UP Board Solutions for Class 5 EVS Hamara Parivesh Chapter 8 प्रकृति का बिगड़ता स्वरुप

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प्रश्न.
हम सब एक खेल खेलेंगे। ऊपर के बने चित्र में क्या-क्या दिखाई दे रहा है? उन्हें यहाँ लिखें।
उत्तर:
जंगल की हरियाली में हाथियों के झुंड, हिरन और बारहसिंहा, शेर, चीता, पक्षी आदि तथा पेड़ों पर लंगूर आराम से रहते नजर आ रहे हैं।

प्रश्न.
इस चित्र में कौन से जानवर, पक्षी कम हो गए हैं? लिखो क्यों?
उत्तर:
हिरन, शेर और बारहसिंहा खत्म हो गए। हाथी, लंगूर और पक्षी कम हो गए। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि जंगल कम हो गए और हरियाली का अभाव हो गया।

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प्रश्न.
इस चित्र में शेर, हाथी, बन्दर, पक्षी क्या करते दिखाई दे रहे हैं, लिखो।
उत्तर:
जंगलों की हरियाली के अभाव में सूखे पेड़ों के नीचे ये खड़े हैं। इन्हें आराम नहीं मिल रहा है। ऐसा पर्यावरण प्रदूषण के कारण है।

प्रश्न.
तुम इन पशु-पक्षियों को बचाने के लिए क्या करोगे? रिक्त स्थान में लिखो।
उत्तर:
वृक्षारोपण की तरफ ध्यान देगें। नीम, पीपल, बरगद के पेड़ लगाकर, वातावरण शुद्ध करेंगे जिससे अधिक ऑक्सीजन प्राप्त होगी।

प्रश्न.
बच्चो, तुम अपने इलाके की हवा को स्वच्छ एवं साफ रखने के लिए क्या करोगे? यहाँ पर लिखो।
उत्तर:
घर और आस-पास स्वच्छता रखेंगे। वाहनों के ठीक रखरखाव से शोर व धुआँ कम करने पर ध्यान देंगे। नीम, पीपल और बरगद के पेड़ लगाकर अधिक ऑक्सीजन के द्वारा वायु- प्रदूषण घटाएंगे।

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प्रश्न.
बच्चो, तुम अपने घर या गाँव के पानी को स्वच्छ और साफ रखने के लिए क्या करोगे? रिक्त स्थान में लिखो।
उत्तर:
पानी के स्थान पर गंदगी फैलाना रोकेंगे। स्वयं और पशुओं का तालाब में स्नान बन्द करके और कोई प्रबंध करेंगे। कपड़े भी अलग धोएँगे। घर का गंदा पानी तालाब में नहीं जाने देंगे। कूड़ा-करकट गड्ढों में ढककर रखेंगे। जल-प्रदूषण दूर करने के उपाय करेंगे।

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UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi विज्ञान आधारित निबन्ध

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Board UP Board
Textbook SCERT, UP
Class Class 12
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 10
Chapter Name विज्ञान आधारित निबन्ध
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi विज्ञान आधारित निबन्ध

1. विज्ञान के बढ़ते कदम (2018, 16, 15)
अन्य शीर्षक विज्ञान और मानव जीवन (2018), विज्ञान : वरदान या अभिशाप (2017), विज्ञान की प्रगति और विश्वशान्ति (2015), जीवन में विज्ञान का महत्त्व (2014), विज्ञान की उपलब्धियाँ (2010)
संकेत बिन्दु वरदान के रूप में विज्ञान, विज्ञान के विषय में भ्रान्ति, मानवीय व्यस्तता, विज्ञान का दुरुपयोग, उपसंहार।

वरदान के रूप में विज्ञान हम अपने आस-पास मानव निर्मित जिन चीज़ों को देखते हैं, उनमें से अधिकाधिक चीजें विज्ञान के बल पर ही आकार पाने में सफल हो पाई हैं। विज्ञान ने मानव जीवन को सुखद व सुगम बना दिया है। पहले लम्बी दूरी की। यात्रा करना मनुष्य के लिए अत्यन्त कष्टदायी होता था। अब विज्ञान ने मनुष्य की हर प्रकार की यात्रा को सुखमय बना दिया है। सड़कों पर दौड़ती मोटरगाड़ियाँ एवं रेलवे स्टेशनों व एयरपोर्ट पर लोगों की भीड़ इसके प्रमाण हैं। पहले मनुष्य के पास मनोरंजन के लिए विशेष साधन उपलब्ध नहीं थे। अब उसके पास मनोरंजन के हर प्रकार के साधन उपलब्ध हैं। रेडियो, टेपरिकॉर्डर से आगे बढ़कर अब एल सी डी, वी सी डी, डी वी डी एवं डी टी एच का जमाना आ गया है। यही नहीं मनुष्य विज्ञान की सहायता से शारीरिक कमजोरियों एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से पार पाने में अब पहले से कहीं अधिक सक्षम हो गया है और यह सब सम्भव हुआ चिकित्सा क्षेत्र में आई वैज्ञानिक प्रगति से। अब ऐसी असाध्य बीमारियों का इलाज भी सम्भव है, जिन्हें पहले लाइलाज समझा जाता था। अब टीबी सहित कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को प्रारम्भिक स्तर पर ही खत्म करना सम्भव हुआ है। आज हर हाथ में मोबाइल का दिखना भी विज्ञान के वरदान का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।

विज्ञान के विषय में भ्रान्ति कुछ लोग कहते हैं कि विज्ञान ने आदमी को मशीन बना दिया है, किन्तु यह कहना उचित नहीं है। मशीनों का आविष्कार मनुष्य ने अपनी सुख-सुविधा के लिए किया है। यदि मशीनें नहीं होतीं, तो मनुष्य इतनी तेजी से प्रगति नहीं कर पाता एवं उसका जीवन तमाम तरह के झंझावातों के बीच ही गुम होकर रह जाता। मशीनों से मनुष्य को लाभ हुआ है।

यदि उसे भौतिक सुख-सुविधाएँ प्राप्त हो रही हैं, तो उसमें मशीनों का योगदान प्रमुख है। मशीनों को कार्यान्वित करने के लिए मनुष्य को उन्हें परिचालित करना पड़ता है। इस कार्य में उसे अधिक नहीं परिश्रम करना पड़ता। यदि कोई व्यक्ति मशीन के बिना कार्य करे तो उसे अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता पड़ेगी।

इस दृष्टि से देखा जाए तो मशीनों के कारण मनुष्य का जीवन यन्त्रवत् नहीं हुआ | है, बल्कि उसके लिए हर प्रकार का कार्य करना सरल हो गया है। यह विज्ञान का ही | वरदान है कि अब डेबिट-क्रेडिट कार्ड के रूप में लोगों के पर्स में प्लास्टिक मनी आ गई है एवं वह जब भी चाहे, जहाँ भी चाहे रुपये निकाल सकता है। रुपये निकालने के लिए अब बैंकों में घण्टों लाइन में लगने की जरूरत ही नहीं!

मानवीय व्यस्तता यद्यपि, मशीन का आविष्कार मनुष्य ने अपने कार्यों को आसान करने के लिए किया था, किन्तु कोई भी मशीन मनुष्य के बिना अधूरी है। जैसे-जैसे मनुष्य वैज्ञानिक प्रगति करता जा रहा है, उसकी मशीनों पर निर्भरता भी बढ़ती जा रही हैं। फलतः मशीनों को चलाने के लिए उसे यन्त्रवत् उसके साथ व्यस्त राहना पड़ता है। आधुनिक मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं को प्राथमिकता देता है, इसके लिए वह दिन रात परिश्रम करता है। वह चाहता है कि उसके पास गाड़ी, बंगला, ऐशोआराम की सभी चीजें हों। इसके लिए वह अपने सुख चैन को भी त्यागकर काम में व्यस्त रहता। इस काम के चक्कर में उसने अपनी जीवनशैली अत्यन्त व्यस्त बना ली है। खासकर शहर के लोगों में यह प्रवृत्ति सामान्यतः दिखाई देती है। मनुष्य ने अपने लिए रोबोट का भी आविष्कार कर लिया, फिर भी उसकी आवश्यकता कम नहीं हुई है। वह दिन-रात अन्तरिक्ष के रहस्यों को जानने के लिए परिश्रम कर रहा है।

विज्ञान का दुरुपयोग कहते हैं दुनिया की किसी भी चीज़ का दुरुपयोग बुरा ‘ होता है। विज्ञान के मामलों में भी ऐसा ही है। विज्ञान का यदि दुरुपयोग किया जाए, तो इसका परिणाम भी बुरा ही होगा। इस दृष्टिकोण से देखा जाए तो विज्ञान का सहयोग मनुष्य के लिए एक अभिशाप के रूप में सामने आया है। विज्ञान की सहायता से मानव ने घातक हथियारों का आविष्कार किया। ये हथियार पूरी मानव सभ्यता का विनाश करने में सक्षम हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय परमाणु बमों के प्रयोग से मानव को जो क्षति हुई, उसकी पूर्ति असम्भव है। विज्ञान की सहायता से मनुष्य ने मशीनों का आविष्कार अपने सुख-चैन के लिए किया, किन्तु अफसोस की बात यह है कि मशीनों के साथ-साथ वह भी मशीन होता जा रहा है एवं उसकी जीवन-शैली भी अत्यन्त व्यस्त हो गई है। विज्ञान की सहायता से मशीनों के आविष्कार के बाद छोटे-छोटे एवं सामान्य कार्यों के लिए भी मशीनों पर निर्भरता बढ़ी है।

परिणामस्वरूप जो कार्य पहले मानव द्वारा किया जाते थे, वे अब मशीनों से पूर्ण किए जाते हैं। यही कारण है कि बेरोजगारी में वृद्धि हुई है। मशीनों के प्रयोग एवं पर्यावरण के दोहन के कारण पर्यावरण सन्तुलन बिगड़ गया है तथा प्रदूषण के कारण मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। यही नहीं, विज्ञान की सहायता से प्रगति के लिए मनुष्य ने पृथ्वी पर मौजूद संसाधनों का व्यापक रूप से दोहन किया है, जिसके कारण उसके लिए ऊर्जा-संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

उपसंहार विज्ञान के दुरुपयोग के कारण यह मनुष्य के लिए विध्वंसक अवश्य लगा है, किन्तु इसमें कोई सन्देह नहीं कि इसके कारण ही मनुष्य का जीवन सुखमय हो सका है और आज हम जो प्रगति एवं विकास की बहार देख रहे हैं, वह विज्ञान के बल पर ही सम्भव हुआ है। इस तरह विज्ञान मानव के लिए सृजनात्मक ही साबित हुआ है। | विज्ञान के दुरुपयोग के लिए विज्ञान को नहीं, बल्कि मनुष्य को दोषी ठहराया जाना चाहिए।

विज्ञान कभी नहीं कहता कि उसका दुरुपयोग किया जाए। इस तरह आज तक विज्ञान की सहायता से तैयार हथियारों के दुरुपयोग के लिए विज्ञान को विध्वंसात्मक कहना विज्ञान के साथ अन्याय करने के बराबर है। विज्ञान को अभिशाप बनाने के लिए मनुष्य दोषी है। अन्ततः देखा जाए तो विज्ञान मनुष्य के लिए वरदान है।

2. मनोरंजन के आधुनिक साधन (2017, 14)
अन्य शीर्षक मनोरंजन के हाई-टेक साधन, मनोरंजन के अत्याधुनिक स्वरूप।।
संकेत बिन्दु भूमिका, टेलीविजन, रेडियो, कम्प्यूटर एवं इण्टरनेट, सिनेमा, उपसंहार।।

भूमिका एक समय था, जब मनोरंजन के लिए लोग शिकार खेला करते थे। सभ्यता में विकास के बाद अन्य खेल लोगों के मनोरंजन के साधन बने। आज भी खेल मनोरंजन के प्रमुख साधन हैं, किन्तु आजकल खेलों को प्रत्यक्ष रूप से देखने के बजाय किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इन्हें देखने वालों की संख्या बढ़ी है। इस समय टेलीविजन, रेडियो तथा इण्टरनेट एवं कम्प्यूटर मनोरंजन के प्रमुख एवं हाई-टेक साधन हैं।

टेलीविजन टेलीविजन आजकल लोगों के मनोरंजन का एक प्रमुख साधन बन चुका है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि टेलीविजन पर हर आयु वर्ग के लोगों के लिए कार्यक्रम मौजूद हैं।

गृहिणियाँ भोजन बनाने वाले कार्यक्रमों सहित सास बहुओं पर आधारित टी.वी. शो देख सकती हैं। बच्चे कार्टून कार्यक्रम सहित तमाम तरह के गीत-संगीत पर आधारित रियलिटी शो देख सकते हैं। पुरुष न्यूज चैनलों के साथ-साथ क्रिकेट मैचों का प्रसारण देख सकते हैं। बुजुर्ग लोग समाचारों, धारावाहिकों के अलावा धार्मिक चैनलों पर सत्संग एवं प्रवचन आदि का आनन्द ले सकते हैं।

रेडियो आधुनिक काल में रेडियो मनोरंजन का एक प्रमुख साधन बनकर उभरा है। रेडियो पर गीत-संगीत के अलावा सजीव क्रिकेट कमेटरी श्रोताओं को आनन्दित तो करती ही है, जब से एफ.एम. चैनलों का पदार्पण भारत में हुआ है, रेडियो की उपयोगिता और बढ़ गई है।

आजकल हम लोगों को मोबाइल फोन के माध्यम से विभिन्न एफ.एम, स्टेशनों को सुनते देखते हैं। रेडियो मिर्ची, रेड एफ.एम., रेडियो सिटी, रेडियो म्याऊ इत्यादि चर्चित एफ.एम. स्टेशन हैं। ये श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन कर रहे हैं। आज एफ.एम. प्रसारण दुनियाभर में रेडियो प्रसारण का पसन्दीदा माध्यम बन चुका है।

इसका एक कारण इससे उच्च गुणवत्ता युक्त स्टीरियोफोनिक आवाज की प्राप्ति भी है। शुरुआत में इस प्रसारण की देशभर में कवरेज केवल 30% थी, किन्तु अब इसकी कवरेज बढ़कर 60% से अधिक तक जा पहुंची है।

कम्प्युटर एवं इण्टरनेट आधुनिक मनोरंजन के साधनों में कम्प्यूटर एवं इण्टरनेट का स्थान अग्रणी है। भारतीय युवाओं में इनका प्रयोग तेजी से बढ़ी है। इण्टरनेट को तो कोई जादू, कोई विज्ञान का चमत्कार, तो कोई ज्ञान का सागर कहता हैं।

आप इसे जो भी कहिए, किन्तु इस बात में कोई सन्देह नहीं कि सूचना क्रान्ति की देन यह इण्टरनेट न केवल मानव के लिए अति उपयोगी साबित हुआ है, बल्कि संचार में गति एवं विविधता के माध्यम से इसने दुनिया को बिल्कुल बदल कर रख दिया है।

इण्टरनेट ने सरकार, व्यापार और शिक्षा को नए अवसर दिए हैं। सरकारें अपने प्रशासनिक कार्यों के संचालन, विभिन्न कर प्रणाली, प्रबन्धन और सूचनाओं के प्रसारण जैसे अनेकानेक कार्यों के लिए इण्टरनेट का उपयोग करती हैं। कुछ वर्ष पहले तक इण्टरनेट व्यापार और वाणिज्य में प्रभावी नहीं था, लेकिन आज सभी तरह के विपणन और व्यापारिक लेन-देन इसके माध्यम से सम्भव हैं।

इण्टरनेट पर आज पत्र-पत्रिकाएँ प्रकाशित हो रही हैं, रेडियो के चैनल उपलब्ध हैं और टेलीविज़न के लगभग सभी चैनल भी मौजूद हैं। इण्टरनेट के माध्यम से मीडिया हाउस ध्वनि और दृश्य दोनों माध्यम के द्वारा ताजातरीन खबरें और मौसम सम्बन्धी जानकारियाँ हम तक आसानी से पहुंचा रहे हैं।
नेता हो या अभिनेता, विद्यार्थी हो या शिक्षक, पाठक हो या लेखक, वैज्ञानिक हो या चिन्तक सबके लिए इण्टरनेट उपयोगी साबित हो रहा है।

सिनेमा बात मनोरंजन के आधुनिक साधनों की हो या पूर्व साधनों की, यह सिनेमा के बिना अधूरी है। सिनेमा पहले भी लोगों के मनोरंजन का एक शक्तिशाली माध्यम था, आज भी है।

आज पारिवारिक एवं हास्य से भरपूर फिल्में दर्शकों का स्वस्थ मनोरंजन कर रही हैं। एक व्यक्ति तनावपूर्ण वातावरण से निकलने एवं मनोरंजन के लिए सिनेमा का रुख करता है, हालाँकि वर्तमान समय में बहुत सी फिल्में हिंसा एवं अश्लीलता का भौण्डा प्रदर्शन भी करती हैं, किन्तु इन जैसी खामियों को दरकिनार कर दें, तो सिनेमा दर्शकों का स्वस्थ मनोरंजन ही करते हैं।

उपसंहार इस प्रकार देखा जाए तो मनोरंजन के इन सभी हाई-टेक साधनों से न सिर्फ हमारा मनोरंजन होता है, बल्कि ये हमारे ज्ञान का विस्तार करने में भी सहायक हैं। इनकी सहायता से हम कठिन से कठिन विषयों को भी बड़ी सुगमता के साथ कम समय में ही ठीक प्रकार से समझ लेते हैं।

अतः हमें जीवन की एकरसता दूर करने व मानसिक स्फूर्ति प्रदान करने हेतु | मनोरंजन के तौर पर सीमित प्रयोग के साथ-साथ इन साधनों का प्रयोग अपने ज्ञान-विज्ञान को परिष्कृत किए जाने में करना चाहिए, तभी हम इनका अधिकाधिक लाभ लेकर अपने समाज तथा देश को उन्नत बना सकेंगे।

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UP Board Solutions for Class 5 EVS Hamara Parivesh Chapter 7 हमारे खनिज और खानें

UP Board Solutions for Class 5 EVS Hamara Parivesh Chapter 7 हमारे खनिज और खानें

लिखो तो जानें –

प्रश्न.
लोहे का उपयोग मशीन बनाने, रेल की पटरियाँ, पुलों व पानी के जहाज बनाने में होता है। क्या तुम बता सकते हो कि तुम्हारे घर में लोहे से बनी किन-किन वस्तुओं का प्रयोग होता है? इन वस्तुओं को रिक्त स्थान पर लिखो –
उत्तर:
हमारे घर में तवा, कड़ाही, चिमटा, कैंची, चाकू आदि का प्रयोग होता है।

प्रश्न.
कोयले का उपयोग तुम किन-किन कामों में कर सकते हो? सोचो और लिखो।
उत्तर:
अँगीठी जलाकर खाना पकाने, कपड़ों पर प्रेस करने और ईंधन के रूप में प्रयोग करने, जैसे – भट्ठी में ईंट पकाने आदि में कोयला प्रयुक्त होता है।

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प्रश्न.
मिट्टी के तेल का उपयोग लिखो।
उत्तर:
लालटेन, ढिबरी जलाकर प्रकाश करने, स्टोव जलाकर खाना बनाने में।

प्रश्न.
कोयला, पेट्रोल, डीजल, मिट्टी के तेल का प्रयोग किया जाता है उस पर लिखो-
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हमारे खनिज और खानें अभ्यास

प्रश्न १.
अगर हमारे देश में खनिज पदार्थ खत्म हो जाएँ तो क्या होगा?
उत्तर:
हमारे देश में खनिज पदार्थ खत्म हो जाएँ तो दूसरे देशों से मँगाना पड़ेगा और अपने यहाँ उसकी पूरक चीजें ढूँढ़नी पड़ेंगी।

प्रश्न २.
तुम्हारे इलाके में इनमें से क्या मिलता है – खड़िया, स्लेटपत्थर, चूना, नमक, ग्रेफाइट।
नोट:
विद्यार्थी स्वयं लिखें।

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प्रश्न ३.
हमारी पढ़ाई-लिखाई में काम आने वाले खनिज पदार्थों के नाम लिखो।
उत्तर:
खड़िया और स्लेटपत्थर।

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UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi संमास

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Board UP Board
Textbook SCERT, UP
Class Class 12
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 6
Chapter Name संमास
Number of Questions Solved 10
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi संमास

परिभाषा
जब दो या दो से अधिक शब्द अपने बीच की विभक्ति को छोड़कर आपस में मिल जाएँ तो उसे समास कहते हैं, जैसे- सूर्यस्य उदयः (सूर्य का उदय) से नया शब्द ‘सूर्योदयः’ बनता है, जिसमें षष्ठी विभक्ति लुप्त हो जाती है। शब्दों के ऐसे मेल से जो एक स्वतन्त्र शब्द बनता है उसे सामासिक पद अथवा समस्त पद कहते हैं। सामासिक पद को अनुसार विभक्तियों सहित तोड़ना समास-विग्रह कहलाता है। जैसे–सामासिक पद श्वेताम्बरम् का विग्रह होगा श्वेतम् अम्बरम्। यहाँ ‘श्वेतम्’ पूर्व पद एवं ‘अम्बरम्’ उत्तर पद हैं।

समास के भेद
समास के छ: भेद हैं।

  1. तत्पुरुष
  2. कर्मधारय
  3. अव्ययीभाव
  4. द्विगु
  5. बहुव्रीहि
  6. द्वन्द्व

आइए, पाठ्यक्र में सम्मिलित तीन समास कर्मधारय, अव्ययीभाव एवं बहुप्रीहि के वारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।

1. कर्मधारय समास
विशेषण विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय वाले समास को कर्मधारय समास कहते हैं। इसमें दोनों शब्द (पूर्व पद एवं उत्तर पद) प्रथमा विभक्ति में होते हैं तथा दोनों ही पदों की प्रधानता होती है; जैसे—’कृष्णाश्वः’ में प्रथम पद ‘कृ’:’ अर्थात् काला विशेषण, जबकि अन्तिम पद ‘अश्वः’ अर्थात् घोड़ा विशेष्य है। इसका विग्रह होगा ‘कृष्णः अश्वः’ अर्थात् काला घोड़ा। उदाहरण-
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2. अव्ययीभाव समास
जिस समास में प्रथम पद अव्यय तथा अन्तिम पद संज्ञा हो तथा प्रथम पद अर्थात् अव्यय के ही अर्थ की प्रधानता हो उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। इस समास के | शब्द हमेशा नपुंसकलिंग एकवचन में ही रहते हैं। इस समास को अपने पदों में विग्रह नहीं होता; जैसे–’निर्धनः’ का विग्रह होगा ‘धनानां अभावः
उदाहरण-
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3. बहुव्रीहि समास
जिस समास में दोनों पद (पूर्व पद एवं उत्तर पद) को छोड़कर कोई अन्य पद प्रधान हो उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। इस प्रकार इसमें सामासिक अर्थ दोनों पदों से भिन्न होता है; जैसे–’त्रीनेत्र’ का विग्रह ‘त्रीणि नेत्राणि यस्य सः’ (तीन हैं नेत्र जिसके) है, जिससे ‘शंकर’ का बोध होता है।
उदाहरण
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बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रामस्य पुत्रः का समस्तपद होगा
(क) रामपुत्रः
(ख) रामेपुत्रः
(ग) रामायपुत्रः
(घ) राममपुत्रः

प्रश्न 2.
‘नीलोत्पलम’ में विग्रह है।
(क) नीलम् उत्पलम्
(ख) निलमुत्पलम्
(ग) नलमोत्पलम्
(घ) नलस्योत्पलम्

प्रश्न 3.
‘यथाशक्ति’ में समास है।
(क) कर्मधारय
(ख) तत्पुरुष
(ग) अव्ययीभाव
(घ) द्विगु

प्रश्न 4.
एकं
एकं प्रति का सामासिक पद होगा
(क) प्रत्येक
(ख) हरेक
(ग) द्विरेकं
(घ) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 5.
‘त्रिलोकी में समास है।
(क) द्वन्ट्स
(ख) द्विगु
(ग) तत्पुरुष
(घ) बहुव्रीहि

प्रश्न 6.
‘प्राप्तोदकः’ में समास है।
(क) तत्पुरुष
(ख) बहुव्रीहि
(ग) कर्मधारय
(घ) द्विगु

प्रश्न 7.
‘घनश्यामः’ में समास है।
(क) द्विगु
(ख) अव्ययीभाव
(ग) कर्मधारय
(घ) बहुव्रीहि

प्रश्न 8.
‘रामस्य समीपे’ का सामासिक पद होगा।
(क) उपरामम्
(ख) उपारामम्
(ग) उपेरामम्
(घ) उपोरामम्

प्रश्न 9.
‘चन्द्रशेखरः’ में समास है।
(क) अव्ययीभाव
(ख) कर्मधारय
(ग) बहुव्रीहि
(घ) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 10.
‘महान् च असौ देवः’ का सामासिक पद होगा।
(क) महादेव
(ख) महादेवी
(ग) शिवः
(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर

1. (क, 2. (क), 3. (ग), 4. (क), 5. (ख), 6. (ख), 7. (ग), 8. (क), 9. (ग), 10. (क)

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UP Board Solutions for Class 11 Home Science गृह विज्ञान

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UP Board Solutions for Class 11 Home Science गृह विज्ञान

UP Board Class 11 Home Science खण्ड ‘क’ शरीर क्रिया विज्ञान तथा स्वास्थ्य रक्षा

शरीर क्रिया विज्ञान

स्वास्थ्य रक्षा

UP Board Class 11 Home Science खण्ड ‘ख’ समाजशास्त्र तथा बाल कल्याण

समाजशास्त्र

बाल कल्याण

UP Board Class 11 Home Science प्रयोगात्मक अध्ययन

UP Board Class 11 Home Science Syllabus & Marking Scheme

सरकारी गजट, उ० प्र० में दिनांक 20 जनवरी, 2018 को प्रकाशित माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उ० प्र० द्वारा निर्धारित नवीन संशोधित पाठ्यक्रम

इस विषय में 70 अंकों का एक प्रश्न-पत्र तथा 30 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा होगी।

उत्तीर्ण होने के लिए लिखित और प्रयोगात्मक परीक्षा में कम-से-कम 23 तथा 10 एवं योग में 33 अंक पाना आवश्यक होगा।

खण्ड ‘क’ शरीर क्रिया विज्ञान तथा स्वास्थ्य रक्षा (35 अंक)

शरीर क्रिया विज्ञान

इकाई-1: जीवित ऊतकों की कोशिकीय बनावट। (2 अंक)

इकाई-2: अस्थिपंजर व पेशी तन्त्र का समरेखीय अध्ययन तथा उनकी सामान्य विकास की अवस्थाएँ। (5 अंक)

इकाई-3: पाचन तथा पोषण- (7 अंक)

  • भोजन प्रणाली का वितरण तथा कार्य, यकृत, तिल्ली तथा आमाशय
  • भोजन के विभिन्न तत्त्व
  • विभिन्न परिस्थितियों जैसे-व्यवसाय, आयु तथा जलवायु के अनुसार शरीर की भोजन सम्बन्धी आवश्यकताएँ
  • पोषण में दुग्ध का विशेष स्थान।

इकाई-4: उत्सर्जन तन्त्र-त्वचा, वृक्क तथा आँत और उनके सामान्य कार्य। (3 अंक)

स्वास्थ्य रक्षा

इकाई-1: स्वास्थ्य रक्षा- (10 अंक)

  • व्यक्तिगत स्वास्थ्य रक्षा; जैसे-त्वचा, दन्त, चक्षु आदि
  • घर की हाईजीन; जैसे—संवाहन व स्वच्छता
  • कूड़ा-करकट तथा व्यर्थ-जल के निकास की व्यवस्था, जल निकास, शौचालय
  • जल सम्भरण, खाद्य सम्भरण।

इकाई-2: व्यक्ति का उत्तरदायित्व। (3 अंक)

इकाई-3: उद्यान, खेल के मैदान, खुले स्थान। (2 अंक)

इकाई-4: विकास तथा क्रियात्मक क्षमता पर व्यायाम का प्रभाव। (3 अंक)

खण्ड ‘ख’ समाजशास्त्र तथा बाल कल्याण

समाजशास्त्र

इकाई-1: मानव आवश्यकताएँ तथा परिस्थितियाँ, जिससे भग्नाशा उत्पन्न होती है। (4 अंक)

इकाई-2: मानव आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के रूप में परिवार। (4 अंक)

इकाई-3: भारतीय परिवार तथा परिवार के प्रत्येक सदस्य का कर्त्तव्य। (4 अंक)

इकाई-4: बालक/बालिका सम्बन्ध। (3 अंक)

इकाई-5: गृहस्थ परिवार का आय-व्यय लेखा, नित्य क्रय-विक्रय में मिव्ययिता के सिद्धान्त, परिवार सम्भरण के क्रय तथा गृह-खर्च। (3 अंक)

बाल कल्याण

इकाई-1: प्रत्याशित माता की देख-रेख। (3 अंक)

इकाई-2: प्रसवकालीन तैयारियाँ। (4 अंक)

इकाई-3: नवजात शिशु की देखभाल- 0-3 माह, 3-6 माह, 6-9 माह, 9-12 माह, 01-02 वर्ष सामान्य व्याधियाँ। (7 अंक)

इकाई-4: प्रारम्भिक बाल्यावस्था की देखभाल (3-6 वर्ष) चारित्रिक गुण। (3 अंक)

प्रयोगात्मक (30 अंक)

पाक कला- सूखी सब्जी, रसेदार सब्जी, तरकारी का सूप, तली तथा घोटी हुई (Mesh) सब्जी।
अचार- आम का अचार, प्याज, जंभीरी नीबू तथा मिश्रित तरकारी।
मुरब्बा- आँवला, आम, पेठा तथा गाजर।

सिलाई

1. सिलाई की मशीन तथा उसकी यान्त्रिकी की जानकारी जिसमें मशीन में धागा लगाना, तनाव तथा टाँके के नियम तथा मशीन की साधारण खराबियों को दूर करने का व्यावहारिक ज्ञान।
2. सिलाई, काज आदि के व्यावहारिक प्रयोग के मानक बनाकर सिले वस्त्रों की सूक्ष्मताओं तथा परिष्करण का ज्ञान देना।
3. नीचे दिए गए प्रत्येक वर्ग से एक वस्त्र

  • लेडीज कुर्ता या बुशर्ट।
  • सलवार या मर्दानी कमीज।
  • फ्रॉक या पेटीकोट।
  • सनसूट या ब्लाउज।

प्रत्येक छात्रा को फैन्सी टाँकों की कढ़ाई का एक सेट तैयार करना चाहिए जैसे लंच सेट पर अथवा बेड शीट (सिंगल या डबल सुविधानुसार) डचेस सेट टी सेट।

गृह विज्ञान

अधिकतम अंक-30
न्यूनतम अंक-10
समय : 5 घंटा

  1. पाक कला (4 अंक)
  2. सिलाई (4 अंक)
  3. सत्रीय कार्य (4 अंक)
  4. मौखिक कार्य (मौखिक सभी खण्डों से होना अनिवार्य) (3 अंक)
  5. सत्रीय कार्य (सिलाई एवं फाइल रिकॉर्ड) (6 अंक)
  6. पाक कला (सत्रीय पाठ्यक्रम पर आधारित सभी बिन्दु) (6 अंक)
  7. मौखिक कार्य (सभी खण्ड से) (3 अंक)

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