कमी को ही पूरा नहीं करते, वरन् इनसे उन्हें अतिरिक्त पौष्टिकता भी मिलती है। ये लोग शिकार के लिए साधारण हथियार; जैसे-भाले, धनुष-बाण, जाल आदि का प्रयोग करते हैं। अफ्रीका के पिग्मी तथा मलेशिया के सेमांग लोग उष्ण कटिबन्धीय वनों में रहते हैं। अफ्रीका के ही बुशमैन और ऑस्ट्रेलिया के आदिम लोग उष्ण कटिबन्धीय मरुस्थल में रहते हैं एवं इनुइट तथा लैप्स उत्तर-ध्रुवीय प्रदेशों में रहते हैं। भारत में अब आखेट का महत्त्व अत्यधिक कम हो चुका है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, असोम, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा तथा दक्षिण भारत की आदिम जनजातियाँ आखेट द्वारा ही अपना जीवन-यापन करती हैं। वन्य-जीवों की संख्या लगातार कम होते रहने के कारण सरकार ने वन्य-जीवों के आखेट पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। इसके अतिरिक्त वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण के कारण यह व्यवसाय लुप्तप्राय ही हो चुका है।

2. पशुपालन – भारत में पशुपालन व्यवसाय कृषि के पूरक रूप में किया जाता है। यह पाश्चात्य देशों के वाणिज्यिक पशुपालन से सर्वथा भिन्न है। देश की दो-तिहाई कृषक जनसंख्या अपने जीविकोपार्जन के लिए गाय, बैल, भैंस आदि पालती है, जो उनके कृषि-कार्य में भी सहायक होते हैं। कुछ आदिवासी वर्ग भी पशुपालन द्वारा आजीविका प्राप्त करते हैं। पशुपालन पर आधारित प्रमुख उद्योग दुग्ध उत्पादन या डेयरी उद्योग है। वैसे तो हमारे देश में गायों तथा भैंसों से दुग्ध उत्पादन विदेशों की तुलना में अल्प ही है, किन्तु देश में इनकी संख्या अधिक होने के कारण भारत 1999-2000 ई० में विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन सका। वर्ष 2000-01 के दौरान 81 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 मिलियन टन अधिक था। पशुधन से देश में 9.8 मिलियन लोगों तथा सहायक क्षेत्र में 8.6 मिलियन लोगों को नियमित रोजगार मिलता है। यहाँ राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अनुसार पिछले ढाई दशक में दुग्ध उत्पादन में तीन गुना वृद्धि हुई है। इस बोर्ड द्वारा उठाये गये कदमों (UPBoardSolutions.com) अर्थात् ‘श्वेत क्रान्ति’ या ‘ऑपरेशन फ्लड’ द्वारा यह सम्भव हो पाया है। देश में इस समय 7 करोड़ दुग्ध उत्पादक हैं। दूध उत्पादन में भैंसों का सर्वाधिक योगदान है। भारत में विश्व की 57% भैंसें तथा 16% गायें हैं।

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प्रश्न 2.
खनन व्यवसाय क्या है ? भारतीय खनन व्यवसाय की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
या
खनन व्यवसाय में लगे प्रमुख राज्यों का वर्णन कीजिए। खनन व्यवसाय में किये जाने वाले सुधारों के लिए उपाय लिखिए।
उत्तर :
खनन व्यवसाय धरती को खोदकर खनिज पदार्थों को निकालना ही खनन कहलाता है। भारत में भारी मात्रा में खनिज; जैसे-लोहा, मैंगनीज, अभ्रक, ताँबा, कोयला आदि खानों में से निकाले जाते हैं। वर्तमान समय में खनन प्राथमिक व्यवसाय न रहकर एक गौण व्यवसाय बन गया है। वर्तमान समय में इस खनन कार्य में बहुत अधिक लोग लगे हुए हैं। विशेषताएँ

1. भारत खनिजों के मामले में एक भाग्यशाली देश है, परन्तु यहाँ खनन कार्य में आधुनिक तकनीक का प्रयोग बहुत ही कम किया जाता है। देश में 3,600 खदानों में से मात्र 880 खदानें ही यन्त्रीकृत हैं, जो देश के 85% खनिजों का उत्पादन करती हैं। शेष 2,720 खदानों से केवल 15% खनिज उत्पादन होता है।
2. भारत का अधिकांश खनन व्यवसाय व्यक्तिगत क्षेत्र में है, जिसके कारण वह व्यवस्थित नहीं है। इसी कारण भारत सरकार ने अभ्रक व कोयले की खदानों को राष्ट्रीयकरण कर दिया है।
3. भारत के अधिकांश खनिज छोटा नागपुर का पठार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश में पाये जाते हैं। कुछ राज्य खनिज प्राप्ति में शून्य हैं तथा कुछ राज्यों-ओडिशा, आन्ध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, असोम, कर्नाटक, गोआ आदि में विविध प्रकार के खनिज पदार्थ मिलते हैं।
4. भारत में हिमालय क्षेत्र में विभिन्न खनिजों के (UPBoardSolutions.com) विशाल भण्डार हैं। भारत में बॉम्बे-हाई से खनिज तेल प्राप्त किया जाता है। यहाँ अनेक क्षेत्रों में खनिजों के अन्वेषण का काम भी चल रहा है।
5. भारत में लौह-अयस्क, मैंगनीज व अभ्रक के विशाल भण्डार हैं। भारत इन खनिजों का निर्यात करता है।

खनन व्यवसाय में लगे प्रमुख राज्य
दक्षिण भारत का पठार भारत के खनिज पदार्थों का मुख्य स्रोत है। खनन व्यवसायों में लगे राज्यों का विवरण निम्नलिखित है–

1. झारखण्ड – खनन व्यवसाय की दृष्टि से भारत में झारखण्ड का स्थान सर्वोपरि है। अभ्रक व कोयले के उत्पादन में इस राज्य का भारत में प्रथम तथा लोहे व बॉक्साइट के उत्पादन में द्वितीय स्थान है। झारखण्ड में देश की खनिज सम्पत्ति के कुल मूल्य का 33% प्राप्त होता है।
2. पश्चिम बंगाल – यहाँ लोहे, कोयले, अभ्रक, चूने का पत्थर, मैंगनीज आदि खनिजों के विशाल भण्डार हैं। देश की खनिज सम्पत्ति के कुल मूल्य का 16% भाग यहाँ से प्राप्त होता है।
3. अन्य राज्य – मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ से देश को खनिज-सम्पदा के मूल्य का 14%, ओडिशा से 8% तथा आन्ध्र प्रदेश से 6% प्राप्त होता है। शेष 23% भाग महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल व असोम राज्यों से प्राप्त होता है।

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सुधार के उपाय
भारत में खनिज सम्पत्ति के समुचित रूप से उपयोग व दोहन के लिए आवश्यक है कि खनन व्यवसाय का पिछड़ापन दूर करके उसको उन्नत बनाया जाए। भारत के खनन व्यवसाय में सुधार के लिए निम्नलिखित उपाय किये जाने चाहिए

  • भारत में अधिक-से-अधिक खानों को यन्त्रीकृत किया जाना चाहिए, जिससे खनिजों का उत्पादन बढ़ जाए।
  • कोयले व अभ्रक की खानों के समान अन्य महत्त्वपूर्ण खनिज पदार्थों की खानों का भी राष्ट्रीयकरण किया जाना चाहिए।
  • खानों को खोदने का कार्य व्यवस्थित (UPBoardSolutions.com) ढंग से किया जाना चाहिए।
  • खनिज पदार्थों के उपयोग को बढ़ाने के लिए यातायात का विकास किया जाना चाहिए।
  • खनिज पदार्थों को खोदने वे खानों से निकालने में नयी विधियों का प्रयोग किया जाना चाहिए जिससे खनिजों का अपव्यय न हो।
  • खनिजों का आवश्यकता से अधिक उत्पादन भी नहीं करना चाहिए और अयस्कों को खुले स्थानों पर एकत्र भी नहीं करना चाहिए। इससे उनकी गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 3.
मत्स्य व्यवसाय के प्रमुख क्षेत्र कहाँ-कहाँ हैं ? इनका विवरण दीजिए।
या
भारत में मत्स्य व्यवसाय की समीक्षा कीजिए।
उत्तर :
मत्स्य-पालन भारत के प्रमुख प्राथमिक व्यवसायों में से एक है। देश के पास 20 लाख वर्ग किमी का विस्तृत मत्स्य संग्रह क्षेत्र है, जिससे बड़ी मात्रा में मछलियाँ प्राप्त की जा सकती हैं। भारत के पास विशाल जलमग्न तट, सक्रिय समुद्री धाराएँ तथा विशाल नदियाँ हैं, जो समुद्र में मछलियों को भोज्य सामग्री पहुँचाती हैं। इन अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण भारत में मत्स्य-व्यवसाय का भविष्य उज्ज्वल है। एक अनुमान के अनुसार भारत में लगभग 60 लाख लोग मात्स्यिकी क्षेत्र के रोजगार में लगे हुए हैं।

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भारत में दो प्रकार के मत्स्य संसाधन उपलब्ध हैं-आन्तरिक या ताजा मत्स्य क्षेत्र (यमुना, शारदा, गंगा आदि नदियाँ, झीलें व तालाब) तथा सागरीय मत्स्य क्षेत्र। वर्ष 1950-51 से 2000-01 की अवधि में आन्तरिक मत्स्य क्षेत्र में चौदह गुना वृद्धि हुई है, जब कि सागरीय मत्स्य क्षेत्र में पाँच गुना। मत्स्य व्यवसाय ने लोगों को रोजगार के अवसर तथा आय के साधन उपलब्ध कराये हैं। वर्ष 2003-04 में देश को मछलियों के (UPBoardSolutions.com) निर्यात से १ 5,739 करोड़ की विदेशी मुद्रा भी प्राप्त हुई। वर्तमान में विश्व के मत्स्य उत्पादक देशों में भारत का चौथा स्थान है। केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल प्रमुख मत्स्योत्पादक राज्य हैं। भारत में मत्स्य व्यवसाय भी अनेक समस्याओं से घिरा हुआ है, जिन्हें दूर करने के लिए भारत सरकार अनेक उपाय कर रही है। इन उपायों में मछुआरों को आर्थिक तथा वित्तीय सहायता, विशाल मत्स्य नौकाओं की व्यवस्था, मछलियों के संग्रह हेतु शीतगृहों की सुविधाएँ आदि प्रमुख हैं।

सरकार समय-समय पर पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा मत्स्य उद्योग को प्रोत्साहन देती रही है। पिछले कुछ वर्षों में मछली उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि हुई है। मछली उद्योग के वैज्ञानिक विकास तथा अनुसन्धान के लिए 1961 ई० में बम्बई (अब मुम्बई) में एक केन्द्रीय मछली शिक्षण संस्थान खोला गया तथा समुद्री मछलियों के अध्ययन के लिए एक अनुसन्धानशाला भी स्थापित की गयी। इस प्रकार कहा जा सकता है कि देश का मछली व्यवसाय धीरे-धीरे विकसित हो रहा है।

प्रश्न 4.
हरित क्रान्ति का वर्णन करते हुए इसको सफल बनाने के लिए उपयुक्त सुझाव दीजिए।
या
हरित क्रान्ति को परिभाषित कीजिए एवं इसके कोई चार तत्त्व लिखिए। [2010]
या

भारत में हरित क्रान्ति को सफल बनाने के लिए कोई दो उपाय सुझाइए। [2013]
या

हरित क्रान्ति किसे कहते हैं? [2015]
या

हरित क्रान्ति से आप क्या समझते हैं? भारत में हरित क्रान्ति को सफल बनाने के लिए चार सुझाव दीजिए। [2018]
उत्तर :

हरित क्रान्ति

हरित क्रान्ति से आशय कृषि में वैज्ञानिक तकनीकी का प्रयोग करके उन्नत एवं प्रमाणित बीज तथा । रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कर, बहुफसली प्रणाली को अपनाकर, सिंचाई साधनों तथा सिंचित क्षेत्रों में वृद्धि कर कृषि उत्पादन में अधिकाधिक वृद्धि करना है। देश के परम्परागत कृषि के तरीकों में सुधार करने के लिए 1958 ई० में ‘इण्डियन सोसायटी ऑफ एग्रोनॉमी’ की स्थापना हुई। इसके प्रयासों से देश में पहली बार 120 लाख (UPBoardSolutions.com) टन गेहूं के स्थान पर 170 लाख टन गेहूं पैदा हुआ। पचास लाख टन की इस आकस्मिक वृद्धि को अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक श्री बोरलॉग ने हरित क्रान्ति’ (Green Revolution) की संज्ञा दी। इसके बाद से ही भारतीय कृषि वैज्ञानिकों ने अधिक उपज देने वाली गेहूं की अनेक संकरण प्रजातियाँ विकसित कीं, जिनकी प्रति हेक्टेयर उपज अत्यन्त उत्साहवर्द्धक रही। ऐसी ही स्थिति धान की प्रजातियों की भी रही। इस प्रकार 1960 ई० के बाद देश में हरित क्रान्ति का प्रसार होने लगा और देश खाद्यान्नों के सम्बन्ध में आत्मनिर्भर होने लगा। हरित क्रान्ति के दौरान सरकार ने वर्ष 1964-65 में ‘गहन कृषि कार्यक्रम चलाया। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत विशिष्ट फसलों के उत्पादन पर ध्यान केन्द्रित किया गया। वर्ष 1966-67 में भयंकर अकाल का सामना करने और कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए अधिक उपज बीज कार्यक्रम चलाया गया। बाद में इस कार्यक्रम में ‘बहुफसली कार्यक्रम’ को भी सम्मिलित कर लिया गया।

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हरित क्रान्ति द्वारा देश के कृषि उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि की जा सकती है। हरित क्रान्ति के मुख्य घटक या तत्त्व निम्नलिखित हैं

  • अधिक उत्पादन देने वाली फसलों का बोया जाना।
  • रासायनिक उर्वरकों का अधिकाधिक प्रयोग करना।
  • कृषि में उन्नत बीजों तथा वैज्ञानिक यन्त्रों-उपकरणों का प्रयोग करना।
  • कृषि शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना।
  • कृषि अनुसन्धानों की व्यवस्था करना।
  • पौध संरक्षण के लिए कीटनाशक, कृमिनाशक तथा खरपतवार नाशकों का अधिकाधिक प्रयोग करना।
  • सघन कृषि जिला कार्यक्रम को अपनाया जाना।
  • सिंचाई सुविधाओं का विस्तार तथा भूमि-सुधार करना।
  • कृषि की नवीन आधुनिक विधियों व तकनीक का प्रयोग करना।
  • फसलों के संग्रह व विक्रय-सुविधाओं में वृद्धि करना।
  • पर्याप्त कृषि-ऋणों की (UPBoardSolutions.com) व्यवस्था करना।
  • सघन कृषि क्षेत्र कार्यक्रम का प्रारम्भ करना।
  • बहुफसली कार्यक्रम लागू करना।

भारत में हरित क्रान्ति को सफल बनाने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिये जा सकते हैं|

  • कृषि उत्पादन से सम्बन्धित सरकारी विभागों में उचित समन्वय होना चाहिए।
  • उर्वरक व उत्तम बीजों के वितरण की उचित व्यवस्था होनी चाहिए तथा इनके प्रयोग के बारे में किसानों को उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
  • कृषि साख की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
  • सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए तथा भू-क्षरण पर नियन्त्रण किया जाना चाहिए।
  • कृषि उपज के विपणन की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
  • भूमि का गहनतम व अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए।
  • भू-सुधार कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग (UPBoardSolutions.com) से लागू किया जाना चाहिए।
  • प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। .
  • फसल बीमा योजना शीघ्रता एवं व्यापकता से लागू की जानी चाहिए।

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प्रश्न 5.
भारतीय कृषि के विकास में प्रयोग की जाने वाली नवीन तकनीकों का उल्लेख कीजिए तथा भारतीय कृषि की भावी सम्भावनाओं पर प्रकाश डालिए [2009]
उत्तर :
भारतीय कृषि में प्रयुक्त नवीन तकनीकी एवं परिवर्तन नि:सन्देह स्वतन्त्रता के पश्चात् भारतीय कृषि में अत्यधिक प्रगति हुई है, जिसके निम्नलिखित कारण हैं

  • चकबन्दी कार्य का विस्तार।
  • उन्नत किस्म के बीजों का प्रयोग।
  • रासायनिक उर्वरकों, जैव खादों एवं कीटनाशक दवाओं का प्रयोग।
  • जुताई का वैज्ञानिक स्वरूप एवं सिंचाई साधनों का विस्तार।
  • मृदा परीक्षण की सुविधा तथा कृषि उपजों के भण्डारण की व्यवस्था।
  • कृषि ऋणों की व्यवस्था एवं उपजों का लाभकारी मूल्य।
  • कृषि विकास में विभिन्न संस्थाओं का योगदान तथा नवीन कृषि यन्त्र एवं उपकरणों का प्रयोग।
  • सहकारी कृषि का प्रचलन तथा व्यापारिक उपजों के क्षेत्र में वृद्धि।

उपर्युक्त प्रयासों के परिणामस्वरूप भारतीय कृषि उद्योग का स्वरूप धारण करती जा रही है। तकनीकी प्रसार के कारण कृषि उत्पादन में भी अत्यधिक वृद्धि हुई है।

कृषि विकास की भावी सम्भावनाएँ

भोजन मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता है। कृषक द्वारा इसकी आपूर्ति खाद्यान्न उगाकर पूरी की जा रही है। भारत में वर्ष 1999-2000 में 208.9 मिलियन टन खाद्यान्नों का उत्पादन किया गया था, परन्तु वर्ष 2000-01 में मौसम की अनियमितता एवं अनिश्चितता के कारण इसका उत्पादन लगभग 50 मिलियन टन घट गया। किसी भी देश में खाद्यान्नों की आवश्यक मात्रा का निर्धारण उसकी जनसंख्या के आकार तथा देशवासियों के जीवन-स्तर द्वारा निर्धारित होता है। सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि सन् 2050 तक भारत की जनसंख्या 150 करोड़ हो जाएगी, जिसके भरण-पोषण के लिए 40 करोड़ टन खाद्यान्नों की (UPBoardSolutions.com) आवश्यकता होगी। यद्यपि यह लक्ष्य प्राप्त करना कठिन नहीं है, परन्तु हमारे सीमित आर्थिक संसाधनों पर भारी दबाव पड़ेगा, जिससे शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं सहित अन्य विकास-कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं जुट पाएँगे तथा कृषि के व्यावसायीकरण और औद्योगिक स्वरूप को प्राप्त करने में कठिनाई आएगी, क्योंकि हमें अपनी जनसंख्या के भरण-पोषण के लिए भूमि का अधिक प्रयोग खाद्यान्न के उत्पादन में ही करना पड़ेगा। इससे हम व्यापारिक फसलों के उत्पादन में भूमि के क्षेत्रफल में वृद्धि नहीं कर सकेंगे। व्यापारिक फसलें हमारे लिए विदेशी मुद्रा के अच्छे स्रोत हैं; अत: भारत की कृषि में विकास की सम्भावनाएँ अच्छी हैं, परन्तु कृषि को औद्योगिक स्वरूप प्रदान करने की सम्भावना अधिक अच्छी नहीं मानी जा सकती। यह तभी सम्भव है जब हम जनसंख्या-वृद्धि पर अंकुश लगाएँ।

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प्रश्न 6.
गेहूं की खेती के लिए अनुकूल भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए। भारत में इसके वितरण का वर्णन कीजिए।
या
गेहूँ की खेती के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए तथा भारत में इसके उत्पादन क्षेत्र बताइए।
या
भारत में गेहूं की खेती का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए-[2009, 12]

  1. अनुकूल भौगोलिक दशाएँ,
  2. उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र,
  3. उत्पादन।

उत्तर :
गेहूँ भारत की प्रमुख उपज तथा महत्त्वपूर्ण एवं प्रमुख खाद्यान्न फसल है। भारत विश्व का 10% गेहूं उत्पन्न कर पाँचवाँ स्थान बनाये हुए है। भारत की कृषि भूमि के 12.4% भाग तथा खाद्यान्न उत्पादन में लगी भूमि के 18.7% भाग पर गेहूँ की कृषि की जाती है। ‘हरित क्रान्ति’ ने भारत के गेहूँ उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि की है। इस क्षेत्र में भारत अब पूर्णत: आत्मनिर्भर हो चुका है तथा निर्यात करने की स्थिति में आ गया है। यहाँ (UPBoardSolutions.com) गेहूं का प्रति हेक्टेयर उत्पादन लगभग 2,750 किग्रा है।
अनुकूल भौगोलिक दशाएँ – गेहूं की उपज के लिए अनुकूल भौगोलिक दशाएँ निम्नलिखित हैं

1. जलवायु – 
गेहूं समशीतोष्ण जलवायु की प्रमुख उपज है। इसकी कृषि के लिए निम्नलिखित जलवायु दशाएँ उपयुक्त रहती हैं

  • तापमान – गेहूँ की कृषि के लिए 10° से 25° सेल्सियस तापमान उपयुक्त रहता है। इसकी कृषि के लिए मौसम स्वच्छ होना चाहिए। पाला, कोहरा, ओला एवं तीव्र व शुष्क पवनें इसकी फसल को बहुत हानि पहुँचाती हैं।
  • वर्षा – गेहूँ की कृषि के लिए 50 से 75 सेमी तक वर्षा की आवश्यकता होती है। वर्षा धीरे-धीरे लगातार होती रहनी चाहिए। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई के द्वारा गेहूं का उत्पादन किया जाता क

2. मिट्टी – गेहूँ की कृषि के लिए हलकी दोमट या बलुई दोमट मिट्टी उत्तम मानी जाती है। इस मिट्टी में चूने तथा नाइट्रोजन के अंश का विद्यमान होना इसकी कृषि के लिए लाभदायक होता है। साथ ही मिट्टी समतल और भुरभुरी होनी चाहिए। अधिक उपज की प्राप्ति के लिए मिट्टी में कम्पोस्ट, यूरिया तथा अमोनियम सल्फेट आदि रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते रहना लाभप्रद रहता है।

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3. मानवीय श्रम – गेहूँ उत्पादन के लिए अधिक मानवीय श्रम की आवश्यकता होती है। खेत जोतने, बोने, निराई-गुड़ाई करने, कटाई, गहाई आदि में पर्याप्त संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है, परन्तु जिन देशों में गेहूं उत्पादन में मशीनों का उपयोग किया जाता है, वहाँ मानवीय श्रम कम अपेक्षित होता है। भारत में मशीनों का प्रयोग कम किये जाने के कारण गेहूँ की कृषि सघन जनसंख्या वाले मैदानी भागों में की जाती है।

गेहूँ के उपज-क्षेत्र अथवा वितरण- उत्तर के विशाल मैदान में, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दोमट मिट्टी में गेहूं की अच्छी पैदावार होती है। देश के शेष भागों मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात तथा महाराष्ट्र के कुछ भागों में भी गेहूँ उगाया जाता है। इस प्रकार गेहूँ उत्तरी भारत की प्रमुख फसल है, जहाँ देश का 70% गेहूँ उगाया जाता है। उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा गेहूँ उत्पादक राज्य है, जहाँ देश (UPBoardSolutions.com) का 35.5% गेहूं उत्पन्न किया जाता है। पंजाब दूसरा बड़ा गेहूँ उत्पादक है, जो देश का 25% गेहूं उत्पन्न करता है। मध्य प्रदेश, हरियाणा तथा राजस्थान अन्य प्रमुख गेहूँ उत्पादक राज्य हैं।

गेहूँ का उत्पादन–वर्ष 1950-51 ई० में 97 लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूँ की कृषि की गयी थी, जो बढ़कर 2004-05 ई० में 265 लाख हेक्टेयर हो गयी। इसी अवधि में गेहूं का उत्पादन 64 लाख टन से बढ़कर 720 लाख टन हो गया। गेहूँ की प्रति हेक्टेयर उपज भी 6.6 कुन्तल से बढ़कर 27.18 कुन्तल हो गयी। इस प्रकार इस अवधि में प्रति हेक्टेयर उत्पादन में लगभग चार गुना वृद्धि हुई। भारत में गेहूँ उत्पादन में वृद्धि एक सफल क्रान्ति है, जिसके फलस्वरूप वर्ष 2011-12 (अनुमानित) में 902.32 टन हो गया। विश्व के गेहूं उत्पादन में चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस एवं कनाडा के बाद भारत का पाँचवाँ स्थान है। भारत में हुई हरित क्रान्ति को वास्तव में गेहूँ क्रान्ति ही कहा जाना चाहिए।

प्रश्न 7.
चावल की फसल का विवरण निम्नलिखित शीर्षकों में कीजिए
(क) अनुकूल भौगोलिक दशाएँ तथा (ख) प्रमुख उत्पादक राज्य और वितरण।
या
उत्तर :
भारत की खाद्यान्न फसलें कौन-सी हैं ? चावल उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक परिस्थितियों, उपज क्षेत्रों तथा उनके उत्पादन के बारे में बताइए।
उत्तर भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसलें गेहूँ, चावल (धान), मक्का, ज्वार, बाजरा, जौ, रागी आदि हैं। इनमें गेहूं एवं चावल प्रमुख तथा महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसलें हैं।

चावल गेहूँ के पश्चात् भारत की दूसरी महत्त्वपूर्ण फसल तथा प्रमुख खाद्यान्न है। देश की कुल कृषि भूमि के 25% भाग पर विश्व का 21% चावल उत्पन्न कर भारत, चीन के बाद चावल उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। यद्यपि यहाँ चीन से अधिक क्षेत्र पर चावल बोया (UPBoardSolutions.com) जाता है, परन्तु प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम होने के कारण यहाँ वार्षिक उत्पादन चीन से कम है।
भौगोलिक परिस्थितियाँ – चावल उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक परिस्थितियाँ निम्नलिखित हैं

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1. जलवायु – चावल उष्णार्द्र जलवायु की उपज है। मानसूनी जलवायु इसकी कृषि के लिए अधिक
उपयुक्त है। चावल की खेती के लिए निम्नलिखित जलवायु दशाएँ आवश्यक होती हैं|

  • तापमान – चावल की कृषि के लिए सामान्यत: 20° से 27° सेल्सियस तापमान आवश्यक होता है।
  • वर्षा – चावल की कृषि के लिए अधिक नमी की आवश्यकता होती है, क्योंकि इसके पौधे पूर्णत: जल से भरे खेतों में लगाये जाते हैं। इसके लिए 100 से 200 सेमी वर्षा आवश्यक होती है। कम वर्षा वाले भागों में सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है।

2. मिट्टी – चावल की कृषि के लिए समतल एवं उपजाऊ डेल्टाई तथा जलोढ़ मिट्टियाँ उत्तम होती हैं। काँपयुक्त मिट्टी सर्वश्रेष्ठ होती है। नदियों के डेल्टा, बाढ़ के मैदान तथा सागरतटीय क्षेत्र चावल की कृषि के लिए अधिक उपयुक्त रहते हैं। चावल की अधिक उपज लेने के लिए मृदा में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग लाभदायक रहता है।

3. मानवीय श्रम – 
चावल उत्पादन के लिए अधिक संख्या में सस्ते श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि फसलों की पौध लगाने, जुताई, बुआई, कटाई आदि कार्यों में मानवीय श्रम की प्रधानता होती है। खेतों में वर्धनकाल तक नमी बनी रहने के कारण मशीनों का उपयोग नहीं हो पाता है; अत: इसकी कृषि में श्रम की अत्यधिक महत्ता है। यही कारण है कि विश्व का 95% चावल दक्षिण-पूर्वी एशिया के सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों में ही उत्पन्न किया जाता है।

उपज (उत्पादन ) के क्षेत्र तथा वितरण – चावल की खेती (उत्पादन) प्रायद्वीप के तटवर्ती भागों, पूर्वी-गंगा के मैदान, ब्रह्मपुत्र घाटी, हिमालय की तलहटी, पूर्वी मध्य प्रदेश तथा पंजाब में अधिक होती है। महानदी डेल्टा (ओडिशा), गोदावरी (UPBoardSolutions.com) तथा कृष्णा डेल्टा (आन्ध्र प्रदेश) एवं कावेरी डेल्टा (तमिलनाडु) में चावल की दो या तीन फसलें प्रति वर्ष प्राप्त की जाती हैं। नयी प्रौद्योगिकी, उन्नत किस्म के बीजों, सिंचाई सुविधाओं तथा उर्वरकों के अधिक प्रयोग से वर्तमान में पंजाब चावल का सबसे बड़ा उत्पादक हो गया है।

उत्पादन – वर्ष 1950-51 ई० में 3 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्रफल में चावल का उत्पादन किया गया था, जो बढ़कर 2000-01 ई० में 4.43 करोड़ हेक्टेयर हो गया। इस अवधि में चावल का उत्पादन 2.5 करोड़ टन से बढ़कर 8.49 करोड़ टन हो गया। चावल की प्रति हेक्टेयर उपज में भी अत्यधिक वृद्धि हुई है। यह 6.7 कुन्तल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 19.13 कुन्तल प्रति हेक्टेयर हो गयी। यह वृद्धि लगभग तीन गुनी है। वर्ष 2004-05 में देश में 8.95 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ तथा वर्ष 2011-12 (अनुमानित) में 1034.06 टन चावल का उत्पादन हुआ था।

प्रश्न 8.
गन्ने की कृषि के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं, प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों तथा उत्पादन का वर्णन कीजिए। [2018]
या
गन्ने की उपज के लिए आवश्यक तापमान तथा वर्षा की दशाओं का वर्णन कीजिए। गन्ना उत्पादन के दो मुख्य राज्यों के नाम बताइट।
या
भारत में गन्ना उत्पादन क्षेत्रों का वर्णन कीजिए तथा गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त दो भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख कीजिए।
या
गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त तापक्रम, वर्षा एवं मिट्टी का उल्लेख कीजिए। [2013]
उत्तर :
आवश्यक भौगोलिक दशाएँ – 
गन्ना उत्पादन के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ आवश्यक होती हैं
1. जलवायु – गन्ना उष्णार्द्र जलवायु की उपज है। गन्ने की कृषि के लिए निम्नलिखित जलवायु उपयुक्त रहती है

  • तापमान – उष्ण कटिबन्धीय पौधा होने के कारण गन्ने की फसल के लिए उच्च तापमान; अर्थात् प्राय: 20° से 35° सेल्सियस की आवश्यकता होती है। गन्ने की फसल लगभग एक वर्ष में तैयार होती है। कोहरा तथा पाला इसकी फसल को हानि पहुँचाते हैं।
  • वर्षा – गन्ने की फसल के लिए अधिक नमी की (UPBoardSolutions.com) आवश्यकता होती है। अत: गन्ना 100 से 150 सेमी वर्षा वाले भागों में उगाया जाता है। इसके लिए वर्षा वर्षभर लगातार मन्द गति से होती रहे तो अच्छा है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई द्वारा गन्ना उगाया जाता है। इसी कारण नहरों तथा नलकूपों द्वारा सिंचित क्षेत्र गन्ने के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र बन गये हैं।

2. मिट्टी – गन्ने की कृषि के लिए उपजाऊ दोमट तथा नमीयुक्त एवं चिकनी मिट्टी उपयुक्त रहती है। दक्षिणी भारत की लावायुक्त मिट्टी में गन्ना अच्छा पैदा होता है। चूना एवं फॉस्फोरसयुक्त मिट्टी गन्ने की कृषि के लिए विशेष उपयोगी होती है। गन्ना मिट्टी से पोषक तत्वों को अधिक शोषण करता है; अत: इसके लिए रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते रहना चाहिए।

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3. मानवीय श्रम – 
गन्ने के खेत तैयार करने, बोने, निराई-गुड़ाई करने तथा उन्हें काटकर मिलों तक पहुँचाने के लिए कुशल एवं सस्ते श्रमिकों की आवश्यकता होती है। इसी कारण गन्ना सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों में ही उगाया जाता है।

प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र – भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में गन्ना उगाया जाता है, परन्तु उत्तरी भारत गन्ना उगाने का मुख्य क्षेत्र है। देश का तीन-चौथाई से भी अधिक गन्ना उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों में उगाया जाता है। अन्य गन्ना उत्पादक राज्यों में आन्ध्र प्रदेश, बिहार एवं झारखण्ड मुख्य हैं। पंजाब, हरियाणा, गुजरात, ओडिशा तथा राजस्थान राज्यों के क्षेत्रों में भी गन्ने का उत्पादन किया (UPBoardSolutions.com) जाता है। उत्तर प्रदेश देश का 50%, पंजाब तथा हरियाणा 15% तथा बिहार व झारखण्ड 12% गन्ने का उत्पादन करते हैं। पिछले दो दशकों से दक्षिणी राज्यों के गन्ना उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि हुई है।

उत्पादन – गन्ना भारत की प्रमुख औद्योगिक फसल है। यहाँ गन्ने का क्षेत्रफल तथा उत्पादन विश्व में सर्वाधिक रहा है, परन्तु पिछले कुछ वर्षों से विश्व के गन्ना उत्पादन में ब्राजील ने प्रथम स्थान प्राप्त कर लिया है। विश्व के कुल गन्ने का 20% क्षेत्रफल भारत में पाया जाता है। यहाँ विश्व का 22.4% गन्ना उत्पन्न किया जाता है। भारतीय कृषकों के लिए गन्ना एक नकदी फसल है। वर्ष 2000-01 में भारत में 4.2 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र पर गन्ने की खेती की गयी थी तथा 299.2 मिलियन टन गन्ने का उत्पादन हुआ। वर्ष 2009-10 में भी भारत में 4.2 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र पर गन्ने की खेती की गई तथा 19.0 मिलियन टन गन्ने का उत्पादन हुआ। भारत में गन्ने की प्रति हेक्टेयर उपज 71 टन तक आ गयी है।

प्रश्न 9.
कपास की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए तथा भारत में उसके उत्पादन के क्षेत्रों पर प्रकाश डालिए। [2009]
या

भारत में कपास किन राज्यों में पैदा होती है? इसकी खेती के लिए दो उपयुक्त भौगोलिक दशाएँ बताइट।
या
भारत में कपास की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी एवं वर्षा की दशाओं का वर्णन कीजिए तथा तीन राज्यों में कपास के उत्पादन का विवरण दीजिए।
या
कपास की खेती के लिए उपयुक्त तापक्रम, वर्षा एवं मिट्टी का उल्लेख कीजिए। [2013]
उत्तर :
भौगोलिक दशाएँ-कपास की खेती के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाओं की आवश्यकता होती है
1. तापमान – कपास के पौधे के लिए साधारणत: 20° से (UPBoardSolutions.com) 35° सेग्रे तापमान की आवश्यकता होती है। पाला एवं ओला इसके लिए हानिकारक होते हैं। अत: इसकी खेती के लिए 200 दिन का पालारहित मौसम होना आवश्यक होता है। केपास की बौंडियाँ खिलने के समय स्वच्छ आकाश तथा तेज एवं चमकदार धूप होनी आवश्यक है, जिससे कि रेशे में पूर्ण चमक आ सके।

2. वर्षा – 
कपास की खेती के लिए साधारणतया 50 से 100 सेमी वर्षा पर्याप्त होती है, परन्तु यह वर्षा कुछ अन्तर से होनी चाहिए। अधिक वर्षा हानिकारक होती है, जब कि 50 सेमी से कम वर्षा वाले भागों में सिंचाई के सहारे कपास का उत्पादन किया जाता है।

3. मिट्टी – 
कपास के उत्पादन के लिए आर्द्रतायुक्त चिकनी एवं गहरी काली मिट्टी अधिक लाभप्रद रहती : है, जिससे पौधों की जड़ों में पानी भी न रहे और उन्हें पर्याप्त नमी भी प्राप्त होती रहे; इस दृष्टिकोण से दक्षिणी भारत की काली मिट्टी कपास के लिए बहुत ही उपयोगी है।

4. मानवीय श्रम – 
कपास की खेती को बोने, निराई-गुड़ाई करने और बौंडियाँ चुनने के लिए सस्ते एवं पर्याप्त संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता होती है। कपास चुनने के लिए अधिकतर स्त्रियाँ श्रमिक उपयुक्त रहती हैं।

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उत्पादक क्षेत्र–गुजरात, महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश राज्य मिलकर देश की 65% कपास का उत्पादन करते हैं। तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, पंजाब व राजस्थान अन्य प्रमुख कपास उत्पादक राज्य हैं। देश की कृषि योग्य भूमि को लगभग 6% क्षेत्र कपास उत्पादन में संलग्न है। विगत 50 वर्षों में कपास उत्पादन क्षेत्र में लगभग डेढ़ गुनी वृद्धि हुई है।

केपास के उत्पादन के लिए लावा से निर्मित काली मिट्टी सर्वोत्तम होती है; अतः भारत में कपास का अग्रणी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र है, जो देश की लगभग एक-चौथाई (25%) कपास पैदा करता है। गुजरात के लावा से निर्मित मिट्टी के क्षेत्र में भी (UPBoardSolutions.com) कपास की अच्छी पैदावार होती है। यह राज्य देश की 15% कपास पैदा करता है। विगत वर्षों में पंजाब में कपास की खेती का बहुत विकास हुआ है। यह राज्य देश की 14% से अधिक कपास पैदा करता है। आन्ध्र प्रदेश लगभग 13% कपास उगाता है। हरियाणा (10%), राजस्थान (8%), कर्नाटक (7%) तथा तमिलनाडु (4%) अन्य महत्त्वपूर्ण कपास उत्पादक राज्य हैं।

प्रश्न 10.
भारत में कहवा की खेती के लिए भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन कीजिए। कहवा उत्पादक क्षेत्रों का भी वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत में कहवा की खेती का विधिवत् आरम्भ 1830 ई० से हुआ था। इसका प्रथम बाग मैसूर राज्य (अब कर्नाटक) में लगाया गया था।
आवश्यक भौगोलिक दशाएँ – कहवा की खेती के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ निम्नलिखित होती हैं
1. तापमान – कहवा के उत्पादन के लिए औसत वार्षिक तापमान 15° से 18° सेग्रे आवश्यक होता है। कहवे का पौधा अधिक धूप को सहन नहीं कर पाता। इसी कारण इसे छायादार वृक्षों के साथ उगाया जाता है।
2. वर्षा – कहवे के लिए 150 से 200 सेमी वर्षा पर्याप्त रहती है। जिन क्षेत्रों में वर्षा का वितरण समान होता है, वहाँ 300 सेमी वर्षा पर्याप्त रहती है। सामान्यतया इसकी खेती 900 मीटर से 1,800 मीटर की ऊँचाई वाले भागों में छायादार वृक्षों के साथ की जाती है। इसके लिए वनों से साफ की गयी भूमि अधिक उपयुक्त रहती है, क्योंकि इसमें उपजाऊ तत्त्व अधिक मिले रहते हैं।
3. मिट्टी – कहवे के लिए दोमट एवं ज्वालामुखी उद्गार से निकली लावा से निर्मित मिट्टी अधिक उपयुक्त रहती हैं, जिनमें क्रमशः जीवांश एवं लोहांश मिले होते हैं। कर्नाटक, तमिलनाडु एवं केरल राज्यों की लैटेराइट मिट्टियों में कहवे का उत्पादन किया जाता है।
4. मानवीय श्रम – कहवे के पौधों को लगाने, निराई-गुड़ाई करने, बीज तोड़ने, सुखाने, पीसने आदि कार्यों के लिए पर्याप्त संख्या में सस्ते एवं कुशल श्रमिकों की आबश्यकता पड़ती है। इन कार्यों के लिए बच्चे एवं स्त्रियाँ श्रमिक अधिक उपयुक्त रहते हैं।

  • उत्पादक क्षेत्र – भारत के प्रमुख कहवा उत्पादक राज्य कर्नाटक, तमिलनाडु व केरल हैं। आन्ध्र प्रदेश में भी विगत वर्षों में कहवे के बागान लगाये गये हैं।
  • कर्नाटक – देश में सर्वप्रथम कहवा उत्पादन इसी राज्य में हुआ था। कुर्ग, चिकमगलूर, हसन, शिमोगा, दक्षिणी कर्नाटक प्रमुख उत्पादक जिले हैं। कर्नाटक का देश के कहवा उत्पादन में प्रथम स्थान है। देश के कुल उत्पादन का 56% भाग यहीं पैदा होता है।

  • केरल – यहाँ वायनाद, इदुकी, कोट्टायम अर्नाकुलम, (UPBoardSolutions.com) पालघाट, क्विलोन, अलप्पी प्रमुख कहवा उत्पादक जिले हैं।

  • तमिलनाडु – यहाँ मदुरै, तिरुनेलवेली, नीलगिरि, कोयम्बटूर, सलेम प्रमुख कहवा उत्पादक जिले हैं।

  • आन्ध्र प्रदेश – यहाँ का विशाखापत्तनम् जिला मुख्य कहवा उत्पादक स्थान है।

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प्रश्न 11.
भारत में जूट की कृषि के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का वर्णन करते हुए उसके उत्पादन के क्षेत्रों पर प्रकाश डालिए। [2014]
या
भारत में जूट उद्योग का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों में कीजिए
(क) उत्पादक क्षेत्र/राज्य तथा (ख) उत्पादन एवं व्यापार।
या
भारत में जूट उद्योग का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए- [2009, 10]
(i) स्थानीयकरण के कारक, (ii) प्रमुख केन्द्र।
उत्तर :
जूट एक प्रमुख व्यापारिक एवं मुद्रादायिनी फसल है। भारत में जूट की कृषि के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का विवरण निम्नवत् है

1. तापमान – जूट उष्ण कटिबन्धीय, उष्णार्द्र जलवायु की उपज है। इसके पौधों के लिए उच्च तापमान की आवश्यकता होती है। इसके लिए प्रायः 25 से 35° सेल्सियस तापमान आवश्यक है। भारत की जलवायु इन दशाओं का निर्माण करती है।
2. वर्षा – जूट की कृषि के लिए उच्च तापमान के साथ-साथ अधिक नमी की भी आवश्यकता होती है। इसकी खेती के लिए प्रायः 100 से 200 सेमी वार्षिक वर्षा आवश्यक है। जूट के पौधों की वृद्धि के समय वर्षा समान गति से लगातार होती (UPBoardSolutions.com) रहनी चाहिए। वर्षा की ये दशाएँ भारत में उपलब्ध हैं।
3. मिट्टी – जूट की खेती के लिए उपजाऊ काँप या चिकनी मिट्टी उपयुक्त होती है। जूट का पौधा भूमि से अधिक पोषक तत्त्व ग्रहण करता है; अत: जूट की खेती नदियों के डेल्टाई भागों में की जाती है। भारत, में गंगा व ब्रह्मपुत्र के डेल्टाई भाग इसकी खेती के लिए अति उपयुक्त हैं। यहाँ नदियों की बाढ़े प्रतिवर्ष नयी उपजाऊ काँप मिट्टी जमा करती रहती हैं। इस मिट्टी में नमी की मात्रा अधिक होती है।
4. श्रमिक – भारत एक विशाल जनसंख्या वाला कृषिप्रधान देश है, जहाँ जूट बोने, गलाने, रेशा अलग करने, धोने तथा सुखाने के लिए श्रमिक बड़ी संख्या में सस्ती दर पर उपलब्ध हैं। यही कारण है कि जूट की खेती सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों; जैसे–पश्चिम बंगाल व बिहार में की जाती है।

उत्पादक क्षेत्र एवं उत्पादन – भारत में जूट का उत्पादक क्षेत्र निरन्तर बढ़ाया जा रहा है। भारत के जूट उत्पादक क्षेत्र वर्ष 1950-51 में 5.7 लाख हेक्टेयर से बढ़कर वर्ष 1999-2000 में 8.5 लाख हेक्टेयर तक पहुँच चुका था। भारत में जूट उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं

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  1. पश्चिम बंगाल – जूट उत्पादन में पश्चिम बंगाल राज्य भारत में प्रथम स्थान रखता है। यहाँ बर्दवान, हुगली, हावड़ा, मुर्शिदाबाद, मिदनापुर, कूच-बिहार, चौबीस परगना, मालदा, नादिया, बाँकुडा आदि जिलों में जूट उगाई जाती है। यहाँ भारत का कुल 60% जूट पैदा किया जाता है।
  2. बिहार – भारत का दूसरा प्रमुख जूट उत्पादक राज्य बिहार है। (UPBoardSolutions.com) यहाँ चम्पारन, दरभंगा, पूर्णिया, सारन, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी तथा सन्थाल परगना जिलों में जूट की खेती की जाती है। यह देश के कुल उत्पादन का 15% जूट पैदा करता है।
  3. असोम – असोम में ब्रह्मपुत्र नदी की निचली घाटी में जूट की खेती की जाती है। नुवगाँव, गोलपाड़ा, कछार, कामरूप आदि जिलों में मुख्य रूप से जूट उगाया जाता है। यहाँ कृषि योग्य भूमि के 95% भाग पर देश का लगभग 10% जूट पैदा किया जाता है।

अन्य जूट उत्पादक राज्य हैं–ओडिशा, मेघालय, त्रिपुरा, आन्ध्र प्रदेश तथा मध्य प्रदेश। इन सभी राज्यों में स्थानीयकरण के प्रमुख कारक उपर्युक्त भौगोलिक दशाओं का पाया जाना है। वर्तमान समय में भारत विश्व में 40% जूट का उत्पादन कर प्रथम स्थान बनाये हुए है। भारत में जूट का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1,907 किग्रा है। वर्ष 2004–05 में 96 लाख गाँठ (1 गाँठ = 180 किग्रा) तथा
वर्ष 2011-12 में 110.00 लाख गाँठ (1 गाँठ = 180 किग्रा) जूट का उत्पादन किया गया था।

प्रश्न 12.
भारतीय कृषि की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल आधार है। आज भी भारत की दो-तिहाई जनसंख्या की आजीविका का आधार कृषि ही है। भारतीय कृषि में खाद्यान्न फसलों की प्रधानता रहती है तथा अधिकांश उत्पादन घरेलू खपत के लिए होता है। वर्तमान समय में किये गये विभिन्न प्रयासों के द्वारा भारतीय कृषि अपने निर्वाहमूलक स्वरूप को छोड़कर व्यापारिक स्वरूप में बदलती जा रही है। भारतीय कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

1. दूर-दूर तक बिखरे खेतों के कारण भारतीय जोतें आर्थिक दृष्टि से अलाभकारी होती जा रही थीं। अतः खेतों को चकबन्दी द्वारा एक स्थान पर ला दिया गया, जिससे उनमें कृषि-यन्त्रों एवं उपकरणों का प्रयोग कर प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन किया जा सके।
2. सन् 1960 से भारत में हरित क्रान्ति के द्वारा अधिक उपज देने वाले सुधरे हुए एवं परिष्कृत बीजों का प्रयोग किया जाने लगा है। इसके साथ ही अल्प अवधि में पककर तैयार होने वाली फसलों के उन्नत . बीज भी कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा खोज लिये गये हैं। इस प्रकार वर्ष में एक खेत से तीन फसलों तक का उत्पादन किया जाने लगा है।
3. भारतीय कृषि में कीटों, फफूदी तथा खरपतवार से फसलों की रक्षा के लिए अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों तथा खरपतवारनाशकों का प्रयोग किया जाने लगा है। इससे खाद्यान्नों का पर्याप्त उत्पादन प्राप्त होने लगा है।
4. लगातार खेती करने तथा मिट्टी की उर्वरता को बनाये रखने के लिए खेतों में जैविक खादों का अधिकाधिक उपयोग तथा मिट्टी में पाये जाने वाले लवणों-खनिजों का वैज्ञानिक परीक्षण सम्भव हुआ है। इससे उर्वरकों का समुचित उपयोग सम्भव हो पाया है।
5. मिट्टी के अधिकतम उपयोग के लिए उसका संरक्षण किया जाना अति आवश्यक है। इसके लिए खेतों की जुताई वैज्ञानिक विधि से करनी चाहिए। ढालू भूमि में शुष्क कृषि हेतु मेड़बन्दी तथा समोच्च-रेखीय जुताई बहुत लाभकारी रहती है। इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है तथा उसका अपरदन भी नहीं होता। देश में बहुफसली, मिश्रित खेती एवं फसलों के हेर-फेर द्वारा मिट्टी की उर्वरता को बनाये रखने के प्रयास (UPBoardSolutions.com) किये गये हैं।
6. कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए आधुनिक यन्त्रों एवं उपकरणों का उपयोग महत्त्वपूर्ण होता है। इनसे न केवल उत्पादन में वृद्धि होती है, अपितु जुताई, बुवाई, निराई, कीटनाशकों के छिड़काव, सिंचाई, उर्वरकों के प्रयोग, परिवहन तथा विपणन में लगने वाले समय व धन की भी पर्याप्त बचत होती है।
7. भण्डारण की समुचित व्यवस्था न होने के कारण कृषि उत्पादन का बहुत बड़ा भाग नष्ट हो जाता था। वर्तमान समय में निजी, सहकारी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों में कृषि भण्डारण की व्यापक व्यवस्था कर ली गयी है। इससे अतिरिक्त कृषि उत्पादन न केवल सुरक्षित रहता है, अपितु कृषकों को भी उचित मूल्य मिल जाता है।
8. फसलोत्पादन पर अधिक निवेश के साथ ही उन्नत बीजों एवं रासायनिक उर्वरकों का उपयोग भी तब तक उचित है जब तक सुनिश्चित सिंचाई की सुविधा न हो। विगत पाँच दशकों में खाद्यान्नों का कुल उत्पादन तीन-गुने से अधिक हो गया है, जब कि इस अवधि में सिंचित भूमि के क्षेत्रफल में मात्र तीन-गुनी वृद्धि हुई है।
9. जोतों के विभाजन को रोकने के लिए संसहकारी कृषि को बढ़ाने के प्रयास किये गये हैं। इससे यान्त्रिक उपकरणों का प्रयोग कर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। महाराष्ट्र एवं गुजरात में सहकारी कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है।
10. जिस भूमि पर खेती हो रही हो, उसकी प्राकृतिक उर्वरता में कमी होना निश्चित है; अतः मिट्टियों का परीक्षण कराते रहना चाहिए। मिट्टी में कम हुए तत्त्वों की कमी को जैविक तथा रासायनिक उर्वरकों से पूरा किया जा सकता है।
11. भारत में कृषि के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक जिले में सहकारी व भूमि विकास बैंक खोले गये हैं। राष्ट्रीयकृत बैंक भी अब कृषकों को आसान शर्तों पर ऋण की सुविधा उपलब्ध कराते हैं।
12. देश में कृषि मूल्य आयोग’ विभिन्न उपजों के लाभकारी मूल्य निर्धारित करता है, जिससे कृषकों को खुले बाजार में कम मूल्यों पर अपने उत्पादों को न बेचना पड़े।
13. देश में राष्ट्रीय बीज निगम, केन्द्रीय भण्डागार निगम, भारतीय खाद्य निगम, भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद्, कृषि विश्वविद्यालय तथा ऐसी ही अनेक संस्थाओं का गठन कृषि के विकास के लिए किया गया है। इससे कृषकों को बहुत लाभ मिलता है।

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प्रश्न 13.
स्वतन्त्रता के बाद कृषि की उन्नति के लिए किये गये सरकार के प्रयासों का वर्णन कीजिए।
या
भारतीय कृषि की दशा सुधारने के लिए केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा किये गये किन्हीं पाँच मुख्य उपायों का उल्लेख कीजिए।
या
भारत में कृषि के विकास के लिए सरकार द्वारा किये गये कोई दो कार्य लिखिए।
उत्तर :
स्वतन्त्रता के पश्चात् सरकार ने भारतीय कृषि को सुधारने के लिए अनेक उपाय किये हैं। इनमें प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं

1. जमींदारी-प्रथा का अन्त – जमींदारी-प्रथा भारतीय किसानों के लिए एक बड़ा अभिशाप थी। भारत सरकार ने इस व्यवस्था को समाप्त करके भूमि के समस्त अधिकार वास्तविक किसानों को दे दिये। कृषित भूमि के उचित वितरण को सुनिश्चित करने के लिए भूमि सम्पत्ति सीमा कानून’ भी लागू किया , गया।

2. चकबन्दी – 
सम्पत्ति उत्तराधिकार कानून के अनुसार कृषित भूमि के बँटवारे के कारण किसानों के जोत प्रायः बिखरे हुए होते थे, जो आर्थिक रूप से अनुपयोगी होते थे। अतएव सरकार ने ऐसे बिखरे खेतों की सीमाएँ पुनः निर्धारित करने हेतु (UPBoardSolutions.com) चकबन्दी व्यवस्था की तथा किसानों में उन्हें बाँट दिया।

3. सिंचाई सुविधाओं का विकास – 
भारतीय कृषि ‘मानसून का जुआ’ कहलाती है। मानसून की अनिश्चित प्रकृति से किसानों को बचाने के लिए सरकार ने सिंचाई की अनेक परियोजनाओं का विकास किया है।

4. उन्नत बीजों का वितरण –
सरकार ने अधिक उपज देने वाली उन्नत किस्म के बीजों का विकास करने के लिए अनेक कृषि विश्वविद्यालय, शोध-संस्थान तथा प्रदर्शन फार्म स्थापित किये हैं।

5. पौध संरक्षण के लिए कीट – रोगनाशकों का प्रयोग – 
अनेक प्रकार के कृषि-रोगों, कीटों तथा टिड्डी दलों के निवारण के लिए रोग तथा कीटनाशकों को किसानों में बाँटने की व्यवस्था की है।

6. रासायनिक उर्वरकों का वितरण – 
सरकार ने रासायनिक उर्वरकों के उत्पादन के लिए अनेक संयन्त्र (कारखाने) स्थापित किये हैं। इन उर्वरकों को सस्ते मूल्य पर किसानों को उपलब्ध कराया। जाता है।

7. कृषि का आधुनिकीकरण – 
कृषि के आधुनिकीकरण के लिए नये उपकरण तथा यन्त्र विकसित किये गये हैं। बड़े (समृद्ध) किसान इनका व्यापक रूप से प्रयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त अनेक प्रकार की प्रौद्योगिकी; जैसे—शुष्क कृषि, बहुशास्य कृषि, अन्त:कृषि, फसलों का हेर-फेर इत्यादि विकसित की गयी हैं। इससे कृषि की उत्पादकता तथा उर्वरता में वृद्धि हुई है।

8. सहकारी सोसायटी तथा बैंकों का विकास – 
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बहुउद्देशीय सहकारी समितियों तथा बैंकों की स्थापना की है, जिससे किसानों का कल्याण हो तथा उन्हें वित्तीय सहायता उपलब्ध हो सके।

9. फसल बीमा योजनाएँ – 
किसानों को प्राकृतिक संकटों से उबारने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक प्रकार की फसल बीमा योजनाएँ चालू की गयी हैं।

10, समर्थन मूल्य – 
किसानों को ऋणदाताओं तथा दलालों (UPBoardSolutions.com) द्वारा शोषण से बचाने के लिए कृषि मूल्य आयोग प्रति वर्ष विविध फसलों के लिए समर्थन मूल्य की घोषणा करता है। भारतीय खाद्य निगम किसानों से सीधे खाद्यान्न खरीदता है।

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यद्यपि भारतीय कृषि की दशा सुधारने के लिए केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा अनेकानेक प्रयास किये गये हैं, तथापि ये सभी प्रयास उस स्तर तक सहायक नहीं हुए हैं कि भारतीय कृषि की स्थिति में पर्याप्त सुधार आ सके। उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी के स्तर को पाने के लिए इसमें और भी सुधार किये जाने चाहिए।

प्रश्न 14.
स्वतन्त्रता के पश्चात् प्रमुख फसलों के उत्पादन और प्रति हेक्टेयर उपज में हुई प्रगति का विवरण दीजिए।
या
क्या भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है ? सप्रमाण अपने कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर :
सन् 1947 में स्वतन्त्रता-प्राप्ति के समय भारत की कृषि अत्यधिक पिछड़ी हुई अवस्था में थी। परिणामत: देश की खाद्यान्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हमें अनेक वर्षों तक विदेशों से करोड़ों रुपये के मूल्य के अनाज का आयात करना पड़ा। देश की खाद्य समस्या को देखते हुए भारत सरकार ने पंचवर्षीय योजनाओं के द्वारा देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक तथा गम्भीर प्रयास किये, जिनके फलस्वरूप सन् 1967-68 में हरित क्रान्ति प्रारम्भ हुई। इस क्रान्ति के कारण देश के कृषि उत्पादन में असाधारण वृद्धि हो गयी और अनाजों के आयातों में कमी हो गयी। किन्तु सन् 1975 में पुन: 74 (UPBoardSolutions.com) लाख टन अनाज का आयात करना पड़ा। वर्ष 1978 से 1980 ई० तक अनाज का आयात नहीं किया गया। सन् 1981-82 में देश को फिर अनाज का आयात करना पड़ा। वर्तमान समय में भारत खाद्यान्नों के मामले में
आत्मनिर्भर हो गया है। अधिक उपज देने वाले बीज, खाद व उर्वरकों का प्रयोग, सिंचाई सुविधाओं में विस्तार तथा कृषि के मशीनीकरण ने उत्पादों की मात्राओं में अत्यधिक वृद्धि की है। इस बात की पुष्टि के लिए प्रमुख फसलों के उत्पादन और प्रति हेक्टेयर उपज में हुई प्रगति का विवरण निम्नलिखित है

1. चावल – 
चावल उत्पादन में भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है। वर्ष 1960-61 में 34.1 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र की अपेक्षा 2000-01 ई० में 44.3 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में चावल बोया गया। इस अवधि में चावल का उत्पादन 34.6 मिलियन टन से 84.9 मिलियन टन हो गया और उपज 10.13 कुन्तल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 19.13 कुन्तल प्रति हेक्टेयर हो गयी। देश में वर्ष 2011-12 (अनुमानित) में 1034.06 टन चावल का उत्पादन हुआ था।

2. गेहूँ – 
गेहूँ भारत की प्रमुख उपज तथा महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न है। यह सबसे पौष्टिक आहार माना जाता है। विश्व के गेहूँ उत्पादन का 9.9% भाग ही भारत से प्राप्त होता है। गेहूं के उत्पादन में भारत का विश्व में पाँचवाँ स्थान (चीन, अमेरिका, रूस तथा कनाडा के बाद) है। वर्ष 2004-05 में गेहूं का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2,718 किग्रा था तथा गेहूँ की कृषि 26.5 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर की गयी थी, जिस पर 72 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन हुआ। खाद्यान्नों के उत्पादन में लगी कुल भूमि के 18.7% भाग पर गेहूँ उगाया जाता है, जो देश की कृषि भूमि का 12.4% भाग घेरे हुए है। कुल खाद्यान्नों में गेहूं का भाग. (UPBoardSolutions.com) लगभग 30% है। भारत में गेहूं उत्पादन में वृद्धि एक सफल क्रान्ति है, जिसके फलस्वरूप वर्ष ।
2011-12 (अनुमानित) में 902.32 टन हो गया। वास्तव में हरित क्रान्ति ही गेहूँ-क्रान्ति है।

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3. दलहन एवं तिलहन – 
भारत दलहन का विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता है। वर्ष 1960-61 ई० में दलहन का उत्पादन क्षेत्र लगभग 23.6 मिलियन हेक्टेयर था, जो 2000-01 ई० में घटकर लगभग 20 मिलियन हेक्टेयर रह गया। फिर भी वर्ष 2008-09 ई० में भारत में 14.57 मिलियन टन दालों का उत्पादन हुआ था।

दलहन की भाँति तिलहन भी बहुत ही महत्त्वपूर्ण फसल है। यह भी हमारे भोजन का प्रमुख अंग है। मूंगफली, तिल, सरसों एवं अरण्डी प्रमुख तिलहन फसलें हैं। भारत में विश्व की लगभग 75% मूंगफली, 25% तिल, 20% अरण्डी तथा 17% सरसों उत्पन्न की जाती है। अलसी, राई, बिनौला, सूरजमुखी आदि अन्य तिलहन फसलें हैं। यहाँ लगभग 67 लाख हेक्टेयर भूमि पर मूंगफली की खेती

की जाती है। सरसों एवं राई की खेती लगभग 73 लाख हेक्टेयर (UPBoardSolutions.com) भूमि पर की जाती है। वर्ष 1960-61 ई० में भारत में तिलहन का कुल उत्पादन 7.0 मिलियन टन था, जो 2000-01 ई० में बढ़कर 18.4 मिलियन टन हो गया।

4. ज्वार, बाजरा(मोटे अनाज) – 
ज्वार, बाजरे और मोटे अनाजों के उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है। इन फसलों के कृष्य क्षेत्रफल में कोई वृद्धि नहीं हुई है, परन्तु उत्पादन में दो-तीन गुना वृद्धि हुई है।

5. मक्का – 
भारत में मक्के की खेती कुछ देर से आरम्भ की गयी, परन्तु प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन के कारण इसकी लोकप्रियता में वृद्धि होती जा रही है। प्रारम्भ में जहाँ मक्के की खेती 32 लाख (3.2 मिलियन) हेक्टेयर भूमि पर की जा रही थी, वहाँ उत्पादन 20 लाख (2 मिलियन) टन था। वर्ष 2008-09 में 7.5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र पर मक्के की खेती की गयी, जिसमें 19.73 मिलियन टन का उत्पादन प्राप्त हुआ।

निष्कर्ष – उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत खाद्यान्न के उत्पादन में लगभग आत्मनिर्भर हो गया है, किन्तु देश की जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि के कारण विद्वानों का अनुमान है कि भारत खाद्यान्न के मामले में अधिक दिनों तक आत्मनिर्भर नहीं रह पाएगा। (UPBoardSolutions.com) अतः देश की आत्मनिर्भरता को बनाये रखने के लिए जनसंख्या में होने वाली निरन्तर तीव्र वृद्धि को नियन्त्रित करना परमावश्यक है।

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प्रश्न 15.
भारत में प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम होने के क्या कारण हैं ? कृषि उत्पादन को बढ़ाने के उपाय लिखिए। [2010, 11]
या
भारतीय कृषि में निम्न उत्पादकता के किन्हीं तीन कारणों पर प्रकाश डालिए तथा इसकी उत्पादकता बढ़ाने हेतु कोई दो महत्त्वपूर्ण सुझाव दीजिए। [2009]
या

भारतीय कृषि की उत्पादकता बढ़ाने हेतु दो सुझाव (उपाय) दीजिए। [2009, 10]
या

भारत में कृषि के पिछड़ेपन के लिए उत्तरदायी किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए। [2010]
या

भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता बढ़ाने के लिए चार सुझाव दीजिए। [2011]
या

भारत में कृषि की न्यून उत्पादकता के पाँच कारणों का उल्लेख कीजिए। [2011,16]
या

कृषि के उत्पादन में वृद्धि करने के लिए किन्हीं दो महत्त्वपूर्ण उपायों को लिखिए। [2011]
या

भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के किन्हीं तीन कारणों का उल्लेख कीजिए तथा उत्पादकता वृद्धि के लिए तीन सुझाव दीजिए। [2015]
उत्तर :

प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम होने के कारण

भारत एक कृषिप्रधान देश है। देश की लगभग 72% जनसंख्या अपनी जीविका के लिए कृषि पर आश्रित है। भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान होने के बावजूद यह पिछड़ी हुई अवस्था में है। अन्य देशों की तुलना में भारत में प्रति हेक्टेयर-कृषि-उत्पादन बहुत कम है। इसके लिए मुख्यतया निम्नलिखित कारण उत्तरदायी हैं|
1. कृषि जोतों का छोटा होना – भारत में कृषि जोतों का आकार बहुत छोटा है। लगभग 51 प्रतिशत जोतों का आकार एक हेक्टेयर से भी कम है। फिर कृषि जोत बिखरी हुई अवस्था में एक-दूसरे से। दूर-दूर हैं। छोटी जोतों पर वैज्ञानिक ढंग से खेती करना सम्भव नहीं होता तथा न ही सिंचाई की समुचित व्यवस्था हो पाती है।
2. कृषिकावर्षा पर निर्भर होना – आज भी भारतीय कृषि का लगभग 80% भाग वर्षा पर निर्भर करता है। वर्षा की अनिश्चितता एवं अनियमितता के कारण भारतीय कृषि ‘मानसून का जूआ’ कहलाती है। देश के कुछ क्षेत्रों में अतिवृष्टि तथा बाढ़ों के कारण फसलें (UPBoardSolutions.com) नष्ट हो जाती हैं।
3. भूमि पर जनसंख्याको अत्यधिक भार – जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण भूमि पर जनसंख्या का भार निरन्तर बढ़ता गया है। परिणामतः प्रति व्यक्ति उपलब्ध भूमि का क्षेत्रफल घटता गया है, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में अदृश्य बेरोजगारी तथा अल्प रोजगार की समस्याएँ बढ़ी हैं और किसानों की गरीबी तथा ऋणग्रस्तता में वृद्धि हुई है।
4. सिंचाई सुविधाओं का अभाव – भारत में सिंचित क्षेत्र केवल 33.14% है। असिंचित क्षेत्रों में किसान अपनी भूमि में एक ही फसल उगा पाते हैं, जिस कारण भारतीय कृषि की उत्पादकता कम है।
5. प्राचीन कृषि-यन्त्र – पाश्चात्य देशों में कृषि के आधुनिक यन्त्रों का प्रयोग किया जाता है, जब कि भारत के अनेक क्षेत्रों में आज भी हल, पटेला, दराँती, कस्सी आदि अत्यधिक प्राचीन यन्त्रों द्वारा कृषि की जाती है, जिस कारण भारतीय कृषि की उत्पादकता कम है।
6. दोषपूर्ण भूमि-व्यवस्था – भारत में अनेक वर्षों तक देश की लगभग 40% भूमि जमींदार, जागीरदार आदि मध्यस्थों के पास रही। किसान इन मध्यस्थों के काश्तकार होते थे। स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद इन मध्यस्थों के उन्मूलन से भी छोटे किसानों की दशा में विशेष सुधार (UPBoardSolutions.com) नहीं हो पाया। आज भी ऐसे असंख्य किसान हैं, जो दूसरों की भूमि पर खेती करते हैं।
7, कृषकों की अशिक्षा तथा निर्धनता – निर्धनता के कारण देश के कृषक आधुनिक यन्त्र, उत्तम बीज, खाद आदि खरीदने तथा उनका प्रयोग करने में असमर्थ हैं। शिक्षा के अभाव के कारण वे आधुनिक कृषि-विधियों का भी प्रयोग नहीं कर पाते। भारत में अधिक उपज देने वाले उन्नत बीजों की भी कमी है। वित्तीय सुविधाओं के अभाव के कारण किसान अपना समय, शक्ति तथा धन कृषि की उन्नति में नहीं लगा पाते।
8. फसलों के रोग – फसले-सम्बन्धी विभिन्न रोगों की समुचित रोकथाम न हो पाने के कारण भी भारतीय कृषि की उत्पादकता कम है। प्रत्येक वर्ष कीटाणु तथा जंगली पशु-पक्षी करोड़ों रुपये की फसलों को नष्ट कर देते हैं।
9. अन्य कारण – भूमि कटाव, जलाधिक्य, नाइट्रोजन की कमी आदि के कारण भी भारतीय कृषि की उत्पादकता कम है।

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कृषि-उत्पादन बढ़ाने के उपाय

भारत में कृषि-उत्पादन बढ़ाने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जाने चाहिए
1. जनसंख्या में तीव्र वृद्धि पर नियन्त्रण – भूमि पर जनसंख्या के अत्यधिक भार को कम करने तथा कृषि जोतों के उपविभाजन तथा विखण्डन को रोकने के लिए देश की जनसंख्या में तीव्र गति से होने वाली वृद्धि को प्रभावी ढंग से नियन्त्रित करना आवश्यक है।

2. सिंचाई सुविधाओं का विकास – 
गाँवों में कुएँ, (UPBoardSolutions.com) ट्यूबवेल, नहरों आदि का समुचित प्रबन्ध करके सिंचाई-सुविधाओं का विकास तथा विस्तार किंया जा सकता है।

3. उन्नत बीजों व खाद की समुचित व्यवस्था – 
सरकारी बीज-गोदामों की स्थापना करके कृषकों को उचित मूल्य पर उन्नत बीज दिये जाने चाहिए। रासायनिक खाद के उत्पादन में वृद्धि करके उसे किसानों को उचित मूल्य पर गाँवों में ही उपलब्ध कराना चाहिए।

4. फसलों की रक्षा – 
जंगली पशुओं, कीटाणुओं तथा रोगों से कृषि-उपजों का बचाव किया जाना चाहिए। बचाव के उपायों का गाँवों में प्रदर्शन और प्रचार होना चाहिए तथा कीटाणुनाशक दवाइयाँ उचित मूल्य पर गाँवों में ही उपलब्धं करायी जानी चाहिए।

5. भूमि संरक्षण – 
वृक्षारोपण, बाँध, मेड़ आदि उपायों द्वारा भूमि का संरक्षण किया जाना चाहिए तथा किसानों को इसके लाभ-हानि से अवगत कराना चाहिए।

6. आधुनिक कृषि – 
यन्त्रों का प्रबन्ध-खेती के पुराने ढंग के औजारों की हानियाँ बतलाकर किसानों को आधुनिक कृषि-यन्त्रों का प्रयोग समझाना चाहिए और इनको उचित कीमतों पर गाँवों में ही उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

7. छोटे तथा बिखरे खेतों का एकीकरण – 
चकबन्दी की सहायता से छोटे व बिखरे खेतों का एकीकरण करके अनार्थिक जोतों को आर्थिक जोतों में बदला जा सकता है। सहकारी खेती को अपनाकर भी खेतों के आकार को बड़ा करके बड़े पैमाने पर खेती की जा सकती है तथा कृषि उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।

8. साख-सुविधाओं का विस्तार – 
किसानों को कम ब्याज पर उत्तम बीज, रासायनिक खाद, आधुनिक यन्त्र आदि खरीदने के लिए पर्याप्त मात्रा में ऋण मिलने चाहिए। इसके लिए सहकारी साख समितियों का विकास किया जाना चाहिए। (UPBoardSolutions.com) भूमि विकास बैंकों तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की अधिक संख्या में स्थापना की जानी चाहिए तथा प्राकृतिक विपत्तियों के समय सरकार द्वारा किसानों को अधिक सहायता दी जानी चाहिए।

9. शिक्षा का प्रसार –
किसानों में शिक्षा का प्रसार करके कृषि सम्बन्धी विभिन्न समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। शिक्षा के प्रसार से किसानों को आधुनिक कृषि-यन्त्रों तथा नयी उत्पादन- विधियों का ज्ञान कराया जा सकता है।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कृषि का भारतीय अर्थव्यवस्था में क्या महत्त्व है ? [2010]
या
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि के किन्हीं दो योगदानों का विवरण दीजिए।
उत्तर :
भारत एक कृषिप्रधान देश है। कृषि इसकी अर्थव्यवस्था की मूल आधार रही है, क्योंकि

  • भारत में कुल क्षेत्रफल का 51% भू-भाग कृषि योग्य है, जब कि विश्व का औसत मात्र 11% ही है।
  • भारतीय जनसंख्या के लगभग दो-तिहाई भाग की जीविकों को आधार कृषि ही है।
  • पशुपालन, मत्स्य-संग्रहण तथा वानिकी की गणना कृषि के अन्तर्गत करते हुए देश के सकल घरेलू उत्पाद में 26% भाग इससे प्राप्त होता है।
  • अधिकांश उद्योगों के कच्चे माल की आपूर्ति कृषि (UPBoardSolutions.com) से ही होती है; जैसे—सूती वस्त्र, चीनी, पटसन, काजू, चाय, कहवा आदि। सूती वस्त्र, चीनी, पटसन तथा चाय के उत्पादन में भारत विश्व में प्रमुख स्थान रखता है।
  • कृषि उपजों के निर्यात से भारत को पर्याप्त विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। कुल निर्यात में कृषि का योगदान 18% है।
  • कृषि उत्पादों पर आधारित उद्योगों में लोगों को पर्याप्त आजीविका के साधन उपलब्ध होते हैं। उपर्युक्त विवरण के आधार पर कहा जा सकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का अत्यधिक महत्त्व है।

प्रश्न 2.
कृषि व्यवसाय की समस्याओं का संक्षिप्त वर्णन करते हुए चकबन्दी के लाभों पर प्रकाश डालिए।
उतर :
कृषि व्यवसाय की कुछ समस्याएँ भी हैं। जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण प्रति व्यक्ति भूमि का क्षेत्रफल घटता जा रहा है। इस प्रकार अधिकतर किसानों की जोते आर्थिक दृष्टि से लाभकारी नहीं रह गयी हैं। वनों और चरागाहों के कम हो जाने के कारण मृदा की उर्वरता बनाये रखने के स्रोत भी सूखते जा रहे हैं। हमारे किसान अभी भी बहुफसली खेती, मिश्रित खेती, पट्टीदार खेती तथा फसलों के वैज्ञानिक हेर-फेर को पूरी तरह अपना नहीं पाये हैं।

आर्थिक दृष्टि से अलाभकारी जोतों के दोष को दूर करने के लिए चकबन्दी कार्यक्रम को चलाया गया है। चकबन्दी का अर्थ है-एक ही परिवार के बिखरे हुए खेतों को एक स्थान पर संगठित करना। देश में अधिकांश भूमि की चकबन्दी की जा चुकी है। चकबन्दी के निम्नलिखित लाभ हैं

  1. चकबन्दी द्वारा छोटे तथा बिखरे हुए खेतों को एक चक (खेत) के रूप में संगठित कर दिया जाता है।
  2. खेतों को आकार बेड़ा हो जाने पर भूमि मेड़ों, रास्तों आदि के बनाने में कम बेकार होती है।
  3. खेती करने में समय तथा श्रम दोनों की बचत होती है, क्योंकि किसान के खेतों के एक ही स्थान पर हो जाने से उसे कृषि-कार्य के लिए अलग-अलग स्थानों पर नहीं जाना पड़ता।
  4. बड़े चक में जुताई, बुआई तथा सिंचाई करना (UPBoardSolutions.com) सुविधाजनक होता है। ट्रैक्टरों द्वारा जुताई, बड़े पैमाने पर खेती तथा एक ही नलकूप की सहायता से सिंचाई की जा सकती है।
  5. एक ही खेत की सुरक्षा करना सुगम होता है।
  6. आधुनिक कृषि-विधियों के प्रयोग, बड़े पैमाने पर खेती, भूमि की बचत आदि के कारण कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है। कृषि-उत्पादन के बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि हो जाती है, जिससे उनके रहन-सहन में सुधार होता है।
  7. चकबन्दी से अन्ततः मुकदमेबाजी कम हो जाती है, जिससे किसानों के धन का अपव्यय घट जाता है।

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प्रश्न 3.
पशुधन को भारत के लिए क्या महत्त्व है ?
उत्तर :
भारत में विश्व के सर्वाधिक पशु पाये जाते हैं। यहाँ गाय, भैंस, भेड़, बकरी, घोड़े, खच्चर, गधे, सूअर, ऊँट, याक इत्यादि पशु पाये जाते हैं, जो अनेक प्रकार से उपयोगी हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, आन्ध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों में बड़ी संख्या में मवेशी पाये जाते हैं। इनसे कृषि में बहुत सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त यातायात, दूध, मांस इत्यादि के लिए भी इनका बहुत महत्त्व है। पशुओं के गोबर से खाद, ईंधन, खालें, चमड़ा, ऊन इत्यादि पदार्थ भी प्राप्त होते हैं। पशुओं की खालें, चमड़ा तथा ऊन उपयोगी निर्यात पदार्थ हैं, जिनसे विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होती है तथा ऊन उद्योग, जूता उद्योग इत्यादि अनेक उद्योग भी विकसित होते हैं। लगभग 1 करोड़ 80 लाख लोग पशुधन क्षेत्रों में मुख्य व सहायक रूप से नियुक्त हैं। पशुधन क्षेत्रों एवं सम्बन्धित उत्पादों से निर्यात आय निरन्तर बढ़ रही है।

प्रश्न 4.
‘श्वेत क्रान्ति’ या ‘ऑपरेशन फ्लड क्या है और इसका क्या महत्त्व है ?
या
‘ऑपरेशन फ्लड’ का क्या तात्पर्य है? उसके दो लाभ बताइए। [2015]
या
‘ऑपरेशन फ्लड’ का क्या तात्पर्य है? इसके दो महत्त्वों का उल्लेख कीजिए। [2015]
या
‘ऑपरेशन फ्लड से आप क्या समझते हैं? भारतीय ग्रामीण विकास में इसके किन्हीं योगदान का वर्णन कीजिए। [2016]
उत्तर :
‘ऑपरेशन फ्लड’ या ‘श्वेत क्रान्ति’ से तात्पर्य दुग्ध-उत्पादन में आशातीत प्रगति से है। समेकित ग्रामीण विकास का यह एक प्रमुख अंग है। इस कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  • देश में दुग्ध उत्पादन तथा दुग्ध उत्पादों (दही, मक्खन, पनीर, घी आदि) की वृद्धि करना।
  • छोटे किसानों की आय में वृद्धि करना।
  • देश में दूध के संग्रह (एकत्रण) तथा वितरण की व्यवस्था करना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करना।

तीव्र गति से जनसंख्या में वृद्धि तथा नगरीय जनसंख्या की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए दुग्ध उत्पादन में और अधिक वृद्धि होनी चाहिए। इसके लिए ‘ऑपरेशन फ्लड’ कार्यक्रम को भारत के प्रत्येक राज्य में तीव्र गति से चलाना आवश्यक है। (UPBoardSolutions.com) देश में ‘श्वेत क्रान्ति’ के विस्तार की आवश्यकता को निम्नलिखित रूप में स्पष्ट किया जा सकता है

  • देश में दूध तथा दुग्ध पदार्थों की सप्लाई को सुनिश्चित करने के लिए डेयरी विकास आवश्यक है।
  • इस क्रान्ति के द्वारा लघु तथा सीमान्त कृषकों को अतिरिक्त आय की प्राप्ति होगी।
  • पशुधन के विकास से खेतों के लिए उर्वरक तथा बायो गैस प्राप्त होगी।
  • इस क्रान्ति से ग्रामीण जनता की निर्धनता दूर होगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों का विकास सुनिश्चित होगा।

ग्रामीण विकास में इसके योगदान अथवा महत्त्व निम्नलिखित हैं

  • सहकारी समितियाँ दूध का संग्रहण तथा विपणन करती हैं। इससे लोगों में सहकारिता की भावना बलवती हुई है।
  • डेयरी व्यवसाय के विकास से ग्रामीण एवं शहरी नागरिकों को एक-दूसरे को समझने में पर्याप्त सहायता मिली है।

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प्रश्न 5.
हरित क्रान्ति की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं ? या हरित क्रान्ति की तीन विशेषताएँ लिखिए। [2015, 16]
या
हरित क्रान्ति की किन्हीं दो विशेषताओं का वर्णन कीजिए। [2015]
उत्तर :
हरित क्रान्ति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • अधिकाधिक उत्पादन देने वाली फसलों का बोया जाना।
  • रासायनिक उर्वरकों का फसलों में अधिकाधिक प्रयोग करना।
  • कृषि में उन्नत बीजों तथा वैज्ञानिक यन्त्रों व उपकरणों का प्रयोग करना।
  • कृषि शिक्षा का प्रचार व प्रसार करना।
  • कृषि अनुसन्धानों की व्यवस्था करना।
  • पौध संरक्षण के लिए कीटनाशक, कृमिनाशक तथा खरपतवारनाशकों का अधिकाधिक प्रयोग करना।
  • सघन कृषि जिला कार्यक्रम को अपनाया जाना।

प्रश्न 6.
भारत में हरित क्रान्ति का विस्तार क्यों आवश्यक है?
उत्तर :
भारत में हरित क्रान्ति के विस्तार की आवश्यकता अनेक कारणों से है, जिनमें निम्नलिखित मुख्य हैं

  1. हमारे देश की जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ रही है। प्रति 35 वर्षों में यह लगभग दो गुनी हो जाती है। इस बढ़ती हुई जनसंख्या को पोषण के लिए अत्यधिक भोजन की आवश्यकता है और यह कार्य हरित क्रान्ति द्वारा ही सम्भव है।
  2. हरित क्रान्ति सम्पन्नता का प्रतीक है, किन्तु वर्तमान समय में यह क्रान्ति देश के उत्तर-पश्चिमी भाग तक ही सीमित है। देश के अनेक भागों में कृषि पिछड़ी हुई दशा में है। इस कारण अनेक प्रदेशों का विकास असन्तुलित है। (UPBoardSolutions.com) सम्पूर्ण देश को कृषि में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सर्वत्र हरित क्रान्ति के विस्तार की आवश्यकता है।
  3. भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। अनेक उद्योग तथा अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार भी कृषि के विकास पर निर्भर हैं। अतएव कृषि के विकास के लिए हरित क्रान्ति के विस्तार की आवश्यकता है।

प्रश्न 7.
भारत में खनन व्यवसाय के पिछड़ेपन के क्या कारण हैं ?
उत्तर :
भारत के खनन व्यवसाय के पिछड़ेपन के निम्नलिखित कारण हैं

  • भारत के अधिकांश खानों में खनन-कार्य के लिए आधुनिक यन्त्रों का प्रयोग नहीं किया जाता। हमारे देश की कुल 3,600 खानों में से केवल 880 खाने ही यन्त्रीकृत हैं, जो देश के 85% खनिजों का उत्पादन करती हैं, बाकी 2,720 खानों से केवल 15% उत्पादन होता है।
  • भारत का 65% खनन व्यवसाय गैर-सरकारी हाथों में है, जिसके कारण खाने खोदने का कार्य व्यवस्थित ढंग से नहीं किया जाता। इससे खानों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता। इसी दृष्टि से भारत सरकार ने अभ्रक व कोयले की खानों का राष्ट्रीयकरण किया है।
  • देश में आन्तरिक जलमार्गों की कमी के कारण भारी खनिजों के परिवहन पर बहुत अधिक व्यय आता है।
  • भारत में व्याप्त खनिज पदार्थों का अभी पूर्ण सर्वेक्षण नहीं हुआ है। हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में खनिजों। के विशाल भण्डार मौजूद हैं।
  • देश में खनिजों के पूर्ण उपयोग करने के साधनों की कमी है।

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प्रश्न 8.
भारत में चाय उत्पन्न करने वाले दो प्रमुख राज्यों के नाम बताए। इसके उत्पादन के लिए उपयुक्त दो भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
चाय उत्पादक राज्य
भारत में चाय के उत्पादन का 75% भाग पश्चिम बंगाल (22%) एवं असोम (53%) राज्यों से; 20% चाय दक्षिणी राज्यों-तमिलनाडु (12%), केरल एवं कर्नाटक में तथा 5% उत्तर प्रदेश, बिहार एवं हिमाचल प्रदेश में उगायी जाती है।
चाय उत्पादन के लिए भौगोलिक परिस्थितियाँ
1. जलवायु – चाय उष्ण कटिबन्धीय मानसूनी जलवायु की उपज है। उपोष्ण कटिबन्धीय देशों द्वारा भी इसका उत्पादन किया जाता है। चाय उत्पादन के लिए निम्नलिखित जलवायु दशाएँ आवश्यक हैं
(i) तापमान – चाय की उपज के लिए 25° से 30° सेल्सियस तापमान आवश्यक होता है। पाला, कोहरा एवं शीतल पवनें इसकी फसल के लिए नुकसानदायक होती हैं। पाले से बचाव के लिए चाय के पौधे पहाड़ी ढालों पर लगाये जाते हैं।
(ii) वर्षा – चाय के पौधे के लिए 150 से 250 सेमी वर्षा अनुकूल होती है। दक्षिणी भारत में 500 सेमी वर्षा वाले भागों में पहाड़ी ढालों पर चाय की खेती की जाती है। इसके पौधों की जड़ों में जल नहीं रुकना चाहिए। यही कारण है कि चाय के पौधे पर्याप्त ऊँचाई वाले भागों में ही लगाये जाते हैं।
2. मिट्टी – चाय की कृषि के लिए दोमट मिट्टी जिसमें पोटाश, लोहा एवं जीवांशों की अधिकता हो, उपयुक्त होती है। वनों को साफ कर प्राप्त की गयी भूमि चाय की कृषि के लिए सर्वोत्तम मानी जाती हैं।

प्रश्न 9.
असम (असोम) चाय की खेती के लिए प्रसिद्ध है, क्यों ?
उत्तर :
असोम राज्य का चाय के उत्पादन में प्रथम स्थान है। यहाँ देश की 50% से अधिक चाय का उत्पादन किया जाता है। यह राज्य भारत में चाय उत्पादन के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसके निम्नलिखित कारण हैं

  • यहाँ चाय की कृषि के लिए लाल, कछारी, उपजाऊ एवं ढालू भूमि पायी जाती है।
  • इस राज्य की मिट्टी में पोटाश, लोहांश तथा जीवांशों की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है, जो चाय उत्पादन के लिए अति आवश्यक है।
  • असोम में चाय की कृषि के लिए तापमान 20° से (UPBoardSolutions.com) 30° सेल्सियस तथा औसत वार्षिक वर्षा 250 सेमी से अधिक पायी जाती है।
  • यहाँ चाय के बागान ढालू भूमि पर लगाये जाते हैं, जिससे पौधों की जड़ों में जल नहीं ठहर पाता।
  • असोम की चाय स्वादिष्ट तथा रंग में श्रेष्ठ होती है; अत: इसकी विदेशों में अत्यधिक माँग बनी रहती है।
  • असोम में उत्पादित चाय के निर्यात से भारत को पर्याप्त विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है।

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प्रश्न 10 भारत में कपास का उत्पादन मुख्यतः गुजरात तथा महाराष्ट्र राज्यों में होता है। दो कारण लिखिए।
उत्तर गुजरात एवं महाराष्ट्र राज्यों में कपास उत्पादन के दो प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं
1. जलवायु–कपास उष्ण कटिबन्धीय जलवायु का पौधा है। कपास उत्पादन के लिए गुजरात व महाराष्ट्र में 20 से 30° सेग्रे तापमान तथा 75 सेमी से अधिक वर्षा उपलब्ध है। दूसरे, यहाँ का पालारहित मौसम भी कपास की कृषि के लिए उपयुक्त कारण है।
2. मिंट्टी-कपास के लिए लावा से निर्मित उपजाऊ गहरी काली एवं मध्यम काली मिट्टी उपयुक्त होती है। गुजरात एवं महाराष्ट्र इस मिट्टी के प्रमुख क्षेत्र हैं। इसलिए यहाँ बड़ी मात्रा में कपास उगाया जाता है।

प्रश्न 11.
भारत में जूट की खेती के प्रमुख दो राज्यों के नाम बताइए। वहाँ इसकी खेती क्यों होती है ?
या
भारत में पटसन उद्योग के विकास के लिए उत्तरदायी दो कारकों का उल्लेख कीजिए।[2010]
उत्तर :
भारत में जूट की खेती प्रमुख रूप से पश्चिम बंगाल तथा बिहार में होती है। जूट के उत्पादन के लिए उच्च एवं नम जलवायु की आवश्यकता पड़ती है। साधारणतया 25° से 35° सेग्रे तापमान इसके लिए आवश्यक होता है। जूट के पौधे के अंकुर निकलने के बाद अधिक जल की आवश्यकता पड़ती है। अत: इसकी खेती के लिए 100 से 200 सेमी या उससे भी अधिक वर्षा आवश्यक होती है। प्रति सप्ताह 2 से 3 सेमी वर्षा उपयुक्त रहती है। जूट की कृषि, भूमि के उत्पादक तत्त्वों को नष्ट कर देती है। अत: इसकी खेती उन्हीं भागों में की जाती है, जहाँ प्रति वर्ष नदियाँ अपनी बाढ़ द्वारा उपजाऊ मिट्टियों का (UPBoardSolutions.com) निक्षेप करती रहती हैं। इसी कारण जूट की खेती डेल्टाई भागों में की जाती है। दोमट, कॉप एवं बलुई मिट्टियाँ भी इसके लिए। उपयुक्त रहती हैं। जूट की कृषि के लिए सस्ते एवं पर्याप्त संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि तैयार पौधों को काटने तथा उन्हें उपयोग हेतु तैयार करने में अधिक श्रम आवश्यक होता है। ये सभी सुविधाएँ उपर्युक्त दोनों राज्यों में उपलब्ध हैं। इसीलिए इन दोनों राज्यों में जूट की खेती प्रमुखता से होती है।

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प्रश्न 12.
भारत में मक्का एवं ज्वार-बाजरे की उपज के क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :

  • मक्का – मक्का खरीफ की फसल है तथा इसके लिए गहरी दोमट मिट्टी, 50 सेमी से 100 सेमी तक वर्षा तथा 25° सेग्रे से 30° सेग्रे तक तापमान उपयुक्त होता है। भारत में इसके प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं-उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और राजस्थान।
  • ज्वार-बाजरा – ज्वार-बाजरा भी खरीफ की फसल है। इसके लिए बलुई मिट्टी, 50 सेमी से 70 सेमी तक वर्षा तथा 25° सेग्रे से 35° सेग्रे तक तापमान उपयुक्त होता है। भारत में इसके प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं-महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, आन्ध्र प्रदेश, राजस्थान व उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 13.
कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
भारत एक कृषि-प्रधान देश है। भारत की श्रमशक्ति का 70% भाग कृषि से ही अपनी आजीविका प्राप्त कर रहा है। वर्तमान में कृषि सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 22% का योगदान करती है। देश के कुल निर्यात में कृषि का योगदान 14% है। अनेक उद्योगों के लिए कच्चा माल कृषि से ही प्राप्त होता है। भारत में कृषि द्वारा ही आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास हुआ है। इसीलिए कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मूलाधार है।

प्रश्न 14.
भारतीय फसलों में विविधता पाए जाने के क्या कारण हैं?
उत्तर :
भारत विविध प्रकार की फसलों के उत्पादन में पूरी तरह समर्थ है, जिसके लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी रहे हैं

  1. भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 51% भाग कृषि योग्य है। यह कृषि योग्य क्षेत्रफल उत्तर का विशाल मैदान, तटीय मैदान, नदी-घाटियाँ एवं डेल्टाई प्रदेश हैं।
  2. भारतीय कृषि ‘मानसून का जुआ’ कहलाती है। अत: बढ़ते हुए मानसून तथा लौटते हुए मानसूनों द्वारा फसलें भी विविध प्रकार की पैदा की जाती हैं।
  3. देश में वर्ष भर फसलों की बुवाई या बोने का समय रहता है (UPBoardSolutions.com) अर्थात् कभी भी फसल बोई जा सकती है। फलस्वरूप विविध प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं।
  4. भारत में कृषि फसलों के उत्पादन में मृदा (मिट्टी) की प्रमुख भूमिका रहती है। देश में मिट्टियों की । विभिन्नता पाई जाने के कारण फसलों में भी विविधता पाई जाती है।
  5. देश में जलवायु दशाओं की विभिन्नता के कारण फसलों के उत्पादन में भी विविधता पाई जाती है।

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प्रश्न 15.
भारतीय कृषि में शुष्क कृषि का विकास क्यों अनिवार्य है?
उत्तर :
आज भी भारतीय कृषि मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है तथा मानसून का जुआ’ कहलाती है। यद्यपि देश में सिंचाई साधनों का पर्याप्त विकास हो चुका है तो भी सम्पूर्ण प्रयासों के बाद भी सिंचित क्षेत्रफल मात्र 35.7% ही हो पाया है। भारत में कृषि योग्य भूमि के मात्र 10% क्षेत्रफल में ही पर्याप्त वर्षा होती है तथा 30% भागों में सामान्य से बहुत-ही कम वर्षा होती है।

भारत में कम वर्षा वाले अधिकांश क्षेत्रों में सिंचाई द्वारा जल आज भी प्राप्त नहीं होता है। अतः ऐसे क्षेत्रों में शुष्क कृषि का विकास किया जाना अति आवश्यक है। ‘शुष्क कृषि, कृषि की एक ऐसी पद्धति है, जिसमें भूमि की नमी को बनाए रखा जाता है तथा फसलों को भी सूखने नहीं दिया जाता है। इसके लिए वर्षा से पूर्व खेतों को जोत लिया जाता है तथा उनकी मेड़बन्दी कर दी जाती है। खेतों की जुताई भी समोच्च (समान ऊँचाई) विधि से की जानी (UPBoardSolutions.com) चाहिए। ऐसा करने से वर्षा का जल बह नहीं सकेगा तथा मिट्टी उस जल को पर्याप्त मात्रा में सोख लेगी। खेतों में जुताई-बुवाई के पश्चात् पटेला (भूमि को समतल बना देना) देना चाहिए, जिससे मिट्टी से वाष्पन क्रिया न हो सके।

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तिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत के लिए कृषि का क्या महत्त्व है ?
उत्तर :
कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल आधार है। आज भी भारत की दो-तिह्मई जनसंख्या की आजीविका का आधार कृषि ही है। भारतीय कृषि में खाद्यान्न फसलों की प्रधानता रहती है तथा अधिकांश उत्पादन घरेलू खपत के लिए होता है। वर्तमान समय में किये गये विभिन्न प्रयासों के द्वारा भारतीय कृषि अपने निर्वाहमूलक स्वरूप को छोड़कर व्यापारिक स्वरूप में बदलती जा रही है।

प्रश्न 2.
 भारत में कृषि की दो मुख्य ऋतुएँ कौन-सी हैं ? प्रत्येक ऋतु की दो फसलों के नाम लिखिए।
उत्तर :
रबी (शीतकालीन) तथा खरीफ (ग्रीष्मकालीन) कृषि की (UPBoardSolutions.com) दो मुख्य ऋतुएँ हैं। गेहूँ तथा जौ रबी की फसलें हैं तथा चावल और मक्का खरीफ की फसलें हैं।

प्रश्न 3.
रबी की तीन मुख्य फसलों के नाम लिखिए। [2010, 12]
या
रबी की प्रमुख फसलें कौन-कौन सी हैं ?
उत्तर :
गेहूँ, जौ, मटर, सरसो, अलसी, मसूर तथा चना रबी की मुख्य फसलें हैं। ये फसलें अक्टूबर तथा नवम्बर में बोयी जाती हैं।

प्रश्न 4.
खरीफ की तीन मुख्य फसलों के नाम लिखिए।
उत्तर :
चावल, कपास तथा जूट खरीफ की मुख्य फसलें हैं।

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प्रश्न 5.
रेशेदार फसलों के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
कपास, जूट, नारियल प्रमुख रेशेदार फसलें हैं।

प्रश्न 6.
नकदी या व्यापारिक फसलों के तीन उदाहरण दीजिए। [2014, 17]
उत्तर :
कपास, जूट तथा गन्ना भारत की प्रमुख नकदी या व्यापारिक फसलें हैं।

प्रश्न 7.
दक्षिण भारत के किन राज्यों में कहवा मुख्यतः उगाया जाता है ?
उत्तर :
दक्षिण भारत के कर्नाटक, तमिलनाडु तथा (UPBoardSolutions.com) केरल में पहाड़ी ढालों पर कहवा उगाया जाता है।

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प्रश्न 8.
भारत में रबड़ का उत्पादन किस राज्य में सर्वाधिक होता है ?
उत्तर :
भारत में रबड़ का सर्वाधिक उत्पादन केरल राज्य में होता है।

प्रश्न 9.
भारत में हरित क्रान्ति की सफलता में किसने सहायता की ?
उत्तर :
भारत में हरित क्रान्ति की सफलता में अमेरिका के कृषि वैज्ञानिक श्री बोरलॉग ने सहायता की। प्रश्न 10 ‘हरित क्रान्ति’ के जन्मदाता कौन थे ? उत्तर हरित क्रान्ति के जन्मदाता अमेरिका के कृषि वैज्ञानिक श्री बोरलॉग थे।

प्रश्न 11.
भारत में सर्वप्रथम आदर्श सहकारी दुग्ध संस्था कहाँ स्थापित की गयी थी ?
उत्तर :
गुजरात राज्य के खेड़ा जिले में आनन्द में भारत की (UPBoardSolutions.com) सर्वप्रथम आदर्श सहकारी दुग्ध संस्था स्थापित की गयी थी।

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प्रश्न 12.
मत्स्य-ग्रहण (मत्स्योत्पादन) के दो मुख्य प्रकार कौन-से हैं ?
उत्तर :
मत्स्य-ग्रहण के दो मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं

  • सागरीय मत्स्य-ग्रहण तथा
  • आन्तरिक या स्वच्छ जलीय मत्स्य-ग्रहण।

प्रश्न 13.
भारतीय किसानों के लिए पशुओं का क्या महत्त्व है ?
उत्तर :
भारतीय किसानों के लिए पशुओं के निम्नलिखित महत्त्व हैं

  • बैल और भैंसे का प्रयोग भारवाहन के लिए किया जाता है। ये जुताई, बुवाई, गहाई तथा कृषि उत्पादों : के परिवहन में भी काम आते हैं।
  • गाय और भैंसों से दूध प्राप्त होता है। इनके गोबर से खाद बनती है।

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प्रश्न 14.
भारत में चाय उत्पन्न करने वाले दो प्रमुख राज्यों के नाम लिखिए।
उत्तर :
असोम (53%) और पश्चिम बंगाल (22%) चाय उत्पन्न करने वाले दो प्रमुख राज्य हैं।

प्रश्न 15.
जूट उत्पादन करने वाले प्रमुख दो राज्यों के नाम लिखिए।
उत्तर :
जूट का उत्पादन करने वाले दो प्रमुख राज्यों के नाम हैं-

  • पश्चिम बंगाल तथा
  • बिहार।

प्रश्न 16.
पीली क्रान्ति किससे सम्बन्धित है ?
उत्तर :
‘पीली क्रान्ति’ तिलहनों के उत्पादन से सम्बन्धित है। इसके अन्तर्गत तिलहन उत्पादन कार्यक्रम 23 राज्यों के 337 जिलों में प्रारम्भ किया गया है।

प्रश्न 17.
कृषि की प्रमुख समस्या का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारतीय कृषि की सबसे बड़ी समस्या प्रति हेक्टेयर निम्न (कम) उत्पादकता की है।

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प्रश्न 18.
भारत में कहवा उत्पन्न करने वाले किन्हीं दो राज्यों के नाम लिखिए।
उत्तर :
भारत में कहवा का उत्पादन करने वाले दो राज्य हैं—

  • कर्नाटक तथा
  • केरल।

प्रश्न 19.
भारत में गन्ने का उत्पादन करने वाले किन्हीं दो राज्यों के नाम लिखिए।
उत्तर :
भारत में गन्ने का उत्पादन करने वाले दो राज्यों के नाम हैं-

  • उत्तर प्रदेश और
  • तमिलनाडु

प्रश्न 20.
भारत के किन्हीं दो प्रमुख भूमि-सुधारों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
भारत के दो प्रमुख भूमि सुधार हैं—

  • जमींदारी उन्मूलन तथा
  • चकबन्दी।

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प्रश्न 21.
प्राथमिक व्यवसाय के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
प्राथमिक व्यवसाय के दो उदाहरण हैं-

  • कृषि एवं
  • मत्स्य-पालन।

प्रश्न 22.
भारत में गेहूं का सर्वाधिक उत्पादन किस प्रदेश में होता है ? [2009, 11]
उत्तर :
भारत में गेहूं का सर्वाधिक उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है।

प्रश्न 23.
भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या कृषि कार्य में संलग्न है?
उत्तर :
भारत की 66% जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है।

प्रश्न 24.
भारत की दो प्रमुख खाद्यान्न फसलें कौन-कौन सी हैं?
उत्तर :
चावल और गेहूँ भारत की दो प्रमुख (UPBoardSolutions.com) खाद्यान्न फसलें हैं।

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प्रश्न 25.
भारत में कपास उत्पादन के दो प्रमुख क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
गुजरात और महाराष्ट्र कपास उत्पादन के दो प्रमुख क्षेत्र हैं।

प्रश्न 26.
मानव के प्राथमिक व्यवसाय कौन-कौन से हैं?
उत्तर :
आखेट, पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि तथा खनन मानव के प्राथमिक व्यवसाय हैं।

प्रश्न 27.
भारतीय जनसंख्या की जीविका का मूल आधार क्या है?
उत्तर :
भारतीय जनसंख्या की जीविका का मूल आधार कृषि है।

प्रश्न 28.
कृषि पर आधारित किन्हीं दो प्रमुख उद्योगों के नाम लिखिए। [2012, 14]
उत्तर :
कृषि पर आधारित दो प्रमुख उद्योग हैं—

  • चीनी उद्योग तथा
  • वस्त्र उद्योग।

प्रश्न 29.
भारत में चाय तथा कहवा के उत्पादन क्षेत्र बताइए। [2013]
उतर :
चाय उत्पादन के क्षेत्र–पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल।
कहंवा उत्पादन के क्षेत्र-कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश।

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प्रश्न 30.
दुधारु पशु तथा भारवाहक पशु में क्या अन्तर है?
उत्तर :
दुधारु पशु दूध देते हैं तथा भारवाहकं पशु (UPBoardSolutions.com) बोझा ढोने का कार्य करते हैं।

बहुविकल्पीय प्रशा

1. भारत में हरित क्रान्ति का सूत्रपात बीसवीं शताब्दी के किस दशक में हुआ था ?
(क) आठवें
(ख) छठवें
(ग) सातवें
(घ) पाँचवें

2. भारत में सर्वाधिक चाय उत्पादक राज्य है
(क) तमिलनाडु
(ख) असोम
(ग) केरल
(घ) पश्चिम बंगाल

3. निम्नलिखित में से कौन-सा जूट उत्पादक राज्य है? [2018]
या
जूट की कृषि का मुख्य राज्य है। [2016]
(क) केरल
(ख) गुजरात
(ग) पश्चिम बंगाल
(घ) उत्तर प्रदेश

4. ऑपरेशन फ्लड (श्वेत क्रान्ति) किससे सम्बन्धित है? [2010, 13, 17]
(क) गेहूँ उत्पादन
(ख) दुग्ध उत्पादन
(ग) चीनी उत्पादन
(घ) वस्त्र उत्पादन

5. निम्न में से कौन-सी बागाती फसल है?
(क) चावल
(ख) चाय
(ग) चना,
(घ) गेहूँ

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6. निम्नलिखित में कौन-सी आर्थिक क्रिया प्राथमिक व्यवसाय नहीं है?
(क) लोहा-इस्पात उद्योग
(ख) मत्स्य व्यवसाये
(ग) खनन
(घ) कृषि

7. भारत की कार्यशील जनसंख्या का कितना प्रतिशत भाग कृषि कार्यों में संलग्न है?
(क) लगभग 40%
(ख) लगभग 55%
(ग) लगभग 65%
(घ) लगभग 85%

8. भारत में खरीफ की फसल के बाद कौन-सी फसली ऋतु आती है?
(क) जायद
(ख) पतझड़
(ग) रबी
(घ) शरद

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9. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल रबी की है?
(क) चना
(ख) चावल
(ग) कपास
(घ) ज्वार-बाजरा

10. भारत में आजीविका का प्रमुख स्रोत है [2012]
(क) सेवाएँ।
(ख) कृषि
(ग) उद्योग
(घ) व्यापार

11. निम्नलिखित में से किस प्रदेश में गेहूं का उत्पादन सर्वाधिक होता है? [2011]
(क) पंजाब
(ख) हरियाणा
(ग) बिहार
(घ) उत्तर प्रदेश

12. चाय की खेती के लिए कौन-सी मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त है? [2011]
(क) पर्वतीय मिट्टी
(ख) दोमट मिट्टी
(ग) जलोढ़ मिट्टी
(घ) लैटेराइट मिट्टी

13. कपास की खेती के लिए निम्नलिखित में से सर्वाधिक उपयुक्त मिट्टी कौन-सी है? [2013, 15]
(क) लाल मिट्टी
(ख) काली मिट्टी
(ग) लैटेराइट मिट्टी
(घ) जलोढ़ मिट्टी

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14. नीली क्रांति सम्बन्धित है [2014]
(क) कृषि से
(ख) आकाश से
(ग) जल से
(घ) मत्स्य से

15. निम्नलिखित में से कौन-सी बागानी फसल है? [2015]
(क) गन्ना
(ख) कपास
(ग) जूट
(घ) कहवा

16. निम्नलिखित में से सबसे अधिक कपास उत्पन्न करने वाला राज्य कौन है? [2015, 18]
(क) हरियाणा
(ख) गुजरात
(ग) मध्य प्रदेश
(घ) उत्तर प्रदेश

17. निम्नलिखित में से कौन औद्योगिक फसल है? [2015]
(क) गेहूँ
(ख) दालें
(ग) मक्का
(घ) चाय

उत्तरमाला

1. (ख), 2. (ख), 3. (ग), 4. (ख), 5. (ख), 6. (क), 7. (ग), 8. (ग), 9. (क), 10. (ख), 11. (घ), 12. (क), 13. (ख), 14. (घ), 15. (घ), 16. (ख), 17. (घ)

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UP Board Solutions for Class 11 History Chapter 4 The Central Islamic Lands

UP Board Solutions for Class 11 History Chapter 4  The Central Islamic Lands (इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570 – 1200 ई०)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 History . Here we have given UP Board Solutions for Class 11 History  Chapter 4 The Central Islamic Lands

पाठ्य – पुस्तक के प्रश्नोत्तर
संक्षेप में उत्तर दीजिए

प्रश्न 1.
सातवीं शताब्दी के आरम्भिक दशकों में बेदुइओं के जीवन की क्या विशेषताएँ थीं?
उत्तर :
बेदुइओं के जीवन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं

(i) अनेक अरब कबीले बेदूइन या बद्दू या खानाबदोश होते थे।
(ii) ये अपने खाद्य (खजूर) और अपने ऊँटों के लिए चारे की तलाश में रेगिस्तान के सूखे क्षेत्रों से हरे-भरे क्षेत्रों (नखलिस्तान) की ओर जाते रहते थे।
(iii) इनमें से कुछ नगरों में बस गए और व्यापार करने लगे।
(iv) खलीफा के सैनिकों में ज्यादा बदू ही थे। ये रेगिस्तान के किनारे बसे शिविर शहरों; जैसे कुफा तथा बसरा में रहते थे।

प्रश्न 2.
अब्बासी क्रान्ति’ से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
उमय्यदों के विरुद्ध ‘दावा’ नामक एक सुसंगठित आंदोलन हुआ, फलस्वरूप उनका पतन हो गया। सन् 1750 में उनके स्थान पर मक्काई मूल के अन्य परिवार (अब्बासिदों) को स्थापित कर दिया गया। वास्तव में अब्बासिदों ने उमय्यद शासन की जमकर आलोचना की और पैगम्बर द्वारा स्थापित मूल इस्लाम को पुनः बहाल कराने का वादा किया। वे उसमें सफल भी रहे। इसे ही अब्बासी । क्रान्तिं की संज्ञा दी गई है। इस क्रान्ति से राजवंश में परिवर्तन के साथ राजनीतिक संरचना में बहुत परिवर्तन हुआ।

प्रश्न 3.
अरबों, ईरानियों व तुर्को द्वारा स्थापित राज्यों की बहुसंस्कृतियों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
अरबों, ईरानियों और तुर्को द्वारा स्थापित राज्य जातीय पक्षपातरहित थे। ये राज्य किसी एकल राजनीतिक व्यवस्था या किसी संस्कृति की एकल भाषा (अरबी) के बजाय सामान्य अर्थव्यवस्था व संस्कृति के कारण सम्बद्ध रहे। मध्यवर्ती इस्लामी देशों में व्यापारी, विद्वान् तथा कलाकार स्वतन्त्र रूप से आते जाते थे। इस प्रकार विचारों तथा तौर-तरीकों का प्रसार हुआ।

प्रश्न 4.
यूरोप व एशिया पर धर्मयुद्धों का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर :
यूरोप व एशिया पर धर्मयुद्ध का निम्नलिखित प्रभाव पड़ा
(i) मुस्लिम राज्यों ने अपने ईसाई प्रजाननों के प्रति कठोर रवैया अपनाया। विशेष रूप से यह स्थिति युद्धों में देखी गई।
(ii) मुस्लिम सत्ता की बहाली के पश्चात् भी पूर्व तथा पश्चिम के मध्य इटली के व्यापारिक समुदायों का अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव था।

संक्षेप में निबन्ध लिखिए।

प्रश्न 5.
रोमन साम्राज्य के वास्तुकलात्मक रूपों से इस्लामी वास्तुकलात्मक रूप किस प्रकार भिन्न थे?
उत्तर :
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रोमन साम्राज्य के महामंदिरों के अनुरूप ही इस्लामी दुनिया में भी धार्मिक इमारतें इस्लामी दुनिया की सबसे बड़ी बहारी प्रतीक थीं। स्पेन से मध्य एशिया तक फैली हुई मस्जिदें, इबादतगाह और मकबरों का मूल्लू डिजाइन समान था। मेहराबें, गुम्बद, मीनार और खुले सहन आदि इमारतें मुसलमानों की आध्यात्मिकता और व्यावहारिक आवश्यकताओं को अभिव्यक्त करती हैं। इस्लाम की प्रथम सदी में, मस्जिद ने एक विशिष्ट वास्तुशिल्पीय रूप (खम्भों के सहारे वाली छत) प्राप्त कर लिया था जो प्रादेशिक विभिन्नताओं से परे था। मस्जिद में एक खुला प्रांगण या सहन होता जहाँ एक फव्वारा या जलाशय बनाया जाता था। यह प्रांगण एक बड़े कमरे की ओर खुलता, जिसमें नमाज पढ़ने वाले लोगों की लम्बी पंक्तियों और नमाज का नेतृत्व करने वाले इमाम के लिए काफी स्थान होता उमय्यदों ने नखलिस्तानों में ‘मरुस्थली महल’ कल्पना कीजिए कि इस पेड़ पर खलीफा विराजमान है। दिए गए चित्र में शान्ति व युद्ध का चित्रण किया गया है। बनाए। उदाहरण के लिए-फिलिस्तीन ने खिरबत-अल-मफजर और जोर्डन में कैसर अमरा जो विलासपूर्ण निवास स्थानों, शिकार और मनोरंजन के लिए विश्रामस्थलों के रूप में प्रयोग किए गए थे। महल रोमन और सासायनियन वास्तुशिल्प के तरीके से बनाए। गए थे। उन्हें चित्रों, प्रतिमाओं और पच्चीकारी से सजाया जाता था। रोम की वास्तुकला अत्यधिक दक्षपूर्ण थी। उनके द्वारा सर्वप्रथम कंकरीट का प्रयोग प्रारम्भ किया गया था। वे पत्थरों व ईंटों को मजबूती से जोड़ सकते थे। रोम के वास्तुकारों ने दो वास्तुशिल्पीय सुधार किए– (i) डाट, (ii) गुम्बद। रोम में इमारतें दो या तीन मंजिलों वाली होती थीं। इनमें डालें (Arches) ठीक एक के ऊपर । मेसोपोटामिया की का प्रयोग कोलोजियम बनाने में किया था। वास्तुकला की परम्पराओं से प्रेरित यह कई शताब्दियों तक दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद थी। डाटों का प्रयोग नहर बनाने के लिए भी किया जाता था। रोम के प्रसिद्ध मंदिर पैन्थियन में । औंधे कटोरे की तरह गुम्बद छत थी। यहाँ रोम वास्तुकला के कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं
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प्रश्न 6.
रास्ते पर पड़ने वाले नगरों का उल्लेख करते हुए समरकन्द से दमिश्क तक की यात्रा का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
समरकन्द से दमस्कस के मार्ग पर मर्व खुरसाम, निशापुर दायलाम, इसफाइन, समारा, बगदाद, कुफा, कुसायुर, अमरा, जेरूसलम आदि शहर स्थित हैं। व्यापारी या यात्री दो रास्तों लाल सागर और फारस की खाड़ी से होकर जाते थे। लम्बी दूरी के व्यापार के लिए उपयुक्त और उच्च मूल्य वाली वस्तुओं; यथा-मसालों, कपड़ों, चीनी मिट्टी की वस्तुओं और बारूद को भारत और चीन से लाल सागर के अदन और ऐधाव तक और फारस की खाड़ी के पत्तन सिराफ और बसरा तक जहाज पर लाया जाता था। वहाँ से माल को जमीन पर ऊँटों के काफिलों द्वारा बगदाद, दमिश्क और समरकन्द तक भेजा जाता था।
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परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
इस्लाम धर्म निम्नलिखित में से किसने चलाया था?
(क) मुहम्मद साहब ने
(ख) अब्राहम ने (ग) इस्माइल ने
(घ) खलीफा उमर ने
उत्तर :
(क) मुहम्मद साहब ने

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा इस्लाम धर्म का पवित्र ग्रन्थ है?
(क) कुरान शरीफ
(ख) हदीस
(ग) एन्जील
(घ) ओल्ड टेस्टामेण्ट
उत्तर :
(क) कुरान शरीफ

प्रश्न 3.
अरब में मुस्लिम साम्राज्य के संस्थापक कौन थे?
(क) खलीफा अबू बकर
(ख) खलीफा उमर
(ग) पैगम्बर मुहम्मद
(घ) खलीफा अली
उत्तर :
(ख) खलीफा उमर

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से कौन-सा नगर धर्मनिष्ठ खलीफाओं की राजधानी था?
(क) मक्का
(ख) मदीना
(ग) बगदाद
(घ) कुफा
उत्तर :
(ख) मदीना

प्रश्न 5.
अब्बासी खलीफाओं की राजधानी कौन-सा नगर था? 
(क) जेरूसलम
(ख) बगदाद
(ग) मक्का
(घ) बसरा
उत्तर :
(ख) बगदाद

प्रश्न 6.
मुहम्मद साहब का जन्म कब हुआ था?
(क) 540 ई० में
(ख) 560 ई० में
(ग) 570 ई० में
(घ) 575 ई० में
उत्तर :
(ग) 570 ई० में

प्रश्न 7.
अब्बासी खलीफाओं में सबसे अधिक प्रसिद्ध है
(क) अल मंसूर
(ख) हारून-अल-रशीद
(ग) अल बाथिक
(घ) अल मामून
उत्तर :
(ख) हारून-अल-रशीद

प्रश्न 8.
‘शाहनामा’ का लेखक कौन था?
(क) शेख सादी
(ख) अल राजी
(ग) उमर खय्याम
(घ) फिरदौसी
उत्तर :
(घ) फिरदौसी।

प्रश्न 9.
‘चट्टान को गुम्बद कहाँ पर स्थित है?

(क) बसरा
(ख) दमिश्क
(ग) जेरूसलम
(घ) बगदाद
उत्तर :
(ग) जेरूसलेम

प्रश्न 10.
अरब का प्रसिद्ध संगीतकार कौन था?
(क) अल रेहान
(ख) फिरदौसी
(ग) गजाली
(घ) अल अगानी
उत्तर :
(ग) गजाली

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अरब प्रायद्वीप में कौन-कौन से देश सम्मिलित हैं?
उत्तर :
अरब प्रायद्वीप में टर्की, मिस्र, सीरिया, इराक, ओमान, बहरीन, ईरान आदि देश सम्मिलित हैं।

प्रश्न 2.
अरब के मुस्लिम पंचांग का निर्माण किसने किया था?
उत्तर :
अरब के मुस्लिम पंचांग का निर्माण उमर खैयाम ने किया था।

प्रश्न 3.
रसायनशास्त्र में अरब निवासी क्या-क्या बनाना जानते थे?
उत्तर :
अरब निवासी रसायनशास्त्र में चॉदी का घोल, पोटाश, शोरे एवं गन्धक का तेजाब तथा इत्र आदि बनाना जानते थे।

प्रश्न 4.
इस्लाम धर्म के प्रवर्तक कौन थे?
उत्तर :
इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मुहम्मद साहब थे।

प्रश्न 5.
इस्लाम धर्म की पवित्र पुस्तक का नाम लिखिए।
उत्तर :
इस्लाम धर्म की पवित्र पुस्तक ‘कुरान शरीफ’ है।

प्रश्न 6.
मुहम्मद साहब का जन्म कब तथा किस नगर में हुआ था?
उत्तर :
मुहम्मद साहब का जन्म 570 ई० में अरब देश के मक्का नगर में हुआ था?

प्रश्न 7.
अब्बासी खलीफाओं की राजनधानी कहाँ स्थित थी?
उत्तर :
मध्यकाल में अब्बासी ख़लीफाओं की राजधानी बगदाद में स्थित थी। यह स्थान वर्तमान इराक की राजधानी है।

प्रश्न 8.
मध्यकाल में बगदाद क्यों प्रसिद्ध था?
उत्तर :
मध्यकाल में बगदाद अब्बासी खलीफाओं के वैभव और अरब सभ्यता व संस्कृति तथा व्यापार का प्रमुख केन्द्र होने के कारण प्रसिद्ध था।

प्रश्न 9.
फिरदौसी ने कौन-सी पुस्तक लिखी?
उत्तर :
फिरदौसी ने ‘शाहनामा’ नामक पुस्तक लिखी थी।

प्रश्न 10.
उमर खय्याम क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर :
उमर खय्याम अपनी रूबाइयों के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 11.
जेरूसलम कहाँ पर स्थित है और क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर :
जेरूसलम पश्चिमी एशिया (इजराइल राष्ट्र) में स्थित एक धार्मिक नगर है। यह इस्लाम, यहूदी और ईसाई धर्मों का संगम-स्थल व पवित्र तीर्थस्थान तथा ओमर मस्जिद के लिए विश्वप्रसिद्ध है।

प्रश्न 12.
अरबों ने लेखन-कला की किस शैली का आविष्कार किया?
उत्तर :
अरबों ने लेखन-कला की ‘खुशवती’ शैली का आविष्कार किया।

प्रश्न 13.
अलबरूनी ने कौन-सी पुस्तक लिखी थी?
उत्तर :
अलबरूनी ने तहकीके हिन्द’ नामक पुस्तक लिखी थी।

प्रश्न 14.
खिलाफत का क्या अर्थ है?
उत्तर :
मुहम्मद साहब के निधन के बाद इस्लाम के प्रचार व प्रसार का कार्यभार (पद) “खिलाफत कहलाया, जिसका तेतृत्व अबू बकर, उमर, उस्मान तथा अली नामक खलीफाओं ने किया।

प्रश्न 15.
अब्बासी खलीफाओं में सबसे अधिक प्रसिद्ध खलीफा का नाम लिखिए।
उत्तर :
अब्बासी खलीफाओं में सबसे अधिक प्रसिद्ध खलीफा हारून-अल-रशीद था।

प्रश्न 16.
हिजरी सम्वत् कब प्रारम्भ हुआ?
उत्तर :
हिजरी सम्वत् 622 ई० से प्रारम्भ हुआ।

प्रश्न 17.
इस्लाम धर्म ने विश्व की सभ्यता पर क्या प्रभाव डाला?
उत्तर :
इस्लाम धर्म ने विश्व की सभ्यता को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया। कला और धर्म के क्षेत्र में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रश्न 18.
‘कीमियागिरी क्या थी? यह कला विलुप्त क्यों हो गई?
उत्तर :
रासायनिक प्रक्रिया द्वारा लोहे या किसी अन्य धातु से स्वर्ण (सोना) बनाने की कला को ‘कीमियागिरी’ कहते थे। वंशानुगत होने के कारण यह कला शीघ्र ही विलुप्त हो गई।

प्रश्न 19.
काबा का क्या महत्त्व था?
उत्तर :
मुहम्मद के कबीले कुरैश का जिस मस्जिद पर नियन्त्रण था, उसे काबा कहा जाता था। यह मस्जिद मक्का में थी। सभी लोग इस जगह को पवित्र मानते थे।

प्रश्न 20.
हिजरी वर्ष की क्या विशेषता है?
उत्तर :
हिजरी वर्ष चन्द्रवर्ष होता है जिसमें 354 दिन अर्थात् 29 या 30 दिनों के 12 महीने होते हैं। प्रत्येक दिन सूर्यास्त के समय शुरू होता है।

प्रश्न 21.
प्रथम चार खलीफाओं के नाम लिखिए।
उत्तर :

  1. अबू बकर,
  2.  उमर,
  3.  उस्मान तथा
  4. अली

प्रश्न 22.
अली के काल में इस्लाम जगत में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर :
इस्लाम के चौथे खलीफा अली के शासनकाल में मुसलमान दो सम्प्रदायों-शिक्षा और सुन्नी में विभाजित हो गया।

प्रश्न 23.
अरब में राजतन्त्र की स्थापना किसने और कब की?
उत्तर :
मुआविया ने स्वयं को पाँचवाँ खलीफा घोषित कर उमय्यद वंश की स्थापना की। वह राजतन्त्र का समर्थक था। राजतन्त्र की स्थापना 661 ई० में हुई।

प्रश्न 24.
फातिमिद कौन था?
उत्तर :
फातिमिद शिया सम्प्रदाय से सम्बद्ध था और स्वयं को मुहम्मद की पुत्री फातिमा का वंशज मानता था। 969 ई० में उसने मिस्र को जीतकर फातिमिद खिलाफत की स्थापना की और काहिरा को अपनी राजधानी बनाया।

प्रश्न 25.
धर्मयुद्ध से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर :
जेरूसलम और फिलिस्तीन के अधिकार के प्रश्न पर मुसलमानों और ईसाइयों में दो शताब्दियों (1096-1291) तक युद्ध हुए थे, उन्हें धर्मयुद्ध कहा जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बगदाद कहाँ है और क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर :
बगदाद, अरब प्रायद्वीप के देश इराक की राजधानी है। मध्यकाल में यह नगर अब्बासी खलीफाओं की राजधानी था। बगदाद; अरब सभ्यता एवं संस्कृति का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र तथा व्यापार का भी प्रमुख केन्द्र होने के कारण प्रसिद्ध है।

प्रश्न 2.
अरब निवासियों के प्रमुख उद्योग कौन-कौन से हैं?
उत्तर :
अरब निवासी कृषि योग्य भूमि से वंचित थे; अतः उन्होंने अनेक उद्योग-धन्धे अपना रखे थे। वे कपास से सुन्दर वस्त्र, कालीन, गलीचे आदि बनाते थे। इत्र, अर्क और शर्बत बनाने में वे विशेषकुशल थे। दमिश्क की मलमल, तलवारें एवं युद्ध का सामान, मिट्टी के बर्तन तथा खिलौने, काँच का सामान आदि उस समय सारे संसार में प्रसिद्ध थे। अरब निवासी इनका बड़ी मात्रा में व्यापार किया करते थे।

प्रश्न 3.
मक्का और मदीना क्यों प्रसिद्ध हैं?
उत्तर :
मक्का और मदीना सऊदी अरब के प्रमुख नगर हैं। मक्का में इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मुहम्मद साहब का जन्म हुआ था। हजरत मुहम्मद साहब ने इस्लाम धर्म चलाया था। मदीना में मुहम्मद साहब ने हिजरत की थी। मक्का मुसलमानों का प्रमुख तीर्थस्थल है। प्रतिवर्ष लाखों मुसलमान यहाँ हज करने के लिए आते हैं। ये दोनों नगर इस्लाम धर्म के पवित्र स्थल होने के कारण प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 4.
विज्ञान के क्षेत्र में अरब निवासियों ने भारत एवं यूनान से क्या-क्या सीखा?
उत्तर :
अरब निवासियों ने विज्ञान के क्षेत्र में भारत और यूनान से बहुत-कुछ सीखा। यूनान से गणित और ज्यामिति का ज्ञान लेकर अरबों ने गोलाकार त्रिकोणमिति की खोज की। भौतिक विज्ञान में उन्होंने पेण्डुलम की खोज की और प्रकाश के सम्बन्ध में अनेक महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले। अरबों ने भारतीयों से आयुर्वेद का ज्ञान भी प्राप्त किया और यूनानी पद्धति अपनाकर यूनानी चिकित्सा की परम्परा प्रारम्भ की।

प्रश्न 5.
विज्ञान के क्षेत्र में अरबों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
विज्ञान के क्षेत्र में अरबों की उपलब्धियाँ निम्नलिखित थीं

  1.  अरबों के द्वारा गोलाकार त्रिकोणमिति और अंक प्रणाली की खोज की गई थी। यूरोपवासियों ने अरबों से ही अंक प्रणाली को सीखा था।
  2.  अरब वैज्ञानिकों ने ही सर्वप्रथम यह खोज की थी कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती हुई स्वयं की परिक्रमा करती है।
  3.  अरबों द्वारा अनुसन्धान हेतु अनेक प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई थी।
  4.  खगोलशास्त्र के क्षेत्र में उन्होंने अनेक वेधशालाओं का निर्माण किया और नए नक्षत्रों का पता लगाया।
  5. भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में पेण्डुलम की खोज उनके द्वारा ही की गई थी। उन्होंने प्रकाश विज्ञान पर अनेक महत्त्वपूर्ण पुस्तकों की रचना की थी।
  6.  वे चिकित्सा के क्षेत्र में भी बहुत पारंगत थे और शिल्प-क्रिया से भली-भाँति परिचित थे।

प्रश्न 6.
कबीले की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
कबीले की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं

  1. कबीले रक्त सम्बन्धों पर संगठित समाज होते थे।
  2.  अरब कबीले वंशों से बने हुए होते थे अथवा बड़े परिवारों के समूह होते थे, परन्तु बन्द समाज नहीं थे।
  3. गैर-अरब व्यक्ति कबीलों के प्रमुखों के संरक्षण में सदस्य बन जाते थे।
  4.  गैर-रिश्तेदार वंशों को तैयार किए गए वंशक्रम के आधार पर विलय किया जाता था।

प्रश्न 7.
इस्लाम धर्म के उदय होने से पूर्व अरब लोगों के जीवन की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
इस्लाम धर्म से पूर्व अरब लोगों के जीवन की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. इस्लाम से पूर्व अरब लोग अनेक छोटे-छोटे कबीलों में बँटे हुए थे।
  2. कबीले परस्पर छोटी-छोटी बातों पर लड़ते रहते थे।
  3. अरब समाज के लोग अनेक अन्धविश्वासों के शिकार थे।
  4. इस समय अरब के लोग अनेक देवी-देवताओं में विश्वास करते थे और मूर्तिपूजा किया करते
  5.  इस समय अरब के लोगों का मुख्य व्यवसाय पशुपालन था। कालान्तर में व्यापार भी इनकी जीविका का मुख्य साधन बन गया।

प्रश्न 8.
अब्द-थल-मलिक के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर :
अब्द-थल-मलिक के प्रमुख कार्य निम्नलिखित थे

  1. उमय्यदवंशीय अब्द-थल-मलिक ने अरबी को प्रशासन की भाषा के रूप में अपनाया और सिक्के जारी किए।
  2.  सिक्कों पर रोमन और ईरानी की नकल समाप्त करके अरबी भाषा में लेख अंकित कराए।
  3.  उसने जेरूसलम में चट्टान के गुम्बद का निर्माण करवाया और अरब-इस्लामी पहचान में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रश्न 9.
इस्लाम धर्म के प्रमुख सिद्धान्त लिखिए।
उत्तर :
इस्लाम धर्म के प्रमुख सिद्धान्त

  1. अल्लाह एक और निराकार-इस्लाम धर्म एक अल्लाह और उसके निराकार स्वरूप के सिद्धान्त को मानता है। उसके अनुसार अल्लाह सर्वज्ञ, सर्वोच्च और निराकार है।
  2. कर्मवाद में विश्वास-इस्लाम धर्म, कर्म के सिद्धान्त का पोषक है। उसके अनुसार कर्मों से ही मनुष्य को जन्नत (स्वर्ग) या नरक (दोजख) प्राप्त होता है। न्याय-दिवस (कयामत) पर जीवों के कर्मों के लेखे-जोखे के आधार पर ही प्रत्येक जीव को उसके कर्मों का फल मिलता है।
  3.  पाँच कर्म सिद्धान्त-इस्लाम धर्म के पाँच कर्म-सिद्धान्त अग्र प्रकार हैं

(क) कलमा : ह इस्लाम धर्म का मूल मन्त्र है, जिसके अनुसार अल्लाह एक है, उसके अतिरिक्त कोई नहीं है और मुहम्मद साहब उसके पैगम्बर हैं।
(ख) रोजा-ईस्लाम धर्म मानता है कि रमजान के पवित्र महीनों में प्रत्येक मुसलमान को प्रातः से सूर्यास्त तक रोजा (व्रत) रखना चाहिए।
(ग) नमाज-प्रत्येक सच्चे मुसलमान को प्रतिदिन पाँच बार नमाज पढ़नी चाहिए।
(घ) जकात–प्रत्येक इस्लाम के अनुयायी को अपनी आय में से एक निश्चित राशि स्वेच्छा से गरीबों में दान देनी चाहिए। दान देना पुण्य का काम है।
(ङ) हज–प्रत्येक मुसलमान को अपने जीवनकाल में एक बार मक्का की तीर्थयात्रा (हज) पर अवश्य जाना चाहिए।

प्रश्न 10.
सामाजिक एकता स्थापित करने के लिए मुहम्मद साहब ने कौन-से नियम बनाए थे?
उत्तर :
मुसलमानों में एकता की भावना का विकास करने के उद्देश्य से मुहम्मद साहब द्वारा निम्नलिखित नियम बनाए गए थे1. इज्मा-सभी मुसलमानों को प्रत्येक क्षण, प्रत्येक स्थान पर, प्रत्येक परिस्थिति में इस्लाम के | सिद्धान्तों पर एकमत रहना चाहिए। 2. सुन्ना-इस्लाम धर्म में निर्धारित कार्यों को आदर्श मानकर उनका पालन करना चाहिए। 3. कयास-इस्लाम धर्म पर आधारित मुहम्मद साहब के उपदेशो के अर्थ एवं भाव को समझकर उन उपदेशों का यथावते पालन करना चाहिए।

प्रश्न 11.
इस्लामी राज्यों में कृषि की उन्नति हेतु क्या प्रसास किए गए?
उत्तर :
इस्लामी राज्यों में कृषि की उन्नति हेतु निम्नलिखित उपाय किए गए

  1.  अनेक क्षेत्रों में विशेषकर नील घाटी, में राज्य ने सिंचाई प्रणालियों, बाँधों और नहरों के निर्माण, कुओं की खुदाई की व्यवस्था कराई।
  2. पानी उठाने के लिए पनचक्कियों की व्यवस्था की गई।
  3. इस्लामी कानून के अन्तर्गत उन लोगों को कर में छूट दी गई जो जमीन को पहली बार खेती के काम में लाते थे।
  4.  अनेक नई फसलों; यथा-कपास, सन्तरा, केला, तरबूज, पालक और बैंगन की खेती की गई और यूरोप को उनका निर्यात किया गया।

प्रश्न 12.
उलेमा कौन थे और उनका क्या कार्य था?
उत्तर :
उमेला धार्मिक विद्वान थे। ये कुरान से प्राप्त ज्ञान (इल्म) पैगम्बर को आदर्श व्यवहार (सुन्ना) का मार्गदर्शन करते थे। मध्यकाल में उलेमा अपना समय कुरान पर टीका (तफसीर) लिखने और मुहम्मद की प्रामाणिक उक्तियों और कार्यों को लेखबद्ध करने में लगाते थे। कुछ उलेमाओं ने कर्मकाण्डों (इबादत) के माध्यम से ईश्वर के साथ मुसलमानों के सम्बन्ध को नियन्त्रित करने और सामाजिक कार्यों (मुआमलात) के लिए शेष इनसानों के साथ मुसलमानों के सम्बन्धों को नियन्त्रित करने के लिए कानून तैयार करने का कार्य किया।

प्रश्न 13.
भारत में इस्लाम का प्रसार किस प्रकार हुआ?
उत्तर :
इस्लाम के इतिहास में वालिद प्रथम का शासनकाल खिलाफत के विस्तार के लिए विख्यात है। इसी के शासनकाल में 711 ई० में बसरा के गवर्नर हेज्जाज और उसके दामाद मुहम्मद इब्न-उल कासिम ने दक्षिणी भारत और बलूचिस्तान से सिन्ध पर आक्रमण किया। इसके पूर्व मुहम्मद बिन कासिम ने 710 ई० में 6000 सीरियाई सैनिकों की सेना लेकर मकराने पर कब्जा जमा लिया। यहीं से इसने बलूचिस्तान होते हुए 711-712 ई० में सिन्धु की निचली घाटी और सिन्धु नदी के मुहाने की भूमि पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया। वहाँ जिन नगरों को जीता गया, उनमें समुद्री बन्दरगाह अल-देबुल और अल-नीरून थे। अल-देबुल में चालीस घन फुट वाली एक बुद्ध की प्रतिमा स्थापित थी। मुहम्मद बिन कासिम की यह विजय उत्तर में दक्षिणी पंजाब स्थित मुल्तान तक की गई, जहाँ गौतम बुद्ध का पवित्र तीर्थस्थल है। इस विजय से दक्षिणी पाकिस्तान के सिन्ध पर इस्लाम का स्थायी प्रभुत्व स्थापित हो गया तथा शेष भारत दसवीं शताब्दी के अन्त तक, जबकि महमूद गजनवी ने आक्रमण किया, अप्रभावित रहा। इस तरह सेमेटिक इस्लाम और भारतीय बौद्ध धर्म के बीच उसी प्रकार स्थायी रूप से सम्पर्क स्थापित हो गया, जिस प्रकार उत्तर में इस्लाम का तुर्की संस्कृति के साथ सम्पर्क स्थापित हुआ था। इस प्रकार दक्षिण में सिन्ध और उत्तर में काशगर और ताशकन्द खिलाफत की सुदूरपूर्वी सीमा बन गई और आगे भी बनी रही।

प्रश्न 14.
धर्मयुद्ध का क्या अर्थ है? इसके क्या कारण थे?
उत्तर :
पवित्र युद्ध या जिहाद उन युद्धों को कहते हैं जो मध्यकाल में फिलिस्तीन को प्राप्त करने के लिए यूरोपीय ईसाइयों ने अरबी मुसलमानों से लड़े। इन युद्धों को धर्मयुद्ध इसलिए कहा जाता है कि यह युद्ध धार्मिक स्थानों को प्राप्त करने के लिए ईसाइयों ने अरबों के विरुद्ध लड़े थे। धर्मयुद्ध के तीन प्रमुख कारण थे

  1. पवित्र प्रदेशों को पुनः प्राप्त करना।
  2. सामन्तों का वीरता प्रदर्शन का शौक।
  3.  लाडौँ तथा चर्च के नेताओं का स्वार्थ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इस्लाम धर्म से पूर्व अरब सभ्यता एवं संस्कृति का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
इस्लाम धर्म से पूर्व अरब सभ्यता एवं संस्कृति :
इस्लाम धर्म से पूर्व अरब सभ्यता एवं संस्कृति का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के आधार पर किया जा सकता है

प्राचीन अरब के निवासी :
सर्वप्रथम, अरब में बसने वाले कैल्डियन जाति के लोग थे। उनकी सभ्यता उच्चकोटि की थी। बाद में सेमेटिक जनजातियों ने इनकी सभ्यता के अवशेषों को नष्ट कर दिया। सेमेटिक जाति के लोग स्वयं को कहतान (जोकतन) का वंश मानते थे। उन्हीं का आदिपुरुष यारब था, जिसके नाम पर इस देश का नाम ‘अरब’ पड़ा। यारब कहतानी शासक; महान् विजेता और नगरों के निर्माता थे। उन्होंने यमन व अरब के अन्य क्षेत्रों पर सातवीं शताब्दी तक अपनी प्रभुत्व जमाए रखा। अरब के अन्तिम निवासी ‘इस्माइली’ थे।  इस्माइल महान् यहूदी ‘अब्राहम के अनुयायी थे। इन्हें अरब की महानता का संस्थापक और काबा का निर्माता माना जाता है। इस्लामी युग से पूर्व अरब मेंबसने वाले यही लोग थे।

प्राचीन अरबों का राजनीतिक जीवन  :
प्राचीन अरब के निवासी बद्दू कहलाते थे। उनका प्रत्येक तम्बू ‘एक परिवार’ माना जाता था। अनेक तम्बू एक वंश या ‘कौम’ का प्रतिनिधित्व करते थे। एक सौ । वंश मिलकर एक जनजाति’ या ‘कबीले’ का निर्माण करते थे। अरब का यह युग जाहिलिया युग (अज्ञानता और बर्बरता का काल) कहलाता है।

प्राचीन अरबों का सामाजिक एवं आर्थिक जीवन :
प्राचीन अरबवासी खानाबदोश थे। वे तम्बुओं में रहते थे और भेड़, बकरी तथा ऊँट आदि पशुओं को पालते थे। उनका जीवन संघर्षपूर्ण था। प्रत्येक कबीले का एक सरदार होता था, जिसकी आज्ञा कबीले के सभी लोगों को माननी पड़ती थी। अरबवासियों को आर्थिक जीवन व्यापार और लूटमार पर निर्भर था। दक्षिण अरब के लोग विदेशों से व्यापार करते थे।

प्राचीन अरबों का सांस्कृतिक जीवन :
प्राचीन अरब में शिक्षा की कमी थी, लेकिन अरबवासी अपनी भाषा और कविता के लिए विख्यात थे। इस्लाम-पूर्व अरब के साहित्य का पर्याप्त विकास हो चुका था।  इस्लाम-पूर्व अरब के प्रसिद्ध लेखकों में हकीम लुकमान, अख्तम-इब्न-सैफी, हाजी-इब्न-जर्राह, हिद (अलखस की पुत्री, विदुषी), अल मयदानी (‘मजमा-अल-अमथल का लेखक), अल-मुफद्दाल-अल-दब्बी ( ‘अमथल-अल-अरब’ का लेखक) आदि के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इस युग के प्रमुख कवियों में इमारुल केज, तराफा, हरिथ तथा अन्तारा आदि के नाम प्रसिद्ध हैं।

धार्मिक जीवन : इस्लाम पूर्व अरब और जाहिलिया युग  : मुसलमान-विरोधी बद्दुओं की किसी भी धर्म में आस्था नहीं थी। यहूदियों और ईसाइयों को छोड़कर शेष अरब मूर्तिपूजक थे। अरबवासी अनेक देवी-देवताओं की पूजा किया करते थे। अकेले मक्का में ही 360 मूर्तियाँ थीं। बद्द् अधिकतर मूर्तियों और नक्षत्रों की पूजा करते थे। मक्का में ऊँटों और भेड़ों की बलि दी जाती थी। अरबवासी वृक्षों, कुओं, गुफाओं, पत्थर और वायु आदि प्राकृतिक वस्तुओं को पवित्र मानते और उनकी पूजा भी करते थे। प्राचीन अरबों के प्रमुख देवता अल मानहु (सर्वशक्तिमाने शुक्र), देवी अल-लात, अर-राबा और अल-मानह
(भाग्य की देवी), यागुस (गिद्ध), ओफ (एक बड़ी चिड़िया) आदि थे। मक्का के कुरैशियों (प्राचीन अरब का प्रसिद्ध वंश) का देवता ‘अल-हुनल’ था।

प्रश्न 2.
इस्लाम धर्म के प्रवर्तक कौन थे? इस्लाम धर्म की प्रमुख शिक्षाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
इस्लाम धर्म के प्रवर्तक इस्लाम धर्म के प्रवर्तक मुहम्मद साहब थे। संसार उन्हें पैगम्बर मुहम्मद के नाम से पुकारता है। उनका जन्म 570 ई० में मक्का में हुआ था। उनके पिता का नाम अब्दुल्ला और माता का नाम अमीना था। 25 वर्ष की आयु में उन्होंने खदीजी नामक एक विधवा से विवाह किया। 619 ई० में जब खदीजा की मृत्यु हो गई तब उन्होंने आयशा नामक स्त्री से विवाह किया। उनकी छोटी पुत्री फातिमा ( अज-जोहरा या खूबसूरत), इस्लाम के चौथे खलीफा हजरत अली की पत्नी थी। मुहम्मद साहब प्रारम्भ से ही चिन्तनशील थे। 610 ई० में उन्हें दिव्य सन्देश की प्राप्ति हुई। 40 की आयु में मुहम्मद साहब ने अपने धर्म का प्रचार करना आरम्भ कर दिया। अपने विरोधियों से बचने के लिए। मुहम्मद साहब ने ‘मक्का’ छोड़कर ‘मदीना’ की ओर प्रस्थान किया। इस्लाम के इतिहास में इस घटना का बहुत महत्त्व है और इसे “हिजरत’ कहा जाता है। इसी समय (622 ई०) से मुस्लिम पंचांग का पहला वर्ष अर्थात् हिजरी संवत् शुरू होता है। मुहम्मद साहब मदीना के सर्वोच्च शासक बन गए। उन्होंने अपने विरोधियों को परास्त किया और अपने धर्म का सम्पूर्ण अरब में प्रसार किया। 62 वर्ष की आयु में 632 ई० में उनकी मृत्यु हो गई। बाद में उनके अनुयायियों ने सारे संसार में इस्लाम धर्म का प्रचार किया।

इस्लाम धर्म की प्रमुख शिक्षाएँ।

इस्लाम धर्म की प्रमुख शिक्षाएँ निम्नलिखित हैं

  1.  ईश्वर एक है तथा मुहम्मद साहब उसके पैगम्बर हैं।
  2.  सभी मनुष्य एक ही ईश्वर (अल्लाह) की सन्तानें हैं; उनमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
  3.  ईश्वर निराकार है और मूर्तिपूजा एक आडम्बर है।
  4. आत्मा अजर और अमर है।
  5. प्रत्येक मुसलमान को अपने धर्म की रक्षा करनी चाहिए।
  6. मादक वस्तुओं, नृत्य, संगीत तथा चित्र-दर्शन आदि से दूर रहना चाहिए।
  7.  इस्लाम धर्म के अनुसार कयामत के दिन अच्छे काम करने वाले को जन्नत (स्वर्ग) तथा बुरे काम करने वाले को दोजख (नरक) में भेज दिया जाएगा।
  8.  इस धर्म के अनुसार ब्याज लेना, जुआ खेलना, सुअर का मांस खाना पाप है।
  9.  अल्लाह अपने पैगम्बरों को सच्चा ज्ञान (इल्हाम) स्वयं देता है।
  10.  प्रत्येक मुसलमान के पाँच अनिवार्य कर्तव्य हैं

 

  1.  कलमा पढ़ना
  2.  प्रतिदिन पाँचों समय नमाज अता करना (पढ़ना)
  3.  रमजान के महीने में रोजे रखना
  4. अपनी आय का चौथा भाग खैरात (दान) में देना तथा
  5.  जीवन में एक बार हज (मक्का-मदीना की तीर्थयात्रा) रना।

प्रश्न 3.
अरब सभ्यता और संस्कृति का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
अरब सभ्यता एवं संस्कृति मध्य युग में अरब सभ्यता का विकास पश्चिमी एशिया में अधिक हुआ, जिसका संक्षिप्त विवेचन निम्नवत् है
1. शासन व्यवस्था :
इस्लाम के प्रमुख नेता को ‘खलीफा’ कहा जाता था। पहले तीन खलीफाओं की राजधानी मदीना नगर था। उसके बाद यह कूफा नगर ले जाई गई, जो आधुनिक दमिश्क में स्थित था। अब्बासी खलीफाओं ने बगदाद को अपनी राजधानी बनाया। तुर्की ने 1453 ई० में पूर्वी रोमन साम्राज्य का अन्त करके कुस्तुनतुनिया को अपनी राजधानी बनाया। आटोमान तुर्को के समय में खलीफा की शक्ति बहुत कम हो गई थी। खलीफाओं ने निरंकुश तथा स्वेच्छाचारी शासक के रूप में अरब पर शासन किया। अब्बासी  खलीफाओं ने जनहित के बहुत-से कार्य किए।

2. सामाजिक जीवन :
अरब साम्राज्य में चार प्रमुख वर्ग थे। प्रथम वर्ग में खलीफा, द्वितीय वर्ग में कुलीन, तृतीय वर्ग में विद्वान, लेखक, व्यापारी आदि सम्मिलित थे तथा चौथे निम्न वर्ग में किसान, दस्तकार तथा दास आते थे। इस समय दास-दासियों की संख्या बहुत अधिक थी। वे खुले बाजार में बेचे और खरीदे जाते थे। अरब समाज में स्त्रियों की दशा शोचनीय थी और उन्हें पर्दे में रहना पड़ता था। इस समय बहुविवाह, तलाक प्रथा और उपपत्नी प्रथा का प्रचलन था। अरब में पुरुष चौड़े पायजामें, कमीज, बड़ी जाकेट, काली पगड़ी, अंगरखा आदि वस्त्र पहनते थे। स्त्रियाँ रंग-बिरंगे सुन्दर वस्त्र धारण करती थीं। निम्न वर्ग में बुर्का (पूरे शरीर को ढकने वाला चोगा) पहनने की प्रथा थी। अरब लोग विभिन्न प्रकार के भोजन तथा पेयोंः जैसे—बनफशा, फालूदा, अंगूर की बेटी अर्थात् शराब आदि का उपयोग करते थे। शतरंज, चौपड़, पासे, चौगाने, पत्तेबाजी, घुड़दौड़, शिकार आदि उनके मनोरंजन के प्रमुख साधन थे।

3. आर्थिक जीवन :
अरबों का प्रमुख व्यवसाय कृषि और युद्ध करना था। अरब के लोग गेहूँ, चावल, खजूर, कपास, पटुआ, मूंगफली, नारंगी, ईख, गुलाब, तरबूज आदि की खेती करते थे। अरब में कम्बल, कढ़े वस्त्र, सिल्क, सूती व ऊनी वस्त्र, किमखाब, फर्नीचर, काँच के बर्तन, कागज आदि निर्माण के उद्योग-धन्धे प्रचलित थे। अरब कारीगर सोने-चाँदी व कीमती पत्थरों, जवाहरातों से जड़े सुन्दर व कलात्मक आभूषण बनाने में दक्ष थे। इस काल में अरब के भारत, चीन तथा अफ्रीका के देशों से व्यापारिक सम्बन्ध थे। बगदाद, बसरा, काहिरा,  सिकन्दरिया मध्य युग के प्रमुख बन्दरगाह और व्यापारिक केन्द्र थे। मध्य युग में अरब के गलीचे, चमड़े की वस्तुएँ, सुन्दर तलवारें, धातु व काँच के बर्तन सारे संसार में विख्यात थे।

4. सांस्कृतिक जीवन :
इस्लामी अरब में शिक्षा का भी पर्याप्त विकास हुआ। अरब में पहला विद्यालय अबू हातिम ने 860 ई० में स्थापित किया। उस समय शिक्षा मस्जिदों और मदरसों में दी जाती थी। अद्द-अल-दौला ने शिराजी नगर में पहला पुस्तकालय बनवाया। उस समय बगदाद शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था। वहाँ एक सौ से अधिक पुस्तक-विक्रेता थे। खलीफा मामून | ने बगदाद में एक उच्च शिक्षा का केन्द्र ‘बैत-अल-हिकमत’ स्थापित करवाया था। 1065-1067 ई० की अवधि में निजाम-उल-मुल्क ने अरब में ‘निजामिया मदरसे’ की स्थापना की थी। इससमय कुरान, हदीस, कानून, धर्मतन्त्र (कलाम), अरबी भाषा और साहित्य, ललित, साहित्य (अदब), गणित आदि की शिक्षा दी जाती थी। अरबों ने लिखने की एक अलंकृत शैली ‘खुशवती’ का आविष्कार किया था।

5. साहित्य :
उस समय के अरब साहित्यकारों में हमदानी (976-1008 ई०, ‘मकाना’ नाटक का लेखक), थालिवी (961-967 ई०), अगानी (गीतिकार), जहशियारी (‘आलिफ-लैला’ का पहला लेखक, 942 ई०), नवास (व्यंग्यकार, गजलों का लेखक), अबू हम्माम, अल बहुतरी (820-897 ई०), उमर खय्याम (रूबाइयों का रचयिता) जैसे महान् कवि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। मध्यकालीन अरब साहित्य में ‘खलीफा हारून-अल-रशीद की कहानियाँ’, ‘उमर खय्याम की रूबाइयाँ’, ‘आलिफ-लैला’ की कहानी और ‘फिरादौसी का शाहनामा’ आज भी सारे संसार में प्रसिद्ध हैं।

6. चिकित्सा :
अरबों ने कई महान् चिकित्सक उत्पन्न किए, जिनमें जिबरील (नेत्र विज्ञान की पुस्तक ‘अल-लाइन’ का लेखक), अलराजी (865-925 ई०, तेहरान निवासी, ‘किताब-उल- असरार’ का लेखक), यूरोप में रहैजेस नाम से विख्यात, चेचक के इलाज का आविष्कारक), अली-अब्बास (‘अल-किताब अल मालिकी’ का लेखक, रोगियों के आहार व मलेरिया की चिकित्सा का अन्वेषक), इब्नसिना (950-1037 ई०, यूरोप में एविसेन्ना नाम से प्रसिद्ध, ‘अलशेख अल-रईस’ की उपाधि, 33 गंन्थों का रचयिता, महान चिकित्सक, क्षय रोग का अन्वेषक, दार्शनिक, भाषाशास्त्री, कवि, प्रमुख पुस्तक ‘किताब-उल-शिफा’) तथा याकूब (पशु चिकित्सक) आज भी सम्पूर्ण-जगत में विख्यात

7. खगोल विद्या और गणित :
अरब ने खगोल विद्या और गणित के क्षेत्र में भी विशेष उन्नति की। अरब खगोलशास्त्रियों ने अबू अहमद, अलबरूनी (973-1048 ई०, ‘हयाहब-अल-न जूम’ का लेखक) तथा उमर खय्याम (1048-1124 ई०, पंचांग का निर्माता) विशेष प्रसिद्ध हैं। मध्यकालीन अरब का विख्यात ज्योतिषी बल्ख का मूल निवासी अबू माशार था, जिसने ज्योतिष सम्बन्धी अनेक पुस्तकें लिखी थीं।

8. कलाओं में प्रगति :
अरब लोगों ने अनेक मस्जिदों व मदरसों का निर्माण करवाया। गजबान ने 838 ई० में बसरा में पहली बार मस्जिद बनवाई। जेरूसलम ने चट्टान का गुम्बद, अक्सा मस्जिद (निर्माता अल-मलिक), दमिश्क में उमय्यद मीनार मस्जिद (705 ई० निर्माता अल वालिद), हरा गुम्बद (निर्माता खलीफा मंसूर) आदि अरब स्थापत्य कला के सुन्दर नमूने हैं। अब्बासी खलीफाओं ने अनेक राजमहलों और भवनों का निर्माण करवाया। बगदाद में बने शाही महल उस समय के अरब वैभव की जानकारी देते हैं। अरब में चित्रकला का भी विकास हुआ। उम्मैद तथा अब्बासी खलीफाओं द्वारा शहरी महलों की दीवारों पर कराई गई चित्रकारी दर्शनीय है। शाही गुम्बद पर घुड़सवार की आकृति (खलीफा मंसूर), शेरों, गरुड़ पक्षियों और समुद्री मछलियों के चित्र (खलीफा अमीन), कैसर आमरा के महल की दीवारों पर महिलाओं तथा शिकार के दृश्यों के चित्र आदि अरब चित्रकला के उत्कृष्ट नमूने हैं। इस युग में प्रमुख चित्रकार अल हरीरी और अल-अल-अगानी थे। अल रेहानी इस समय का विख्यात सुलेखनकार था, जिसने ‘मुकलाह’ की रचना की थी। अरब संगीतकारों में इब्राहीम (खलीफा हारून-अल-रशीद का भाई), गजाली (‘अहिया-अल-उलम’ गजलों का संग्रह), खलीफा अल महदी (सियास या संगीत की पुस्तक), खलीफा अल बाथिक (वीणावादक) के नाम प्रमुख हैं। इस काल में सितार या गिटार तथा उरुयान (आर्गन) प्रमुख वाद्य यन्त्र थे। अल फराबी ने किताब उल मुसीफी अल कबीर’ तथा अल गजाली ने ‘अल समां’ नामक संगीत की पुस्तकें लिखी थीं।।

प्रश्न 4.
कागज की उपलब्धता ने इस्लामिक इतिहास को किस प्रकार संजोया? संक्षेप में लिखिए।
उत्तर :
कागज के आविष्कार के पश्चात् मध्य इस्लामिक भूमि में लिखित रचनाओं को बड़े पैमाने पर प्रसार होने लगा। कागज जो लिनन से बनता था, चीन में कागज बनाने की प्रक्रिया को अत्यन्त गुप्त रखा गया था। समरकन्द के मुस्लिम शासकों ने सन् 750 में 20,000 चीनी हमलावरों को बन्दी बना लिया। इनमें से कुछ कागज बनाने में बहुत कुशल थे। अगली एक सदी के लिए, समरकन्द का कागज निर्यात की एक महत्त्वपूर्ण वस्तु बन गया। इस्लाम एकाधिकार का निषेध करता है; अतः कागज इस्लामी दुनिया के शेष भागों में बनाया जाने लगा। दसवीं सदी के मध्य तक इसने पैपाइरस का स्थान ले लिया। कागज की माँग बढ़ गई। बगदाद का एक डॉक्टर अब्द-अल-लतीफ जो 1193 से 1207 तक मिस्र का निवासी था, लिखता है कि मिस्र के किसानों ने ममियों के ऊपर लपेटे गए लिनन से बने हुए आवरण प्राप्त करने के लिए किस तरह कब्रों को लूटा था जिससे वे यह लिनन कागज के कारखानों को बेच सकें। कागज की उपलब्धता के कारण सभी प्रकार के वाणिज्यिक एवं वैयक्तिक दस्तावेजों को लिखना भी सरल हो गया। सन् 1896 में फुस्ताल में बेन एजरा के यहुदी प्रार्थना भवन के एक सीलबन्द कमरे गेनिजा में मध्यकाल के यहूदी दस्तावेजों का एक विशाल भण्डार प्राप्त हुआ। ये सभी दस्तावेज इस यहूदी प्रथा के कारण सुरक्षित रख गए थे कि ऐसी किसी भी लिखित रचना को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए जिसमें ईश्वर का नाम लिखा हुआ हो। गेनिजा में लगभग ढाई लाख पांडुलिपियाँ और उनके टुकड़े थे जिसमें कई आठवीं शताब्दी के मध्यकाल के भी थे। अधिकांश सामग्री दसवीं से तेरहवीं सदी तक की थी अर्थात् फातिमी, अयूबी और प्रारम्भिक मामलुक काल की थी। इनमें व्यापारियों, परिवार के सदस्यों और दोस्तों के बीच लिखे गए पत्र, संविदा, दहेज से जुड़े वादे, बिक्री दस्तावेज, धुलाई के कपड़ों की सूचियाँ और अन्य साधारण वस्तुएँ शामिल थीं।। अधिकांश दस्तावेज यहूदी-अरबी भाषा में लिखे गए थे, जो हिब्रू अक्षरों में लिखी जाने वाली अरबी भाषा का ही रूप था, जिसका उपयोग समूचे मध्यकालीन भूमध्य सागरीय क्षेत्र में यहूदी समुदायों द्वारा साधारण रूप से किया जाता था। गेनिजा दस्तावेज निजी और आर्थिक अनुभवों से भरे हुए हैं और वे भूमध्य सागरीय और इस्लामी संस्कृति की अन्दरूनी जानकारी प्रस्तुत करते हैं। इन दस्तावेजों से यह भी ज्ञात होता है कि मध्यकालीन इस्लामी जगत के व्यापारियों के व्यापारिक कौशल और वाणिज्यिक तकनीक उनके यूरोपीय प्रतिपक्षियों की तुलना में बहुत अधिक उन्नत थीं।

प्रश्न 5.
अरब में दर्शन और इतिहास विषय पर कौन-सी रचनाएँ की गईं? अरबों की विश्व सभ्यता को क्या देन है? 
उत्तर :
अरब दार्शनिकों में अल किन्दी, अल फराबी, इब्नसिना, गजाली, अल-मारी, अलतौहिन्दी के नाम प्रमुख हैं। अरब दर्शन यूनानी दर्शन से प्रभावित था। अरब व यूनान की फिलॉसफी को ‘फलसफा’ कहते थे। अरब में इतिहास-लेखन का भी पर्याप्त विकास हुआ। इस युग के अरब इतिहासकारों में इब्न इशाक (मदीना निवासी, पैगम्बर की जीवनी का पहला लेखक), कृति ‘सिरात रसूल अल्लाह’, अल मुकफा (‘खुदायनामा’ का लेखक), कुतवाह (पहला अरब इतिहासकार, बगदाद निवासी, मृत्यु 889 ई०) कृति ‘किताब उल मारिफ’, अल याकूबी (भूगोलवेत्ता इतिहासकार), अल बालादुरी (‘अल बुल्दान’ तथा ‘अनसाब अल अशरफ’ पुस्तकों का लेखक), अल हकाम (‘फुतुह मित्र’ का लेखक), अल तबरी (838-923 ई०, ‘तारीख अल रसूल’ व अल मुलुक’ का लेखक), अल मसूदी (अरबों का हेरोडोट्स, कृति ‘अल तनवीह’ व ‘अल इशरफ’), अलबरूनी (‘किताब उल हिन्द’ या ‘तहकीके हिन्द’ का लेखक) के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। अरब के भूगोलवेत्ताओं में फाह्यान(‘मजम अल बुल्दान’ या ‘भौगोलिक कोष’ का रचयिता), ख्वारिज्मी (‘सूरत अल गर्द’ या ‘पृथ्वी की शक्ल’ का लेखक), अल हमदानी (‘जजीरात अल अरब’ का लेखक) आदि के नाम सारे संसार में प्रसिद्ध हैं। अरबों की देन-अरबों की विश्व सभ्यता को अनेक महत्त्वपूर्ण देन हैं। अरबों ने सर्वप्रथम प्रबुद्ध राजतन्त्र और राष्ट्रीयता की भावना का विकास किया। इस्लाम धर्म का प्रचार तथा प्रसार किया, सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन करने की प्रेरणा दी। संगठित सामाजिक जीवन की नींव डाली। भारत, चीन और अफ्रीका से व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित किए। चीनी, इत्र टिन्चर, कागज, काँच के बर्तन, गलीचे, चमड़े की कलात्मक वस्तुएँ, सुन्दर तलवारें व अन्य हथियार आदि संसार को प्रदान किए। इस्लाम के पवित्र ग्रन्थ कुरान शरीफ’ की रचना की। उन्होंने संसार को अरेबियन नाइट्स (आलिफ लैला की कहानियाँ), गुलिस्तां व बोस्तां (शेख सादी), शाहनामा (फिरदौसी) जैसे ग्रन्थ उपलब्ध कराए और चिकित्सा, दर्शन, खगोलविद्या, ज्योतिष, गणित, बीजगणित, गोलाकार ज्यामिति तथा कीमियागिरी में अनेक उपलब्धियाँ प्राप्त की और उनका ज्ञान संसार को दिया। अरबों ने बगदाद, दमिश्क, काहिरा, जेरूसलम, मक्का व मदीना में अनेक मस्जिदों का निर्माण कराया और चित्रकला तथा संगीत कला का भी पर्याप्त विकास किया।

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UP Board Solutions for Class 8 Agricultural Science chapter 8 मामान्य फसलें एवं फसल चक्र

UP Board Solutions for Class 8 Agricultural Science chapter 8 मामान्य फसलें एवं फसल चक्र

These Solutions are part of UP Board Solutions for 8 Agricultural Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 8 Agricultural Science Chapter 8 मामान्य फसलें एवं फसल चक्र

इकाई-8 मामान्य फसलें एवं फसल चक्र
अभ्यास

प्रश्न 1.
सही विकल्प के सामने सही (✔)  का चिह्न लगाइए (चिह्न लगाकर)
उत्तर :

  1. गन्ने की फसल के लिए उपयुक्त भूमि है
    (क) दोमट(✔)
    (ख) हल्की दोमट (ग) बलुई दोमट
    (घ) उपर्युक्त सभी
  2. गन्ने की अच्छी पैदावार हेतु कितनी नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है?
    (क) 150 किग्रा प्रति हेक्टेयर (✔)
    (ख) 100 किग्रा प्रति हेक्टेयर
    (ग) 50 किग्रा प्रति हेक्टेयर
    (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
  3. निम्न में से कौन सी प्रजाति सूरजमुखी की उन्नत किस्म है?
    (क) के 617
    (ख) वरदान
    (ग) सूर्या(✔)
    (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
  4. फसलों की पैदावार बढ़ाने का निम्नलिखित में से कौन-सा साधन है? |
    (क) लगातार एक फसल का बोना
    (ख) फसल चक्र अपनाना (✔)
    (ग) अधिक पानी की व्यवस्था करना
    (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके)
उत्तर :

(क) सूरजमुखी का तेल हृदय रोगियों के लिए उत्तम माना जाता है।
(ख) गन्ने का बीज 50-60 कुन्तल प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाता है।
(ग) सूरजमुखी की बुवाई जून- जुलाई (UPBoardSolutions.com) माह में होती है।
(घ) गन्ने की फसल के लिये प्रति हेक्टेयर 157 किग्रा नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है।
(च) बरसीम को बीज बुवाई के लिए 30 किग्रा प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 3.
सही कथन पर(✔) का चिह्न तथा गलत कथन पर (✘) का दिन लगाइए (निशान लगाकर)

उत्तर :
(क) बरसीम की फसल में 120 किग्रा नाइट्रोजन प्रयोग की जाती है।     (✘)
(ख) बरसीम का बीज 10-20 किग्रा प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाता है। (✘)
(ग) जे0एच0बी0 146 बरसीम की उन्नत किस्म है।                                   (✔)
(घ) गन्ने की खेती ऊसर भूमि में की जाती है।                                            (✔)

प्रश्न 4.
गन्ने की अगेती उन्नतशील प्रजातियों के तीन नाम बताइए।
उत्तर :

पूर्वीक्षेत्र                      बी0ओ 47, को 687, को 395
मध्य क्षेत्र                   को 510, को 64, बी0ओ 47
पश्चिमी क्षेत्र               को 1336, को 1147, को 6613
तराई क्षेत्र                  को  1148, को 1336, को शा 1157

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प्रश्न 5.
सूरजमुखी से कितनी उपज प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है?

उत्तर :
उन्नत ढंग से खेती करने से संकुल प्रजातियों की उपज 12-15 कुन्तल/हेक्टेयर तथा संकर प्रजातियों की उपज 20-25 कुन्तल/हेक्टेयर प्राप्त की जा सकती है।

प्रश्न 6.
गन्ने की कितनी मात्रा एक हेक्टेयर बुवाई हेतु प्रयोग की जाती है?

उत्तर :
गन्ने के बीज की मात्रा गन्ने की मोटाई पर निर्भर है। औसत मोटाई के गन्ने का 50-60 कुन्तल बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है।

प्रश्न 7.
बरसीम की खेती हेतु एक हेक्टेयर में कितना बीज प्रयोग किया जाता है?

उत्तर :
करीब 30 किग्रा बरसीम का बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है।

प्रश्न 8.
बरसीम के बीज शोथन हेतु राइजोबियम कल्चर की मात्रा बताइए।

उत्तर :
150 ग्राम गुड़ को 1 लीटर पानी में गर्म करके ठण्डा किया जाता है। इसमें 600 ग्राम कल्चर मिलाकर 15 किग्रा बीज में मिलाया जाता है।

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प्रश्न 9.
फसल चक्र किसे कहते हैं?

उत्तर :
किसी निश्चित भूमि पर एक निश्चित अवधि तक फसलें (UPBoardSolutions.com) अदल-बदल कर बोना, जिससे भूमि की उर्वरा ।। शक्ति बनी रहे, और अधिक पैदावार हो, फसल चक्र कहलाता है।

प्रश्न 10.
एक वर्षीय फसल चक्र का उदाहरण दीजिए।

उत्तर :
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख फसल चक्र

  1. धान-गेहूं                      1 वर्ष
  2. मक्का-आलू-प्याज   1 वर्
  3. ज्वार-बरसीम          1 वर्ष

प्रश्न 11.
फसल चक्र का एक महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त बताइए।

उत्तर :

  1. अधिक पानी वाली फसल के बाद कम पानी वाली फसल बोनी चाहिए जैसे- धान के बाद मटर, चना आदि।
  2. दलहनी के बाद बिना दनुहनी जैसे- अरहर के बाद गेहूँ।
  3. अधिक जुताई वाली फसल के बाद कम जुताई वाली जैसे- गेहूँ के बाद मुँग।।
  4. एक ही कल के पौधे लगातार नहीं बोने चाहिए जैसे- मूंग, उड़द के बाद चना, मटर नहीं बोना चाहिए।

प्रश्न 12.
बरसीम में सिंचाई के प्रबन्ध का वर्णन कीजिए।

उत्तर :
बरसीम को 10-12 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है। बीज बोने के बाद हलकी सिंचाई करते हैं। दिसम्बर, जनवरी में एक बार तथा फरवरी, मार्च में 15 दिन के अन्तर पर सिंचाई करनी चाहिए।

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प्रश्न 13.
फसल चक्र से होने वाले लाभों का वर्णन कीजिए।

उत्तर :
फसल चक्र से होने वाले लाभ निम्न हैं

  1. भूमि की उर्वराशक्ति में कमी नहीं होती।
  2. जैव पदार्थों का अभाव नहीं होता।
  3. फसलों का रोगों और कीटों से बचाव
  4. खरपतवारों का नाश होता है।
  5. भूमि की भौतिक दशा में सुधार होता है।
  6. भूमि में विकार उत्पन्न नहीं होते।
  7. फसल उत्पादन में व्यय कम होता है।
  8. अधिक अन्न उत्पादन होता है।
  9. किसान को अधिकाधिक आर्थिक लाभ होता है। बाजार की माँग की पूर्ति की जा सकती है।

प्रश्न 14.
सूरजमुखी की फसल में कीट एवं रोग नियंत्रण के बारे में वर्णन कीजिए।

उत्तर :
कीट नियन्त्रण : सूरजमुखी में कभी-कभी दीमक, हरे फुदके तथा चना के फली बेधक का प्रकोप होता है। दीमक के नियन्त्रण के लिए क्लोरपायरीफास दवा वोने के समय खेत में मिला देना (UPBoardSolutions.com) चाहिए। हरे फुदके पत्तियों का रस चूस कर नुकसान पहुँचाते हैं। इनके नियन्त्रण के लिए एजाडिरेक्टिन 0.15 ई.सी की । लीटर मात्रा 600-800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर देना चाहिए। चना के फली वेधक की सूड़ियाँ मुण्डक के दानों को खा जाती हैं। इनकी रोकथाम के लिए क्विनालफास 25 ई.सी. की 2 ली. मात्रा को 800-1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। रोग नित्रन्त्रण-खरीफ ऋतु वाली फसल में फफूदजनित अंगमारी का प्रकोप अधिक होता है। डाइथेन एक-45 की 2.5 किग्रा मात्रा को 800-1000 लीटर पानी में घोल बनाकर 10-15 दिनों के अन्तर पर दो या तीन सप्ताह बाद छिड़काव करना चाहिए।

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प्रश्न 15.
गन्ने की उन्नतशील प्रजातियों एवं बुवाई की विधि का वर्णन कीजिए।

उत्तर :
गन्ने की उन्नतशील किस्में
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UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables

UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables (दो चरों में रैखिक समीकरण)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 9 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables (दो चरों में रैखिक समीकरण).

प्रश्नावली 4.1

प्रश्न 1.
एक नोटबुक की कीमत एक कलम की कीमत से दो गुनी है। इस कथन को निरूपित करने के लिए दो चरों वाला रैखिक समीकरण लिखिए।
हल :
माना एक नोटबुक की कीमत = x
एक कलम की कीमत = y
प्रश्नानुसार,
एक नोटबुक की कीमत = 2 x एक कलम की कीमत
x = 2y
⇒ x – 2y = 0

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित रैखिक समीकरणों को ax + by + c = 0 के रूप में व्यक्त कीजिए और प्रत्येक स्थिति में a, b और c के मान बताइए:
UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables img-1
UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables img-2

प्रश्नावली 4.2

प्रश्न 1.
निम्नलिखित विकल्पों में से कौन-सा विकल्प सत्य है और क्यों?
y = 3x + 5 का
(i) एक अद्वितीय हल है।
(ii) केवल दो हल हैं।
(iii) अपरिमित रूप से अनेक हल हैं।
हल :
दिया समीकरण y = 3x + 5 ⇒ 3x – y + 5 = 0
जो दो चर राशियों में रैखिक समीकरण है।
क्योंकि x के प्रत्येक मान के लिए 9 का एक संगत मान होता है और विलोमत: भी।
इसलिए इसके अपरिमित रूप से अनेक हल हैं।
विकल्प (iii) सत्य है।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित समीकरणों में से प्रत्येक समीकरण के चार हल लिखिए :
(i) 2x + y = 7
(ii) πx + y = 9
(iii) x = 4y
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UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables img-4

प्रश्न 3.
बताइए कि निम्नलिखित हलों में से कौन-कौन समीकरण x – 2y = 4 के हल हैं और कौन-कौन हल नहीं है :
(i) (0, 2)
(ii) (2, 0)
(iii) (4, 0)
(iv) (√2, 4√2)
(v) (1, 1)
UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables img-5
UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables img-6

प्रश्नावली 4.3

प्रश्न 1.
दो चरों वाले निम्नलिखित रैखिक समीकरणों में से प्रत्येक का आलेख खींचिए।
(i) x + y = 4
(ii) x – y = 2
(iii) y = 3x
(iv) 3 = 2x + y
हल :
(i) दिया हुआ समीकरण : x + y = 4
माना x = 1, तब
3 + y = 4 या y = 4 – 1 या y = 3.
तब, समीकरण x + y = 4 के आलेख पर एक बिन्दु A (1, 3) स्थित है।
पुनः माना x = 3, तब
3 + y = 4 या y = 4 – 3 या y = 1
तब समीकरण x + y = 4 के आलेख पर एक बिन्दु B (3, 1) स्थित है।
बिन्दुओं A (1, 3) तथा B(3, 1) को ग्राफ पेपर पर अंकित किया। अब ऋजु, रेखा AB खींची।
ऋजु रेखा AB दिए हुए रैखिक समीकरण x + y = 4 का आलेख है।
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(ii) दिया हुआ समीकरण x – y = 2
माना x = 1, तब
1 – y = 2 या -y = 2 – 1 या y = -1
तब, समीकरण x – y = 2 के आलेख पर एक बिन्दु A(1, -1) स्थित है।
UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables img-8
पुनः माना x = 4, तब
4 – y = 2 या -y = 2 – 4 या -y = – 2 या y = 2
तब समीकरण x – y = 2 के आलेख पर एक अन्य बिन्दु B (4, 2) स्थित है।
प्राप्त बिन्दुओं A (1, -1) वे B(4 , 2) को ग्राफ पेपर पर अंकित किया और उन्हें मिलाकर ऋजु रेखा AB खींची।
ऋजु रेखा AB दिए गए रैखिक समीकरण x – y = 2 का आलेख है।
(iii) दिया हुआ समीकरण y = 3x
माना x = – 1, तो y = 3 x -1 = -3
UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables img-9
अत: समीकरण y = 3x के आलेख पर एक बिन्दु A (-1, -3) स्थित है।
पुनः माना x = 1, तो y = 3 x 1 = 3
अतः समीकरण y = 3x के आलेख पर एक अन्य बिन्दु B (1, 3) स्थित है।
प्राप्त बिन्दुओं A(-1, -3)तथा B (1, 3) को ग्राफ पेपर पर अंकित किया और उन्हें मिलाकर ऋजु रेखा AB खींची।
ऋजु रेखा AB दिए गए रैखिक समीकरण y = 3 का आलेख है।
(iv) दिया हुआ समीकरण : 3 = 2x + y या 2x + y = 3
माना x = -1 तो 2 x -1 + y = 3 या -2 + y = 3 ⇒ y = 3 + 2 = 5
अत: समीकरण 3 = 2x + y के आलेख पर एक बिन्दु A(-1, 5) स्थित है।
पुनः माना x = 2 तो 2 x 2 + y = 3 या 4 + y = 3 या y = 3 – 4 = – 1
अत: समीकरण 3 = 2x + y के आलेख पर एक अन्य बिन्दु B (2, -1) स्थित है।
UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables img-10
बिन्दुओं A(-1, 5) व B (2, -1) को ग्राफ पेपर पर अंकित किया और ऋजु रेखा AB खींची।
ऋजु रेखा AB दिए गए रैखिक समीकरण 3 = 2x + y या 2x + y = 3 का आलेख है।

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प्रश्न 2.
बिन्दु (2, 14) से होकर जाने वाली दो रेखाओं के समीकरण लिखिए। इस प्रकार की और कितनी रेखाएँ हो सकती हैं और क्यों?
हल :
माना (2, 14) से होकर जाने वाली रेखा ax + by + c= 0 है।
x = 2, y = 14 रखने पर,
2a + 14b + c = 0
यदि q = 1, b = 1 तो।
2 x 1 + 14 x 1 + c = 0
c = – 16
(2, 14) से होकर जाने वाली एक रेखा का समीकरण x + y – 16 = 0 अथवा x + y = 16.
पुनः a = 7, b = -1 तो
2 x 7 + 14 x -1 + c = 0 ⇒ 14 – 14 + c= 0 ⇒ c = 0
(2, 14) से होकर जाने वाली एक अन्य रेखा का समीकरण 7x – y = 0
इस प्रकार, किसी बिन्दु (2, 14) से जाने वाली ऋजु रेखाओं की संख्या अपरिमित रूप से अनेक होगी, क्योंकि एक बिन्दु किसी सरल रेखा की स्थिति निर्धारित नहीं कर सकता। किसी सरल रेखा की स्थिति को निर्धारित करने के लिए कम-से-कम दो बिन्दुओं की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 3.
यदि बिन्दु (3, 4) समीकरण 3y = ax + 7 के आलेख पर स्थित है, तो a का मान ज्ञात कीजिए।
हल :
बिन्दु (3, 4), समीकरण 3y = ax +7 के आलेख पर स्थित है।
समीकरण 3y = ax +7 में x = 3, y = 4 रखने पर,
3 x 4= (a x 3) + 7
⇒ 12 = 3a + 7 या
⇒ 3a = 12 – 7 = 5
⇒ a = [latex]\frac { 5 }{ 3 }[/latex]
अत: a का अभीष्ट मान = [latex]\frac { 5 }{ 3 }[/latex]

प्रश्न 4.
एक नगर में टैक्सी का किराया निम्नलिखित है :
पहले किमी का किराया 8 है और उसके बाद की दूरी के लिए प्रति किमी का किराया है 5 है। यदि तय की गई दूरी x किमी हो और कुल किराया y हो, तो इसका एक रैखिक समीकरण लिखिए और उसका आलेख खींचिए।
हल :
पहले 1 किमी यात्रा का किराया = 8
और शेष यात्रा का प्रति किमी किराया = 5
तय की गई यात्रा = x किमी
तबे, x किमी यात्रा का किराया = पहले 1 किमी यात्रा का किराया + शेष (3 – 1) किमी यात्रा का किराया
y = 1 x 8 + (x – 1) x 5
y = 8 + 5x – 5
y = 5x + 3
अर्थात तय की गई x किमी यात्रा का किराया y प्रदर्शित करने वाला रैखिक समीकरण y = 5x + 3 अथवा 5x – y + 3 = 0 है।
(i) माना x = – 1 तो
y = (5 x – 1) + 3 = -5 + 3 = – 2 या y = – 2
समीकरण y = 5x + 3 के आलेख पर एक बिन्दु A(-1, -2) स्थित है।
(ii) पुनः माना x = 2 तो
y = (5 x 2) + 3 = 10 + 3 = 13 या y = 13
समीकरण y = 5 + 3 के आलेख पर एक बिन्दु B (2, 13) स्थित है।
(iii) बिन्दुओं A(-1, -2) और B (2, 13) को ग्राफ पेपर पर अंकित किया।
चित्र में समीकरण y = 5x + 3 द्वारा यात्रा-किराया आलेख प्रदर्शित किया गया है।
UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables img-11

प्रश्न 5.
निम्नलिखित आलेखों में से प्रत्येक आलेख के लिए दिए गए विकल्पों से सही समीकरण का चयन कीजिए :
(i) y = x
(ii) x + y = 0
(iii) y = 2x
(iv) 2 + 3y = 7x
UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables img-12
(i) y = x + 2
(ii) y = x – 2
(iii) y = -x + 2
(iv) x + 2y = 6
UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables img-13
हल :
पहले आलेख के लिए पहले आलेख पर स्थित बिन्दु हैं : (-1, 1) व (1, -1)
(i) दिया समीकरण y = x
इस समीकरण से स्पष्ट है कि x व y के निर्देशांक जिन बिन्दुओं में बराबर और समान चिह्न के होंगे, वही बिन्दु इस समीकरण को सन्तुष्ट करेंगे।
अतः विकल्प (i) सही नहीं है।
(ii) दिया हुआ समीकरण x + y = 0
बिन्दु (-1, 1) के लिए समीकरण x + y = 0 में x = -1 तथा y = +1 प्रतिस्थापित करने पर, बायाँ पक्ष = (-1) + (1) = 0 = दायाँ पक्ष
और बिन्दु (1, -1) के लिए समीकरण x + y = 0 में x = 1 तथा y = – 1 प्रतिस्थापित करने पर,
बायाँ पक्ष = (1) + (- 1) = 0= दायाँ पक्
बिन्दु (-1, 1) व (1,- 1), समीकरण x + y = 0 के आलेख पर स्थित हैं।
अत: विकल्प (ii) सही है।
दूसरे आलेख के लिए
इस आलेख पर स्थित बिन्दु (-1, 3), (0, 2) व (2, 0) हैं। तब आलेख के समीकरण को उक्त बिन्दुओं में से कम-से-कम दो बिन्दुओं द्वारा सन्तुष्ट होना चाहिए।
(i) दिया हुआ समीकरण y = x + 2 तब समीकरण y = x + 2 में x = -1, y = 3 रखने पर,
3 = -1 + 2 जो कि असंगत है।
अतः बिन्दु (-1, 3) समीकरण y = x + 2 के आलेख पर स्थित नहीं है।
अत: विकल्प (i) सही नहीं है।
(ii) दिया हुआ समीकरण y = x – 2
तब समीकरण y = x – 2 में x = -1, y = 3 रखने पर,
3 = -1 – 2 जो कि असंगत है।
अतः बिन्दु (-1, 3) समीकरण y = x – 2 के आलेख पर स्थित नहीं है।
अतः विकल्प (ii) सही नहीं है।
(iii) दिया हुआ समीकरण y = – x + 2
तब समीकरण y = – x + 2 में x = – 1 व y = 3 रखने पर,
3 = – (-1) + 2 = 1 + 2 = 3
अर्थात, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष
बिन्दु (-1, 3) समीकरण y = -x + 2 के आलेख पर स्थित है।
तब बिन्दु (0, 2) के लिए : समीकरण में x = 0, y = 2 प्रतिस्थापित करने पर,
बायाँ पक्ष = 2 और दायाँ पक्ष = – 0 + 2 = 2
बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष
बिन्दु (0, 2) समीकरण y = -x + 2 के आलेख पर स्थित है।
और बिन्दु (2, 0) के लिए : समीकरण में x = 2 तथा y = 0 प्रतिस्थापित करने पर,
दायाँ पक्ष = – x + 2= – 2 + 2 = 0 = बायाँ पक्ष
बिन्दु (2, 0) समीकरण y = – x + 2 के आलेख पर स्थित है।
सभी बिन्दु (-1, 3), (0, 2), (2, 0) समीकरण y = -x + 2 के आलेख पर स्थित हैं।
अतः विकल्प (iii) सही है।

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प्रश्न 6.
एक अचर बल लगाने पर पिण्ड द्वारा किया गया कार्य पिण्ड द्वारा तय की गई दूरी के अनुक्रमानुपाती होता है। इस कथन को दो चरों वाले एक समीकरण के रूप में व्यक्त कीजिए और अचर बल 5 मात्रक लेकर इसका आलेख खींचिए।
यदि पिण्ड द्वारा तय की गई दूरी
(i) 2 मात्रक
(ii) 0 मात्रक
हो तो आलेख से किया हुआ कार्य ज्ञात कीजिए।
हल :
माना किसी पिण्ड द्वारा तय की गई दूरी के लिए चर 5 तथा पिण्ड द्वारा किए गए कार्य के लिए चर W है।
पिण्ड द्वारा किया गया कार्य ∝ पिण्ड द्वारा तय की गई दूरी (प्रश्नानुसार)
W ∝ s
यदि समानुपात का नियतांक (बल F) हो तो
W = F.s …(1)
दिया है, अचर बल F = 5 मात्रक है।
W = 5s
X-अक्ष (X’OX) पर पिण्ड द्वारा चली दूरी 8 तथा Y-अक्ष पर पिण्ड द्वारा किए गए कार्य W को प्रदर्शित किया।
माना s = 1 मात्रक, तो । समीकरण W = 5s में s = 1 रखने पर,
W = 5 x 1 = 5 मात्रक तब, बिन्दु A(1, 5), समीकरण W = 5s के आलेख पर स्थित है।
पुनः माना s = 3 मात्रक, तो समीकरण W = 5s में s = 3 रखने पर,
W = 5 x 3= 15 मात्रंक …(2)
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तब बिन्दु B (3, 15), समीकरण W = 5s के आलेख पर स्थित है।
बिन्दुओं A(1, 5) व B (3, 15) को ग्राफ पेपर पर अंकित किया और ऋजु रेखा AB खींची।
ऋजु रेखा AB अभीष्ट दूरी-कार्य का आलेख है।
(i) 2 मात्रक दूरी के लिए पिण्ड द्वारा किया गया कार्य :
(a) X-अक्ष पर 2 मात्रक चलकर Y-अक्ष के समान्तर चलाने पर आलेख पर बिन्दु P प्राप्त होता है।
(b) P से X-अक्ष के समान्तर चलकर Y-अक्ष पर पहुँचते हैं।
(c) पैमाने की सहायता से Y-अक्ष पर स्थिति 2 के सापेक्ष 10 मात्रक है अर्थात P (2, 10)
स्पष्ट है कि 2 मात्रक दूरी चलने पर पिण्ड द्वारा किया गया कार्य 10 मात्रक होगा।
(ii) 0 मात्रक दूरी के लिए :
ग्राफ के आलेख पर एक बिन्दु (0, 0) है।
0 मात्रक दूरी चलने पर किया गया कार्य = 0(शून्य) मात्रक।

प्रश्न 7.
एक विद्यालय की कक्षा IX की छात्राएँ यामिनी और फातिमा ने मिलकर भूकम्प पीड़ित व्यक्तियों की सहायता के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष में 100 अंशदान दिया।एक रैखिक समीकरण लिखिए जो इन आँकड़ों को सन्तुष्ट करता हो।(आप उनका अंशदान x और y मान सकते हैं)। इस समीकरण का आलेख खींचिए।
हल :
माना यामिनी ने x तथा फातिमा ने y दिए।
दोनों ने मिलकर (x + 3) का अंशदान दिया,
परन्तु प्रश्नानुसार दोनों ने 100 अंशदान दिया
तब, x + y = 100
जो कि अभीष्ट रैखिक समीकरण है।
यामिनी-फातिमा के प्रधानमंत्री राहत कोष में दिए अंशदान का ग्राफीय आलेख
(i) प्राप्त रैखिक समीकरण x + y = 100
(ii) माना x = 10, तो 10 + y = 100 या y = 90
अतः बिन्दु A(10, 90), समीकरण x + y = 100 के आलेख पर स्थित है।
UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables img-15
(iii) माना x = 80, तो
80 + y = 100 या y = 20
अतः बिन्दु B (80, 20) समीकरण x + y = 100 के आलेख पर स्थित है।
(iv) बिन्दुओं A (10, 90) तथा B (80, 20) को ग्राफ पेपर पर अंकित किया तथा इन्हें मिलाते हुए एक ऋजु रेखा AB . खींची।
ऋजु रेखा AB दोनों छात्राओं द्वारा प्रधानमंत्री राहत कोष में दिए गए अंशदान का आलेख प्रदर्शित करती है।

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प्रश्न 8.
अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में तापमान फारेनहाइट में मापा जाता है, जबकि भारत जैसे देशों में तापमान सेल्सियस में मापा जाता है। यहाँ फारेनहाइट को सेल्सियस में रूपान्तरित करने वाला एक रैखिक समीकरण दिया गया है।
F = ([latex]\frac { 9 }{ 5 }[/latex]) C + 32
(i) सेल्सियस को X-अक्ष और फारेनहाइट को Y-अक्ष मानकर ऊपर दिए गए रैखिक समीकरण का आलेख खींचिए।
(ii) यदि तापमान 30°c है, तो फारेनहाइट में तापमान क्या होगा?
(iii) यदि तापमान 95° F है, तो सेल्सियस में तापमान क्या होगा?
(iv) यदि तापमान 0° c है, तो फारेनहाइट में तापमान क्या होगा? और यदि तापमान 0° F है, तो सेल्सियस में तापमान क्या होगा?
(v) क्या ऐसा भी कोई तापमान है जो फारेनहाइट और सेल्सियस दोनों के लिए संख्यात्मकतः समान है? यदि हाँ, तो उसे ज्ञात कीजिए।
हल :
फारेनहाइट-सेल्सियस तापमान रूपान्तरण समीकरण
F= ([latex]\frac { 9 }{ 5 }[/latex]) C + 32
(i) (1) X-अक्ष पर सेल्सियस पैमाना अंकित किया।
(2) Y-अक्ष पर फारेनहाइट पैमाना अंकित किया।
(3) दिया हुआ समीकरण F= ([latex]\frac { 9 }{ 5 }[/latex]) C + 32
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प्रश्नावली 4.4

प्रश्न 1.
(i) एक चर वाले
(ii) दो चर वाले समीकरण के रूप में y = 3 का ज्यामितीय निरूपण कीजिए।
हल :
(i) एक चर वाले समीकरण के रूप में y = 3 का ज्यामितीय निरूपण :
संख्या रेखा खींचिए और उस पर 0 के दायीं ओर तीसरा चिह्न चिह्नित कीजिए। y = 3 की संख्या-रेखा पर यही ज्यामितीय स्थिति है।
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(ii) दो चर वाले समीकरण के रूप में y = 3 का ज्यामितीय निरूपण :
(1) वर्ग पत्रक (ग्राफ पेपर) पर X-अक्ष तथा Y-अक्ष खींचकर उन पर मापन चिह्न अंकित कीजिए।
(2) Y-अक्ष पर +3 चिह्न से X-अक्ष के समान्तर रेखा AB खींचिए जो X-अक्ष के ऊपर X-अक्ष से 3 इकाई की दूरी पर स्थित हैं।
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इस रेखा पर x (भुज) के भिन्न-भिन्न मान वाले बिन्दुओं के लिए भी y (कोटि) का मान 3 स्थिर है।
अतः ऋजु रेखा AB अभीष्ट आलेख है।

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प्रश्न 2.
(i) एक चर वाले
(ii) दो चर वाले
समीकरण के रूप में 2x + 9 = 0 का ज्यामितीय निरूपण कीजिए।
हल :
(i) एक चर वाले समीकरण के रूप में 2x + 9 = 0 की ज्यामितीय निरूपण :
दिया हुआ समीकरण 2x + 9 = 0 या 2x = – 9 या x = -4[latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] संख्या-रेखा खींचिए। 0 के बायीं ओर -4[latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] पर चिह्न लगाइए संख्या-रेखा पर 2x + 9 = 0 की यही स्थिति है।
UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 4 Linear Equations in Two Variables img-22
(ii) दो चर वाले समीकरण के रूप में 2x + 9 = 0 का ज्यामितीय निरूपण :
(1) ग्राफ पेपर पर X-अक्ष तथा Y-अक्ष खींचकर उन पर मापक चिह्न अंकित कीजिए।
(2) X-अक्ष पर [latex]\frac { -9 }{ 2 }[/latex] या -4.5 चिह्नित (अंकित) कीजिए और इससे Y-अक्ष के समान्तर रेखा AB खींचिए जो Y-अक्ष के बायीं ओर Y-अक्ष से 4.5 इकाई दूरी पर स्थित है।
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इस रेखा पर स्थित सभी बिन्दुओं के लिए x = -4[latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] चाहे 3 को मान कुछ भी हो।
अतः ऋजु रेखा AB अभीष्ट आलेख है।

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