UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 8 किशोरावस्था 

UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 8 किशोरावस्था

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किशोरावस्था

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित के सही विकल्प चुनकर (UPBoardSolutions.com) अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखिए
उत्तर
(क) किशोरावस्था की अवधि है-
(अ) 0-5 वर्ष
(ब) 6 – 11 वर्ष
(स) 11 – 19 वर्ष
(द) 20 – 50 वर्ष

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(ख) एस्ट्रोजन है-
(अ) अंतः स्रावी ग्रन्थि
(ब) स्त्री हार्मोन
(स) पुरुष हार्मोन
(द) प्रजनन विधि,

(ग) सामान्यतः ऋतुस्राव आरम्भ होता है-
(अ) 11 – 13 वर्ष
(ब) 20-25 वर्ष
(स) 45-50 वर्ष
(द) कभी नहीं

(घ) किशोरावस्था में स्वास्थ्य पोषण से सम्बन्धित योजनाएँ हैं-
(अ) समेकित बाल विकास कार्यक्रम
(ब) राष्ट्रीय बाल (UPBoardSolutions.com) स्वास्थ्य कार्यक्रम
(स) सर्वशिक्षा अभियान ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस
(द) उपरोक्त सभी

(ङ) विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है-
(अ) 31 मई।
(ब) 5 जून
(स) 11 जुलाई
(द) 13 अक्टूबर

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करो
उत्तर
(क) जनन परिपक्वता जननांग में आती है।
(ख) किशोरों के गले में स्वर यंत्र के उभार को कंठमणि कहा जाता है।
(ग) युग्मनज का पोषण गर्भ में होता है।
(घ) अधिक मदिरा का सेवन, (UPBoardSolutions.com) व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
(ङ) मिशन इन्द्रधनुष का उद्देश्य सभी बच्चों का टीकाकरण करना है।

प्रश्न 3.
सत्य कथन के सामने सही (✓) तथा असत्य कथन के सामने गलत का गलत (✗) का चिह्न लगाइये
उत्तर
UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 8 किशोरावस्था img-1

प्रश्न 4.
निम्नलिखित के सही जोड़े बनाइए
उत्तर
UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 8 किशोरावस्था img-2

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक तथा मानसिक परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए?
उत्तर
किशोरावस्था के शारीरिक परिवर्तन (UPBoardSolutions.com) (लम्बाई में वृद्धि, स्वर में बदलाव, जननांगों में परिपक्वता एवं स्वेद एवं तैल ग्रन्थियों की सक्रियता) तथा मानसिक परिवर्तन (संवेदनशीलता, भावुकता, चिन्तनशीलता आदि परिलक्षित होते हैं।

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(ख) द्वितीयक लैंगिक लक्षण किसे कहते हैं तथा ये किस प्रकार नियंत्रित होते हैं?
उत्तर
पुरुष तथा स्त्री में अन्तर को स्पष्ट करने वाले लक्षण जैसे-दाढ़ी, मूंछ निकलना, स्तन का विकास होना, द्वितीयक लैंगिक लक्षण कहलाता है। ये अन्तःस्रावी ग्रन्थियों में स्रावित हार्मोन द्वारा नियंत्रित होता है।

(ग) किशोरावस्था में व्यक्तिगत सफाई के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
किशोरावस्था में व्यक्तिगत सफाई का महत्त्व-स्वेद एवं तैल ग्रन्थियों की क्रिया (UPBoardSolutions.com) भी बढ़ जाने से शरीर से गन्ध आने लगती है। गन्दगी बने रहने की स्थिति में चर्म रोग, खुजली तथा अन्य यौन रोग होने की आशंका बनी रहती है।

(घ) युग्मज में लिंग निर्धारण किस प्रकार होता है? समझाइए।
उत्तर
मनुष्य की प्रत्येक कोशिका में 23 जोड़ा (46) ) गुणसूत्र होते हैं। (UPBoardSolutions.com) पुरुषों में X और Y गुणसूत्र होते हैं जबकि स्त्रियों में केवल ४ गुणसूत्र ही होते हैं। पुरुषों का X या Y गुणसूत्र जब स्त्रियों के X गुणसूत्र से मिलता है तो युग्मज में लिंग निर्धारण होता है। (XX) बालिका (XY) बालक।।

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(ङ) किशोरावस्था में पोषण का क्या महत्त्व है? किशोर तथा किशोरियों के पोषण में सुधार लाने हेतु किए जाने वाले क्रियाकलाप पर प्रकाश डालिए?
उत्तर
किशोरावस्था में पोषक आहार लेने से शरीर तेजी से वृद्धि एवं विकास करता है। किशोर तथा किशोरियों के पोषण में सुधार लाने हेतु किये जाने वाले क्रियाकलाप पर प्रकाश

  1. समेकित बाल विकास कार्यक्रम- वृद्धि निगरानी (UPBoardSolutions.com) अनुपूरक पोषाहार किशोरी व गर्भवती माँ की देखभाल।।
  2. स्वास्थ्य विभाग- टीकाकरण
  3. पंचायती राज- शौचालय का निर्माण व साफ-सफाई करना।

(च) धुम्रपान एवं मादक द्रव्यों से होने वाले दुष्प्रभावों का वर्णन कीजिए?
उत्तर
मनुष्य कमजोर तथा संवेदनशून्य हो जाता है।

(छ) जनसंख्या वृद्धि के कारण तथा (UPBoardSolutions.com) उससे होने वाले कुप्रभाव को समझाइए।
उत्तर
जनसंख्या वृद्धि के कारण-

  1. देश की गर्म जलवायु,
  2. विवाह की अनिवार्यता,
  3. कम उम्र में विवाह,
  4. यौन शिक्षा का अभाव,
  5. परिवार नियोजन उपायों की सीमित जानकारी।

कुप्रभाव-

  1. प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव, जिससे भोजन, पानी, भूमि पर बुरा प्रभाव,
  2. देश की सामाजिक, आर्थिक विकास की गति पर बुरा प्रभाव,
  3. निर्धनता,
  4. महँगाई,
  5. आवास सुविधाओं में कमी,
  6. रोजगार में कमी,
  7. अपराधों में वृद्धि।

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(ज) परिवार-निरोध विधियों का प्रसार किस प्रकार किया जा सकता है?
उत्तर
परिवार-निरोध, विधियों का प्रसार मनुष्यों में परिवार नियोजन उद्देश्य की जागरूकता से , किया जा सकता है। जैसे

  1. दो बच्चों के बीच कम से कम तीन वर्षों का अंतराल रखना।
  2. बेटे हो या बेटियाँ, दोनों की समान (UPBoardSolutions.com) शिक्षा उपलब्ध कराकर।
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार कल्याण कार्यक्रम के प्रति जागरूकता लाकर।

(झ) परिवार कल्याण कार्यक्रम के अन्तर्गत संचालित योजनाओं को लिखिए?
उत्तर

  1. मिशन इन्द्रधनुष,
  2. जननी सुरक्षा योजना,
  3. एम्बुलेंस सेवा

● नोट- प्रोजेक्ट कार्य छात्र स्वयं करें।

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UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 16 ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत

UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 16 ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत

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ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प छाँटकर अपनी अभ्यास-पुस्तिका में लिखिए-
(क) पुनः प्राप्त न होने वाली (अनवीकरणीय) ऊर्जा का स्रोत है –
(अ) पवन ऊर्जा
(ब) बहते हुए जल की ऊर्जा
(स) सौर ऊर्जा
(द) कोयले की ऊर्जा
उत्तर
(स) कोयले की ऊर्जा

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(ख) पुनः प्राप्त होने वाली (नवीकरणीय ऊर्जा का स्रोत है –
(अ) कोयला
(ब) पेट्रोलियम
(स) ज्वार-भाटा की ऊर्जा
(द) प्राकृतिक गैस
उत्तर
(स) ज्वार-भाटा की ऊर्जा

(ग) सौर ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है –
(अ) सौर भटूटी द्वारा
(ब) सौर-सेल द्वारा
(स) सोलर कुकर द्वारा
(द) सौर-जल ऊष्मक द्वारा
उत्तर
(ब) सौर-सेल द्वारा।

(घ) पवन चककी में प्रयोग होने वाली ऊर्जा है-
(अ) सौर ऊर्जा
(ब) वायु की ऊर्जा
(स) नाभिकीय ऊर्जा
(द) जल ऊर्जा (UPBoardSolutions.com)
उत्तर
(ब) वायु की ऊर्जा

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित कथनों में सही कथन के सम्मुख (✓) और गलत कथन के सम्मुख (✗) का चिह्न लगाइएउत्तर-
उत्तर
UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 16 ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत img-1

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
उत्तर
(क) मुख्यतः जीवाश्म ईंधन पेट्रोलियम और कोयला है।
(ख) सभी प्राणी अपना (UPBoardSolutions.com) भोजन सूर्य से प्राप्त करते हैं।
(ग) बायोगैस मुख्यतः मेथेन और कार्बन डाइऑक्साइड का मिश्रण है।
(घ) जलविद्युत संयंत्र का मुख्य स्रोत जल है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों में चार पद हैं। तीन पद किसी-न-किसी रूप में एक से हैं। एक पद अन्य तीनों से भिन्न है। भिन्न पद की पहचान कर अभ्यास-पुस्तिका में लिखिए –
(क) डीजल, पेट्रोल, सूर्य, मिट्टी का तेल
(ख) वायु, जल, बायोगैस, कोयला
(ग) सोलर कुकर, सौर सेल, प्रकाश, सौर जल ऊष्मक,
(घ) ईंधन, अनाज, फल, सब्जियाँ
उत्तर
(क) सूर्य
(ख) कोयला
(ग) प्रकाश
(घ) ईंधन

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प्रश्न 5.
स्तम्भ ‘क’ और स्तम्भ ‘ख’ में दिए गए शब्दों को मिलान कीजिए –
उत्तर
UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 16 ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत img-2

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत कौन है?
उत्तर
पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य है।

(ख) सोलर सेल का क्या उपयोग होता है?
उत्तर
सोलर सेल प्रकाश उत्पन्न करने, रेडियो, टी०वी०, जल पम्प आदि चलाने में प्रयोग किया जाता है।

(ग) पेट्रोलियम किस प्रकार बनता है?
उत्तर
लाखों-करोड़ों वर्ष में भौगोलिक उथल-पुथल के फलस्वरूप पृथ्वी के अन्दर जीव-जन्तु एवं पौधे दब जाते हैं। मृत जीव-जन्तु एवं वनस्पतियाँ, ऊष्मा, दाब तथा ।
उत्प्रेरक क्रिया के द्वारा अपघटित होने से पेट्रोलियम बन जाते हैं।

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(घ) सौर ऊर्जा के ऊष्मीय प्रभाव का उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है?
उत्तर
सूर्य की ऊष्मीय ऊर्जा का उपयोग वायु ऊर्जा में, जल ऊर्जा में, प्रकाश संश्लेषण क्रिया में, सोलर कुकर, सोलर सेल, सौर जल ऊष्मक तथा सभी प्राणियों के भोजन में किसी-न-किसी रूप में होता है।

(ङ) नाभिकीय ऊर्जा क्या है? इसका क्या उपयोग है?
उत्तर
नाभिकीय विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा को नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं। इसका उपयोग परमाणु भट्टी द्वारा विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने में किया जाता है।

(च) वर्तमान में जीवाश्म ईंधन ऊर्जा के प्रमुख स्रोत क्यों हैं?
उत्तर
वर्तमान में शहरों और कस्बों में भोजन पकाने के लिए द्रव पेट्रोलियम गैस (L.PG.) का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा जेनरेटर, मोटरकार, बस, मोटर साइकिल, ट्रक, रेलगाड़ी, वायुयान चलाने में (UPBoardSolutions.com) पेट्रोलियम उत्पादों (डीजल/मिट्टी का तेल/पेट्रोल) का उपयोग किया जाता है। रेल इंजन में कोयले का प्रयोग किया जाता है। उपरोक्त ऊर्जा के सभी स्रोत हमें जीवाश्म ईंधन से प्राप्त होते हैं। इसीलिए वर्तमान में जीवाश्म ईंधन ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं।

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(छ) ऊर्जा संकट क्या है? आप उस संकट को दूर करने के क्या उपाय करेंगे? |
उत्तर
जनसंख्या वृद्धि और दैनिक जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ऊर्जा की माँग दिनों-दिन बढ़ रही है। वर्तमान में कुल ऊर्जा व्यय का 80% भाग पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भर है। जीवाश्म ईंधन अनवीकरणीय ऊर्जा के स्रोत हैं। यदि हम इसी प्रकार अनवीकरणीय ऊर्जा का अन्धाधुन्ध प्रयोग करते रहे, तो ये स्रोत एक दिन समाप्त हो जाएँगे। इस कारण ऊर्जा संकट उत्पन्न हो जाएगा।

ऊर्जा संकट को दूर करने के लिए हम नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत जैसे- सूर्य, जल, वायु, बायोगैस आदि के प्रयोग पर जोर देंगे तथा निम्नलिखित उपायों पर अमल कराने का प्रयास करेंगे –

  1. घर के विद्युत उपकरण जैसे- पंखे, बल्ब, हीटर आदि की आवश्यकता न होने पर बन्द रखना चाहिए।
  2. जहाँ पर सम्भव हो, भोजन पकाने में, भोज्य पदार्थों के सुखाने में, पानी को गर्म करने में सौर ऊर्जा का ही प्रयोग करना चाहिए।
  3. प्रकाश उत्पन्न करने के लिए ट्यूब लाइट, (UPBoardSolutions.com) सोडियम वाष्प लैम्प/मरकरी वाष्प लैम्प का प्रयोग घरों में तथा सड़कों पर करना चाहिए।
  4. कम दूरी के लिए पेट्रोल/डीजल के वाहनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  5. ईंधन की कम खपत करने वाले वाहनों का प्रयोग करना चाहिए तथा इंजनों की सफाई करते रहना चाहिए।
  6. ऊर्जा अपव्यय की रोकथाम और ऊर्जा बचत की उचित आदतों का ज्ञान होना चाहिए।

(ज) सीमित तथा असीमित ऊर्जा के तीन-तीन उदाहरण लिखिए।
उत्तर
सीमित ऊर्जा – कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस ।।
असीमित ऊर्जा – जल, वायु, बायो गैस।।

प्रश्न 7.
ऊर्जा के कौन-कौन स्रोत वायुमण्डल को प्रदूषित नहीं करते हैं?
उत्तर
जल, पवन, जैव गैस तथा सूर्य ऊर्जा।।

प्रश्न 8.
ऊर्जा के उन स्रोतों का नाम बताइए जिनसे वायुमण्डल प्रदूषित होता है।
उत्तर
कोयला, पेट्रोलियम्।

प्रश्न 9.
गोबर गैस प्लाण्ट का सचित्र वर्णन कीजिए?
उत्तर
UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 16 ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत img-3

जीव-जन्तुओं के मलमूत्र, गोबर, कचरा, कृषि उत्पादों के अपशिष्ट आदि को जैव मात्रा कहते हैं। इनका विशेष प्रकार के संयंत्र में विघटन कर ऊर्जा के एक स्रोत बायोगैस का उत्पादन किया जाता है। (UPBoardSolutions.com) गोबर में संचित रासायनिक ऊर्जा को बायो गैस में बदलने का कार्य गोबर गैस प्लांट में किया जाता है। इसमें चित्रानुसार (चित्र १६६) मिक्सिंग टैंक में गोबर को जल में मिलाकर पाचक टैंक में डाला जाता है। इससे मेथेन और कार्बन डाइऑक्साइड के मिश्रण युक्त गैस उत्पन्न होती है। इस गैस को गोबर गैस या बायोगैस कहते हैं।

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प्रश्न 10.
सोलर कुकर की संरचना एवं उपयोग लिखिए।
उत्तर
सोलर कुकर द्वारा सौर ऊर्जा को ऊष्मा के रूप में एकत्रित करके इसे भोजन पकाने में । प्रयोग किया जाता है। सूर्य की प्रकाश किरणें कुकर के काँच के ढक्कन तथा परावर्तक पर पड़ती है। काँच के ढक्कन पर तथा परावर्तक से परावर्तित होकर आने वाली प्रकाश किरणें बाक्स में रखे बर्तन तथा उसकी भीतरी दीवारों पर पड़ती है। बर्तन की बाहरी (UPBoardSolutions.com) सतह तथा बॉक्स की दीवारें व तली सभी काले रंग की होती हैं, जिससे सूर्य की किरणों की ऊर्जा को अवशोषित कर लिया जाता हैं परिणामस्वरूप बॉक्स के अन्दर का ताप बढ़ जाता है। दो तीन घंटों में इसके अन्दर रखा खाना पक जाता है। सोलर कुकर की सहायता से चपाती बनाने और सफाई करने के अतिरिक्त सभी प्रकार के भोजन पकाये जा सकते हैं।

प्रश्न 11.
नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का अधिक उपयोग क्यों करना चाहिए?
उत्तर
नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत जैसे सौर ऊर्जा, वायु ऊर्जा, जल ऊर्जा तथा बायोगैस से प्राप्त ऊर्जा पुनः प्राप्त होने वाले ऊर्जा के स्रोत है। विकास के साथ-साथ ऊर्जा की माँग में वृद्धि हुई है। अतः विभिन्न ऊर्जा स्रोतों का न्यायसंगत उपयोग किया जाना चाहिए। अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत समाप्त होते जा रहे हैं। अतः हमें नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का अधिकाधिक उपयोग करना चाहिए।

प्रश्न 12.
ऊर्जा के अनवीकरणीय स्रोतों का संरक्षण किस प्रकार किया जा सकता है? विस्तार से समझाइये।
उत्तर
ऊर्जा संरक्षण हेतु निम्नलिखित उपायों को अपनाना चाहिए

  • ऊर्जा अपव्यय की रोकथाम और ऊर्जा बचत की उचित आदतों का ज्ञान ऊर्जा बचत में सहायक हो सकता है।
  • ऊर्जा संरक्षण के दृष्टिकोण से परम्परागत (अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग यदाकदा ही करना उपयुक्त होगा।
  • घर के विद्युत उपकरण जैसे पंखे, बल्ब, हीटर आदि को अति आवश्यक होने पर ही प्रयोग में लाना चाहिए। आवश्यकता न होने पर इनका उपयोग बन्द रखना चाहिए।
  • जहाँ पर सम्भव हो भोजन पकाने में, भोज्य पदार्थों के सुखाने में, पानी को गर्म करने में सौर ऊर्जा का ही प्रयोग करना चाहिए।
  • सोलर कुकर से भोजन पकाने पर आवश्यक तत्त्व भी सुरक्षित रहते हैं।
  • प्रकाश उत्पन्न करने के लिए ट्यूब लाइट, सोडियम वाष्प लैम्प/मरकरी वाष्प लैंप का प्रयोग घरों में तथा सड़क पर करना चाहिए।
  • भोजन पकाने के लिए प्रेशर कुकर का प्रयोग करना चाहिए, इससे ऊर्जा की बचत होती है।
  • खाना पकाने में मिट्टी के तेल का प्रयोग करते समय अच्छे किस्म के स्टोव का प्रयोग करना चाहिए।
  • आस-पास के स्थानों के आने जाने के लिए पेट्रोल/डीजल के वाहनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • व्यक्तिगत वाहनों के प्रयोग के स्थान पर यात्रा रेलगाड़ी/बस जैसे सार्वजनिक वाहनों से करनी चाहिए। ऐसा करने पर ईंधन की बचत होगी।

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प्रश्न 13.
बायोगैस किसे कहते हैं?
उत्तर
बायोगैस मेथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैसों का मिश्रण है। (UPBoardSolutions.com) यह गैस प्लांट में गोबर और जल के मिश्रण से उत्पन्न की जाती है। जब मिक्सिग टैंक में गोबर और जल को मिलाकर पाचक टैंक में डाला जाता है, तो मेथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है। इस गैस को ही बायोगैस कहते हैं।

● नोट- प्रोजेक्ट कार्य छात्र स्वयं करें।

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UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 8 अशुद्ध जल से फैलने वाले रोग (पेचिश, अतिसार, हैजा)

UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 8 अशुद्ध जल से फैलने वाले रोग (पेचिश, अतिसार, हैजा)

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विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1:
अशुद्ध जल से रोग किस प्रकार फैलते हैं? इनके नियन्त्रण के उपाय बताइए।
उत्तर:
अशुद्ध जल से रोगों की उत्पत्ति एवं उनका संवाहन

अशुद्ध जल में अनेक प्रकार के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थ पाए जाते हैं। इनके अतिरिक्त अशुद्ध जल में अनेक प्रकार के जीवाणु, कृमि व उनके अण्डे तथा प्रोटोजोन्स आदि पाए जाते हैं। ये मनुष्यों में अनेक रोगों की उत्पत्ति का कारण होते हैं।
अशुद्ध अथवा दूषित जल प्रायः पेय जल के रूप में रोगों की उत्पत्ति एवं उनके संवाहन का कारण बनता है। अत: दूषित जल पीने से सामान्यत: आहारनाल सम्बन्धी रोग होते हैं, जिससे कि रोग की गम्भीर अवस्था में शरीर के कुछ अन्य अंग या पूर्ण शरीर रोग के अभाव में आ जाता है; जैसे-पेचिश, अतिसार व हैजा आदि में शरीर में पानी में आवश्यक लवणों की कमी हो जाने के कारण रोगी डी-हाइड्रेशन अथवा जल-अल्पता का शिकार होकर  मरने की स्थिति में पहुँच जाता है। जल द्वारा रोगों का संवाहन प्रायः निम्नलिखित अज्ञानताओं एवं असावधानियों के कारण होता है

  1. पेय जल का उपयोग करते समय उसकी शुद्धता पर ध्यान न (UPBoardSolutions.com) देकर हम स्वयं रोगों को आमन्त्रित करते हैं। इसके गम्भीर परिणाम प्रायः वर्षा ऋतु में अधिक होते हैं, क्योंकि वर्षा ऋतु में जल-प्रदूषण अधिक होता है।
  2. रोगी द्वारा प्रयुक्त बर्तनों में बिना उनका उचित नि:संक्रमण किए जल पीने की लापरवाही स्वस्थ व्यक्तियों को भी रोग का शिकार बना देती है।
  3. चिकित्सा के मध्य स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करते हुए रोगी को अज्ञानतावश दूषित जल पिला देना उसे दोबारा से रोगी बना देता है।
  4. दूध में अशुद्ध जल की मिलावट होने पर भी यह जल संवाहित रोगों का माध्यम बन जाता है।
  5. कभी-कभी दूषित जल द्वारा भोजन पकाने तथा उस भोजन को ग्रहण करने से भी रोग का संक्रमण हो जाता है।

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जल संवाहित रोगों से बचने के उपाय
जल संवाहित रोगों का मूल कारण दूषित जल होता है। दूषित जल का सेवन करने पर इसमें उपस्थित जीवाणु तथा प्रोटोजोन्स इत्यादि हमारे शरीर में प्रवेश कर रोगों की उत्पत्ति करते हैं। अतः इन रोगों से बचने का एकमात्र उपाय शुद्ध जल का सेवन करना है, परन्तु यह इतना सरल नहीं है। इसके लिए पेय जल को रोगाणु मुक्त करना आवश्यक है। पेय जल को रोगाणुमुक्त करने की सामान्य विधियाँ निम्नलिखित हैं

(1) उबालना:
जल को उबालने से अधिकांश रोगाणु नष्ट हो जाते हैं। अब इस जल को ठण्डा करके पीने से जल संवाहित रोगों के होने की सम्भावना नहीं रहती है।

(2) आसवन:
यह उबालने की विधि का वैज्ञानिक रूप है। इसमें एक बर्तन में जल को (UPBoardSolutions.com) उबाला जाता है तथा परिणामस्वरूप बनी जल-वाष्प को एक दूसरे बर्तन में ठण्डा करके फिर से जल में परिवर्तित किया जाता है। इसे आसुत जल कहते हैं तथा यह पूर्ण रूप से रोगाणु मुक्त होता है।

(3) जीवाणु अभेद्य निस्यन्दक:
बाजार में विभिन्न क्षमता वाले ,जीवाणु अभेद्य निस्यन्दक लगे उपकरण मिलते हैं। इनमें पेय जल डालने पर जीवाणु व प्रोटोजोन्स निस्यन्दक द्वारा रुक जाते हैं। तथा शुद्ध जल छनकर बर्तन में एकत्रित हो जाता है।

(4) परा-बैंगनी किरणें:
विशिष्ट उपकरणों द्वारा पराबैंगनी अथवा अल्ट्रावॉयलेट किरणें डालने से जल में उपस्थित सभी रोगाणु नष्ट हो जाते हैं। इस विधि का उपयोग प्राय: जल-संस्थान द्वारा किया जाता है।

(5) पोटैशियम परमैंगनेट:
कुएँ, तालाब, पोखर इत्यादि के जल में (पाँच ग्राम प्रति एक हजार लीटर जल में) पोटैशियम परमैंगनेट (लाल दवा) डालने से कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। हैजा जैसे संक्रामक रोग के प्रसार को रोकने का यह एक प्रभावशाली उपाय है।

(6) आयोडीन:
दो हजार लीटर जल में एक ग्राम पोटैशियम आयोडाइड मिलाने से जल के अधिकांश जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।

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(7) ब्लीचिंग पाउडर:
एक लाख गैलन जल में 250 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर डालने से जल जीवाणुमुक्त हो जाता है। इसका उपयोग प्रायः जल संस्थानों द्वारा बड़े पैमाने पर जल को जीवाणु मुक्त करने के लिए किया जाता है।

(8) क्लोरीन:
क्लोरीन गैस को जल में प्रवाहित करने से जल जीवाणुरहित हो जाता है। जल संस्थानों द्वारा क्लोरीन गैस का उपयोग जीवाणुरहित पेय जल की आपूर्ति के लिए किया जाता है। दस लाख लीटर जल में प्रायः एक लीटर गैस प्रवाहित की जाती है।

प्रश्न 2:
अशुद्ध जल से फैलने वाले रोगों के नाम लिखिए। किसी एक रोग के लक्षण व बचने के उपाय बताइए। [2011, 13, 15, 17, 18]
या
हैजा किस प्रकार फैलता है? इस रोग के लक्षण तथा बचने के उपायों का वर्णन कीजिए। [2007, 10, 13, 14, 17]
या
हैजा नामक रोग के जीवाणु का नाम लिखकर इसका उपचार बताइए।
या
दूषित जल से फैलने वाले प्रमुख रोग कौन-कौन से हैं? ‘हैजे के लक्षण, उपचार तथा बचाव के उपाय लिखिए। [2011,13]
उत्तर:
UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 8 अशुद्ध जल से फैलने वाले रोग (पेचिश, अतिसार, हैजा)
जल प्रायः भोजन का एक आवश्यक भाग होता है। अनेक रोग (UPBoardSolutions.com) ऐसे होते हैं कि जिनका संवाहन जल तथा भोजन दोनों से ही होता है।
उदाहरण:  हैजा, टायफाइड आदि।
सामान्यत: निम्नलिखित रोग भोजन के माध्यम से फैलते हैं।
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हैजा (कॉलरा)

कारण:
यह रोग विब्रियो कोलेरी नामक जीवाणु द्वारा होता है। दूषित जल इस रोग का प्राथमिक अथवा मूल वाहक है। हैजा फैलने के विभिन्न कारणों का संक्षिप्त विवरण अग्रलिखित है

  1. शुद्ध पेय जल की समुचित व्यवस्था न होने पर नदियों, तालाबों अथवा ठहरा हुआ जल पीने को विवश होना। इस प्रकार का जल हैजे के कीटाणुओं से दूषित हो सकता है।
  2. भीड़ के स्थानों (मेलों इत्यादि) में मल-मूत्र विसर्जन की उचित व्यवस्था (UPBoardSolutions.com) न होने पर यह रोग फैलकर महामारी का रूप धारण कर लेता है। रोगी व्यक्ति वाहक का कार्य करते हैं तथा दूर-दूर तक रोग के जीवाणुओं को फैला देते हैं।
  3. मक्खियाँ इस रोग के संवाहक का कार्य करती हैं। चारों ओर फैली गन्दगी पर जब मक्खियाँ बैठती हैं, तो इनके पंखों एवं पैरों में गन्दगी चिपक जाती है जिसे ये खुले हुए भोज्य पदार्थों तक पहुँचा देती हैं। इस प्रकार भोज्य पदार्थ जीवाणुयुक्त गन्दगी से दूषित हो जाते हैं तथा रोग को फैलाने का कार्य करते हैं।

लक्षण:
रोगाणुओं के शरीर में प्रवेश करने के कुछ घण्टे उपरान्त से दो-तीन दिन पश्चात् तक रोग के निम्नलिखित लक्षण दिखाई पड़ने लगते हैं

  1. चावल के माँड जैसे दस्तों की पुनरावृत्ति।
  2. अत्यधिक मात्रा में तथा बार-बार वमन।
  3. मूत्र विसर्जन में कमी।
  4. शरीर अत्यन्त दुर्बल तथा ज्वर की शिकायत।
  5.  रोगी जल-अल्पता (डी-हाइड्रेशन) से पीड़ित तथा उचित उपचार न मिलने पर कुछ ही घण्टों में मृत्यु की गोद में जा पहुँचता है।

उपचार एवं बचने के उपाय:

  1. मेलों या भीड़ भरे क्षेत्रों में जाने वाले तथा रोगी के आस-पास रहने वाले व्यक्तियों को हैजे से बचाव का टीका अवश्य लगवाना चाहिए।
  2. रोगी को अस्पताल में भर्ती करा देना चाहिए। यदि यह सम्भव न हो, तो उसे पृथक् कमरे में रखना चाहिए।
  3. दूध व जल को उबालकर पीना चाहिए।
  4. भोजन सामग्री को ढककर रखना चाहिए तथा जिन भोज्य पदार्थों पर मक्खियाँ बैठती हों उन्हें कदापि नहीं खाना चाहिए।
  5. घर के आस-पास, गलियों व सड़कों पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इनमें गन्दगी के ढेर कभी नहीं रहने देने चाहिए। नगरपालिका व स्वास्थ्य विभाग को समय-समय पर सचेत करते रहना चाहिए।
  6. रोगी के मल-मूत्र व वमन आदि का विधिपूर्वक तुरन्त नि:संक्रमण करना चाहिए।
  7. रोगी द्वारा प्रयुक्त बर्तनों व वस्त्रों को खौलते पानी में डालकर साबुन से धोना चाहिए।
  8. रोगी को योग्य चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ओषधियाँ देना (UPBoardSolutions.com) सदैव विवेकपूर्ण रहता है।
    जल शुद्ध करने की घरेलू विधि-‘उबालना’ जल शुद्ध करने की उत्तम घरेलू विधि है।

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प्रश्न 3:
अतिसार नामक रोग के कारणों, लक्षणों एवं बचने के उपायों का वर्णन कीजिए। [2011, 12, 15, 17]
या
अतिसार रोग के लक्षण लिखिए। अतिसार के रोगी को किस प्रकार को आहार देना चाहिए? [2008, 09, 14]
या
अतिसार और पेचिश में क्या अन्तर है? अतिसार के कारण, लक्षण और उपचार लिखिए। [2008, 17]
या
पेचिश एवं अतिसार में क्या अन्तर है? [2008, 13, 17, 18]
उत्तर:
अतिसार (डायरिया)

कारण-अतिसार जल द्वारा फैलने वाला एक रोग है। इस रोग की उत्पत्ति प्राय: इश्चेरिचिया कोलाई नामक जीवाणु द्वारा होती है। यह रोग प्रायः बच्चों में अधिक पाया जाता है। इस रोग के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं

  1. वर्षा-ऋतु में इस रोग के जीवाणु जल में अधिक पाए जाते हैं।
  2. मक्खियों द्वारा इसके जीवाणु दूध में आ जाते हैं जिनके द्वारा यह बच्चों के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
  3. बार-बार वे आवश्यकता से अधिक भोजन करने से, अपच हो जाने (UPBoardSolutions.com) के कारण यह रोग हो सकता है।
  4. समय-असमय भोजन करने से भी यह रोग हो सकता है।

लक्षण:
इस रोग के निम्नलिखित लक्षण हैं

  1. पतले व हरे रंग के दस्त आते हैं।
  2. दस्त अधिक आने पर कभी-कभी दस्त के साथ रक्त भी आता है।
  3. रोगी को हल्का-सा ज्वर भी रहता है।
  4. दस्तों की संख्या एक दिन में 25-30 तक हो सकती है, जिससे रोगी अत्यधिक दुर्बल हो जाता है।

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बचाव के उपाय:
यह एक भयानक रोग है जिसमें उचित चिकित्सा न होने पर लगभग 1-6 वर्ष की आयु तक के बच्चों के मरने का भय बना रहता है; अत: निम्नलिखित उपायों का पालन किया जाना अति आवश्यक है

  1. रोगी को पूर्ण विश्राम करने देना चाहिए।
  2.  योग्य चिकित्सक से तुरन्त परामर्श करना चाहिए।
  3. रोगी को उबालकर ठण्डा किया जल पीने के लिए देना चाहिए।
  4. बोतल से दूध पीने वाले बच्चों की बोतल को समय-समय पर अच्छी तरह से स्वच्छ करना चाहिए।
  5. रोगी बच्चे को व अन्य स्वस्थ बच्चों को सदैव उबालकर ताज़ा दूध देना चाहिए।
  6. भोज्य पदार्थों को मक्खियों से बचाने के लिए ढककर रखना चाहिए।
  7. रोगी बच्चे को खाने में चूने का पानी, मट्ठा तथा अन्य सुपाच्य व हल्के भोज्य पदार्थ (UPBoardSolutions.com) देने चाहिए। फलों में केला खाने के लिए देना इस रोग में लाभप्रद रहता है।।
  8. अतिसार के रोगी को निर्जलीकरण से बचाने के समस्त उपाय करने चाहिए।

अतिसार और पेचिश में अन्तर
प्रायः अतिसार में पेट में पीड़ा होने के लक्षण नहीं पाए जाते। केवल दस्त ही होते हैं। अतिसार पर नियन्त्रण नहीं किया जाता है, तो इसके बाद पेचिश के लक्षण भी दो-एक दिनों में दिखाई देने लगते हैं, अर्थात् दस्तों के साथ पेट में तेज ऐंठन, दस्त के साथ श्लेष्मा (आँव) व रक्त, भी आने लगता है। रोगी को ज्वर भी हो सकता है।

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प्रश्न 4:
मियादी बुखार या टायफाइड नामक रोग के कारणों, लक्षणों, उपचार एवं बचने के उपायों का वर्णन कीजिए। [2007, 08, 09, 10, 14]
या
टायफाइड के कारण एवं लक्षण लिखिए। [2016]
या
मियादी बुखार के कारण तथा रोकथाम के उपाय लिखिए। [2011]
उत्तर:
मियादी बुखार या टायफाइड अथवा मोतीझरा

मियादी बुखार जल एवं भोजन के माध्यम से फैलने वाला एक संक्रामक रोग है। इसे मोतीझरा या टायफाइड भी कहा जाता है। यह बुखार एक अवधि तक अवश्य रहता है। इसीलिए इसे मियांदी बुखार कहा जाता है।

कारण:
यह रोग साल्मोनेला टाइफी नामक जीवाणु द्वारा होता है। यह एक संक्रामक रोग है, जोकि एक निश्चित अवधि (लगभग 4-6 सप्ताह) तक रहता है, परन्तु. अधिक दुर्बल हो जाने के कारण रोगी अन्य रोगों से ग्रस्त हो सकता है। इस रोग के फैलने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं

  1. यह रोग दूषित जल व भोज्य पदार्थों से फैलता है।
  2. रोगी के मल-मूत्र के साथ लाखों जीवाणु शरीर से बाहर निकलते हैं, जोकि रोगी के नाखूनों में भर जाते हैं। इस प्रकार का अर्द्ध-स्वस्थ व्यक्ति जीवाणुओं के वाहक का कार्य करता है तथा जल, दूध व अन्य भोज्य पदार्थों को जीवाणुयुक्त बनाता रहता है।
  3. फल, सलाद व तरकारियाँ शुद्ध पानी से अच्छी प्रकार न धोने पर रोग की उत्पत्ति (UPBoardSolutions.com) का कारण बन सकती हैं।
  4. मक्खियाँ भी भोज्य पदार्थों को जीवाणुयुक्त बनाती हैं।
  5.  रोगी द्वारा प्रयुक्त बर्तन व भोज्य पदार्थ नि:संक्रमित न किये जाने पर रोग के प्रसार में सहायक होते हैं।

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सम्प्राप्ति काल: 4 दिन से 40 दिन तक हो सकता है।
लक्षण:
रोग के संक्रमण के एक से तीन सप्ताह के अन्दर रोगी में निम्नलिखित लक्षण दिखाई पड़ते हैं

  1. सिर में असहनीय तीव्र पीड़ा अनुभव होती है।
  2. प्रथम सप्ताह में ज्वर 101°-105° फारेनहाइट तक बढ़ता है।
  3.  द्वितीय सप्ताह में ज्वर समान रहता है, तृतीय सप्ताह में ज्वर घटने लगता है तथा चौथे सप्ताह में सामान्य हो जाता है, परन्तु लगभग छठे सप्ताह तक दुर्बलता रहती है।
  4. जिह्वा मध्य में सफेद तथा सिरों पर लाल रहती है।
  5. दूसरे सप्ताह के लक्षण अधिक भयंकर रहते हैं; जैसे–पेट फूलना, सन्निपात के समान स्थिति, मल-मूत्र विसर्जन सामान्य न रहना इत्यादि।
  6. गर्दन व शरीर पर मोती जैसे दाने निकल आते हैं।
  7. आँतों में सूजन आ जाती है, जिसके कारण आहारनाल सम्बन्धी अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं।

उपचार व बचने के उपाय:
इस रोग से बचने के निम्नलिखित उपाय हैं

  1. रोग निरोधक टीका लगवाने से रोम की सम्भावना बहुत कम रह जाती है, इस रोग से बचाव के लिए टी० ए० बी० का टीका लगवाया जाना चाहिए।
  2. रोगी को पृथक् कमरे में रखना चाहिए।
  3. रोगी द्वारा प्रयुक्त वस्तुओं का विधिपूर्वक नि:संक्रमण होना चाहिए।
  4. जल व दूध को उबाल कर पीना चाहिए।
  5. भोज्य पदार्थों को मक्खियों से सुरक्षित रखना चाहिए।
  6. (रोगी को सुपाच्य एवं हल्का भोजन देना चाहिए।
  7. योग्य चिकित्सक की देख-रेख में ही रोगी का इलाज कराना चाहिए।
  8. पूर्ण स्वस्थ होने तक रोगी को एकान्तवास एवं विश्राम करना चाहिए, क्योंकि अर्द्ध-स्वस्थ (UPBoardSolutions.com) रोगी अन्य व्यक्तियों में रोग फैला सकता है।

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प्रश्न 5:
पेचिश नामक रोग के फैलने के कारणों, लक्षणों तथा उपचार एवं रोग से बचने के उपायों का वर्णन कीजिए। [2007, 10, 11, 12, 13, 14]
उत्तर:
पेचिश (डिसेण्ट्री)

कारण:
यह रोग जीवाणुओं एवं प्रजीवाणुओं (प्रोटोजोन्स) दोनों ही से उत्पन्न होता है। जीवाण बैसिलस द्वारा होने वाली पेचिश को बैसिलरी पेचिश तथा प्रजीवाण ( एण्ट हिस्टोलिटिका) द्वारा होने वाली पेचिश को अमीबायोसिस कहते हैं। पेचिश का उद्भवन काल सामान्य रूप से-1 से 2 दिन तक होता है। इस रोग के फैलने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं

  1. दूषित जल में (नदी, तालाब, कुएँ व नलकूप आदि) प्रायः जीवाणु व प्रजीवाणु दोनों पाए जाते हैं। अतः यह जल संवाहित रोग है।
  2. मक्खियाँ इस रोग के वाहक का कार्य करती हैं तथा पेय जल एवं खाद्य पदार्थों तक रोगाणुओं को पहुँचाती रहती हैं।
  3. रोगी के मल-मूत्र व अन्य प्रकार की गन्दगी इस रोग को व्यापक स्तर पर फैलाने में पर्याप्त योगदान देती है।

लक्षण:
संक्रमण के एक या दो दिन पश्चात् ही रोगी में निम्नलिखित लक्षण दिखाई पड़ते हैं

  1. पेट में बार-बार पीड़ादायक ऐंठन होती है।
  2. बार-बार दस्त आते हैं तथा कुछ दिनों बाद दस्त के साथ श्लेष्मा अथवा (UPBoardSolutions.com) आँव तथा रक्त भी आने लगता है।
  3. रोगी को कभी-कभी ज्वर भी रहता है।
  4. प्रजीवाणु प्रायः आँतों की झिल्ली में घावे कर देते हैं।
  5. प्रजीवाणु यकृत एवं झिल्ली को भी कुप्रभावित कर सकते हैं।

उपचार एवं रोग से बचने के उपाय:
पेचिश से बचने एवं उपचार के उपायों का संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित हैं

  1. रोगी को अन्य व्यक्तियों से पृथक् रखना चाहिए।
  2. पेय जल की शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए नदी, तालाबों व कुओं के जल में समय-समय पर पोटैशियम परमैंगनेट अथवा ब्लीचिंग पाउडर डालना चाहिए।
  3. रोगी एवं अन्य स्वस्थ व्यक्तियों को जल उबालकर पीना चाहिए।
  4. पेय एवं खाद्य सामग्रियों को मक्खियों से सुरक्षित रखना चाहिए।
  5. गलियों एवं सड़कों की स्वच्छता के प्रति सचेत रहना चाहिए तथा आवश्यकता पड़ने पर नगरपालिका अथवा स्वास्थ्य विभाग को सूचित भी करना चाहिए।
  6. औषधियों का सेवन किसी योग्य चिकित्सक के परामर्श के अनुसार पूर्णतया रोगमुक्त होने तक करना चाहिए।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1:
अशुद्ध जल से फैलने वाले रोगों के नाम लिखिए। [2011, 16, 17, 18]
उत्तर:
अशुद्ध जल से अनेक प्रकार के सामान्य से लेकर भयंकर रोग तक फैलते हैं। इनमें
आहारनाल सम्बन्धी, गुर्दे सम्बन्धी तथा ज्वर सम्बन्धी अनेक रोग सम्मिलित हैं। पीलिया, टायफाइड, हैजा, अतिसार, पेचिश, गोलकृमि, सूत्रकृमि आदि महामारियों के रूप में भी फैलते हैं।
अनेक अति सामान्य रोग; जैसे—सिरदर्द, नजला, फ्लू, आँखों के रोग, मितली, उल्टी (वमन), दस्त आदि भी दूषित जल से हो सकते हैं।

प्रश्न 2:
मक्खियाँ किस प्रकार रोगों के वाहक का कार्य करती हैं? मक्खियों द्वारा कौन-कौन से रोग फैलते हैं?
उत्तर:
मक्खियों के पैर रोमयुक्त होते हैं। जब ये कूड़े-करकट, वमन, मल-मूत्र, थूक अथवा अन्य प्रकार की गन्दगी पर बैठती हैं तो गन्दगी के साथ रोगाणु भी इनके पैरों पर चिपक जाते हैं। जब ये मक्खियाँ पेय व खाद्य पदार्थों पर बैठती हैं, तो गन्दगी के साथ चिपके रोगाणु इन भोज्य पदार्थों पर चिपक जाते हैं। इस प्रकार मक्खियों द्वारा भोज्य पदार्थ रोगाणुयुक्त हो जाते हैं तथा स्वस्थ व्यक्ति जब भी इस प्रकार के भोज्य पदार्थों का सेवन करते हैं, तो रोगाणु उनके (UPBoardSolutions.com) शरीर में प्रवेश कर उन्हें रोगी बना देते हैं।
मक्खियाँ प्राय: निम्नलिखित रोगों को फैलाती हैं–
(1) हैजा,
(2) टायफाइड,
(3) पेचिश तथा
(4) अतिसार।

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प्रश्न 3:
जल किस प्रकार रोगाणुयुक्त होता है?
या
किन कारणों से जल प्रदूषित होता है? प्रदूषित जल से फैलने वाले रोगों के नाम लिखिए।
उत्तर:
जल में रोगाणु प्रायः निम्नलिखित विधियों अथवा वाहकों द्वारा प्रवेश करते हैं|
(1) मक्खियों द्वारा:
मक्खियाँ गन्दगी के रोगाणुओं को जल में स्थानान्तरित करती रहती हैं।

(2) अर्द्ध अथवा आंशिक रूप से स्वस्थ रोगियों द्वारा:
इस प्रकार के रोगी जब नदी अथवा तालाब के पास मल-मूत्र विसर्जन करते हैं तथा कुओं आदि के किनारों पर स्नान करते हैं अथवा वस्त्रादि धोते हैं, तो रोगाणु जल में प्रवेश कर जाते हैं, जैसे कि टायफाइड अथवा पेचिश के रोगी।

(3) सार्वजनिक स्वच्छता के प्रति उदासीनता एवं लापरवाही:
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रायः सार्वजनिक स्वच्छता के प्रति अज्ञानता एवं उदासीनता देखी जा सकती है। गन्दगी को तालाबों वे नदी के किनारों पर डाल दिया जाता है, जहाँ से जीवाणु सरलतापूर्वक जल में पहुँच जाते हैं।

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(4) वायु द्वारा:
वायु गन्दगी, थूक, मल-मूत्र आदि को धूल के साथ उड़ाकर जल तक पहुँचा देती है, (UPBoardSolutions.com) परिणामस्वरूप जल रोगाणुयुक्त हो जाता है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1:
जल द्वारा फैलने वाले रोग कौन-से हैं? [2008, 11, 12, 13, 17, 18]
उत्तर:
जल द्वारा फैलने वाले मुख्य रोग हैं-हैजा, टायफाइड, पेचिश एवं अतिसार।

प्रश्न 2:
पाचन-तन्त्र सम्बन्धी दो रोगों के नाम बताइए।
उत्तर:
पाचन-तन्त्र सम्बन्धी दो रोग हैं
(1) पेचिश तथा
(2) अतिसार।

प्रश्न 3:
किस रोग में रोगी अत्यधिक वमन करता है?
उत्तर:
हैजे का रोगी अत्यधिक वमन करता है।

प्रश्न 4:
हैजा नामक रोग किस जीवाणु द्वारा फैलता है?
या
हैजा रोग के कारण लिखिए।
उत्तर:
हैजा नामक रोग विब्रियो कोलेरी नामक जीवाणु द्वारा फैलता है। (UPBoardSolutions.com) अशुद्ध जल के कारण वचारों ओर फैली गन्दगी, उन पर बैठने वाली मक्खियों के द्वारा भोजन पर आकर बैठने से।

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प्रश्न 5:
टायफाइड फैलाने वाले रोगाणु का नाम लिखिए। [2010, 14, 18]
उत्तर:
साल्मोनेला टाइफ

प्रश्न 6:
उबालने से जल किस प्रकार रोगमुक्त हो जाता है?
उत्तर:
उबालने से जल के अन्दर उपस्थित सभी जीवाणु इत्यादि मर जाते हैं, क्योंकि जिस तापक्रम पर जल उबलता है अर्थात् 100° सेण्टीग्रेड पर जीवित रहना सामान्यतः सम्भव नहीं रहता।

प्रश्न 7:
कुम्भ के मेले में ज़ल संवाहित कौन-से रोग के लिए टीका लगाया जाता है?
उत्तर:
हैजे से बचाव के लिए टीका लगाया जाता है।

प्रश्न 8:
पाचन-तन्त्र के रोग प्रायः किन माध्यमों द्वारा फैलते हैं?
उत्तर:
दूषित जल एवं भोजन द्वारा।

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प्रश्न 9:
जल में लाल दवा डालने से क्या लाभ हैं?
या
लाल दवा का वैज्ञानिक नाम क्या है? इसकी क्या उपयोगिता है? [2008]
उत्तर:
लाल दवा का वैज्ञानिक नाम पोटैशियम परमैंगनेट है। जल में लाल (UPBoardSolutions.com) दवा अथवा पोटैशियम परमैंगनेट डालने से जल के जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न 10:
बच्चों में होने वाला भीषण संक्रामक रोग कौन-सा है?
उत्तर:
1-6 वर्ष की आयु के बच्चों में होने वाला प्राणघातक जल संवाहित रोग है–अतिसार।

प्रश्न 11:
अतिसार प्रायः किस ऋतु में अधिक फैलता है? [2013]
उत्तर:
वर्षा-ऋतु में।

प्रश्न 12:
डायरिया के कारण बताइए।
उत्तर:
दूषित जल व भोजन इस रोग के मूल कारण हैं। मक्खियाँ इस रोग के वाहक का कार्य करती हैं।

प्रश्न 13:
दूषित जल से फैलने वाली दो बीमारियों के नाम लिखिए। या, अशुद्ध जल से क्या हानियाँ होती हैं? [2009, 11]
उत्तर:
अशुद्ध जल से अनेक प्रकार के साधारण तथा भयंकर रोग हो सकते हैं; जैसे-हैजा एवं टायफाइड।

प्रश्न 14:
हैजा रोग से बचने के दो उपाय लिखिए।
उत्तर:
हैजा रोग से बचने के लिए खाने-पीने की वस्तुओं को मक्खियों से बचाना चाहिए तथा टीकाकरण भी करवाना चाहिए।

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प्रश्न 15:
पेचिश रोग के प्रकार लिखिए। [2007]
उत्तर:
यह रोग दो प्रकार से उत्पन्न होता है। यह रोग जीवाणुओं एवं (UPBoardSolutions.com) प्रजीवाणुओं, दोनों ही प्रकार से होता है। जीवाणु बैसिलस द्वारा होने वाली पेचिश को बैसिलरी पेचिश तथा प्रजीवाणु एण्ट अमीबा हिस्टोलिका द्वारा होने वाली पेचिश को अमीबियोसिस कहते हैं।

प्रश्न 16:
हैजा किन क्षेत्रों में अधिक फैलता है? [2014]
उत्तर:
हैजा भीड़ वाले तथा सफाई की व्यवस्था न होने वाले क्षेत्रों; जैसे–मेलों, तीर्थस्थानों तथा युद्ध-क्षेत्र में अधिक फैलता है। मक्खियों की अधिकता वाले क्षेत्रों में हैजा फैलने की अधिक आशंका रहती है।

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न:
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही विकल्पों का चुनाव कीजिए

1. मक्खियों द्वारा कौन-सा रोग फैलता है? [2008, 15] 
(क) मलेरिया
(ख) अतिसार (डायरिया)
(ग) हैजा
(घ) तपेदिक

2. आन्त्रशोध (मियादी बुखार) फैलाने वाला जीवाणु है
(क) ट्यूबर कुलोसिस बैसिलस
(ख) साल्मोनेला टाइफी
(ग) बैसिलस पर्टयूसिस
(घ) इनमें से कोई नहीं

3. टाइफाइड में कैसा आहार दिया जाना चाहिए?
(क) पौष्टिक तथा गरिष्ठ
(ख) हल्का तथा सुपाच्य
(ग) मिर्च मसालेदार
(घ) कुछ भी आहार नहीं देना चाहिए।

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4. अशुद्ध जल से रोग हो जाता है। [2007, 11, 14, 15, 17, 18]
या
जल द्वारा कौन-सा रोग हो जाता है ? [2009, 16]
(क) क्षय रोग
(ख) चेचक
(ग) हैजा
(घ) मलेरिया

5. हैजा के जीवाणु का नाम है [2008, 17]
(क) टिटैनी
(ख) टाइफी
(ग) विब्रियो कोलेरी
(घ) बैसिलरी

6. पेचिश में निम्नलिखित लक्षण होते हैं
(क) पेट में पीड़ा तथा ऐंठन
(ख) बार-बार शौच होना
(ग) आँव का होना
(घ) ये सभी

7. मक्खियों को नष्ट करने के लिए छिड़काव किया जाता है
(क) डी० डी० टी० का
(ख) ब्लीचिंग पाउडर का
(ग) आयोडीन घोल का
(घ) लाल दवा का

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8. अतिसार के रोगी को किस प्रकार का आहार देना चाहिए ? [2009]
(क) उच्च प्रोटीन युक्त
(ख) उच्च रेशेयुक्त
(ग) नरम व तरल आहार
(घ) इनमें से कोई नहीं

9. निम्नलिखित में से कौन-सा रोग अशुद्ध जल से नहीं फैलता है?
(क) हैजा
(ख) अतिसार
(ग) क्षय रोग (टी० बी०)
(घ) मोतीझरा (टायफाइड)

10. हैजा किसके द्वारा फैलता है ? [2010, 16, 17]
(क) दूषित हवा
(ख) विटामिन
(ग) शुद्ध जल
(घ) दूषित जल

उत्तर:
1. (ग) हैजा,
2. (ख) साल्मोनेला टाइफी,
3. (ख) हल्का तथा सुपाच्य,
4. (ग) हैजा,
5. (ग) विब्रियो कोलेरी,
6. (घ) ये सभी,
7. (क) डी० डी० टी० का,
8. (ग) नरम व तरल आहार,
9. (ग) क्षय रोग (टी०बी०),
10. (घ) दूषित जल।

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UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 15 कार्बन एवं उसके यौगिक

UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 15 कार्बन एवं उसके यौगिक

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 8 Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 15 कार्बन एवं उसके यौगिक.

कार्बन एवं उसके यौगिक

● निम्न तालिका में अंकित कार्य के समक्ष उसमें प्रयुक्त ईंधन का नाम लिखिए –
UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 15 कार्बन एवं उसके यौगिक img-1

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● निम्नलिखित सारणी को पूरा कीजिए (पूरा करके)-
UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 15 कार्बन एवं उसके यौगिक img-2

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प छाँटकर अभ्यासपुस्तिका में लिखिए (लिखकर)-
(क) निम्नलिखित पदार्थों में से किसमें कार्बन नहीं पाया जाता है-
(अ) कोयला में।
(ब) चीनी में
(स) रोटी में
(द) नमक में (UPBoardSolutions.com)
उत्तर
(द) नमक में।

(ख) प्रकृति में कार्बन पाया जाता है।
(अ) केवल मुक्त अवस्था में
(ब) केवल यौगिकों में
(स) मुक्त एवं यौगिक दोनों अवस्थाओं में
(द) केवल अपने अपररूपों में
उत्तर
(स) मुक्त एवं यौगिक दोनों अवस्थाओं में।

(ग) कुकिंग गैस (L.P.G.) में किसकी मात्रा अधिक है-
(अ) मेथेन
(ब) एथेन
(स) एथिलीन
(द) ब्यूटेन
उत्तर
(द) ब्यूटेन।

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(घ) कार्बन का क्रिस्टलीय रूप है-
(अ) जन्तु चारकोल
(ब) ग्रेफाइट
(स) कोयला
(द) लकड़ी का चारकोल
उत्तर
(अ) ग्रेफाइट।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके)-
उत्तर
(क) कार्बन सभी सजीव तथा कुछ निर्जीवों में उपस्थित है।
(ख) मेथेन सरलतम हाड्रोकार्बन है।
(ग) हीरा सबसे कठोर ‘दार्थ है।
(घ) पेट्रोल ज्वलनशील धन है।
(ङ) पेंसिल में उपस्थित ला पदार्थ ग्रेफाइट है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित कथनों में सही कथन पर (✓) तथा गलत कथन पर (✗) का चिह्न लगाइए (लगाकर) –
उत्तर
UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 15 कार्बन एवं उसके यौगिक img-3

प्रश्न 4.
संक्षेप में उत्तर दीजिए-
(क) अपररूप क्या होते हैं? कार्बन के अपररूपों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
अपररूप- वे पदार्थ जो विभिन्न भौतिक गुण परन्तु समान रासायनिक गुण रखते हैं, अपरलैंप कहलाते हैं।

कार्बन विभिन्न अपररूपों में मिलता है, जिन्हें निम्न दो भागों में बाँटा गया है-
1. क्रिस्टलीय –

  1. हीरा
  2. ग्रेफाइट।

2. अक्रिस्टलीय-

  1. लकड़ी का कोयला
  2. हड्डी का कोयला
  3. कोक
  4. काजल तथा
  5. गैस कार्बन।

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(ख) हीरा तथा ग्रेफाइट के गुणों की तुलना कीजिए।
उत्तर
ग्रेफाइट तथा हीरे के निम्न गुण स्पष्ट रूप से भिन्न हैं –

  1. रंग
  2. कार्य
  3. पारदर्शिता
  4. कठोरता

ग्रेफाइट तथा हीरा दोनों ही अपने गुणों में अधिकांशतः भिन्न हैं। ग्रेफाइट धूसर रंग का काला पदार्थ है। यह स्पर्श करने पर चिकना तथा फिसलने वाला पदार्थ है। जबकि, हीरा पारदर्शक तथा कठोर है। अब तक ज्ञात सबसे अधिक कठोर पदार्थ होने के बावजूद हीरा सरलता से टूट जाता है। बहुत से फलकों वाला क्रिस्टल बनाने (UPBoardSolutions.com) के लिए इसे विभिन्न तलों के साथ-साथ काफी सफाई से तोड़ा जाता है। इस पर पड़ने वाली प्रकाश की किरण-पुंज तेजी से बिखर कर अर्थात् परिशोषित होकर एक सजीव इन्द्रधनुष बनाती है। अतः इसको इसके स्थान से थोड़ा-सा हटाने पर यह चमकता है और सुन्दर रंगों के रूप में चिंगारी निकालता हुआ प्रतीत होता है।

ग्रेफाइट तथा हीरों में कार्बन परमाणु विभिन्न तरीकों (पैटर्नो) में परस्पर जुड़े अथवा आबन्धित होते हैं। परमाणुओं के इन्हीं विभिन्न पैट्रनें के कारण ही ये दोनों गुणों में भिन्न-भिन्न होते हैं। ग्रेफाइट में प्रत्येक कार्बन परमाणु एक ही तल में अपने पास के अन्य तीन कार्बन परमाणुओं के साथ जुड़ा रहता है। और षट्कोणीय जाल बनाता है। अनेक ऐसे तल एक-दूसरे के ऊपर ढीले-ढाले अथवा आबद्ध रूप में रखे होते हैं। इसी कारण ये तल सरलता से फिसल जाते हैं। इसी गुण के कारण ग्रेफाइट स्पर्श करने पर चिकना और फिसलने वाला पदार्थ लगता है और एक उत्तम स्नेहक के रूप में उपयोग होता है।

हीरे में कार्बन परमाणुओं की व्यवस्था पूर्णतया भिन्न है। प्रत्येक कार्बन परमाणु, अन्य चार कार्बन परमाणुओं के साथ जुड़कर त्रिविमीय (Three dimensions) दृढ़ क्रिस्टल की संरचना बनाता है। (UPBoardSolutions.com) इसी अत्यधिक स्थायी संरचना के कारण ही हीरा अब तक ज्ञात पदार्थों में सबसे अधिक कठोर पदार्थ है।

(ग) मेथेन को “मार्श” गैस क्यों कहते हैं?
उत्तर
मेथेन गैस (CH,) वायु की अनुपस्थिति में दलदली स्थानों पर, पेड़-पौधों और कार्बनिक पदार्थों (मार्श) के गलने-सड़ने से बनती है, इसलिए इसे मार्श गैस कहते हैं।

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(घ) पेट्रोल को जीवाश्म ईंधन क्यों कहते हैं?
उत्तर
पेट्रोल, करोड़ों वर्ष पहले दबे मृत जीव-जन्तु एवं वनस्पति के अपघटन से बने पेट्रोलियम से प्राप्त होता है। इसलिए पेट्रोल को जीवाश्म ईंधन कहते हैं।

(ङ) पेट्रोल को तरल सोना क्यों कहते हैं?
उत्तर
वर्तमान युग में पेट्रोलियम किसी राष्ट्र के लिए सोने से भी अधिक कीमती है, क्योंकि किसी भी राष्ट्र की उन्नति पेट्रोलियम की मात्रा पर निर्भर करती है। (UPBoardSolutions.com) कृषि, उद्योग, यातायात एवं संचार आदि विभिन्न कार्यों में इसका उपयोग अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है, इसलिए पेट्रोलियम को तरल सोना कहा जाता है।

(च) प्रकृति में कार्बन किन पदार्थों में पाया जाता है?
उत्तर
प्रकृति में कार्बन – कार्बन एक तत्व है जिसका परमाणु भार 12 है तथा यह स्वतन्त्र अवस्था में प्रकृति में शुद्ध रूप में (हीरे तथा ग्रेफाइट के रूप में) मिलता है। इसके अतिरिक्त संयुक्त अवस्था में पेट्रोलियम, खड़िया तथा चूने के पत्थर में पाया जाता है।

(छ) लैम्प ब्लैक क्या होता है?
उत्तर
लैम्प ब्लैक मोम अथवा तेल को वायु की सीमित मात्रा में जलाने पर प्राप्त कालिख को कहते हैं।

(ज) हाइड्रोकार्बन यौगिक कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर
हाइड्रोकार्बन यौगिक दो प्रकार के होते हैं –

  1. संतृप्त हाइड्रोकार्बन
  2. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन

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(झ) रॉकेट ईंधन के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
मेथिल हाइड्रोजन तथा द्रवित हाइड्रोजन।

(ट) पेट्रोलियम गैस किन गैसों का मिश्रण है?
उत्तर
पेट्रोलियम गैस ब्यूटेन एवं प्रोपेन गैसों का मिश्रण है।

प्रश्न 5.
लकड़ी, कण्डे, खेतों में धान व गेहूँ के पुआल जलाने से होने वाले प्रदूषण के कारण पर्यावरण पर होने वाले प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर
लकड़ी, कण्डे, गेहूँ व धान के पुआल (पराली), कोयला, पेट्रोल, एल.पी.जी. के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है। खेतों में धान व गेहूँ के पुआल (पराली जलाने से वायुमण्डल में (UPBoardSolutions.com) धुएँ का कोहरा छा जाता है। जिससे आँखों में जलन व साँस लेने में तकलीफ होती है तथा वायुमण्डल में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है।

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) ईंधन क्या है? ईंधन का वर्गीकरण उदाहरण सहित कीजिए।
उत्तर
ईंधन से दहन क्रिया द्वारा ऊर्जा प्राप्त होती है। ईंधन करोड़ों वर्ष पूर्व पृथ्वी के अन्दर दबे मृत जीव-जन्तु, वनस्पतियों के अपघटन द्वारा प्राप्त पेट्रोलियम के शोधन से प्राप्त किया जाता है। ईंधन तीन अवस्थाओं में पाया जाता है

  1. ठोस ईंधन – चारकोल, कोयला आदि।
  2. द्रव ईंधन – डीजल, पेट्रोल आदि।
  3. गैस ईंधन – गोबर गैस, एल०पी०जी० आदि।

ईंधन का वर्गीकरण पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन से प्राप्त प्रभाजों के क्वथनांक के आधार पर किया गया है।
UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 15 कार्बन एवं उसके यौगिक img-4

(ख) हीरा में कार्बन परमाणु किस प्रकार व्यवस्थित रहते हैं? चित्र की सहायता से समझाइए।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 8 Science Chapter 15 कार्बन एवं उसके यौगिक img-5
हीरा कार्बन का एक पारदर्शी क्रिस्टलीय अपरूप है। इसमें कार्बन का एक परमाणु चार परमाणुओं से जुड़ा होता है। कार्बन परमाणुओं की चतुष्फलकीय व्यवस्था के कारण यह पूर्णतः आबद्ध कठोर तथा त्रिविमीय , संरचना चित्रानुसार होती है।

(ग) हीरा का उपयोग आभूषण बनाने में क्यों किया जाता है?
उत्तर
हीरे को सरलता से भिन्न-भिन्न तल में तोड़कर कई फलक वाले क्रिस्टल बनाए जा सकते हैं, जिससे इस पर पड़ने वाला प्रकाश पूँज विभक्त होकर शीघ्रता से इन्द्रधनुषी रंग बनाता है। यह थोड़ी-सी भी हलचल से झिलमिलाता है और सुन्दर रंगों वाला स्फुलिंग उत्पन्न करता है। अतः हीरे के उपयोग से आभूषण की सुन्दरता बढ़ जाती है। इसी कारण हीरे का उपयोग आभूषण बनाने में किया जाता है।

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(घ) सुगर चारकोल का उपयोग लिखिए।
उत्तर
सुगर चारकोल का उपयोग अपचायक के रूप में होता है। यह धातु ऑक्साइड को धातु के रूप में अपचयित करता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित प्रश्नों में चार-चार पद हैं। प्रत्येक प्रश्न में तीन पद किसी-न-किसी रूप में एक से हैं और एक पद अन्य तीनों से भिन्न है। अन्य से भिन्न पद की पहचान कर अभ्यास-पुस्तिका में लिखिए (लिखकर) –
(क) हीरा, कोयला, जन्तु चारकोल, काजल
(ख) मेथेन, इथेन, प्रोपेन, इथलीन
(ग) एल०पी०जी० गैस, पेट्रोल, डीजल, लकड़ी
(घ) खाने का सोडा, चीनी, रोटी, नमक
उत्तर
(क) काजल,
(ख) इथलीन
(ग) लकड़ी
(घ) रोटी

● नोट- प्रोजेक्ट कार्य छात्र स्वयं करें।

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UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 10 अपशिष्ट (कचरा) प्रबन्धन

UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 10 अपशिष्ट (कचरा) प्रबन्धन

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 10 Home Science . Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 10 अपशिष्ट (कचरा) प्रबन्धन.

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1:
अपशिष्ट ( कचरा ) प्रबन्धन से क्या आशय है? कचरा प्रबन्धन की प्रक्रिया का विवरण दीजिए।
या
घरेलू कूड़े-कचरे के व्यवस्थित प्रबन्धन के लिए घर में क्या-क्या उपाय किये जाने चाहिए। प्रक्रिया का क्रमिक वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अपशिष्ट (कचरा) प्रबन्धन का अर्थ एवं आवश्यकता

घर को हर प्रकार से साफ एवं स्वच्छ रखना अनिवार्य है। घर पर अनेक कार्य (UPBoardSolutions.com) किए जाते हैं, जिनके परिणामस्वरूप घर में लगातार कूड़ा या कचरा (अपशिष्ट पदार्थ) एकत्र होता रहता है। भोजन बनाने के लिए सब्जी को काटना-छीलना पड़ता है। आटे को छाना जाता है तथा चोकर अलग किया जाता है। पके हुए भोजन की भी जूठन बचती है। इसके अतिरिक्त धूल-मिट्टी भी घर में हवा आने-जाने वालों के पैरों के साथ आती रहती है। इसके साथ-साथ छोटे बच्चों द्वारा घर में जहाँ-तहाँ मल-मूत्र त्याग देने से भी गंदगी में तथा कूड़े में वृद्धि हो जाती है। अतः स्पष्ट है कि घर में विभिन्न प्रकार का कूड़ा नित्य ही एकत्रित होता रहता है। यह कूड़ा हमारे लिए एक समस्या बन जाता है। जहाँ एक ओर इससे गंदगी होती है तथा दुर्गन्ध आती है, वहीं साथ-साथ कूड़े पर मक्खी तथा मच्छर भी पलते रहते हैं। अतः इस कूड़े को घर से प्रतिदिन बाहर निकालना अति आवश्यक है। घर से कूड़े के विसर्जन के उचित ढंग का ज्ञान होना भी अति आवश्यक है। इस प्रकार स्पष्ट है कि अपशिष्ट (कचरा) या कूड़े-करकट का व्यवस्थित प्रबन्धन अति आवश्यक कार्य है।

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अपशिष्ट ( कचरा ) प्रबन्धन की प्रक्रिया

उपर्युक्त वर्णित परिचय से स्पष्ट है कि स्वास्थ्य एवं सफाई के लिए कूड़े-करकट को घर से बाहर निकालने की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। इस उद्देश्य के लिए घर की गृहिणी तथा अन्य सदस्यों को निरंतर ध्यान रखना चाहिए तथा बिलकुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। सबसे पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि घर में कूड़ा-करकट कम-से-कम फैले। इसके लिए घर में जहाँ-जहाँ आवश्यक हो, वहाँ पर कूड़ेदान रख देने चाहिए। मुख्य रूप से रसोईघर में कोई खाली डिब्बा
अथवा ढक्कनदार बाल्टी अवश्य रखनी चाहिए। रसोईघर का सारा कूड़ा अर्थात् सब्जियों के छिलके, भोजन की जूठन तथा चोकर आदि को हाथ-के-हाथ ही इस डिब्बे में डाल देना चाहिए। रसोईघर के अतिरिक्त बच्चों के पढ़ाई वाले कमरे या स्थान पर भी एक टोकरी या ट्रे रख देनी चाहिए। बच्चों को चाहिए कि वे अपने फटे हुए कागज तथा कतरनें आदि को इसी टोकरी में फेंकें। इस प्रकार
की व्यॆवस्था कर देने से पूरे घर में कूड़ा नहीं फैलेगा।

उपर्युक्त व्यवस्था के अतिरिक्त एक मुख्य कूड़ेदान की भी व्यवस्था होनी चाहिए। यह लोहे का ढोल-सा होता है। इसे मुख्य द्वार के निकट अथवा सीढ़ियों के नीचे कहीं रखना चाहिए। जब घर की सफाई हो तथा झाडू लगाई जाए तो जो कूड़ा निकले उसे सीधे ही इस मुख्य कूड़ेदान में डालना चाहिए। इसके अतिरिक्त घर में अन्य स्थानों पर रखे गए डिब्बों अथवा टोकरी के कूड़े को भी समय-समय पर मुख्य कूड़ेदान में डालते रहना चाहिए। यह मुख्य कूड़ेदान भी ढक्कनदार होना चाहिए। ध्यान रहे कि इस कूड़ेदान में पानी नहीं भरना चाहिए। गंदे पानी के निकास की व्यवस्था अलग से करनी चाहिए। कूड़ेदान में तथा उसके आस-पास (UPBoardSolutions.com) समय-समय पर चूना डालते रहना चाहिए, जिससे गंदगी में उत्पन्न होने वाले कीटाणु भी मरते रहते हैं। आधुनिक मान्यताओं के अनुसार गीले कूड़े तथा सूखे कूड़े को एकत्र करने के लिए अलग-अलग कूड़ेदान रखने चाहिए।

अब प्रश्न उठता है कि इस मुख्य कूड़ेदाने का कूड़ा घर से बाहर कैसे विसर्जित किया जाए? सामान्य रूप से नगरों में घरों पर नित्य ही मेहतर आया करते हैं। मेहतर इस कूड़े को अपनी ठेली द्वारा अथवा टोकरी द्वारा उठाकर ले जाते हैं तथा सार्वजनिक खत्ते पर पहुँचा देते हैं। यदि किसी स्थान पर मेहतर की सुविधा न हो तो स्वयं ही कूड़े को घर से बाहर निकालना पड़ता है। इस स्थिति में ध्यान देना पड़ता है कि यदि गली अथवा सड़क की सफाई नित्य होती है तथा वहाँ से कूड़ा उठा ले जाने की सही व्यवस्था है तो उस स्थिति में हम अपने घर का कूड़ा घर से बाहर निर्धारित स्थान पर डाल सकते हैं। ऐसी स्थिति में ध्यान रखने योग्य मुख्य बात यह है कि हम अपने घर को कूड़ा समय से पहले ही घर से बाहर निकाल दें, जब सड़क की सफाई होती है। यदि हम सड़क की सफाई होने के बाद घर का कूड़ा बाहर फेंकते हैं तो वह अगले दिन सुबह तक वहीं पड़ा रहेगा तथा हवा आदि से फैलता रहेगा। यह . अनुचित है। यदि सड़क पर किसी सार्वजनिक कूड़ेदान की व्यवस्था है तो हमें चाहिए कि हम अपने घर का कूड़ा अनिवार्य रूप से उसी सार्वजनिक कूड़ेदान में ही डालें। गली अथवा सड़क को स्वच्छ रखना भी हमारा कर्तव्य है। कहीं-कहीं नगरपालिका की गाड़ियाँ कूड़ा ढोने का कार्य करती हैं। ऐसी स्थिति में हमें ध्यान रखना चाहिए कि जब कूड़े की गाड़ी आये, तभी अपने घर का कूड़ा उसमें डाल दें।

उपर्युक्त विवरण द्वारा घर के साधारण कूड़े को घर से बाहर निकालने का उपाय स्पष्ट होता है। इसके अतिरिक्त कुछ घरों में गाय, भैंस अथवा मुर्गियाँ भी पाली जाती हैं। इन पशुओं के कारण घर में अतिरिक्त कूड़ा भी एकत्रित होता रहता है, जिसे बाहर निकालने की व्यवस्था अनिवार्य है। गाय के गोबर के उपले आदि पथवा देने चाहिए। अन्य अवशेषों को घर से दूर खाली स्थान पर गड्ढे में डालते रहना चाहिए, जहाँ इससे खाद बनती रहती है। घर पर पशु होने (UPBoardSolutions.com) पर घर की सफाई का सामान्य से अधिक ध्यान रखना चाहिए तथा सफाई पर अधिक मेहनत करनी चाहिए। पशुओं के स्थान को समय-समय पर किसी कीटनाशक दवा से धुलवाते रहना चाहिए। इस प्रकार स्पष्ट है कि घर की सफाई हेतु कूड़ा-करकट के विसर्जन के लिए निरन्तर प्रयास करने चाहिए तथा इस ओर कभी भी लापरवाही नहीं दिखानी चाहिए।

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कचरा प्रबन्धन के लिए कचरा प्रबन्धन अधिनियम है। जिसके अन्तर्गत स्थानीय संस्थाओं के साथ-ही-साथ कचरा उत्पन्न करने वालों की भी जिम्मेदारी निर्धारित की गयी है। जो संस्थान कचरा जेनेरेट करते हैं उन्हें भी अपना कचरा वापस लेकर रिसाइकिल करना होगा।

प्रश्न 2:
घरों से एकत्र कूड़े-करकट या कचरे को नष्ट या समाप्त करने के लिए विभिन्न उपायों का विवरण दीजिए।
या
घरेलू कूड़े-करकट को घर से बाहर निकालना ही अनिवार्य नहीं है बल्कि उसे सही ढंग से ठिकाने लगाना अनिवार्य है।” इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कचरे को ठिकाने लगाने के विभिन्न उपायों का उल्लेख करें तथा बतायें कि कौन-से उपाय उपयुक्त हैं?
या
कचरे को नष्ट करने के लिए कौन-कौन सी विधियाँ अपनाई जाती हैं?
या
कचरे के निस्तारण की सर्वोत्तम विधि कौन-सी है? कारण भी समझाइए।
उत्तर:
कचरा या कूड़े-करकट को नष्ट करना या समाप्त करना

घरेलू कूड़े-करकट को घर से बाहर निकालने की व्यवस्था ही अपने आप में पर्याप्त तथा अंतिम व्यवस्था नहीं है। वास्तव में पूरे क्षेत्र से एकत्र हुए कूड़े को नष्ट करना या ठिकाने लगाना भी अति
आवश्यक है। यह अपने आप में एक गम्भीर नगरीय समस्या है। कूड़े-करकट को नष्ट करने या ठिकाने (UPBoardSolutions.com) लगाने के मुख्य उपाय निम्नलिखित हैं

(1) जलाकर:
स्वास्थ्य की दृष्टि से कूड़े को नष्ट करने का यह सर्वश्रेष्ठ उपाय है। कूड़े को जलाने के लिए शहर की बस्ती से दूर, ईंटों की एक गोलाकार चिमनी बनी होती है, जिसके ऊपर की ओर धुआँ तथा गैसों के निकलने के लिए 3 छेद होते हैं। बीच में एक जाली होती है जिसके नीचे कूड़ा रखने और नीचे से आग जलाने का प्रबन्ध होता है। चिमनी में आग लगाकर कूड़ा जला दिया जाता है। तथा बची हुई राख से सड़क या सीमेंट बनाने का काम लिया जाता है। यहाँ यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि कूड़े को इस प्रकार से जलाने से अनेक विषैली गैसें बनती हैं, जो वायु प्रदूषण में वृद्धि करती हैं। आज़कल कूड़े में प्लास्टिक या पॉलिथीन की थैलियों की काफी अधिक मात्रा होती है। इन वस्तुओं के जलने से अत्यधिक वायु प्रदूषण होता है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अब हर
को जलाने का समर्थन नहीं किया जा सकता।

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(2) जलस्रोतों में प्रवाहित करना:
पारम्परिक रूप से प्रायः सभी क्षेत्रों में कूड़े-कचरे को जलस्रोतों अर्थात् नदियों आदि में विसर्जित कर दिया जाता थी परन्तु अब यह अनुभव किया गया कि कूड़े-कचरे को जलस्रोतों में प्रवाहित करना भी अनुचित है। इससे जल-प्रदूषण का गम्भीर खतरा उत्पन्न होने लगा है। हमारे देश की प्रायः सभी नदियों का जल काफी अधिक प्रदूषित हो चुका है। अतः कूड़े-कचरे को जल में प्रवाहित करने का समर्थन भी नहीं किया जा सकता।

(3) कूड़े से गड्ढों को पाटना:
यह विधि अधिक उपयुक्त नहीं है। इस विधि में कूड़े को नीची जमीनों को पाटने के काम में ले लिया जाता है। कूड़ा खुला पड़ा रहता है तथा मक्खी, मच्छर और हानिकारक जीवाणु इसमें इकट्ठे होते रहते हैं, जो यहाँ से उड़कर दूसरे स्थानों पर गंदगी फैलाते हैं। इससे पर्यावरण-प्रदूषण (UPBoardSolutions.com) में बहुत अधिक वृद्धि होती है। अतः इस उपाय का भी समर्थन नहीं किया जा सकता।

(4) छंटाई द्वारा कूड़े का उपयोग:
पाश्चात्य देशों में प्रचलित इस विधि में कूड़े को तीन भागों में छाँट लिया जाता है

  1. कोयले व मिट्टी के टुकड़े,
  2. मुलायम कूड़ा (घास, पत्ती, कागज व कपड़ों के टुकड़े),
  3.  कड़ा-कूड़ा (हड्डी, काँच, टूटी चीजें)। पहले प्रकार के कूड़े से ईंट व दूसरे प्रकार के कूड़े से खाद बना ली जाती है। तीसरे प्रकार के कूड़े को सड़कों के गड्ढे आदि पाटने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

(5) खाद बनाना:
कूड़े से खाद बनाना उसको ठिकाने लगाने की सर्वोत्तम विधि है। बड़े-बड़े गड्ढों में घेरलू कूड़ा भरकर उसे मिट्टी से दबा दिया जाता है। कुछ समय में कूड़ा सड़कर उत्तम कार्बनिक खाद के रूप में परिवर्तित हो जाता है। यह खाद कृषि-कार्य के लिए उपयोगी एवं लाभदायक होती है। अब कम्पोस्ट प्लांट बनाये गये हैं। इन प्लांटों में ‘आर्गेनिक वेस्ट कम्पोस्ट मशीन की व्यवस्था है। यह मशीन कचरे को महीन बना देती है तथा इससे केवल 15 दिन में ही अच्छी कम्पोस्ट खाद बनकर तैयार हो जाती है। अब विद्यालयों की कैण्टीन आदि में भी तथा आवासीय सोसाइटियों में भी इस प्रकार की व्यवस्था करने का सुझाव दिया जा रहा है।

उपर्युक्त विवरण द्वारा कूड़े-कचरे को नष्ट करने या ठिकाने लगाने के विभिन्न उपायों का सामान्य परिचय प्राप्त (UPBoardSolutions.com) हो जाता है। इस विवरण के आधार पर कहा जा सकता है कि कूड़े-करकट को ठिकाने लगाने के उपयुक्त उपाय हैं

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  1. छंटाई द्वारा कूड़े का उपयोग तथा
  2. कूड़े से खाद बनाना।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1:
घर की सफाई एवं सजावट के लिए कचरा प्रबन्धन की आवश्यकता को स्पष्ट करें।
उत्तर:
घर की सफाई तथा कचरा प्रबन्धन

प्रत्येक परिवार उत्तम स्वास्थ्य एवं गृह सज्जा के लिए नियमित सफाई को अति आवश्यक मानता है। घर की सफाई का अर्थ है-घर में गन्दगी तथा कूड़े-करकट का अभाव होना। उस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अति आवश्यक है कि घर में कूड़ा-करकट अधिक फैले ही नहीं तथा हमें पूरे (UPBoardSolutions.com) घर में जहाँ-तहाँ बिखरने वाले कूड़े-कचरे को साथ ही साथ कूड़ेदानों या डिब्बों आदि में डालते रहना चाहिए। विभिन्न कूड़ेदानों एवं डिब्बों में एकत्र हुए कूड़े-कचरे को एक मुख्य कूड़ेदान में डाल देना चाहिए तथा वहाँ से घर से बाहर निकालने की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए। इस प्रक्रिया द्वारा घर की सफाई तथा सजावट के लिए कूड़े-कचरे का उचित प्रबन्धन हो जाता है।

प्रश्न 2:
कचरे का घर में संग्रह कैसे करेंगी?
उत्तर:
घर में कचरे का संग्रह करने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

  1. घर में सूखे व गीले कचरे को संग्रह करने के लिए अलग-अलग पात्र होने चाहिए। पात्र ऐसे स्थानों पर रखने चाहिए जहाँ परिवार के सदस्यों को उनमें कचरा डालने में सुविधा रहे।
  2. परिवार के सभी सदस्यों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वे फटे कागज, खाने के टुकड़े व अन्य निरर्थक वस्तुओं को इधर-उधर न फेंके वरन् उनको कचरापात्रों में ही डालें। इस विषय में बालकों को प्रारम्भ से ही शिक्षा मिलनी चाहिए।
  3.  कचरापात्रों को ढकने की व्यवस्था होनी आवश्यक है जिससे मक्खियाँ उस पर न बैठ सकें।
    वर्तमान में एक विशेष प्रकार के कचरापात्र बनाए जा रहे हैं जिनका ढक्कन खड़े-खड़े पैर से एक लोहे के टुकड़े को दबाने से खुल जाता है। इससे बहुत सुविधा रहती है। कचरापात्रों से प्रतिदिन कचरा हटाया जाना चाहिए और साथ ही यह भी आवश्यक है कि कचरापात्रों को अन्दर व बाहर से समय-समय पर धोकर साफ किया जाए, नहीं तो ये कचरापात्र स्वयं एक समस्या बन जाएँगे
    तथा ये जहाँ भी रखे जाएँगे इन पर मक्खियाँ भिनभिनाएँगी।

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प्रश्न 3:
कचरे के संवहन की कौन-सी विधि है?
उत्तर:
कचरे के संवहन की निम्नलिखित विधि है

घरों से कचरा बाल्टियों व टोकरियों से भरकर बाहर ले जाया जाता है और गली व (UPBoardSolutions.com) मुहल्ले के बड़े कचरापात्रों में डाला जाता है। फिर वहाँ से कचरे को नगर महापालिकाओं की गाड़ियों में भरकर नगर के बाहर निस्तारण हेतु भेजा जाता है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1:
घरेलू कचरे से क्या आशय है?
उत्तर:
घर की सफाई के दौरान निकलने वाले व्यर्थ एवं दूषित पदार्थों को घरेलू कचरा कहा जाता हैं

प्रश्न 2:
घर में कचरा रहने से क्या हानियाँ हो सकती हैं?
उत्तर:
घर में कचरा रहने से गन्दगी बढ़ती है तथा विभिन्न रोगाणु पनपते हैं। इससे गृहसज्जा धूमिल पड़ जाती है।

प्रश्न 3:
कचरा प्रबन्धन के लिए सर्वप्रथम क्या उपाय किया जाना चाहिए?
उत्तर:
कचरा प्रबन्धन के लिए सर्वप्रथम कूड़े-करकट को घर से बाहर निकालने की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।

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प्रश्न 4:
कूड़े-करकट के निस्तारण की मुख्य विधियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(i) कूड़े को जलाकर नष्ट करना,
(ii) जलस्रोतों में प्रवाहित करना,
(iii) कूड़े से गड्ढों को पाटना,
(iv) छंटाई द्वारा कूड़े का उपयोग तथा
(v) खाद बनाना।

प्रश्न 5:
कूड़े को जलाने का क्या प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
कूड़े को जलाने से वायु प्रदूषण में वृद्धि होती है।

प्रश्न 6:
कूड़े-कचरे को जलस्रोतों में प्रवाहित करने से क्या हानियाँ होती हैं?
उत्तर:
कूड़े-कचरे को जलस्रोतों में प्रवाहित करने से जल-प्रदूषण का गम्भीर खतरा बना हुआ है।

प्रश्न 7:
कूड़े-कचरे के निस्तारण के हानि-रहित उपाय कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
कूड़े-कचरे के निस्तारण के हानि-रहित उपाय हैं

(i) छंटाई द्वारा कूड़े का उपयोग तथा
(ii) कूड़े से खाद बनाना।

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प्रश्न 8:
गोबर का सर्वोत्तम उपयोग क्या है?
उत्तर:
गोबर से बायो गैस बनाना गोबर का सर्वोत्तम उपयोग है। इस प्रक्रिया (UPBoardSolutions.com) में अवशिष्ट पदार्थ को । खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

प्रश्न 9:
कचरा-प्रबन्धन में ध्यान में रखने योग्य मुख्य बात क्या है?
उत्तर:
कचरा-प्रबन्धन में ध्यान में रखने योग्य मुख्य बात यह है कि कचरे से पर्यावरण-प्रदूषण में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं होनी चाहिए तथा जहाँ तक सम्भव हो कचरे का सदुपयोग हो।

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न-निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही विकल्पों का चुनाव कीजिए

1. घर में जहाँ-तहाँ कचरान फैला रहे, इसके लिए निम्नलिखित में से क्या आवश्यक है?
(क) घर में कचरा उत्पन्न ही न हो।
(ख) कचरे को जलाते रहें।
(ग) घर पर विभिन्न स्थानों पर कचरापात्र रखें
(घ) कोई भी उपाय सफल नहीं होता।

2. घरेलू कचरे की समस्या के पूर्ण समाधान का उपाये क्या है?
(क) घर में कचरा न फैलने दें।
(ख) कचरे को घर से निकालने की समुचित व्यवस्था करें
(ग) सभी घरों से निकलने वाले कचरे को नष्ट करने के उपाय करें
(घ) उपर्युक्त सभी उपाय आवश्यक हैं।

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3. घर के समस्त कचरे को किस स्थान पर एकत्र करना चाहिए?
(क) घर के किसी कोने में
(ख) कचरापात्र में
(ग) सड़क पर
(घ) पड़ोसियों के घर के सामने।

4. नगर के कचरे को ठिकाने लगाने का हानिरहित उपाय निम्नलिखित में से क्या है?
(क) कचरे को जला देना।
(ख) कचरे को जल-स्रोत में बहा देना
(ग) कचरे को खुले मैदान में डाल देना
(घ) कचरे से खाद बना लेना।

उत्तर:
1. (ग) घर पर विभिन्न स्थानों (UPBoardSolutions.com) पर कचरापात्र रखे,
2. (घ) उपर्युक्त सभी उपाय आवश्यक हैं,
3. (ख) कचरापात्र में,
4. (घ) कचरे से खाद बना लेना।

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