UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 8 धानों का गीत (मंजरी)

UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 8 धानों का गीत (मंजरी)

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समस्त पद्याशों का भावार्थ

धान उगेंगे……………………………………………………………………… बादल जरूर।
संदर्भ-प्रस्तुत गीत हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मंजरी’ के संकलित पाठ ‘धानों का गीत’ नामक गीत से उद्धृत है। यह गीत लेखक केदारनाथ सिंह द्वारा रचित है।
प्रसंग-प्रस्तुत गीत में किसान की तान में सुर मिलाकर धान, चाँदनी एवं गाँव के विश्वास को बड़ी ही सरलता से प्रस्तुत किया गया है। कवि ग्रामीण परिवेश के अन्तर्गत किसान के स्वर में बादल को स्वागत करता है।
भावार्थ-लहलहाते धान के खेतों को देखकर किसान प्रसन्न हो जाता है और कहता है कि उसके खेतों में धान होंगे जिनके लिए वर्षा की, पानी की जरूरत होने के कारण बादलों को आने का निमन्त्रण देता है। (UPBoardSolutions.com) चन्द्रमा धान की कोमल बालियों पर चाँदनी छिटकाएगा और सूरज सूखी रेत पर प्रकाशित होगा। वर्षा होने के कारण खेत से आगे रास्ते खाली होंगे और बसों के पेड़ झुके दिखाई देंगे। संध्या समय नमी से आँखें गीली होंगी और सवेरे खेतों में धान लहराता नजर आएगा, जिसके लिए बादलों को आने को निमन्त्रण दिया जा रहा है, ताकि वर्षा हो। .

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धान कैंपेंगे …………………………………………………………………….. बादल जरूर।
संदर्भ एव प्रसंग-पूर्ववत्।
भावार्थ-किसान खेत में हिलते हुए धान को देखकर प्रसन्न होकर कहता है कि (हवा चलने पर) धान हिलने लगेंगे। पानी की जरूरत पूरी करने के लिए बादलों को अनिवार्य आगमन को निमन्त्रण देता है। धूपं ढलने पर तुलसी के पौधे हिलने लगेंगे और संध्या समय कनेर के फूल खिल उठेंगे और ज्वार तथा धान की लहलहाती फसलें हिलती (UPBoardSolutions.com) नजर आएँगी। फसलों की पानी की जरूरत पूरी करने के लिए किसान बादलों को अनिवार्य रूप से आने का निमन्त्रण देता है और कहता है कि फसल उनके खेतों में पक जाएगी।

प्रश्न-अभ्यास

कुछ करने को-        नोट-विद्यार्थी स्वयं करें।
विचार और कल्पना-    नोट-विद्यार्थी स्वयं करें।

गीत से-
प्रश्न 1.
बादल को स्वागत कौन-कौन और कब-कब कर रहे हैं?
उत्तर-
बादल का स्वागत किसान भोर (सुबह), धूप ढले, साँझ, पूजा की बेला आदि पर कर रहे हैं।

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प्रश्न 2.
पंक्तियों के भावार्थ स्पष्ट कीजिए
(क) चंदा को बाँचेंगे कच्ची कलगियों, सूरज को सूखी रेत में।
भावार्थ-चन्द्रमा की चाँदनी धान की कोमल बालियों पर और सूरज सूखे रेत में प्रकाशित होगा।
(ख) संझा पुकारेंगी गीली आँखड़ियाँ भोर हुए धन-खेत।
भावार्थ-संध्या समय नमी से आँखें गीली होंगी और सुबह खेत दिखाई देंगे।
(ग) पूजा की बेला में ज्वार अरेंगे, धान-दिये की बेर।
भावार्थ-प्रात:काल में ज्वार और रात्रि में धान के खेत लहराएँगे।

प्रश्न 3.
धान को प्रान क्यों कहा गया है? समझाकर लिखिए।
उत्तर-
धान को प्रान इसलिए कहा गया है क्योंकि संसार में एक बड़ी जनसंख्या के भोजन का आधार चावल ही है।

प्रश्न 4.
धान उगेंगे कि प्रान उगेंगे,
धान कैंपेंगे कि प्रान कैंपेंगे, और
धान पकेंगे कि प्रान पकेंगे- इन तीनों पंक्तियों के भावार्थ की तुलना करते हुए यह स्पष्ट कीजिए कि ‘उगेंगे’, कैंपेंगे और ‘पकेंगे’ से क्या आशय है?
उत्तर-
धान के उगने, लहलहाने और पक जाने से आशय है। 

भाषा की बात-
प्रश्न 1.
जहाँ प्रकृति की वस्तुओं को मानवीय व्यवहार की तरह दिखाया जाता है, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है, जैसे-संझा पुकारेगी। इसकी तरह कविता में मानवीकरण अलंकार के अन्य उदाहरण हूँढकर लिखिए।
उत्तर-
बादल आना जी, डगरिया पुकारेगी, तुलसी-वन झरेंगे, ज्वार झरेंगे।

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प्रश्न 2.
कविता में अनेक तद्भव शब्दों का प्रयोग हुआ है। जैसे- प्रान और चन्दा। इनका तत्सम रूप क्रमशः ‘प्राण’ और ‘चन्द्रमा’ है। कविता में आए अन्य तद्भव शब्दों को छाँटिए तथा उनका तत्सम रूप लिखिए।
उत्तर-
तद्भव                   तत्सम
सूरज                    सूर्य
सूखी                    
शुष्क
खेत                     क्षेत्र
साँझ                   संध्या
दिये                    दीपक

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UP Board Solutions for Class 9 Hindi Chapter 6  मैथिलीशरण गुप्त (काव्य-खण्ड)

UP Board Solutions for Class 9 Hindi Chapter 6  मैथिलीशरण गुप्त (काव्य-खण्ड)

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विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. निम्नलिखित पद्यांशों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए तथा काव्यगत सौन्दर्य भी स्पष्ट कीजिए :

(पंचवटी)

1. चारु चन्द्र की ……………………………………. झोंकों से।
शब्दार्थ- चारु = सुन्दर । अवनि = धरती। अम्बरतले = आकाश। पुलक = आनन्दमय रोमांचित । तृण = घास । झीम = झूमना ।
सन्दर्भ- प्रस्तुत पद ‘हिन्दी काव्य’ में संकलित एवं मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित खण्डकाव्य ‘पंचवटी’ से लिया गया है।
प्रसंग- यहाँ कवि ने पंचवटी के प्राकृतिक सौन्दर्य का सजीव चित्रण किया है।
व्याख्या- गुप्त जी कहते हैं कि सुन्दर चन्द्रमा की किरणें जल और थल में फैली हुई हैं। पृथ्वी और आकाश में स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है। हरी-हरी घास की नोकें (UPBoardSolutions.com) ऐसी लगती हैं मानो वे पृथ्वी के सुख से रोमांचित हो रही हैं। वहाँ के सभी वृक्ष मन्दमन्द वायु के झोंकों से झूमते प्रतीत होते हैं।
काव्यगत सौन्दर्य

  1. भाषा- खड़ीबोली । चाँदनी रात का बड़ा सुन्दर शब्द-चित्र प्रस्तुत किया गया है।
  2. अलंकार- अनुप्रास, उत्प्रेक्षा एवं मानवीकरण । रस- श्रृंगार । गुण- माधुर्य ।

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2. पंचवटी की छाया ……………………………………. दृष्टिगत होता है।
शब्दार्थ-  पर्णकुटीर = पत्तों की कुटिया। सम्मुख = सामने । स्वच्छ = साफ, निर्मल । शिला = पत्थर । निर्भीकमना = निर्भय मनवाला। धनुर्धर = धनुष धारण करनेवाला। भुवन-भर = सम्पूर्ण संसार। भोगी = भोग करनेवाला, राजा। कुसुमायुध = कामदेव।
सन्दर्भ- प्रस्तुत पद्यांश ‘हिन्दी काव्य’ में संकलित एवं मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘पंचवटी’ शीर्षक कविता से उद्धृत है।
प्रसंग- इसमें प्रहरी के रूप में लक्ष्मण को सुन्दर चित्रण किया गया है।
व्याख्या- कवि कहता है कि पंचवटी की घनी छाया में एक सुन्दर पत्तों की कुटिया बनी हुई है। उस कुटिया के सामने एक स्वच्छ विशाल पत्थर पड़ा हुआ है और उस पत्थर (UPBoardSolutions.com) के ऊपर धैर्यशाली, निर्भय मनवाला वीर पुरुष बैठा हुआ है। सारा संसार सो रहा है परन्तु यह धनुषधारी इस समय भी जाग रहा है। यह वीर ऐसा दिखायी पड़ता है जैसे भोग करनेवाला कामदेव यहाँ योगी बनकर आ बैठा हो ।
काव्यगत सौन्दर्य

  1. भाषा- खड़ीबोली । रस- शान्त । अलंकार- अनुप्रास अलंकार की छटा है, उपमा अलंकार की सुन्दर योजना है। प्रसाद गुण युक्त सरल साहित्यिक खड़ीबोली भाषा है। गुण- प्रसाद।

3. किस व्रत में ……………………………………. जीवन है।
शब्दार्थ-व्रती = व्रत धारण करनेवाला । विपिन = वन । विराग = वैराग्य, विरक्ति। प्रहरी = पहरेदार । कुटीर = कुटिया। रस = लगा हुआ। राज भोग्य = राज भोगने योग्य।
सन्दर्भ- प्रस्तुत पद्यांश हिन्दी काव्य’ में संकलित एवं मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘पंचवटी’ खण्डकाव्य से अवतरित है।
प्रसंग- यहाँ राम और सीता की कुटी पर पहरा देते हुए लक्ष्मण की विशेषताओं का चित्रण किया गया है।
व्याख्या- इस वीर पुरुष ने यह कौन-सा व्रत धारण किया है, जिसके कारण इस प्रकार नींद का त्याग कर दिया है। यह तो राज्य के सुखों को भोगने योग्य है परन्तु किस कारण (UPBoardSolutions.com) से यह वन में वैराग्य ग्रहण किये हुए बैठा है। पता नहीं इस कुटिया में ऐसा कौन-सा अमूल्य धन रखा हुआ है, जिसकी रक्षा में तन-मन और जीवन लगाते हुए लक्ष्मण प्रहरी बना हुआ है।
काव्यगत सौन्दर्य 

  1. यहाँ एक निर्भीक और कर्तव्यनिष्ठ प्रहरी के रूप में लक्ष्मण का सजीव चित्रण हुआ है।
  2. भाषा- सरस व शुद्ध खड़ीबोली।
  3. शैली- वर्णनात्मक।
  4. अलंकार- अनुप्रास।
  5. गुण-ओज
  6. रस- अद्भुत ।

4. मर्त्यलोक-मालिन्य ……………………………………. माया ठहरी।
शब्दार्थ- मर्त्यलोक-मालिन्य =
संसार के पाप ।
सन्दर्भ- प्रस्तुत पद्य पंक्तियाँ ‘हिन्दी काव्य’ में संकलित एवं मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘पंचवटी’ खण्डकाव्य से उद्धृत हैं।
प्रसंग- कवि ने उस अनुपम धन की महानता का वर्णन किया है, जिसकी रक्षा में वीर, व्रती लक्ष्मण एकाग्र मन से संलग्न हैं।
व्याख्या- वास्तव में इस कुटी के अन्दर ऐसा अनुपम धन है, जिसकी रक्षा एक वीर पुरुष ही कर सकता है। तीनों लोकों को साक्षात् लक्ष्मी सीताजी इस कुटी के अन्दर विद्यमान हैं। वे अपने पति राम के साथ इस कुटी में रह रही हैं। मनुष्य लोक की बुराइयों को दूर करने के लिए वे अपने पति राम के (UPBoardSolutions.com) साथ आयी हैं; अतः इस कुटी में तीनों लोकों की लक्ष्मी स्वरूप सीताजी विराजमान हैं। वे वीरों के वंश की प्रतिष्ठा हैं। रघुवंश वीरों की वंश है। उनकी रक्षा से ही रघुवंश की प्रतिष्ठा हो सकती है। यदि सीताजी की प्रतिष्ठा में कोई आँच आती है तो रघुकुल की प्रतिष्ठा में धब्बा लगता है। इसीलिए लक्ष्मण जैसे प्रहरी को यहाँ नियुक्त किया गया है। वीर लक्ष्मण इस कुटी में उपस्थित सीताजी की रक्षा में अपना तन, मन और जीवन समर्पित किये हुए हैं।
                 यह वन निर्जन है। रात्रि काफी शेष है। यहाँ पर राक्षस लोग चारों ओर घूम रहे हैं। वे किसी माया के जाल में फंसाकर विपत्ति खड़ी कर सकते हैं। अतः रात्रि के समय निर्जन प्रदेश में राक्षसों की माया से बचने के लिए लक्ष्मण जैसा वीर ही उपयुक्त पहरेदार है।
काव्यगत सौन्दर्य

  1. यहाँ कवि ने वीर लक्ष्मण को उपयुक्त पहरेदार के रूप में चित्रित किया है।
  2. सीता ‘वीर वंश की लाज’ हैं।
  3. भाषा- साहित्यिक खड़ीबोली।
  4. शैली- चित्रात्मक एवं गीत ।
  5. रस- शान्त ।
  6. छन्द- मात्रिक।
  7. अलंकार- अनुप्रास, रूपक। गुण-माधुर्य ।

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5. क्या ही स्वच्छ……………………………………. और चुपचाप।
शब्दार्थ- निस्तब्ध = सन्नाटे से भरी। स्वच्छन्द= स्वतन्त्र । सुमन्द = मन्द-मन्द। गन्धवह = हवा, वायु। निरानन्द = आनन्दरहित । नियति-नटी = नियतिरूपी । नटी = नर्तकी । नियति = भवितव्यता, भाग्य । कार्य-कलाप = क्रिया-कलाप, काम।
सन्दर्भ- प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी काव्य’ में संकलित एवं मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘पंचवटी’ पाठ से उधृत है।
प्रसंग- पंचवटी में दूर तक फैली चाँदनी का वर्णन करते हुए कवि कहता है
व्याख्या- पंचवटी में जो दूर-दूर तक चाँदनी फैली हुई है, वह बहुत ही साफ दिखायी दे रही है और रात सन्नाटे से भरी है। कोई शब्द नहीं हो रहा है। वायु स्वच्छन्द गति से, अपनी स्वतन्त्र चाल से मन्द-मन्द बह रही है। इस समय उत्तर-पश्चिम आदि सभी दिशाओं में आनन्द-ही-आनन्द (UPBoardSolutions.com) व्याप्त है। कोई भी दिशा आनन्द-शून्य नहीं है। ऐसे समय में भी नियति नामक शक्ति-विशेष के समस्त कार्य सम्पन्न हो रहे हैं। कहीं कोई रुकावट नहीं। नियति-नटी अपने क्रिया-कलापों को बहुत ही शान्ति से सम्पन्न कर रही है। वह एकान्त भाव से अर्थात् अकेले-अकेले और चुपचाप अपने कर्तव्यों का निर्वाह किये जा रही है।
काव्यगत सौन्दर्य

  1. नियति के क्रिया-कलाप निरन्तर चलते रहते हैं। उनमें दिन या रात का कोई व्यवधान नहीं आता।
  2. भाषा- साहित्यिक खड़ीबोली।
  3. छन्द- मात्रिक।
  4. अलंकार- अनुप्रास, रूपक।
  5. रस- शान्त
  6. शैली- भावात्मक।

6. है बिखेर देती……………………………………. झलकाता है।
सन्दर्भ- प्रस्तुत अवतरण मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘पंचवटी’ नामक काव्य से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी काव्य’ में संगृहीत किया गया है।
प्रसंग- वनवास के समय पंचवटी में निवास करते हुए लक्ष्मण एक पर्णकुटी में सीता की रक्षा करते हुए रात की प्राकृतिक शोभा का वर्णन करते हुए कहते हैं
व्याख्या- यह पृथ्वी सबके सो जाने पर नित्यप्रति आकाश में नक्षत्ररूपी मोतियों को फैला देती है और सूर्य सदा ही प्रातः काल हो जाने पर उनको बटोरकर रख लेता है। वह सूर्य.भी.नक्षत्ररूपी मोतियों को संध्यारूपी सुन्दरी को देकर अपने लोक चला जाता है। अतः नक्षत्ररूपी मोतियों को धारण (UPBoardSolutions.com) करके उस सन्ध्यारूपी सुन्दरी का शून्य-सा श्यामल रूप झिलमिल करता हुआ अति दीप्त हो जाता है।
काव्यगत सौन्दर्य

  1. प्रकृति वर्णन में मानवीकरण किया गया है।
  2. अलंकार-अतिशयोक्ति अलंकार । भाषा-शुद्ध परिमार्जित खड़ीबोली। गुण-प्रसाद, शैली-वर्णनात्मक। छन्द-मात्रिक।

7. सरल तरल जिन तुहिन ……………………………………. सदय भाव से सेती है।
शब्दार्थ- तुहिन = ओस, पाला। सेती है = रक्षा करती है। अदय = निर्दय।
सन्दर्भ- प्रस्तुत पद ‘हिन्दी काव्य’ में संकलित एवं मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित खण्डकाव्य ‘पंचवटी’ से लिया गया है।
प्रसंग- पंचवटी में लक्ष्मण शिला पर विराजमान हो प्रकृति के रूप और उनके व्यवहार के सम्बन्ध में सोच रहे हैं। वे कहते हैं
व्याख्या- कभी तो प्रकृति पृथ्वी पर जिन ओस के कणों से हँसती और प्रसन्न होती-सी प्रतीत होती है उन्हीं ओस के कणों के माध्यम से वह हमारे अत्यन्त ही निकट और आत्मीय हो कष्टों से व्यथित होकर रुदन करती-सी प्रतीत होती है अर्थात् कभी ओस की बूंदें मोती-सी चमकदार प्रकृति की प्रसन्नता को व्यक्त करती हैं और कभी आँख के आँसुओं के रूप में हमारे दुःखों से दुःखित हो रोती हुई-सी प्रतीत (UPBoardSolutions.com) होती हैं। कभी तो यह इतनी निर्दय और निष्ठुर हो जाती हैं कि वह अनजाने में हमारे द्वारा की गयी भूलों के कारण हमें कठोर से कठोर दण्ड तक ने सकती हैं; जैसे-भूकम्प, अतिवृष्टि, बाढ़ आदि। कभी इतनी दयालु हो जाती हैं। कि बूढों की भी बच्चों की भाँति दया-भाव से सेवा करती हैं।
काव्यगत सौन्दर्य

  1. इस पद में प्रकृति के शिव और अशिव दोनों रूपों का वर्णन है।
  2. यहाँ पर प्रकृति का मानवीकरण किया गया है जो छायावादी कविता का प्रभाव है।
  3. ‘हँती हरित होती है’, ‘अति आत्मीयता से सेती है’ अनुप्रास अलंकार है। छन्द- मात्रिक।भाषा- साहित्यिक खड़ीबोली। रस- शृंगार । गुण- माधुर्य।

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8. तेरह वर्ष ….………………………………….किस धन की?
शब्दार्थ- तात = पिताजी। आर्त = दु:ख से। इन जन को = मुझे।
सन्दर्भ- प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी काव्य’ में संकलित एवं मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘पंचवटी’ से उद्धृत है।
प्रसंग- कवि ने वनवास के 13 वर्ष व्यतीत हो जाने पर लक्ष्मण के घर लौटने की प्रसन्नता का वर्णन किया है।
व्याख्या- वनवास के समय यद्यपि तेरह वर्ष व्यतीत हो चुके हैं परन्तु सम्पूर्ण बात कल की बात की तरह हृदय पटल पर अंकित है, जबकि पिताजी हमको वन में आते देख दुःख से अचेत हो गये थे। वनवास की अवधि की समाप्ति निकट है परन्तु मुझे इसँ वनवास से बढ़कर और किस धन की प्राप्ति हो सकती है। काव्यगत सौन्दर्य

  1. भाषा- साहित्यिक खड़ीबोली । रस- शान्त । गुण- प्रसाद । छन्द- मात्रिक। अलंकार- उत्प्रेक्षा, रूपक।

9. और आर्य को?…..………………………………….. यह नरलोक?
शब्दार्थ- प्रजार्थ = प्रजा के लिए। लोकोपकार = संसार की भलाई।
सन्दर्भ- प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी काव्य’ में संकलित एवं मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘पंचवटी’ से उद्धृत है।
प्रसंग- कवि कहता है कि लक्ष्मण कल्पना कर रहे हैं कि जब रामचन्द्र को राज्य मिल जायेगा तो वे अपने कर्तव्य में इतने व्यस्त हो जायेंगे कि हमें भूल जायेंगे। राम के जन कल्याण में लगे होने के कारण इसको हम बुरा नहीं मानेंगे।
व्याख्या- आर्य राम को इससे अधिक सुख और (UPBoardSolutions.com) क्या हो सकता है? रामचन्द्र जी सिंहासन पर बैठकर प्रजा के सुख के लिए राज्य करेंगे। उस कार्य में व्यस्त होकर हमको भी भुला देने को विवश हो जायेंगे। परन्तु संसार की भलाई के विचार से हमको इसमें तनिक भी दुःख नहीं होगा, किन्तु क्या यह मनुष्य समाज राजा का आश्रय न लेकर अपनी भलाई स्वयं नहीं कर सकता।
काव्यगत सौन्दर्य

  1. भाषा- खड़ीबोली है।
  2. रस- शान्त। गुण- माधुर्य । छन्द- मात्रिक। इसमें यह भाव दर्शाया गया है कि क्या मनुष्य बिना किसी के सहारे अपनी भलाई स्वयं नहीं कर सकता? अलंकार-उत्प्रेक्षा।

प्रश्न 2. मैथिलीशरण गुप्त की जीवनी एवं रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
अथवा मैथिलीशरण गुप्त की साहित्यिक सेवाओं एवं भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
अथवा मैथिलीशरण गुप्त के साहित्य एवं जीवन-परिचय पर प्रकाश डालिए।

मैथिलीशरण गुप्त
( स्मरणीय तथ्य )

जन्म- सन् 1886 ई०, चिरगाँव जिला झाँसी, (उ० प्र०)। मृत्यु- सन् 1964 ई०।
रचनाएँ- मौलिक काव्य-‘भारत-भारती’, ‘जयद्रथ-वध’, ‘पंचवटी’, ‘साकेत’, ‘यशोधरा’, ‘द्वापर’, ‘सिद्धराज’ आदि। 
अनूदित-‘मेघनाद-वध’, ‘वीरांगना’, ‘विरहिणी-ब्रजांगना’, ‘प्लासी का युद्ध’, ‘रुबाइयाँ’, ‘उमर-खैयाम’।
काव्यगत विशेषताएँ
वर्य-विषय- ‘राष्ट्रप्रेम’, ‘आर्य संस्कृति से प्रेम’, ‘प्रकृति-प्रेम’,’मानव हृदय चित्र’, ‘नारी महत्त्व’।
भाषा- शुद्ध तथा परिष्कृत खड़ीबोली।
शैली- प्रबन्धात्मक, उपदेशात्मक, गीतिनाट्य तथा भावात्मक।
रस तथा अलंकार- प्रायः सभी। विप्रलम्भ श्रृंगार में विशेष सफलता मिली है।

  • जीवन-परिचय- राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म चिरगाँव जिला झाँसी में सन् 1886 ई० में हुआ था। गुप्तजी के पिता का नाम सेठ रामचरण जी था जो अत्यन्त ही सहृदय और काव्यानुरागी व्यक्ति थे। पिता के संस्कार पुत्र को पूर्णतः प्राप्त थे। इनकी शिक्षा-दीक्षा प्रायः घर पर ही हुई थी । हिन्दी के अतिरिक्त इन्होंने संस्कृत, बंगला, मराठी आदि भाषाओं का अध्ययन किया था। आचार्य पं० महावीरप्रसाद द्विवेदी जी के सम्पर्क में आने से इनकी रचनाएँ सरस्वती में प्रकाशित होने लगीं। द्विवेदीजी की प्रेरणा से ही इनके काव्य में गम्भीरता एवं उत्कृष्टता का विकास हुआ। इनके काव्य में राष्ट्रीयता की छाप है। (UPBoardSolutions.com) गाँधी दर्शन से आप विशेष प्रभावित हैं। इन्होंने असहयोग आन्दोलन में जेल यात्रा भी की है। आगरा विश्वविद्यालय ने इनकी हिन्दी सेवा पर सन् 1948 ई० में डी० लिट्० की सम्मानित उपाधि से विभूषित किया। ‘साकेत’ नामक प्रबन्ध काव्य पर इनको मंगलाप्रसाद पारितोषिक भी मिल चुका है। आप स्वतन्त्र भारत के राज्यसभा में सर्वप्रथम सदस्य मनोनीत किये गये थे। आपकी मृत्यु सन् 1964 ई० में हो गयी।
  • रचनाएँ– गुप्तजी की रचनाएँ दो प्रकार की हैं- (1) मौलिक एवं (2) अनूदित ।
    1. मौलिक- जयद्रथ-वध, भारत-भारती, पंचवटी, नहुष आदि।
    2. अनूदित रचनाएँ- मेघनाद वध, वीरांगना, स्वप्नवासवदत्ता आदि।’साकेत’ आधुनिक युग का प्रसिद्ध महाकाव्य है। इसमें रामकथा को एक नये परिवेश में चित्रित कर उपेक्षित उर्मिला के चरित्र को उभारा गया है। यशोधरा में बुद्ध के चरित्र का चित्रण हुआ है। यह एक चम्पू काव्य है जिसमें गद्य और पद्य दोनों में रचना की गयी है। भारत-भारती गुप्त जी की सर्वप्रथम खड़ीबोली की राष्ट्रीय रचना है जिसमें देश की अधोगति को बड़ा ही मार्मिक एवं हृदयस्पर्शी चित्रण किया गया है।

काव्यगत विशेषताएँ

  • (क) भाव-पक्ष-
    1. गुप्तजी की कविता के वर्ण्य-विषय मुख्यतः भक्ति, राष्ट्र-प्रेम, भारतीय संस्कृति और समाजसुधार हैं।
    2. इनकी धार्मिकता में संकीर्णता का आरोप नहीं किया जा सकता है।
    3. ये भारतीय संस्कृति के सच्चे पुजारी हैं।
    4. गुप्तजी लोक सेवा को सर्वोपरि मानते हैं।
    5. इनके हृदय में नारी जाति के प्रति अपार आदर और सहानुभूति है।
    6. राष्ट्रप्रेम तो गुप्तजी के शब्द-शब्द में भरा है।
    7. इनकी राष्ट्रीयता पर गाँधीवाद की पूरी छाप है।
    8. इनकी रचनाओं में समाज सुधारवादी दृष्टिकोण भी दिखलाई पड़ता है।
    9. गुप्तजी के प्रकृति-चित्रण में सरसता एवं सजीवता है।
    10. मनोभावों के चित्रण में गुप्तजी को विशेष दक्षता प्राप्त है।
    11. संवादों की अभिव्यक्ति अत्यन्त ही सरल तर्क-व्यंग्य से मुक्त है।
  • (ख) कला-पक्ष- भाषा और शैली- गुप्तजी की भाषा शुद्ध परिष्कृत खड़ीबोली है जिसका विकास धीरे-धीरे हुआ है। इनकी प्रारम्भिक काव्य रचनाओं में गद्य की भाँति शुष्कता है, किन्तु बाद की रचनाओं में सरसता और मधुरता अपने आप आ गयी है। इनकी भाषा में संस्कृत (UPBoardSolutions.com) के तत्सम शब्दों का भी प्रयोग हुआ है। शब्द-चयन में भी ये काफी कुशल हैं। उसमें मुहावरे और लोकोक्तियों के प्रयोग से चार चाँद लग गये हैं। भाषा में प्रसाद गुण की प्रधानता है। कहीं-कहीं तुक मिलाने के प्रयास में इन्हें शब्दों को विकृत भी करना पड़ा है जो कभी-कभी खटक जाता है।
    काव्य-रचना की दृष्टि से गुप्तजी की शैली चार प्रकार की है –
    भावात्मक शैली- झंकार तथा अन्य गीति काव्य। उपदेशात्मक शैली- भारत-भारती, गुरुकुल आदि। गीति-नाट्य शैली- यशोधरा, सिद्धराज, नहुष आदि। प्रबन्धात्मक शैली- साकेत, पंचवटी, जयद्रथ-वध आदि।
  • रस-छन्द-अलंकार- गुप्तजी के काव्य में वीर, रौद्र, हास्य आदि सभी रसों का सुन्दर परिपाक हुआ है। गुप्तजी ने नये और पुराने दोनों प्रकार के छन्द अपनाये हैं। हरिगीतिका गुप्तजी का अत्यन्त ही प्रिय छन्द है। गुप्तजी की कविता में उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, विषयोक्ति, संदेह, यमक, श्लेष, अनुप्रास आदि अलंकारों की प्रधानता है। विशेषण-विपर्यय और मानवीकरण आदि नये ढंग के अलंकार भी इनकी रचनाओं में छायावाद प्रभाव के कारण आ गये हैं।
  • साहित्य में स्थान- गुप्तजी आधुनिक हिन्दी काव्य-जगत् के अनुपम रत्न हैं। ये सही अर्थों में राष्ट्रकवि थे। इन्होंने अपनी प्रेरणादायक और उद्बोधक कविताओं से राष्ट्रीय जीवन में चेतना का संचार किया है।

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प्रश्न 3. ‘पंचवटी’ शीर्षक कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
         ‘पंचवटी’ कविता राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘पंचवटी’ खण्डकाव्य से उधृत है। इसमें पंचवटी के प्राकृतिक सौन्दर्य का जीवन्त वर्णन है। प्रकृति-वर्णन के अतिरिक्त श्रीराम के विशाल व्यक्तित्व का भी इसमें सजीव चित्रण है। कविता का सारांश निम्न प्रकार है –
             सारांश- चन्द्रमा की स्वच्छ चाँदनी पृथ्वी तल पर तथा आकाश में फैली हुई है। पृथ्वी पर हरित-दूब उगी हुई है। मन्द पवन के झोंकों से वृक्ष मानो मस्त होकर झूम रहे हैं। प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण पंचवटी पर श्रीराम की कुटी बनी हुई है। इस कुटी के सामने श्वेत शिला पर कामदेव की भाँति धनुष धारण कर लक्ष्मण योगी रूप में कुटी की रक्षा में सम्पूर्ण राज्य-सुखों को त्याग कर लीन हैं। आज तीनों लोकों की रानी सीता ने इस कुटी को अपना लिया है। रानी सीता रघुवंश की लाज हैं। इसलिए लक्ष्मण इस कुटी का प्रहरी वीर-वेश धारण किये हुए हैं।
            प्रकृति-सुन्दरी यहाँ अपना नाटक पूरा करती है। इसलिए वह प्रतिदिन शाम को पृथ्वी पर सुन्दर मोती (ओस-कण) बिखेर देती है और सूर्य सबेरा होते ही उन्हें समेट लेता है।
इस प्रकार वन में राम, लक्ष्मण और सीता को रहते हुए तेरह वर्ष बीत चुके। श्रीराम प्रजा के हित के लिए अतिशीघ्र राज्य ग्रहण करेंगे और लोक का उपकार करेंगे। राज्यभार ग्रहण कर वे अति व्यस्त हो जायेंगे। व्यस्तता में वे हमें भी भूल जायेंगे परन्तु लोकोपकार की भावना में ऐसा होने पर हमें कोई दु:ख नहीं होगा। इसी समय लक्ष्ण के मन में विचार उठता है कि क्या संसार के लोग स्वयं अपना उपकार नहीं कर सकते?

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ‘पंचवटी’ की प्रकृति का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर- गुप्तजी की कविताओं में प्रकृति का सजीव चित्रण देखने को मिलता है। उन्होंने प्रकृति के मोहक चित्र अपने काव्य में प्रस्तुत किये हैं। पंचवटी’ में तो प्रकृति-चित्रण साकार हो उठा है। वे चाँदनी रात का वर्णन करते हुए कहते हैं कि ”चारु चन्द्र की चंचल किरणें खेल रही हैं जल थल में स्वच्छ चाँदी बिछी हुई हैं, अवनि और अम्बर तल में।” पृथ्वी पर निकली हरी घास की नोकें हिल रही हैं, मानो पृथ्वी उन्हीं के द्वारा अपनी (UPBoardSolutions.com) प्रसन्नता को प्रकट कर रही है। रात्रि के समय चारों ओर चाँदनी छिटकी हुई है और वातावरण शान्त है। प्रात:काल सूर्य के निकलने पर ओस की बूंदें गायब हो जाती हैं। सन्ध्या के समय तारे निकल आते हैं, जिससे उसको सौन्दर्य और अधिक बढ़ जाता है।

प्रश्न 2. ‘प्रहरी बना हुआ वह’ (लक्ष्मण) कुटीर के किस धन की रक्षा कर रहा है?
उत्तर- लक्ष्मण जी प्रहरी बनकर सीतारूपी महान् धन की रक्षा कर रहे हैं।

प्रश्न 3. लक्ष्मण संसार के मनुष्यों से क्या करने की आशा रखते हैं?
उत्तर- लक्ष्मण जी अपेक्षा करते हैं कि संसार के सभी व्यक्ति लोकोपकार में लगे रहें, अपने हित का चिन्तन करें और अपने हित के लिए दूसरों पर निर्भर न रहें।

प्रश्न 4. पंचवटी’ कविता में निहित मूल भाव से सम्बन्धित चार वाक्य लिखिए।
उत्तर- चन्द्रमा की स्वच्छ चाँदनी पृथ्वी तल और आकाश में छायी हुई है। पृथ्वी पर हरी-भरी दूब उगी हुई है। मन्द पवन के झोंकों से पेड़ मानो मस्त होकर झूम रहे हैं। इस प्रकार प्राकृतिक सौन्दर्य से भरी हुई पंचवटी में श्रीराम की कुटी बनी हुई है। कवि के मन में प्रश्न उठता है कि इस श्वेत शिला (UPBoardSolutions.com) पर कामदेव की भाँति सुन्दर यह कौन धनुर्धारी योगी बैठा जाग रहा है? यह योगी सम्पूर्ण राज्य-सुखों को त्यागकर इस कुटी में कौन-से धन की रक्षा कर रहा है?

प्रश्न 5. मैथिलीशरण गुप्त की भाषा-शैली लिखिए।
उत्तर- गुप्तजी ने शुद्ध, साहित्यिक एवं परिमार्जित खड़ीबोली में रचनाएँ की हैं। इनकी भाषा सुगठित तथा ओज एवं प्रसाद गुण से युक्त है। इन्होंने अपने काव्य में संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू एवं प्रचलित विदेशी शब्दों के भी प्रयोग किये हैं। इनके द्वारा प्रयुक्त शैलियाँ हैं-प्रबन्धात्मक शैली, उपदेशात्मक (UPBoardSolutions.com) शैली, विवरणात्मक शैली, गीति शैली तथा नाट्य शैली। वस्तुतः आधुनिक युग में प्रचलित अधिकांश शैलियों को गुप्तजी ने अपनाया है।

प्रश्न 6. सन्ध्या को सूर्य की विरामदायिनी क्यों कहा गया है?
उत्तर- सूर्य दिन भर आकाश मार्ग में चलता है। जब सन्ध्या होती है तब सूर्य की यात्रा रुकती है। कवि कल्पना के अनुसार सूर्य विश्राम करता है। इस कारण सन्ध्या को सूर्य की विरामदायिनी कहा गया है। सूर्य के अतिरिक्त सन्ध्या पक्षियों, किसान आदि के लिए भी विरामदायिनी है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. मैथिलीशरण गुप्त किस युग के कवि हैं?
उत्तर- मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के कवि हैं।

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प्रश्न 2. मैथिलीशरण गुप्त की दो प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर- साकेत और यशोधरा।।

प्रश्न 3. ‘साकेत’ रचना पर गुप्तजी को कौन-सा पुरस्कार प्राप्त हुआ है?
उत्तर- ‘साकेत’ रचना पर गुप्तजी को ‘मंगलाप्रसाद पारितोषिक’ प्राप्त हुआ।

प्रश्न 4. ‘साकेत’ की विषय-वस्तु क्या है?
उत्तर- ‘साकेत’ में लक्ष्मण और उर्मिला के त्याग को दर्शाया गया है।

प्रश्न 5. निम्नलिखित में से सही उत्तर के सम्मुख सही (√) का चिह्न लगाइए-
उत्तर-

(अ) पंचवटी में श्रीराम की कुटी बनी हुई है।                         (√)
(ब) सूर्य के निकलने पर ओस की बूंदें गायब हो जाती हैं।      (√)
(स) मैथिलीशरण गुप्त भारतेन्दु युग के कवि हैं।                    (×)
(द) ‘सखि, वे मुझसे कहकर जाते’ यह यशोधरा का कथन है। (√)

काव्य-सौन्दर्य एवं व्याकरण-बोध

प्रश्न 1. निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए
(अ) चारु चन्द्र की चंचल किरणें खेल रही हैं जल-थल में।
(ब) जाग रहा ये कौन धनुर्धर जबकि भुवन-भर सोता है?
(स) मर्त्यलोक मालिन्य मेटने स्वामि संग जो आयी है।
उत्तर-

  • (अ) काव्यगत विशेषताएँ- 
    1. पंचवटी का सौन्दर्य वर्णित है।
    2. भाषा- साहित्यिक खड़ीबोली।
    3. शैली- वर्णनात्मक।
    4. गुण- ओज।
    5. अलंकार- अनुप्रास, पुनरुक्ति।
  • (ब) काव्यगत विशेषताएँ-
    1. कवि ने लक्ष्मण की कर्तव्यनिष्ठा का वर्णन किया है।
    2. भाषा में तत्सम तथा तद्भव शब्दों का सुन्दर समन्वय हुआ है।
  • (स) काव्यगत विशेषताएँ- 
    1. यहाँ भारतीय नारी के महान् आदर्शों का चित्रण किया गया है कि वह सुख-दुःख में अपने पति को ही साथ देती है। सीताजी को तीन लोकों की ‘श्री’ कहा गया है।
    2. भाषा- साहित्यिक खड़ीबोली।
    3. शैली- गीतात्मक एवं चित्रात्मक।
    4. अलंकार- अनुप्रास, रूपक।
    5. गुण- माधुर्य ।
    6. रस- शान्त।
    7. छन्द- मात्रिक।

प्रश्न 2. निम्नलिखित में सन्धि-विच्छेद कीजिए तथा सन्धि का नाम बताइए-
प्रजार्थ, लोकोपकार, कुसुमायुध, निरानन्द।

उत्तर-
प्रजार्थ = प्रजा + अर्थ  = दीर्घ सन्धि
लोकोपकार = लोक + उपकार =  गुण सन्धि
कुसुमायुध = कुसम + आयुध =  
दीर्घ सन्धि
निरानन्द = निर + आनन्द = दीर्घ सन्धि

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प्रश्न 3. निम्नलिखित पदों में समास विग्रह करके समास का नाम लिखिए-
पंचवटी, वीरवंश, सभय, कुसुमायुध, ध्वनि संकेत, नरलोक।
उत्तर-
पंचवटी = पाँच वटों का समाहार = बहुब्रीहि समास
वीरवंश = वीरों का वंश = 
सम्बन्ध तत्पुरुष
सभय = भय से युक्त  = अव्ययी भाव
कुसुमायुध = कुसुम है आयुध जिसके =  बहुब्रीहि समास
वह (कामदेव)
ध्वनि संकेत = ध्वनि का संकेत = षष्ठी तत्पुरुष समास
नरलोक  = नरों का लोक =तत्पुरुष समास

प्रश्न 4. ‘पंचवटी’ शीर्षक कविता से अनुप्रास अलंकार का कोई एक उदाहरण बताइए।
उत्तर- चारु चन्द्र की चंचल किरणें खेल रही हैं जल थल में।

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UP Board Solutions for Class 9 English Grammar Chapter 12 Word Formation

UP Board Solutions for Class 9 English Grammar Chapter 12 Word Formation

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SOLVED EXERCISES BASED ON TEXT BOOK

EXERCISE : 1

Make Nouns from :

Questions.

1. act
2. wise
3.employ
4. appear
5. obey
6. please
7. able
8. propose
9. enter
10.fertile.
Answers:
1. action
2. wisdom
3. employee
4. appearance
5. obedience
6. pleasure
7. ability
8. proposal
9. entry
10. fertility.

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EXERCISE : 2

Make Nouns from :

Questions.

1. deliver
2. waste
3. deny
4. close
5. confirm
6. govern
7. educate
8. avoid
9. gentle
10. heavy.
Answers:
1. delivery
2. wastage
3. denial
4. closure
5. confirmation
6. government
7. education
8. avoidance
9. gentleness
10. heaviness.

EXERCISE : 3

Make Adjectives from :
Questions.
1. nation
2. origin
3. favour
4. value
5. thirst
6. hunger
7. storm
8. worth
9. blood
10. magic.
Answers:
1. national
2. original
3. favourable
4. valuable
5. thirsty
6. hungry
7. stormy
8. worthy
9. bloody
10. magical.

EXERCISE : 4

Make Verbs from :
Questions.
1. able
2. large
3. joy
4. fool
5. bitter
6. rich
7. power
8. friend
9. courage
10. little.

Answers:
1. enable
2. enlarge
3. enjoy
4. befool
5.embitter
6. enrich
7. empower
8. befriend
9. encourage
10. elittle.

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EXERCISE : 5

Fill in the blanks with suitable compound forms of the words given in the brackets in the
following sentences :
(a)
Questions.
1. How can I do the……… (possible)?
2. Never be ………… (polite) to anyone, whoever it may be.
3. “Do you agree with me?” “No, I ………… (agree).”
4. His action is ……… (legal). He is sure to be prosecuted.
5. These apples are still ……… (ripe).
6. The bullock-cart has not ………. (live) its usefulness.
7. Never ……….. (estimate) the strength of an enemy.
8. This man claims to be able to ………. (tell) future events.
9. The Government …………. (consider) the orders and cancelled them.
10. Hoarders and smugglers are …………. (social) persons.
11. Is he ……….. (Australia) or British ?
12. A journal which is published twice a month is called a …………..(weekly).
13. The sub-inspector is …………. (power) to arrest a law-breaker.
14. His uncle’s influence ………. (able) him to get a job soon countries.
Answers:
1. impossible
2. impolite
3. disagree
4. illegal
5. unripe
6. outlived
7. underestimate
8. foretell
9. reconsidered
10. anti-social
11. non-Australian
12. bi-weekly
13. empowered
14. enabled.

(b)
Questions.
1. Mr. Sohanlal is one of the best …….. …….. (cricket) our state has produced.
2. My headmaster has known me since my ……… (boy).
3. Great sacrifices were made in the struggle for our ………….. (free).
4. The ……………… (inhabit) of that island are short and dark skinned.
5. .…….. (elect) to Parliament have been postponed.
6. People in many districts faced ……….. (starve) owing to the drought.
7. An ………….. (agree) was signed between the two parties yesterday.
8. He was very rich, but found no real …………….. (happy) in being wealthy.
9. We can calculate the time of eclipses with great …………… (accurate).
10. The …………… (post) for registration of letters has been increased recently.
11. The saying is that ……………….. (fail) is a stepping stone to success.
12. The story of the Ramayana has been ………………. (simple) in that book.
13. This road has been (wide) by cutting down the trees on both sides of it.
14. He received a lot of …………. (assist) from his uncle for his college education.
Answers:
1. cricketers
2. boyhood
3. freedom
4. inhabitants
5. elections
6. starvation
7. agreement
8. happiness
9. accuracy
10. postage
11. failure
12. simplified
13. widened
14. assistance.

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UP Board Solutions for Class 6 Environment Chapter 3 अपशिष्ट एवं उसका निस्तारण

UP Board Solutions for Class 6 Environment Chapter 3 अपशिष्ट एवं उसका निस्तारण

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अपशिष्ट एवं उसका निस्तारण

अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) अपशिष्ट किसे कहते हैं ?
उत्तर
मनुष्य एवं अन्य जीवों के दैनिक क्रिया-कलापों के फलस्वरूप निकलने वाले अनुपयोगी पदार्थ, अपशिष्ट पदार्थ कहलाते हैं।

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(ख) ठोस, द्रव और गैसीय अपशिष्ट में अन्तर बताते हुए इसके दो-दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर
ठोस अवस्था में पाए जाने वाले अपशिष्ट पदार्थ ठोस अपशिष्ट कहलाते हैं। तरल रूप में पाए जाने वाले ‘अपशिष्ट पदार्थ द्रव अपशिष्ट कहलाते हैं। गैस या धुआँ के रूप में पाए जाने वाले अपशिष्ट पदार्थ गैसीय अपशिष्ट कहलाते हैं।

फल-सब्जियों के छिलके प्लास्टिक के टुकड़े आदि ठोस अपशिष्ट हैं। नालियों और सीवर का गंदा पानी, चमड़ा शोधन तथा अन्य उद्योगों से निकलने वाला गंदा और विषैला जल द्रव (UPBoardSolutions.com) अपशिष्ट के उदाहरण हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआँ, कारखानों की चिमनियों से निकलने वाला धुआँ गैसीय अपशिष्ट का उदाहरण है।

(ग) गैसीय अपशिष्ट पदार्थ के स्रोत क्या हैं ?
उत्तर
गैसीय अपशिष्ट पदार्थ के स्त्रोत हैं- लकड़ी, कोयला, कारखाने, परिवहन के साधन, मरे हुए जीव-जंतु, अँगीठी, सिगरेट, बीडी आदि।

(घ) अपशिष्ट संग्रह के दुष्प्रभावों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
अपशिष्ट संग्रह पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। ये मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालते हैं। दिसंबर 1984 में भोपाल गैस त्रासदी में यूनियन कार्बाइड पेस्टीसाइड फैक्ट्री से मेथिल आइसो साइनाइट गैस के रिसाव के कारण हजारों लोगों की मृत्यु हुई और लाखों लोग इसके कारण- कैंसर, साँस फूलना, सिर दर्द, अंगों को सुन्न होना जैसी अनेक बीमारियों से ग्रसित हो गए। इस घटना के बाद फैक्ट्री से कचरे के (UPBoardSolutions.com) रूप में घातक रसायन निकले जिसने आस-पास की मिट्टी और जल को प्रभावित किया। इन अपशिष्ट का दुष्प्रभाव आज भी वहाँ की पीढ़ियों में देखा जा सकता है।

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(ङ) सोकपिट बनाने की विधि लिखिए।
उत्तर
सोकपिट बनाने के लिए जमीन में एक 5-6 फीट गहरा चौकोर गड्ढा खोदा जाता है। इस गड्ढे की तली पर ईंट तथा पत्थर के टुकड़े डालकर उनको बालू की परत से ढक दिया जाता है। इसके बाद इसे नाली द्वारा पानी बहने के स्थान से जोड़ दिया जाता है तथा ऊपर से ढक दिया जाता है। इस प्रकार सोकपिट बनकर तैयार हो जाता है।

(च) ई-कचरा से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर
ई-कचरा से तात्पर्य है- इलेक्ट्रॉनिक कचरा जो ऑफिस एवं घरों से निकलता है। इसके अन्तर्गत खराब कम्प्यूटर, मोबाइल फोन, सी०डी०, बैटरी व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (UPBoardSolutions.com) जैसे- टीवी, वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरटेर, ए०सी० आदि आते हैं।

(छ) कारखानों से निकलने वाले जल को नदियों में बहाने से पहले क्या उपाय करने चाहिए?
उत्तर
कारखानों से निकले जल को उचित उपचार करने के बाद ही नदियों में बहाना चाहिए जिससे कि नदियों का जल दूषित न हो।

(ज) प्रत्येक घर में शौचालय होना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर
मल-मूत्र के उचित निस्तारण तथा गंदगी से बचने के लिए प्रत्येक घर में शौचालय होना आवश्यक है।।

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प्रश्न 2.
सही कथन के सामने (✓) और गलत के सामने (✗) का चिह्न लगाइए-
उत्तर
(क) उद्योगों से विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट पदार्थ निकलते हैं।               (✓)
(ख) अपशिष्ट पदार्थों से हमारा पर्यावरण दूषित होता है।                     (✓)
(ग) अपशिष्ट पदार्थ ठोस, द्रव और गैस के रूप में होते हैं।                   (✓)
(घ) घरेलू कूड़े-कचरे का निस्तारण आज प्रदूषण की समस्या नहीं है।   (✗)
(ङ) प्लास्टिक एवं पॉलीथीन आसानी से सडती है।                               (✗)

प्रश्न 3.
सही मिलान कीजिए-
उत्तर
UP Board Solutions for Class 6 Environment Chapter 3 अपशिष्ट एवं उसका निस्तारण img-1

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प्रोजेक्ट वर्क- विद्यार्थी स्वयं करें।

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UP Board Solutions for Class 10 Sanskrit निबन्ध (रचना)

UP Board Solutions for Class 10 Sanskrit निबन्ध (रचना)

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संस्कृत में वाक्यों की रचना

दसवीं कक्षा में किसी सामान्य विषय पर संस्कृत में आठ वाक्य लिखने होते हैं। विद्यार्थियों को शुद्ध संस्कृत में सरल और छोटे-छोटे वाक्य लिखने चाहिए। इसके लिए सबसे पहले छात्रों को हिन्दी में वाक्य लिखकर उनकी संस्कृत बनाकर क्रम से लिख लेना चाहिए। निबन्ध-रचना के समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए –

  1. वाक्य सरल एवं छोटे-छोटे होने चाहिए।
  2. भावों को सोचकर संक्षेप में लिखना चाहिए।
  3. अपनी बात की पुष्टि के लिए एक-दो श्लोक भी उदाहरण के रूप में दिये जा सकते हैं।
  4. विषय को स्पष्ट करने के लिए पूर्ण कथानकों को देना उचित नहीं है। (UPBoardSolutions.com) कथानकों से सम्बन्धित नामोल्लेख मात्र करना पर्याप्त होता है।
  5. यदि किसी वाक्य के अनुवाद में कठिनाई का अनुभव हो तो उस वाक्य को परिवर्तित करके ऐसा बना लीजिए, जिसका शुद्ध अनुवाद किया जा सके।
  6. निबन्ध लिखवाने का उद्देश्य मात्र यह जानना है कि आप संस्कृत में अपने विचार प्रकट कर सकते हैं या नहीं। इसमें तथ्यों के औचित्य-अनौचित्य, सत्यता-असत्यता, अनुभूतता अन नुभूतता का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

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दसवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में निर्धारित (23 जुलाई, 2011 के उत्तर प्रदेश गजट के अनुसार) निबन्ध निम्नलिखित हैं –

  1. विद्या
  2. सदाचारः
  3. परोपकारः
  4. सत्सङ्गतिः
  5. अहिंसा परमोधर्मः
  6. मातृभूमिः
  7. वसुधैव कुटुम्बकम्
  8. राष्ट्रिय-एकता
  9. अनुशासनम्
  10. राष्ट्रपिता महात्मागांधी
  11. संस्कृतभाषायाः (UPBoardSolutions.com) महत्त्वम्
  12. भारतीय कृषकः
  13. हिमालयः
  14. तीर्थराज प्रयागः
  15. वनसम्पत्
  16. पर्यावरणम्
  17. परिवार-कल्याणम्
  18. राष्ट्रपक्षी मयूरः
  19. यौतुकम्
  20. दूरदर्शनम्
  21. क्रिकेटक्रीडनम्।

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यहाँ पर कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण निबन्ध भी छात्रों की सुविधा व बोध के लिए दिये जा रहे हैं। इन्हीं के आधार पर छात्रों को अन्य विषयों पर भी निबन्ध लिखने का अभ्यास करना चाहिए।

1. विद्या [2010, 12, 13]

[सम्बद्ध शीर्षकः–विद्वान् सर्वत्र पूज्यते, विद्या विहीनः पशुः (2007), विद्यायाः महत्त्वम् (2009,11), विद्याधनं सर्वधनं प्रधानम् (2010,12,13), विद्या ददाति विनयम् (2010,14), विद्या-महिमा (2011,15)]

  1. अस्मिन् संसारे विद्या एव सर्वप्रधानं धनमस्ति।
  2. विद्याधनं चौरोऽपि चोरयितुं न शक्नोति, नृपः अपहर्तुं न शक्नोति।
  3. विद्या व्ययतो वृद्धिमायाति, सञ्चयात् च क्षयमायाति।
  4. विद्या कल्पलता इव सर्वंकीर्थसाधिका अस्ति।
  5. विद्या माता इव रक्षति, पिता इव (UPBoardSolutions.com) हिते मियुङ्क्ते, कीन्ती इवै खेदम् अपमयति।
  6. विद्या सर्बसुखानां परमं कारणम् अस्ति।
  7. विद्येयी यावज्जीवं तृप्तिर्भवति।
  8. विद्ययाऽमृतम् अश्नुते।
  9. विद्या विनयं ददाति, विनयात् पात्रताम्, पात्रतायाः धनम्, धनाद् धर्म, ततः सुखं प्राप्नोति मनुष्यः।
  10.  विदुषः पुरुषस्य सर्वत्र सम्मानः भवति।
  11. राजा तु स्वदेशे पूज्यते, परन्तु विद्वान् सर्वत्र पूज्यते।
  12. रूपयौवनसम्पन्नोऽपि विद्याहीनः जनः न शोभते।
  13. राजसु विद्यैव पूज्यते, धनं न पूज्यते।
  14. विद्याविहीनः नर: पशुतुल्यः भवति।
  15. अत: सर्वे नराः स्वपुत्रान् पुत्रींश्च पाठयेयुः।

2. सत्सङ्गतिः [2006, 07,08, 09, 10, 11, 14, 15)

[सम्बद्ध शीर्षकः-सत्सङ्गतिः कथय किं न करोति पुंसाम् ]

  1. सत्पुरुषाणां सङ्गति सत्सङ्गतिः कथ्यते।
  2. सज्जनांनां सङ्गतिः सुखकरी भवति।
  3. सत्सङ्गत्या जनः उन्नतिपदं प्राप्नोति।
  4. सत्सङ्गतिः धियः जाड्यं हरति, वाचि सत्यं सिञ्चति, पापं दूरी करोति, दिक्षु च यशः तनोति।
  5. अत: सत्सङ्गति एवं जनानां सर्वकार्यसाधिका भवति।
  6. सत्सङ्गत्याः प्रभावेन दुष्टाः सज्जनाः भवन्ति, मूर्खश्च प्रवीणतां याति।
  7. ऋषीणां सङ्गत्या व्याधः वाल्मीकिः महर्षिपदम् अलभत।
  8. काञ्चन-संसर्गात् काचोऽपि मारकतिं (UPBoardSolutions.com) द्युतिं धत्ते, पुष्पसङ्गत्या कीटोऽपि महतां शिर: आरोहति।
  9. सत्सङ्गतिः जनानाम् असाध्यानि कार्याणि अपि साधयति।
  10. मनुष्यः सभ्यतायाः संस्कृतेः च शिक्षाम् अपि सत्सङ्गेन एव लभते।
  11. अस्माकं वेदशास्त्रेषु अपि सत्सङ्गस्य महिमा वर्णितः अस्ति।
  12. अत: वयं दुष्टानां सङ्गं त्यक्त्वा सदैव सतां सङ्गतिः कुर्याम।

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3. सदाचारः [2006,07,08, 12, 13]

[सम्बद्ध शीर्षक:–आचारः परमो धर्मः, सदाचारवान्नरः[2008]]

  1. सताम् आचारः सदाचारः कथ्यते।
  2. सज्जना: यद् आचरन्ति, तदेव आचरणं सदाचारः कथ्यते।
  3. सदाचारी जनः सर्वैः सह शिष्टतापूर्वकम् आचरति।
  4. सः सत्यं वदति, नित्यं मातापितरौ अभिवादयति, गुरुजनानाम् आदरं करोति, परोपकारं च करोति
  5. मानव: सज्जनवत् आचरणेन सदाचारी, धार्मिकः विनीतः च भवति।
  6. सदाचारयुक्तः जनः सर्वत्र आदरं लभते।
  7. सदाचारेणैव बुद्धिः वर्धते, यश: प्रसरति, दुर्गुणाः दूरीभवन्ति, हृदये सद्भाव: जागर्ति आयुश्च वर्धते।
  8. सदाचारः जनान् उन्नतपदे आरोपयति।
  9. सदाचारिणः पापकर्मणिः प्रवृत्तिः न भवति, बुद्धिः निर्दोषा भवति सः च जनानां हितचिन्तने प्रवृत्तः भवति।
  10. अतः महर्षिभिः ‘आचारः परमो धर्मः’ इति उक्तम्।
  11. समस्त धर्मग्रन्थेषु आचारस्य महिमा वर्णितास्ति।
  12. आचारात् जनः आयुः, लक्ष्मीं, कीर्ति च प्राप्नोति।
  13. सदाचारपालनेन हरिश्चन्द्रः, दधीचिः, गान्धिमहोदयश्च यशः (UPBoardSolutions.com) शरीरेण अद्यापि जीवन्ति।
  14. अत: वयं सदा सदाचारिणः भवेम।

4. परोपकारः [2006,07,08, 10, 11, 12, 13, 14, 15]

[सम्बद्ध शीर्षकः–परोपकारः पुण्याय (2007), परोपकाराय सतां विभूतयः(2010]]

  1. परेषाम् उपकारः परोपकारः कथ्यते।
  2. स्वार्थं परित्यज्य अन्येषां कल्याणेच्छया यत् किञ्चित् क्रियते तत् परोपकारः कथ्यते।
  3. परोपकारिणः जनाः परोपकारेणैव प्रसन्नाः भवन्ति।
  4. परोपकारस्य भावना मनुष्येषु एव न, देवेषु, पशु-पक्षिवृक्षादिषु अपि च भवति।
  5. प्रकृतिः अपि परोपकारस्य एव शिक्षां ददाति।
  6. नद्यः स्वयम् एव जलं न पिबन्ति, वृक्षाः स्वयं फलानि न खादन्ति, किन्तु तासां जलं, तेषां फलानि च परोपकाराय एव भवन्ति।
  7. परोपकारिणः हृदये सन्तोष: आनन्दः च जायते।
  8. परोपकारेण जनः सर्वाः सम्पदः लभते।
  9. परोपकाराय एव नरपति: शिविः कपोताये स्वमांसम् अयच्छत्, (UPBoardSolutions.com) दानवीरः कर्णः कवचकुण्डलौ दत्तवान्, रन्तिदेवः ” क्षुधितोऽपि स्वभोजनं चाण्डालाय, प्रायच्छत्।
  10. शास्त्रेषु परोपकारस्य महत्त्वं वर्णितम्-‘परोपकारः पुण्याय’, ‘उपकाराज्जायते सुखम् च इति।

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5. सत्यस्य महिमा

[सम्बद्ध शीर्षकः-सत्यमेव जयते (2010), सत्यम् (2011)]

  1. यद् वस्तु यथा अस्ति, तस्य तथैव कथनं सत्यमस्ति।
  2. भगवता मनुना कथितेषु दशसु धर्मसु एकतमः धर्म: सत्यमस्ति।
  3. त्रिषु लोकेषु सत्यात्परः धर्मः नास्ति।
  4. यः सत्यं वदति, सः निर्भीको भवति, सः पापकर्मसु न प्रवर्तते।
  5. सत्यवादिनः पुरुषाः समाजे आदरं प्राप्नुवन्ति।
  6. ‘सर्वसत्ये प्रतिष्ठितम्’ इत्यनुसारेण सत्यमेव (UPBoardSolutions.com) लोकस्य आधारोऽस्ति।
  7. सत्यवचनात् नरस्य कल्याणं भवति।
  8. सत्यवादिनि मनुष्ये सर्वे विश्वासं कुर्वन्ति।
  9. सत्यवादिनः सरलतया कार्याणि साधयन्ति।
  10. महान् खलु सत्यस्य महिमा अस्ति , अतएव महापुरुषाः स्वप्राणैरपि सत्यं रक्षन्ति।
  11. महाराजः दशरथः सत्यस्य रक्षायै स्व प्राणान् ददौ।
  12. सत्यस्य रक्षायै एव राजा हरिश्चन्द्रः महान्ति कष्टानि असहत्।
  13. सत्यबलेनैव महात्मागान्धि स्वदेशं स्वतन्त्रं कृतवान्।
  14. अतः सर्वैरपि सदा सत्यं भाषणीयम्।

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6. अहिंसा परमो धर्मः [2007,08]

[सम्बद्ध शीर्षकः-अहिंसा]

  1. परेषां हिंसनं पीडनम् एव हिंसा भवति, एतद् विपरीता भावना अहिंसा भवति।
  2. मनसा वाचा कर्मणा कथमपि कस्यचित् कष्टं न देयम् इति एव अहिंसा।
  3. मनुना निर्दिष्टेषु दशसु धर्मलक्षणेषु अहिंसा एव प्रथम: धर्मः अस्ति।
  4. अहिंसापालकाः कारुणिकाः दयावन्तश्च भवन्ति।
  5. अहिंसया एव आत्मा सुखम् अनुभवति मनश्च परां शान्ति लभते।
  6. अहिंसाबलेन शत्रवोऽपि मित्राणि भवन्ति।
  7. सर्वाणि कार्याणि अहिंसया एव सिध्यन्ति अतएव मुनिभिः ‘अहिंसा परमो धर्मः’ इति स्वीकृतः।
  8. जैनबौद्धधर्मी अहिंसाधर्मे परमौ निष्ठावन्तौ।
  9. महात्मागान्धिमहोदयः अहिंसाधर्मस्य परमोपासकः आसीत्।
  10. सः अहिंसाशस्त्रेण भारतं स्वतन्त्रमकरोत्।
  11. अहिंसायां महती शक्तिः वर्तते, अनया अधिकृताः जनाः सदा वशवर्तिनः भवन्ति।
  12. अतः सर्वैः अहिंसा धर्मः पालनीया।

7. उद्यमः [2013,14]

[सम्बद्ध शीर्षकः–उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः, उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि (2011, 12), उद्योगः, उद्योग-महिमा (2010), परिश्रमः (2013), उद्योगः सर्वसाधनम् (2014)]

  1. अस्मिन् संसारे सर्वे जनाः सुखमिच्छन्ति, पुरुषार्थेन एव ते सुखं प्राप्नुवन्ति।
  2. उद्यमेन एव सर्वाणि कार्याणि सिध्यन्ति।
  3. यदि मानव: उद्योगं न कुर्यात्, तस्य किमपि कार्यं न सिध्येत्।
  4. सिंह: महान् बलवान् भवति, सोऽपि उद्यम विना स्वोदरमपि पूरयितुं न समर्थः।
  5. उद्योगिनां पुरुषाणां पाश्र्वे लक्ष्मीः स्वयमायाति।
  6. उद्योगबलेनैव पाण्डवाः नष्टमपि राज्यम् उपलब्धवन्तः।
  7. कालिदासः उद्योगं कृत्वा एव कविकुलगुरुः अभवत्।
  8. लोकमान्यतिलक-गोखले-महात्मागान्धिप्रभृतिभिः देशभक्तैः (UPBoardSolutions.com) पुरुषार्थेनैव भारतभूमिः पारतन्त्र्याद् विमुक्ता कृता।
  9. शास्त्रेषु उद्यमस्य महिमा वर्णित:-नास्ति उद्यमसमो बन्धुः, उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः च इति।
  10. निर्बला पिपीलिका उद्योगस्य बलेन एव स्वजीवनं यापयति।
  11. अत: वयं जीवनसौख्याय उद्योगिनः भवेम।

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8. व्यायामः [2007]

[सम्बद्ध शीर्षकः-स्वास्थ्य महत्त्वम्, शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्, विद्यालयेषु स्वास्थ्य-शिक्षायाः आवश्यकता]

  1. शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्’ इत्यनुसारेणं सर्वधर्माणां प्रथमं साधनं स्वस्थं शरीरम् अस्ति।
  2. शरीरं तदैव किञ्चित्कर्तुं शक्नोति यदा तत् स्वस्थं भवति।
  3. स्वास्थ्यरक्षायाः सर्वोत्तमः उपाय: व्यायामः अस्ति।
  4. व्यायामेन शरीरं बलवत्, पुष्टं, स्वस्थं च भवति।
  5. शरीरस्य सर्वाङ्गीणविकासाय व्यायाम: आवश्यकीयः।
  6. स्वस्थे शरीरे एवं स्वस्थः मनः वसति; अतः व्यायामशीलस्य मनः सदा प्रसन्नं भवति।
  7. व्यायामाः क्रीडनं, तरणं, कूर्दनं, धावनं, भ्रमणम् इत्यादयः अनेकविधाः भवन्ति।
  8. व्यायामेन शरीरस्य बुद्धेश्च विकासो भवति।
  9. अतः सर्वैः स्वशरीरस्य स्वास्थ्यरक्षार्थं व्यायामः अवश्यं करणीयः।
  10. स्वस्थं शरीरं जीवनसौख्यं प्रदातुं शक्नोति।

9. संस्कृतभाषायाः महत्त्वम् [2006, 11, 12, 13, 14, 15]

[सम्बद्ध शीर्षक:–संस्कृताध्ययनस्य लाभः,संस्कृतस्य-उपयोगिता (2006), सुभारती (2007). राष्ट्रभाषा-संस्कृतम् (2010), संस्कृत नाम दैवी वाक् (2011) संस्कृतवाङ्मयम् (2010), संस्कृतस्य महत्त्वम् (2006,08), संस्कृतभाषा (2012,14), देववाणी (2014)]

  1. संस्कृतभाषा संसारस्य प्राचीनतमा भाषा अस्ति।
  2. व्याकरणादि दोषरहिता भाषा संस्कृतभाषेति कथ्यते।
  3. पुरा सर्वे जनाः संस्कृतभाषायाम् एव वदन्ति स्म।
  4. सर्वे प्राचीनाः ग्रन्थाः; यथा—चत्वारो वेदाः, ब्राह्मणग्रन्थाः, उपनिषद्-ग्रन्थाः, पुराणानि, षड्दर्शनग्रन्थाः, संस्कृतभाषायामेव लिखिताः सन्ति।
  5. आदिकविः महर्षि वाल्मीकि रामस्य चरित्ररूपं रामायणम्, (UPBoardSolutions.com) महर्षिः व्यासश्च विश्वप्रसिद्धं ग्रन्थं महाभारतं संस्कृते एव अलिखत्।
  6. संस्कृतभाषा एव भारतदेशम् ऐक्यसूत्रे बध्नाति।
  7. यथा जननी स्वदुग्धदानेन स्वसन्तत्या: पोषणं करोति, तथैव संस्कृतभाषा सर्वासां भारतीयभाषाणां जननी अस्ति; अत: भारतीयाः इमां मातृवत् पूजयन्ति।
  8. ये भारतीया: हिन्दीभाषायाः विरोधं कुर्वन्ति, ते कदापि संस्कृतभाषायाः विरोधं न कुर्वन्ति।
  9. विशालं मनोज्ञं च अस्याः साहित्यं, परिपूर्ण अस्याः व्याकरणं, श्रुतिमधुरः शब्दभण्डारः, ललिता सामासिकी पदावली च अस्याः महत्त्वं प्रकटयन्ति।
  10. संस्कृतभाषायाः प्रचारेण छात्राणाम् अनुशासनहीनता दूरीकर्तुं शक्यते।
  11. विश्वस्य सुखाय शान्तये चापि संस्कृतस्य प्रचार: लाभप्रदः भविष्यति।
  12. अतः सर्वैः संस्कृतभाषा अवश्यं पठनीया अनुशीलनीया च।

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10. सन्मित्रम्

  1. सुखे दु:खे च सम्पत्तौ विपत्तौ च कस्यामपि अवस्थायां यः स्वमित्रं न त्यजति, स एव सन्मित्रमस्ति।
  2. सन्मित्रं स्वमित्रं दुःखितं दृष्ट्वा कदापि त्यक्तुं न शक्नोति।
  3. आवश्यकतासमये स: धनं दत्वा तस्य सहायतां करोति।
  4. सः तस्य अवगुणान् न प्रकटयति, किन्तु गुणान् एव प्रकाशयति।
  5. सन्मित्रं स्वमित्रं पापात् निवारयति, हिताय योजयते, आपद्गतं न त्यजति।
  6. मित्राय आवश्यकतायां धनं ददाति।
  7. तस्य गोप्याः वार्ताः गोपयति, गुणान् च प्रकटीकरोति।
  8. यत् अविचार्य प्रियं कुर्यात् तत् मित्रं सन्मित्रमुच्यते।
  9. अस्मिन् संसारे सन्मित्रस्य प्राप्ति: दुर्लभः अस्ति। ये (UPBoardSolutions.com) समृद्धिसमये सन्निहिताः भवन्ति, परन्तु विपदि आपदि च साहाय्यभूताः विरला एव भवन्ति।
  10. ये जनाः सन्मित्रं प्राप्नुवन्ति ते एव पुण्यवन्तः धन्याश्च सन्ति।

11. प्रभातवर्णनम् [2009]

  1. प्रातः सूर्य: उदयति, चन्द्रः च अस्तं गच्छति।
  2. इदानीं तमः नश्यति, प्रकाशः च भवति।
  3. प्रात:समये सरोवरेषु कमलानि विकसन्ति, कुमुदानि च निमीलन्ति।
  4. प्रात: समय: उलूकान् दुःखीकरोति, चक्रवाकान् च मुदितान् करोति।
  5. सर्वे मनुष्याः प्रात:काले आलस्यं त्यक्त्वा, शयनादुत्तिष्ठन्ति स्वकार्येषु च निरताः भवन्ति।
  6. पक्षिण: वृक्षेषु कलरवं कुर्वन्ति, मधुपाः च पुष्पेषु गुञ्जन्ति, मकरन्दं च पिबन्ति।
  7. प्रात: शीतलः सुगन्धश्च पवनः मन्दं वहति।
  8. जनाः प्रात:काले भ्रमणाय गच्छन्ति।
  9. प्रातः भ्रमणेन तेषां मतिः विमला भवति।
  10. प्रात:समये मन्दिरेषु भक्तानां सङ्गीतमिश्रः ध्वनिः आकाशे प्रसरित दिशः च मुखरीकरोति।

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12. उद्यानम्

[सम्बद्ध शीर्षकः–उपवनम्]

  1. उद्याने बहुविधाः वृक्षा: लताश्च भवन्ति।
  2. वृक्षेषु लतासु च विविधानि बहुवर्णानि पुष्पाणि मधुराणि च पक्वानि फलानि शोभन्ते।
  3. उद्याने वृक्षेषु खगाः मधुरं कूजन्ति।
  4. उद्याने पुष्पेषु भ्रमरा: गुञ्जन्ति मकरन्दं च पिबन्ति।
  5. तत्र शीतलः सुगन्धश्च पवनः मन्द-मन्दं सञ्चरति।
  6. जनाः प्रात:काले भ्रमणाय उद्यानं गच्छन्ति।
  7. तत्र बालकाः क्रीडन्ति प्रसन्नाः च भवन्ति।
  8. मालाकारः तत्र वृक्षान्, पादपान्, सुपुष्पितांश्च लताः जलेन सिञ्चति, पुष्पाणि चिनोति।
  9. उद्याने वृक्षाणां छायासु श्रान्ताः पथिकाः पशवः च विश्राम कुर्वन्ति।
  10. सर्वत्र रम्याणि दृश्याणि भवन्ति।
  11. उद्यानै: पर्यावरण-शुद्धिरपि सम्भवति।

13. ग्राम-वर्णनम्

[सम्बद्ध शीर्षकः–ग्राम्य-जीवनम्, स्वग्रामवर्णनम्, ग्रामः]

  1. भारतदेश: ग्रामाणां देशः अस्ति।
  2. ग्राम्यजीवनस्य पृथगेव स्ववैशिष्ट्यं भवति।
  3. ग्रामवासिनां जीवनं सरलं निश्चलं च भवति। तेषां जीवने प्रदर्शनस्य कृत्रिमतायाः च अभावः भवति।
  4. ग्रामेषु नगराणां कृत्रिमं चाकचिक्यं न भवति, अपितु तत्र स्वाभाविकी शान्ति, प्राकृतिक सौन्दर्यं भवति।
  5. ग्रामेषु शस्यश्यामलानि क्षेत्राणि, मनोहराणि उपवनानि, कलकल-निनादं कुर्वत्यः नद्यश्च मानवान् मोहयन्ति।
  6. ग्रामेषु स्वच्छः वायुः, निर्मलं कूपजलं, नवं नवनीतं, दुग्धं दधि (UPBoardSolutions.com) च मिलन्ति, यैः जनाः नीरोगाः पुष्टा: बलवन्तः च भवन्ति।
  7. ग्रामेषु जनाः सदैव उद्यमिनः भवन्ति।
  8. ग्रामीणानां भोजनं शुद्धं सात्त्विकं च भवति, येन ते सात्त्विकवृत्तयः भवन्ति।
  9. ग्रामेषु षट्सु ऋतुषु अपूर्वा शोभा सर्वत्र प्रसरति।
  10. ग्रामीणा: स्वयमेव मनोरञ्जनार्थम् अभिनयादिकं महापुरुषाणां चरित्रश्रवणाय वा समवेताः भवन्ति, आनन्दं चानुभवन्ति।
  11. तत्र शिक्षायाः अभावः वर्तते, शिक्षायाः प्रचारे कृते तेषां जीवनं स्वर्गतुल्यं भविष्यति।

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14. भारतवर्षस्य महत्त्वम्

[सम्बद्ध शीर्षक:–मातृभूमिः (2006), जन्मभूमिः (2010), भारतवर्षः (2008, 09), अस्माकं देशः (2006, 10, 11, 13, 14, 15),जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी, स्वदेशः]

  1. संसारे माता मातृभूमिश्च द्वे एवं सर्वोत्तमे स्तः।
  2. यथा अस्माकं जननी अस्मान् लालयति, तथैव अस्माकं जन्मभूमिरपि स्वजलेन, स्ववायुना, स्वमृत्तिकया च अस्मान् पोषयति।
  3. अतएव स्वदेशं प्रति अस्माकं हृदये स्वाभाविक: आदरः भवति।
  4. अस्माकं जन्मभूमि: भारतवर्षमस्ति।
  5. पर्वतराजः हिमालयः अस्याः मुकुटः अस्ति, समुद्रश्च अस्याः पादान् प्रक्षालयति।
  6. अत्र गङ्गायमुनादायः अनेकाः महानद्यः कृषकाणां क्षेत्राणि सिञ्चन्ति।
  7. अस्माकं देश: सर्वेषु देशेषु सुन्दरतमः प्राचीनतमः च अस्ति।
  8. संसारे सर्वप्रथमं सभ्यतायाः प्रादुर्भावः, प्राचीनतमानां वेदानां रचना, लेखन-कला-काव्यनाटकादीनां च उत्पत्तिः सर्वप्रथमं भारते एवाभूत्।
  9. अनेकाभिः महानदीभिः, प्रचुरैः फलैः, शस्यश्यामलैः क्षेत्रैः सुन्दरतमायाम्। अस्यां भूमौ जन्मग्रहणाय देवता अपि स्पृह्यन्ति।
  10. भारतवर्षेऽस्मिन् अनेके महर्षयः, भक्ताः, चक्रवर्तिनृपतयः, विद्वांस धर्मप्रवर्तकाः, कवयः, राजनीतिज्ञाः नारी मूर्धन्याः च अभवन्।
  11. अयम् अस्माकं देश: सर्वथा प्रशंसनीयः अस्माभिः पूजनीयश्च।
  12. वयं सुजलां, सुफलां, मलयजशीतलां, शस्यश्यामलां मातरं, भारत मातरं नमामः।

15. हिमालयः [2006]

  1. भारतवर्षस्य उत्तरस्यां दिशि एव स्थितः उच्चतमः पर्वतः हिमालयः अस्ति।
  2. अस्य शिखराणि सदैव हिमेन आच्छादितानि तिष्ठन्ति, अतएव अयं हिमस्य आलयः ‘हिमालयः’ इति कथ्यते।
  3. अयं सर्वेषां पर्वतानाम् उच्चतमः अस्ति; अतः ‘पर्वतराजः अपि कथ्यते।
  4. एवरेस्ट’ इति अस्य उच्चतमं शिखरम् अस्ति।
  5. अस्यैव कैलासशिखरम् भगवतः शिवस्य निवासभूमिः अस्ति।
  6. अस्य कन्दरासु तपः कुर्वन्तः मुनयः परां सिद्धि प्राप्नुवन्ति।
  7. हिमालयस्य प्रदेशेषु अति सुन्दराणि तीर्थस्थानानि सन्ति।
  8. कश्मीरप्रदेशः अस्यैव प्रदेशेषु स्थितः स्व सौन्दर्येण ‘भूस्वर्गः’ इति कथ्यते।
  9. हिमालये अनेकाः औषधयः, वनस्पतयः, वनानि, बहुपयोगीनि च काष्ठानि प्राप्यन्ते।
  10. गङ्गा-यमुना-ब्रह्मपुत्रादयः महानद्यः अस्मात्पर्वतात् (UPBoardSolutions.com) निर्गत्य स्वेन पवित्रेण जलेन भारतभुवं सिञ्चन्ति।
  11. महाकविना कालिदासेन हिमालयं ‘देवतात्मा’ इत्युक्तम्।

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16. भारतीयः कृषकः

[सम्बद्ध शीर्षकः–कृषकः (2014)]

  1. भारतदेश: कृषिप्रधानाः देश: अस्ति।
  2. कृषे: उन्नतौ एव भारतस्य उन्नतिः निहितास्ति।
  3. कृषका एवं भारतस्य प्राणभूताः सन्ति।
  4. कृषका: ग्रामेषु वसन्ति।
  5. कृषिकार्यमेव तेषां मुख्योद्योगः।
  6. अत: भारतस्य अर्थव्यवस्थायां कृषकाणां महत्त्वपूर्ण स्थानमस्ति।
  7. तथापि भारतीयः कृषक: अशिक्षितः अति निर्धनः च अस्ति।
  8. कृषक: अस्माकं कृते अन्नम् उत्पादयति।
  9. सः प्रात:काले उत्थाय कठिनं श्रमं करोति।
  10. स दारुणे आतपे, शरीरकम्पे शीते वर्षासु च घोरं श्रमं करोति।
  11. तस्य पत्नी पुत्राश्च कृषिकायें तस्य सहायता कुर्वन्ति।
  12. भारतीय-कृषकस्य पावें कृषेः वैज्ञानिक साधनानाम् अभावः वर्तते। अतः तस्य आर्थिक दशा शोचनीया अस्ति।
  13. सम्प्रति कृषे: कृषकस्य च उन्नतये भारतीयशासनं प्रयत्नशीलं वर्तते।
  14. कालान्तरे तस्य दशा सन्तोषप्रदा भविष्यति।

17. वर्षावर्णनम्

[सम्बद्ध शीर्षकः–वर्षर्तुः, वर्षाः]

  1. भारतवर्षे वसन्तः, ग्रीष्मः, वर्षा, शरद्, हेमन्तः, शिशिरः चेति षड् ऋतवः भवन्ति।
  2. एषु ऋतुषु वर्षतः अतिमहत्त्वमस्ति।
  3. ग्रीष्मादनन्तरं वर्षर्तुः समागच्छति।
  4. वर्षर्ती मेघाः आकाशे आच्छादिताः भवन्ति, प्रचुरमात्रायां जलं च वर्षन्ति।
  5. वर्षतः आगमनेन सन्तप्तः संसारः शान्ति लभते, सन्तप्ताः भूमयः सरसाः भवन्ति, आतपेन दग्धाः वनस्पतयः पुन जीवनं प्राप्नुवन्ति।
  6. तडागः, नद्यः, कृपाश्च जलेन परिपूर्णाः भवन्ति।
  7. प्रसन्नाः कृषकाः क्षेत्रेषु नवानि अन्नबीजानि वपन्ति।
  8. अस्याः ऋतोः विचित्रं दृश्यं भवति। गगनं मेधैः आच्छादितं भवति, (UPBoardSolutions.com) दर्दुराणां कोलाहल:, झिल्लीनां झंकृतं, दंशमशकादीनां ‘भन्–भन्’ स्वरं च श्रूयन्ते।
  9. मयूरा: मेघान् दृष्ट्वा नर्तितुम् आरभन्ते।
  10. सर्वत्र मनोहारिणी हरीतिमा भवति।
  11. इयम् ऋतु: कृषये लाभप्रदा अस्ति।

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18. ग्रीष्म-वर्णनम्

  1. भारतवर्षे वसन्तः, ग्रीष्मः, वर्षा, शरद्, हेमन्त: शिशिरः चेति षड् ऋतवः भवन्ति।
  2. वसन्तस्य अनन्तरं ग्रीष्मस्य आगमनं भवति।
  3. अस्य आरम्भसमये हरितानि धान्यानि पक्वानि भवन्ति।
  4. शनैः शनैः ग्रीष्मेण सह कष्टानि अपि वर्द्धन्ते।
  5. सूर्यरश्मयः अग्निस्फुलिङ्गान् वर्षन्ति।
  6. तडाग-नदी-कूपानां जलं न्यूनतां गच्छति।
  7. जनाः पशवः पक्षिणश्च पिपासाकुलिताः भवन्ति।
  8. शीतलं पेयादिकं, शीतला च छाया एव रुचिकरा भवन्ति।
  9. श्रान्ताः पथिकाः स्वेदक्लिन्नाः सन्तः वृक्षाणां शीतलां छायाम् एव अन्विष्यन्ति।
  10. भूमिगृहेषु, कन्दरासु, वृक्षाणामधः एव च उष्णताभाव: प्रतीयते।

19. वसन्तर्तुः [2009]

  1. भारतवर्षे एकस्मिन वर्षे षड् ऋतवः भवन्ति।
  2. सर्वेषु ऋतुषु वसन्तर्तुः सर्वोत्तमः अस्ति, अतएव अयं ‘ऋतुराज:’ कथ्यते।
  3. वसन्ते सौन्दर्यस्य अभिनवं साम्राज्यं समुल्लसति।
  4. वसन्ते पक्षिकुलं दिशि दिशि धावति कूजति नृत्यति च।
  5. पलाशे रक्तपुष्पाणि विकसन्ति।
  6. तरुषु कोमलानि किसलयानि पुष्पाणि च मन: आकर्षन्ति।
  7. पिका: आग्नमञ्जरीं दृष्ट्वा हर्षातिरेकेन (UPBoardSolutions.com) गायन्ति कूजन्ति च।
  8. कृषका: नवशस्यानि दृष्ट्वा प्रसन्नाः भवन्ति।
  9. बहवः जनाः पीतानि वस्त्राणि धारयन्ति।
  10. अस्मिन् ऋतौ होलिकोत्सवः सम्पद्यते।
  11. अस्मिन् ऋतौ नाधिकः शीतः नाधिक: उष्णता भवति।
  12. सर्वतः क्षेत्रेषु सर्षपपुष्पाणि विकसन्ति।
  13. तडागेषु विविधानि वर्णानि कमलानि विकसन्ति।
  14. वसन्ते भ्रमणेन मन: प्रफुल्लं शरीरं च स्फूर्तियुक्तं भवति।
  15. अयं ऋतु: अस्मभ्यम् आनन्दस्य उल्लासस्य च सन्देशं ददाति।

20. दीपमालिका

[सम्बद्ध शीर्षकः–दीपावल्युत्सवः, दीपावलिः (2006, 12, 14)]

  1. दीपमालिका हिन्दूनां चतुषु मुख्योत्सवेषु एकः पवित्रतम: प्रमुख: महत्त्वपूर्णश्च उत्सवः वर्तते।
  2. अयम् उत्सवः कार्तिकमासस्य अमावस्यायां तिथौ सम्पादितो भवति।
  3. अस्य उत्सवस्य प्रक्रिया अनेकै: अहोभिः पूर्वं प्रारभते।
  4. एतत् ब्रूयते यद् अस्मिन् दिने श्रीरामचन्द्रः रावणं हत्वा लक्ष्मण-सीताभ्यां सह अयोध्या प्रत्यागच्छत्। अत: अयोध्यावासिनः दीपानां मालया तेषां सोल्लासं स्वागतम् अकुर्वन्।
  5. अस्मिन् दिवसे जना: गृहाणि आपणानि च सुधया लेपयन्ति।
  6. आपणवीथय: सज्जिताः भवन्ति।
  7. गृहे गृहे दीपा: पङ्क्तिबद्धाः प्रज्वाल्यन्ते।
  8. जनाः मित्राणां सम्बन्धिनां गृहेषु मिष्टान्नानि प्रेषयन्ति।
  9. रात्रौ लक्ष्म्याः पूजनं भवति।
  10. प्रसन्नाः बालका: विविधानि क्रीडनकानि प्राप्य, मिष्टान्नानि च भुक्त्वा इतस्तत: उच्छलन्ति।
  11. अस्मिन् उत्सवे गृहाणि स्वच्छानि भवन्ति, दीपालोकेन रोगकीटाणव: नश्यन्ति, जनेषु स्नेहस्य सञ्चारः भवति।
  12. केचन मूर्खा: अस्मिन् दिने द्यूतक्रीडया अस्योत्सवस्य (UPBoardSolutions.com) पवित्रतां दूषयन्ति।
  13. वस्तुत: दीपावली ज्ञानस्य सम्पन्नतायाः आराधना च उत्सवः अस्ति।
  14. भारतीय-साहित्ये दीपावल्या: विस्तृत वर्णनम् अस्ति।

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21. होलिकोत्सवः [2013,14]

[सम्बद्ध शीर्षकः-रङ्गपर्वः ]

  1. होलिकोत्सवः हिन्दूनां चतुषु मुख्योत्सवेषु एक: प्रमुखः उत्सवः अस्ति।
  2. अयमुत्सवः फाल्गुनमासस्य पूर्णिमायाः दिने सम्पादितो भवति।
  3. होलिकोत्सवः वसन्तपञ्चमीत: प्रारम्भो भवति।
  4. अस्य उत्सवस्य समय वसन्त ऋतुः समुल्लसति, अत: वातावरणं समशीतोष्णं भवति।
  5. एवं श्रूयते यत् होलिका नाम एका राक्षसी आसीत्। सा हिरण्यकशिपोः आदेशात् प्रह्लादनामकं बालकं निजाङ्के निधाय प्रज्वलितम् अग्नि प्रविष्टा। परम् ईशकृपया होलिका दग्धा जाता, प्रह्लादश्च सुरक्षित: अतिष्ठत्। तस्या स्मृतौ एवं अयम् उत्सवः भवति।
  6. जनाः एकस्मिन् स्थाने काष्ठानां सञ्चयं कुर्वन्ति, रात्रौ च होलिकायाः प्रतिमां विधाय तां दहन्ति।
  7. होलिकोत्सवे जनाः अतीव आनन्दमग्नाः भवन्ति, गायन्ति, (UPBoardSolutions.com) वाद्यन्ति नृत्यन्ति च।
  8. अग्रिमे दिवसे सर्वे मित्राणां गृहेषु यान्ति, तेषाम् उपरि रङ्गम् अबीरं च प्रक्षिपन्ति लेपयन्ति च।
  9. सर्वे जनाः प्रेम्णा मिलन्ति।
  10. अस्मिन् पर्वणि पारस्परिकः द्वेषः शत्रुता च नश्यति, स्नेहस्य सञ्चारः च भवति।

22. विजयदशमी [2006,07]

  1. विजयदशमी भारतस्य प्रमुखः उत्सवः अस्तिः।
  2. इदं कथ्यते यत् अस्मिन्नेव मर्यादापुरुषोत्तमः रामः रावणं हत्वा स्वभार्या सीतां रावणबन्धनात् अमुञ्चत्।
  3. तदा अयोध्यावासिनः प्रसन्ना: भूत्वा इमम् उत्सवम् आयोजितवन्तः।
  4. प्रमुखरूपेण अयम् उत्सवः क्षत्रियाणाम् उत्सवः भवति।
  5. अस्मिन् अवसरे ग्रामे-ग्रामे । नगरे–नगरे रामलीलायाः आयोजनं भवति।
  6. रामलीलायां मर्यादापुरुषोत्तमस्य रामस्य आदर्श जीवनं प्रदर्शयति।
  7. रावण: अन्यायस्य दुराचारस्य च प्रतीकः आसीत्।
  8. श्रीराम: मर्यादायाः सत्यस्य च प्रतीक आसीत्।
  9. अयम् उत्सवः अन्यायस्योपरि न्यायस्य विजयः अस्ति।
  10. दानवतायाः उपरि मानवतायाः विजयः अस्ति।

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23. मम प्रियं पुस्तकम्

[सम्बद्ध शीर्षकः-वाल्मीकि-रामायणम्]

  1. आदिकविना वाल्मीकि महर्षिणा विरचितं ‘रामायणम्’ मम अति प्रियं पुस्तकम् अस्ति।
  2. इदं संस्कृतभाषायाः प्रथमं काव्यम् अस्ति।
  3. अस्मिन् ग्रन्थे भगवतः श्रीरामचन्द्रस्य शक्ति-शील-सौन्दर्याणाम् अति सरलायां भाषायां विस्तृतं वर्णनमस्ति।
  4. अस्मिन् ग्रन्थे श्रीराम: मानवानामादर्शरूपेण वर्णितः।
  5. सः आदर्शः पुत्रः, आदर्श: भ्राता, आदर्शः पतिः, आदर्श: राजा च आसीत्।
  6. सः पितुः आज्ञया चतुर्दशवर्षाणि वने न्यवसत्, रावणं च हत्वा पापानि अनाशयत्।
  7. अस्मिन् ग्रन्थे प्राकृतिकं वर्णनम् अपि अतिशोभनं वर्णितम्।
  8. अयं ग्रन्थः जनान् आदर्श जीवनं यापयितुं प्रेरयति।
  9. अहमपि अस्माद् ग्रन्थात् आदर्श जीवनस्य शिक्षां लभे।
  10. अयं ग्रन्थः मह्यम् अतीव रोचते।

24. ममः प्रियः कविः [2006,07,08, 09, 10, 11, 12, 13,14]

[सम्बद्ध शीर्षकः–कालिदासो महान् कविः (2010), कविकुलगुरुः कालिदासः(2012),महाकविः कालिदासः (2007, 12, 13,14)]

  1. कालिदासः संस्कृतसाहित्यस्य महाकविः अस्ति।
  2. संस्कृतसाहित्ये एवं न, अपितु विश्वसाहित्ये अस्य उच्चस्थानम् अस्ति।
  3. अस्य महाकवेः जीवनस्य विषये किमपि निश्चितं न ज्ञायते।
  4. अनुमानतः अस्य जन्म ईसापूर्वं द्वितीयशतके उज्जयिन्याम् अभूत्।
  5. अयं राज्ञः विक्रमादित्यस्य सभाया: नवरत्नेषु एकं रनम्। आसीत्।
  6. अयं रघुवंशं कुमारसम्भवं चेति द्वे महाकाव्ये, मेघदूतं ऋतुसंहारञ्चेति द्वे (UPBoardSolutions.com) गीतिकाव्ये, विक्रमोर्वशीयं मालविकाग्निमित्रम् अभिज्ञानशाकुन्तलम् चेति त्रीणि नाटकानि अरचयत्।
  7. अभिज्ञानशाकन्तुलम् अस्य अनुपमं नाटकम् अस्ति।
  8. उपमायाः प्रयोगे सः अतीव विशिष्टः अस्ति।
  9. ‘उपमा कालिदासस्य इत्याभणक: अति प्रसिद्धः अस्ति।
  10. तस्य शैली अतीव मनोहारिणी, भाषा च सरसा, कोमला, प्रसाद-गुणयुक्ता च आसीत्।
  11. अस्य प्रकृतिचित्रणम् अपि अद्वितीयम् अस्ति।
  12. अस्य काव्येषु सर्वत्र सरसा: सूक्तयः प्राप्यन्ते।
  13. अस्य काव्यनाटकेषु आसमुद्रं भूस्थानानि वर्णितानि सन्ति

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25. राष्ट्रपिता महात्मा गान्धि [2006, 12, 13,14]

[सम्बद्ध शीर्षकः–महापुरुषस्य जीवनम्]

  1. महात्मागान्धि एकः सदाचारशीलः, सत्यनिष्ठः, अहिंसाव्रती, देशभक्तश्च महापुरुषः आसीत्।
  2. तस्य जन्म एकोनसप्तत्यधिकाष्टादशशततमे ईसवीयाब्दे अक्टूबरमासस्य द्वितारिकायां गुजरात-प्रान्तस्य पोरबन्दरनगरे अभवत्।
  3. अस्य पितुः नाम कर्मचन्द: गान्धि, मातुश्च नाम पुतलीबाई इत्यासीत्।
  4. सः सत्यप्रियः अहिंसायाः पालकश्च बाल्यादेवासीत्।
  5. सः विधिशास्त्रं पठितुम् आङ्ग्लदेशं गतः।
  6. तत्र निवसतः अपि तस्योपरि विदेशीय सभ्यतायाः प्रभाव: नाभवत्।
  7. अफ्रीकादेशं गत्वा सत्याग्रहान्दोलनेन अयं तत्र भारतीयेभ्यः अधिकारान् अदापयत्।
  8. ततः स्वदेशं प्रत्यागत्य सः भारतस्य स्वतन्त्रतायै अहिंसात्मकम् आन्दोलनम् आरब्धवान्।
  9. अहिंसात्मकेन आन्दोलनेन एव सः भारतं पारतन्त्र्य-पाशात् स्वतन्त्रम् अकरोत्।
  10. सः हरिजनानाम् उद्धाराय आजीवनं प्रायतत।
  11. अतः भारतीयाः एनं ‘बापू’ ‘राष्ट्रपिता’ वा इति अभिधातुमारब्धवन्तः।
  12. अस्माकं कर्त्तव्यं यत् वयं महात्मन: गान्धिनः मार्गम् अनुसरेम।

26. गौः

[सम्बद्ध शीर्षकः—गोपालनम्, मदीया गौः, गोसेवा (2014)]

  1. गौः एकः अति सरल: स्वभावः पशुः अस्ति।
  2. अस्याः द्वौ कण, द्वौ शृङ्गौ, एकं पुच्छ, चत्वारः स्तनाः, चत्वारः पादाश्च भवन्ति।
  3. गौः सस्नेहं घासं खादति मिष्टं दुग्धं च ददाति।
  4. धेनोः दुग्धेन देवानां पूजा भवति, घृतेन च हवनं पूर्णं भवति।
  5. अस्याः मूत्रं महद् औषधम् अस्ति।
  6. अस्याः गोमयलेपनेन च रोगा: विनश्यन्ति।
  7. अस्या गोमयेन कृषे: कार्यं भवति, इन्धनं च भवति।
  8. अस्याः वत्सा: वृषभाः भवन्ति, हलं च कर्षन्ति।
  9. शिशवः तस्याः मधुरं दुग्धं पीत्वा हृष्टाः पुष्टाः च भवन्ति, (UPBoardSolutions.com) तेषां बुद्धिश्च निर्मला भवति।
  10. प्राचीनकाले ऋषयः धेनूनां पालनमकुर्वन्।
  11. धेनुः माता इव मान्या, वन्द्या च भवति; अतः जनाः तां गौमाता इति कथयन्ति।

27. राष्ट्रियपक्षी मयूरः

  1. अस्माकं देशे भारतवर्षे राष्ट्रियवैशिष्ट्ययुक्तानि कानिचित् प्रतीकानि स्वीकृतानि सन्ति।
  2. तेषु मयूरः राष्ट्रियपक्षिरूपेण स्वीकृतोऽस्ति।
  3. मयूरोऽतीव शोभन: पक्षी भवति।
  4. अस्य पक्षा: विधात्री अनेकवर्णाः सौन्दर्ययुक्ताश्च निर्मिताः।
  5. वर्षाकाले यदा गगनं मेचकैः मेघेः आच्छादितं भवति, तदा अयं स्वपक्षान् सर्वत: प्रसार्य नृत्यति तदा वने अति भव्यं दृश्यं भवति।
  6. अस्य पक्षिणः धार्मिकम् अपि महत्त्वम् अस्ति।
  7. कार्तिकेयस्य वाहनं मयूर एव अस्ति।
  8. भगवान् कृष्णः मयूरस्य पक्षैः निर्मितं मुकुटं धारयति।
  9. मयूरस्य अतिमनोहारि रूपं दृष्ट्वा एव भारतीयशासनेन मयूरः राष्ट्रियः पक्षी स्वीकृतः।
  10. अयं स्वनर्तनेन सौन्दर्येण केकास्वरेण च जनानां मनांसि विनोदयति।
  11. अयं मानवशत्रून् सर्पादीन् व्यापाद्य प्राकृतिक सन्तुलनं सम्पादयति।
  12. सर्वैः सह मधुरम् आलापनीयं मधुरं व्यवहर्तितव्यम्, परं ये राष्ट्रद्रोहिणः, (UPBoardSolutions.com) अत्याचारपरायणाः राष्ट्रियाखण्डतायाः ऐक्यस्य च विनाशकाः ते सर्पतुल्याः मयूरेण इव राष्ट्रेण व्यापादयितव्याः।
  13. अतः अस्माभिः मयूरः सदा संरक्षणीयः संवर्धनीयश्च।।

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28. यौतुकम्। [2006]

[सम्बद्ध शीर्षकः–यौतुकप्रथा (2009)]

  1. कन्यायाः विवाहे कन्यापक्षात् वरपक्षाय यद् धनं वस्तुजातं वा दीयते, तदेव यौतुकम् कथ्यते।
  2. प्राचीनकाले कन्यायाः विवाहे उपहारदानस्य प्रथा प्रचलिता आसीत्, परमियं प्रथा सम्प्रति दोषपूर्णा अभवत्।
  3. अधुना तु वरस्य योग्यतानुरूपं, निश्चितं धनम् अनिवार्यरूपेण बलात् देयं भवति।
  4. यदि यौतुके काचित् न्यूनता भवति, तदा पत्युगृहे वधूः प्रताडिता भवति।
  5. धनलोलुपाः केचित् नरपिशाचा: वधूनां प्राणान् अपि हरन्ति।
  6. एतस्यायं परिणामः अभवत् यदि कन्यायाः पिताः (UPBoardSolutions.com) निश्चितं यौतुकं दातुमशक्तः भवति तदा तस्य दुहिता अपरिणीता स्वगृहे तिष्ठति।
  7. प्रभूतं यौतुकं दत्वा अपि माता-पितरौ कन्यायाः सुखविषये विश्वस्तौ न भवतः।
  8. प्रतिदिनं वध्वाः यातनायाः वधस्य च समाचाराः श्रूयन्ते।
  9. यौतुककारणात् अति भयङ्करान् परिणामान् दृष्ट्वा अपि जनाः अस्य अवरोधाय न यतन्ते।
  10. एवमेनुभूयते यत् अस्माकं समाज: पतनोन्मुखः सन् यौतुकसुरसामुखे पतिष्यति।
  11. अत: इमं समाजमुखात् इमं कलङ्क परिमाष्टुम् अवश्यं प्रयतनीयम्।

29. दूरदर्शनम् [2005,06,08, 09]

  1. आधुनिकेषु विज्ञानस्य आविष्कारेषु दूरदर्शनं नाम एतादृशं यन्त्रम् आविष्कृतं, येन वयं दूरस्थम् अपि दृश्यं सम्मुखमिव पश्यामः।
  2. एतस्य सहाय्येन वयं सुदूरस्थेषु देशेषु घटिताः घटना: प्रत्यक्षमिव पश्यामः नेतृणां भाषणानि शृणुमः।
  3. अधुना इदं मनोरञ्जनस्य विज्ञापनस्य वा प्रमुखतमं साधनं जातम्।
  4. वयं स्वगृहे उपविष्टा एव देशविदेशीयानां क्रीडनानां प्रतियोगिताः सुखेन पश्यामः, स्वगृहे एव पर्यस्योपरि समासीनाः चलचित्रदर्शनस्यानन्दमनुभवामः।
  5. एवं दूरदर्शनं मनोरञ्जनं करोति ज्ञानं च वर्धयति।
  6. दूरदर्शनयन्त्रं श्वेतश्यामम् अनेकवर्णं च उपलभ्यते।
  7. अनेकवणे दूरदर्शनयन्त्रे दृश्यानि स्वाभाविकरूपेण दृश्यन्ते।
  8. दूरदर्शने अनेके दोषाः अपि समुत्पन्नाः।
  9. अस्य कार्यक्रमेषु कानिचित् अभद्राणि दृश्यानि अपि दृश्यते, येन अपरिपक्वबुद्ध्यः बालकाः विकृतिं प्राप्नुवन्ति।
  10. अतः अश्लीलदृश्यानां प्रदर्शनं परिहरणीयम्।
  11. दूरदर्शने ते एव कार्यक्रमाः प्रदर्शनीयाः ये सामाजिक दृष्ट्या सत्प्रेरणादायकाः स्युः।

30. पर्यावरणम् [2006, 08, 12, 13, 14]

[सम्बद्ध शीर्षकः-पर्यावरणस्य महत्त्वम्, पर्यावरणस्य संरक्षणस्य उपायाः (2010,11), पर्यावरण-प्रदूषणम् (2010, 11, 12, 13, 14, 15), पर्यावरण-समस्या (2006), पर्यावरण शोधनोपायाः (2011), पर्यावरण-सन्तुलनम् (2013, 14)]

  1. प्रकृत्याः तत्त्वजातं परितः आवृत्य संस्थितम्। अस्मात् कारणात् तत्पर्यावरणं कथ्यते।
  2. कस्यापि देशस्य प्राकृतिकं यद् वातावरणं, तदेव तद्देशस्य पर्यावरणमुच्यते।
  3. मृत्स्ना-जल-वायु-वनस्पति-खग-मृगकीट-पतङ्ग-जीवाणवः एते पर्यावरणस्य घटकाः सन्ति।
  4. स्वस्थं पर्यावरणमेव स्वस्थजीवनस्य आधारः अस्ति।
  5. पर्यावरणे मानवसमाजे च सन्तुलनेन मानव-समाजस्य विकासः भवति।
  6. असन्तुलितं विकृतं च पर्यावरणं मानवीय स्वास्थ्यं विनाशयति।
  7. सम्प्रति वैज्ञानिके युगे नवीनानाम् उद्योगानां विकासात् पर्यावरणम्, असन्तुलितं विकृतं च अभवत्।
  8. प्रदूषणं शोधयितुं शासनेन महान्तः प्रयासाः क्रियन्ते।
  9. वृक्षारोपणैः संरक्षणैश्च पर्यावरणं शुद्धं भवति।
  10. अस्माभिरपि पर्यावरणं शोधयितुं यथाशक्यं प्रयासः कर्तव्यः।
  11. पर्यावरणे शुद्धे जाते वयं सुखेन जीवितुं शक्नुमः।

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31. तीर्थराजः प्रयागः [2008, 15]

[सम्बद्ध शीर्षकः-प्रयाग-वर्णनम् (2011,14), प्रयाग-नगरम् (2012)]

  1. प्रयागः सर्वेषु तीर्थेषु श्रेष्ठः अस्ति; अतः अयं तीर्थानां राजा तीर्थराजः अस्ति। अत्र ब्रह्मा श्रेष्ठं यागम् अकरोत्।
  2. प्राचीनकालेऽत्र बहवः अश्वमेधादयः यज्ञाः सम्पन्नाः अभवन्, अतोऽस्य नाम प्रयागोऽस्ति।
  3. अकबरः अस्य नाम स्वकीयस्य इलाहीधर्मस्य अनुसारेण (UPBoardSolutions.com) इलाहाबाद’ इति अकरोत्।
  4. प्रयाग: उत्तरप्रदेशराज्येऽस्ति।
  5. अत्र एव गङ्गा-यमुना-सरस्वतीनां तिसृणां नदीनां सम्मेलनं भवति।
  6. आसां नदीनां पवित्रे सङ्गमे अनेकलक्षाः जनाः स्नानं कुर्वन्ति, आत्मानं च पावयन्ति।
  7. प्रतिद्वादशवर्षम् अत्र कुम्भपर्वः भवति।
  8. अस्मिन् पर्वणि देशस्य सुदूरेभ्यः भागेभ्यः आगत्य तीर्थयात्रिणः सङ्गमे स्नानं कुर्वन्ति।
  9. प्रयागः विविधविद्यानां प्रमुख केन्द्रम् अस्ति।
  10. अत्र प्रयाग-विश्वविद्यालये ज्ञानविज्ञानादीनां शिक्षा दीयते।
  11. यत्र सहस्रशः विद्यार्थिन: ज्ञानार्जनाय सुदूरेभ्यः देशेभ्यः आगच्छन्ति।
  12. उत्तरप्रदेशराज्यस्य उच्चन्यायालयः, माध्यमिक शिक्षा परिषद्, हिन्दी-साहित्य सम्मेलनम्, प्रसिद्धम् आनन्दभवनम् च अत्र विराजन्ते।
  13. भारतवर्षस्य त्रयः प्रधानमन्त्रिणः अत्र जन्म अलभन्त।
  14. महाकविः कालिदासः अपि अस्य नगरस्य महिमानम् अवर्णयत्।

32. अनुशासनम् [2009, 12]

[सम्बद्ध शीर्षक: अनुशासनस्य महत्त्वम्]

  1. निर्धारितानां नियमानां पालनं, गुरूणामाज्ञानुपालनं च अनुशासनं कथ्यते।
  2. अनुशासनेन व्यक्तेः, समाजस्य देशस्य च उन्नतिर्भवति।
  3. मानवजीवने अनुशासनस्य महती आवश्यकता अस्ति।
  4. अनुशासनेन मार्गेषु यानानि सुरक्षितानि चलन्ति, जनाः च स्वगृहेषु निर्भया: वसन्ति।
  5. अनुशासनं विना जीवनं दुःखमयं विघ्नमयं च भवति।
  6. यदा मानवः अनुशासनं त्यजति, तदा विविधानि कष्टानि स्वयम् आगच्छन्ति।
  7. प्रकृतिजीवनेऽपि अनुशासनं दृश्यते।
  8. सूर्यचन्द्रौ यथासमयम् उदयेते, अस्तं च गच्छतः।
  9. आकाशे अनेकानि नक्षत्राणि अनुशासनेन एव स्वमार्गे परिभ्रमन्ति।
  10. जलधिः अनुशासनेन एव स्वसीमानं न लङ्घयते।
  11. अनुशासनमुल्लङ्घ्य प्रकृति: यदा आचरति, तदा अनिष्टं भवति।
  12. अनुशासनहीनानां जनानां जीवनं नारकीयं घृणास्पदं च भवति।
  13. अनुशासिताः जनाः सर्वेषां प्रियाः भवन्ति, निरन्तरम् उन्नतिं च कुर्वन्ति। \
  14. अतः वयं सदा अनुशासिताः भवेम।

33. वन-सम्पद् [2006,09]

[सम्बद्ध शीर्षकः–वनस्यमहत्त्वम्।]

  1. वनेषु वृक्ष-लता-तृण-गुल्मादिकं यदपि भवति सा वनसम्पद् भवति।
  2. कस्यापि देशस्य सम्पत्सु वनसम्पदा महत्स्थानम् अस्ति।
  3. यत्रदेशे वनानि न सन्ति, सः देश: निर्धनः भवति।
  4. अस्माकं देशे बहूनि वनानि सन्ति।
  5. विविधानां तरूणां, सुपुष्पान्वितानां लतानां, खगानां, मृगाणाम्, औषधीनां रूपेण महती वनसम्पत् अस्माकं देशे अस्ति।
  6. वनेषु विविधाः वृक्षाः सुपुष्पिता: लता: कूजन्तः पक्षिणः अस्माकं मनांसि मोहयन्ति।
  7. वनेभ्यः प्रभूतं काष्ठं, फलानि, औषधयः, खनिजाः पदार्थाः च उपलभ्यन्ते।
  8. वनेभ्यः एव आक्सीजनं नामा प्राणवायुः अपि प्राप्यते, येन प्राणिनः जीवनं धारयन्ति।
  9. वृक्षाणां काष्ठैः गृहाणि बहूनि काष्ठोपकरणानि च अपि निर्मीयन्ते।
  10. बहवः उद्योगाः काष्ठनिर्भराः सन्ति।
  11. परन्तु वयं अज्ञानात्। अल्पलोभाच्च वृक्षाणां कर्त्तनैः वनानि विनाशयामः।
  12. वनसम्पदां रक्षणाय वयं वृक्षान् न कर्त्तयेम।
  13. जीवनं निहितं वने” इत्युक्त्वा वनानां रक्षणं मानवजीवनम् रक्षणम् अस्ति।

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34. मम विद्यालयः

[सम्बद्ध शीर्षकः–युष्माकं विद्यालयः, अस्माकं विद्यालयः (2006, 08, 10, 11, 12, 13, 15), विद्यालयः (2011)]

  1. मम विद्यालयः नगरस्य पूर्वस्यां दिशि स्थितः नगरस्य श्रेष्ठः विद्यालयः अस्ति।
  2. मम विद्यालये पञ्चत्रिंशत् कक्षा द्विसहस्र छात्राः च सन्ति।
  3. विद्यालये एकः विशालः सभागारः अस्ति।
  4. अस्मिन् कक्षे विद्यालयस्य विभिन्नोत्सवाः आयोजयन्ति।
  5. मम विद्यालये एकः पुस्तकालयः, एक: वाचनालयः, षड् प्रयोगशाला: च सन्ति; यत्र छात्राः अधीयन्ते।
  6. अत्र सर्वे गुरुजना: परिश्रमेण पाठयन्ति।
  7. छात्राः अनुशासनमनुसरन्तः अध्ययनं कुर्वन्ति।
  8. मम विद्यालयस्य परीक्षा परिणामः सदैव (UPBoardSolutions.com) शत-प्रतिशतं भवति।
  9. क्रीडाक्षेत्रेऽपि मम विद्यालयस्य ख्यातिः अस्ति।
  10. अस्मिन् विद्यालये पठित्वा अहं कथं गर्वं न अनुभविष्यामि?

35. छात्रजीवनम्

[सम्बद्ध शीर्षकः-विद्यार्थि-जीवनम् (2011,12)]

  1. अस्माकं पूर्वजाः मानवजीवनं चतुषु भागेषु विभाजितम् अकरोत्।
  2. पञ्चविंशति वर्षपर्यन्तं ब्रह्मचर्याश्रमः कथ्यते।
  3. इयमेव जीवनं छात्र-जीवनम् अस्ति।
  4. अस्मिन् काले मनुष्यः स्व-इन्द्रियाणि नियम्य विद्याध्ययनं कुर्यात्।
  5. छात्राः सदैव अनुशासिताः भवेयुः।
  6. विनयः छात्राणाम् आभूषणम्।
  7. विनीत: छात्रः सर्वेषां प्रियः भवति।
  8. विद्यायाः सर्वोत्तमः लाभ: विनय एव अस्ति।
  9. विनीत: छात्र: स्वविनयेन सर्वत्र सफलतां प्राप्नोति।
  10. छात्राणां गुणं शास्त्रेषु एव वर्णित:

काक चेष्टा वको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च।
अल्पाहारी गृहत्यागी, विद्यार्थी पञ्चलक्षणम् ॥

36. अयोध्यावर्णनम्

  1. अयोध्या एका धार्मिका नगरी अस्ति।
  2. दशरथः अस्याः राजा आसीत्।
  3. दशरथात्पूर्वमपि अत्र अनेके सूर्यवंशीयाः नृपाः अभवन्।
  4. ये पुत्रवत् प्रजाम् अपालयन्।
  5. अस्यामेव नगर्यां श्रीरामस्य रूपे भगवान् विष्णुः अवतरितवान्।
  6. श्रीरामः मानवजीवनस्य सर्वाः मर्यादाः अपालयत्।
  7. यत् कार्यं केनापि पुत्रेण न कृतः तत् (UPBoardSolutions.com) श्रीरामेण कृतः।
  8. इयं नगरी भगवतः रामस्य जन्मस्थली क्रीडाभूमिश्च अस्ति।
  9. अयोध्या निकटे एवं सरयू नदी वहति, यस्याः वर्णनं रामायणेऽस्ति।
  10. अत: इयं नगरी तीर्थस्थानेषु विख्याता अस्ति।

37. अस्माकं प्रधानाचार्यः [2014]

  1. अहं श्रीमालवीय माध्यमिक विद्यालये पठामि।
  2. अयं विद्यालयः नगरात् बहिरस्ति।
  3. विद्यालयस्य प्रधानाचार्यः श्रीसदाशिव मिश्रः एकः आदर्श: प्रधानाचार्यः अस्ति।
  4. स: सहकर्मीन् अध्यापकान् स्वानुजान् इव व्यक्हरति।
  5. तस्य व्यवहारेण सर्वे गुरवः तम् अग्रज इव आदरं कुर्वन्ति।
  6. प्रार्थनास्थले छात्राः तस्य भाषणम् आदरपूर्वकं शृण्वन्ति।
  7. नगरेऽपि अस्माकं प्रधानाचार्यः सर्वत्र समादृतः अस्ति।
  8. तस्यैव प्रयासेन अस्माकं विद्यालयः अनुशासने शीर्षस्थः अस्ति।
  9. सर्वे छात्राः अध्यापकाश्च मानयन्ति यत् विद्यालयस्य उन्नतिः अस्माकमेव उन्नति अस्ति।
  10. वयं स्वप्रधानाचार्ये गर्वः अस्ति।

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38. गङ्गा नदी

  1. गङ्गाया अखिलविश्वस्य नदीषु महत्त्वपूर्णं स्थानं वर्तते।
  2. सुरधुनीयम्, भागीरथी, विष्णुनदी, जाह्नवी आदि अस्याः अन्यानि नामानि सन्ति।
  3. गङ्गा हिमालयात् नि:सृता।
  4. भारतवर्षस्य धरित्रीं शस्यश्यामला निर्मातुं गङ्गायाः उपकारः अनिर्वचनीयः।
  5. भारतवर्षस्य अनेकानि प्रमुखानि नगराणि अस्याः तटे स्थिताः सन्ति।
  6. गङ्गायाः पावने कूले अमेकानि तीर्थस्थानामि सन्ति।
  7. गङ्गोदकं स्वच्छं शीतलं, तृषीशामकं, रुचिवर्द्धकं, सुस्वादु, रोगापहारि च भवति।
  8. गङ्गायाः जले कीटाणवः न जायन्ते।
  9. जना इमां ‘गङ्गामाता इति सम्बोधयन्ति।
  10. अद्य मानव: अज्ञानवशात् प्रमादात् च सर्वकल्याणकारिणीं गङ्गां प्रदूषयति।

39. राष्ट्रिय-एकता

  1. विविध धर्म-भाषावलम्बिनां जनानां वासस्थानं राष्ट्रं भवति।
  2. परन्तु धर्म-भाषा-वैविध्येऽपि एकस्मिन् राष्ट्रे वसन्तः (UPBoardSolutions.com) जनाः अभिन्ना एव भवन्ति।
  3. यथा एकस्मिन् गृहे वसन्त: बहवः जनाः पृथक् वस्त्राभूषणानि धारयन्ति पृथगेव चिन्तयन्ति च।
  4. परं मूलत: ते एकस्यैव गृहस्यैव अङ्गानि भवन्ति। अत: अभिन्नाः एव तिष्ठन्ति।
  5. एवमेव वयं स्वराष्ट्रे वसन्तः पृथक् भाषा-भाषिणः, पृथक् धर्मावलम्बिनः, पृथक् विचारानुयायिनः। सन्त: अपि अभिन्नाः एव।
  6. यतो हि भारतम् अस्माकं राष्ट्रं वयं च अस्य राष्ट्रस्य नागरिकाः।
  7. राष्ट्रं यदि सुरक्षितम् अस्ति तर्हि वयमपि निस्सन्देहं सुरक्षिताः।
  8. राष्ट्रं यदि विकसितं तर्हि अस्माकमपि विकासः सुनिश्चित: एव।
  9. अतः अस्माकं सर्वेषां भारतीयानाम् इदं प्रथमं कर्त्तव्यम् अस्ति यद् राष्ट्रियैक्यस्य बाधकानि तत्त्वानि निवारयेम राष्ट्रियाम् एकतां च पोषयेम।
  10. एतेनैव राष्ट्रस्य अस्माकं सर्वेषां च समुन्नतिः समृद्धिश्च सुनिश्चिता।

40. वसुधैव कुटुम्बकम्

  1. विश्वस्य स्रष्टा ईश्वरः एकः एव अस्ति।
  2. सर्वे प्राणिनः च तस्य तनया: सन्ति।
  3. अतः विश्वस्य सर्वेषु भागेषु स्थितीः जनाः रूप-वर्ण-भाषा-संस्कृति भेदान् धारयन्तः अपि अभिन्नाः एव।
  4. यतोहि सर्वेषां मूलप्रवृत्तयः समाना: एव; यथा–एकः जनः सम्माने सुखम् अपमाने च दुःखम् अनुभवति तथैव अन्येऽपि।
  5. अतः श्रेष्ठः जनः सः एव यः सर्वेषु प्राणिषु समानं व्यवहारं करोति, सर्वेषु स्निह्यति न कमपि पीडयति।
  6. अद्य तु विज्ञानस्य प्रभावेण देशकालयोः अन्तरं प्रायः समाप्ति गतम्।
  7. भारत स्थितः जनः विदेशेषु स्थितानां जनानां समाचार प्रतिदिनं प्राप्नोति दूरभाषेण च वार्ती करोति।
  8. दूरदर्शनेन तु सर्व विश्वं करतलस्थितमेव जातम्।
  9. एतस्य सहयोगेन कुत्रचिदपि घटितां घटनां क्षणादेव वयं ज्ञातुं समर्थाः भवामः।
  10. अत: उपर्युक्तस्थितौ विश्वबन्धुत्वस्य भावनायाः महती आवश्यकता अस्ति।
  11. अत: महर्षिभिः उक्तम्- उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।

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41. परिवारकल्याणम् [2006]

[सम्बद्ध शीर्षकः–जनसङ्ख्या -समस्या (2007,08, 11,14), जनसङ्ख्या -विस्फोटः (2007, 10, 11, 15),परिवार-नियोजनम् (2011)]

  1. परिवार कल्याणार्थम् इदम् आवश्यक यत् व्ययः आयात् अल्पतरो भवेत्।
  2. यदि परिवारे सदस्यानां सङ्ख्या विशाला स्यात् तर्हि तेषां पालनाय महान् आयः अपि अल्पतरः एव।
  3. अतः परिमित-सदस्यानां परिवारः एव सुखी भवति।
  4. परिवारस्य परिमित्यर्थ प्राचीनकालेऽपि अनेक उपायाः (UPBoardSolutions.com) प्रचलिताः आसन्। तेषु इन्द्रियसंयमः मुख्यः आसीत्।
  5. अस्मिन् भोगविलासयुगे इन्द्रिय-संयमः नास्ति सुकरः।
  6. अतएव अस्मिन् युगे परिवार-परिमित्यर्थं बहवः वैज्ञानिकाः उपायाः आविष्कृताः सन्ति।
  7. तेषु गर्भ: रोधकानाम् ओषधीनां प्रयोग: वन्ध्याकरणं च इमौ द्वौ उपायौ मुख्यौ स्तः।
  8. किन्तु शिक्षाभावात् सामान्यजना: परिवार नियोजन नाङ्गीकुर्वन्ति।
  9. केचित् राजनीतिक-नेतारः अपि अस्मिन् विषये बाधकाः भवन्ति।
  10. यदि अस्माकं देशवासिन: परिवार-निरोधं स्वेच्छया न स्वीकुर्वन्ति तर्हि प्रकृतिः अस्माकं नियोजनं करिष्यति।
  11. अत: अस्माकं सर्वेषाम् इदं कर्त्तव्यं यद् वयं परिवार-निरोधाय मनुष्यान् प्रेरयाम।

42. विद्यालयमहोत्सवः [2009]

[सम्बद्ध शीर्षकः–स्वतन्त्रता दिवसः (2009)]

  1. अगस्त-मासस्य पञ्चदशे दिनाङ्के अस्माकं देशः स्वतन्त्रः अभवत्।
  2. अस्मिन् दिने सम्पूर्ण-भारते स्वतन्त्रता दिवसस्य उत्सवः भवति।
  3. अस्माकं विद्यालये अयं वार्षिक-महोत्सवरूपेण भवति।
  4. अयम् उत्सवः अगस्तमासस्य प्रथम-दिनाङ्केतः प्रारभते।
  5. दिने प्रतिदिनं बहुविधाः क्रीडा-प्रतियोगिताः भवन्ति।
  6. अस्माकं मुख्य: उत्सवः पञ्चदश-दिनाङ्के भवति।
  7. अस्मिन् दिने अनेके यान्याः अतिथयः आगच्छन्ति।
  8. प्रात:काले प्रधानाचार्यः ध्वजारोहणं करोति।
  9. सन्ध्या-काले एका विशाला सभा आयोज्यते।
  10. छात्रा: सांस्कृतिका कार्यक्रमान् प्रस्तुतवन्ति।
  11. प्रधानाचार्यः छात्रेभ्यः मिष्टान्नानि पुरस्कारान् च वितरन्ति।
  12. एवम् अयं स्वतन्त्रता दिवस: विद्यालय-महोत्सवः च सम्पन्नः भवति।।

43. क्रिकेट-क्रीडनम्

  1. भारते क्रीडायाः प्रथा अतिप्राचीना वर्तते।
  2. क्रिकेट-क्रीडनम् कन्दुक-क्रीडायाः स्वरूपम् अस्ति।
  3. इदं क्रीडनं यष्टिभिः कन्दुकः-ताडनारूपे प्रचलितम् अस्ति।
  4. सम्प्रति बहुविधानि क्रीडनानि प्रचलितानि सन्ति।
  5. तेषु क्रिकेट-क्रीडनम् अति लोकप्रियम् अस्ति।
  6. विदेशेषु अपि अस्य क्रीडनस्य अति प्रचलनम्। अस्ति।
  7. प्रायः विश्वस्य सर्वेषु देशेषु इदम् क्रीडनम् क्रीड्यते।
  8. समयानुसारं अन्ताराष्ट्रिया क्रिकेट प्रतियोगितापि आयोज्यते।
  9. क्रिकेट-क्रीडनेन शरीरं स्वस्थ स्फूर्तियुक्तं च भवति।
  10. एतेन स्पर्धा सहयोग-भावना च वर्धेते।
  11. सम्प्रति सहयोग-भावनायाः परमावश्यकता वर्तते।
  12. क्रिकेट-क्रीडनेन सम्प्रति देशस्य युवकानां स्वास्थ्य-विकासः भवति।।

44. अस्माकं प्रधानमन्त्री

  1. भारतः एकः राष्ट्रः अस्ति।
  2. कस्यापि राष्ट्रस्य एकः प्रधानमन्त्री भवति।
  3. भारतराष्ट्रस्य अपि एक: प्रधानमन्त्री अस्ति।
  4. अस्माकं प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्रः दामोदरदास: मोदी महाभागः अस्ति।
  5. सः महान् राष्ट्रभक्तः अस्ति।
  6. सः महान् राजनीतिज्ञः अस्ति।
  7. नरेन्द्रः दामोदर-दासः मोदी महोदयः कुशल प्रशासकः अस्ति।
  8. अयं देशम् उन्नतिमार्गं नेतुं प्रयत्नशीलः अस्ति।
  9. अस्माकं प्रधानमन्त्रिणः विदेशनीति, गृहनीति, अर्थनीति, सुदृढा सन्ति।
  10. अयम् एकः सक्षम: प्रधानमन्त्री अस्ति।

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45. धर्मः

[सम्बद्ध शीर्षकः-धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः]

  1. धर्मः कश्चित् लोकोत्तर: आध्यात्मिकः गुणः अस्ति।
  2. धारणात् धर्मः इत्युच्यते।
  3. धर्मः मानवस्य सदैव संरक्षकः अस्ति।
  4. यः धर्मं रक्षति धर्मः तं रक्षति।
  5. धर्मः एव मानवेषु एक: विशिष्टः गुणः अस्ति।
  6. धर्मेण हीनः जनः पशो: तुल्यः भवति।
  7. धर्मः सदैव पालनीयः (UPBoardSolutions.com) भवति।
  8. स्वधर्मः एव श्रेष्ठः भवति।
  9. धर्मस्य परिभाषा कर्तुम् अशक्या।
  10. मानवैः धर्मः सदैव रक्षणीयः पालनीयश्च।

46. धैर्यम्। [2008]

[सम्बद्ध शीर्षकः-त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि काले]

  1. धैर्यम् एकः अद्भुत: गुणः अस्ति।
  2. धीरः सर्वं विधातुं समर्थः अस्ति।
  3. अधीर: स्वकार्यं विनाशयति।
  4. धैर्येण असाध्यमपि कार्यं सरलं भवति।
  5. धैर्यमवलम्ब्य मानवः स्वकार्यं साधयेत्।
  6. मानव-जीवने धैर्यस्य महत्त्वपूर्ण स्थानं स्वीकृतम्।
  7. मानवः धैर्यं कदापि न त्यजेत्।
  8. धैर्यं विना जीवनं दु:खमयं कष्टमयं च भवति।
  9. विपत्सु अपि धैर्यं सज्जनाः न परित्यजन्ति।
  10. वयमपि धीराः भवेम।

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47. प्रियः अध्यापकः [2006,07]

  1. य: अध्यापयति स: अध्यापकः भवति।
  2. मम विद्यालये अनेके अध्यापकाः सन्ति।
  3. सर्व एव अध्यापका समानाः न भवन्ति।
  4. छात्रेषु कश्चित् एव प्रियतमः प्राप्तसम्मानः भवति।
  5. मम अपि श्री कमलेश कुमार जैन: प्रिय: अध्यापकः अस्ति।
  6. छात्राः तं सर्वाधिकं सम्मन्यन्ते।
  7. सः वस्तुतः अस्ति सम्मानस्य योग्यः।
  8. सः सौम्य: व्यवहारकुशल: उदारः स्वविषये च निष्णातः अस्ति।
  9. सवें अध्यापका: छात्रा: अन्ये कर्मचारिणश्च श्री जैन: सम्मानं कुर्वन्ति।
  10. सः छात्रेभ्यः अति रोचते, अत: ममापि सः प्रियः अध्यापकः अस्ति।

48. विज्ञानयुगम्

[सम्बद्ध शीर्षकः-विज्ञानस्य उपयोगिता]

  1. वर्तमानयुगं विज्ञानयुगम् अस्ति।
  2. विशिष्टज्ञानं विज्ञानम् अस्ति।
  3. अस्मिन् युगे विज्ञानं विना कार्यं न सम्भवम्।
  4. विद्युत-व्यजनं, विद्युत-शकटिका, आकाशवाणी, (UPBoardSolutions.com) दूरदर्शनादीनि प्रमुखानि वैज्ञानिक अनुसन्धानानि सन्ति।
  5. आधुनिकयुगे इमानि साधनानि अति आवश्यकानि वर्तन्ते।
  6. मानवजीवने विज्ञानस्य एवं प्रधानता अस्ति।
  7. विज्ञानबलेन अद्य असम्भवम् अपि सम्भवं भवति।
  8. अधुना विज्ञानबलेन एव मनुष्यः चन्द्रादि लोकं गच्छति।
  9. विज्ञानस्य प्रसादेनैव पोतेन नदी समुद्राः च तरामः।
  10. वयं विज्ञानप्रभावेन आकाशे स्वच्छन्दं भ्रमामः।

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