UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 23 सन्त गाडगे बाबा (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 23 सन्त गाडगे बाबा (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

सन्त गाडगे बाबा का पूरा नाम देव ‘डेबू जी’ झिंगराजी जाणोरकर था। इनका जन्म 23 फरवरी, सन् 1876 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के शेणगाँव में हुआ था। इनके पिता का

नाम झिंगराजी जाणोरकर और माता सखूबाई थीं। ये हमेशा मिट्टी का गडुआ या मटका रखते थे, इस कारण इनको लोग गाडगे बाबा कहते थे। 8 वर्ष की आयु में इनके पिता का देहान्त हो गया। इनका पालन-पोषण बहुत गरीबी में हुआ। एका विवाह 16 वर्ष की आयु में कुन्ताबाई से हुआ। एक साहूकार की धोखाधड़ी के कारण इनके मामा का देहान्त हो गया। तब इन्होंने संकल्प लिया कि गरीब लोगों की सहायता करेंगे और उन्हें शिक्षित करेंगे ताकि गाँव वाले किसी के धोखे के शिकार न हों। इन्होंने मांस-मदिरा का सेवन करने वाले अन्धविश्वासी लोगों का अन्धविश्वास दूर किया। लोगों को अच्छे-बुरे का ज्ञान कराया।

इन्होंने 30 वर्ष की अवस्था में घर परिवार छोड़कर संन्यास ले लिया। 12 वर्ष तक उन्होंने साधना की। कबीर, तुकाराम, ज्ञानदेव, नामदेव, नानक, स्वामी विवेकानन्द, जैसे सन्तों के उदाहरणों को देकर वे अपने प्रवचन में साधारण बोल-चाल की भाषा का प्रयोग करते थे, जिस कारण लोग उनसे बहुत प्रभावित हुए। सन्त गाडगे बाबा ने मूर्ति पूजा का विरोध किया और कहा मन्दिर बनवाने से अच्छा धर्मशाला बनवाएँ, जहाँ लोग ठहर सकते हैं और भोजन प्राप्त कर सकते हैं। इन्होंने सैकड़ों स्कूल बनवाए। विद्यार्थियों को प्रभु की मूर्तियों की उपाधि दी। ये समाज की कुव्यवस्था और कुरीतियों से बहुत दुखी थे। इन्होंने दहेज प्रथा, बाल विवाह, छुआछूत जैसी बुराइयों को दूर करने के लिए संघर्ष किए। इनका कहना था “सच्चा ईश्वर दरिद्र नारायण के रूप में तुम्हारे सामने खड़ा है, उसकी सेवा करो।”

सन्त गाडगे की मुलाकात डॉ० भीमराव अम्बेडकर और गांधी जी से भी हुई। बाबा मधुमेह की बीमारी से पीड़ित थे। सन् 1955 में बाबा को अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल का खर्च उठाना मुश्किल हो गया और (UPBoardSolutions.com) वे बिना बताए ही रात को अस्पताल से निकल गए। 6 दिसम्बर, 1956 को डॉ० भीमराव अम्बेडकर की मृत्यु का समाचार पाकर वे रो पड़े और खाना-पीना छोड़ दिया। 20 दिसम्बर, 1956 को सन्त गाडगे बाबा का स्वर्गवास हो गया।

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अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न प्रश्नों के उत्तर लिखो
(क) सन्त गाडगे जी का नाम क्या था?
उत्तर :
सन्त गाड़गे जी का नाम देव डेबू जी झिंगराजी जाणोरकर था।

(ख)
डेबूजी के पिता ने अन्तिम समय में डेबूजी की माँ से क्या कहा?
उत्तर :
डेबू जी के पिता ने अन्तिम समय में डेबू जी की माँ से कहा कि मैं कुछ दिन का मेहमान हूँ। डेबू जी का ध्यान रखना और मांस-मदिरा से दूर रहने की सलाह देना।

(ग)
मामा की मृत्यु के बाद डेबूजी ने क्या संकल्प किया? (UPBoardSolutions.com)
उत्तर :
मामी की मृत्यु के बाद डेबू जी ने संकल्प लिया कि गरीब लोगों की सहायता करेंगे और शिक्षित करेंगे ताकि गाँव वाले किसी के धोखे के शिकार न हो सकें।

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(घ) संत गाडगे बाबा ने कौन-कौन से कार्य किए ?
उत्तर :
सन्त गाडगे बाबा ने निम्न कार्य किए- उन्होंने मूर्ति पूजा का विरोध किया, दहेज प्रथा, बाल विवाह, छुआछूत जैसी बुराइयों को दूर करने के लिए उन्होंने बहुत संघर्ष किया।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करो (पूर्ति करके)
(क) डेबूजी के पिता झिंगराजी जाणोरकर और माता सखूबाई थीं।
(ख) इनका विवाह 18 वर्ष की आयु में कुन्ताबाई से हो गया।
(ग) उनके पिता की मृत्यु का मुख्य कारण मदिरा थी।
(घ) भोजन में शुद्ध शाकाहारी भोजन परोसा गया। (UPBoardSolutions.com)
(ङ) वे मन्दिर बनवाने की अपेक्षा धर्मशाला बनवाना अच्छा समझते थे।

प्रश्न 3.
सही वाक्य के सामने सही (✓) तथा गलत वाक्य के सामने गलत (✗) का निशान लगाइए (निशान लगाकर)
उत्तर :
(क) सन्त गाडगे जी के पिता का नाम झिंगराजी जाणोरकर और माता सखूबाई थीं। (✓)
(ख) 20 दिसम्बर, 1956 को सन्त गाडगे बाबा की मृत्यु हो गई। (✓)
(ग) डेबू जी आँत की बीमारी से पीड़ित थे। (✗)
(घ) सन्त गाडगे बाबा मूर्ति पूजा के विरोधी थे। (✓)

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi प्रमुख लेखक एवं उनकी रचनाएँ

UP Board Solutions for Class 10 Hindi प्रमुख लेखक एवं उनकी रचनाएँ

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प्रमुख लेखक एवं उनकी रचनाएँ

S.No.     लेखक   –    रचना   –    विधा

1. गोकुलनाथ – चौरासी वैष्णवन की वार्ता – वार्ता साहित्य

2. गोकुलनाथ – दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता – वार्ता साहित्य

3. बिट्ठलनाथ – शृंगार रस मण्डन (2015) – ब्रजभाषा गद्य

4. बैकुण्ठमणि शुक्ल – वैशाख माहात्म्य -ब्रजभाषा गद्य

5. बैकुण्ठमणि शुक्ल – अगहन माहात्म्य – ब्रजभाषा गद्य

6. नाभादास – अष्टयाम -ब्रजभाषा गद्य

7. बनारसीदास – बनारसी विलास – ब्रजभाषा गैद्य

8. वैष्णवदास – भक्तमाल प्रसंग – (UPBoardSolutions.com) ब्रजभाषा गद्य

9. कवि गंग – चंद छंद बरनन की महिमा – खड़ी बोली गद्य

10. रामप्रसाद निरंजनी – भाषा योग-वाशिष्ठ (2012] – खड़ी बोली गद्य

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11. दौलतराम – पद्मपुराण- भाषानुवाद

12. मथुरानाथ शुक्ल – पंचांग दर्शन[2013] – ज्योतिष ग्रन्थ का भाषानुवाद

13. मुंशी इंशा अल्ला खाँ – रानी केतकी की कहानी – कहानी

14. मुंशी सदासुखलाल – सुखसागर (2015) – खड़ी बोली गद्य

15. लल्लूलाल – प्रेमसागर (2009) – कहानी

16. लल्लूलाल – माधव विलास – ब्रजभाषी गद्य

17. सदल मिश्र । – नासिकेतोपाख्यान (2009) – आख्यान

18. देवकीनन्दन खत्री – चन्द्रकान्ता [2012] – उपन्यास

19. राजा शिवप्रसाद सितारेहिन्द’ – राजा भोज का सपना – कहानी

20. राजा लक्ष्मणसिंह।-  शकुन्तला – नाटक

21. गोपालचन्द्र गिरधरदास – नहुष : – नाटक

22. किशोरीलाल गोस्वामी – इन्दुमती (2014, 15) – कहानी

23. किशोरीलाल गोस्वामी – सुल्ताना (2018) – उपन्यास

24. श्रीनिवासदास । – परीक्षा-गुरु [2013]– उपन्यास

25. स्वामी दयानन्द – सत्यार्थ प्रकाश (2009) – धार्मिक ग्रन्थ

26. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र – अंधेर नगरी – नाटक

27. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र – सत्य हरिश्चन्द्र – नाटक

28. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र – भारत दुर्दशा- नाटक

29. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र – वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति – नाटक ।

30. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र – दिल्ली दरबार दर्पण – (UPBoardSolutions.com) निबन्ध-संग्रह

31. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र – मदालसा – निबन्ध-संग्रह

32. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र  – सुलोचना – निबन्ध-संग्रह

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33. प्रतापनारायण मिश्र – भारत दुर्दशा- नाटक

34. प्रतापनारायण मिश्र – हठी हम्मीर – नाटक

35. प्रतापनारायण मिश्र – कलि कौतुक – पद्य नाटक ।

36. प्रतापनारायण मिश्र – संगीत शाकुन्तल – नाटक

37. प्रतापनारायण मिश्र – हमारा कर्तव्य और युग-धर्म – निबन्ध

38. श्यामसुन्दर दास – रूपक-रहस्य – आलोचना

39. श्यामसुन्दर दास – साहित्यालोचन[2015,17] – आलोचना

40. श्यामसुन्दर दास – हिन्दी भाषा और साहित्य का इतिहास – इतिहास

41. श्यामसुन्दर दास – भाषा-विज्ञान – भाषा-विज्ञान

42. श्यामसुन्दर दास – भाषा-रहस्य – भाषा-विज्ञान

43. श्यामसुन्दर दास – वैज्ञानिक कोश – कोश

44. श्यामसुन्दर दास दास – हिन्दी शब्दसागर – कोश

45. प्रेमचन्द – गोदान [2012] – उपन्यास

46. प्रेमचन्द – गबन [2011,15) – उपन्यास

47. प्रेमचन्द कर्मभूमि [2011] – उपन्यास

48. प्रेमचन्द रंगभूमि – उपन्यास प्रेमचन्द सेवासदन [2011,17] – उपन्यास

50. प्रेमचन्द प्रेमाश्रम – उपन्यास

51. प्रेमचन्द निर्मला- उपन्यास

52. प्रेमचन्द कर्बला – नाटक

53. प्रेमचन्द प्रेम की वेदी – नाटक

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54. प्रेमचन्द – संग्राम – नाटक

55. प्रेमचन्द – मानसरोवर (आठ भाग) – कहानी-संग्रह।

56. प्रेमचन्द – पूस की रात – कहानी

57. प्रेमचन्द – प्रेमांजलि – कहानी

58. प्रेमचन्द – कुछ विचार – निबन्ध

59. वियोगी हरि – प्रार्थना – गद्य काव्य

60. वियोगी हरि – श्रद्धाकण – गद्य काव्य

61. वियोगी हरि – अन्तर्नाद – गद्य काव्य

62. वियोगी हरि – उद्यान – उपदेश

63. वियोगी हरि- गाँधी जी का आदर्श – उपदेश

64. वियोगी हरि – भावना – उपदेश

65. वियोगी हरि – बुद्धवाणी – उपदेश

66. वियोगी हरि – तरंगिणी – गद्य गीत

67. वियोगी हरि – पावभर आटा – (UPBoardSolutions.com) गद्य गीत

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68. वियोगी हरि – मन्दिर प्रवेश – धर्म

69. वियोगी हरि – पगली – गद्य गीत

70. वियोगी हरि – वीर हरदौल – नाटक

71. वियोगी हरि – छद्मयोगिनी – नाटक

72. वियोगी हरि – मेरा जीवन-प्रवाह – आत्मकथा

73. वियोगी हरि – विश्व-धर्म – निबन्ध

74. हरिभाऊ उपाध्याय – बापू के आश्रम में [2010] – संस्मरण

75. हरिभाऊ उपाध्याय – सर्वोदय की बुनियाद – निबन्ध

76. हरिभाऊ उपाध्याय – पुण्य स्मरण[2010] – संस्मरण

77. हरिभाऊ उपाध्याय – साधना के पथ पर [2008,09] – जीवनी

78. हरिभाऊ उपाध्याय – स्वतन्त्रता की ओर – निबन्ध

79. हरिभाऊ उपाध्याय हमारा कर्तव्य और युग-धर्म – निबन्ध

80. गुलाबराय – मेरे निबन्ध – निबन्ध

81. गुलाबराय – नर से नारायण (2017) – निबन्ध

82. गुलाबराय – ठलुआ क्लब [2009, 15] – निबन्ध

83. गुलाबराय – मेरी असफलताएँ [2009, 10, 11, 14, 16] – आत्मकथा

84. गुलाबराये – मन की बातें – निबन्ध

85. गुलाबराय – काव्य के रूप – आलोचना

86. गुलाबराय – सिद्धान्त और अध्ययन – आलोचना

87. गुलाबराय – राष्ट्रीयता – आलोचना

88. गुलाबराय – हिन्दी नाट्य-विमर्श – आलोचना

89. गुलाबराय – अध्ययन और आस्वाद – आलोचना

90. गुलाबराय – हिन्दी काव्य-विमर्श – आलोचना

91. गुलाबराय – नवरस – आलोचना

92. गुलाबराय – हिन्दी-साहित्य का सुबोध इतिहास – इतिहास

93. गुलाबराय – आलोचक रामचन्द्र शुक्ल – आलोचना

94. विनोबा भावे – गीता प्रवचन – निबन्ध

95. विनोबा भावे – गंगा – निबन्ध

96. विनोबा भावे – स्थितप्रज्ञ दर्शन – निबन्ध

97. विनोबा भावे – भूदान यज्ञ – निबन्ध

98. विनोबा भावे – जीवन और शिक्षण – निबन्ध

99. विनोबा भावे – गाँव सुखी हम सुखी – निबन्ध

100. विनोबा भावे – आत्मज्ञान और विज्ञान – उपदेश

101. विनोबा भावे – विनोबा के विचार – उपदेश

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102. विनोबा भावे – राजघाट की सन्निधि में – संस्मरण

103. विनोबा भावे – चिरतारुण्य की साधना – निबन्ध

104. हजारीप्रसाद द्विवेदी – अशोक के फूल [2018] – निबन्ध

105. हजारीप्रसाद द्विवेदी – विचार-प्रवाह – निबन्ध

106. हजारीप्रसाद द्विवेदी – कुटज (2015) – निबन्ध

107. हजारीप्रसाद द्विवेदी – कल्पलता। – निबन्ध

108. हजारीप्रसाद द्विवेदी – पुनर्नवा – उपन्यास

109. हजारीप्रसाद द्विवेदी – बाणभट्ट की आत्मकथा (2011, 13, 17] – उपन्यास

110. हजारीप्रसाद द्विवेदी – चारुचन्द्रलेख – उपन्यास

111. हजारीप्रसाद द्विवेदी – अनामदास का पोथा [2010,15] – उपन्यास

112. हजारीप्रसाद द्विवेदी – हिन्दी-साहित्य की भूमिका – इतिहास

113. हजारीप्रसाद द्विवेदी – हिन्दी-साहित्य का आदिकाल – इतिहास

114. हजारीप्रसाद द्विवेदी – सूर साहित्य – आलोचना

115. हजारीप्रसाद द्विवेदी – कबीर – आलोचना

116. हजारीप्रसाद द्विवेदी – गुरु नानकदेव – आलोचना

117. हजारीप्रसाद द्विवेदी – हिन्दी साहित्य – आलोचना

118. हजारीप्रसाद द्विवेदी – नाथ सिद्धों की बानियाँ – आलोचना

119. महादेवी वर्मा – श्रृंखला की कड़ियाँ [2013] – निबन्ध

120. महादेवी वर्मा – क्षणदा – निबन्ध

121. महादेवी वर्मा – विवेचनात्मक (UPBoardSolutions.com) गद्य – निबन्ध

122. महादेवी वर्मा – अतीत के चलचित्र [2013,15,17] संस्मरण और रेखाचित्र –

123. महादेवी वर्मा – स्मृति की रेखाएँ। – संस्मरण और रेखाचित्र

124. महादेवी वर्मा – मेरा परिवार – संस्मरण और रेखाचित्र

125. महादेवी वर्मा – पथ के साथी (2017) – संस्मरण और रेखाचित्र

126. रामवृक्ष बेनीपुरी – पतितों के देश में [2017] – उपन्यास

127. रामवृक्ष बेनीपुरी – चिता के फूल – | कहानी

128. रामवृक्ष बेनीपुरी – माटी की मूरतें (2015) – रेखाचित्र

129. रामवृक्ष बेनीपुरी – अम्बपाली नाटक

130. रामवृक्ष बेनीपुरी – जंजीरें और दीवारें – संस्मरण

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131. रामवृक्ष बेनीपुरी – गेहूँ और गुलाब [2016] – निबन्ध

132. रामवृक्ष बेनीपुरी – पैरों में पंख बाँधकर [2016] – यात्रा-वर्णन

133. श्रीराम शर्मा – सेवाग्राम की डायरी – संस्मरण

134. श्रीराम शर्मा – सन् बयालीस के संस्मरण – संस्मरण

135. श्रीराम शर्मा – शिकार – शिकार साहित्य

136. श्रीराम शर्मा – प्राणों का सौदा – शिकार साहित्य

137. श्रीराम शर्मा – बोलती प्रतिमा – शिकार साहित्य

138. श्रीराम शर्मा जंगल के बीच – शिकार साहित्य

139. काका कालेलकर – जीवन का काव्य – निबन्ध

140. काका कालेलकर – सर्वोदय । – निबन्ध

141. काका कालेलकर – जीवन-लीला – आत्मचरित

142. काका कालेलकर  -हिमालय प्रवास (2015) – यात्रावृत्त

143. काका कालेलकर – लोकमाता – संस्मरण

144. काका कालेलकर – यात्रावृत्त

145. काका कालेलकर – उस पार के पड़ोसी – यात्रावृत्त

146. काका कालेलकर – संस्मरण – संस्मरण

147. काका कालेलकर  – बापू की झाँकियाँ – संस्मरण

148. विनयमोहन शर्मा – साहित्यावलोकन [2017] – निबन्ध

149. विनयमोहन शर्मा  – दृष्टिकोण – निबन्ध

150. विनयमोहन शर्मा – दक्षिण भारत की एक झलक [2011,18] – निबन्ध

151. विनयमोहन शर्मा – साहित्य-शोध समीक्षा – आलोचना

152. विनयमोहन शर्मा – भाषा-साहित्य समीक्षा – आलोचना

153. विनयमोहन शर्मा – रेखाएँ और रंग। – संस्मरण और रेखाचित्र

154. विनयमोहन शर्मा – कवि, प्रसादकृत आँसू और अन्य कृतियाँ आलोचना

155. विनयमोहन शर्मा  – हिन्दी को मराठी सन्तों की देन । – शोध

156. विनयमोहन शर्मा – शोध-प्रविधि – शोध

157. विनयमोहन शर्मा – व्यावहारिक समीक्षा । – शोध

158. विनयमोहन शर्मा  -हिन्दी गीत-गोविन्द – शोध

159. लक्ष्मीसागर वाष्र्णेय – आधुनिक हिन्दी-साहित्य – आलोचना

160. लक्ष्मीसागर वाष्र्णेय  -भारतेन्दु हरिश्चन्द्र । – आलोचना

161. लक्ष्मीसागर वाष्र्णेय  -बीसवीं शताब्दी : हिन्दी-साहित्य : नये सन्दर्भ आलोचना

162. लक्ष्मीसागर वाष्र्णेय  -फोर्ट विलियम कॉलेज – आलोचना

163. लक्ष्मीसागर वाष्र्णेय  -हिन्दी-साहित्य का इतिहास । – इतिहास

164. लक्ष्मीसागर वाष्र्णेय  -आधुनिक हिन्दी-साहित्य की भूमिका – इतिहास

165. धर्मवीर भारती  – गुनाहों का देवता [2011] – उपन्यास

166. धर्मवीर भारती – सूरज का सातवाँ घोड़ा[2010, 11, 15, 16] उपन्यास

167. धर्मवीर भारती – नदी प्यासी थी[2010,11] – नाटक

168. धर्मवीर भारती  -अन्धा युग [2011] – नाटक

169. धर्मवीर भारती – कहनी-अनकहनी

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170. धर्मवीर भारती – ठेले पर हिमालय – निबन्ध

171. धर्मवीर भारती – पश्यन्ती – निबन्ध

172. धर्मवीर भारती  – नीली झील – एकांकी

173. धर्मवीर भारती – मानव मूल्य और साहित्य – आलोचना

174. धर्मवीर भारती  -चाँद और टूटे हुए लोग – कहानी-संग्रह

175. वृन्दावनलाल वर्मा – मृगनयनी [2011, 13] – उपन्यास

176. विष्णु प्रभाकर – आवारा (UPBoardSolutions.com) मसीहा [2013, 15, 16] – जीवनी

177. भगवतीचरण वर्मा – चित्रलेखा – उपन्यास

178. मोहन राकेश – लहरों के राजहंस [2014,17] – नाटक

179. मोहन राकेश – आषाढ़ का एक दिन [2013] – नाटक

180. माखनलाल चतुर्वेदी – साहित्य देवता – निबन्ध-काव्य

181. सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’ । –  कुल्ली भाट

182. अमृतराय – कलम का सिपाही [2012, 15, 16, 17, 18] जीवनचरित

183. डॉ० रामविलास शर्मा – निराला की साहित्य-साधना – समालोचना

184. पाण्डेय बेचन – शर्मा ‘उग्र’ अपनी खबर (2009) – आत्मकथा

185. हरिवंशराय बच्चन – क्या भूलें क्या याद करू[2012,13,14,15, 17, 18] आत्मकथा

186. हरिवंशराय बच्चन – नीड़ का निर्माण फिर [2013, 15] – आत्मकथा

187. डॉ० रामकुमार वर्मा – पृथ्वीराज की आँखें [2009,14] – एकांकी

188. देवकीनन्दन खत्री – भूतनाथ (2017) – तिलिस्मी उपन्यास

189. सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन – ‘अज्ञेय शेखर : एक जीवनी [2011, 12, 13] – उपन्यास

190. सही०वा ‘अज्ञेय – आत्मनेपद (2013) – निबन्ध-संग्रह

191. चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी – उसने कहा था [2013,15] – कहानी

192. डॉ० नामवर सिंह – कविता के नये प्रतिमान[2013] – आलोचना

193. जैनेन्द्र कुमार – (UPBoardSolutions.com) त्यागपत्र [2013,14,16] – उपन्यास

194. राहुल सांकृत्यायन – मेरी लद्दाख यात्रा [2014, 15] – यात्रावृत्त

195. सत्येन्द्र नाथ दत्ता – तीर्थ सलिल [2014, 11, 18] – अनूदित काव्य

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196. सियारामशरण गुप्त – दैनिकी [2014, 15] – डायरी

197. फणीश्वरनाथ रेणु – मैला आँचल [2015,17] – उपन्यास

198. इलाचन्द्र जोशी – जहाज का पंछी – उपन्यास

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 6 केन किं वर्धते? (संस्कृत-खण्ड)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 6 केन किं वर्धते? (संस्कृत-खण्ड)

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अववरणों का ससन्दर्भ हिन्दी अनुवाद

प्रश्न 1.
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 6 केन किं वर्धते? (संस्कृत-खण्ड) img-2
उत्तर
[सुवचनेन = सुन्दर (मधुर) वचनों से। इन्दुदर्शनेन = चन्द्रमा के देखने से। रागः = प्रेम। श्रीः = लक्ष्मी, धन-सम्पत्ति। औचित्येन = उचित व्यवहार से। औदार्येणः = उदारता से। प्रभुत्वम् = प्रभुता। वैश्वानरः = अग्नि। अशौचेन = अपवित्रता से। अपथ्येन = अनुपयुक्त भोजन से, बदपरहेजी से। तृष्णा = (इच्छा) लालच।]

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के ‘संस्कृत-खण्ड’ के ‘केन किं वर्धते’ पाठ से उद्धृत है।

प्रसंग-इनमें बताया गया है कि किस वस्तु से व्यक्ति की क्या वस्तु वृद्धि प्राप्त करती है।

अनुवाद-मधुर वचन से मित्रता बढ़ती है। चन्द्रमा के दर्शन से समुद्र बढ़ता है। श्रृंगार से प्रेम बढ़ता है। विनय से गुण बढ़ता है। दान से यश बढ़ता है। परिश्रम से न-सम्पत्ति बढ़ती है। सत्य से धर्म बढ़ता है। रक्षा (पोषण) करने से उपवन बढ़ता है। सदाचार से विश्वास बढ़ता है। (UPBoardSolutions.com) अभ्यास से विद्या बढ़ती है। न्याय से राज्य बढ़ता है। उचित व्यवहार से बड़प्पन बढ़ता है। उदारता से प्रभुता बढ़ती है। क्षमा से तप बढ़ता है। पूर्वी वायु (पुरवैया) से बादल बढ़ता है। लाभ से लोभ बढ़ता है। पुत्र के दर्शन से हर्ष बढ़ता है। मित्र के दर्शन से प्रसन्नता बढ़ती है। बुरे वचनों से झगड़ा बढ़ता है। तिनकों से आगे बढ़ती है। नीच लोगों की संगति से दुष्टता बढ़ती है। उपेक्षा से शत्रु बढ़ जाते हैं। पारिवारिक झगड़े से दु:खे बढ़ता है। दुष्ट हृदय से दुर्दशा की वृद्धि होती है। अपवित्रता से दरिद्रता बढ़ती है। अनुचित भोजन से रोग बढ़ता है। असन्तोष से लालच बढ़ता है। बुरी आदत से वासना बढ़ती है।

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अतिलघु-उत्तरीय संस्कृत प्रकोत्तर

प्रश्न 1
मैत्री केन वर्धते? [2009,10,15]
उत्तर
सुवचनेन मैत्री वर्धते।

प्रश्न 2
गुणः केन वर्धते ?
उत्तर
गुणः विनयेन वर्धते।

प्रश्न 3
दानेन कः लाभः भवति ? या दानेन किं वर्धते ? [2017]
उत्तर
दानेन कीर्तिः (UPBoardSolutions.com) वर्धते।

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प्रश्न 4
श्रीः केन वर्धते? [2009, 16]
उत्तर
श्री: उद्यमेन वर्धते।

प्रश्न 5
विश्वासः केन वर्धते ?
या
सदाचारेण कः वर्धते?
उत्तर
विश्वासः सदाचारेण वर्धते।

प्रश्न 6
विद्या केन वर्धते ? [2011, 14, 16, 18]
उत्तर
विद्या अभ्यासेन वर्धते।

प्रश्न 7
अभ्यासेन किं वर्धते ? [2010, 14]
उत्तर
भ्यासेन विद्या वर्धते।

प्रश्न 8
उपेक्षया किम् वर्धते? [2018]
उत्तर
उपेक्षया रिपुः (UPBoardSolutions.com) वर्धते।।

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प्रश्न 9
तपः केन वर्धते? [2010, 13]
उत्तर
तपः क्षमया वर्धते।

प्रश्न 10
जलदः केन वर्धते ?
या
पूर्ववायुना किं वर्धते ?
उत्तर
जलदः पूर्ववायुना वर्धते।

प्रश्न 11
मित्रदर्शनेन किं वर्धते? [2017]
उत्तर
मित्रदर्शनेन आह्लादो वर्धते।

प्रश्न 12
नीचसङ्गेन का वर्धते ? [2013, 14]
या
दुश्शीलता केन वर्धते ?
उत्तर
नीचसङ्गेन दुश्शीलता वर्धते।

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प्रश्न 13
रिपुः केन वर्धते ? [2015]
उत्तर
रिपुः उपेक्षया (UPBoardSolutions.com) वर्धते।

प्रश्न 14
कुटुम्बकलहेन किं वर्धते ?
या
दुःखं केन वर्धते ?
उत्तर
कुटुम्बकलहेन दुःखं वर्धते।

प्रश्न 15
रोगः केन वर्धते ? [2010]
उत्तर
रोग: अपथ्येन वर्धते।

प्रश्न 16
असन्तोषेण का वर्धते ? [2010]
उत्तर
असन्तोषेण तृष्णा वर्धते।

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प्रश्न 17
शत्रुः कथं वर्धते ? ।
या
उपेक्षया किं वर्धते ?
उत्तर
उपेक्षया शत्रुः वर्धते।

प्रश्न 18
तृष्णा केन वर्धते ? [2009]
उत्तर
तृष्णा असन्तोषेण वर्धते।

प्रश्न 19
राज्यं केन वर्धते ?
या
न्यायेन कः वर्धते ?
उत्तर
न्यायेन राज्यं (UPBoardSolutions.com) वर्धते।

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प्रश्न 20
समुद्रः केन वर्धते ?
उत्तर
समुद्रः इन्दुदर्शनेन वर्धते।

प्रश्न 21
औदार्येण किं वर्धते ?
उत्तर
औदार्येण प्रभुत्वं वर्धते।

प्रश्न 22
सत्येन कः वर्धते ?
या
धर्मः केन वर्धते ? [2011, 14]
उत्तर
सत्येन धर्म: वर्धते।

प्रश्न 23
दुर्व्यसनेन किं वर्धते ?
उत्तर
दुर्व्यसनेन कलहः वर्धते।

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प्रश्न 24
कलहः केन वर्धते ? [2014, 18]
उत्तर
कलहः दुर्व्यसनेन वर्धते।

प्रश्न 25
इन्दुदर्शनेन कः वर्धते ? [2011, 12, 13, 14, 16]
उत्तर
इन्दुदर्शनेन समुद्रः वर्धते।

प्रश्न 26
विनयेन कः वर्धते ?
उत्तर
विनयेन गुण: वर्धते।

प्रश्न 27
सुवचनेन किं वर्धते ?
उत्तर
सुवचनेन मैत्री (UPBoardSolutions.com) बर्धते।

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प्रश्न 28
वैश्वानरः केन वर्धते ? [2009]
उत्तर
वैश्वानरः तृणेन बर्धते।

प्रश्न 29
तृणैः कः वर्धते ?
उत्तर
तृणैः वैश्वानर: वर्धते।

प्रश्न 30
पुत्रदर्शनेन कः वर्धते ? [2011,14,15]
उत्तर
पुत्रदर्शनेन हर्ष: वर्धते।

प्रश्न 31
दारिद्रयं केन वर्धते ?
उत्तर
दारिद्र्यम् अशौचेन वर्धते।

प्रश्न 32
लोभः केन वर्धते ? [2012, 14, 17]
उत्तर
लोभ: लाभेन (UPBoardSolutions.com) वर्धते।

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अनुवादात्मक

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए-
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 6 केन किं वर्धते? (संस्कृत-खण्ड) img-3

व्याकरणत्मक

प्रश्न 1
विनय, क्षमा और रिपु के चतुर्थी, पञ्चमी तथा षष्ठी विभक्तियों के तीनों वचनों में रूप लिखिए।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 6 केन किं वर्धते? (संस्कृत-खण्ड) img-4

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प्रश्न 2
चन्द्र, उद्यान, वायु, अग्नि और पुत्र के पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर
चन्द्र-इन्दुः, विधुः, शीतांशुः, सुधाकरः, निशाकरः, रजनीशः, दिनमणिः।
उद्यान-उपवनम्, वाटिका।
वायु-पवन:, समीरः, अनिलः।।
अग्नि-वह्निः, अनलः, पावकः, हुताशनः, दहनः।
पुत्र-आत्मजः, तनयः, सुतः, अर्भकः, सूनुः।

प्रश्न 3
तृतीया विभक्ति के प्रयोग के तीन मुख्य कारण बताइए। पाठ में किस कारण से तृतीया विभक्ति का प्रयोग हुआ है ?
उत्तर

  1. जिसकी सहायता से या जिसके द्वारा कार्य पूर्ण होता है, उसमें करण कारक तथा तृतीया विभक्ति होती है।
  2. ‘साथ’ का अर्थ रखने वाले ‘सह, (UPBoardSolutions.com) साकम्, सार्धम्’ शब्दों के योग में जिसके साथ क्रिया . होती है, उसमें तृतीया विभक्ति होती है।
  3. जिस अंग से शरीर के विकार का ज्ञान होता है, उसमें तृतीया विभक्ति होती है। उपर्युक्त कारणों में से प्रथम कारण से पाठ में तृतीया विभक्ति का प्रयोग हुआ है।

प्रश्न 4
निम्नलिखित पदों में विभक्ति एवं वचन बताइए-
व्यसनेन,
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 6 केन किं वर्धते? (संस्कृत-खण्ड) img-5

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प्रश्न 5
निम्नलिखित शब्दों का सन्धि-विच्छेद कीजिए-
सदाचारेण, दुश्शीलता।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 6 केन किं वर्धते (संस्कृत-खण्ड) img-1

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UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 21 लाला लाजपत राय (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 21 लाला लाजपत राय (महान व्यक्तित्व)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 8 Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 21 लाला लाजपत राय (महान व्यक्तित्व).

पाठ का सारांश

लाला लाजपत राय का जन्म फिरोजपुर जिले के ढोडिके गाँव में 28 जनवरी सन् 1865 ई० में हुआ। इनके पिता राधाकिशन स्कूल में अध्यापक और माता गुलाबी देवी थी।

लाला लाजपत राय ने अपने पिता से पढ़ने-लिखने का उत्साह पाया। सन् 1882 ई० में जब वे लाहौर कालेज में छात्र थे, आर्य समाज में शामिल हो गए। 23 वर्ष की अवस्था में ये सन् 1888 ई० में कांग्रेस में शामिल हुए और इन्होंने कांग्रेस का ध्यान जनता की गरीबी और निरक्षरता की ओर दिलाया।

लाला लाजपत राय की आस्था और विश्वास के कारण उन्हें पंजाब केसरी और शेरे पंजाब की उपाधि दी गई। ब्रिटिश सरकार की निर्मय आलोचना करने के कारण उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया। अँग्रेजों ने मई 1907 ई० में लाला जी को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया। कांग्रेस के भीतर और बाहर उन्हें कांग्रेस का योग्य नेता समझा जाता था। भारत का नेतृत्व करने और समर्थन पाने के लिए वे इंग्लैण्ड और यूरोप कई बार गए।

लाला लाजपतराय ने 30 अक्टूबर, 1928 को लाहौर में साइमन कमीशन का बहिष्कार करने वाली जनता का शान्तिपूर्ण ढंग से नेतृत्व किया। लाठियों के प्रहार के फलस्वरूप लाला जी को गंभीर चोटें (UPBoardSolutions.com) आईं और 16 नवम्बर, 1929 ई० में रात में दशा खराब होने से प्रातः उनकी मृत्यु हो गई।

लाला जी राजनैतिक गतिविधियों के अलावा सामाजिक सुधार कार्यक्रमों और शिक्षा के प्रसार के लिए भी सक्रिय थे। जनता के उत्थान के लिए वे शिक्षा को अनिवार्य मानते थे। वे हृदय से शिक्षा शास्त्री थे। उनका महिलाओं की समस्याओं को देखने का दृष्टिकोण प्रगतिशील था। सन् 1896 ई० में उत्तर भारत में भीषण अकाल के समय जनता को राहत पहुँचाने के कार्य में वे सबसे आगे थे। इसी प्रकार पंजाब में भूकम्प पीड़ितो को राहत पहुँचाने और उनकी सहायता में अग्रणी रहे। राहत कार्य के दौरान इन्होंने ‘सर्वेट्स ऑफ पीपुल सोसाइटी’ की स्थापना की। जिसके सदस्य देशभक्त थे और जिसका ध्येय जनसेवा था।

लाला लाजपतराय ने कई पुस्तकें लिखीं जैसे- ए हिस्ट्री ऑफ इण्डिया, महाराज अशोक, वैदिक ट्रैक्ट और अनहैप्पी इण्डिया। इन्होंने कई पत्रिकाओं की स्थापना और सम्पादन भी किया। देशवासियों के लिए उनका योगदान, त्याग और बलिदान चिरस्मरणीय रहेगा।

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अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1.
लाला लाजपत राय का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर :
लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी सन् 1865 ई० में फिरोजपुर जिले के ढोडिके गाँव में हुआ।

प्रश्न 2.
लाला लाजपत राय को कौन-सी उपाधि दी गई थी और क्यों?
उत्तर :
लाला लाजपत राय को आस्था और विश्वास के कारण पंजाब केसरी तथा शेरे पंजाब की उपाधि दी गई।

प्रश्न 3.
लाला लाजपत राय अंग्रेजों के विशेष निशाने पर क्यों रहते थे?
उत्तर :
ब्रिटिश सरकार की निर्भय आलोचना, अपने दृढ़ विश्वास और (UPBoardSolutions.com) भारतीय जनता में अपनी गहरी पैठ के कारण वे अंग्रेजों के विशेष निशाने पर रहते थे।

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प्रश्न 4.
लाला लाजपत राय का सामाजिक कार्यों में क्या योगदान रहा?
उत्तर :
लाला जी का सामाजिक कार्यों में बड़ा योगदान था। वे गरीबों की सहायता और शिक्षा के प्रसार की दिशा में सक्रिय रहे। अकाल और भूकम्प के समय पीड़ित जनता के लिए राहत कार्यों में वे आगे रहते थे। उन्होंने लोगों में राष्ट्रीयता की भावना और देशभक्ति की प्रेरणा भरने की कोशिश की। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं के अस्तित्व के लिए अपनी बचत से 40000 रुपये दान दिया।

प्रश्न 5.
लाला लाजपत राय की किन्हीं तीन रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर :
लाला लाजपत राय की रचनाओं के नाम ए हिस्ट्री ऑफ इण्डिया, महाराज अशोक और वैदिक ट्रैक्ट हैं।

प्रश्न 6.
“लाला लाजपत राय हृदय से शिक्षाशास्त्री थे।” पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
लाला लाजपत राय ने अति वंचित एवं पिछड़े लोगो के लिए एक शिक्षण संस्था की स्थापना की। इसके बाद इस तरह की कई संस्थाएँ खोली गई। इनके लिए उन्होनें अपनी बचत से 40,000 रुपया दान दिया। लाला लाजपत राय हृदय से शिक्षा शास्त्री थे। उनका विश्वास था कि जनता के उत्थान लिए शिक्षा अनिवार्य है।

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प्रश्न 7.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके)

  • लाला लाजपत राय की माता ने उन्हें धर्म की शिक्षा दी। (UPBoardSolutions.com)
  • लाला लाज़पत राय का विचार था कि जनता के उत्थान के लिए शिक्षा अनिवार्य है।
  • पंजाब में भूकम्प पीड़ितों के लिए राहत कार्य के लिए उन्होंने सर्वेट्स ऑफ पीपुल सोसाइटी की स्थापना की।
  • लाला लाजपत राय का सारा समय जन-कल्याण तथा सारा जीवन राष्ट्र की सेवा में बीता।

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UP Board Solutions for Class 6 History Chapter 5 छठी शताब्दी ई०पूँ० का भारत धार्मिक आन्दोलन

UP Board Solutions for Class 6 History Chapter 5 छठी शताब्दी ई०पूँ० का भारत धार्मिक आन्दोलन

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प्रश्न 1.
निम्नलिखित के विषय में लिखिए –
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 6 History Chapter 5 छठी शताब्दी ई०पूँ० का भारत धार्मिक आन्दोलन 1

प्रश्न 2.
त्रिरत्न और अष्टांगिक मार्ग क्या हैं ? यह किनसे सम्बन्धित हैं ? लिखिए।
उत्तर :
महावीर स्वामी के अनुसार त्रिरत्न निम्न हैं –

  1. सही बातों में विश्वास
  2. सही बातों को ठीक से समझना
  3. उचित कर्म। ये जैन धर्म से सम्बन्धित हैं।

अष्टांगिक मार्ग सरल मानवतापूर्ण व्यवहार के नियम हैं। गौतमबुद्ध के अनुसार अष्टांगिक मार्ग निम्न हैं –

  1. जीवन को सुचारु रूप से चलाने के लिए सही सोच होना
  2. सही बात और कार्य
  3. सत्य बोलना
  4. अच्छा कार्य करना
  5. अच्छे कार्य द्वारा जीविका अर्जित करना
  6. मानसिक और नैतिक उन्नति के लिए प्रयास करना
  7. अपने कार्य-व्यवहार पर हमेशा नजर रखना
  8. ज्ञान प्राप्ति के लिए ध्यान केंद्रित करना। ये बौद्ध धर्म से सम्बन्धित हैं।

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प्रश्न 3.
जैन और बौद्ध धर्म के सिद्धान्तों को लोगों ने क्यों अपनाया ?
उत्तर :
निम्नलिखित कारणों से जैन और बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को लोगों ने अपनाया।

  1. इन धर्मों के आने से शाकाहारी संस्कृति को बल मिला
  2. भारत की अहिंसावादी छवि इन्हीं के कारण हुई
  3. ये धर्म लोकतांत्रिक और उदार थे। संगठित धर्म पर जोर बढ़ने से इनका दूर-दूर तक प्रचार बढ़ा। चीन व दक्षिण-पूर्वी एशिया में भी इन्हें अपनाया गया (UPBoardSolutions.com)
  4. इनके संघों में महिलाओं को प्रवेश के साथ-साथ ऊँचा स्थान दिया गया
  5. जातक और हितोपदेश में कहानियों के माध्यम से उपदेशों को सरल भाव से लोगों तक पहुँचाया गया।

प्रश्न 4.
महावीर स्वामी द्वारा बताए गए पाँच महाव्रतों के बारे में लिखिए।
उत्तर :

  1. जीवों को न मारना।
  2. सच बोलना।
  3. चोरी न करना।
  4. अनुचित धन न जुटाना।
  5. इन्द्रियों को वश में रखना।

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प्रोजेक्ट वर्क –
नोट – विद्यार्थी स्वयं करें।

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