UP Board Solutions for Class 6 History Chapter 8 मौर्योत्तर काल में भारत की स्थिति व विदेशियों से सम्पर्क

UP Board Solutions for Class 6 History Chapter 8 मौर्योत्तर काल में भारत की स्थिति व विदेशियों से सम्पर्क

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 6 History. Here we have given UP Board Solutions for Class 6 History Chapter 8 मौर्योत्तर काल में भारत की स्थिति व विदेशियों से सम्पर्क

मानचित्र देखकर लिखिए –

प्रश्न 1.
उन देशों के नाम लिखिए जिन देशों से होकर रेशम का व्यापार होता था।
उत्तर :
मानचित्र के अनुसार- साइप्रस, सीरिया, इराक, ईरान, अफगानिस्तान, भारत व चीन गणतन्त्र से होकर रेशम का व्यापार होता था।

अभ्यास

प्रश्न 1.
शृंगवंश का संस्थापक कौन था?
उत्तर :
पुष्पमित्र शुंग

UP Board Solutions 

प्रश्न 2.
कण्व वंश के अन्तिम शासक का नाम बताइए।
उत्तर :
कण्व वंश का अन्तिम शासक सुशर्मन था।

प्रश्न 3.
सिमुक किस वंश का शासक था?
उत्तर :
सिमुक कण्व वंश का शासक था।

प्रश्न 4.
सातवाहन कालीन धर्म की क्या विशेषता थी?
उत्तर :
सातवाहन राज्य का केन्द्र आंध्र प्रदेश में था। सातवाहन राजाओं ने उत्तर एवं दक्षिण की कला तथा शिल्प से परिचित होने के कारण दोनों का लाभ उठाया। इनके समय में पत्थर की ठोस चट्टानों को काटकर चैत्यों तथा विहारों का निर्माण किया गया। इनमें कार्ले का चैत्य मंडप प्रसिद्ध है। इस चट्टान को (UPBoardSolutions.com) गहराई में काटकर बनाया गया है। यह विशाल वास्तुकला का उदाहरण है। इन्होंने सिक्के, छल्लेदार कुएँ, पक्की ईंट और लेखन कला को उत्तर के सम्पर्क से सीखा।

इस वंश के शासक वैदिक धर्म के अनुयायी थे। इन्होंने सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण अपनाया। बौद्ध भिक्षुओं को भी भूमि तथा ग्राम दान में दिए। चैत्य बौद्ध धर्म के प्रार्थना स्थल होते हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 5.
भारत के विदेशों से सम्पर्क के कारण व्यापार, पहनावा, ज्ञान विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में क्या बदलाव आया ?
उत्तर :
भारत का विदेशों से सम्पर्क के कारण व्यापार, पहनावा, ज्ञान-विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आए बदलाव निम्नलिखित हैं –

व्यापार – मध्य एशिया व रोमन साम्राज्य से सम्पर्क के कारण भारी मात्रा में सोना प्राप्त हुआ। काँच के बर्तन बनाने की तकनीक में प्रगति हुई। नगरीकरण चोटी पर पहुँच गया। (UPBoardSolutions.com) कनिष्क ने तक्षशिला, पुरुषपुर (पेशावर) और कनिष्कपुर आदि नगर बसाए। कुषाणों ने चीन से मध्य एशिया होते हुए रोमन साम्राज्य जाने वाले रेशममार्ग पर नियन्त्रण कर लिया, जिससे भारतीय व्यापार की वृद्धि हुई।

पहनावा – कुषाणों के प्रभाव के कारण भारत में पगड़ी, कुर्ती, पजामे, लम्बे जूते और लम्बे कोट का प्रचलन शुरू हुआ।

ज्ञान-विज्ञान और प्रौद्योगिकी – नाट्यमंच में पर्दा का प्रचलन विदेशियों के प्रभाव से हुआ। नए-नए शब्दों का आदान-प्रदान हुआ, जिससे व्याकरण समृद्ध हुआ। खगोल और ज्योतिषशास्त्र में प्रगति हुई। सप्ताह के दिनों को ग्रहों के नाम से पुकारना यूनानियों से सीखा। यूनानी औषध पद्धति के विषय में जानकारी हुई। कनिष्क के समय में चरक नामक चिकित्सक हुए। इन्होंने चरक संहिता में 600 से ज्यादा औषधियों के विषय में लिखा है। इसमें चिकित्सक के लिए मरीजों के प्रति निर्देश भी दिए गए हैं।

प्रश्न 6.
कुषाण कालीन कला की विशेषता का उल्लेख करिए।
उत्तर :
कुषाण शासन का भारतीय शिल्प और कला पर काफी प्रभाव पड़ा। कुषाणकाल की कला के दो प्रमुख केन्द्र मथुरा और गान्धार थे। मथुरा में लाल बलुआ पत्थर और गान्धार में लाल स्लेटी पत्थर की मूर्तियाँ गढ़ी जाती थीं। मथुरा की मूर्तियों में यूनानी शैली थी और उनमें भारतीय भाव और विचारों को (UPBoardSolutions.com) ध्यान में रखा गया, जबकि गान्धार शैली में मूर्तियों के कपड़ों में चुन्नटें और बालों का मुँघरालापन प्रदर्शित किया जाता था। कुषाण राजाओं ने सबसे ज्यादा स्वर्ण मुद्राएँ जारी कीं। उनकी स्वर्ण मुद्राएँ धातु की शुद्धता में गुप्त शासकों की स्वर्ण मुद्राओं से बेहतर थीं।

UP Board Solutions

प्रश्न 7.
विदेशियों ने भारत से क्या सीखा ? लिखिए।
उत्तर :
विदेशी आक्रमणकारियों के पास अपनी भाषा, लिपि और सुव्यवस्थित धर्म नहीं थे। उन्होंने संस्कृति के इन उपादानों को भारत से लिया। कनिष्क के शासनकाल में चीन, मध्य एशिया और अफगानिस्तान में बौद्ध धर्म का प्रचार किया गया। चीन से बौद्ध धर्म कोरिया और जापान पहुँचा। कनिष्क ने बुद्ध और। बोधिसत्व की प्रतिमाएँ विदेशों में भेजी। बौद्ध धर्म का नया रूप महायान कहलाया और विदेशों में बुद्ध की प्रतिमा की पूजा होने लगी।

प्रश्न 8.
भारतीय संस्कृति की ऐसी क्या विशेषताएं हैं, जिससे कि वह अन्य प्राचीन सभ्यताओं से । भिन्न है?
उत्तर :
भारतीय संस्कृति में अन्य देशों की संस्कृतियों को मिला लेने की अपूर्व क्षमता है, जिससे भारतीय संस्कृति आज भी विद्यमान है, जबकि अन्य प्राचीन सभ्यताएँ जैसे मेसोपोटामिया, मिश्र, यूनान एवं रोम विलुप्त हो चुकी हैं और उनके भौतिक अवशेष ही बचे हैं। इसका मुख्य कारण भारतीय संस्कृति में (UPBoardSolutions.com) सहिष्णुता, सामाजिक मेलजोल, लचीलापन, उदारवादिता व वसुधैव कुटुम्बकम् (पृथ्वी के सभी निवासी एक ही परिवार के सदस्य की तरह माने गए हैं) की ओर बढ़ना ही आदर्श माना गया है।

प्रश्न 9.
सही कथन के सामने (✓) तथा गलत कथन पर (✗) का निशान लगाइए –

(अ) कार्ले का चैत्य मण्डप कुषाणों ने बनवाया। (✗)
(ब) मिनाण्डर शक शासक था। (✗)
(स) भारत में सोने के सिक्के सबसे पहले कुषाण राजा ने चलाए। (✓)
(द) मथुरा एवं गान्धार कुषाण काल की कला के प्रमुख केन्द्र थे। (✓)

UP Board Solutions

प्रश्न 10.
रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए।

(अ) सातवाहन वंश के शासक वैदिक धर्म के अनुयायी थे।
(ब) कनिष्क ने शक संवत् चलाया।
(स) कण्व वंश के संस्थापक सुशर्मन थे।
(द) शक शासकों में रूद्रदामन प्रथम सबसे अधिक विख्यात शासक था।

प्रोजेक्ट वर्क –
नोट – विद्यार्थी स्वयं करें।

We hope the UP Board Solutions for Class 6 History Chapter 8 मौर्योत्तर काल में भारत की स्थिति व विदेशियों से सम्पर्क help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 6 History Chapter 8 मौर्योत्तर काल में भारत की स्थिति व विदेशियों से सम्पर्क, drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure

UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure (क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं)

पाठ्य – पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 16)

प्रश्न 1.
पदार्थ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
पदार्थ वह है जिसमें उपस्थित सभी कण समान रासायनिक प्रकृति के होते हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
समांगी और विषमांगी मिश्रणों में अन्तर बताएँ।
उत्तर-
समांगी मिश्रण – समांगी मिश्रण वह मिश्रण है जिनमें मिश्रित पदार्थों के अवयव समान रूप से मिले होते हैं, समांगी मिश्रण कहलाते हैं।
जैसे-नमक का विलयन, चीनी का विलयन।।
विषमांगी मिश्रण – विषमांगी मिश्रण वह मिश्रण है। जिनमें (UPBoardSolutions.com) मिश्रित पदार्थों के अवयव समान रूप से नहीं मिले होते विषमांगी मिश्रण कहलाते हैं।
जैसे- बालू और चीनी का मिश्रण।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 20)

प्रश्न 1.
उदाहरण के साथ समांगी एवं विषमांगी | मिश्रणों में विभेद कीजिए।
उत्तर-
समांगी प्रकृति – द्रव्य की वह स्थिति जिसमें सभी जगह गुण समरूप हों, समांगी प्रकृति कहलाती है। जैसे, चीनी का घोल सर्वत्र समान रूप से मीठा होता है।
अतः चीनी का घोल समांगी है।
विषमांगी प्रकृति – द्रव्य की स्थिति जिसमें एक अंश के गुण दूसरे से भिन्न हों, विषमांगी प्रकृति कहलाती है।
जैसे-मिट्टी युक्त पानी आदि।

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
विलयन, निलंबन और कोलॉइड एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं ?
उत्तर-
विलयन, निलंबन और कोलॉइड में निम्न प्रकार से अन्तर स्पष्ट किया जा सकता है
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure image - 1

प्रश्न 3.
एक संतृप्त विलयन बनाने के लिए 36 g सोडियम क्लोराइड को 100 g जल में 293 K पर घोला जाता है। इस तापमान पर इसकी सांद्रता प्राप्त करें।
उत्तर-
विलेय (सोडियम क्लोराइड) का द्रव्यमान = 36 g
विलायक (जल) का द्रव्यमान = 100 g
विलयन का द्रव्यमान = विलेय का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान = 36 g + 100 g = 136 g
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure image - 3

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 26)

प्रश्न 1.
पेट्रोल और मिट्टी का तेल (kerosene oil) जो कि आपस में घुलनशील हैं, के मिश्रण को आप कैसे पृथक् करेंगे? पेट्रोल तथा मिट्टी का तेल के क्वथनांकों में 25°C से अधिक का अन्तराल है।
उत्तर-
पेट्रोल और मिट्टी के तेल का पृथक्करण प्रभाजी आसवन विधि द्वारा किया जाता है। दोनों के मिश्रण को प्रभाजी आसवन स्तम्भ में ले जाते हैं फिर ताप को घटाकर उसे ठंडा कर (UPBoardSolutions.com) संपीडित किया जाता है जहाँ वाष्प अपने-अपने क्वथनांक के अनुसार पृथक् हो जाती है।

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
पृथक् करने की सामान्यविधियों के नाम
(i) दही से मक्खन
(ii) समुद्री जल से नमक
(iii) नमक से कपूर
उत्तर-
(i) दही से मक्खन अपकेन्द्रण द्वारा पृथक् किया जाता है।
(ii) जल से नमक वाष्पीकरण द्वारा पृथक् किया जाता है।
(iii) नमक से कपूर ऊर्ध्वपातन विधि द्वारा पृथक् किया जाता है।

प्रश्न 3.
क्रिस्टलीकरण विधि से किस प्रकार के मिश्रण को पृथक् किया जा सकता है।
उत्तर-
क्रिस्टलीकरण विधि से वे ठोस पदार्थ शुद्ध किये जा सकते हैं, जिनमें अन्य ठोस पदार्थ अशुद्धि के रूप में मौजूद होते हैं।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 27)

प्रश्न 1.
निम्न को रासायनिक और भौतिक परिवर्तनों में वर्गीकृत करें-
पेड़ों को काटना, मक्खन का एक बर्तन में (UPBoardSolutions.com) पिघलना, अलमारी में जंग लगना, जल का उबलकर वाष्प बनना, विद्युत तरंग का जल में प्रवाहित होना तथा उसका हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में विघटित होना, जल में साधारण नमक का घुलना, फलों से सलाद बनाना तथा लकड़ी और कागज का जलना।
उत्तर-
भौतिक परिवर्तन – पेड़ों को काटना, मक्खन का एक बर्तन में पिघलना, जल का उबलकर वाष्प बनना, जल में साधारण नमक का घुलना, फलों से सलाद बनाना।
रासायनिक परिवर्तन – अलमारी में जंग लगना, जल में विद्युतधारा का गुजरना तथा उसका हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में विघटित होना, कागज और लकड़ी का जलना।

प्रश्न 2.
अपने आस-पास की चीजों को शुद्ध पदार्थों या मिश्रण से अलग करने का प्रयत्न करें।
उत्तर-
ऑक्सीजन, कॉपर, ऐल्युमिनियम आदि शुद्ध पदार्थ हैं तथा वायु, शर्बत, पीतल आदि मिश्रण हैं।

अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ संख्या 30 – 33)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित को पृथक् करने के लिए आप किन विधियों को अपनाएँगे ?
(a) सोडियम क्लोराइड को जल के विलयन से पृथक् करने में।
(b) अमोनियम क्लोराइड को सोडियम क्लोराइड तथा अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण से पृथक् करने में।
(c) धातु के छोटे टुकड़े को कार के इंजन ऑयल से पृथक् करने में।
(d) दही से मक्खन निकालने के लिए।
(e) जल से तेल निकालने के लिए।
(f) चाय से चाय की पत्तियों को पृथक करने में।
(g) बालू से लोहे की पिनों को पृथक् करने में।
(h) भूसे से गेहूँ के दानों को पृथक् करने में।
(i) पानी में तैरते हुए महीन मिट्टी के कण को पानी से अलग करने के लिए।
(j) पुष्प की पंखुड़ियों के निचोड़ से विभिन्न रंजकों को पृथक् करने में।
उत्तर-
(a) वाष्पीकरण विधि
(b) ऊर्ध्वपातन प्रक्रम
(c) छानने की क्रिया,
(d) अपकेन्द्रीकरण,
(e) कीप-पृथक्करण,
(f) छानने की क्रिया,
(g) चुम्बकीय पृथक्करण,
(h) विनोइंग द्वारा,
(i) निथारने की क्रिया
(j) क्रोमेटोग्राफी प्रक्रम द्वारा।

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
चाय तैयार करने के लिए आप किन-किन चरणों का प्रयोग करेंगे?
विलयन, विलायक, विलेय, घुलना, घुलनशील, अघुलनशील, घुलेय, (फिल्ट्रेट) तथा अवशेष शब्दों का प्रयोग करें।
उत्तर-
चाय बनाते समय हम निम्नलिखित चरणों का प्रयोग करेंगे–
चरण-1 : एक पतीली में थोड़ा पानी (विलायक) गर्म करें।
चरण-2 : एक केतली में थोड़ी चाय-पत्तियाँ (विलेय) डालें।
चरण-3 : उबलते पानी को केतली में डाल दें और पत्तियों को कुछ देर फूलने दें। यह एक विलयन में बदल जाएगा।
चरण-4 : एक कप में चीनी (विलेय) डालें । चरण-5 : विलयन को केतली में हिलाएँ।
चरण-6 : छलनी से छानकर विलयन को कप में डालें। दो छोटे चम्मच दूध डालें। चम्मच से मिलाएँ। अब चाय तैयार है। चाय की पत्तियाँ (अवशेष) छलनी में रह जाएँगी जबकि चाय (छना हुआ भाग) विलयन में घुल जाएगी। चीनी और दूध घुलनशील विलेय हैं जबकि चाय की पत्तियाँ अघुलनशील विलेय हैं।

प्रश्न 3.
प्रज्ञा ने तीन अलग-अलग पदार्थों की घुलनशीलताओं को विभिन्न तापमान पर जाँचा तथा नीचे दिए गए आँकड़ों को प्राप्त किया। प्राप्त हुए परिणामों को 100 g जल में विलेय पदार्थ की मात्रा, जो संतृप्त विलयन बनाने हेतु पर्याप्त है, निम्नलिखित तालिका में दर्शाया गया है
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure image - 4
(a) 50 g जल में 313 K पर पोटैशियम नाइट्रेट के संतृप्त विलयन को प्राप्त करने हेतु कितने ग्राम पोटैशियम नाइट्रेट की आवश्यकता होगी ?
(b) प्रज्ञा 358 K पर पोटैशियम क्लोराइड को एक संतृप्त विलयन तैयार करती है और विलयन को कमरे के तापमान पर ठंडा होने के लिए छोड़ देती है। जब विलयन ठंडा होगा तो वह क्या अवलोकित करेगी ? स्पष्ट करें।
(c) 293 K पर प्रत्येक लवण की घुलनशीलता का परिकलन करें। इस तापमान पर कौन-सा लवण सबसे अधिक घुलनशील होगा?
(d) तापमान में परिवर्तन से लवण की घुलनशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
(a) तालिका के अनुसार, 313 K पर 100 gm जल में 62 gm पोटैशियम नाइट्रेट संतृप्त विलयन बनाने के लिए घोला है।
अतः 50 gm जल में इसका संतृप्त विलयन बनाने के लिए [latex]\frac { 50 x 62 }{ 100 }[/latex] = 31gm पोटैशियम नाइट्रेट घोलना पड़ेगा।
(b) जब पोटैशियम क्लोराइड के 353 K (80°C) पर संतृप्त घोल को कमरे के तापमान (293 K या 20°C) तक ठंडा किया गया तो उसकी विलेयता घट जाती है और इसके क्रिस्टल पात्र की तली पर इकट्ठा हो जायेंगे।
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure image - 5
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure image - 6
(d) किसी भी पदार्थ की घुलनशीलता तापमान के बढ़ने से बढ़ जाती है।

UP Board Solutions

प्रश्न 4.
निम्नलिखित की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए
(a) संतृप्त विलयन
(b) शुद्ध पदार्थ
(c) कोलाइड
(d) निलम्बने।
उत्तर-
(a) संतृप्त विलयन – किसी दिए हुए तापमान पर जब उस द्रव में और अधिक विलेय पदार्थ न घुल सके उसे संतृप्त घोल कहते हैं।
उदाहरण- कक्ष ताप (20°C) पर 50 mL पानी एक बीकर में लो। अब इसमें सोडियम क्लोराइड (नमक) थोड़ा-थोड़ा करके डालो और घोल लो। ध्यान रहे कि नमक तली में न रहे। इसी प्रकार नमक डालो और हिलाओ। एक स्थिति ऐसी आ जाती है कि और पदार्थ (नमक) घुलना बन्द हो जाता है। यही कक्ष ताप पर संतृप्त विलयन है।
(b) शुद्ध पदार्थ – वे वस्तुएँ जिनका दिए गए तापमान पर रंग-रूप, संरचना, स्वाद व स्वभाव एक समान रहे और उसके हर भाग में संरचना समान हो और उसे सरल
भौतिक विधियों द्वारा और सरल पदार्थों में विभाजित न किया जा सके उसे शुद्ध पदार्थ कहते हैं।
एक शुद्ध पदार्थ या तो तत्त्व होगा या फिर यौगिक।
उदाहरण- सोना, चाँदी, सोडियम, पोटैशियम, कार्बन डाइऑक्साइड आदि शुद्ध पदार्थ हैं।
(c) कोलाइड – यह एक ऐसा विषमांगी मिश्रण है। जिसमें विलेय व विलायक दोनों के कण समान रूप से फैले होते हैं और अधिक देर तक रखने पर भी कण नीचे नहीं बैठते। क्योंकि इनका आकार 1 nm से 100 nm के बीच होता है। ये कोलाइडी कण परिक्षेपण माध्यम में से गुजरने वाले दृश्य प्रकाश का प्रकीर्णन कर देते हैं।
उदाहरण- दूध, स्याही, धुंध, रक्त आदि।
(d) निलम्बन – निलम्बन एक ऐसा विषमांगी मिश्रण है जिसमें विलायक में विलेय पदार्थ घुलता नहीं है और उसके कणों को नंगी आँखों से भी देखा जा सकता है। (UPBoardSolutions.com) इसके कणों का आकार 10-5 cm से भी ज्यादा होता है। अधिक देर बिना हिलाए रखने पर कण नीचे बैठ जाते हैं।
उदाहरण- जैसे-चॉक के पाउडर को पानी में विलयन।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से प्रत्येक को समांगी और विषमांगी मिश्रणों में वर्गीकृत करें-सोडा जल, लकड़ी, बर्फ, वायु, मिट्टी, सिरका, छन्ति चाय।
उत्तर-
समांगी मिश्रण – सोडा जल, सिरका, छनित चाय, बर्फ।
विषमांगी मिश्रण – मिट्टी, लकड़ी।

प्रश्न 6.
आप किस प्रकार पुष्टि करेंगे कि दिया हुआ रंगहीन द्रव शुद्ध जल है?
उत्तर-
रंगहीन तरल पदार्थ किसी भी भौतिक विधि द्वारा और अधिक सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता यदि इसे वाष्पित किया जाए तो शेष कुछ नहीं बचता इसलिए दिया गया तरल शुद्ध पदार्थ है।
दिए गए तरल का विद्युत विच्छेदन करने पर हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन आयतन के अनुसार 2 : 1 के अनुपात में प्राप्त होती है अतः दिया गया तरले जल है जो एक यौगिक है। दिया गया तरल वायुमण्डलीय दाब पर 373 K पर उबलने लगता है जो कि शुद्ध जल का क्वथनांक है अतः दिया गया तरल शुद्ध जल है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-सी वस्तुएँ शुद्ध पदार्थ हैं ?
(a) बर्फ
(b) दुध
(c) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
(d) लोहा
(e) कैल्सियम ऑक्साइड
(f) पारा
(g) ईंट
(h) लकड़ी
(i) वायु।
उत्तर-
निम्न शुद्ध पदार्थ’ हैं-
(1) बर्फ
(2) लोहा
(3) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
(4) कैल्सियम ऑक्साइड
(5) पारा

UP Board Solutions

प्रश्न 8.
निम्न मिश्रणों में से विलयन की पहचान करो
(a) मिट्टी
(b) समुद्री जल
(c) वायु
(d) कोयला
(e) सोडा जल।
उत्तर-
विलयन-
(1) समुद्री जल
(2) वायु
(3) सोडा जल

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से कौन टिण्डल प्रभाव को प्रदर्शित करेगा?
(a) नमक का घोल
(b) दूध
(c) कॉपर सल्फेट का विलयन
(d) स्टार्च विलयन
उत्तर-
दूध और स्टार्च विलयन ‘टिंडल प्रभाव दिखाएँगे।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित को तत्त्व, यौगिक तथा मिश्रण में वर्गीकृत करें
(a) सोडियम
(b) मिट्टी
(c) चीनी का घोल
(d) चाँदी
(e) कैल्सियम कार्बोनेट
(f) टिन
(g) सिलिकन
(h) कोयला
(i) वायु
(j) साबुन
(k) मीथेन
(l) कार्बन डाइऑक्साइड
(m) रक्त।
उत्तर-
(a) तत्त्व
(b) मिश्रण
(c) यौगिक
(d) तत्त्व
(e) मिश्रण
(f) यौगिक
(g) मिश्रण
(h) मिश्रण
(i) तत्त्व
(j) तत्त्व
(k) तत्त्व
(l) यौगिक
(m) यौगिक।

UP Board Solutions

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में से कौन-कौन से परिवर्तन रासायनिक हैं ?
(a) पौधों की वृद्धि
(b) लोहे में जंग लगना
(c) लोहे के चूर्ण तथा बालू को मिलाना
(d) खाना पकाना।
(e) भोजन का पाचन
(f) जल से बर्फ बनना।
(g) मोमबत्ती का जलना।
उत्तर-
लोहे पर जंग लगना, भोजन का पकना, भोजन का पचना और मोमबत्ती का जलना-रासायनिक परिवर्तन हैं।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विलयन क्या है ?
उत्तर-
दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण विलयन कहलाता है।

प्रश्न 2.
जलीय विलयन क्या है ?
उत्तर-
विलेय का जल में विलयन, जलीय विलयन कहलाता है।

प्रश्न 3.
संतृप्त विलयन की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
वह विलयन जिसमें किसी ताप पर विलेय की अधिकतम मात्रा घुली हो संतृप्त विलयन कहलाता है।

प्रश्न 4.
विलयन की सान्द्रता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
विलेय की मात्रा जो विलायक या विलयन की इकाई मात्रा या इकाई आयतन में घुली होती है, विलयन की सान्द्रता कहलाती है।

प्रश्न 5.
कोलाइड काफी स्थायी होते हैं। उस प्रक्रम का (UPBoardSolutions.com) नाम बताइये जिससे आप कोलाइड विलयन के अवयवों को पृथक् कर सकते हैं ?
उत्तर-
अपकेन्द्रीकरण द्वारा कोलाइड विलयन के अवयवों को पृथक् कर सकते हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 6.
किस कारक पर आधारित कोई विलयन तनु, सान्द्र अथवा संतृप्त कहलाता है ?
उत्तर-
उसमें उपस्थित विलेय की मात्रा पर आधारित कोई विलयन तनु, सान्द्र अथवा संतृप्त कहलाता है।

प्रश्न 7.
निम्न में से समांगी मिश्रण बताइएलकड़ी, चीनी का जलीय घोल, मिट्टी मिला जल।
उत्तर- चीनी का जलीय घोल।

प्रश्न 8.
केरोसिन तथा जल के मिश्रण को पृथक करने का सिद्धान्त बताइये।
उत्तर-
आपस में नहीं मिलने वाले द्रव अपने घनत्व के अनुसार विभिन्न परतों में पृथक् हो जाते हैं।

प्रश्न 9.
उस प्रक्रम का नाम बताइये जिसे आप जल और ऐल्कोहॉल के मिश्रण को पृथक् करने के लिए प्रयोग करेंगे ?
उत्तर-
ऐल्कोहॉल और जल के मिश्रण को प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् किया जा सकता है।

प्रश्न 10.
30-50 K से अधिक क्वथनांक में अन्तर वाले मिश्रणीय द्रवों को पृथक् करने की विधि का नाम बताइए।
उत्तर-
साधारण आसवन।

प्रश्न 11.
चीनी के संतृप्त विलयन का ताप 5°C `बढ़ाने पर क्या होगा ?
उत्तर-
चीनी के संतृप्त विलयन का ताप 5°C बढ़ाने पर विलयन असंतृप्त हो जायेगा।

प्रश्न 12.
दो अघुलनशील द्रवों को आप किस तकनीक से पृथक् करेंगे ?
उत्तर-
दो अघुलनशील द्रवों को पृथक्करण कीप द्वारा पृथक् करेंगे।

प्रश्न 13.
किसी कोलायडी विलयन में उसके कणों को आकार क्या होगा ?
उत्तर-
कोलाइडी विलयन में कणों का आकार 10-7 cm तथा 10-5 cm के बीच होता है।

प्रश्न 14.
ऊर्ध्वपातन पदार्थ क्या हैं ?
उत्तर-
वह पदार्थ जो गर्म करने से ठोस अवस्था से सीधे गैसीय अवस्था में बदल जाते हैं ऊर्ध्वपातन पदार्थ कहलाते हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 15.
दो ऊर्ध्वपातन पदार्थों के नाम बताइये।
उत्तर-
कपूर और अमोनियम क्लोराइड।

प्रश्न 16.
लोहे की पिन लकड़ी के बुरादे में मिल गयी है, इन्हें कैसे अलग करेंगे? ।
उत्तर-
बुरादे में मिली लोहे की पिनों को चुम्बक द्वारा अलग करेंगे।

प्रश्न 17.
वायु के विभिन्न घटक किस प्रक्रम द्वारा अलग किये जाते हैं ?
उत्तर-
वायु के विभिन्न घटक प्रभाजी आसवन विधि द्वारा अलग किये जाते हैं।

प्रश्न 18.
तन्यता क्या है ?
उत्तर-
धातुएँ खींचने पर तार में बदल जाती हैं, इसे तन्यता कहते हैं।

प्रश्न 19.
टिंडल प्रभाव क्या है ?
उत्तर-
द्रव या गैस में निलम्बित पदार्थ के कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन टिंडल प्रभाव कहलाता है।

प्रश्न 20.
कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पायी जाने वाली धातु का नाम लिखिए।
उत्तर-
कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पायी जाने वाली धातु पारा है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आसवन को परिभाषित कीजिए। आसवन से किस प्रकार के मिश्रणों को पृथक् किया जा सकता है?
उत्तर-
आसवन, द्रव को गर्म करके वाष्प बनाने और तत्पश्चात् वाष्प को ठंडा करके पुनः द्रव प्राप्त करने का प्रक्रम है। आसवन को विलेय अवाष्पशील ठोसों से द्रव को पृथक् करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 2.
क्रिस्टलीकरण प्रक्रम क्या है ? यह किस प्रकार उपयोगी है ?
उत्तर-
संतृप्त विलयन में विलेय की अधिकतम मात्रा घुली होती है। अगर विलेय की मात्रा संतृप्त-स्तर से बढ़ जाये तो विलेय की संतृप्त स्तर से अधिक मात्रा अविलेय या क्रिस्टल के रूप में आ जाती है।
अतः संतृप्त विलयन से क्रिस्टल (UPBoardSolutions.com) बनने की प्रक्रिया क्रिस्टलीकरण कहलाती है।
उपयोग- यदि कोई पदार्थ ठोस अवस्था में होता है। और उसमें अन्य कोई ठेस अशुद्धि के रूप में पाया जाता है, तब क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया प्रयोग की जाती है।

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
5 g विलेय को 40 g जल में घोला गया। है। विलयन की द्रव्यमान प्रतिशतता क्या है?
उत्तर-
विलयन का द्रव्यमान = विलेय का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान = 5 g + 40 g = 45 g
विलयन की द्रव्यमान प्रतिशतता
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure image - 7

प्रश्न 4.
कोलाइडल विलयन के दो लक्षण लिखिए।
उत्तर-
कोलाइडल विलयन के लक्षण|
(i) कोलाइडी विलयन समांगी दिखाई देता है, परन्तु वास्तव में वह विषमांगी होता है।
(ii) कोलाइडी विलयन में कणों का आकार वास्तविक विलयन से बड़ा परन्तु निलम्बन से छेटा होता है। वह व्यास में 1 nm और 100 nm के बीच होता है।

प्रश्न 5.
मिश्रणीय तथा अमिश्रणीय द्रवों में अन्तर कीजिए।
उत्तर-
मिश्रणीय द्रव-दो या दो से अधिक अमिश्रणीय द्रवों का मिश्रण विभिन्न परतों में पृथक् हो जाता है जिनकी पृथकन सीमाएँ स्पष्ट होती हैं।
अमिश्रणीय द्रव- दो या दो से अधिक मिश्रणीय द्रवों का मिश्रण विभिन्न परतों में पृथक् नहीं होता है और समांगी विलयन बनाते हैं।

प्रश्न 6.
मिश्रणों के प्रकारों को उचित उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर-
अवयवों के मिश्रित होने के आधार पर मिश्रण दो प्रकार के हैं-
(i) समांगी मिश्रण
(ii) विषमांगी मिश्रण।

(i) समांगी मिश्रण : वह मिश्रण जिनमें मिश्रित पदार्थों के अवयव समान रूप से मिले होते हैं समांगी मिश्रण कहलाते हैं, जैसे चीनी को विलयन, नमक का विलयन ।
(ii) विषमांगी मिश्रण : वह मिश्रण जिनमें मिश्रित पदार्थों के अवयव समान रूप से नहीं मिले होते विषमांगी मिश्रण कहलाते हैं, जैसे बालू और चीनी का मिश्रण।

UP Board Solutions

प्रश्न 7.
टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect) क्या हैं ?
उत्तर-
टिंडल प्रभाव : जो कोलाइडल कण प्रकाश को एक ओर बिखेरते हैं, उसे टिंडल प्रभाव कहते हैं।
अगर प्रकाश किरण-पुंज को कोलाइड विलयन से गुजारा जाए व प्रकाश किरण के लम्बवत् सूक्ष्मदर्शी रखकर देखा जाए तो प्रकाश किरण का पथ दिखाई देने लगता है।
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure image - 8

प्रश्न 8.
आप किसी निलम्बन तथा कोलाइडल में अन्तर किस प्रकार करेंगे ? प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
निलम्बन तथा कोलाइड में अन्तर निम्नलिखित हैं-
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure image - 9

प्रश्न 9.
मिश्रण के घटकों को अलग करने की आवश्यकता क्यों पड़ती है ?
उत्तर-
मिश्रण के घटकों को अलग करने की आवश्यकता निम्न कारणों से है :

  1. अवांछित घटक को दूर करने के लिए।
  2. किसी हानिकारक घटक को दूर करने के लिए।
  3. पदार्थ का शुद्ध नमूना प्राप्त करने के लिए।
  4. किसी लाभप्रद घटक को प्राप्त करने के लिए।

प्रश्न 10.
मिश्रणों के घटकों को पृथक् करने के लिए प्रयोग की जाने वाली सामान्य विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर-
मिश्रणों के घटकों को पृथक् करने के लिए। प्रयोग की जाने वाली सामान्य विधियाँ निम्नलिखित हैं :

  1. छानना
  2. चुम्बक द्वारा अलग करना
  3. हाथ से चुनना
  4. आसवन विधि
  5. अपकेन्द्रन विधि
  6. वाष्पीकरण
  7. ऊर्ध्वपातन की प्रक्रिया द्वारा।

UP Board Solutions

प्रश्न 11.
मिश्रण एवं यौगिक में अन्तर बताइए।
उत्तर-
यौगिक एवं मिश्रण में निम्नलिखित अन्तर है
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure image - 10

प्रश्न 12.
क्रोमैटोग्राफी का उपयोग करकेनीली-काली स्याही में उपस्थित राइ को कैसे पृथक् करोगे ?
उत्तर-

  1. फिल्टर पेपर की एक पतली और लम्बी पट्टी (Strip) लें। इसके निचले किनारे से 3 cm ऊपर पेंसिल से एक रेखा खींचें।
  2. उस रेखा के बीच में स्याही की एक बूंद रखें। इसे सूखने दें।
  3. जार में जल लें, उसमें हम फिल्टर पेपर को इस प्रकार रखें कि वह जल की सतह से ठीक ऊपर रहे।
  4. जैसे ही जल फिल्टर पेपर पर ऊपर की दिशा की ओर अग्रसर होता है यह डाई के कणों को भी अपने साथ ले जाता है। प्रायः डाइ दो या दो से अधिक (UPBoardSolutions.com) रंगों का मिश्रण होता है। रंग वाला घटक जो कि जल में अधिक घुलनशील है, तेजी से ऊपर उठता है और इस प्रकार, रंगों का पृथक्करण हो जाता है।

प्रश्न 13.
कैल्सियम कार्बोनेट को गर्म करने पर कैल्सियम ऑक्साइड तथा कार्बन डाइऑक्साइड प्राप्त होते हैं।
(a) क्या यह भौतिक या रासायनिक परिवर्तन है?
(b) उपर्युक्त अभिक्रिया में प्राप्त उत्पादों से क्या तुम एक अम्लीय तथा एक क्षारीय विलयन बना सकते हो? यदि हाँ तो रासायनिक अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर-
(a) यह एक रासायनिक परिवर्तन है। (b) हम अम्लीय तथा क्षारीय विलयन बना सकते हैं:
(i) CaO + H2O → Ca(OH)2 (क्षारीय विलयन)
(ii) CO2 + H2O → HaCO3 (अम्लीय विलयन)

UP Board Solutions

प्रश्न 14.
भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन की परिभाषा उदाहरण सहित दीजिए।
उत्तर-
भौतिक परिवर्तन : वह परिवर्तन जिसमें पदार्थ के संघटन में कोई परिवर्तन नहीं होता है भौतिक परिवर्तन कहलाता है। जैसे-जल को बर्फ या भाप में बदलना, विद्युत बल्ब का चमकना।
रासायनिक परिवर्तन : वह परिवर्तन जिसमें पदार्थ के संघटन में परिवर्तन होता है, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है। जैसे ईंधन का जलना, लोहे (UPBoardSolutions.com) का जंग लगना।
भौतिक परिवर्तन में नया पदार्थ उत्पन्न नहीं होता, केवल पदार्थ के भौतिक गुणों में परिवर्तन होता है, लेकिन रासायनिक परिवर्तन में नया पदार्थ बनता है और पदार्थ के रासायनिक गुणों में परिवर्तन होता है, किसी पदार्थ के रासायनिक गुण उसके रासायनिक संघटन पर निर्भर करते हैं।

प्रश्न 15.
निम्न को भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन में वर्गीकृत करें :
(a) काँच का पिघलना
(b) फूल से फल बनना
(c) अगरबत्ती का जलना
(d) रोटी का पकना
(e) कपड़े का फटना
(f) बादलों का बनना।
उत्तर-
(a) काँच का पिघलना – भौतिक परिवर्तन
(b) फूल से फल बनना – रासायनिक परिवर्तन
(c) अगरबत्ती का जलना – रासायनिक परिवर्तन
(d) रोटी का पकना – रासायनिक परिवर्तन
(e) कपड़े का फटना – भौतिक परिवर्तन
(f) बादलों का बनना – भौतिक परिवर्तन।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विलेय और विलायक की अवस्था के आधार पर विलयनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
विलेय व विलायक की अवस्था के आधार पर विलयन निम्न प्रकार के हैं :
(i) ठोस का दूर्व में विलयन – जैसे चीनी का जल में विलयन (शर्बत), टिंचर आयोडीन। [आयोडीन (ठोस) का ऐल्कोहॉल (द्रव) में विलयन ।
(ii) गैस का द्रव में विलयन – जैसे ठंडे पेय जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड (गैस) जल द्रव में घुली होती है।
(iii) गैस का गैस में विलयन – जैसे वायु जिसमें ऑक्सीजन (21%) व नाइट्रोजन (78%) मिले होते हैं।
(iv) ठोस का ठोस में विलयन – जैसे मिश्र धातुएँ (Alloys)। पीतल में जिंक लगभग 30% व कॉपर लगभग 70% होता है।

प्रश्न 2.
निलम्बन, वास्तविक विलयन व कोलाइडल विलयन को उदाहरण देते हुए परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
जब किन्हीं दो पदार्थों का घोल बनता है, तब विलेय के कण परिक्षेपण कण’ (Dispersed particles) व विलायक ‘परिक्षिप्त माध्यम’ (Dispersion medium) कहलाता है।
परिक्षिप्त माध्यम में परिक्षेपण कणों के आकार के आधार पर विलयन तीन प्रकार के हैं-

(i) वास्तविक विलयन : जब परिक्षिप्त माध्यम में परिक्षेपण कणों का व्यास 10-8 सेमी होता है तो परिक्षेपण कण परिक्षिप्त माध्यम में दिखाई नहीं देते। इस प्रकार का विलयन वास्तविक विलयन कहलाता है। उदाहरण- जल में नमक या चीनी का घोल। वास्तविक विलयन में परिक्षेपण कणों को सूक्ष्मदर्शी द्वारा नहीं देखा जा सकता।

(ii) कोलाइडल विलयन : जब परिक्षिप्त माध्यम में परिक्षेपण कणों का व्यास 10-7 से 10-5 सेमी होता है। तो विलयन कोलाइडल विलयन कहलाता है।
उदाहरण- दूध, रक्त, टूथपेस्ट। कोलाइडल विलयन में परिक्षेपण कणों को आँखों द्वारा नहीं देखा जा सकता, लेकिन सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखा जा सकता है।

(iii) निलम्बन : जब परिक्षिप्त माध्यम में परिक्षेपण कणों का व्यास 10-5 सेमी या उससे अधिक होता है तो इसे निलम्बन कहते हैं। निलम्बन में परिक्षेपण कणों को (UPBoardSolutions.com) परिक्षिप्त माध्यम में तैरते हुए आँख द्वारा देखा जा सकता। है।
उदाहरण- जल में मिट्टी या बालू का घोल, जल में चॉक का घोल।।

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
(i) विलयन को परिभाषित कीजिए। जब 15 g NaCl को 200 g जल में घोलकर विलयन तैयार किया जाता है, तो NaCl की द्रव्यमान प्रतिशतता परिकलित कीजिए।
(ii) वास्तविक विलयन से विलेय के कणों को पृथक् करना क्यों असम्भव है ?
(iii) तापमान में परिवर्तन से लवण की घुलनशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
(i) विलयन : दो या अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण विलयन कहलाता है।
दिया है : NaCl (विलेय) की मात्रा = 15 g
जल (विलायक) की मात्रा = 200 g
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure image - 11
(ii) वास्तविक विलयन में विलेय के कणों को पृथक् करना असंभव है, क्योंकि वे विलायक के साथ समांगी मिश्रण बनाते हैं।
(iii) तापमान बढ़ाने पर लवण की घुलनशीलता बढ़ जाती है और घटाने पर कम हो जाती है।

प्रश्न 4.
रासायनिक संघटन के आधार पर शुद्ध पदार्थों के प्रकार का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
रासायनिक संघटन के आधार पर शुद्ध पदार्थ दो प्रकार के हैं :
(i) तत्त्व (Element) एवं
(ii) यौगिक (Compound)

(i) तत्त्व : रॉबर्ट बॉयल पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने सन् 1661 में ‘तत्त्व’ शब्द का प्रयोग किया। एंटोनी लॉरेंट लवाइजिए (Antoine Laurent Lavoisier) ने तत्त्व (UPBoardSolutions.com) की परिभाषा सर्वप्रथम निम्न प्रकार दी :
“तत्त्व पदार्थ का वह मूल रूप है जिसे रासायनिक क्रिया द्वारा अन्य सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता।” जैसे-लोहा, ताँबा, चाँदी ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन आदि।

(ii) यौगिक : ‘वह पदार्थ जो दो या अधिक तत्त्वों के किसी निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोजन करने से बनता है।”
उदाहरणार्थ
(i) जल एक यौगिक है जो हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन के 1 : 8 के द्रव्यमान-अनुपात में संयोजन करने पर बनता है।
(ii) उसी तरह कार्बन डाइऑक्साइड एक यौगिक है जो कार्बन व ऑक्सीजन के 3 : 8 के द्रव्यमान अनुपात में संयोजन करने से बनती है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित मिश्रण के अवयवों को पृथक् करने की विधि बताइये :
सल्फर + रेत + चीनी + आयरन रेतन।
उत्तर-
इस मिश्रण के चार अवयव हैं-सल्फर, रेत, चीनी तथा आयरन रेतन। मिश्रण के ऊपर से एक चुम्बक को कई बार चलाते हैं। आयरन रेतन, चुम्बक द्वारा आकर्षित हो जाती है। वह चुम्बक पर चिपक जाती है और पृथक् हो जाती है।
चीनी, गंधक तथा रेत के शेष मिश्रण को पानी में डालकर विलोडन करते हैं। इससे जल में चीनी घुल जाती है। छानने पर छनित्र में चीनी का विलयन प्राप्त होता है। छनित्र को वाष्पित करके चीनी प्राप्त की जा सकती है। अवशेष में सल्फर तथा रेत होते हैं।
सल्फर तथा रेत के मिश्रण को कार्बन डाइसल्फाइड के साथ हिलाते हैं जिससे सल्फर, कार्बन डाइसल्फाइड में घुल जाता है और रेत बिना घुले रहता है। छानने पर, सल्फर विलयन के रूप में छनित्र में प्राप्त होती है। कार्बन डाइसल्फाइड के वाष्पन से सल्फर प्राप्त की जा सकती है। रेत, फिल्टर पेपर पर अवशेष के रूप में बच जाता है।

UP Board Solutions

प्रश्न 6.
धातुएँ किसे कहते हैं? इनके गुणधर्मों को समझाइये।
उत्तर-
धातुएँ (Metals) – धातु एक तत्त्व है जो आघातवर्थ्य (malleable) तथा तन्य (ductile) होता है और विद्युत संचालित करता है। धातुओं के कुछ उदाहरण हैं : आइरन, कॉपर, ऐलुमिनियम, जिंक, सिल्वर, गोल्ड, प्लैटिनम, क्रोमियम, सोडियम, पोटैशियम मैग्नीशियम, निकिल, कोबाल्ट, टिन, लेड, कैडमियम, मर्करी, ऐन्टीमनी। एक तत्त्व मर्करी, जो कि एक द्रव है, को छोड़कर सभी धातुएँ ठोस हैं।
धातुओं के गुणधर्म (Properties of Metals)
धातुओं के प्रमुख गुणधर्म नीचे दिये गये हैं :

1. धातुएँ आघातवर्थ्य (malleable) हैं। इसका अर्थ है कि धातुओं को हथौड़े से पतली शीटों में (बिना टूटे) पीटा जा सकता है।
गोल्ड (सोना) तथा सिल्वर (चाँदी) धातुएँ उत्तम आघातवर्थ्य धातुओं में से कुछ हैं। ऐलुमिनियम और कॉपर (ताँबा) धातुएँ भी अत्यधिक आघातवर्थ्य धातुएँ हैं। इन सभी धातुओं को हथौड़े से अत्यंत पतली (महीन) चादरों में कटा जा सकता है जो पन्नी (foils) कहलाती हैं। उदाहरणार्थ, सिल्वर (चाँदी) धातु को, उसकी उच्च आघातवटै र्यता के कारण, हथौड़े से महीन रजत पन्नियों (thin silver foils) में कूटा जा सकता है। चाँदी (रजत) की पन्नियों का उपयोग मिठाइयों को सजाने में किया जाता है। उसी प्रकार, ऐलुमिनियम धातु पर्याप्त आघातवर्थ्य है और महीन शीटों में रूपान्तरित की जा सकती है जो ऐलुमिनियम पन्नियाँ (aluminium foils) कहलाती हैं। (UPBoardSolutions.com) ऐलुमिनियम पन्नियों को खाद्य सामग्रियाँ जैसे बिस्कुट, चॉकलेट, दवाइयाँ, सिगरेट इत्यादि पैक करने के लिए उपयोग किया जाता है। दूध की बोतल के ढक्कन भी ऐलुमिनियम पन्नी के बने होते हैं। ऐलुमिनियम चादरों (शीटों) को पाक बर्तनों (cooking utensils) के बनाने में किया जाता है। कॉपर (ताँबा) धातु भी अत्यधिक आघातवर्थ्य है। इसलिए, रसोई या अन्य घरेलू उपयोग के बर्तनों तथा अन्य बर्तनों या पत्रों को बनाने के लिए कॉपर की शीटों (ताँबे की चादरों) का उपयोग किया जाता है। अतः, आघातवर्ध्यता (malleability) धातुओं का एक प्रमुख अभिलाक्षणिक गुणधर्म है।

2. धातुएँ तन्य (ductile) हैं। इसका अर्थ है कि धातुओं को महीन तारों में खींचा जा सकता है। | सभी धातुएँ समान रूप से तन्य नहीं होती हैं। दूसरों की अपेक्षा कुछ अधिक तन्य होती हैं। उत्तम तन्य धातुओं में गोल्ड (सोना) और सिल्वर (चाँदी) हैं। उदाहरणार्थ, सिल्वर जैसी अत्यधिक तन्य धातु के मात्र 100 मिलीग्रामों को लगभग 200 मीटर लम्बे महीन तार में खींचा जा सकता है। कॉपर
और ऐलुमिनियम धातुएँ भी अत्यंत तन्य होती हैं और पतले तारों में खींची जा सकती हैं जिन्हें वैद्युत तार लगाने में उपयोग किया जाता है। अतः, तन्यता (ductility) धातुओं का एक अन्य प्रमुख अभिलाक्षणिक गुणधर्म है।
उपर्युक्त विवेचना से हम निष्कर्ष निकालते हैं कि धातुएँ आघातवर्थ्य और तन्य होती हैं। आघातवर्थ्यता और तन्यता के गुणधर्मों के कारण ही विविध वस्तुएँ बनाने के लिए धातुओं को विभिन्न आकृतियाँ दी जा सकती हैं।

3. धातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक हैं। इसका अर्थ है कि धातुएँ ऊष्मा और विद्युत को अपने में से आसानी से प्रवाहित होने देती हैं। धातुएँ सामान्यतः ऊष्मा की सुचालक होती हैं [ऊष्मा का चालन, ऊष्मा चालकता (thermal conductivity) भी कहलाता है। सिल्वर (चाँदी) धातु ऊष्मा का उत्तम चालक है। उसकी सबसे अधिक ऊष्मा चालकता होती है। कॉपर और ऐलुमिनियम धातुएँ भी ऊष्मा की अत्यन्त सुचालक हैं। पाक बर्तनों (cooking utensils) तथा जल क्वथित्रों (water boilers), इत्यादि को प्रायः कॉपर अथवा ऐलुमिनियम धातुओं का बनाया जाता है क्योंकि वे ऊष्मा की अत्यधिक सुचालक होती हैं। धातुओं में ऊष्मा का हीनतम चालक (poorest conductor) लेड (lead) है। मर्करी धातु भी ऊष्मा का हीन चालक है।

4. धातुएँ प्रायः दृढ़ होती हैं। उनमें उच्च तनन सामर्थ्य (high tensile strength) होती है। इसका अर्थ है। कि धातुएँ बिना टूटे भारी (बड़े) भारों को रोक सकती हैं।
उदाहरणार्थ, आइरन धातु (स्टील के रूप में) उच्च | तनन सामर्थ्य वाली अत्यंत दृढ़ होती है। इसके कारण आइरन धातु को सेतुओं या पुलों, भवनों, रेल की पटरियों, गार्डरों, (UPBoardSolutions.com) मशीनों, वाहनों और चेनों, इत्यादि के निर्माण में उपयोग किया जाता है। यद्यपि अधिकांश धातुएँ दृढ़ होती हैं। परन्तु कुछ धातुएँ दृढ़ नहीं होती हैं। उदाहरणार्थ, सोडियम और पोटैशियम धातुएँ दृढ़ नहीं हैं। उनमें निम्न तनन सामर्थ्य होती है।

5. धातुएँ कमरे के ताप पर ठोस होती हैं (मर्करी के अतिरिक्त जो कि एक द्रव धातु है।
आइरन, कॉपर, ऐलुमिनियम, सिल्वर तथा गोल्ड, इत्यादि, जैसी सभी धातुएँ कमरे के ताप पर ठोस होती हैं। | कमरे के ताप पर केवल एक धातु, मर्करी, द्रव अवस्था में है।

6. धातुओं का सामान्यतः उच्च गलनांक और क्वथनांक होता है। इसका अर्थ है कि अधिकांश धातुएँ उच्च तापों पर गलती और वाष्पित होती हैं। उदाहरणार्थ, आइरन 1535°C के उच्च गलनांक वाली धातु है। इसका अर्थ है कि 1535°C के उच्च ताप तक गर्म करने पर ठोस आइरन गलता है और द्रव आइरन (अथवा गलित आइरन) में परिवर्तित होता है। कॉपर धातु का भी 1083°C का उच्च गलनांक होता है। यद्यपि, कुछ अपवाद भी हैं। उदाहरणार्थ, सोडियम और पोटैशियम धातुओं के उच्च गलनांक (100°C से कम) होते हैं। अन्य धातु गैलियम का गलनांक इतना कम होता है कि वह हाथ में ही गलने लगता है (हमारे हाथ की ऊष्मा से)।

7. धातुओं के उच्च घनत्व होते हैं। इसका अर्थ है। कि धातुएँ भारी पदार्थ हैं। उदाहरणार्थ, आइरन धातु का घनत्व 7.8 g/cm3 है जो पर्याप्त उच्च है। यद्यपि, कुछ अपवाद हैं। सोडियम और पोटैशियम के निम्न घनत्व होते हैं। वे अत्यंत हल्की धातुएँ हैं।

8. धातुएँ ध्वानिक (sonorous) होती हैं। इसका अर्थ है कि धातुएँ, जब उन्हें मारते हैं, घंटी की ध्वनि उत्पन्न करती हैं। धातुओं के ध्वानिकता के गुण के कारण ही उन्हें घण्टी, प्लेट के प्रकार के बाजा जैसे मंजीरा और तन्तु-वाद्य जैसे वॉयलिन, गिटार, सितार तथा तानपूरा, इत्यादि के लिए तारों (या तंतुओं) को बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।

9. धातुएँ प्रायः रजत (silver) अथवा धूसर भूरे (grey) रंग की होती हैं (कॉपर और गोल्ड के अतिरिक्त)। कॉपरे का रक्ताभ भूरा (reddish brown) रंग होता है जबकि गोल्ड (सोने) का रंग पीला होता है।
धातुएँ बहुसंख्यक (अनेक) कार्यों के लिए हमारे दैनिक जीवन में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं। पाक-उपकरण, बिजली के पंखे, सिलाई मशीनें, कार, बस, ट्रक, (UPBoardSolutions.com) रेलगाड़ियाँ, जहाज और वायुयान सभी, धातुओं अथवा मिश्रधातु (alloys) नामक धातुओं के मिश्रण से बनाये जाते हैं। वास्तव में, धातुओं की बनी वस्तुओं की सूची जिन्हें हम अपने दैनिक जीवन में उपयोग करते हैं, अन्तरहित (unending) है।

UP Board Solutions

प्रश्न 7.
अधातुएँ क्या होती हैं? उनके गुणधर्मों को समझाइये।
उत्तर-
अधातुएँ (Non-metals) : अधातु एक तत्त्व है जो न तो आघातवर्थ्य न तनय होता है, और विद्युत चालित (प्रवाहित) नहीं करता है। अधातुओं के कुछ उदाहरण हैं : कार्बन, सल्फर, फॉस्फोरस, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फ्लुओरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन, हीलियम, निऑन, ऑर्गन, क्रिप्टान, और जीनाने । हीरा (diamond) तथा ग्रेफाइट (graphite) भी अधातुएँ हैं। वे कार्बन के अपररूप (allotropic forms) हैं। कमरे के ताप पर सभी अधातुएँ, ब्रोमीन के अतिरिक्त जो एक द्रव अधातु है, ठोस (solids) अथवा गैस (gases) होती हैं।
अधातुओं के गुणधर्म (Properties of Nonmetals) :
अधातुओं के भौतिक गुणधर्म, धातुओं के भौतिक गुणधर्मों के बिल्कुल विपरीत हैं। अधातुओं के प्रमुख भौतिक गुणधर्म नीचे दिये गये हैं :

1. अधातुएँ आघातवर्थ्य नहीं हैं। अधातुएँ भंगुर (brittle) होती हैं। इसका अर्थ है कि अधातुओं को हथौड़े से पतली चादरों (thin sheets) में नहीं पीटा जा सकता है। जब हथौड़ा मारा जाता है, अधातुएँ छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं।
उदाहरणार्थ, सल्फर (गंधक) और फॉस्फोरस ठोस अधातुएँ हैं जो आवातवर्थ्य नहीं हैं, उन्हें हथौड़े से पतली चादरों में पीटा नहीं जा सकता है। अतः अधातुओं की हम पतली चादरें नहीं प्राप्त कर सकते हैं। सल्फर और फॉस्फोरस अधातुएँ भंगुर हैं। हथौड़े से जब पीटी जाती हैं, वे छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं। भंगुरता (brittleness) ठोस अधातुओं का अभिल्लाक्षणिक गुणधर्म है।

2. अधातुएँ तन्य नहीं होती हैं। इसका अर्थ है कि अधातुओं को तारों में र्वीचा नहीं जा सकता है। खींचने पर वे आसानी से पड़-पड़ करके टूट जाती हैं।
उदाहरणार्थ, सल्फर और फॉस्फोरस अधातुएँ हैं और वे तन्य नहीं हैं। जब खींचा जाता है, सल्फर और फॉस्फोरस
टुकड़ों में टूट जाते हैं और तार नहीं बनाते हैं। अतः अधातुओं से हम तार नहीं प्राप्त कर सकते हैं। उपर्युक्त विवेचना से हम निष्कर्ष निकालते हैं कि : अधातुएँ न तो आघातवष्ट ये हैं न तन्य। अधातुएँ भंगुर हैं।

3. अधातुएँ ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं। इसका अर्थ है कि अधातुएँ अपने में से ऊष्मा और विद्युत को प्रवाहित नहीं होने देती हैं। अधातुओं में से अनेक, वास्तव में, विद्युतरोधी (insulators) हैं। यद्यपि, कुछ अपवाद हैं। कार्बन तत्त्व का एक रूप, हीरा (diamond) अधातु है जो ऊष्मा का सुचालक है और कार्बन तत्त्व का एक अन्य रूप, ग्रेफाइट अधातु है जो विद्युत का सुचालक है। विद्युत का सुचालक होने से, ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड (eletrodes) बनाने के लिए उपयोग किया जाता है (जैसे कि शुष्क सेलों में)।

4. अधातुएँ दीप्त (या चमकीली) नहीं होती हैं। वे देखने में धुंधली होती हैं। अधातुओं में चमक नहीं होती। है जिसका मतलब है कि अधातुओं में चमकीली सतह नहीं होती है। ठोस अधातुएँ देखने में धुंधली होती हैं। उदाहरणार्थ, सल्फर और फॉस्फोरस अधातुएँ हैं जिनमें दीप्ति । (चमक) नहीं है, (UPBoardSolutions.com) अर्थात्, उनमें चमकीली सतह नहीं होती है। वे धुंधली (भद्दी) प्रतीत होती हैं। यद्यपि, एक अपवाद है। आयोडीन दीप्त (चमकीली) आकृति वाली अधातु होती है। उसमें चमकीली ऊपरी सतह होती है (धातुओं की भाँति)।

5. अधातुएँ आमतौर पर मृदु होती हैं (हीरे के अतिरिक्त क्योंकि यह अत्यंत कठोर अधातु है)। अधिकांश ठोस अधातुएँ काफी मृदु होती हैं। वे चाकू से आसानी से कट सकती हैं। उदाहरणार्थ, सल्फर और फॉस्फोरस ठोस अधातुएँ हैं जो काफी मृदु हैं और चाकू से आसानी से काटी जा सकती हैं। केवल एक अधातु कार्बन (हीरे के रूप में) अत्यंत कठोर है। वास्तव में, हीरा (जो कार्बन का एक अपररूप है। ज्ञात कठोरतम प्राकृतिक पदार्थ है।

6. अधातुएँ दृढ़ नहीं होती हैं। उनमें निम्न तनन सामर्थ्य होती है। इसका अर्थ है कि अधातुएँ बड़े (भारी) भारों को (बिना टूटे) रोक नहीं सकती हैं। उदाहरणार्थ, ग्रेफाइट एक अधातु है जो दृढ़ नहीं है। उसमें निम्न तनन सामर्थ्य होती है। जब ग्रेफाइट चादर पर भारी भार रखा जाता है, वह टूट जाता है।

7. अधातुएँ, कमरे के ताप पर, ठोस, द्रव अथवा गैसें हो सकती हैं। अधातुएँ सभी तीन अवस्थाओं : ठोस, द्रव और गैस में हो सकती हैं। उदाहरणार्थ, कार्बन, सल्फर और फॉस्फोरस ठोस अधातुएँ हैं; ब्रोमीन द्रव अधातु है; जबकि हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और क्लोरीन गैसीय अधातुएँ हैं।

8. अधातुओं के, तुलनात्मक रूप से, निम्न गलनांक और क्वथनांक होते हैं (ग्रेफाइट के अतिरिक्त जो अत्यंत उच्च गलनांक वाली अधातु है)। इसका मतलब है यह कि अधातुएँ, तुलनात्मक रूप से निम्न तापों पर गलती और वाष्पित होती हैं।
उदाहरणार्थ, सल्फर 119°C के निम्न गलनांक वाली अधातु है। आयोडीन भी 113°C के निम्न गलनांक वाली अधातु है। केवल एक अधातु ग्रेफाइट का अत्यंत उच्च गलनांक (3700°C) होता है। अधिकतर अधातुओं के अत्यंत निम्न गलनांक होते हैं जिसके कारण वे कमरे के ताप पर गैसों के रूप में उपस्थित होते हैं।

9. अधातुओं के निम्न घनत्व होते हैं। इसका अर्थ है। कि अधातुएँ हल्के पदार्थ हैं। उदाहरणार्थ सल्फर 2 g/cm3 के निम्न घनत्व वाला ठोस अधातु है, जो काफी निम्न है। गैसीय अधातुओं का घनत्व अत्यंत निम्न होता है। एक अधातु आयोडीन का यद्यपि, उच्च घनत्व होता है।

10. अधातुएँ वानिक sonorous) नहीं होती हैं। इसका (UPBoardSolutions.com) अर्थ है कि ठोस अधातुएँ, जब उन्हें मारा जाता है, घण्टी की ध्वनि उत्पन्न नहीं करती हैं।

प्रश्न 8.
कोलाइडों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर-
कोलाइडों को निम्नलिखित सात वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है
(i) सॉल (Sol)
(ii) ठोस सॉल (Solid sol)
(iii) ऐरोसॉल (Aerosol)
(iv) इमल्शन (Emulsion)
(v) फोम (Foam)
(vi) ठोस फोम (Solid Foam)
(vii) जेल (Gel)

(i) सॉल (Sol) – सॉल एक कोलाइड है जिसमें नन्हें ठोस कण, द्रव माध्यम में परिक्षिप्त होते हैं। सॉलों के उदाहरण हैं : स्याही, साबुन विलयन, स्टार्च विलयन और अधिकांश पेण्ट (प्रलेप)

(ii) ठोस सॉल (Solid Sol) – ठोस सॉल एक कोलाइड है जिसमें ठोस कण, ठोस माध्यम में परिक्षिप्त होते हैं। ठोस सॉल का उदाहरण है : रंगीन रत्नपत्थर (माणिक्य काँच के समान) ।।

(iii) ऐरोसॉल (Aerosol) – ऐरोसॉल एक कोलाइड है जिसमें ठोस अथवा द्रव, गैस (वायु सहित) में परिक्षिप्त होता है। कोलाइडों जिनमें गैस में ठोस परिक्षिप्त होता है, के उदाहरण हैं : धुआँ या धूम (जो वायु में कालिख है) और स्वचालित वाहन निष्कास (Automobile Exhausts)। ऐरोसॉलों जिनमें गैस में द्रव परिक्षिप्त होता है, के उदाहरण हैं : केश स्प्रे, कोहरा, कुहासा और मेघ या बादल।

(iv) इमल्शन (Emulsion) – इमल्शन (पायस) एक कोलाइड है जिसमें एक दूव की अत्यंत छोटी सूक्ष्म बूंदें, दूसरे द्रव जो उसके साथ मिश्रणीय नहीं हैं, में परिक्षिप्त होती हैं। इमल्शन के उदाहरण हैं दूध, मक्खन और फेस क्रीम।

(v) फोम (Foam) – फोम (फेन या झाग) एक कोलाइड है जिसमें ठोस माध्यम में गैस परिक्षिप्त होती है। फोम के उदाहरण हैं : अग्निशामक आग (Fire-extinguisher Foam); साबुन के बुलबुले (Soap Bubbles), शेविंग क्रीम (Shaving Cream) और बीअर झाग (Beer Foam)।

(vi) ठोस फोम (Solid Foam) – ठोस फोम एक (UPBoardSolutions.com) कोलाइड है जिसमें ठोस माध्यम में गैस परिक्षिप्त होती है। ठोस फोम के उदाहरण हैं : रोधी फोम, फोम रबड़ और स्पंज।

(vii) जेल (Gel) – जेल एक अर्द्ध-ठोस कोलाइड है जिसमें द्रव में परिक्षिप्त ठोस कणों को लगातार जलक होता है। जेल के उदाहरण हैं : जेलियाँ (Jellies) और जिलैटिन (Gelatine)
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure image - 12

प्रश्न 9.
एक विलयन में, जल के 370 g में शक्कर के 30 ग्राम घुले हुए हैं। इस विलयन के सान्द्रण (सान्द्रता) की गणना कीजिए।
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure image - 13
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure image - 14

अभ्यास प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. लोहे से बने किसी बर्तन पर जंग का लगना कहलाता है
(a) घुलना और यह एक भौतिक परिवर्तन
(b) संक्षारण और यह एक रासायनिक परिवर्तन
(c) घुलना और यह एक रासायनिक परिवर्तन
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

2. सल्फर तथा कार्बन डाइसल्फाइडे का मिश्रण है
(a) समांगी तथा टिण्डल प्रभाव नहीं दर्शाता है।
(b) विषमांगी तथा टिण्डल प्रभाव नहीं दर्शाता है।
(c) समांगी तथा टिण्डल प्रभाव देर्शाता है।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

UP Board Solutions

3. समुद्री जल से नमक प्राप्त किया जाता है|
(a) वाष्पीकरण द्वारा
(b) प्रभाजी आसवन द्वारा
(c) क्रोमैटोग्राफी द्वारा
(d) अपकेन्द्रन विधि द्वारा।

4. ऊर्ध्वपातन पदार्थ नहीं है
(a) आयोडीन
(b) बेंजीन
(c) कपूर
(d) अमोनियम क्लोराइड।

5. पृथक्करण फनल का उपयोग करते हैं अलग करने के लिए
(a) दो घुलनशील द्रवों को
(b) द्रव में अघुलनशील कणों को
(c) दो अघुलनशील द्रवों को।
(d) द्रव में विलेय ठोस पदार्थ को।

6. लोहे की पिने, बालू व अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण घटकों को अलग करने के लिए प्रयोग किये गये प्रक्रमों का सही क्रम है
(a) विलयन बनाना, छानना व चुम्बकीय पृथक्करण
(b) चुम्बकीय पृथक्करण, विलयन बनाना व छानना
(c) चुम्बकीय पृथक्करण, ऊर्ध्वपातन
(d) विलयन बनाना, आसवन व चुम्बकीय पृथक्करण

7. गर्म करने पर सन्तृप्त विलयन हो जायेगा|
(a) अति सन्तृप्त
(b) असन्तृप्त
(c) अपघटित
(d) तनु विलयन।

8. टिंडल प्रभाव प्रदर्शित नहीं करते हैं
(a) वास्तविक विलयन
(b) निलम्बन
(c) कोलाइडल
(d) ये सभी।

9. क्रोमैटोग्राफी का प्रयोग करते हैं
(a) डाई में रंगों को अलग करने में
(b) प्राकृतिक रंगों से लवकों को अलग करने में
(c) रक्त से नशीले पदार्थों को दूर करने में।
(d) उपर्युक्त सभी में।

UP Board Solutions

10. धातुएँ
(a) चमकीली व गहरे रंग की होती हैं।
(b) विद्युत व ताप की सुचालक होती हैं।
(c) आघातवर्थ्य एवं तन्य होती हैं।
(d) उपर्युक्त सभी।

11. कमरे के ताप पर द्रव धातु है
(a) टिन
(b) ब्रोमीन
(c) पारा
(d) बोरॉन

12. कमरे के ताप पर द्रव अधातु है
(a) टिन
(b) ब्रोमीन
(c) पारा
(d) बोरॉन

13. उपधातु का उदाहरण है
(a) टिन
(b) ब्रोमीन
(c) पारा
(d) बोरॉन।

14. दो घुलनशील द्रव अलग किये जाते हैं
(a) आसवन प्रक्रम द्वारा
(b) पृथक्करण फनल द्वारा
(c) भारण विधि द्वारा
(d) ऊर्ध्वपातन द्वारा।

15. निलम्बन के कण दूर किये जाते हैं
(a) आसवन द्वारा
(b) पृथक्करण फनल द्वारा
(c) भारण विधि द्वारा
(d) ऊर्ध्वपातन द्वारा।

16. दो अघुलनशील द्रव अलग किये जाते हैं
(a) आसवन द्वारा
(b) पृथक्करण फनले द्वारी
(c) भारण विधि द्वारा
(d) ऊर्ध्वपातन द्वारा।

UP Board Solutions

17. दूध से क्रीम निकाली जाती है|
(a) आसवन द्वारा
(b) प्रभाजी आसवन द्वारा
(c) क्रोमैटोग्राफी द्वारा
(d) अपकेन्द्रन विधि द्वारा।

18. पेट्रोलियम व वायु के घटक प्राप्त किये जाते हैं
(a) आसवन द्वारा
(b) प्रभाजी आसवन द्वारा ।
(c) क्रोमैटोग्राफी द्वारा
(d) अपकेन्द्रन विधि द्वारा।

19. रक्त से नशीले पदार्थ अलग किये जाते हैं
(a) वाष्पीकरण द्वारा
(b) प्रभाजी आसवन द्वारा
(c) क्रोमैटोग्राफी द्वारा
(d) अपकेन्द्रन विधि द्वारा।

20. घटकों का पृथक्करण चाहिए|
(a) अवांछित या हानिकारक घटक को दूर करने के लिए
(b) शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए
(c) लाभदायक घटक को प्राप्त करने के लिए
(d) उपर्युक्त सभी

21. समांगी मिश्रण का उदाहरण है
(a) कॉपर सल्फेट का विलयन
(b) नमक व सल्फर का मिश्रण
(c) सल्फर व लोहे के चूर्ण का मिश्रण
(d) उपर्युक्त सभी।

22. दो या अधिक पदार्थों को समांगी मिश्रण कहलाता
(a) विलयन
(b) निलम्बन
(c) कोलाइडल
(d) इनमें से कोई भी नहीं।

23. निलम्बन है एक
(a) समांगी मिश्रण
(b) विषमांगी मिश्रण जिसमें घुलित कण आँखों से देखे जा सकें
(c) विषमांगी मिश्रण जिसमें घुलित कण आँखों से न देखे जा सकें
(d) उपर्युक्त सभी।

UP Board Solutions

24. विलयन है एक
(a) समांगी मिश्रण
(b) विषमांगी मिश्रण जिसमें घुलित कण आँखों से देखे जा सकें
(c) विषमांगी मिश्रण जिसमें घुलित कण आँखों से न देखे जा सकें
(d) उपर्युक्त सभी।

25. कोलाइडल है एक
(a) समांगी मिश्रण
(b) विषमांगी मिश्रण जिसमें घुलित कण आँखों से देखे जा सकें
(c) विषमांगी मिश्रण जिसमे घुलित कण आँखों से न ‘ देखे जा सकें।
(d) उपरोक्त सभी।

26. मिश्रण के विषय में सही कथन नहीं है।
(a) घटक अपने गुण प्रदर्शित करते हैं।
(b) मिश्रण के गुण घटकों के गुण से भिन्न होते हैं।
(c) घटक किसी भी अनुपात में मिले होते हैं।
(d) घटक सरल विधियों द्वारा अलग किये जा सकते हैं।

27. विषमांगी मिश्रण का उदाहरण है
(a) लकड़ी
(b) पीतल
(c) नमक का जलीय विलयन
(d) स्टील।

28. ठोस-ठोस विलयन का उदाहरण है–
(a) लकड़ी
(b) पीतल
(c) नमक का जलीय विलयन
(d) इमल्शन।

29. गंदला पानी उदाहरण है
(a) विलयन का
(b) निलम्बन का
(c) कोलाइडल का
(d) ये सभी

UP Board Solutions

30. साबुन का जलीय विलयन है एक
(a) विलयन का
(b) निलम्बन का
(c) कोलाइडल का
(d) ये सभी ।

उत्तरमाला

      1. (b)
      2. (a)
      3. (a)
      4. (b)
      5. (c)
      6. (c)
      7. (b)
      8. (a)
      9. (d)
      10. (d)
      11. (c)
      12. (b)
      13. (d)
      14. (a)
      15. (c)
      16. (b)
      17. (d)
      18. (b)
      19. (c)
      20. (d)
      21. (a)
      22. (a)
      23. (b)
      24. (a)
      25. (c)
      26. (b)
      27. (a)
      28. (b)
      29. (b)
      30. (c)

We hope the UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure (क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 2 Is Matter Around us Pure (क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 18 कर्तव्यपालन (मंजरी)

UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 18 कर्तव्यपालन (मंजरी)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 7 Hindi . Here we have given UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 18 कर्तव्यपालन (मंजरी).

महत्त्वपूर्ण गद्यांश की व्याख्या

नहीं, मेरे सच्चे बहादुर मित्र …………………………… रहेगा।

संदर्भ:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मंजरी’ के ‘कर्तव्यपालन’ नामक पाठ से अवतरित है। इसके लेखक रामनरेश त्रिपाठी हैं।

प्रसंग:
राजा वन में वनरक्षक से मिलता है। वनरक्षक ने उसके साथ ईमानदारी से अपने कर्तव्यपालन का ध्यान रखकर समुचित व्यवहार किया। उसे पहले राजा का परिचय न था, परन्तु बाद में एक दरबारी के कुशल पूछने पर राजा को पहचाना और क्षमा माँगी।

UP Board Solutions

व्याख्या:
राजा वनरक्षक पुंडरीक के कर्तव्यपालन का ध्यान रखने (UPBoardSolutions.com) के कारण बहुत प्रसन्न हुआ। उसने उसे बहादुर मित्र कहा और अपनी योग्य पदवी के लिए उसे तलवार प्रमाण के रूप में भेंट की। उसके लिए एक हजार रुपया सालाना पुरस्कार भी घोषित किया जो उसे जीवनपर्यंत अपनी अच्छी सेवा के कारण मिलता रहेगा। राजा ने पुंडरीक को राजरत्न कहा।

पाठ का सार (सारांश)

राजा अँधेरे में जंगल में खड़ा है। वनरक्षक आकर पूछता है कि वह कहाँ जाएगा। वह राजा को बाहर निकलने को कहता है। राजा पूछता है कि उसे इसका क्या अधिकार है। वनरक्षक बताता है कि वह राजा का वनरक्षक पुंडरीक है। राजा स्वयं को एक राजा का अधिकारी बताता है, लेकिन पुंडरीक उस पर विश्वास नहीं करता। राजा उसकी ओर एक रुपया बढ़ाता है। पुंडरीक कहता है कि तुम (राजा) सच में एक दरबारी ही हो, जो आज छोटी रिश्वत देता है और कल के लिए बड़ा वायदा करता है परन्तु यह दरबार नहीं है। राजा कहता है “तू नीच आदमी है। तेरे बारे में ज्यादा परिचय चाहता हूँ।” पुंडरीक ‘तू’ और ‘तेरे शब्दों के सम्बोधने से नाराज होकर कहता है, “मैं भी उतना ही भला आदमी हूँ जितने तुम हो।” राजा मित्र कहकर उससे क्षमा माँगता है। पुंडरीक को राजा पर परिचय न देने के कारण सन्देह है। फिर भी वह राजा को राजधानी का रास्ता बताने को तैयार है। यही नहीं वह राजा को रात अपने घर में बिताने का प्रस्ताव भी देता है जिसे राजा स्वीकार लेता है। (UPBoardSolutions.com) उसी समय घोड़े पर सवार सैनिक आता है और राजा से कुशल-क्षेम पूछता है। उसके द्वारा राजा को जब महाराज कहकर संबोधित किया जाता है तब पुंडरीक राजा को पहचानता है। वह राजा से क्षमा माँगता है। राजा उसे बहादुर और सच्चा मित्र कहकर अपनी तलवार, उसकी पदवी के प्रमाण के रूप में देता है तथा उसको एक हजार रुपया सालाना पुरस्कार भी जीवनभर देने की घोषणा करता है। पुंडरीक घुटने टेककर राजा को प्रणाम करता है। राजा पुंडरीक से उसे महल तक पहुंचाने के लिए कहता है। राजा उसे रात को अपने महल में मेहमान बनाकर रखता है।

UP Board Solutions

प्रश्न-अभ्यास

  • कुछ करने को
    नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।
  • विचार और कल्पना
    नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।
  • एकांकी से

प्रश्न 1:
राजा द्वारा ली गई परीक्षा में वनरक्षक किस प्रकार खरा उतरता है?
उत्तर:
जब राजा वनरक्षक पुंडरीक को झोपड़ी में रहने देने के बदले ह्र रुपया देना चाहता है, तब वह उसे रिश्वत बताता है और लेने से इनकार कर देता है। फिर इसके बाद जब राजा राजधानी तक चलने के लिए कहता है तो वह इनकार करता है और कहता है (UPBoardSolutions.com) कि अगर स्वयं राजा भी आ जाए, तो भी इस समय मैं राजधानी नहीं जाऊँगा। इस तरह वनरक्षक राजा की परीक्षा में खरा उतरता है।

प्रश्न 2:
नीचे लिखे वाक्य के तीन सम्भावित उत्तर दिए गए हैं, सही उत्तर पर सही (✓) का चिह्न लगाइए (चिह्न लगाकर )

राजा ने तलवार खींच ली क्योंकि
(क) वह वनरक्षक को दण्ड देना चाहता था।
(ख) वह वनरक्षक को क्षमा करना चाहता था।
(ग) वह वनरक्षक को सम्मान देना चाहता था। (✓)

UP Board Solutions

प्रश्न 3:
वनरक्षक द्वारा परिचय पूछे जाने पर राजा क्या उत्तर देते हैं?
उत्तर:
राजा कहते हैं कि इन प्रश्नों का उत्तर (UPBoardSolutions.com) देने का मुझे अभ्यास नहीं है।

प्रश्न 4:
वनरक्षक को राजा पर क्या सन्देह होता है?
उत्तर:
वनरक्षक को राजा पर बदमाश होने का सन्देह होता है।

प्रश्न 5:
राजा द्वारा यह कहने पर कि यदि एक रुपया कम हो तो सवेरे और भी दूंगा, वनरक्षक ने राजदरबार और दरबारी का कैसा चित्र खींचा?
उत्तर:
वनरक्षक की नजर में राजदरबार में काम करने वाले (UPBoardSolutions.com) दरबारी हर छोटे-बड़े काम के लिए रिश्वत देते हैं या लेते हैं या आश्वासन देते हैं।

प्रश्न 6:
वनरक्षक को उसकी नेकी और ईमानदारी का क्या फल मिला?
उत्तर:
वनरक्षक को उसकी नेकी और ईमानदारी के लिए एक तलवार और 1000 रुपये सालाना का पुरस्कार जीवन भर के लिए मिला।

UP Board Solutions

प्रश्न 7:
एकांकी में वनरक्षक के व्यक्तित्व की किन-किन विशेषताओं का पता चलता है?
उत्तर:
एकांकी में वनरक्षक के व्यक्तित्व की कर्तव्यपरायणता, (UPBoardSolutions.com) ईमानदारी, राजभक्ति बहादुरी और स्पष्टवादिता जैसे विशेषताओं का पता चलता है।

भाषा की बात

प्रश्न 1:
निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग और प्रत्यय युक्त शब्दों को छाँटकर अलग-अलग लिखिए ( छाँटकर )
उत्तर:
उपसर्ग: अभिमान, विशेष, सम्मान

प्रत्यय:
चमकीला, सच्चाई, ईमानदारी, प्रसन्नता, पुरस्कार, निकलकर

UP Board Solutions

प्रश्न 2:
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखकर उनका वाक्यों (UPBoardSolutions.com) में प्रयोग कीजिए (प्रयोग करके
उत्तर:
तिरस्कार (अवहेलना)          –             राजा ने तिरस्कार से उसे नीच कहा।
यकीन (विश्वास)                    –            मुझे यकीन है कि वही लड़का चोर है।
मुनासिब (उचित)                 –            जो मुनासिब समझो वही करो।
रिश्वत (घूस)                          –            अधिकारी रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।
ढिठाई (अकड़ के साथ)        –            बच्चों को बड़ों से ढिठाई के साथ बात नहीं करनी चाहिए।
फर्ज (कर्तव्य)                        –            भारतीय सैनिक अपने कार्य से कभी पीछे नहीं हटते।।

प्रश्न 3:
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए (UPBoardSolutions.com) एक-एक शब्द लिखिए (लिखकर )
क. किसी बात की परवाह न करने वाला।         –             लापरवाह
ख. वन की रक्षा करने वाला।                            –              वनरक्षक
ग. जो विश्वास करने योग्य हो।                          –              विश्वसनीय
घ. जो रिश्वत लेता हो।                                      –              रिश्वतखोर
ङ. जो क्षमा करने योग्य न हो।                        –               अक्षम्य

UP Board Solutions

प्रश्न 4:
नीचे दिये गये वाक्यों में से सरल वाक्य, (UPBoardSolutions.com) संयुक्त वाक्य और मिश्रित वाक्य अलग-अलग कीजिए ( अलग-अलग करके)
क. मुझे पता तो चल गया कि मैं मनुष्य भी हूँ ।।                       –    मिश्रित वाक्य
ख. आज मेरा सारा अभिमान मुझे झूठा जाने पड़ रहा है ।        –    सरल वाक्य
ग. तुम कहाँ रहते हो और करते क्या हो ?                               –     संयुक्त वाक्य
घ. मैंने माना कि तुम दरबारी हो, आज के लिए तो एक छोटी   –     सी रिश्वत
और कल के लिए एक बड़ा-सा वादा।।                                   –     मिश्रित वाक्य

प्रश्न 5:
नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।

We hope the UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 18 कर्तव्यपालन (मंजरी) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 18 कर्तव्यपालन (मंजरी), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 9 Hindi Chapter 11 नागार्जुन (काव्य-खण्ड)

UP Board Solutions for Class 9 Hindi Chapter 11 नागार्जुन (काव्य-खण्ड)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 9 Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 9 Hindi Chapter 11 नागार्जुन (काव्य-खण्ड).

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पद्यांशों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए तथा काव्यगत सौन्दर्य भी स्पष्ट कीजिए :

(बादल को घिरते देखा है)

1. अमल धवल ………………………………………………………………………….. तिरते देखा है।

शब्दार्थ-अमल = निर्मल। धवल = सफेद शिखर = चोटी स्वर्णिम = सुनहले। तुंग = ऊँचा। ऊमस = गर्मी । पावस = वर्षा तिक्त = कसैला। बिसतन्तु = कमलनाल के अन्दर के कोमल रेशे। तिरते = तैरते हुए।

सन्दर्भ – प्रस्तुत काव्य-पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी काव्य’ में जनकवि नागार्जुन द्वारा रचित ‘बादल को घिरते देखा है’ नामक कविता से अवतरित हैं। यह कविता उनके काव्य-संग्रह ‘प्यासी-पथराई आँखें’ में संकलित है।

प्रसंग – इस स्थल पर कवि ने हिमालय के वर्षाकालीन सौन्दर्य का चित्रण किया है।

व्याख्या – कवि का कथन है कि मैंने निर्मल, चाँदी के समान सफेद और बर्फ से मण्डित पर्वत की चोटियों पर घिरते हुए बादलों के मनोरम दृश्य को देखा है। मैंने मानसरोवर में खिलनेवाले स्वर्ण-जैसे सुन्दर कमल-पुष्पों पर मोती के समान चमकदार अत्यधिक शीतल जल की बूंदों को गिरते हुए देखा है।
कवि हिमालय की प्राकृतिक सुषमा का अंकन करते (UPBoardSolutions.com) हुए कहता है कि उस पर्वत-प्रदेश में हिमालय के ऊँचे शिखररूपी कन्धों पर छोटी-बड़ी अनेक झीलें फैली हुई हैं। मैंने उन झीलों के नीचे शीतल, स्वच्छ, निर्मल जल में ग्रीष्म के ताप के कारण व्याकुल और समतल क्षेत्रों से आये (अर्थात् मैदानों से आये हुए) हंसों को कसैले और मधुर कमलनाल के तन्तुओं को खोजते हुए और उन झीलों में तैरते हुए देखा है।

काव्यगत सौन्दर्य

  • कवि ने साहित्यिक और कलात्मक शब्दावली का प्रयोग करते हुए हिमालय की सुन्दरता का अंकन किया है, जहाँ पर सभी प्राणी आनन्द और उल्लास का अनुभव कर सकते हैं।
  • आलम्बने रूप में प्रकृति का चित्रण हुआ है।
  • सरल व प्रवाहपूर्ण भाषा का प्रयोग।
  • गुण–माधुर्य।
  • रस-श्रृंगार।
  • शब्द-शक्ति-लक्षणा।
  • अलंकार-अनुप्रास, उपमा, पुनरुक्तिप्रकाश, रूपकातिशयोक्ति।

UP Board Solutions

2. एक दूसरे से ………………………………………………………………………….. चिढ़ते देखा है।
अथवा निशा काल ………………………………………………………………………….. के तीरे।
अथवा दुर्गम ………………………………………………………………………….. हो-होकर।

शब्दार्थ-वियुक्त = पृथक्, जुदा। तीरे = किनारे शैवाल = घास परिमल = सुगन्ध।

सन्दर्भ – प्रस्तुत पद्य-पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी काव्य’ में कविवर नागार्जुन द्वारा रचित ‘बादल को घिरते देखा है’ शीर्षक कविता से अवतरित हैं।

प्रसंग – इनमें कवि ने हिमालय के मोहक दृश्यों का चित्रण किया है।

व्याख्या – कवि कहता है कि चकवा-चकवी आपस में एक-दूसरे से अलग रहकर सारी रात बिता देते हैं। किसी शाप के कारण वे रात्रि में मिल नहीं पाते हैं। विरह में व्याकुल होकर वे क्रन्दन करने लगते हैं। प्रात: होने पर उनका क्रन्दन बन्द हो जाता है और वे मानसरोवर के किनारे मनोरम दृश्य में एक-दूसरे से मिलते हैं और हरी घास पर प्रेम-क्रीड़ा करते हैं। महाकवि कालिदास द्वारा मेघदूत महाकाव्य में वर्णित अपार धन के स्वामी कुबेर और उसकी सुन्दर अलका नगरी अब कहाँ है? आज आकाश मार्ग से जाती हुई पवित्र गंगा का जल कहाँ गया? बहुत हूँढ़ने पर भी मुझे मेघ के उस दूत के दर्शन नहीं हो सके। ऐसा भी हो सकता है कि इधर-उधर भटकते (UPBoardSolutions.com) रहनेवाला यह मेघ पर्वत पर यहीं कहीं बरस पड़ा हो। छोड़ो, रहने दो, यह तो कवि की कल्पना थी। मैंने तो गगनचुम्बी कैलाश पर्वत के शिखर पर भयंकर सर्दी में विशाल आकारवाले बादलों को तूफानी हवाओं से गरजे-बरस कर संघर्ष करते हुए देखा है। हजारों फुट ऊँचे पर्वत-शिखर पर स्थित बर्फानी घाटियों में जहाँ पहुँचना बहुत कठिन होता है, कस्तूरी मृग अपनी नाभि में स्थित अगोचर कस्तूरी की मनमोहक सुगन्ध से उन्मत्त होकर इधर-उधर दौड़ता रहता है। निरन्तर भाग-दौड़ करने पर भी जब वह उसे कस्तूरी को प्राप्त नहीं कर पाता तो अपने-आप पर झुंझला उठता है।

काव्यगत सौन्दर्य

  • यहाँ कवि ने विभिन्न मोहक दृश्यों को प्रस्तुत करके अपनी कुशल प्रकृति-चित्रण कला को दर्शाया है।
  • भाषा-तत्सम प्रधान खड़ीबोली।
  • रस-श्रृंगार।
  • गुण-माधुर्य।
  • अलंकार-अनुप्रास।

3. शत-शत ………………………………………………………………………….. फिरते देखा है।

शब्दार्थ-मुखरित = गुंजित कानन = वन शोणित = लाल धवल = सफेद कुन्तल = केश। सुघर = सुन्दर कुवलय = नीलकमल वेणी = चोटी। रजित = चाँदी के बने, मणियों से गढ़े। लोहित = लाल त्रिपदी = तिपाई । मदिरारुण = मद्यपान कर लेने के कारण हुई लाल, नशे में लाल। उन्मद = नशे में मस्त।

सन्दर्भ – प्रस्तुत पद्य हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी काव्य’ में कविवर नागार्जुन द्वारा रचित ‘बादल को घिरते देखा है’ से लिया गया है।

प्रसंग – यहाँ कवि ने किन्नर-प्रदेश की शोभा का वर्णन किया है।

व्याख्या – कवि का कथन है कि आकाश में बादल छा जाने के बाद किन्नर-प्रदेश की शोभा अद्वितीय हो जाती है। सैकड़ों छोटे-बड़े झरने अपनी कल-कल ध्वनि से देवदार के वन को गुंजित कर देते हैं अर्थात् गिरते हुए झरनों का स्वर देवदार के वनों में गूंजता रहता है। इन वनों के बीच में लाल और श्वेत (UPBoardSolutions.com) भोजपत्रों से छाये हुए कुटीर के भीतर किन्नर और किन्नरियों के जोड़े विलासमय क्रीडाएँ करते रहते हैं। वे अपने केशों को विभिन्न रंगों के सुगन्धित पुष्पों से सुसज्जित किये रहते हैं। सुन्दर शंख जैसे गले में इन्द्र-नीलमणि की माला धारण करते हैं, कानों में नीलकमल के कर्णफूल पहनते हैं और उनकी वेणी में लाल कमल सजे रहते हैं।

कवि का कथन है कि किन्नर प्रदेश के नर-नारियों के मदिरापान करनेवाले बर्तन चाँदी के बने हुए हैं। वे मणिजड़ित तथा “कलात्मक ढंग से बने हुए हैं। वे अपने सम्मुख निर्मित तिपाई पर मदिरा के पात्रों को रख लेते हैं और स्वयं कस्तूरी मृग के नन्हें बच्चों की कोमल और दागरहित छाल पर आसन लगाकर बैठ जाते हैं । मदिरा पीने के कारण उनके नेत्र लाल रंग के हो जाते हैं। उनके नेत्रों में उन्माद छा जाता है। मदिरा पीने के (UPBoardSolutions.com) बाद वे लोग मस्ती को प्रकट करने के लिए अपनी कोमल और सुन्दर अँगुलियों से सुमधुर स्वरों में वंशी की तान छेड़ने लगते हैं। कवि कहता है कि इन सभी दृश्यों की मनोहरता को मैंने देखा है।

काव्यगत सौन्दर्य

  • यहाँ किन्नर प्रदेश के स्त्री-पुरुषों के विलासमय जीवन को यथार्थ चित्रण हुआ है।
  • प्रकारान्तर से कवि ने धनी वर्ग की विलासिता का वर्णन किया है।
  • भाषा–संस्कृतनिष्ठ खड़ीबोली।
  • रस-श्रृंगार।
  • अलंकार-उपमा, पुनरुक्तिप्रकाश।
  • शब्द-शक्ति-लक्षणी।

प्रश्न 2.
नागार्जुन का जीवन-परिचय देते हुए उनकी भाषा-शैली का उल्लेख कीजिए।

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
नागार्जुन का जीवन वृत्त लिखकर उनके साहित्यिक योगदान का उल्लेख कीजिए

प्रश्न 4.
नागार्जुन के साहित्यिक अवदान एवं रचनाओं पर प्रकाश डालिए।

प्रश्न 5.
नागार्जुन का जीवन-परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए तथा उनके काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।

(नागार्जुन)
स्मरणीय तथ्य

जन्म – सन् 1910 ई०, तरौनी (जिला दरभंगा (बिहार)।
मृत्यु – सन् 1998 ई०।
शिक्षा – स्थानीय संस्कृत पाठशाला में, श्रीलंका में बौद्ध धर्म की दीक्षा।
वास्तविक नाम-वैद्यनाथ मिश्र।
रचनाएँ – युगधारा, प्यासी-पथराई आँखें, सतरंगे पंखोंवाली, तुमने कहा था, तालाब की मछलियाँ, हजार-हजार बाँहोंवाली, पुरानी जूतियों का कोरस, भस्मांकुर (खण्डकाव्य), बलचनमा, रतिनाथ की चाची, नयी पौध, कुम्भीपाक, उग्रतारा (उपन्यास), दीपक, विश्वबन्धु (सम्पादन)।
काव्यगत विशेषताएँ
वर्य-विषय – सम-सामयिक, राजनीतिक तथा सामाजिक समस्याओं का चित्रण, दलित वर्ग के प्रति संवेदना, अत्याचारपीड़ित एवं त्रस्त व्यक्तियों के प्रति (UPBoardSolutions.com) सहानुभूति।
भाषा – शैली-तत्सम शब्दावली प्रधान शुद्ध खड़ीबोली। ग्रामीण और देशज शब्दों का प्रयोग। प्रतीकात्मक शैली का प्रयोग।
अलंकार व छन्द-उपमा, रूपक, अनुप्रास। मुक्तक छन्द।।

जीवन-परिचय – श्री नागार्जुन का जन्म दरभंगा जिले के तरौनी ग्राम में सन् 1910 ई० में हुआ था। आपका वास्तविक नाम वैद्यनाथ मिश्र है। आपका आरम्भिक जीवन अभावों का जीवन था। जीवन के अभावों ने ही आगे चलकर आपके संघर्षशील व्यक्तित्व का निर्माण किया व्यक्तिगत दुःख ने आपको मानवता के दु:ख को समझने की क्षमता प्रदान की है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा स्थानीय संस्कृत पाठशाला में हुई। सन् 1936 ई० में आप श्रीलंका गये और वहाँ पर बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। सन् 1938 ई० में आप स्वदेश लौट आये। (UPBoardSolutions.com) राजनीतिक कार्यकलापों के कारण आपको कई बार जेल-यात्रा भी करनी पड़ी। आप बाबा के नाम से प्रसिद्ध हैं तथा घुमक्कड़ एवं फक्कड़ किस्म के व्यक्ति हैं। आप निरन्तर भ्रमण करते रहे। सन् 1998 ई० में आपका निधन हो गया।

रचनाएँ – युगधारा, प्यासी-पथराई आँखें, सतरंगे पंखोंवाली, तुमने कहा था, तालाब की मछलियाँ, हजार-हजार बाँहोंवाली, पुरानी जूतियों का कोरस, भस्मांकुर (खण्डकाव्य) आदि।

उपन्यास – बलचनमा, रतिनाथ की चाची, नयी पौध, कुम्भीपाक, उग्रतारा आदि। सम्पादन-दीपक, विश्व-बन्धु पत्रिका।

मैथिली के ‘पत्र – हीन नग्न-गाछ’ काव्य-संकलन पर आपको साहित्य अकादमी का पुरस्कार भी मिल चुका है।

काव्यगत विशेषताएँ

नागार्जुन के काव्य में जन भावनाओं की अभिव्यक्ति, देश-प्रेम, श्रमिकों के प्रति सहानुभूति, संवेदनशीलता तथा व्यंग्य की प्रधानता आदि प्रमुख विशेषताएँ पायी जाती हैं। अपनी कविताओं में आप अत्याचार-पीड़ित, त्रस्त व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति

प्रदर्शित करके ही सन्तुष्ट नहीं होते हैं, बल्कि उनको अनीति और अन्याय का विरोध करने की प्रेरणा भी देते हैं। व्यंग्य करने में आपको संकोच नहीं होता। तीखी और सीधी चोट (UPBoardSolutions.com) करनेवाले आप वर्तमान युग के प्रमुख व्यंग्यकार हैं। नागार्जुन जीवन के, धरती के, जनता के तथा श्रम के गीत गानेवाले कवि हैं, जिनकी रचनाएँ किसी वाद की सीमा में नहीं बँधी हैं।

भाषा – शैली–नागार्जुन जी की भाषा-शैली सरल, स्पष्ट तथा मार्मिक प्रभाव डालनेवाली है। काव्य-विषय आपके प्रतीकों के माध्यम से स्पष्ट उभरकर सामने आते हैं। आपके गीतों में जन- जीवन का संगीत है। आपकी भाषा तत्सम प्रधान शुद्ध खड़ीबोली है, जिसमें अरबी व फारसी के शब्दों का भी प्रयोग किया गया है।

अलंकार एवं छन्द – आपकी कविता में अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग है। उपमा, रूपक, अनुप्रास आदि अलंकार ही देखने को मिलते हैं। प्रतीक विधान और बिम्ब-योजना भी श्रेष्ठ है।
साहित्य में स्थान-निस्सन्देह नागार्जुन जी का काव्य भाव-पक्ष तथा कला पक्ष की दृष्टि से हिन्दी साहित्य का अमूल्य कोष है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नागार्जुन ने अपनी कविता ‘बादल को घिरते देखा है’ में प्रकृति के किस रूप के सौन्दर्य का वर्णन किया
उत्तर:
इस कविता में कवि ने हिमालय पर्वत पर स्थित कैलाश पर्वत की चोटी पर घिरते बादलों के सौन्दर्य का वर्णन किया है।

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
‘महामेघ को झंझानिल से गरज-गरज भिड़ते देखा है’ पंक्ति में प्राकृतिक वर्णन के अतिरिक्त मुख्य भाव क्या है?
उत्तर:
कवि कहता है कि इस संसार में निरन्तर संघर्ष चल रहा है। मैंने असहाय जाड़ों में आकाश को छूने वाले कैलाश पर्वत की चोटी पर बहुत बड़े बादल-समूह को बर्फानी और तूफानी (UPBoardSolutions.com) हवाओं से गर्जना करके क्रोध प्रकट करते हुए युद्धरत देखा है। यद्यपि हवा बादल को उड़ा ले जाती है। बादल वायु के समक्ष शक्तिहीन है फिर भी उसको हवा के प्रति संघर्ष उसके अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।

कहने का भाव यह है कि सफलता की सम्पूर्ण सामर्थ्य व्यक्ति के अन्दर निहित रहती है, किन्तु अज्ञानतावश उस सामर्थ्य को न जानने के कारण और सफलता से वंचित रहने के कारण वह अपने ऊपर ही झुंझलाता है।

प्रश्न 3.
कवि ने नरेत्तर (मनुष्य से इतर) दम्पतियों का किस प्रकार वर्णन किया है?
उत्तर:
कवि नरेत्तर दम्पतियों का वर्णन करते हुए कहता है कि सुगन्धित फूलों को अपने बालों में लगाये हुए, अपने शंख जैसे गलों में, मणि की माला तथा कानों में नीलकमल के कर्णफूल पहने हुए, अंगूरी शराब पीकर हिरण की खाल पर पालथी मारकर बैठे हुए किन्नर युगल दर्शकों के हृदय को गद्गद करते हैं।

प्रश्न 4.
‘बादल को घिरते देखा है’ शीर्षक कविता का सारांश लिखिए।
उत्तर:
‘बादल को घिरते देखा है’ कविता में हिमालय पर्वत पर स्थित कैलास पर्वत की चोटी पर घिरते बादलों के सौन्दर्य को वर्णन किया गया है। कवि के अनुसार निर्मल, चाँदी के समान सफेद और बर्फ से मण्डित पर्वत-चोटियों पर घिरते हुए बादलों से सम्पूर्ण वातावरण अत्यन्त मनोहारी दिखायी देने लगता है। कैलाश पर्वत पर छाये बड़े-बड़े बादल; तूफानी हवाओं से गरज-गरजकर दो-दो हाथ करते हैं। यद्यपि तूफानी हवाएँ (UPBoardSolutions.com) अन्ततः बादलों को उड़ा ले जाती हैं, फिर भी बादल अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत रहता है। आकाश में बादल छा जाने से किन्नर प्रदेश की शोभा अद्वितीय हो जाती है। सैकड़ों छोटे-बड़े झरने अपनी कल-कल ध्वनि से देवदार के वन को गुंजित कर देते हैं। इन वनों में किन्नर और किन्नरियाँ विलासितापूर्ण क्रीड़ाएँ करने लगती हैं।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नागार्जुन किस युग के कवि हैं?
उत्तर:
आधुनिक (प्रगतिवाद) युग के कवि हैं।

प्रश्न 2.
नागार्जुन की दो रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
युगधारा, खून और शोले।

प्रश्न 3.
नागार्जुन की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
नागार्जुन की भाषा सहज, सरल, बोधगम्य, स्पष्ट, स्वाभाविक और मार्मिक प्रभाव डालने वाली है। उनकी शैली स्वाभाविक और पाठकों के हृदय में तत्सम्बन्धी भावनाओं को उदीप्त करनेवाली होती है।

UP Board Solutions

प्रश्न 4.
बादल को घिरते देखा है? शीर्षक कविता का सारांश लिखिए।
नोट-इस प्रश्न के उत्तर के लिए लघु उत्तरीय प्रश्न संख्या 4 देखें।

प्रश्न 5.
‘बादल को घिरते देखा है’ शीर्षक कविता का उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
प्रस्तुत कविता ‘बादल को घिरते देखा है’ के माध्यम से कवि ने हिमालय पर्वत पर स्थित कैलाश पर्वत की चोटी के सौन्दर्य को वर्णित करने की चेष्टा की है।

प्रश्न 6.
‘बादल को घिरते देखा है’ कविता का प्रतिपाद्य बताइए।
उत्तर:
‘बादल को घिरते देखा है’ कविता का प्रतिपाद्य हिमालय पर्वत पर स्थित कैलाश पर्वत की चोटी का सौन्दर्य वर्णन है।

काव्य-सौन्दर्य एवं व्याकरण-बोध
1.
निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों का काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए
(अ) श्यामल शीतल अमल सलिल में।
समतल देशों के आ-आकर
पावस की उमस से आकुल
तिक्त मधुर बिस तंतु खोजते, हंसों को तिरते देखा है।

(ब) मृदुल मनोरम अँगुलियों को वंशी पर फिरते देखा है।
उत्तर:
(अ) काव्य-सौन्दर्य-

  • कैलाश पर्वत अत्यन्त रमणीक स्थान है। गर्मी की उमस से व्याकुल होकर यहाँ दूर देश के पक्षी आते हैं और विचरण करते हैं।
  • शैली-गेय है।
  • भाषा-सहज, स्वाभाविक एवं बोधगम्य है।
  • अलंकार-अनुप्रास।

(ब) काव्य-सौन्दर्य-

  • कवि कह रहा है कि कोमल अँगुलियों द्वारा वंशीवादन से लोग थिरक उठते हैं। जैसे गोपिकाएँ भगवान् श्रीकृष्ण की मुरली पर मोहित हो जाती थीं।
  • शैली-गेय है।
  • भाषा-सहज, स्वाभाविक एवं बोधगम्य है।

UP Board Solutions

2.
निम्नलिखित शब्द युग्मों से विशेषण-विशेष्य अलग कीजिएअतिशय शीतल, स्वर्णिम कमलों, प्रणय कलह, रजत-रचित।
उत्तर:
विशेषण                                   विशेष्य 

अतिशय                    –                शीतल
प्रणय                         –               कलह
स्वर्णिम                      –               कमलों
रजत                          –               रचित

We hope the UP Board Solutions for Class 9 Hindi Chapter 11 नागार्जुन (काव्य-खण्ड) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 9 Hindi Chapter 11 नागार्जुन (काव्य-खण्ड), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 5 अग्रपूजा (खण्डकाव्य)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 5 अग्रपूजा (खण्डकाव्य)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 10 Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 5 अग्रपूजा (खण्डकाव्य).

प्रश्न 1
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य का सारांश लिखिए। [2009, 12]
या
‘अग्रपूजा’ का कथा-सार अपने शब्दों में लिखिए। [2010, 11, 12, 14]
या
‘अग्रपूजा’ के कथानक का सारांश लिखिए। [2011, 12, 13, 17]
या
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए। [2010, 11, 12, 14, 15, 16, 17, 18]
या
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य की प्रमुख घटना का उल्लेख कीजिए। [2016]
उत्तर
श्री रामबहोरी शुक्ल द्वारा रचित ‘अग्रपूजा’ नामक खण्डकाव्य का कथानक श्रीमद्भागवत और महाभारत से लिया गया है। इसमें भारतीय जनजीवन को प्रभावित करने वाले महापुरुष श्रीकृष्ण के पावन चरित्र पर विविध दृष्टिकोणों से प्रकाश डाला गया है। (UPBoardSolutions.com) युधिष्ठिर ने अपने राजसूय यज्ञ में श्रीकृष्ण को सर्वश्रेष्ठ मानकर उनकी पूजा की थी, इसी आधार पर खण्डकाव्य का नामकरण हुआ है। सम्पूर्ण काव्य का कथानक छः सर्गों में विभक्त है। उनका सारांश इस प्रकार है

UP Board Solutions

‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य का प्रथम सर्ग ‘पूर्वाभास है। इस सर्ग की कथा का प्रारम्भ दुर्योधन द्वारा समस्त पाण्डवों का विनाश करने के लिए लाक्षागृह में आग लगवाने से होता है। दुर्योधन को पूर्ण विश्वास हो गया कि पाण्डव जलकर भस्म हो गये, परन्तु पाण्डवों ने उस स्थान से जीवित निकलकर दुर्योधन की चाल को विफल कर दिया। वे वेश बदलकर घूमते हुए द्रौपदी के स्वयंवर-मण्डप में पहुँचे और अर्जुन ने आसानी से मत्स्य-वेध करके स्वयंवर की शर्त पूर्ण की। कुन्ती की इच्छा और व्यास जी के अनुमोदन पर द्रौपदी का विवाह पाँचों भाइयों से कर दिया गया।

दुर्योधन पाण्डवों को जीवित देखकर ईर्ष्या की अग्नि में जलने लगा। धृतराष्ट्र भीष्म, द्रोण और विदुर । से परामर्श करके सत्य-न्याय की रक्षा के लिए पाण्डवों को आधा राज्ये देने हेतु सहमत हो गये। दुर्योधन, कर्ण, दुःशासन और शकुनि मिलकर सोचने लगे कि पाण्डवों से सदा-सदा के लिए कैसे मुक्ति मिले।

‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य का दूसरा सर्ग ‘सभारम्भ’ है। सर्ग का प्रारम्भ श्रीकृष्ण को साथ लेकर पाण्डवों के खाण्डव वन पहुँचने से होता है। वह विकराल वन था। श्रीकृष्ण ने विश्वकर्मा से उस वन-प्रदेश में पाण्डवों के लिए इन्द्रपुरी जैसे भव्य नगर का निर्माण कराया। (UPBoardSolutions.com) इस क्षेत्र का नाम इन्द्रप्रस्थ रखा गया। हस्तिनापुर से आये हुए अनेक नागरिक और व्यापारी वहाँ बस गये। व्यास भी वहाँ आये। युधिष्ठिर को भली-भाँति प्रतिष्ठित करने के बाद व्यास और कृष्ण इन्द्रप्रस्थ से चले गये। |

युधिष्ठिर का राज्य समृद्धि की ओर बढ़ चला। उनके शासन की कीर्ति सर्वत्र (सुरलोक और पितृलोक तक) प्रसारित हो गयी।

‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य का तीसरा सर्ग ‘आयोजन’ है। सर्ग की आरम्भिक कथा के अनुसार पाण्डवों ने सोचा कि नारी (द्रौपदी) कहीं उनके पारस्परिक संघर्ष का कारण न बने; अत: नारद जी की सलाह से उन्होंने द्रौपदी को एक-एक वर्ष तक अलग-अलग अपने साथ रखने का निश्चय किया। साथ ही यह भी तय कर लिया गया कि जब द्रौपदी किसी अन्य पति के साथ हो और दूसरा कोई भाई वहाँ पहुँचकर उन्हें देख ले तो वह बारह वर्षों तक वन में रहेगा। इस नियम-भंग के कारण अर्जुन बारह वर्षों के लिए वन को चले गये।

अनेक स्थानों पर भ्रमण करते हुए अर्जुन द्वारको पहुँचे। वहाँ श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा से विवाह करके वह इन्द्रप्रस्थ लौटे। युधिष्ठिर का राज्य सुख और शान्ति से चल रहा था। एक दिन देवर्षि नारद इन्द्रप्रस्थ नगरी में आये। उन्होंने पाण्डु का सन्देश देते हुए युधिष्ठिर को बताया कि यदि वे राजसूय यज्ञ करें तो उन्हें इन्द्रलोक में निवास मिल जाएगा। आयु पूर्ण हो जाने पर युधिष्ठिर भी वहाँ जाएँगे। युधिष्ठिर ने सलाह के लिए श्रीकृष्ण को द्वारका से बुलवाया और राजसूय यज्ञ की बात बतायी। श्रीकृष्ण ने सलाह दी कि जब तक जरासन्ध का वध न होगा, राजसूय यज्ञ सम्पन्न नहीं हो सकता। जरासन्ध को सम्मुख युद्ध में जीत पाना सम्भव नहीं था। श्रीकृष्ण ने जरासन्ध को तीनों का परिचय दिया और किसी से भी मल्लयुद्ध करने के लिए ललकारा। जरासन्ध ने भीम से मल्लयुद्ध करना स्वीकार कर लिया। श्रीकृष्ण के संकेत पर भीम ने उसकी एक टाँग को पैर से दबाकर दूसरी टाँग ऊपर को उठाते हुए बीच से चीर दिया। उसके पुत्र सहदेव को वहाँ का राजा बनाया। युधिष्ठिर ने चारों (UPBoardSolutions.com) भाइयों को दिग्विजय करने के लिए चारों दिशाओं में भेजा। इस प्रकार अब सम्पूर्ण भारत युधिष्ठिर के ध्वज के नीचे आ गया और युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ की योजनाबद्ध तैयारी प्रारम्भ कर दी।

UP Board Solutions

‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य का चतुर्थ सर्ग प्रस्थान है। इस सर्ग में राजसूय यज्ञ से पूर्व की तैयारियों का वर्णन किया गया है। राजसूय यज्ञ के लिए चारों ओर से राजागण आये। श्रीकृष्ण को बुलाने के लिए अर्जुन स्वयं द्वारका गये। उन्होंने प्रार्थना की कि आप चलकर यज्ञ को पूर्ण कराइए और पाण्डवों के मान-सम्मान की रक्षा कीजिए। श्रीकृष्ण ने सोचा कि इन्द्रप्रस्थ में एकत्र राजाओं में कुछ ऐसे भी हैं, जो मिलकर गड़बड़ी कर सकते हैं; अतः वे अपनी विशाल सेना लेकर इन्द्रप्रस्थ पहुँच गये। युधिष्ठिर ने नगर के बाहर ही बड़े सम्मान के साथ उनका स्वागत किया। श्रीकृष्ण के प्रभाव और स्वागत-समारोह को देखकर रुक्मी और शिशुपाल ईर्ष्या से तिलमिला उठे।

‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य का पञ्चम सर्ग ‘राजसूय यज्ञ’ है। राजसूय यज्ञ प्रारम्भ होने से पूर्व सभी राजाओं ने अपना-अपना स्थान ग्रहण कर लिया। युधिष्ठिर ने यज्ञ की सुचारु व्यवस्था के लिए पहले से ही स्वजनों को सभी काम बाँट दिये थे। श्रीकृष्ण ने स्वेच्छा से ही ब्राह्मणों के चरण धोने का कार्य अपने ऊपर ले लिया। जब भीष्म ने गम्भीर वाणी में सभासदों से पूछा, कृपया बताएँ कि अग्रपूजा का अधिकारी कौन है? सहदेव ने तुरन्त कहा कि यहाँ श्रीकृष्ण ही परम-पूज्य और प्रथम पूज्य हैं। भीष्म ने सहदेव का समर्थन किया। सभी लोगों ने उनका एक साथ अनुमोदन किया। केवल शिशुपाल ने श्रीकृष्ण के चरित्र पर दोषारोपण करते हुए इस बात का विरोध किया। अन्ततः सहदेव ने कहा कि मैं श्रीकृष्ण को सम्मानित करने जा रहा हूँ, जिसमें भी सामर्थ्य हो वह मुझे रोक ले। शिशुपाल तुरन्त क्रोधातुर होकर श्रीकृष्ण पर आक्रमण करने दौड़ा। श्रीकृष्ण मुस्कराते रहे और तब वह श्रीकृष्ण के प्रति नाना प्रकार के अपशब्द कहने लगा। श्रीकृष्ण ने उसे सावधान किया और कहा कि फूफी को वचन देने के कारण ही मैं तुझे क्षमा करता जा रहा हूँ। फिर भी शिशुपाल ने माना और उनकी कटु निन्दा करता रहा, अन्ततः श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट दिया।

UP Board Solutions

षष्ठ सर्ग ‘उपसंहार’ में उल्लिखित शिशुपाल और कृष्ण के विवाद का यज्ञ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। यज्ञ निर्विघ्न चलता रहा। व्यास, धौम्य आदि सोलह तत्त्वज्ञानी ऋषियों ने यज्ञ-कार्य सम्पन्न किया। युधिष्ठिर ने उन्हें दान-दक्षिणा देकर उनका यथोचित सत्कार किया। (UPBoardSolutions.com) तत्त्वज्ञानी ऋषियों ने भी युधिष्ठिर को हार्दिक आशीर्वाद दिया, जिसे युधिष्ठिर ने विनम्र भाव से शिरोधार्य किया।

प्रश्न 2
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के प्रथम सर्ग ‘पूर्वाभास’ का सारांश लिखिए। [2013, 14, 15]
उत्तर
दुर्योधन ने समस्त पाण्डवों का विनाश करने के लिए लाक्षागृह में आग लगवा दी। उसे पूर्ण विश्वास हो गया कि पाण्डव जलकर भस्म हो गये, परन्तु पाण्डवों ने उस स्थान से जीवित निकलकर दुर्योधन की चाल को विफल कर दिया। वे वेश बदलकर घूमते हुए द्रौपदी के स्वयंवर-मण्डप में पहुँचे और अर्जुन ने आसानी से मत्स्य-वेध करके स्वयंवर की शर्त पूर्ण की। राजाओं ने ब्राह्मण वेशधारी अर्जुन पर आक्रमण कर दिया, किन्तु अर्जुन और भीम ने अपने पराक्रम से उन्हें परास्त कर दिया। बलराम और श्रीकृष्ण भी उस स्वयंवर में उपस्थित थे। उन्होंने छिपे हुए वेश में भी पाण्डवों को पहचान लिया और रात में उनके निवास-स्थल पर उनसे मिलने हेतु गये। राजा द्रुपद को जब अपने पुत्र से पाण्डवों की वास्तविकतो ज्ञात हुई तो द्रुपद ने उन्हें राजभवन में आमन्त्रित किया और कुन्ती की इच्छा और (UPBoardSolutions.com) व्यास जी के अनुमोदन पर द्रौपदी का विवाह पाँचों भाइयों से कर दिया गया।

UP Board Solutions

इधर दुर्योधन पाण्डवों को जीवित देखकर ईष्र्या की अग्नि में जलने लगा। शकुनि उसे और भी उकसाने लगा। वह कर्ण को लेकर धृतराष्ट्र के पास पहुँचा और पाण्डवों के विनाश की अपनी इच्छा पर चर्चा की। धृतराष्ट्र ने उसे अपने भाई पाण्डवों के साथ प्रेमपूर्वक रहने की सलाह दी, लेकिन वह नहीं माना। कर्ण ने उसे पाण्डवों को युद्ध करके जीत लेने हेतु प्रेरित किया। लेकिन उसने कर्ण की सलाह भी नहीं मानी। अन्ततः धृतराष्ट्र चिन्तित होकर भीष्म, द्रोण और विदुर से परामर्श करके सत्य-न्याय की रक्षा के लिए पाण्डवों को आधा राज्य देने हेतु सहमत हो गये। विदुर कुन्ती, द्रौपदी सहित पाण्डवों को साथ लेकर हस्तिनापुर आये। जनता ने उनका भव्य स्वागत किया। धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर का राज्याभिषेक कर उनसे खाण्डव वन को पुनः बसाने के लिए कहा। श्रीकृष्ण ने धृतराष्ट्र से पाण्डवों को आशीर्वाद देने के लिए कहा। धृतराष्ट्र ने खेद प्रकट करते हुए प्रसन्न मन से उन्हें विदा कर दिया। दुर्योधन, कर्ण, दुःशासन और शकुनि मिलकर सोचने लगे कि (UPBoardSolutions.com) पाण्डवों से सदा-सदा के लिए कैसे मुक्ति मिले।

प्रश्न 3
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के सभारम्भ सर्ग (द्वितीय सर्ग) का सारांश लिखिए। [2010, 12]
उत्तर
श्रीकृष्ण को साथ लेकर पाण्डव खाण्डव वन पहुँचे। वह विकराल वन था। श्रीकृष्ण ने विश्वकर्मा से उस वन-प्रदेश में पाण्डवों के लिए इन्द्रपुरी जैसे भव्य नगर का निर्माण कराया। नगर रक्षा के लिए शतघ्नी शक्ति, शस्त्रागार, सैनिक गृह आदि निर्मित किये गये। सर्वत्र सुरम्य उद्यान और लम्बे-चौड़े भव्य मार्ग थे। वहाँ निर्मल जल से परिपूर्ण नदियाँ और कमल से सुशोभित सरोवर थे। इस क्षेत्र का नाम इन्द्रप्रस्थ रखा गया। हस्तिनापुर से आये हुए अनेक नागरिक और व्यापारी वहाँ बस गये। व्यास भी वहाँ आये। युधिष्ठिर को भली-भाँति प्रतिष्ठित करने के बाद व्यास और कृष्ण इन्द्रप्रस्थ से चले गये। श्रीकृष्ण जैसा हितैषी पाकर उनके उपकारों से पाण्डव अपने आपको धन्य मानते थे। युधिष्ठिर ने सत्य, न्याय और प्रेम के आधार पर आदर्श शासन किया। उन्होंने रामराज्य को आदर्श मानकर प्रजा के लिए पृथ्वी पर स्वर्ग उतार लाने जैसे कार्य किये। युधिष्ठिर का राज्य समृद्धि की ओर बढ़ चला। उनके शासन की कीर्ति सर्वत्र (सुरलोक और पितृलोक तक) प्रसारित हो गयी।

प्रश्न 4
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के आयोजन सर्ग’ (तृतीय सर्ग) का कथासार (कथावस्तु, कथानक) अपने शब्दों में लिखिए। [2009, 10, 11, 13, 14, 17]
या
‘अग्रपूजा के आधार पर जरासन्ध वध को वर्णन कीजिए। [2017, 18]
उत्तर
संसार में धन, धरती और स्त्री के कारण संघर्ष होते आये हैं। कौरव धन और धरती के पीछे ही पागल थे। पाण्डवों ने सोचा कि नारी (द्रौपदी) कहीं उनके पारस्परिक संघर्ष का कारण न बने; अत: नारद जी की सलाह से उन्होंने द्रौपदी को एक-एक वर्ष तक अलग-अलग अपने साथ रखने का निश्चय किया। साथ ही यह भी तय कर लिया गया कि जब द्रौपदी किसी पति के साथ हो और कोई दूसरा भाई वहाँ पहुँचकर उन्हें देख ले तो वह बारह वर्षों तक वन में रहेगा।

UP Board Solutions

एक दिन चोरों ने एक ब्राह्मण की गायें चुरा लीं। वह राजभवन में न्याय और सहायता के लिए पहुँचा। अर्जुन उसकी रक्षा के लिए शस्त्रागार से शस्त्र लेने गये तो वहाँ उन्होंने द्रौपदी को युधिष्ठिर के साथ देख लिया। उन्होंने चोरों से गायें छुड़ाकर ब्राह्मण को दे दीं और नियम-भंग के कारण बारह वर्षों के लिए वन को चले गये।

अनेक स्थानों पर भ्रमण करते हुए अर्जुन द्वारका पहुँचे। वहाँ श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा से विवाह करके वह इन्द्रप्रस्थ लौटे। श्रीकृष्ण भी अपनी बहन के लिए बहुत सारा दहेज लेकर इन्द्रप्रस्थ आये और बहुत दिनों तक रुके। श्रीकृष्ण और अर्जुन ने मिलकर अग्निदेव के हित हेतु खाण्डव वन का दाह किया। अग्निदेव ने प्रसन्न होकर अर्जुन को कपिध्वज नामक रथ, करूण ने गाण्डीव धनुष और दो अक्षय तृणीर उपहार में दिये। (UPBoardSolutions.com) श्रीकृष्ण को अग्निदेव ने कौमोदकी गदा और सुदर्शन चक्र प्रदान किये। यहीं अग्नि की लपटों से व्याकुल मय नामक राक्षस ने सहायता के लिए आर्त पुकार की। अर्जुन ने उसे बचा लिया और उसने कृतज्ञतापूर्वक कृष्ण के कहने पर युधिष्ठिर के लिए एक अलौकिक सभा-भवन का निर्माण किया। मय दानव ने अर्जुन को ‘देवदत्त शंख और भीम को एक भारी गदा भेंट की।

युधिष्ठिर का राज्य सुख और शान्ति से चल रहा था। एक दिन देवर्षि नारद इन्द्रप्रस्थ नगरी में आये। उन्होंने पाण्डु का सन्देश देते हुए युधिष्ठिर को बताया कि यदि वे राजसूय यज्ञ करें तो उन्हें इन्द्रलोक में निवास मिल जाएगा। आयु पूर्ण हो जाने पर युधिष्ठिर भी वहाँ जाएँगे। युधिष्ठिर ने नारद के द्वारा सद्धेश भेजकर सलाह के लिए श्रीकृष्ण को द्वारका से बुलवाया और राजसूय यज्ञ की बात बतायी। श्रीकृष्ण ने कह दी कि जब तक जरासन्ध का वध न होगा, राजसूय यज्ञ सम्पन्न नहीं हो सकता। इसीलिए उन्होंने अर्जुन.और भीम को साथ लेकर मगध की राजधानी गिरिव्रज की ओर प्रस्थान किया और ब्रह्मचारी वेश में नगर में प्रवेश किया। जरासन्ध ने रुद्रयज्ञ में बलि देने के लिए दो हजार राजाओं को बन्दी बना रखा था। श्रीकृष्ण का विचार था कि जरासन्ध को मारने पर यज्ञ का मार्ग भी साफ हो जाएगा और राजाओं की मुक्ति भी हो जाएगी, किन्तु जरासन्ध को सम्मुख युद्ध में जीत पाना सम्भव नहीं था। श्रीकृष्ण ने जरासन्ध को तीनों का परिचय दिया और किसी से भी मल्लयुद्ध करने के लिए ललकारा। जरासन्ध ने भीम को ही अपने जोड़ का समझकर उससे मल्लयुद्ध करना स्वीकार कर लिया। तेरह दिन के युद्ध के बाद जरासन्ध के थक जाने पर भीम ने टाँग पकड़कर घुमा-घुमाकर उसे पृथ्वी पर पटकना शुरू कर दिया। श्रीकृष्ण के संकेत पर भीम ने उसकी एक टाँग को पैर से दबाकर दूसरी टाँग ऊपर को उठाते हुए बीच से चीर दिया। इसके बाद उन्होंने समस्त बन्दी राजाओं को मुक्त कर दिया और जरासन्ध के पुत्र सहदेव को वहाँ का राजा बनाया, जिसने युधिष्ठिर की अधीनता स्वीकार कर ली। इन्द्रप्रस्थ लौटकर (UPBoardSolutions.com) श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से विदा लेकर द्वारका चले गये। युधिष्ठिर ने चारों भाइयों को दिग्विजय करने के लिए चारों दिशाओं में भेजा। चारों भाइयों ने सभी राजाओं को जीतकर युधिष्ठिर के अधीन कर दिया। इस प्रकार अब सम्पूर्ण भारत युधिष्ठिर के ध्वज के नीचे आ गया।

UP Board Solutions

युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ की योजनाबद्ध तैयारी प्रारम्भ कर दी। एक भव्य विशाल यज्ञशाला बनायी गयी। सभी दिशाओं में निमन्त्रण-पत्र भेजे गये। कौरवों सहित अनेकानेक राजा यज्ञ में भाग लेने के लिए इन्द्रप्रस्थ में एकत्र होने लगे। सबका यथोचित सत्कार करके उपयुक्त आवासों में ठहराया गया। वहाँ देव, मनुज और दानव सभी स्वभाव के लोग आमन्त्रित एवं एकत्रित हुए।

प्रश्न 5
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के प्रस्थान’ सर्ग (चतुर्थ सर्ग) का सारांश लिखिए। [2010]
उत्तर
राजसूय यज्ञ के लिए चारों ओर से राजागण आये। श्रीकृष्ण को बुलाने के लिए अर्जुन स्वयं द्वारका गये। उन्होंने प्रार्थना की कि आप चलकर यज्ञ को पूर्ण कराइए और पाण्डवों के मान-सम्मान की रक्षा कीजिए। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को विदा कर बलराम, उद्धव और दरबारी जनों से विचार-विमर्श किया। उन्होंने सोचा कि इन्द्रप्रस्थ में एकत्र राजाओं में कुछ ऐसे भी हैं, जो ऊपरी मन से तो अधीनता स्वीकार कर चुके हैं, पर मन से उनके विरोधी हैं। ये लोग मिलकर कुछ गड़बड़ी अवश्य कर सकते हैं; अत: निश्चय हुआ कि वे पूरी साज-सज्जा और सैन्य बल के साथ तैयार होकर जाएँगे। श्रीकृष्ण अपनी विशाल सेना लेकर इन्द्रप्रस्थ पहुँच गये। युधिष्ठिर ने नगर के बाहर ही बड़े सम्मान के साथ उनका स्वागत किया और स्वयं श्रीकृष्ण का रथ हाँकते हुए उन्हें नगर में प्रवेश कराया। विशाल जन-समुदाय (UPBoardSolutions.com) श्रीकृष्ण की शोभा-यात्रा को देखने के लिए उमड़ पड़ा। नगरवासी अपार श्रद्धा और प्रेम से श्रीकृष्ण का गुणगान कर रहे थे। श्रीकृष्ण भव्य स्वागत के बाद युधिष्ठिर के महल में ठहराये गये। श्रीकृष्ण के प्रभाव और स्वागत-समारोह को देखकर रुक्मी और शिशुपाल ईष्र्या से तिलमिला उठे। वे पहले से ही श्रीकृष्ण से द्वेष रखते थे। वे रातभर इसी वैरभाव और द्वेष की आग में जलते रहे और क्षणभर भी सो न सके।

UP Board Solutions

प्रश्न 6
‘अग्रपूजा’ के आधार पर शिशुपाल वध का वर्णन संक्षेप में कीजिए। [2010, 12]
या
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के ‘राजसूय यज्ञ’ सर्ग (पञ्चम सर्ग) का सारांश अपने शब्दों में लिखिए। [2011, 13, 14]
या
सभा में शिशुपाल से भीष्म ने क्या कहा, इस पर विशेष प्रकाश डालिए।
या
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के पञ्चम सर्ग (राजसूय यज्ञ) का सारांश लिखिए। [2009, 10, 11, 12, 13, 14, 18]
या
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य में सबसे अधिक प्रभावित करने वाली घटना का सकारण उल्लेख कीजिए।
या
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के आधार पर शिशुपाल वध के सन्दर्भ में श्रीकृष्ण की सहनशीलता का उल्लेख कीजिए। [2009]
उत्तर
यज्ञ प्रारम्भ होने से पूर्व सभी राजाओं ने अपना-अपना स्थान ग्रहण कर लिया। युधिष्ठिर ने यज्ञ की सुचारु व्यवस्था के लिए पहले से ही स्वजनों को सभी काम बाँट दिये थे। श्रीकृष्ण ने स्वेच्छा से ही ब्राह्मणों के चरण धोने का कार्य अपने ऊपर ले लिया। यज्ञ कार्य करने आये ब्राह्मणों के चरण श्रीकृष्ण ने धोये। जब यज्ञशाला में बलराम और सात्यकि के साथ श्रीकृष्ण पधारे तो सभी लोगों ने उठकर उनका सम्मान किया। केवल शिशुपाल ही उनके आगमन को अनदेखा-सा करते हुए जान-बूझकर बैठा रहा। सबकी आँखें श्रीकृष्ण पर टिकी रह गयीं। तभी भीष्म ने गम्भीर वाणी में सभासदों से पूछा, कृपया बताएँ कि सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति कौन है, जिसे सर्वप्रथम पूजा जाए; अर्थात् अग्रपूजा का अधिकारी कौन है? सहदेव ने तुरन्त कहा कि यहाँ श्रीकृष्ण ही परम-पूज्य और प्रथम पूज्य हैं। भीष्म ने सहदेव का समर्थन किया और सभी लोगों ने उनका एक साथ अनुमोदन किया। केवल शिशुपाल ने श्रीकृष्ण के चरित्र पर दोषारोपण करते हुए इस बात को विरोध किया। भीम को क्रोध आया, पर भीष्म ने भीम को रोक दिया। भीष्म बड़े संयम और शान्त भाव से शिशुपाल के तर्कों का उत्तर देते हुए बोले कि “स्वार्थ की हानि और ईष्र्या के वशीभूत होने पर मानव अन्धा हो जाता है। उसे गुण भी दोष और यश की सुगन्ध दुर्गन्ध प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि मनुष्यता की महिमा पूर्ण रूप में कृष्ण में ही दिखाई पड़ती है और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में ये पूर्णरूपेण (UPBoardSolutions.com) डूबे हुए हैं। इनका सम्पूर्ण जीवन ही योग-भोग के जनक सदृश है। इनके समान रूप में जन्म लेने वाला ही इन्हें जान सकता है। सीमित दृष्टि और द्वेष बुद्धि रखने वाला व्यक्ति इन्हें नहीं जान सकता। ये पुष्प की पंखुड़ियों से भी कोमल हैं; दया, प्रेम, करुणा के भण्डार हैं तथा शील, सज्जनता, विनय और प्रेम के प्रत्यक्ष शरीर हैं। ये अनीति को मिटाते हैं। तथा धर्म-मर्यादा की स्थापना करते हैं। इस तरह से भीष्म ने श्रीकृष्ण के गुणों का वर्णन किया, फिर भी शिशुपाल अनर्गल ही बकता रहा। अन्ततः सहदेव ने कहा कि मैं श्रीकृष्ण को सम्मानित करने जा रहा हूँ, जिसमें भी सामर्थ्य हो वह मुझे रोक ले। यह कहकर सहदेव ने सर्वप्रथम श्रीकृष्ण के चरण धोये और फिर अन्य सभी पूज्यों के पाद-प्रक्षालन किये। शिशुपाल तुरन्त क्रोधातुर होकर श्रीकृष्ण पर आक्रमण करने दौड़ा। श्रीकृष्ण मुस्कराते रहे। शिशुपाल को चारों ओर कृष्ण-ही-कृष्ण दिखाई दे रहे थे। वह इधर-उधर दौड़कर घूसे मारने की चेष्टा करता हुआ हाँफने लगा और श्रीकृष्ण के प्रति नाना प्रकार के अपशब्द कहने लगा। श्रीकृष्ण ने उसे सावधान किया और कहा कि फूफी को वचन देने के कारण ही मैं तुझे क्षमा करता जा रहा हूँ। फिर भी शिशुपाल न माना और उनकी कटु निन्दा करता रहा, अन्तत: श्रीकृष्ण ने सुदर्शन-चक्र से उसका सिर काट दिया। युधिष्ठिर ने शिशुपाल के पुत्र को उसके बाद चेदि राज्य का राजा घोषित कर दिया।

प्रश्न 7
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के ‘उपसंहार’ सर्ग (षष्ठ सर्ग) का सारांश (कथासार) अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
पञ्चम सर्ग में उल्लिखित शिशुपाल और कृष्ण के विवाद का यज्ञ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा
और यज्ञ निर्विघ्न चलता रहा। व्यास, धौम्य आदि सोलह तत्त्वज्ञानी ऋषियों ने यज्ञ-कार्य सम्पन्न किया। युधिष्ठिर ने उन्हें दान-दक्षिणा देकर उनका यथोचित सत्कार किया। उन्होंने बलराम और श्रीकृष्ण के प्रति अपना आभार प्रकट किया। सभी राजा उनके सौम्य स्वभाव और सत्कार से सन्तुष्ट हुए और उन्होंने युधिष्ठिर को अपना अधिपति मानते हुए उनकी आज्ञा-पालन करने का वचन दिया। तत्त्वज्ञानी ऋषियों ने भी युधिष्ठिर को हार्दिक आशीर्वाद दिया, जिसे युधिष्ठिर ने विनम्र भाव से शिरोधार्य किया।

UP Board Solutions

प्रश्न 8
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के आधार पर उसके नायक श्रीकृष्ण का चरित्र-चित्रण कीजिए। [2009, 11, 12, 13, 14, 15, 17]
या
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्यः का नायक कौन है ? उसकी चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। [2009, 10, 11, 12, 13, 14, 17]
या
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के पात्रों में जिस पात्र ने आपको सबसे अधिक प्रभावित किया हो अथवा सर्वश्रेष्ठ पात्र के चरित्र की विशेषताओं का वर्णन कीजिए। [2010]
या
‘अग्रपूजा के किसी प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए। [2011, 12, 16, 17, 18]
या
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के आधार पर श्रीकृष्ण की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए। [2015]
या
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के नायक के गुणों का संक्षेप में वर्णन कीजिए। [2015]
या
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के प्रधान पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए। [2018]
उत्तर
श्री रामबहोरी शुक्ल द्वारा रचित ‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के नायक श्रीकृष्ण हैं। सम्पूर्ण काव्य में श्रीकृष्ण ही प्रमुख पात्र के रूप में उभरकर आये हैं। युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में सर्वप्रथम श्रीकृष्ण की ही पूजा होती है। वे ही समस्त घटनाओं के सूत्रधार भी हैं। हमें उनके चरित्र में निम्नलिखित विशेषताएँ दिखाई पड़ती हैं

(1) लीलाधारी दिव्य पुरुष–कवि ने मंगलाचरण में श्रीकृष्ण के विष्णु-रूप का स्मरण किया है। विश्वकर्मा से भयानक खाण्डव वन में अलौकिक नगर का निर्माण करवा देने तथा शिशुपाल को अनेक रूपों में दिखाई देने के कारण वे पाठकों को अलौकिक पुरुष के रूप में प्रतीत होते हैं।

(2) शिष्ट एवं विनयी—श्रीकृष्ण सदा बड़ों के प्रति नम्र भाव रखते हैं। वे कुन्ती आदि पूज्यजनों के सम्मुख शिष्टाचार और नम्रता का व्यवहार करते हैं। स्वयं अलौकिक शक्तिसम्पन्न होते हुए भी वे विनम्रता से युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में ब्राह्मणों के चरण धोने का कार्य स्वेच्छा से ग्रहण करते हैं।

(3) पाण्डवों के परम हितैषी-श्रीकृष्ण पाण्डवों के परम हितैषी हैं। वे उनके सभी कार्यों में पूर्ण सहयोग देते हैं। द्रौपदी के स्वयंवर में पाण्डवों को पहचानकर वे उनसे आत्मीयता से मिलने जाते हैं। वे पाण्डवों के लिए इन्द्रपुरी सदृश नगर का निर्माण करवाते हैं और उनके राजसूय यज्ञ की सफलता के लिए जरासन्ध को मारने की योजना बनाते हैं। राजसूय यज्ञ में किसी विरोधी राजा के विघ्न डालने की आशंका से वे ससैन्य यज्ञ में पहुंचते हैं। इन बातों से स्पष्ट है कि श्रीकृष्ण पाण्डवों के शुभचिन्तक हैं। |

(4) अनुपम सौन्दर्यशाली–श्रीकृष्ण अलौकिक महापुरुष और अनुपम सौन्दर्यशाली थे। इन्द्रप्रस्थ जाते समय सभी नगरवासी उनके सौन्दर्य को देखने के लिए दौड़ पड़े थे। इन्द्रप्रस्थ की नारियाँ उनकी मधुर मुस्कान पर मुग्ध होकर न्योछावर हो जाती हैं

देखा सुना न पढ़ा कहीं भी, ऐसा अनुपम रूप अमन्द।
ऐसी मधु मुस्कान न देखी, हैं गोविन्द सदृश गोविन्द ॥

(5) धैर्यवान् एवं शक्तिसम्पन्न–श्रीकृष्ण परमवीर थे, यही कारण है कि वे केवल अर्जुन और भीम को साथ लेकर जरासन्ध का वध करने पहुँच जाते हैं। शिशुपाल की अशिष्टता और नीचता को भी वे बहुत देर तक सहन करते हैं। भीष्म के समझाने (UPBoardSolutions.com) पर भी जब वह दुर्वचन कहने से नहीं माना तो उन्होंने उसे दण्ड देने का निश्चय कर लिया और सुदर्शन-चक्र से उसका वध कर दिया।

(6) धर्म एवं मर्यादापालक-श्रीकृष्ण राजसूय यज्ञ में ब्राह्मणों के चरण धोते हैं एवं यज्ञ में मर्यादा की रक्षा के कारण ही शिशुपाल के निन्दाजनक शब्दों को शान्त-भाव से क्षमा करते हैं। वे आदर्श मानव हैं। भीष्म के शब्दों में

शील, सुजनता, विनय, प्रेम के केशव हैं प्रत्यक्ष शरीर।
मिटा अनीति, धर्म मर्यादा स्थापन करते हैं यदुवीर॥

(7) अनासक्त योगी–श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व में भोग और योग का सुन्दर समन्वय है। वे सांसारिक होते हुए भी संसार से निर्लिप्त हैं। जल में कमल-पत्र की भाँति वे मनुष्यों के सभी कार्यों को अनासक्त रहकर । पूर्ण करते हैं। सबके पूजनीय होने के कारण ही उन्हें अग्रपूजा के लिए चुना जाता है।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि कृष्ण अत्यन्त शिष्ट और विनम्र हैं। वे पाण्डवों के परम हितचिन्तक और अनुपम सौन्दर्यवान् हैं। वे धर्म एवं मर्यादा के पालक और अलौकिक शक्तिसम्पन्न हैं। उनके बारे में स्वयं भीष्म कहते हैं-“श्रीकृष्ण महामानव हैं, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे रहने वाले हैं। संसार में रहकर भी वे अनासक्त और कर्मयोगी हैं। उनमें रूप, शील एवं शक्ति का अनुपम भण्डार है। योग तथा भोग से पूर्ण इनका व्यक्तित्व अनूठा उदाहरण है। ये सज्जनता, विनम्रता, प्रेम तथा उदारता के पुंज हैं। इस बात में तनिक भी सन्देह नहीं है कि श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व अत्यन्त आदर्शपूर्ण एवं महान् है।”

UP Board Solutions

प्रश्न 9
‘अग्रपूजा के आधार पर युधिष्ठिर का चरित्र-चित्रण कीजिए। [2010,15]
या
‘अग्रपूजा’ के आधार पर युधिष्ठिर के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2010, 12, 14]
या
‘अग्रपूजा’ में जिस पात्र के चारित्रिक गुणों ने आपको प्रभावित किया है, उस पर संक्षेप में – प्रकाश डालिए। [2009, 10]
उत्तर
युधिष्ठिर पाण्डवों में सबसे बड़े थे। इन्द्रप्रस्थ में उनका ही राज्याभिषेक किया जाता है। सभी राजा उनकी अधीनता को स्वीकार करते हैं तथा वे ही राजसूय यज्ञ सम्पन्न कराते हैं। इस प्रकार युधिष्ठिर ‘अग्रपूजा’ काव्य के प्रमुख पात्र हैं। उनका चरित्र मानव-आदर्शों की स्थापना करने वाला है, जिसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं–

(1) विनम्र स्वभाव-युधिष्ठिर विनम्र स्वभाव के हैं। इन्द्रप्रस्थ में गुरु द्रोणाचार्य (UPBoardSolutions.com) के प्रवेश करते ही वे विनय भाव से उनके चरणों में गिर पड़ते हैं। राजसूय यज्ञ के समय श्रीकृष्ण के आने पर वे उनका रथ स्वयं हाँककर उन्हें नगर में प्रवेश कराते हैं। यज्ञ के समाप्त होने पर वे तत्त्वज्ञानी ऋषियों को पर्याप्त दान-दक्षिणा देते हैं और उनके आशीर्वाद को विनय-भाव से स्वीकार करते हैं।

(2) आदर्श शासक-महाराज युधिष्ठिर एक आदर्श शासक के रूप में हमारे सामने आते हैं। वे राम-राज्य को आदर्श मानकर प्रजा को सुखी-सम्पन्न बनाने का प्रयत्न करते हैं

था प्रयत्न उनकी यह निशदिन, लायें भू पर स्वर्ग उतार।।

वे भारत के सभी राजाओं को जीतकर शक्तिशाली भारत राष्ट्र का निर्माण करते हैं।

(3) धार्मिक तथा सत्य-प्रेमी-युधिष्ठिर धार्मिक और सत्यप्रेमी हैं। वे प्रत्येक कार्य को धर्म और न्याय के अनुसार करते हैं और सदैव सत्य के पथ पर चलते हैं। उनके सम्बन्ध में स्वयं नारद जी इस प्रकार कहते हैं—

बोल उठे गद्गद वाणी से—धर्मराज, जीवन तव धन्य।
धरणी में सत्कर्म-निरत जन नहीं दीखता तुम-सा अन्य।

राजसूय यज्ञ को सम्पन्न करके वे अपने पिता की इच्छा को पूर्ण करते हैं।

(4) उदारहृदय-युधिष्ठिर अत्यन्त उदार हैं। वे राज्य के लिए दुर्योधन से झगड़ा नहीं करते और खाण्डव वन के भाग को ही राज्य के रूप में प्रसन्नता से स्वीकार कर लेते हैं। वे किसी राजा के राज्य को अपने राज्य में नहीं मिलाते। उन्होंने शिशुपाल और जरासन्ध का वध होने पर भी उनके राज्य को उनके पुत्रों को सौंप दिया। वे राजसूय यज्ञ में उदारतापूर्वक ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देते हैं।

इस प्रकार युधिष्ठिर परम विनीत, धर्मात्मा, सत्य-प्रेमी, उदारहदय एवं सुयोग्य शासक हैं।

प्रश्न 10
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के आधार पर शिशुपाल का चरित्र-चित्रण कीजिए। [2012, 15]
उत्तर
शिशुपाल भी ‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य को एक प्रमुख चरित्र है। वह चेदि राज्य का स्वामी है। प्रस्तुत खण्डकाव्य में उसकी भूमिका खलनायक की है। वह हमें ईर्ष्यालु, क्रोधी, अविनीत और अशिष्ट व्यक्ति के रूप में दृष्टिगोचर होता है। शिशुपाल का चरित्र-चित्रण इस प्रकार किया जा सकता है-

(1) श्रीकृष्ण का शत्रु-शिशुपाल और श्रीकृष्ण के बीच पुरानी शत्रुता है। शिशुपाल रुक्मी की बहन रुक्मिणी से विवाह करना चाहता था, किन्तु रुक्मिणी श्रीकृष्ण को हृदय से पति-रूप में वरण कर चुकी थी। इसलिए श्रीकृष्ण रुक्मिणी का हरण कर द्वारका ले आये और वहाँ उन्होंने उससे विवाह कर लिया। इस घटना से शिशुपाल श्रीकृष्ण को अपना शत्रु मानने लगा।

(2) ईष्र्यालु व्यक्ति–शिशुपाल स्वभाव से बहुत ईष्र्यालु व्यक्ति है। (UPBoardSolutions.com) इन्द्रप्रस्थ में श्रीकृष्ण का अधिक सम्मान होना उसे काँटे की तरह चुभ रहा था। इसी कारण ईर्ष्या की आग में जलते हुए वह अकारण ही श्रीकृष्ण के प्रति जहर उगलता हुआ अपशब्दों का प्रयोग करता है-

UP Board Solutions

आज यहाँ हैं ज्ञानी योगी, पण्डित, ऋषि, नृप, अनुपम वीर।
फिर भी अग्र अर्चना होगी, उसकी जो गोपाल अहीर॥

शिशुपाल ईर्ष्यावश श्रीकृष्ण को नाचने-कूदने वाला, छलिया और अशिष्ट भी बतलाता है।

(3) क्रोधी और अभिमानी–शिशुपाल में क्रोध और अभिमान का भाव कूट-कूटकर भरा था। वह भरी सभा में सीना तानकर श्रीकृष्ण की ओर हाथापाई के लिए बढ़ता है और उन्हें भला-बुरा कहकर ललकारता है-

वह बोला मायावी, छलिया, इन्द्रजाल अब करके बन्द।।
आ सम्मुख तू बच न सकेगा, करके ये सारे छल छन्द ॥

उसके अभिमानी स्वभाव के कारण ही उस पर भीष्म के उपदेश और सहदेव की सूझ-बूझ का कोई प्रभाव नहीं होता।।

(4) अशिष्ट-शिशुपाल की वाणी में दूसरों के प्रति शिष्टता का अभाव है। वह जहाँ (UPBoardSolutions.com) एक ओर अग्रपूजा के लिए श्रीकृष्ण का नाम प्रस्तावित करने को सहदेव का लड़कपन बताता है, वहाँ दूसरी ओर भीष्म की बुद्धि को भी मारी गयी कहता है

लगता सठिया गये भीष्म हैं, मारी गयी बुद्धि भरपूर।।
तभी अनर्गल बातें करते, करो यहाँ से इनको दूर ॥

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि शिशुपाल का चरित्र एक खलनायक के रूप में अनेक दोषों से भरा है।

We hope the UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 5 अग्रपूजा (खण्डकाव्य) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 5 अग्रपूजा (खण्डकाव्य), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.