UP Board Class 5 नैतिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य शिक्षा

UP Board Class 5 नैतिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य शिक्षा

नैतिक शिक्षा का उद्देश्य

१. छात्रों में सदैव सत्य बोलने की भावना जाग्रत् करना।
२. छात्रों में परोपकार एवं दया की भावना जाग्रत करना।
३. छात्रों में देश-प्रेम की भावना जाग्रत करना।
४. छात्रों में अपने माता-पिता, गुरुजनों का सम्मान करने की भावना जाग्रत् करना।

योग-शिक्षा

प्रश्न १.
योग किसे कहते हैं?
उत्तर:
आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की प्रक्रिया ही योग है।

प्रश्न २.
आसन करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर:
आसन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए
१. आसन खाली पेट करना चाहिए।
२. आसन करते समय ढीले वस्त्र पहनने चाहिए।
३. आसन करने का कमरा खुला एवं हवादार होना चाहिए।
४. जमीन पर मोटा कपड़ा या कम्बल बिछाकर आसन करना चाहिए।
५. प्रत्येक आसन करने के बाद शरीर को ढीला छोड़ देना चाहिए, जिससे शरीर के प्रत्येक अंग को आराम मिले।

प्रश्न ३.
आसनों से प्राप्त होनेवाले लाभ का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आसनों से निम्नलिखित बिन्दुओं में लाभ होता है
१. आसन करने से शरीर स्वस्थ, सुडौल, सुन्दर एवं नीरोग रहता है।
२. आसन शरीर के अंगों को मजबूत बनाता है।
३. आसन करने से शरीर चुस्त रहता है।
४. आसन करने से शरीर में लचीलापन बना रहता है।
५. आसन करने से शरीर का आलस्य दूर रहता है।
६. आसन करने से मन को एकाग्र करने तथा आत्म-चिंतन में सहायता मिलती है।

सुखासन

विधि – जिन छात्रों को पद्मासन कठिन प्रतीत होता है, उनके लिए सुखासन सुविधाजनक है। इस आसन में पालथी मारकर सीधा बैठना चाहिए; किन्तु कमर झुकी न हो, यह ध्यान रहे। बाएँ हाथ की हथेली बाएँ घुटने पर और दाएँ हाथ की हथेली दाएँ घुटने पर आराम से रखनी चाहिए। हाथों की अंगुलियों एवं नेत्रों को सहज रखें।
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लाभ: इस आसन से हाथों और टाँगों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं और पाचनशक्ति बढ़ती है। घुटनों में जमा हुआ रक्तविकार दूर हो जाता है।

वज्रासन
इस आसन में बैठनेवाला व्यक्ति दृढ़ और मजबूत स्थिति प्राप्त करता है। इस स्थिति में सरलता से हिला-डुला नहीं जा सकता, इसीलिए इसे वज्रासन कहा जाता है।

विधि – पैरों के दोनों तलवों को गुदा के दोनों ओर इस प्रकार रखिए कि दोनों जाँघे पैरों पर और कूल्हे तलवों पर आए। टखनों से घुटनों तक का भाग भूमि को छूना चाहिए। पूरे शरीर का वजन घुटनों और टखनों पर रखिए। इस आसन के अभ्यास के दौरान श्वासोच्छवास जारी रखिए। प्रारंभ में संभवतः घुटनों और टखनों में दर्द होगा; किन्तु बाद में अपने आप दूर हो जाएगा। दोनों हाथ सीधे करके घुटनों पर रखिए।
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दोनों घुटनों को एकदम नजदीक रखिए। शरीर, गर्दन और सिर एक सीध में रखकर बिलकुल तनकर बैठिए। यह एक अत्यंत सामान्य आसन है। इस आसन में काफी लंबे समय तक आराम से बैठा जा सकता है।

लाभ:
१. इस आसन से पाचक रस अधिक मात्रा में उत्पन्न होते हैं। जठर अच्छा कार्य करता है और गैस का रोग मिटता है।
२. यह आसन निरंतर करने से घुटनों, पैरों, पंजों और जाँघों में होनेवाला दर्द दूर होता है।
३. इस आसन का लंबे समय तक अभ्यास करने से रसग्रंथियों अथवा प्लीहा, गले के कॉकल, अस्थिमज्जा आदि स्थानों पर उत्पन्न होनेवाले श्वेतकणों की संख्या में वृद्धि होने से स्वास्थ्य अधिक अच्छा बनता है।
४. नियमित रूप से यह आसन करनेवाला व्यक्ति ज्वर, कब्ज, मन्दाग्नि या अजीर्ण आदि छोटे-बड़े किसी भी रोग से पीड़ित नहीं होता।

उत्कट आसन

विधि – अपने पंजों पर एड़ियों को जितना उठा सकें उठाकर खड़े हो जाइए। इसके पश्चात धीरे-धीरे अपने शरीर को साधते हुए पंजों के सहारे जमीन पर बैठने का प्रयास कीजिए। आपके शरीर का सारा भार पंजों पर ही होना चाहिए। कुल्हे और एड़ियाँ एक-दूसरे से मिले रहने चाहिए। दोनों इस अवस्था में रहें कि जमीन से सामान्तर रेखाएँ बनाएँ। आपके शरीर का शेष अंग सीधे और समकोण रहने चाहिए। दोनों हाथ घुटनों पर और आँखें खुली रखकर गहरी साँस लेनी चाहिए।
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उत्कट आसन के निम्न लाभ होते हैं
१. इसमें मांसपेशियों का गठन अच्छा होता है।
२. पैरों के अँगूठे तथा घुटने स्वस्थ रहते हैं।
३. आसन शरीर शुद्धि में सहायक होते हैं।
४. रीढ़ की हड्डी ठीक बनी रहती है।

कोणासन

इस आसन में दोनों हाथ और दोनों पैरों से शरीर का आधार कोण जैसा बनता है। इसलिए इसे ‘कोणासन’ कहा जाता है। इस आसन में दोनों हाथों के पंजों और पैरों की एड़ियों पर पूरे शरीर का संतुलन बनाए रखना पड़ता है।
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विधि – दोनों पैर साथ में जोड़े रखिए। दोनों हाथों के बीच कंधों के बराबर अंतर रखकर हाथ और पैर लंबे करें। इसके बाद साँस खींचिए और हथेलियों तथा एडियों की सहायता से शरीर को ऊपर की ओर ले जाइए। गरदन को पीछे की ओर मोड़िए। दोनों हाथ सीधे और सीना आसमान की तरफ रखिए। इस स्थिति में आठ-दस सेकंड तक रहिए; फिर धीरे-धीरे मूल स्थिति में आइए। यह आसन चार से छह बार कर सकते हैं।

लाभ:
१. इस आसन से कंधे मजबूत बनते हैं और पेट की तकलीफें दूर होती है।
२. इस आसन से पैरों और रीढ़ को पर्याप्त मात्रा में व्यायाम मिलता है।
३. यह आसन पश्चिमोत्तानासन का उप-आसन माना जाता है। इसलिए इसे पश्चिमोत्तानासन के बाद करने से बहुत लाभ होता है।

आसन करते समय सावधानी

आसन करते समय निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी चाहिए
१. आसन नियमपूर्वक करना चाहिए तथा कभी भी शीघ्रता नहीं करनी चाहिए।
२. आसन करने के पश्चात् कभी भी तुरंत स्नान नहीं करना चाहिए।
३. आसन करते समय आपस में बातचीत नहीं करनी चाहिए।
४. आसन प्रतिदिन निश्चित समय पर करना चाहिए।

दिशाओं का ज्ञान
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निर्देश –

  • बच्चों से पूछे कि सूर्योदय के समय सूर्य की ओर मुंह करके खड़े होने पर उनके
    • मुँह की ओर कौन-सी दिशा होगी?
    • पीठ की ओर कौन-सी दिशा होगी?
    • बाएँ हाथ की ओर कौन-सी दिशा होगी?
    • दाएँ हाथ की ओर कौन-सी दिशा होगी?
  • कक्षा के अंदर भी यह गतिविधि करवाएँ।
  • नक्शे के आधार पर भी दिशाओं की पहचान करवाएँ।

महीनों और त्योहारों के नाम
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निर्देश

  • प्रत्येक माह में प्रकृति में होनेवाले परिवर्तन के बारे में चर्चा करें।
  • भारतीय कैलेंडर के अनुसार आनेवाले तीज-त्योहारों के बारे में बातचीत करें।
  • अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार आनेवाले प्रमुख त्योहारों के विषय में बातचीत करें।
  • ऋतुओं के बारे में चर्चा करें कि कौन-सी ऋतु किस अंग्रेजी अथवा भारतीय महीने में आती है।

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UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi धातु रूप

UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi धातु रूप part of UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi धातु रूप.

Board UP Board
Textbook SCERT, UP
Class Class 12
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 3
Chapter Name धातु रूप
Number of Questions Solved 41
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi धातु रूप

परिभाषा
क्रिया के मूल रूप को ‘धातु’ कहते हैं; जैसे—पठ, गम्, लिखू, नम् आदि। लकार की परिभाषा संस्कृत भाषा में काल को ‘लकार’ कहते हैं, जैसे-वर्तमान काल-लेट् लकार, भूतकाल-लङ्ग लकार, भविष्यत् काल तृट् लकार आदि।

लकार के भेद
संस्कृत में दस लकार होते हैं।

  1. लट् लकार
  2. लङ्ग लकार
  3. तृट् लकार
  4. लोट् लकार
  5. विधिलिङ्ग लकार
  6. लुट् लकार
  7. लिट् लकार
  8. लुङ्ग लकार
  9. लेट् लकार
  10. नृङ्ग लकार

नोट पाठ्यक्रम के अनुसार पाँच (लट्, लृट्, लोट्, विधिलिङ्ग एवं लङ् लकार) लकारों के बारे में ही चर्चा करेंगे।
संस्कृत में जितने शब्द होते हैं, उन सभी शब्दों को कारक और वचन के अनुसार तो प्रयोग किया ही जाता है, इसके अतिरिक्त संस्कृत के समस्त शब्दों को पुरुष में भी बाँटा (विभाजित) जाता है। ‘पुरुष’ शब्द का अर्थ ‘व्यक्ति से है अर्थात् कर्ता (क्रिया को करने वाला) इस प्रकार संस्कृत के सभी शब्दों को तीन प्रकार के शब्दों में विभाजित किया गया है, जो इस प्रकार हैं

  1. प्रथम पुरुष जिसके विषय में बात की जाती है। (जो प्रत्यक्ष न हो) उसे प्रथम पुरुष कहते हैं, जैसे वह, वे दोनों, वे सब/ये ही प्रथम पुरुष के कर्ता हैं।
  2. मध्यम पुरुष जो बात करने का माध्यम होता है, उसे मध्यम पुरुष कहते हैं; जैसे—तुम, तुम दोनों, तुम सब/ये ही मध्यम पुरुष के कर्ता है।
  3. उत्तम पुरुष किसी विषय पर स्वयं बोलने वाले को उत्तम पुरुष कहते हैं; जैसे मैं, हम दोनों, हम सब/ये ही उत्तम पुरुष के कर्ता हैं।

धातु-भेद
अर्थ-भेद के आधार पर धातु के निम्न तीन भेद होते हैं।

  1. परस्मैपदी जिन धातुओं के अन्त में ति, तः, अन्ति आदि प्रत्यय लगते हैं, उन्हें ‘परस्मैपदी’ धातु कहते हैं। नोट पाठ्यक्रम के अनुसार, परस्मैपदी के अन्तर्गत स्था, पा, नी, कृ, चुर एवं दा ‘सम्मिलित किए गए हैं।
  2. आत्मनेपदी जिन धातुओं के अन्त में ते, एते, अन्ते आदि प्रत्यय लगते हैं, उन्हें आत्मनेपदी धातु कहते हैं; जैसे-सेवते, सेवेते, सेवन्ते
  3. भयपदी जिन धातुओं के रूप दोनों पदों (परस्मैपद एवं आत्मनेपद) में चलते हैं, उन्हें उभयपदी धातु कहते हैं, जैसे

‘याच’ धातु परस्मैपद में रूप-याचति याचतः याचन्ति
‘याच’ धातु आत्मनेपदी में रूप-याचते याचेते याचन्ते

प्रश्न 1.
‘दा’ धातु लुट्लकार प्रथम पुरुष, द्विवचन का रूप है।
(क) दास्यतः
(ख) दत्तः
(ग) दास्यावः
(घ) दास्यथः

प्रश्न 2. ‘नेष्यावः’ रूप है ‘नी’ धातु का (2010)
(क) लट्, उत्तम, द्विवचन
(ख) लोट्, मध्यम, द्विवचन
(ग) लृट्, मध्यम, बहुवचन
(घ) लृट्, उत्तम, द्विवचन

प्रश्न 3.
नयतः रूप है ‘नी’ धातु का
(क) लट्, प्रथम, द्विवचन
(ख) लङ्, मध्यम, एकवचन
(ग) विधिलिङ, प्रथम, एकवचन,
(घ) लोट्, उत्तम, एकवचन

प्रश्न 4.
‘तिष्ठ’ रूप है ‘स्था’ धातु का (2015)
(क) लट्, प्रथम पुरुष, एकवचन
(ख) लोट्, मध्यम पुरुष, एकवचन
(ग) विधिलिङ, उत्तम पुरुष, एकवचन
(घ) लङ, उत्तम पुरुष, एकवचन

प्रश्न 5.
‘पास्यामः’ रूप है-‘पिबु धातु का (2011)
(क) लट्, उत्तम, बहुवचन
(ख) लृट्, उत्तम, बहुवचन
(ग) लङ्, मध्यम, एकवचन
(घ) लोट्, प्रथम, बहुवचन

प्रश्न 6.
‘एधि’ रूप है ‘अस्’ धातु का (2010)
(क) लट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) लडु, उत्तम, एकवचन
(ग) विधिलिङ, प्रथम, बहुवचन
(घ) लोट्, मध्यम, एकवचन

प्रश्न 7.
‘स्था’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा
(क) तिष्ठेयुः
(ख) तिष्ठे:
(ग) तिष्ठेव
(घ) तिष्ठेयम्

प्रश्न 8.
‘कृ’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा
(क) करोतु
(ख) कुरु
(ग) कुरुत
(घ) अकरोत्

प्रश्न 9.
‘स्था’ धातु विधिलिङ्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा
(क) तिष्ठामि
(ख) तिष्ठ
(ग) स्थास्यति
(घ) तिष्ठेम

प्रश्न 10.
‘कृ’ धातु लोट्, मध्यम, द्विवचन का रूप होगा। (2011)
(क) कुरुताम्
(ख) कुरुथः
(ग) कुरुत
घ) कुरुतम्

प्रश्न 11.
‘भविष्यथ’ रूप है ‘अस्’ धातु का (2012)
(क) लोट्, प्रथम, द्विवचन
(ख) विधिलिङ, उत्तम, एकवचन
(ग) लृट्, मध्यम, द्विवचन
(घ) लट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन

प्रश्न 12.
‘कृ’ धातु लूट, मध्यम पुरुष, द्विवचन का रूप होगा (2015)
(क) करोति
(ख) करिष्यथ:
(ग) करिष्यामि
(घ) करिष्यत

प्रश्न 13.
‘चोरयाव’ रूप है ‘चुर्’ (चुराना) धातु का (2010)
(क) लट्, प्रथम, द्विवचन
(ख) विधिलिड्., मध्यम, एकवचन
(ग) लोट्, उत्तम, द्विवचन
(घ) लङ्, उत्तम, बहुवचन

प्रश्न 14.
‘स्था’ धातु लुट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा (2012)
(क) स्थास्यति
(ख) स्थास्यावः
(ग) स्थास्यथ
(घ) स्थास्यामि

प्रश्न 15.
‘अस्’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा (2011)
(क) स्थः
(ख) स्त
(ग) स्थ
(घ) भविष्यथ

प्रश्न 16.
‘अतिष्ठः’ रूप है ‘स्था’ थातु का (2010)
(क) लृट्, प्रथम, एकवचन
(ख) लोट्, मध्यम, बहुवचन
(ग) विधिलङ, उत्तम, एकवचन
(घ) लङ, मध्यम, एकवचन

प्रश्न 17.
‘आदः’ रूप है ‘अद्’ धातु का (2010)
(क) लट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) बृद्, प्रथम, एकवचन
(ग) लङ्, मध्यम, एकवचन
(घ) लट्, प्रथम, द्विवचन

प्रश्न 18.
‘चुर्’ धातु लुट्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप होगा (2011, 10)
(क) चोरयति
(ख) चोरयिष्यति
(ग) अचोरयत
(घ) चोरयतु

प्रश्न 19.
‘पा’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा (2013)
(क) पिबथ
(ख) पिविष्यथ
(ग) पास्यथ
(घ) पास्यन्ति

प्रश्न 20.
‘दा’ धातु ललकार प्रथम पुरुष बहुवचन का रूप होगा। (2012)
(क) देहि
(ख) अददुः
(ग) दास्यन्ति
(घ) ददाति

प्रश्न 21.
‘कृ’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन का रूप होगा (2010)
(क) कुर्याताम्
(ख) कुर्याम्
(ग) कुर्यातम्
(घ) कुर्यात

प्रश्न 22.
‘भू’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा (2013)
(क) भवताम्
(ख) भव
(ग) भवन्तु
(घ) भवानि

प्रश्न 23.
‘पठतु’ रूप है ‘पठ’ (पढ़ना) धातु का (2011)
(क) लट्, प्रथम, एकवचन
(ख) लोट्, प्रथम, एकवचन
(ग) लोट्, मध्यम, द्विवचन,
(घ) लृट्, उत्तम, एकवचन

प्रश्न 24.
‘पा’ (पिब) धातु ललकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन का रूप हैं। (2010)
(क) पिबसि
(ख) पिबामि
(ग) पिबन्ति
(घ) पिबति

प्रश्न 25.
‘स्थास्यथः’ रूप है ‘स्था’ धातु का (2011)
(क) विधिलिङ, मध्यम, बहुवचन
(ख) लोट् प्रथम, एकवचन
(ग) लृट्, मध्यम, द्विवचन
(घ) लट्, प्रथम, बहुवचन

प्रश्न 26.
‘ददाम’ रूप है ‘दा’ धातु का (2012)
(क) लोट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन
(ख) ट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन
(ग) ललकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन
(घ) विधिलिङ्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

प्रश्न 27.
‘तिष्ठेव’ रूप है ‘स्था’ धातु का (2013)
(क) विधिलिङ्लकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन
(ख) विधिलिङ्लकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन
(ग) ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन
(घ) लोट्लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन

प्रश्न 28.
‘भू’ (होना) धातु ललकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा (2011)
(क) भवति
(ख) भवसि
(ग) भवामि
(घ) भवामः

प्रश्न 29.
‘नी’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा (2011)
(क) नय
(ख) नयत
(ग) नयतु
(घ) नयति

प्रश्न 30.
‘कुर्मः’ रूप है ‘कृ’ धातु का (2010)
(क) लङ्, उत्तम, बहुवचन
(ख) लृट्, मध्यम, एकवचन
(ग) विधिलिङ, प्रथम, द्विवचन
(घ) लट्, उत्तम, बहुवचन

प्रश्न 31.
‘कृ’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा। (2010)
(क) कुरुथ
(ख) कुरुत
(ग) कुर्यात
(घ) कुर्यात्

प्रश्न 32.
‘पिबामः’ रूप है ‘पा’ (पिब्) धातु का (2009)
(क) लृट्, उत्तम, बहुवचन
(ख) लोट्, मध्यम, बहुवचन
(ग) लङ्, प्रथम, बहुवचन
(घ) लट्, उत्तम, बहुवचन

प्रश्न 33.
‘अकरोत्’ रूप होता है ‘कृ’ धातु का (2011, 10)
(क) लङ्, प्रथम, एकवचन
(ख) विधिलिङ, मध्यम, द्विवचन
(ग) लृट्, उत्तम, बहुवचन
(घ) लट्, प्रथम, एकवचन

प्रश्न 34.
‘नयतम्’ रूप है ‘नी’ धातु का (2014, 12, 11)
(क) लोट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) लट्, मध्यम, बहुवचन
(ग) लृद्, प्रथम, एकवचन
(घ) लोट्, प्रथम, द्विवचन

प्रश्न 35.
‘स्युः’ रूप है ‘अस्’ धातु का (2010)
(क) लोट्, मध्यम, एकवचन
(ख) लृट्, उत्तम, द्विवचन
(ग) विधिलिङ्, प्रथम, बहुवचन
(घ) लङ्, प्रथम, एकवचन

प्रश्न 36.
‘नयानि’ रूप है ‘नी’ धातु का
(क) लट्, प्रथम, एकवचन
(ख) लोट्, उत्तम, एकवचन
(ग) लृट्, मध्यम, द्विवचन
(घ) लोट्, मध्यम, बहुवचन

प्रश्न 37.
‘अपिबत’ रूप है ‘पा’ धातु का
(क) लड्, प्रथम, एकवचन
(ख) लङ्, मध्यम, बहुवचन
(ग) विधिलिङ्, उत्तम, एकवचन
(घ) लट्, प्रथम, द्विवचन

प्रश्न 38.
‘अनयः रूप है ‘नी’ धातु का
(क) लट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) लङ्, मध्यम, एकवचन
(ग) लङ, प्रथम, बहुवचन
(घ) लृट्, प्रथम, एकवचने

प्रश्न 39.
‘स्था’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन का रूप होगा (2012, 10)
(क) स्थास्यथः
(ख) स्थास्यतः
(ग) तिष्ठथः
(घ) तिष्ठतम्

प्रश्न 40.
‘अतिष्ठाव’ रूप है ‘स्था’ धातु का
(क) लोट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) लड्, उत्तम, द्विवचन
(ग) विधिलिङ्, प्रथम, बहुवचन
(घ) लृटु, मध्यम, एकवचन

प्रश्न 41.
निम्नलिखित धातुओं के यथानिर्देश रूप लिखिए।
‘पा’ (पिब) धातु ललकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = पिबामः (2018)
‘नी’ धातु लट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = नयामः (2018)
‘पा’ धातु लोटलकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = पिबत (2018)
‘दा’ धातु लुट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = दास्यथः (2018)
‘नी’ धातु लोटलकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = नय, नयतात् (2018)
‘दा’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = देहि (2018)
‘कृ’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = अकुतम् (2018)
‘दा’ धातु ललकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन = दत्तः (2018)
‘पा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = पिबावः (2018)
‘नी’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = नयावः। (2018)
‘दा’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = दत्त (2018)
‘चुर’ धातु लङ्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन = अचोरयत् (2018)
‘नी’ धातु लोट्लकार’ मध्यम पुरुष, बहुवचने = नयत (2018, 17)
‘कृ’ धातु ‘लोट्लकार’ मध्यम पुरुष, बहुवचन = कुरूत (2018, 17)
‘पा’ धातु ‘लिङ्लकार’ मध्यम पुरुष, द्विवचन
‘दा’ धातु ‘लिङ्लकार’ मध्यम पुरुष, द्विवचन
‘चुर’ धातु ‘ललकार’ मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप लिखिए = चोरयसि (2017)
‘स्था’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = तिष्ठथ (2016)
‘कृ’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = कृथ (2016)
‘नी’ धातु लुट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = नेष्यामः (2016)
‘कृ’ धातु लुट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = करिष्यम् (2016)
‘मा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = अपिषाव (2016)
‘अस्’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = आस्थ (2016)
‘स्था’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = तिष्ठतम् (2017, 16)
‘नी’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = नयतम् (2016)
‘या’ धातु विधिलिङ् लकार, मध्यम पुरुष, द्विवधन = पिबेतम् (2017, 16)
‘नी’ धातु विधिलिङ् लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = नयेतम् (2017, 16)
‘कृ’ धातु लोट्लकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन = कुरुताम् (2016)
दा’ धातु लोट्लकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन = दत्ताम्। (2016)
‘दा’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = दोहि
‘पा’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = पिब (2018)
‘स्था’ धातु ललकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = अतिष्ठन्। (2013)
‘दा’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = देहि, दत्तात्। (2016, 14, 13)
‘नी’ धातु ललकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = अनयन् । (2013)
‘दा’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = अदम् (2018, 13)
‘स्था’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = अतिष्ठतम् (2017, 13)
‘चुर्’ धातु ललकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन = चोरयतः (2013)
‘स्था’ धातु लट्लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = तिष्ठन्ति (2014)
‘दा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = दास्यावः (2012)
‘स्था’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = तिष्ठे: (2013)
‘पा’ (पिब) धातु ललकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = पिबन्ति (2014)
‘कृ’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = कुर्यात (2013)
‘ढा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = अढद्म (2012)
‘स्था’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = तिष्ठ (2014)
‘स्था’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = अतिष्ठत (2013)
‘दा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = दाः (2012)
‘नी’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = नयस (2017, 13)
‘स्था’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = स्थास्यावः (2012)
‘नी’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = नयेत (2013)
‘स्था’ धातु लुट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवधन = अतिष्ठाम (2012)
‘दा’ धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = दास्यामः (2012)
‘स्था’ लङ्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = अतिष्ठाम (2012)
‘पा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, एकवचन = पिबामि (2014)
‘दा’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = अददाः (2013)
‘नी’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = नयथ : (2013)
‘चुर्’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = चोरय (2013)
‘स्था’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, एकवचन = तिष्ठामि. (2014)
‘स्था’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = तिष्ठेत (2013)
‘पा’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = पिब (2018, 16, 14, 13)
‘नी’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = नयेः (2013)
‘पा’ धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = पास्यथ (2017, 13)
‘दा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, एकवचन = अददाम्। (2013)
‘दा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = अदद्वः (2013)
‘पठ’ धातु लृट्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन = पठिष्यति (2014)
‘कृ’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = कुरु कुरुताम् (2014)

उत्तर
1. (क), 2. (घ), 3. (क), 4. (ख), 5. (ख), 6. (घ), 7. (ख), 8. (ख), 9. (घ), 10. (घ), 11. (ग) 12. (ख), 13. (ग), 14. (ग), 15. (घ), 16. (घ), 17. (घ), 18. (ख), 19. (ग), 20. (ख), 21. (ग), 22. (ख), 23. (ख), 24. (ग), 25. (ग), 26. (क), 27. (ख), 28. (ख), 29. (क), 30. (घ), 31. (ग), 32. (घ), 33. (क), 34. (क), 35. (ग), 36. (ख), 37. (क), 38. (ख), 39. (क), 40. (ख),

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UP Board Class 4 Hindi व्याकरण

UP Board Class 4 Hindi व्याकरण

प्रश्न:
व्याकरण क्या है?
उत्तर:
भाषा की शुद्धता और अशुद्धता का ज्ञान करानेवाला शास्त्र व्याकरण कहलाता है;

जैसे-

  • राम स्कूल गया है। (शुद्ध)
  • राम स्कूल गई है। (अशुद्ध)

प्रश्न:
भाषा क्या है?
उत्तर:
भाषा-विचार या भाव प्रकट करने वाला माध्यम ही भाषा है; जैसे- हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, तेलुगू, मराठी, तमिल, मैथिली आदि।

UP Board Class 4 Hindi व्याकरण

भाषा के भेद
भाषा को प्रयोग के आधार पर तीन भागों में बाँटा जा सकता है
(१) लिखित भाषा-जो भाषा लिखने और पढ़ने में प्रयोग की जाती है, उसे ‘लिखित भाषा’ कहते हैं।
(२) कथित अथवा मौखिक भाषा-जो भाषा आपस में बातचीत करते समय प्रयोग की जाती है, उसे ‘कथित भाषा’ अथवा ‘मौखिक भाषा’ कहते हैं।
(३) सांकेतिक भाषा-जब संकेतों से अपने विचारों को प्रकट किया जाता है, तब उसे ‘सांकेतिक भाषा’ कहते हैं।

प्रश्न:
लिपि किसे कहते हैं?
उत्तर:
लिपि-वर्गों के लिखित चिह्न को लिपि कहते हैं; जैसे- हिंदी की ‘देवनागरी’, उर्दू की ‘फारसी’ और अंग्रेजी की लिपि ‘रोमन’ है।

प्रश्न:
वर्ण या अक्षर किसे किहते हैं? तथा उसके भेद बताओ।
उत्तर:
वर्ण (अक्षर )-वर्ण (अक्षर) भाषा की वह छोटी से छोटी मूल ध्वनि है, जिसके टुकड़े न हो सकें; जैसे- अ, इ, ए, क्, ख् आदि।

वर्ण या अक्षर के भेद-

१. स्वर
२. व्यंजन।

प्रश्न:
स्वर किसे कहते हैं? उसके भेद बताओ।
उत्तर:
स्वर-वे वर्ण, जिनके उच्चारण में दूसरे वर्गों की सहायता नहीं लेनी पड़ती, ‘स्वर’ कहलाते हैं।

स्वर ग्यारह होते हैं-
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।

स्वरों के भेद स्वर के तीन भेद हैं-
(क) ह्रस्व स्वर – जैसे – अ, इ, उ, ऋ, आदि।
(ख) दीर्घ स्वर – जैसे – आ, ई, ऊ, ऐ, ओ, औ आदि।
(ग) प्लत स्वर – जैसे – ओ३म आदि।।

प्रश्न:
व्यंजन किसे कहते हैं? इसके प्रकार भी बताओ।
उत्तर:
व्यंजन-वे वर्ण, जिनके उच्चारण में स्वरों की सहायता लेनी पड़ती है, व्यंजन कहलाते हैं; जैसे- क् में अ जोड़ने से ‘क’ तथा ख में अ जोड़ने ‘ख’ बन जाता है।
व्यंजन के प्रकार-हिंदी वर्णमाला में उनतालीस (३६) व्यंजन होते हैं।

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१. क वर्ग – क ख ग घ ङ
२. च वर्ग – च छ ज
३. ट वर्ग – ट ठ ड ढ ण
४. त वर्ग – त थ द ध न
५. प वर्ग – प फ ब भ म
६. अन्तःस्थ – य र ल व
७. ऊष्म – श ष स ह
६. संयुक्त – क्ष = क + ष् + अ, त्र = त् + र + अ, ज्ञ = ज्+ + अ, श्र = श + र् + अ

अनुस्वार (अं)-समस्त पंचम वर्णों (ङ, ञ, ण, न, म) को बिंदु (-) के माध्यम से प्रकट किया जाता है। इसे अनस्वार (अं) कहते हैं; जैसे- गंगा, मंगल, जंगल आदि।

विसर्ग (अः)-इसे ऊपर-नीचे दो बिंदुओं (:) के सहारे प्रकट करते हैं; जैसे-प्रातः, अत: आदि।
मात्रा-व्यंजन को पूरा करने के लिए स्वर वर्ण के जो निर्धारित चिह्न हैं, उन्हें मात्रा कहते हैं।
मात्राएँ-निम्न होती हैं-
UP Board Class 4 Hindi व्याकरण 4
विशेष-‘अ’ सभी व्यंजनों में मिला होता है, इसीलिए इसकी मात्रा नहीं होती।

प्रमुख विराम चिह्न-हिंदी में लिखते समय निम्न विराम चिह्न प्रयुक्त किए जाते हैं-
१. अल्प विराम (,)
२. अर्ध विराम (;)
३. पूर्ण विराम (।)
४. प्रश्नवाचक चिह्न (?)
५. विस्मयादिबोधक चिह्न (!)
६. लाघव चिह्न (०)
७. विवरण चिह्न (:)
८. योजक चिह्न (-)
६. निर्देशक चिह्न (–)
१०. अवतरण चिह्न (” “), (‘ ‘)

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शब्द

शब्द की परिभाषा-वर्णों का सार्थक समूह ही शब्द कहलाता है; जैसे- राम, सीता, पुस्तक आदि।

शब्दों के भेद

अर्थ के अनुसार शब्द दो प्रकार के होते हैं-
(१) सार्थक शब्द-जिस शब्द से कुछ अर्थ प्रकट हो, उसे ‘सार्थक शब्द’ कहते हैं, जैसेपुस्तक, आम, लड़का आदि।
(२) निरर्थक शब्द-जिस शब्द से कुछ भी अर्थ न निकले उसे ‘निरर्थक शब्द’ कहते हैं, जैसे- कस्तपु, काड़ल, लमक आदि।

व्याकरण के अनुसार शब्द दो प्रकार के होते हैं

1. विकारी तथा
2. अविकारी (अव्यय)

1. विकारी शब्द- लिंग, वचन तथा कारक के कारण जिन शब्दों के रूप बदल जाते हैं, उन्हें ‘विकारी शब्द’ कहते हैं। ये चार प्रकार के होते हैं- संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया तथा विशेषण।
2. अविकारी शब्द (अव्यय)- जिन शब्दों के रूप सदैव एक समान रहते हैं यानी लिंग वचन और कारक के कारण जो कभी परिवर्तित नहीं होते, उन्हें ‘अविकारी शब्द’ या ‘अव्यय’ कहते हैं। ये भी मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं– क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक।

वाक्य

प्रश्न:
वाक्य किसे कहते हैं?
उत्तर:
शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते हैं; जैसे- भारत हमारी मातृभूमि है। यह वाक्य चार शब्दों का समूह है। इन चार शब्दों के समूह से पूरी बात समझ में आ जाती है।

१. संज्ञा-किसी वस्तु, स्थान, प्राणी या भाव के नाम को ‘संज्ञा’ कहते हैं, जैसे- पुस्तक, आगरा, राम, श्याम, राहुल आदि।

संज्ञा के भेद

संज्ञा के पाँच भेद होते हैं-

  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा-जिस शब्द से किसी विशेष वस्तु, व्यक्ति अथवा स्थान का पता चले, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे – राम, सीता, गंगा, यमुना, भारत, उत्तर प्रदेश, आदि। जैसे-भारत, यमुना, अंकित, लखनऊ आदि।
  2. जातिवाचक संज्ञा-जिस संज्ञा शब्द से एक ही प्रकार की सब वस्तुओं का बोध हो उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे- लड़की, गाय, नदी, गेंद, माता, पिता, भाई, बहन आदि।
  3. समूहवाचक संज्ञा- जिस शब्द से प्राणियों या वस्तुओं के एकत्र या एक साथ इकट्ठे होने का बोध हो, उसे समूहवाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे- भीड़ मंडली, दल, सभा, कक्षा, सेना आदि।
  4. भाववाचक संज्ञा-जिस संज्ञा शब्द से गुण, दशा, व्यापार आदि का बोध हो, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे- सुंदरता, मोटापा, कालापन, मिठास, कड़वाहट, अधिकता, कठोरता आदि।
  5. द्रव्यवाचक संज्ञा-मापे या तौले जाने वाले पदार्थ का ज्ञान कराने वाले शब्द द्रव्यवाचक संज्ञा कहलाते हैं; जैसे- चावल, दाल, आटा, बेसन, कपड़ा, सब्जी, रस्सी आदि।

२. सर्वनाम-संज्ञा के स्थान पर प्रयोग होने वाला शब्द ‘सर्वनाम’ कहलाते हैं; जैसे- मैं, वह, तुम आदि।

UP Board Class 4 Hindi व्याकरण

उदाहरण-
वीणा लखनऊ में रहती है। वह स्कूल जाती है। यहाँ ‘वह’ सर्वनाम है। मैं, हम, वह, तुम, आप, कौन, कोई आदि भी सर्वनाम हैं।

सर्वनाम के भेद

सर्वनाम के छः भेद होते हैं-

  • पुरुषवाचक सर्वनाम, जैसे- मैं, हम, तुम, वह आदि।
  • निश्चयवाचक सर्वनाम, जैसे- यह, ये, वह, वे आदि।
  • अनिश्चयवाचक सर्वनाम, जैसे- कोई, कुछ आदि।
  • संबंधवाचक सर्वनाम, जैसे- जो-सो जैसा-वैसा आदि।
  • प्रश्नवाचक सर्वनाम, जैसे- क्या, कौन आदि।
  • निजवाचक सर्वनाम, जैसे- अपने आप, स्वयं, स्वतः, खुद, आप ही आप आदि।

३. क्रिया-जिस शब्द से किसी काम का करना या होना पाया जाए, उसे ‘क्रिया’ कहते हैं, जैसे- दौड़ना, पढ़ना, खेलना, लिखना, खाना आदि।
जैसे-सीता खेलती है। राम पढ़ता है। ऊपर के वाक्य में ‘खेलना’ और ‘पढ़ना’ क्रियाएँ हैं। अन्य उदाहरण- चलना, जाना, गाना, इत्यादि।

क्रिया के भेद
(i) सकर्मक क्रिया, जैसे-खाना, पीना, पहनना इत्यादि।
(ii) अकर्मक क्रिया, जैसे-रोना हँसना, दौड़ना आदि।

४. विशेषण-जो शब्द किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता बताए, उसे विशेषण कहते . हैं; जैसे- काला, अच्छा, मोटा, सुंदर आदि।

विशेषण के भेद

  • गुणवाचक विशेषण, जैसे-अच्छा, बुरा, काला, मोटा, पीला आदि।
  • परिमाणवाचक विशेषण, जैसे-किलोग्राम, मीटर, लीटर आदि।
  • संख्यावाचक विशेषण, जैसे-एक, दो, दस, सौ, हजार आदि।
  • सार्वनामिक विशेषण, जैसे-वह, यह, ऐसा, वैसा, तुम्हारा, मेरा आदि।

क्रिया-विशेषण-क्रिया-विशेषण उन शब्दों को कहते हैं, जो क्रियाओं की विशेषताएँ प्रकट करते हैं; जैसे-साइकिल तेज दौड़ती है। गौरव अच्छा लिखता है। यहाँ ‘तेज’ और ‘अच्छा’ क्रिया-विशेषण हैं।

लिंग

परिभाषा-जिससे किसी वस्तु या प्राणी की जाति (पुरुष या स्त्री) का बोध हो, उसे ‘लिंग’ कहते हैं।

UP Board Class 4 Hindi व्याकरण

लिंग के भेद

लिंग के निम्नलिखित दो भेद होते हैं-

  1. पुल्लिग-जिससे पुरुष जाति का बोध हो, उसे ‘पुल्लिंग’ कहते हैं; जैसे-राम, आम, घोड़ा, हाथ, पैर, सिर, शरीर टमाटर आलू, बैंगन, अनार, काजू आदि।
  2. स्त्रीलिंग-जिससे स्त्री जाति का बोध हो, उसे ‘स्त्रीलिंग, कहते हैं; जैसे- सीता, गंगा, लड़की, आँख, नाक, गरदन, जाँघ, देह, काया, कोयल, भाषा, लिपि, वर्तनी आदि।

वचन

वचन की परिभाषा-संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से किसी वस्तु या प्राणी की संख्या का बोध हो, उसे ‘वचन’ कहते हैं, जैसे-गाय-गायें, पुस्तक-पुस्तकें, आँख-आँखें, लड़का-लड़के, गाड़ी-गाड़ियाँ, डंडा-डंडे, कलम-कलमें आदि।

वचन के भेद

वचन के निम्नलिखित दो भेद होते हैं-

  • एकवचन-जिससे केवल एक वस्तु या प्राणी का बोध हो, उसे ‘एकवचन’ कहते है जैसेगाय, पुस्तकं, लड़का आदि।
  • बहुवचन-जिससे एक से अधिक वस्तुओं अथवा प्राणियों का बोध होता है, उसे ‘बहुवचन’ कहते हैं, जैसे- गायें, पुस्तकें, लड़के आदि।

काल

काल की परिभाषा-किसी कार्य में लगने वाला समय ही ‘काल’ कहलाता है।

काल के भेद

काल के निम्नलिखित तीन भेद होते हैं-

  • वर्तमानकाल-जिस क्रिया से कार्य का बीत रहे समय में होना पाया जाए, उसे ‘वर्तमानकाल’ कहते हैं; जैसे-गीता खाना खा रही है।
  • भूतकाल-जिस क्रिया से कार्य का बीते हुए समय में होना पाया जाए, उसे ‘भूतकाल’ कहते हैं; जैसे-गीता ने खाना खाया।
  • भविष्यत्काल-जिस क्रिया से कार्य का आने वाले समय में होना पाया जाए, उसे ‘भविष्यत्काल’ कहते हैं; जैसे-गीता खाना खाएगी।

कारक

कारक की परिभाषा-संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों, विशेषकर क्रिया के साथ जाना जाता है, उसे कारक कहते हैं। हिंदी में कारक आठ होते हैं-
UP Board Class 4 Hindi व्याकरण 1

विभक्ति-कारक के चिह्नों को ‘विभक्ति’ कहते है; जैसे- ने, को, से, के लिए, को, से आदि।

UP Board Class 4 Hindi व्याकरण

विलोम शब्द (विपरीतार्थक शब्द)

विलोम शब्द-जो शब्द एक-दूसरे का उलटा (विपरीत) अर्थ बताएँ, उन्हें विपरीतार्थक शब्द कहते हैं; जैसे-दिन का विलोम शब्द रात है।
UP Board Class 4 Hindi व्याकरण 2

शुद्ध-अशुद्ध शब्द

UP Board Class 4 Hindi व्याकरण 3

पर्यायवाची शब्द

१. अश्व-घोड़ा, हय, तुरंग, घोटक, सैन्धव आदि।
२. अमृत-सुधा, सोम, पीयूष, अमिय, सुरभोग आदि।
३. असुर-राक्षस, निशाचर, दानव, दैत्य, आदि।
४. आग-पावक, अनल, अग्नि, कृशानु, हुताशन आदि।
५. आकाश-गगन, नभ, अंबर, शून्य, व्योम आदि।
६. आँख-नेत्र, नयन, चक्षु, लोचन, दृग आदि।
७. दिन-दिवस, वासर, अह्न, दिवा आदि।
८. नदी-सरिता, सलिला, तरंगिणी, तटिनी, निर्झरिणी आदि।

मुहावरे

१. प्राणों की बाजी लगाना = जान पर खेलना
प्रयोग-मातृभूमि की रक्षा के लिए भारतीय वीरों ने प्राणों की बाजी लगा दी।

UP Board Class 4 Hindi व्याकरण

२. कमर तोड़ देना = बहुत नुकसान पहुँचाना..
प्रयोग-व्यापार में अचानक घाटा हो जाने से हमारी कमर टूट गई।

३. पीछे हट जाना = हार मान लेना
प्रयोग-सैनिक पीछे हटना नहीं जानते।

लोकोक्तियाँ

भले का अंत भला – भलाई का फल अच्छा होता है।
आ बैल मुझे मार – जान-बूझकर मुसीबत मोल लेना।
एक और एक ग्यारह – एकता में बल होता है।
एक हाथ से ताली नहीं बजती – भूल दोनों ओर से होती है।

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UP Board Solutions for Class 4 Sanskrit Piyusham Chapter 5 बालगीतम्

UP Board Solutions for Class 4 Sanskrit Piyusham Chapter 5 बालगीतम् (बालगीत)

बालगीतम्  शब्दार्थाः 

चटका = गौरैया
ब्रूते = बोलती है/बोलता है
कुक्कुटः = मुर्गा
कोकिलः = कोयल
हर्षयामो (हर्षयामः) = हम सब प्रसन्न होते हैं
मुहुः मुहुः = बार-बार
शिखिनः वाणी = मोर की बोली
करुते = करता है/करती है
मण्डूकः = मेंढक
विहसति = हँसता है/मुसकराता है
प्रलपति = बोलता है
कुक्कुरः = कुत्ता
वानरो (वानरः) = बंदर
वदति = बोलता है/बोलती है

UP Board Solutions for Class 4 Sanskrit Piyusham Chapter 5 बालगीतम्

बालगीतम् अभ्यासः

मौखिक:

प्रश्न १.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके)
उत्तर:
(क) चटका ब्रूते चूं-धूं-चूँ।
(ख) शिखिनः वाणी केका-केका |
(ग) काकः प्रलपति का-का-का
(घ) वदति वानरः खौं-खौं-खौं

नोट – विद्यार्थी इस बालगीत का सस्वर वाचन करें।

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UP Board Solutions for Class 4 Sanskrit Piyusham Chapter 4 अव्यय शब्दाः

UP Board Solutions for Class 4 Sanskrit Piyusham Chapter 4 अव्यय शब्दाः (अव्यय शब्द)

अव्ययशब्दाः शब्दार्थाः

अपि = भी
कुत्र = कहाँ
किम् = क्या
एव = ही
सदा = हमेशा
तृणम् = तिनका
उत्पतति = उड़ता है
अधुना = इस समय/अभी

UP Board Solutions for Class 4 Sanskrit Piyusham Chapter 4 अव्यय शब्दाः

अव्यय शब्दाः अभ्यासः

मौखिक:

प्रश्न १.
निम्नलिखित वाक्यों को सही-सही पढ़िए
मयूरः नृत्यति। मयूरः तृणम् अपि खादति। शुकः वृक्षे एव तिष्ठति। मत्स्यः जले एव वसति। गौ तृणानि अन्नानि च खादति।
नोट – विद्यार्थी स्वयं पढ़ें।

प्रश्न २.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए
(क) मयूरः किं खादति?
उत्तर:
मयूरः तृणम् खादति ।

(ख) शुकः कुत्र उत्पतति?
उत्तर:
शुक: आकाशे उत्पतति ।

(ग) गौः किं ददाति?
उत्तर:
गौः दुग्धं ददाति ।

लिखितः

प्रश्न १.
पाठगत अव्यय शब्दों की सूची बनाइए।
उत्तर:
अपि, किम्, अधुना, एव, कुत्र, सदा, च, प्रातः, सायं ये पाठगत अव्यय हैं।

प्रश्न २.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके)
उत्तर:
(क) मयूरः तृणम् अपि खादति ।
(ख) अधुना शुकः किं करोति?
(ग) मत्स्यः सदा जले एव वसति ।
(घ) सा तृणानि अन्नानि च खादति ।

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